लखनऊ की एक शादीशुदा औरत ने अजनबी को बुलाया ताकि पेट में जान डाले। पति देखता रहा, फिर खुद शामिल हो गया। रात-दर-रात शरीर पर निशान गहराते गए, तीनों मिलकर हर हद पार करते रहे। पेट जितना फूलता, भूख उतनी ही काली होती चली गई chut ki aag kahani ।
दोस्तो, उम्मीद है आप सब खुश और स्वस्थ होंगे। मेरा नाम राहुल है। उम्र 27 साल है। मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ, गोरा-सा तन, कद 5 फुट 10 इंच, और जिस्म में कसरत से बनी मांसपेशियाँ। यह कहानी मेरी जिंदगी की सबसे काली, सबसे क्रूर और सबसे मस्ती भरी रात की है, जो 2021 की बरसात के मौसम में शुरू हुई।
एक शाम मैं इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रहा था। अचानक एक नोटिफिकेशन आया—प्रियंका नाम की लड़की ने फॉलो रिक्वेस्ट भेजी। प्रोफाइल फोटो में चेहरा आधा ढका था, लेकिन आँखें इतनी तेज थीं कि दिल धड़क उठा। मैंने तुरंत एक्सेप्ट कर लिया। रात भर कुछ मैसेज एक्सचेंज हुए, फिर अगले दिन से रोज़ की बातें शुरू हो गईं। धीरे-धीरे पता चला कि वह भी लखनऊ की ही है, उम्र 31 साल, शादीशुदा, और शरीर का नाप 36-28-38। कद सवा पाँच फुट से थोड़ा ज्यादा। जब उसने पहली बार अपना फुल बॉडी फोटो भेजा, तो मैं बिस्तर पर लेटा-लेटा अपनी मुठ मारने लगा। उसके भारी स्तन, पतली कमर और गोल जाँघें रात भर सपनों में घूमती रहीं।
एक महीने तक सामान्य बातें चलती रहीं। फिर एक दिन उसने बताया कि उसके पति का लंड कभी ठीक से खड़ा नहीं होता। डॉक्टरों ने सब कुछ ट्राई कर लिया, लेकिन नतीजा शून्य। ससुराल वाले बच्चे की मांग कर रहे थे। मैंने डॉक्टर से मिलने की सलाह दी, लेकिन वह बोली—“सब हो चुका। अब सिर्फ तुम ही मदद कर सकते हो।” मैंने अनजान बनकर पूछा—“मैं क्या करूँ?” वह सीधी बोली—“तुम मेरे पति की जगह ले लो। मुझे गर्भवती बना दो। मेरा पति भी तैयार है। वह देखेगा, भाग लेगा, और तुम्हें कोई तकलीफ नहीं देगा।”
मेरा दिमाग घूम गया। इतनी हसीन औरत खुद चोदने के लिए बुला रही थी, और उसका पति भी साथ देने को तैयार। मैंने शर्त रखी कि सब कुछ सुरक्षित रहेगा। उसने वादा किया। दो दिन बाद मैसेज आया—“पति राजी हो गया। अगले हफ्ते ओव्यूलेशन है। रोज आना होगा।” मैंने नंबर भेज दिया। पाँच दिन बाद एक अनजान नंबर से कॉल आई। आवाज में भारीपन था। उसने अपना नाम बताया—अमित। बोला—“कल दोपहर तीन बजे आ जाना। घर वाले सोए रहेंगे।”
रात को मैं नहाया, झांटें साफ कीं, लंड को तेल लगाकर तैयार किया। अगले दिन तीन बजे मैं उनके घर पहुँचा। बड़ा सा बंगला था, दूसरी मंजिल पर उनका कमरा। अमित ने दरवाजा खोला। कमरे में प्रियंका पहले से बैठी थी। सलवार-कुर्ता में, बिना दुपट्टे के। स्तन इतने भरे हुए कि कपड़ा तन रहा था। जाँघों के बीच हल्की सी उभार साफ दिख रही थी। मैंने देखा तो लंड तुरंत सख्त हो गया।
