मामा के बाहर जाते ही मीरा नंगी कबीर के पास पहुँचीं मौसी रंडी की चुदाई । चेन से कसी गईं, गर्म मोम निप्पलों पर गिरा, बर्फ दोनों छेदों में ठूंसी गई और गला दबते-दबते वो बार-बार टूटती रहीं। हर सुबह और प्यासी लौट आतीं।
कबीर 26 साल का था। लंबे बाल, तगड़ा शरीर और 9 इंच का मोटा लंड जो हमेशा आधा खड़ा रहता था। उसकी मौसी मीरा 38 साल की थीं—गदराया हुआ बदन, 38E के भारी गोल बूब्स, मोटी दूध जैसी जाँघें और एक बड़ी गद्देदार गांड जो कपड़ों में भी साफ झलकती थी। मुंबई के अंधेरी वेस्ट में मौसी का फ्लैट था। मामा अक्सर बाहर रहते थे। दो साल पहले की बात है।
एक शाम मामा का फोन आया, “कबीर, घर आ जा। कुछ काम है।” अगले दिन कबीर पहुँचा। शाम हो चुकी थी। मामा ने प्रेम से बिठाया, चाय-नाश्ता करवाया और बोले, “मुझे शादी में जाना नहीं हो पा रहा। तुम अपनी मौसी के साथ कल सुबह चले जाना।” कबीर के मन में हलचल मच गई। मौसी के बदन की तस्वीरें आँखों के सामने तैरने लगीं। डिनर के बाद सब सो गए, लेकिन कबीर की आँखों में नींद नहीं थी। वो सोचता रहा—कैसे मौसी की वो मोटी गांड अपने लंड से फाड़ूँ।
सुबह मौसी ने उठाया। कबीर देर तक सोता रहा। दूसरी बार हिलाने पर उठा तो मौसी नहीं दिखीं। बाथरूम का दरवाजा आधा खुला था। उसने धक्का दिया। अंदर मीरा पूरी नंगी नहा रही थीं। पानी की धार उनके बड़े बूब्स पर गिर रही थी। निप्पल कड़े हो चुके थे। गांड के दोनों गोल हिस्से चमक रहे थे। नज़रें टकराईं। कबीर का लंड एक पल में पत्थर हो गया। मौसी ने कुछ नहीं कहा। बस पानी की धार तेज कर दी। कबीर तुरंत बाहर निकल आया।
रेडी होकर दोनों निकले। रास्ते में सन्नाटा। आधे घंटे बाद मौसी ने धीमी आवाज में कहा, “सुबह जो हुआ… किसी को मत बताना।” कबीर ने सिर हिलाया, “गलती हो गई मौसी। लेकिन एक बात कहूँ?” मौसी ने देखा। “आप आज भी किसी जवान लड़की जैसी लगती हो। मामा का नसीब है।” मौसी हल्के से हँसीं, “नसीब? वो तो मुझे छूते तक नहीं। काम में इतने डूबे रहते हैं कि मैं सूखी रह जाती हूँ।” कबीर ने कहा, “तो खुद आकर्षित करो।” मौसी चुप रहीं। आँखों में कुछ और था।
शादी वाले घर पहुँचे। रिश्तेदार ने अलग कमरा दे दिया। आराम के बाद मौसी बाथरूम गईं। बाहर आईं तो सिर्फ एक पतला तौलिया लपेटे हुए। आधे बूब्स बाहर, गांड का निचला हिस्सा मुश्किल से ढका। कबीर का लंड शॉर्ट्स में तनकर फटने को हो गया। मौसी ने नोटिस किया। मुस्कुराईं, “सुबह सब देख लिया था… अब शर्मा क्या?” कबीर ने साहस जमाया, “तो तौलिया क्यों?” मौसी ने आँख मारी और तौलिया गिरा दिया। अंदर काली ब्रा-पैंटी थी। ब्रा की पट्टियाँ कंधों पर चढ़ा लीं। 38E के बूब्स ब्रा से बाहर आने को बेताब। कबीर ने कहा, “मौसी… सच में लौंडिया लग रही हो।” मौसी हँसीं, “मस्का बंद कर। तैयार हो।”
