रुद्रक्ष-अनन्या भाग 6

तीन दिन अकेले कमरे में कैमरे घूमते रहे। संपत्ति ने अपनी ही मुट्ठी और नाखूनों से खुद को बार-बार खोला। लौटकर मालिक ने नई शर्त रख दी—रोज़ एक घंटा और अगला कमरा सिर्फ दर्पणों से भरा। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 5 हफ्ते भर अनन्या रोज़ रात शीशे के सामने खड़ी होकर बताती रही कि दिन भर किस हिस्से ने दर्द माँगा। रुद्रक्ष सुनता, कभी थप्पड़ मारता, कभी ताला लगा देता, कभी खोल देता। शरीर पर पुराने शब्द......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 5

मालिक ने लौटी संपत्ति के शरीर पर औरतों की हर हरकत फिर से खोदी, दोनों जगह एक साथ भरा और अगले हफ्ते मंच पर बीस लोगों के सामने खड़ी होकर गिनती करने का हुक्म दे दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 4 सुबह की रोशनी से पहले ही दरवाजा खुला। रुद्रक्ष अंदर आया। अनन्या अभी भी शीशे के सामने खड़ी थी। निप्पलों की सुइयाँ जगह पर थीं। ताला ठंडा पड़ा था। जांघों पर खून के सूखे अक्षर। आँखें......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 4

मालिक ने निप्पलों में सुइयाँ चुभाकर पानी से अंदर तक धोया, मुट्ठी घुमाई और चूत पर ताला ज्यों का त्यों रखा। कल पाँच औरतों के बीच तीन घंटे की बोली का फैसला सुना दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 3 दो घंटे बाद दरवाजा खुला। रुद्रक्ष अंदर आया। हाथ में एक काला चमड़े का थैला था। अनन्या कोने में उसी तरह पड़ी थी। शरीर पर सूखा खून और पानी के धब्बे। आँखें खुली हुईं लेकिन निगाहें खोई-खोई।रुद्रक्ष ने......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 3

मालिक ने लौटी हुई संपत्ति को शीशे के सामने बाँधकर पुराने निशान मिटाए, ठंडे पानी से नहलाया और अगली बार औरतों के हवाले करने का नया फैसला सुना दिया। रुद्रक्ष-अनन्या भाग 2: तीसरे दिन सुबह रुद्रक्ष के कमरे में अनन्या फिर घुटनों के बल बैठी थी। शरीर पर पिछले वारों के निशान अभी भी काले-बैंगनी थे। निप्पल सूजे हुए। गुदा हल्की-हल्की जल रही थी। कॉलर की चेन फर्श से बंधी हुई थी।रुद्रक्ष कुर्सी पर बैठा......Read Full story

रुद्रक्ष-अनन्या भाग 2:

मालिक ने अपनी संपत्ति को कुत्तों के साथ बंद कर रात बिताई। सुबह जूते चाटने का नया हुक्म दिया और अगले तीन दिन किसी और के हवाले करने का फैसला सुनाया। रुद्रक्ष की अनन्या 1 सुबह की पहली रोशनी काली खिड़की से छनकर आई तो अनन्या अभी भी फर्श पर पड़ी हुई थी। शरीर हर जगह जल रहा था। नितंबों पर खून की सूखी धारियाँ चिपक गई थीं। चूत सूजी हुई और चिपचिपी। गर्दन का......Read Full story

रुद्रक्ष की अनन्या 1 : नंबर तीन की अंतिम साँस

एक पत्थर दिल मालिक अपनी संपत्ति को रातभर पीटता, रौंदता और अंदर तक भरता है। कल की पार्टी में नंगी बेइज्जती और कुत्तों वाले कमरे का इंतजार उसे पागल कर रहा है। रुद्रक्ष मल्होत्रा के ठंडे काले कमरे में हवा भी थम गई थी। दीवारें काली संगमरमर की थीं, फर्श पर मोटी काली कालीन बिछी हुई थी जिस पर खून के धब्बे आसानी से छिप जाते। कमरे के बीचोंबीच एक लोहे का ढांचा खड़ा था—चौड़ा,......Read Full story