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अमित ने हमें अकेला छोड़ दिया, बोला—“मजा लो, मैं पास ही हूँ।” कुछ पल खामोशी रही। मैंने कहा—“आज तो तुम आग लग रही हो।” वह मुस्कुराई और मेरे पास आकर बैठ गई। मैंने उसका हाथ पकड़ा, फिर कमर। वह मेरे ऊपर झुक गई। होंठ मिले। जीभ अंदर घुसी। मैंने उसके होंठ काटे, उसने जवाब में मेरे होंठ चबाए। चुंबन गहरा होता गया। मैंने उसके गले पर दाँत गड़ाए, निशान छोड़ दिए। वह कराह उठी।
मैंने उसके कपड़े फाड़ दिए। सलवार-कुर्ता फर्श पर गिरे। सिर्फ काली पैंटी रह गई। स्तन बाहर निकल आए—भारी, गोल, निप्पल काले और कड़े। मैंने एक स्तन मुँह में लिया, दूसरे को हाथ से मसलने लगा। दाँत से निप्पल काटा। वह चीखी—“आह… और जोर से काटो!” मैंने दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसा, काटा, मसला। निप्पल लाल हो गए, थूक से चमकने लगे। फिर हाथ नीचे ले गया। पैंटी के ऊपर से चूत दबाई। गर्मी और नमी महसूस हुई। पैंटी खींचकर फाड़ दी। सामने आई पूरी मुंडवाया हुआ, फूली हुई चूत। होंठ मोटे, बीच में गुलाबी दरार, जहाँ से पानी रिस रहा था।
मैंने मुँह लगा दिया। जीभ अंदर घुसाई, चूसा, काटा। वह मेरे सिर को दोनों हाथों से दबाकर चूत पर रगड़ने लगी—“चूस साले… पूरा निचोड़ ले… आह मेरे पति ने कभी ऐसा नहीं किया!” मैंने दो उंगलियाँ अंदर घुसा दीं, तीसरी से क्लिटिस दबाया। वह उछलने लगी। अचानक उसका शरीर अकड़ गया और चूत से गर्म पानी का फव्वारा निकल पड़ा। मैंने पूरा पी लिया। स्वाद नमकीन और तीखा था।
अब मेरी बारी थी। मैंने उसे घुटनों पर बैठाया। लंड उसके मुँह के सामने। वह बिना हिचकिचाहट के पूरा निगल गई। गले तक ले गई, फिर बाहर निकाला, फिर अंदर। गों-गों की आवाज आने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर को आगे-पीछे झटकने लगा। लंड गले में धंस रहा था। वह आँखों में पानी लाकर भी चूसती रही। टट्टे चाटे, झांटें सूँघीं। जब मैं करीब आया तो उसने मुँह हटा लिया और बोली—“अब अंदर डाल… जल्दी!”
मैंने उसे पलंग पर लिटाया, पैर फैलाए, लंड चूत पर रखा। एक झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। वह चीखी। चूत इतनी टाइट और गर्म थी कि लगा जैसे किसी भट्ठी में घुस गया हो। मैंने जोर-जोर से ठोकरें मारनी शुरू कीं। हर ठोकर पर उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने गाली दी—“तेरी इस रंडी चूत का भोसड़ा बना दूँगा!” वह जवाब में बोली—“बना दे… चोद मुझे कुत्ते की तरह… आह!” मैंने उसकी गर्दन दबाई, साँस रोक दी। आँखें फटीं, लेकिन चूत और भी भीग गई। छोड़ते ही वह हाँफने लगी और और जोर से कराहने लगी।
दस मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई चली। वह दो बार झड़ चुकी थी। चूत से रस बह रहा था, लंड फिसल रहा था। मैंने उसे पलटा, कुत्ते की पोजीशन में किया। बाल पकड़कर खींचे, कमर पकड़कर और गहराई तक ठोकर मारी। उसकी गांड पर थप्पड़ जड़े—लाल निशान पड़ गए। वह चीख रही थी—“और मार… और जोर से!” मैंने एक हाथ से गांड का छेद दबाया, उंगली अंदर घुसा दी। दो छेद एक साथ भरे हुए। वह पागल हो रही थी।
