देवर ने भाभी को बेड से बांधकर बेरहम पेलाई की

देवर ने भाभी को बेड से बांधकर बेल्ट और मोम से सताया। गला दबाकर दोनों छेद में बेरहम पेलाई की। रोती-चीखती प्रिया फिर भी और मांगती रही, पूरी तरह टूटकर उसकी संपत्ति बन गई।

राहुल इंदौर में रहता था। उम्र पच्चीस साल। उसका भाई विक्रम उससे चार साल बड़ा था। विक्रम की शादी प्रिया से हुई थी। प्रिया उम्र में राहुल से नौ साल बड़ी थी, यानी चौंतीस। राहुल और विक्रम बचपन से ही बहुत करीब थे। राहुल अक्सर विक्रम के घर आजाया करता था। प्रिया लव मैरिज से आई थी। उसकी बॉडी ऐसी थी कि पहली नजर में ही किसी का खून गर्म हो जाए। लंबे बाल, गोरी त्वचा, भारी स्तन जो किसी भी टाइट कपड़े में बाहर निकलने को बेताब रहते, और मांसल, गोल गांड जो जींस में भी साफ झलकती।

शादी के डेढ़ साल बाद राहुल और प्रिया के बीच हंसी-मजाक बढ़ने लगा। राहुल का ऑफिस दोपहर दो बजे छूट जाता। वह सीधे प्रिया के घर पहुंच जाता। प्रिया ज्यादातर घर में छोटी स्कर्ट और पतली टॉप पहनती। स्तन इतने बड़े थे कि टॉप के बटन तनाव में रहते। राहुल कई दिनों से खुद को छू भी नहीं पाया था। उसका ध्यान बार-बार प्रिया के स्तनों और गांड पर जाता। एक दिन वह बर्दाश्त नहीं कर पाया।
“प्रिया… तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। सच में… मैं तुम्हें चाहता हूं।”

प्रिया ने पल भर के लिए उसे देखा, फिर धीरे से मुस्कुराई।
“राहुल, हम भाभी-देवर हैं। लेकिन… मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं। बस ये बात किसी को नहीं पता चलनी चाहिए।”
कुछ हफ्तों बाद राहुल ने प्रिया को फोन किया।
“आज शाम सात बजे सिटी गार्डन में मिलो।”

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प्रिया आई। काली साड़ी में। साड़ी इतनी पतली थी कि अंदर का ब्लाउज और ब्रा की लकीरें साफ दिख रही थीं। कमर पतली, स्तन भारी, गांड उभरी हुई। वे बेंच पर बैठे। राहुल ने उसका हाथ पकड़ लिया। प्रिया चुप रही। फिर राहुल ने धीरे से कहा,
“मुझे तुम्हारे स्तन छूने हैं। अभी।”
प्रिया ने चारों तरफ देखा। फिर धीरे से बोली,

“जल्दी करो।”
राहुल उसे पेड़ों के घने हिस्से में ले गया। पीछे से खड़ा होकर साड़ी का पल्लू हटाया, ब्लाउज के अंदर हाथ डाल दिया। गर्म, भारी स्तन। उसने जोर से दबाया। प्रिया की सांस अटक गई। राहुल ने निप्पल को उंगलियों से मरोड़ा। प्रिया की आंखें बंद हो गईं। राहुल ने अपना लंड उसकी गांड पर दबाया। वह पहले से ही सख्त था। कुछ ही सेकंड में उसके अंडकोष सिकुड़ गए और वह कपड़ों के अंदर ही झड़ गया।

दो दिन बाद राहुल प्रिया के ट्यूशन सेंटर पहुंचा। सेंटर बंद हो चुका था। सिर्फ प्रिया अंदर थी। राहुल ने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया।

“आज सिर्फ छूना नहीं। देखना है। पूरा।”
प्रिया ने साड़ी का पल्लू हटाया, ब्लाउज के हुक खोले, ब्रा ऊपर कर दी। दो बड़े, गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल कड़े थे। राहुल ने एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसा। दांतों से हल्का काटा। प्रिया की कमर कांप उठी।