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कबीर बाथरूम गया। मौसी की नंगी तस्वीर याद करके मुठ मारी। बाहर आया तो मौसी पेटीकोट-ब्लाउज में मेकअप कर रही थीं। बिना साड़ी। कबीर ने कपड़े उतारे, सिर्फ चड्डी में रह गया। मौसी की नजर उसके खड़े लंड पर गई। उन्होंने आह भरी, “हम्म… अब समझ आ रहा है कि मैं अभी भी हॉट हूँ।” दोनों जल्दी तैयार हुए और शादी में पहुँचे। कबीर की नजर हर पल मौसी पर थी। थोड़ी देर बाद मौसी पास आईं, “यहाँ अच्छा नहीं लग रहा। जल्दी खाकर चलते हैं।”
खाना खाकर निकले। रास्ते में मौसी बोलीं, “रात बहुत हो गई। अकेले सफर ठीक नहीं। कोई होटल दिखे तो रुक जाते हैं।” कबीर ने गाड़ी रोकी। मोबाइल पर सर्च किया। दो किलोमीटर आगे एक होटल मिला। कमरा बुक किया। कागजी कार्रवाई के बाद कमरे में दाखिल हुए। मौसी फ्रेश होने गईं। कबीर भी। वापस आकर कबीर ने पूछा, “इतनी जल्दी क्यों निकले?” मौसी ने सीधा देखा, “तुम इतने बुद्धू नहीं हो। मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना था।” फिर आवाज काँपी, “तुम्हारे मामा मुझे छूते तक नहीं। तुमने दिन भर मेरी देखभाल की… तारीफ की… मेरे मन में कुछ और ही चलने लगा।” कहकर रोने लगीं।
कबीर ने कंधे पर हाथ रखा। मौसी और जोर से रोईं। गाल पर हाथ फेरते हुए आँसू पोंछे। तभी मौसी उसके गले लग गईं। चिपक गईं। कबीर ने चेहरा सामने किया। मौसी ने होंठ रगड़ दिए। किस शुरू हो गया। जीभ अंदर घुसी। दोनों एक-दूसरे की लार पीने लगे। कबीर ने साड़ी खींचकर खोली। ब्लाउज के ऊपर से बूब्स दबाने लगा। सॉफ्ट और भारी। मौसी आहें भरने लगीं। दोनों ने एक-दूसरे को नंगा करना शुरू किया। ब्लाउज खुला। कबीर टूट पड़ा। एक निप्पल मुँह में लिया, दूसरा हाथ से मसलने लगा। बदल-बदल कर चूसा, काटा, मरोड़ा। मौसी बोलीं, “नीचे भी एक रसभरी है…”
कबीर नीचे सरका। पेट पर किस। नाभि पर जीभ। मौसी मचल रही थीं। सर को नीचे धकेल रही थीं। पेटीकोट का नाड़ा खुद ढीला कर दिया। कबीर ने खींचा। मौसी ने गांड उठाई। अब सिर्फ पैंटी बची। कबीर ने पैंटी फाड़ दी। चूत के बाल गीले थे। उसने जीभ चूत पर फेर दी। मौसी की कमर उछली। “आह्ह… अंदर…!” कबीर ने दो उंगलियाँ घुसा दीं। तेजी से अंदर-बाहर। मौसी की टाँगें काँपने लगीं। फिर पूरा मुँह चूत पर लगा दिया। जीभ अंदर तक। मौसी जोर से झड़ गईं। पानी कबीर के चेहरे पर लगा।
अब कबीर उठा। अपना 9 इंच का लंड निकाला। मौसी की आँखें फटी रह गईं। “इतना मोटा…!” कबीर ने टाँगें फैलाईं और एक झटके में आधा लंड चूत में घुसा दिया। मौसी चीखीं। “फट गई… धीरे…!” कबीर ने नहीं सुना। पूरा अंदर तक पेल दिया। फिर जोर-जोर से ठोकने लगा। बेड चरमरा रहा था। मौसी की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। कबीर ने बाल पकड़कर पीछे खींचे। गर्दन दबाई। “मौसी… आज तेरी चूत और गांड दोनों फाड़ूँगा।”
बीस मिनट चूत मारने के बाद लंड निकाला। मौसी को घुमाया। चेहरे के बल लिटाया। गांड ऊपर। थूक लगाकर एक झटके में लंड गांड में घुसा दिया। मौसी की चीख दिवारों से टकराई। “आह्ह… बहनचोद… गांड फट गई…!” कबीर ने बाल पकड़े और रेलगाड़ी चला दी। हर झटके पर गांड की मांस फड़क रही थी। मौसी रो रही थीं लेकिन गांड पीछे धकेल रही थीं। “और जोर से… फाड़ दे…!”