तभी दरवाजा खुला। अमित अंदर आ गया। नंगा। उसका लंड आधा सख्त था। वह पास आया और मेरे लंड को चूत से बाहर निकालकर मुँह में ले लिया। चूसने लगा। मैं चौंक गया, लेकिन मजा आ गया। पहली बार किसी मर्द ने मेरा लंड चूसा था। अमित ने अच्छी तरह चाटा, फिर प्रियंका की तरफ देखा। प्रियंका मुस्कुराई और बोली—“अब दोनों मिलकर चोदो मुझे।”
मैंने उसे फिर लिटाया। अमित ने उसके मुँह में अपना लंड ठूंस दिया। मैंने चूत में। दोनों तरफ से भरी हुई। हम दोनों ने एक साथ ठोकरें मारीं। प्रियंका की आवाज दब गई। आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन शरीर झटक रहा था। मैंने उसकी गांड पर और थप्पड़ जड़े। अमित ने उसके बाल खींचकर सिर पीछे किया। लंड गले में धंस रहा था। जब मैंने वीर्य छोड़ना शुरू किया तो पूरा अंदर भर दिया। अमित ने भी उसके मुँह में छोड़ दिया। वह निगल गई, थूक और वीर्य मुँह से बाहर निकल रहे थे।
हम थोड़ी देर लेटे रहे। फिर अमित ने मेरे लंड को फिर से सख्त किया। उसने चूसा, चाटा, हाथ से हिलाया। प्रियंका ने तकिया लगाकर पैर ऊपर किए, ताकि वीर्य अंदर ही रहे। मैं फिर से उसके ऊपर चढ़ गया। इस बार और क्रूर। मैंने उसके दोनों हाथ बिस्तर के सिरहाने बाँध दिए। रस्सी से। वह बेबस हो गई। मैंने स्तनों पर दाँत गड़ाए, निप्पल काटे। खून की बूँदें निकलीं। वह चीखी, लेकिन मना नहीं किया। चूत में लंड डालकर इतनी तेज ठोकर मारी कि बिस्तर चरमरा उठा। हर ठोकर पर गाली—“रंडी… कुतिया… तेरी चूत मेरी है अब!” वह जवाब में—“हाँ… तेरी रंडी… और चोद… तोड़ दे मुझे!”
मैंने उसे उलटा किया। गांड ऊपर। लंड गांड के छेद पर रखा। थूक लगाया, फिर धीरे-धीरे धकेलना शुरू किया। वह चीखी—“आह… दर्द हो रहा है… लेकिन मत रुक!” मैंने पूरा अंदर घुसा दिया। गांड टाइट थी। ठोकरें तेज होती गईं। एक हाथ से चूत में उंगलियाँ घुसाईं, दूसरे से स्तन मसले। अमित सामने बैठा देख रहा था, अपना लंड हिला रहा था। कभी-कभी आकर प्रियंका के मुँह में ठूंस देता। हम तीनों पसीने से नहाए हुए थे। कमरे में सिर्फ मांस की टकराहट और कराहने की आवाजें गूँज रही थीं।
दूसरे राउंड में मैंने उसे गोद में बैठाया। वह ऊपर-नीचे उछल रही थी। स्तन उसके चेहरे पर बार-बार लग रहे थे। मैंने दोनों स्तन पकड़कर निचोड़े। निप्पल से दूध जैसा कुछ निकलने लगा—शायद उत्तेजना का रस। वह पागल हो गई। चार बार झड़ चुकी थी। चूत सूज गई थी, लाल हो गई थी। फिर भी मैं रुकने वाला नहीं था। मैंने उसे दीवार से सटाया। एक पैर ऊपर उठाया, लंड अंदर डाला और खड़े-खड़े चोदा। दीवार पर उसके शरीर के निशान पड़ गए।
रात भर यही सिलसिला चला। चार बार मैंने उसके अंदर वीर्य भरा। गांड में भी एक बार। हर बार अमित साथ था—कभी चूसता, कभी देखता, कभी अपनी पत्नी के मुँह में ठूंसता। प्रियंका पूरी तरह टूट चुकी थी। शरीर पर काटने के निशान, थप्पड़ों के लाल दाग, रस्सी के निशान। लेकिन आँखों में मजा चमक रहा था। सुबह मैं नहाकर निकला। अमित ने दरवाजे तक छोड़ा, बोला—“अगले महीने भी यही होगा। जब तक बच्चा न हो जाए।”