“आह… राहुल… धीरे…”
राहुल ने नहीं सुना। दूसरे स्तन को भी उसी तरह सताया। फिर उसने प्रिया को दीवार से सटाया, स्कर्ट ऊपर की, पैंटी नीचे खींची और दो उंगलियां उसकी चूत में घुसेड़ दीं। अंदर गीला और गर्म था। उसने उंगलियां तेजी से अंदर-बाहर कीं। प्रिया की टांगें कांपने लगीं।
“चोदना है मुझे?” राहुल ने उसके कान में फुसफुसाया।

प्रिया ने सिर्फ हां में गर्दन हिलाई।
लेकिन राहुल ने उस दिन नहीं चोदा। उसने सिर्फ उंगलियों से उसे चरम सुख तक पहुंचाया और फिर छोड़ दिया। प्रिया दीवार से सटकर सांस ले रही थी, स्तन खुले, चूत गीली।

अगली मुलाकात विक्रम के ऑफिस में लेट होने वाले दिन हुई। राहुल शाम छह बजे घर पहुंचा। प्रिया ने दरवाजा खोला। टाइट जींस और क्रॉप टॉप में। स्तन टॉप से आधे बाहर। राहुल ने उसे अंदर खींचा, दरवाजा बंद किया और दीवार से सटा दिया।
“आज पूरी तरह मेरी हो।”

उसने प्रिया के होंठों को अपने मुंह में ले लिया। जीभ अंदर घुसाई। एक हाथ से टॉप ऊपर किया, ब्रा खोल दी। स्तनों को जोर-जोर से मसला। फिर जींस का बटन खोला, नीचे खींची। पैंटी गीली थी। राहुल ने पैंटी फाड़ दी। प्रिया की चूत साफ मुंडी हुई, गुलाबी, चमक रही थी।
राहुल घुटनों पर बैठ गया। जीभ से चूत चाटी। पहले बाहर, फिर अंदर। प्रिया की उंगलियां उसके बालों में घुस गईं।

“आह्ह्ह… राहुल… और अंदर…”
राहुल ने खड़े होकर अपनी पैंट उतारी। सात इंच का मोटा, सख्त लंड बाहर निकला। प्रिया ने घुटनों पर बैठकर उसे मुंह में ले लिया। गले तक। राहुल ने उसके बाल पकड़कर सिर को आगे-पीछे किया। लंड गले में धंस रहा था। प्रिया की आंखों से पानी आने लगा, लेकिन वह रुक नहीं रही थी।

फिर राहुल ने उसे बेड पर लिटाया। टांगें फैलाईं। लंड को चूत पर रखा और एक झटके में अंदर धकेल दिया। प्रिया चीख उठी।
“आआह्ह… बड़ा है… धीरे…”
राहुल ने धीरे नहीं किया। उसने दोनों कलाई पकड़कर सिर के ऊपर दबा दीं। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ स्तन उछल रहे थे। उसने एक स्तन मुंह में लिया और काटा। प्रिया की चूत कस रही थी।

“चोदो… और जोर से… अपनी भाभी को चोदो…”
राहुल ने उसकी गर्दन दबाई। हल्के से। प्रिया की आंखें लाल हो गईं, लेकिन वह और जोर से कमर उठा रही थी। राहुल ने उसे पलट दिया। घुटनों के बल। गांड ऊपर। उसने एक थप्पड़ गांड पर मारा। लाल निशान पड़ गया। फिर दूसरा। तीसरा। प्रिया कराह रही थी।
“मारो… और मारो…”

राहुल ने लंड फिर से चूत में घुसेड़ दिया। एक हाथ से बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। दूसरा हाथ गर्दन पर। वह बिना रुके पेल रहा था। पसीना दोनों के शरीर पर चमक रहा था। पंद्रह मिनट बाद राहुल ने कहा,
“अंदर डालूं?”

