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कबीर-निशा पार्ट 2
आँखें बंद, बाँहें छत से बंधी, बर्फ और गर्म मोम का खेल। निशा ने कबीर को पूरी रात अपने अंदर कैद रखा। सुबह तक बदन टूट चुका था, फिर भी वो फिर आने को बेताब था। अगले दिन सुबह सात बजकर चालीस मिनट पर मैं फिर उसी दरवाज़े के सामने खड़ा था। शरीर अभी भी कल के निशानों से जल रहा था। जाँघों पर बेल्ट के लाल निशान, सीने पर मोम के दाग और अंडकोष......Read Full story