अगले हफ्ते रोज यही हुआ। कभी दिन में, कभी रात में। कभी प्रियंका की ननद आ जाती तो रात को बुलाते। एक रात दूध में कुछ मिलाया गया था—ताकत की दवा। मैं सांड बन गया। छह बार चोदा उस रात। अलग-अलग स्टाइल में। बाँधकर, पीटकर, गला दबाकर, गांड और चूत दोनों एक साथ। अमित ने भी कई बार मेरा लंड चूसा। कभी-कभी मैंने अमित को भी चोदा—प्रियंका देखती रही और मजा लेती रही।
एक महीने बाद प्रियंका का पीरियड नहीं आया। टेस्ट पॉजिटिव आया। डॉक्टर ने कन्फर्म किया—गर्भवती है। अब जब भी मन करता है, मैं उनके घर जाता हूँ। अमित के सामने ही खेल होता है। कभी प्रियंका को बाँधकर चोदता हूँ, कभी उसे कुत्ते की तरह घसीटता हूँ, कभी दोनों को एक साथ सताता हूँ। शरीर पर निशान अब स्थायी हो गए हैं। लेकिन कोई शिकायत नहीं। वह खुद मांगती है—“आज और क्रूर बनो… आज और तोड़ो मुझे।”
गर्भ ठहरने के बाद भी हमारी मुलाकातें रुकीं नहीं। बल्कि और क्रूर, और गंदी और और निर्दयी हो गईं। प्रियंका का पेट हल्के से फूलने लगा था, स्तन और भारी हो गए थे, निप्पल काले और संवेदनशील। लेकिन उसकी भूख पहले से कहीं ज्यादा हो गई थी। वह खुद मैसेज करती—“आज रात आना। आज मुझे तोड़ना है। आज रस्सी, चाबुक और दोनों छेद एक साथ चाहिए।”
एक रात मैं पहुँचा। अमित ने दरवाजा खोला। कमरे में प्रियंका पहले से नंगी थी। उसके दोनों हाथ सिर के ऊपर रस्सी से बँधे हुए थे, पैर फैलाकर टखनों से भी बाँध दिए गए थे। बिस्तर के चारों कोनों पर। आँखों पर काला कपड़ा बाँधा हुआ था। मुँह में बड़ा सा गैग ठूँसा हुआ था, जिससे सिर्फ कराह निकल रही थी। शरीर पर पहले से ही लाल निशान थे—पुरानी मार के।
अमित ने मुझसे कहा—“आज पूरा अधिकार तुम्हारा है। जितना चाहो उतना सताओ। मैं देखूँगा और जब जरूरत पड़ेगा तो शामिल हो जाऊँगा।”
मैंने धीरे-धीरे उसके पास जाकर स्तनों को मसला। निप्पल इतने संवेदनशील हो गए थे कि हल्के से दबाने पर वह काँप उठी। मैंने दाँत गड़ा दिए। खून की बूँदें निकलीं। वह गैग के पीछे चीखी। मैंने चाबुक उठाया—चमड़े का, पतला और तेज। पहले उसकी जाँघों पर लड़काया। लाल लकीरें उभर आईं। फिर स्तनों पर। एक-एक करके। हर वार पर शरीर ऐंठता, चूत से पानी रिसने लगता। मैंने चाबुक चूत पर भी मारा। सीधे क्लिटिस पर। वह उछली, रस्सियाँ खिंचीं, लेकिन भाग नहीं सकी।
मैंने गैग निकाला। उसके मुँह से लार बह रही थी। मैंने अपना लंड उसके मुँह में ठूँस दिया। गले तक। वह साँस नहीं ले पा रही थी, आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन मैंने बाल पकड़कर और गहराई तक धकेल दिया। “निगल रंडी… पूरा निगल।” वह गों-गों कर रही थी। मैंने दस-बारह बार गले की चुदाई की, फिर बाहर निकाला। लार और थूक उसके चेहरे पर फैला दिया।