प्रिया ने हां में गर्दन हिलाई। राहुल ने आखिरी जोरदार धक्के लगाए और गहरे अंदर झड़ गया। गर्म वीर्य उसकी कोख में भर गया।
वे दोनों थककर लेट गए। लेकिन राहुल का लंड फिर से सख्त होने लगा। उसने प्रिया को ऊपर बैठाया।

“अब तुम चोदो।”
प्रिया ने लंड को चूत में लिया और ऊपर-नीचे होने लगी। राहुल ने उसके स्तन पकड़कर जोर से मरोड़े। निप्पल को नाखून से दबाया। प्रिया चीख रही थी, लेकिन रुक नहीं रही थी। दूसरी बार भी राहुल अंदर ही झड़ा।

उस रात के बाद उनका रिश्ता बदल गया। अब जब भी विक्रम घर से बाहर होता, राहुल आता। कभी रसोई में, कभी बाथरूम में, कभी बेड पर। एक दिन उसने प्रिया को बाथरूम में पकड़ा। नहाते हुए। पानी टपकते शरीर पर साबुन। राहुल ने उसे शीशे के सामने खड़ा किया। पीछे से लंड चूत में घुसाया। एक हाथ से स्तन मसले, दूसरे से चूत रगड़ी। शीशे में प्रिया अपना चेहरा देख रही थी—आंखें आधी बंद, मुंह खुला, स्तन हिलते हुए।

राहुल ने और क्रूरता बढ़ाई। एक दिन उसने प्रिया की दोनों कलाई बेड के हेडबोर्ड से रस्सी से बांध दीं। आंखों पर काला कपड़ा बांधा। फिर घंटों तक उसे सताया। कभी जीभ से, कभी उंगलियों से, कभी लंड से। जब प्रिया चरम सुख के करीब पहुंचती, वह रुक जाता। प्रिया रोने लगती।
“प्लीज… छोड़ो… डालो…”

राहुल हंसता और फिर से शुरू करता। आखिर में जब उसने लंड अंदर डाला तो प्रिया इतनी जोर से आई कि उसके पूरे शरीर में कंपन हो गया। राहुल ने उसके मुंह में लंड डालकर झड़ा। प्रिया ने पूरा निगल लिया।

एक और रात विक्रम देर से आने वाला था। राहुल ने प्रिया को बालकनी में ले जाया। रात के अंधेरे में। उसने प्रिया की साड़ी ऊपर की, पैंटी एक तरफ की और खड़े-खड़े चोदा। नीचे सड़क पर गाड़ियां गुजर रही थीं। प्रिया मुंह दबाए कराह रही थी। राहुल उसके बाल पकड़े हुए था। हर धक्के के साथ प्रिया की गांड उसकी जांघों से टकरा रही थी।

“अगर कोई देख ले तो?” प्रिया ने फुसफुसाया।
“तो देख ले। तुम मेरी हो।”
राहुल ने और जोर लगाया। प्रिया की टांगें कांपने लगीं। वह फिर से चरम पर पहुंच गई। राहुल ने अंदर ही वीर्य छोड़ दिया।

समय के साथ राहुल की मांगें बढ़ती गईं। उसने प्रिया को अपने दोस्तों के सामने नहीं, लेकिन फोन पर वीडियो कॉल पर नंगा होकर बैठने को कहा। प्रिया ने माना। राहुल ने उसे निर्देश दिए—स्तन दबाओ, चूत में उंगली डालो, गांड फैलाकर दिखाओ। प्रिया शरमाती, लेकिन करती।

एक दिन राहुल ने उसे अपने फ्लैट पर बुलाया। वहां उसने प्रिया को कुर्सी पर बैठाया, टांगें फैलाईं और घंटों तक टॉर्चर किया। आइस क्यूब से निप्पल, मोमबत्ती की मोम गांड पर, हल्के थप्पड़ चेहरे पर। प्रिया रो रही थी, लेकिन हर बार “और” कह रही थी। आखिर में राहुल ने उसे फर्श पर लिटाया, टांगें कंधों तक मोड़ीं और इतनी जोर से पेलने लगा कि प्रिया की आवाज घर के बाहर तक जा रही थी।

“चोदो… मारो… तोड़ो मुझे…”
राहुल ने गर्दन दबाई, स्तन काटे, गांड पर थप्पड़ मारे। जब वह झड़ा तो प्रिया की चूत से वीर्य बाहर निकल रहा था। उसने उंगलियों से उसे वापस अंदर धकेला।
“ये अंदर ही रहेगा। मेरा है।”

