Posted inDesi Fiction Stories Web Series
रेल की तबाही भाग 2
शीशे के सामने अर्जुन ईशिता के निप्पलों में हुक धँसाकर उसके फूलते पेट को चाबुक से फाड़ता है। पानी का दबाव, दोहरी रॉड और खुद की बर्बादी माँगती आवाज़ उसे अपनी हार की गहरी लत में धकेल देती है sex series । ट्रेन सुरंग में घुस चुकी थी। काला अँधेरा वैगन को निगल गया। खिड़कियों के बाहर सिर्फ घना अँधेरा दौड़ रहा था। कोई रोशनी नहीं। सिर्फ पटरियों की भारी कराह और ईशिता की दबी......Read Full story