कबीर-निशा पार्ट 3: रात भर लटकता गुलाम

आँखें बंद, बाँहें छत से बंधी, बर्फ और गर्म मोम का खेल। निशा ने कबीर को पूरी रात अपने अंदर कैद रखा। सुबह तक बदन टूट चुका था, फिर भी वो फिर आने को बेताब था। अगले दिन सुबह सात बजकर चालीस मिनट पर मैं फिर उसी दरवाज़े के सामने खड़ा था। शरीर अभी भी कल के निशानों से जल रहा था। जाँघों पर बेल्ट के लाल निशान, सीने पर मोम के दाग और अंडकोष......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 11

तीन घंटे बंद गोदाम में बीस पुरुषों ने संपत्ति को बारी-बारी और एक साथ खोला। लौटकर मालिक ने हिसाब लिया और अगली रात पार्टनर व उसकी पत्नी के हवाले करने का हुक्म दे दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 10 रात के नौ बजे रुद्रक्ष ने अनन्या को एक बड़े बंगले के अंदर धकेल दिया। अंदर पाँच महिलाएँ इंतजार कर रही थीं। सब अमीर, सब ठंडी आँखों वाली। उम्र तीस से पैंतालीस के बीच। कमरे में मोमबत्तियाँ जल......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 10

पाँच दिन बिना रोशनी के बंद कमरे में संपत्ति ने अंधेरे में खुद को बार-बार खोला। लौटकर मालिक ने जाँच की और अगली रात महिलाओं के हवाले करने का नया फैसला सुना दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 9 सुबह के सात बजे रुद्रक्ष ने अनन्या को ऊँची इमारत की खुली बालकनी में ले जाकर खंभे से बाँध दिया। हाथ ऊपर। पैर फैलाए। वजन भारी। नंगी। सिर्फ कॉलर। नीचे सड़क पर लोग आने-जाने शुरू हो चुके थे। गाड़ियाँ,......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 9

तीन दिन अकेले कमरे में कैमरे घूमते रहे। संपत्ति ने अपनी मुट्ठी से खुद को बार-बार खोला। मालिक ने लौटकर जाँच की और सुबह से शाम तक खुली बालकनी का नया हुक्म सुना दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 8 रात के आठ बजे बड़े हॉल में तीन पुरुष बैठे थे। रुद्रक्ष के पुराने व्यापारिक दुश्मन। एक भारी भरकम, एक दुबला तेज आँखों वाला, एक शांत लेकिन ठंडी मुस्कान वाला। मेज पर शराब की बोतलें, गिलास और महंगे......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 8

मालिक ने संपत्ति को कांच की मेज पर बाँधकर निप्पल खींचे, बार-बार भरा और खून निकालने तक पीटा। कल रात तीन दुश्मनों के सामने नंगी सर्वर बनने का अंतिम हुक्म दे दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 7 तीसरे दिन रात को रुद्रक्ष ने अनन्या को एक बंद ट्रक के अंदर धकेल दिया। अंदर बिल्कुल अंधेरा था। कोई रोशनी नहीं। फर्श ठंडा लोहा। दीवारें धातु की। अनन्या के हाथ पीछे बाँध दिए गए। कॉलर की चेन फर्श के......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 7

आधी रात ऊँची छत पर नंगी बाँधी संपत्ति शहर की रोशनी में खड़ी रही। नीचे भीड़ जुटती गई। मालिक ने गिनती करवाई, भरा और अगले सफर में बंद ट्रक का नया हुक्म सुना दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 6 दर्पणों वाला कमरा बिल्कुल अलग था। चारों दीवारें, छत और फर्श तक बड़े-बड़े साफ दर्पण लगे थे। कोई कोना नहीं, कोई अंधेरा नहीं। हर दिशा में अनन्या की नंगी काया के सैकड़ों टुकड़े दिख रहे थे। बीच में......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 6

तीन दिन अकेले कमरे में कैमरे घूमते रहे। संपत्ति ने अपनी ही मुट्ठी और नाखूनों से खुद को बार-बार खोला। लौटकर मालिक ने नई शर्त रख दी—रोज़ एक घंटा और अगला कमरा सिर्फ दर्पणों से भरा। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 5 हफ्ते भर अनन्या रोज़ रात शीशे के सामने खड़ी होकर बताती रही कि दिन भर किस हिस्से ने दर्द माँगा। रुद्रक्ष सुनता, कभी थप्पड़ मारता, कभी ताला लगा देता, कभी खोल देता। शरीर पर पुराने शब्द......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 5

मालिक ने लौटी संपत्ति के शरीर पर औरतों की हर हरकत फिर से खोदी, दोनों जगह एक साथ भरा और अगले हफ्ते मंच पर बीस लोगों के सामने खड़ी होकर गिनती करने का हुक्म दे दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 4 सुबह की रोशनी से पहले ही दरवाजा खुला। रुद्रक्ष अंदर आया। अनन्या अभी भी शीशे के सामने खड़ी थी। निप्पलों की सुइयाँ जगह पर थीं। ताला ठंडा पड़ा था। जांघों पर खून के सूखे अक्षर। आँखें......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 4

मालिक ने निप्पलों में सुइयाँ चुभाकर पानी से अंदर तक धोया, मुट्ठी घुमाई और चूत पर ताला ज्यों का त्यों रखा। कल पाँच औरतों के बीच तीन घंटे की बोली का फैसला सुना दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 3 दो घंटे बाद दरवाजा खुला। रुद्रक्ष अंदर आया। हाथ में एक काला चमड़े का थैला था। अनन्या कोने में उसी तरह पड़ी थी। शरीर पर सूखा खून और पानी के धब्बे। आँखें खुली हुईं लेकिन निगाहें खोई-खोई।रुद्रक्ष ने......Read Full story