प्रिया अब पूरी तरह उसकी गुलाम बन चुकी थी। विक्रम के सामने वह सामान्य पत्नी बनी रहती, लेकिन राहुल के सामने वह कुछ भी करने को तैयार रहती। कभी वह खुद राहुल को फोन करके बुलाती।
“आज घर खाली है। आओ। आज तुम जो चाहो करो।”

और राहुल आता। कभी रस्सियों के साथ, कभी बेल्ट के साथ, कभी सिर्फ अपने हाथों और लंड के साथ। वह प्रिया को घंटों तक इस्तेमाल करता। कभी मुंह में, कभी चूत में, कभी गांड में। पहली बार जब उसने गांड में लंड डाला तो प्रिया चीख पड़ी। लेकिन राहुल रुका नहीं। धीरे-धीरे प्रिया की गांड भी लंड लेने लगी। राहुल दोनों छेद बारी-बारी इस्तेमाल करता।

एक लंबी रात में उसने प्रिया को तीन बार चोदा। पहली बार चूत में, दूसरी बार गांड में, तीसरी बार फिर चूत में। प्रिया थककर बेहोश सी हो गई थी। राहुल ने उसे नहलाया, फिर से बेड पर लिटाया और सुबह तक उसके शरीर को छूता रहा।

अब उनका रिश्ता सिर्फ शरीर का नहीं रह गया था। प्रिया राहुल के बिना नहीं रह पाती थी। और राहुल के लिए प्रिया सिर्फ भाभी नहीं, उसकी निजी संपत्ति बन चुकी थी। वह जब चाहे उसे ले सकता था। जहां चाहे। जैसे चाहे।
और प्रिया हर बार तैयार रहती। आंखों में वही भूख, शरीर में वही आग।

इंदौर की उन गरम रातों में, जब विक्रम ऑफिस में होता, राहुल और प्रिया के बीच जो होता, वह सिर्फ चुदाई नहीं था। वह कब्जा था। स्वामित्व था। और प्रिया खुद को पूरी तरह सौंप चुकी थी।
राहुल अब प्रिया को सिर्फ चोदता नहीं था। वह उसे तोड़ता था। एक रात विक्रम तीन दिन के टूर पर गया। राहुल ने प्रिया को अपने फ्लैट बुलाया। दरवाजा बंद होते ही उसने प्रिया के बाल पकड़कर घुटनों पर गिरा दिया।

“मुंह खोल।”
प्रिया ने मुंह खोला। राहुल ने अपना मोटा लंड गले तक ठूंस दिया। प्रिया की आंखों से पानी बहने लगा, लेकिन राहुल ने सिर पकड़कर और गहरा धकेला। लंड गले में धंस रहा था। प्रिया की सांस अटक रही थी। राहुल ने उसके गालों पर थप्पड़ मारे।
“निगल। पूरा निगल।”

वह बिना रुके मुंह चोदता रहा। जब वीर्य निकला तो उसने प्रिया के मुंह में ही झाड़ दिया और ठोड़ी पकड़कर मुंह बंद कराया।
“निगल। एक बूंद भी बाहर नहीं।”

प्रिया ने निगल लिया। आंखें लाल, लार टपकती हुई।
राहुल ने उसे बेड पर घसीटा। दोनों हाथ ऊपर करके हेडबोर्ड से रस्सी बांध दी। टांगें भी फैलाकर बांध दीं। प्रिया पूरी तरह फैली हुई, असहाय। राहुल ने बेल्ट निकाली। पहला थप्पड़ उसकी गांड पर पड़ा। जोर का। लाल निशान। दूसरा। तीसरा। प्रिया चीख रही थी।
“चुप। आवाज निकाली तो और मारूंगा।”

वह बेल्ट से उसकी गांड, जांघों और स्तनों पर मारता रहा। स्तन लाल हो गए, निप्पल सूज गए। फिर उसने मोमबत्ती जलाई। गर्म मोम प्रिया के निप्पलों पर टपकाया। प्रिया का शरीर ऐंठ गया।
“आह्ह्ह… जल रहा है…”

राहुल हंसा। मोम गांड की दरार में भी गिराया। फिर उसने आइस क्यूब निकाला और जली हुई जगहों पर रगड़ा। दर्द और ठंडक का मिश्रण प्रिया को पागल कर रहा था।