कबीर ने तीस मिनट गांड मारी। फिर लंड निकाला। मौसी को घुटनों पर बिठाया। “चूस।” मौसी ने लंड मुँह में लिया। गला तक उतारने लगीं। कबीर ने सर पकड़कर जोर से मुँह चोदा। आँसू बह रहे थे। लार टपक रही थी। दस मिनट बाद कबीर ने लंड निकाला और मौसी के चेहरे पर वीर्य की धार छोड़ दी। होंठ, आँखें, बाल… सब सफेद हो गए। मौसी ने जीभ निकालकर चाटा।
रात अभी बाकी थी। कबीर ने मौसी के हाथ पीछे बांध दिए। बेल्ट से। फिर निप्पल पर क्लिप जैसे अटैचमेंट लगाए (होटल के मिनी बार से तार निकालकर)। थोड़ा खींचा। मौसी चीखीं। फिर बर्फ के टुकड़े चूत और गांड दोनों में ठूंस दिए। मौसी तड़पने लगीं। “ठंड… निकाल…!” कबीर ने नहीं निकाला। बल्कि उसी हालत में फिर से चूत में लंड डालकर ठोकने लगा। बर्फ पिघल रही थी। पानी और चूत का रस मिलकर फर्श गीला कर रहा था।
सुबह चार बजे तक खेल चला। मौसी की गांड और चूत दोनों सूजी हुईं थीं। निप्पल लाल, गर्दन पर उंगलियों के निशान। कबीर ने आखिर में मौसी को बाथटब में ले जाकर ठंडे पानी में बैठाया। सर पानी में दबाया। पाँच-पाँच सेकंड। मौसी हाथ-पैर पटक रही थीं। फिर निकाला और उसी पानी में खड़े होकर गांड में लंड घुसा दिया। पानी की लहरों के साथ चुदाई। जब झड़ा तो पूरा वीर्य गांड के अंदर छोड़ दिया।
सुबह मौसी उठीं। शरीर दर्द से काँप रहा था लेकिन आँखों में भूख बाकी थी। कबीर के पास आकर बोलीं, “आज के बाद जब भी मामा बाहर हों… मुझे बुलाना। मुझे और क्रूरता चाहिए। मुझे तोड़ना।” कबीर ने उनके होंठ चूसे, गांड पर जोर का थप्पड़ मारा। “बुलाना मत। खुद चली आना। तेरी गांड अब मेरी है।”
दोनों तैयार होकर निकले। वापसी के रास्ते में मौसी की टाँगें काँप रही थीं। हर धक्के पर दर्द हो रहा था। लेकिन मुस्कान चेहरे पर थी।
मीरा मौसी घर पहुँचीं तो मामा अभी भी ट्रिप पर थे। शरीर में दर्द था—गांड सूजी हुई, चूत जल रही थी, निप्पल पर काले निशान। लेकिन रात भर की वह क्रूरता उनके अंदर और गहरी भूख छोड़ गई थी। तीन दिन बाद मामा लौटे। मीरा ने मुस्कान ओढ़ ली, खाना परोसा, लेकिन रात को बिस्तर पर लेटते ही आँखों के सामने कबीर का 9 इंच का मोटा लंड तैरने लगा। मामा ने दो मिनट में काम खत्म किया और सो गए। मीरा बाथरूम गईं, उंगलियाँ चूत में घुसाईं और कबीर का नाम लेकर झड़ गईं।
एक हफ्ते बाद कबीर का मैसेज आया।
“मामा फिर बाहर हैं। आज रात 11 बजे मेरे फ्लैट आ। दरवाजा खुला रहेगा। अंदर कुछ मत पहनना।”
रात 11 बजते-बजते मीरा कबीर के अंधेरी वेस्ट वाले फ्लैट के दरवाजे पर थीं। कोट के नीचे पूरी नंगी। दरवाजा धकेलकर अंदर घुसीं। कबीर सोफे पर बैठा था। सिर्फ जीन्स में। लंड पहले से तना हुआ। उसने एक शब्द नहीं बोला। सिर्फ उंगली से इशारा किया—बेडरूम।
बेडरूम में लोहे का फ्रेम लगा था। चारों कोनों पर मोटी चेन। कबीर ने मीरा का कोट उतारा। भारी 38E बूब्स बाहर आए। उसने मीरा को फ्रेम के बीच खड़ा किया और हाथ-पैर चारों चेन से कसकर बांध दिए। टाँगें पूरी फैली हुईं। चूत और गांड दोनों हवा में लटक रहे थे। कबीर ने पहले एक मोटी काली मोमबत्ती जलाई। गर्म मोम सीधा बाएँ निप्पल पर गिराया। मीरा चीखीं। मोम सख्त होकर जम गया। फिर दाएँ निप्पल पर। फिर चूत के ऊपर के भाग पर। जलन इतनी तेज थी कि मीरा की कमर ऐंठ गई।