फिर मैंने चूत में तीन उंगलियाँ एक साथ घुसा दीं। सूजी हुई, गर्भावस्था के कारण और भी संवेदनशील। उंगलियों को मोड़-मोड़कर अंदर मसला। वह चीख रही थी—“आह… छोड़… नहीं… और अंदर!” मैंने चौथी उंगली भी डाल दी। फिर पूरा मुट्ठी भरने की कोशिश की। आधा मुट्ठी अंदर चली गई। वह पागल हो रही थी। शरीर काँप रहा था, पसीना बह रहा था। मैंने मुट्ठी अंदर-बाहर की, फिर अचानक निकालकर लंड से बदल दिया। एक झटके में पूरा अंदर।
ठोकरें इतनी तेज थीं कि बिस्तर की लकड़ी चरमरा रही थी। हर ठोकर पर उसके पेट पर हल्का दबाव पड़ रहा था। मैंने गर्दन दबाई। साँस बंद। चेहरा लाल। छोड़ते ही वह हाँफते हुए बोली—“और दबा… और मार… मुझे कुत्ते से भी बदतर बना दे!” मैंने चाबुक फिर उठाया। पीठ पर, गांड पर, जाँघों पर लगातार वार। लाल निशान काले पड़ने लगे। खून की पतली लकीरें बहने लगीं।
अमित पास आया। उसने अपना लंड प्रियंका के मुँह में ठूँस दिया। मैं नीचे चोद रहा था, वह ऊपर। दोनों तरफ से भरी हुई। मैंने उसकी गांड का छेद भी नहीं छोड़ा। थूक लगाकर दो उंगलियाँ गांड में घुसा दीं। फिर लंड चूत से निकालकर गांड में धकेल दिया। एक ही झटके में आधा। वह चीखी—“फाड़ दे… पूरा फाड़ दे साले!” मैंने पूरा अंदर कर दिया। गांड की चुदाई शुरू। एक हाथ से चूत मसल रहा था, दूसरे से स्तन। अमित उसके बाल खींचकर मुँह की चुदाई कर रहा था।
मैंने दोनों छेद बदल-बदलकर चोदे। कभी चूत, कभी गांड। वीर्य छोड़ने से पहले निकाला और उसके चेहरे पर छोड़ दिया। आँखों में, मुँह में, बालों में। अमित ने भी उसी समय उसके मुँह में छोड़ दिया। वह निगल नहीं पाई, सब चेहरे पर बह गया। मैंने उंगली से उसके चेहरे पर फैलाया और बोला—“चाट अपनी गंदगी।” वह जीभ निकालकर चाटने लगी।
रस्सियाँ खोलीं। वह ढेर हो गई। लेकिन मैंने आराम नहीं दिया। उसे फर्श पर घसीटा। कुत्ते की तरह। बाल पकड़कर कमरे में घुमाया। फिर दीवार से सटाया। हाथ ऊपर बाँधे। पैर फैलाए। मैंने पीछे से चोदा—गांड और चूत दोनों बारी-बारी। चाबुक बीच-बीच में चलाता रहा। अमित नीचे बैठकर उसकी चूत चाट रहा था जबकि मैं गांड चोद रहा था। जीभ और लंड एक साथ। वह पागल हो चुकी थी। लगातार झड़ रही थी। शरीर ऐंठ रहा था, लेकिन रुकने को नहीं कह रही थी।
रात के दो बजे तक यही सिलसिला चला। मैंने उसे बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे खड़ा किया। ठंडा पानी। शरीर काँप रहा था। मैंने फिर से लंड अंदर डाल दिया। पानी और रक्त और वीर्य मिलकर फर्श पर बह रहे थे। अमित ने उसका मुँह दबा रखा था ताकि चीख बाहर न जाए। मैंने आखिरी बार दोनों छेदों में भर दिया। पूरा। अंदर ही अंदर।
सुबह जब मैं निकला तो प्रियंका बिस्तर पर लेटी थी। शरीर पर इतने निशान थे कि कपड़े पहनने में तकलीफ हो रही थी। लेकिन आँखों में वही भूख थी। उसने फुसफुसाकर कहा—“अगली बार और क्रूर आना। आज जो किया वो भी कम लगा।”