राहुल ने लंड फिर से निकाला। पहले चूत में एक झटके में घुसेड़ दिया। इतनी जोर से कि प्रिया की सांस रुक गई। वह बिना किसी दया के पेलने लगा। हर धक्के के साथ बेड चरमरा रहा था। उसने प्रिया के गले पर हाथ रख दिया और दबाया। प्रिया की आंखें फटी की फटी रह गईं, चेहरा लाल हो गया।

“मेरी संपत्ति हो तुम। समझी?”
प्रिया ने हां में गर्दन हिलाई। राहुल ने और जोर से दबाया। फिर छोड़ा। प्रिया जोर से सांस लेने लगी। राहुल ने लंड निकाला और गांड की तरफ घुमाया। थूक लगाकर एक झटके में गांड में धकेल दिया। प्रिया की चीख घर में गूंज गई।
“आआआह्ह्ह… फट रहा है…”

राहुल रुका नहीं। गांड को बेरहमी से चोदने लगा। एक हाथ से बाल पकड़े, दूसरे से स्तन मरोड़ रहा था। प्रिया रो रही थी, लेकिन उसकी चूत से पानी बह रहा था। राहुल ने देखा और हंसा।
“रोते हुए भी गीली हो रही है। कितनी वेश्या है तू।”

वह दोनों छेद बारी-बारी इस्तेमाल करता रहा। कभी चूत, कभी गांड। जब प्रिया चरम पर पहुंचने वाली होती, वह रुक जाता। प्रिया पागल होकर कमर उठाती।
“प्लीज… छोड़ो… पूरा करो…”

राहुल ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। फिर से पेलने लगा। आखिर में उसने प्रिया की गांड में ही झाड़ दिया। गर्म वीर्य अंदर भर गया। उसने लंड बाहर निकाला तो वीर्य गांड से बाहर निकलकर जांघों पर बहने लगा। राहुल ने उंगलियों से उसे वापस अंदर धकेला।
“ये अंदर ही रहेगा। मेरा निशान।”

उसने रस्सियां नहीं खोलीं। प्रिया को उसी हालत में छोड़ दिया। खुद फ्रिज से पानी लिया, पीया, और प्रिया के खुले शरीर को देखता रहा। आधे घंटे बाद वापस आया। प्रिया की आंखें सूजी हुई थीं, शरीर पर लाल निशान, वीर्य सूख रहा था।

राहुल ने फिर से लंड खड़ा किया। इस बार उसने प्रिया की चूत में तीन उंगलियां एक साथ घुसेड़ दीं और जोर-जोर से फैलाया। प्रिया कराह उठी। फिर लंड डाल दिया। अब वह और क्रूर हो चुका था। वह प्रिया के चेहरे पर थूकता, गालों पर थप्पड़ मारता, निप्पलों को दांतों से काटता। प्रिया की चूत सूज गई थी, लेकिन राहुल नहीं रुक रहा था।

रात भर वह उसे इस्तेमाल करता रहा। सुबह चार बजे जब उसने आखिरी बार झाड़ा तो प्रिया बेहोश जैसी पड़ी थी। राहुल ने रस्सियां खोलीं। प्रिया के हाथ-पैर सुन्न हो चुके थे। उसने उसे बाथरूम में घसीटा, शावर के नीचे खड़ा किया और खुद साबुन लगाकर नहलाया। उंगलियां फिर से चूत और गांड में घुमाईं, बाकी बचा वीर्य निकालने के बहाने।

“अब से हर हफ्ते ऐसे ही होगा। समझी?”
प्रिया ने थकी हुई आवाज में कहा, “हां… जैसा तुम कहो।”
राहुल ने उसके होंठों को काटते हुए चुंबन लिया। “अच्छी गुलाम है तू।”

अगले दिन जब विक्रम लौटा, प्रिया सामान्य पत्नी बनी हुई थी। लेकिन शरीर पर छिपे निशान और अंदर भरा राहुल का वीर्य उसे हर पल याद दिला रहा था कि वह अब सिर्फ विक्रम की बीवी नहीं, राहुल की निजी वेश्या और गुलाम बन चुकी है। और राहुल कभी भी, कहीं भी, जैसे चाहे उसे तोड़ने आ सकता था।

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