फिर कबीर ने बांस की छड़ी निकाली। पहले गांड पर दस जोरदार वार। हर वार पर मोटी लाल लकीर उभर आई। मीरा रो रही थीं लेकिन गांड पीछे की तरफ धकेल रही थीं। “और… जोर से मार…!” छड़ी चूत के होंठों पर भी पड़ी। दो-तीन वार। होंठ सूज गए। कबीर ने छड़ी रखी और एक 11 इंच का काला डildo निकाला। पहले चूत में पूरा ठूंस दिया। मीरा की आँखें फटी रह गईं। “बहुत गहरा… अंदर तक…!” कबीर ने डildo को तेजी से अंदर-बाहर किया। पानी की आवाज आने लगी। फिर निकाला और एक झटके में गांड में घुसा दिया। मीरा की चीख घर में गूँज उठी। डildo अंदर छोड़ दिया।
अब कबीर ने अपनी जीन्स उतारी। 9 इंच का मोटा लंड बाहर आया। नसें फूली हुईं। उसने मीरा के बाल पकड़कर सर पीछे खींचा और लंड मुँह में ठूंस दिया। गला तक। मीरा की आँखों से आँसू बहने लगे। कबीर ने सर दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदने लगा। लार मुँह से बाहर निकलकर छाती पर बह रही थी। पंद्रह मिनट बाद लंड निकाला। मीरा हाँफ रही थीं। “और… गला फाड़ दे…!”
कबीर ने मीरा को पलटा। चेहरे के बल। गांड ऊपर। डildo अभी भी अंदर था। उसने डildo निकाला और अपना लंड एक ही झटके में गांड में गाड़ दिया। पूरा। मीरा चीखीं, “आह्ह… फट गई… बहनचोद…!” कबीर ने बाल पकड़े और रेलगाड़ी चला दी। हर धक्के पर गांड की मांसपेशियाँ फड़क रही थीं। तीस मिनट तक लगातार पेलता रहा। मीरा की आवाज बैठ गई थी। सिर्फ सिसकियाँ बच रही थीं।
लंड निकाला। गांड से सफेद झाग निकल रहा था। कबीर ने तुरंत चूत में डाल दिया। मीरा दोबारा झड़ गईं। शरीर काँप रहा था। कबीर रुका नहीं। चूत फाड़ते हुए दोनों निप्पल मरोड़े। गर्दन दबाई। साँस रुकने लगी। आँखें पलटीं। ठीक उसी वक्त कबीर ने जोर का झटका मारा और मीरा तीसरी बार झड़ गईं। पानी कबीर की जाँघों तक बह आया।
रात अभी बाकी थी। कबीर ने चेन थोड़ी ढीली की। मीरा को घसीटते हुए बाथटब में ले गया। ठंडा पानी भरा। मीरा को पानी में बैठाया। फिर फ्रिज से बर्फ के बड़े टुकड़े निकाले और चूत व गांड दोनों में ठूंस दिए। मीरा काँप रही थीं। “ठंड… मर जाऊँगी…!” कबीर ने उनका सर पानी में दबाया। सात सेकंड। दस सेकंड। मीरा हाथ-पैर पटकने लगीं। कबीर ने छोड़ा। मीरा खाँस रही थीं। “और… डुबा…!” कबीर ने फिर डुबाया।
इस बार लंबा। गांड पानी के ऊपर थी। कबीर ने खड़े होकर गांड में लंड घुसा दिया। पानी के अंदर चुदाई। मीरा की चीखें पानी में गूँज रही थीं। जब झड़ने वाला था तो लंड निकाला, सर पानी से बाहर निकाला और मुँह में ठूंस दिया। पूरा वीर्य गले में उतार दिया। मीरा ने निगला। कुछ बाहर निकला तो कबीर ने थप्पड़ मारा। “सब निगल। एक बूँद भी बाहर नहीं।”
