रेल की तबाही भाग 2

शीशे के सामने अर्जुन ईशिता के निप्पलों में हुक धँसाकर उसके फूलते पेट को चाबुक से फाड़ता है। पानी का दबाव, दोहरी रॉड और खुद की बर्बादी माँगती आवाज़ उसे अपनी हार की गहरी लत में धकेल देती है sex series । ट्रेन सुरंग में घुस चुकी थी। काला अँधेरा वैगन को निगल गया। खिड़कियों के बाहर सिर्फ घना अँधेरा दौड़ रहा था। कोई रोशनी नहीं। सिर्फ पटरियों की भारी कराह और ईशिता की दबी......Read Full story

कबीर-निशा पार्ट 8

प्रोफेसर अंदर बात कर रहे थे। दरवाज़े के पीछे खड़ा कबीर। निशा ने गांड में बर्फ के टुकड़े धकेलते हुए उसे चुपचाप ठंडा किया। हर टुकड़े पर बदन काँपता रहा, फिर भी वो हिला नहीं chut fad story । कबीर-निशा पार्ट 7 chut fad story सुबह सात बजते ही मैं फिर उस घर के दरवाज़े पर खड़ा था। कल मोम की जलन अभी भी अंडकोष पर बाकी थी। चलते समय हल्का दर्द उठता था। फिर......Read Full story

कबीर-निशा पार्ट 7

प्रोफेसर सो रहे थे। बिस्तर के नीचे लेटा कबीर। निशा ने अंडकोष पर गर्म मोम की बूँदें गिराते हुए उसे चुपचाप जलाया। हर बूँद पर बदन तड़पता रहा, फिर भी वो हिला नहीं adventure chudai । कबीर-निशा पार्ट 6 सुबह सात बजते ही मैं फिर उस घर के दरवाज़े पर खड़ा था। कल बिस्तर के पाये वाली उंगलियों की जलन अभी भी गांड में बाकी थी। चलते समय हल्का दर्द उठता था। फिर भी घंटी......Read Full story

कबीर-निशा पार्ट 6

प्रोफेसर सो रहे थे। बिस्तर के पाये से बंधा कबीर। निशा ने गांड में उंगलियाँ घुमाते हुए उसे चुपचाप तोड़ा। हर घुमाव पर बदन काँपता रहा, फिर भी वो सहता गया। कबीर-निशा पार्ट 5 सुबह सात बजे मैं फिर उस घर के दरवाज़े पर खड़ा था। कल अलमारी वाले क्लिप्स की लाल निशान अभी भी निपल्स पर चमक रहे थे। कपड़ा छूते ही जलन होती थी। फिर भी घंटी बज गई। निशा ने दरवाज़ा खोला।......Read Full story

कबीर-निशा पार्ट 5

प्रोफेसर के कमरे की अलमारी में नंगा खड़ा कबीर। निपल्स पर क्लिप और लटकते वजन। हिलने पर भार बढ़ता गया, फिर भी वो चुपचाप सहता रहा। सुबह सात बजकर दस मिनट पर मैं फिर उस घर के दरवाज़े पर खड़ा था। कल बिस्तर के नीचे की सुइयों के निशान अभी भी लंड पर लाल छेद छोड़ गए थे। चलते समय हल्की जलन होती थी। फिर भी घंटी बज गई। निशा ने दरवाज़ा खोला। उनके चेहरे......Read Full story

कबीर-निशा पार्ट 4

प्रोफेसर के बिस्तर के नीचे लेटा कबीर। ऊपर चुदाई की आवाज़ें, नीचे लंड में सुइयाँ। हर धक्के के साथ दर्द बढ़ता गया, फिर भी वो और मांगता रहा। सुबह सात बजकर बीस मिनट पर मैं फिर उस घर के दरवाज़े पर था। शरीर पर कल के क्लिप्स और बेल्ट के निशान अभी भी साफ दिख रहे थे। गांड की जलन बाकी थी। फिर भी हाथ खुद-ब-खुद घंटी बजाने को उठ गए। निशा ने दरवाज़ा खोला।......Read Full story

कबीर-निशा पार्ट 3

प्रोफेसर घर पर थे। रसोई में क्लिप और बेलन से निशा ने कबीर को चुपचाप तोड़ा। तीन कदम दूर खतरा खड़ा था, फिर भी वो और सज़ा माँगता रहा। कबीर-निशा पार्ट 2 सुबह की पहली रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी जब मेरी आँख खुली। शरीर एक जगह से हिल भी नहीं पा रहा था। हाथ अभी भी छत की कड़ी से बंधे थे। निशा मेरे ऊपर सोई हुई थीं। उनका पूरा वजन मेरे......Read Full story

कबीर-निशा पार्ट 2

आँखें बंद, बाँहें छत से बंधी, बर्फ और गर्म मोम का खेल। निशा ने कबीर को पूरी रात अपने अंदर कैद रखा। सुबह तक बदन टूट चुका था, फिर भी वो फिर आने को बेताब था। अगले दिन सुबह सात बजकर चालीस मिनट पर मैं फिर उसी दरवाज़े के सामने खड़ा था। शरीर अभी भी कल के निशानों से जल रहा था। जाँघों पर बेल्ट के लाल निशान, सीने पर मोम के दाग और अंडकोष......Read Full story

कबीर-निशा पार्ट 1

ट्यूशन वाले कमरे में रस्सी, मोम और थप्पड़ों ने एक लड़के को पूरी तरह तोड़ दिया। दर्द में भी लंड तनता रहा। अब वो रो-रोकर और माँगता है। मेरा नाम कबीर है। उम्र बाईस साल। दिल्ली के एक छोटे से इलाके में रहकर मैं एम.कॉम की पढ़ाई कर रहा था। घर की हालत ठीक नहीं थी इसलिए ट्यूशन लेकर गुज़ारा चलाना पड़ता था। उसी ट्यूशन की वजह से मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई।ट्यूशन......Read Full story