अगले हफ्ते और भी काला खेल हुआ। इस बार अमित ने घर के बरामदे में व्यवस्था की। रात के अँधेरे में। प्रियंका को कुर्सी पर बाँधा। हाथ-पैर फैलाए। मुँह में बड़ा डिल्डो ठूँसा। मैंने उसकी आँखें खोलीं रखीं ताकि वह सब देख सके। चाबुक की जगह इस बार पतली बेंत ली। जाँघों पर, स्तनों पर, चूत पर लगातार वार। हर वार पर शरीर उछलता, लेकिन आवाज डिल्डो के कारण दब जाती। मैंने बेंत की नोक से उसके निप्पल को चुभोया। फिर चूत के होंठों को। खून निकला। मैंने लंड उस खून पर रगड़कर अंदर डाल दिया।
अमित उसके पीछे खड़ा था। उसने अपना लंड मेरे लंड के साथ ही उसके एक छेद में ठूँसने की कोशिश की। दोनों लंड एक साथ चूत में। प्रियंका की आँखें फटी की फटी रह गईं। दर्द से शरीर काँप रहा था। लेकिन हम दोनों ने धकेलना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे दोनों अंदर तक चले गए। दो लंड एक साथ उसकी सूजी चूत को चीर रहे थे। वह रो रही थी, लेकिन सिर हिला-हिलाकर और कह रही थी। हमने एक साथ ठोकरें मारीं। उसकी चूत फटने के कगार पर थी। खून और रस मिलकर बह रहे थे। जब हमने वीर्य छोड़ा तो दोनों का मिलाजुला गर्म द्रव उसके अंदर भर गया, बाहर भी निकलकर जाँघों पर बहने लगा।
उसके बाद मैंने उसे कुर्सी से खोला और फर्श पर पेट के बल लिटाया। गर्भवती पेट के कारण सावधानी से, लेकिन क्रूरता कम नहीं की। गांड ऊपर उठाई। दोनों छेद खुले हुए, लाल और सूजे। मैंने एक के बाद एक दोनों में लंड डालकर चोदा। अमित उसके मुँह में बैठा था। हमने घंटों तक उसे इस्तेमाल किया। कभी बाँधकर, कभी घसीटकर, कभी कुत्ते की तरह पेशाब करवाकर। हाँ, एक बार मैंने उसके मुँह में पेशाब किया। उसने पिया। अमित ने भी। वह सब पी गई।
अब हर मुलाकात इससे भी आगे निकल जाती है। प्रियंका का पेट सात महीने का हो चुका है। स्तनों से कभी-कभी दूध रिसने लगा है। मैं उस दूध को चूसता हूँ, फिर उसके मुँह में थूक देता हूँ। शरीर पर स्थायी निशान हो गए हैं—चाबुक के, दाँतों के, रस्सी के। अमित अब सिर्फ देखता नहीं, खुद भी सताता है। कभी वह मुझे चोदता है प्रियंका के सामने, कभी हम दोनों मिलकर उसे दोनों छेदों में एक साथ फाड़ते हैं।
एक रात उसने खुद कहा—“मुझे बेचना। किसी और को भी बुलाओ। आज तीन लोग एक साथ चाहिए।” हमने बुलाया। एक और मर्द। तीन लंड। एक मुँह में, एक चूत में, एक गांड में। लगातार घंटों। वह बेहोश होने के कगार पर पहुँच गई, लेकिन हमने पानी के छींटे देकर जगाया और फिर से शुरू कर दिया। सुबह तक उसके शरीर का कोई कोना नहीं बचा था जो इस्तेमाल न हुआ हो।
अब वह सिर्फ मेरी रंडी नहीं रही। वह हमारी साझा संपत्ति है। गर्भवती, टूटी हुई, निशानों से भरी, लेकिन हर बार और ज्यादा मांगती हुई। और मैं… मैं हर बार और गहराई तक उतरता जाता हूँ इस अंधेरे में। अगली रात क्या होगा, यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन एक बात तय है—जब तक यह शरीर सह सकता है, तब तक हम इसे तोड़ते रहेंगे। और वह खुद हमें तोड़ने के लिए बुलाती रहेगी।
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