सुबह चार बजे तक खेल चला। मीरा की गांड और चूत दोनों सूजी हुईं थीं। बूब्स पर मोम के निशान, गांड पर छड़ी के लाल निशान, गर्दन पर उंगलियों के निशान। कबीर ने उन्हें बेड पर लिटाया। मीरा सो नहीं पा रही थीं। शरीर दर्द से काँप रहा था लेकिन आँखों में संतुष्टि थी।
दूसरे दिन दोपहर में मीरा फिर आईं। इस बार हाथ में काला बैग। अंदर रस्सियाँ, मेटल क्लैम्प्स और एक छोटी इलेक्ट्रिक मशीन। “आज मुझे पूरी तरह तोड़ दे,” मीरा ने कहा। “मामा को शक हो रहा है। ऐसा सबक दे कि मैं भूल न पाऊँ।”
कबीर ने मीरा को नंगा किया। हाथ पीछे बांधे। निप्पल पर मेटल क्लैम्प्स लगाए। चेन से जोड़ दिए। थोड़ा खींचा तो मीरा चीखीं। फिर इलेक्ट्रिक पैड चूत के दोनों तरफ लगाए। लो वोल्टेज। मीरा का शरीर झटके से उछला। “आह्ह… करंट… और बढ़ा…!” कबीर ने वोल्टेज बढ़ाया। मीरा फर्श पर गिर गईं। शरीर ऐंठ रहा था। कबीर ने उसी हालत में उनका मुँह खोला और लंड ठूंस दिया। मीरा करंट लगते हुए भी लंड चूस रही थीं।
आँसू और लार मिलाकर बह रहे थे। कबीर ने उन्हें उठाया, दीवार से सटाया। टाँगें फैलाकर लंड चूत में घुसाया। उसी समय क्लैम्प्स खींचे और करंट दिया। मीरा पागलों की तरह चीखीं। शरीर काँप रहा था। कबीर रुका नहीं। दीवार से टकराते हुए चोदता रहा।
रात को नया खेल। मीरा को कुर्सी पर बैठाया। हाथ-पैर बांधे। आँखों पर काली पट्टी। फिर एक-एक करके अलग चीजें—पहले मोटी मोमबत्ती चूत में, फिर गांड में। फिर अदरक की पतली पट्टी गांड में ठूसी। जलन इतनी तेज थी कि मीरा रोने लगीं। “निकाल… जल रहा है…!” कबीर ने नहीं निकाला। बल्कि उसी जलन में अपना लंड चूत में डालकर जोर-जोर से पेलने लगा। मीरा पागल हो रही थीं। दर्द और मजे का मिश्रण। वो झड़ गईं। शरीर शिथिल पड़ गया।
तीसरे दिन सुबह मीरा को घर लौटना था। कबीर ने आखिरी बार उन्हें बेड पर बांधा। दोनों छेद एक साथ—चूत में लंड, गांड में मोटा डildo। मीरा की चीखें घर में गूँज रही थीं। कबीर ने बाल पकड़कर सर पीछे खींचा और कान में फुसफुसाया, “शादीशुदा मौसी। तेरा पति तुझे ऐसे कभी नहीं चोदेगा। याद रखना—तेरी गांड, तेरी चूत, तेरे निप्पल सब मेरे हैं। जब भी बुलाऊँ, तू आएगी। नहीं तो मैं खुद आकर तेरे पति के सामने तेरी गांड फाड़ूँगा।”
मीरा आँसू भरी आँखों से बोलीं, “आऊँगी… हमेशा आऊँगी… तू मेरा मालिक है…”
कबीर ने आखिरी झटके मारे। पहले चूत में वीर्य उड़ेल दिया। फिर लंड निकालकर गांड में डाल दिया और बाकी वीर्य वहाँ छोड़ दिया। अंत में मीरा के मुँह में लंड रखकर बचा हुआ निगलवाया।
मीरा उठीं। कपड़े पहने। चलते-चलते दरवाजे पर रुकीं। मुड़ीं। आँखों में अभी भी वही भूख थी। “अगली बार और क्रूर होना। मुझे तोड़ना। पूरी तरह।”
कबीर ने सिर्फ सिर हिलाया। दरवाजा बंद हुआ। फ्लैट में सन्नाटा छा गया। लेकिन कबीर जानता था—यह अंत नहीं था। मीरा बार-बार आएंगी। हर बार और ज्यादा टूटी हुई, और ज्यादा भूखी। और कबीर हर बार उन्हें और गहराई तक तोड़ेगा। क्योंकि कुछ औरतें सिर्फ दर्द में ही जीती हैं। और मीरा मौसी उनमें से एक थीं।
मौसी रंडी की चुदाई :-