पति दूर था जब पुराना साथी घर में घुसा। रस्सी, चाबुक और बर्बर धक्कों ने उसकी देह को तोड़ दिया। दर्द में भी वो और मांगती रही। हर सांस में गुलामी और हर चोट में पागलपन भरा मिलन lustyweb chudai kahani ।
दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। उम्र अभी 42 साल हो चुकी है। मैं पुणे में रहता हूँ, एक छोटे से फ्लैट में। कद मेरा पाँच फुट दस इंच का है, शरीर मजबूत और मांसपेशियों वाला। देखने में साधारण हूँ पर बातचीत में लोगों को बाँध लेने वाला। मेरा लौंडा सात इंच लंबा और बेहद मोटा है, नसों से भरा हुआ, जिसे एक बार जो महिला छू लेती है वो बार-बार याद करती है।
यह कहानी पिछले साल की है। उस समय मैंने कई औरतों को चोदा था—भाभियाँ, आंटियाँ, पड़ोसनें—पर ये वाला वाकया सबसे क्रूर और भयंकर था। जिस औरत के साथ हुआ उसका नाम मीना था। वो कभी मेरे ऑफिस में काम करती थी, अब किसी और की बीवी बन चुकी थी इसलिए मैं उसे भाभी कहता हूँ। मीना की उम्र 36 साल थी, कद सवा पाँच फुट, शरीर 40-30-42 का। बूब्स भारी-भारी, निपल्स काले और मोटे, गांड गोल-गोल और चुत चिकनी-चिकनी। उसके पति दुबई में नौकरी करते थे और महीने में एक बार आते थे। दो बच्चे थे जो स्कूल जाते थे।
उस दिन मुझे पुणे से नासिक जाना था। सामान्यतः मैं ट्रेन से जाता हूँ पर उस दिन अचानक बस पकड़ने का मन हो गया। बस स्टैंड पर खड़ा था तभी पीछे से आवाज़ आई—“राहुल!” मुड़कर देखा तो मीना खड़ी थी। दस साल बाद मिल रहे थे। पहले साधारण लगती थी, अब उसके बूब्स इतने बड़े हो गए थे कि ब्लाउज फटने को तैयार था। फिगर ऐसा कि सड़क पर हर आदमी घूर रहा था।
हमने नंबर लिए और अलग हो गए। रात को ग्यारह बजे उसका मैसेज आया—“हैलो राहुल।” चैट शुरू हुई। बीस मिनट बाद उसने कॉल करने को कहा। स्कूल-कॉलेज की बातें, परिवार की बातें। उसने बताया कि पति दुबई में है, बच्चे सोने के बाद वो अकेली रहती है। मैंने बताया कि मेरी बीवी भी बच्चों को लेकर मायके गई है। रात एक बजे तक बात हुई।
सुबह गुलाब वाले गुड मॉर्निंग मैसेज आया। रात को फिर कॉल। बातें गंदी होने लगीं। पुराने अफेयर्स की चर्चा। मैं समझ गया कि ये भूखी है। मैंने कहा—“कल मूवी चलें?” उसने पहले मना किया फिर बोली—“बच्चों को सिस्टर के पास छोड़ दूँगी। ग्यारह बजे सिनेमा हॉल के बाहर मिलो।”
मेरा लौंडा तुरंत सख्त हो गया। मैंने नहाया, रेडी हुआ और हॉल पहुँच गया। मीना थोड़ी देर से आई। आँखों में ही सब बात हो गई। हॉल में अँधेरे में बैठे। दस मिनट बाद उसका हाथ मेरे जांघ पर आ गया। मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा। उसने सिर मेरे कंधे पर रख दिया। फिर मैंने सीधा हाथ उसके ब्लाउज के अंदर डाल दिया। भारी बूब्स को मसलने लगा। निपल्स पहले से ही सख्त थे। वो सिसकने लगी। उसका हाथ मेरे लौंडे पर आ गया। पैंट के ऊपर से ही आकार महसूस कर रही थी।
इंटरवल में बाहर आए। उसने कहा—“घर चलो। यहाँ चुदाई का मजा नहीं आएगा।” रास्ते में हमने एक-दूसरे को चूसा। उसके घर पहुँचे। दरवाजा बंद करते ही वो मेरे ऊपर झपटी। किस करते हुए बेडरूम में घसीट ले गई।
मैंने उसकी सलवार-कुर्ती फाड़ दी। ब्रा-पैंटी में खड़ी थी। ब्रा खोलते ही बूब्स बाहर निकल आए। मैंने दोनों को मुँह में भर लिया और जोर से चूसने लगा। दाँतों से निपल्स काटने लगा। वो चीखने लगी—“आह… राहुल… जोर से… और जोर से काटो!” मैंने एक निपल को दाँतों के बीच दबाया और खींचा। दर्द से उसकी आँखों में पानी आ गया पर वो मुस्कुरा रही थी।
फिर उसने मुझे नंगा किया। सात इंच का मोटा लौंडा देखकर उसकी आँखें फैल गईं। “इतना मोटा… पति का तो आधा भी नहीं है।” वो घुटनों के बल बैठ गई और लौंडे को मुँह में ठूंस लिया। गले तक ले जा रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और जोर-जोर से मुँह चोदने लगा। थूक बह रहा था, आँखों से आँसू। मैंने गहराई तक धकेला। वो दम घुटने लगी पर मैंने छोड़ा नहीं। पाँच मिनट बाद मुँह से निकाला तो वो खाँस रही थी।
मैंने उसे बिस्तर पर धकेला। पैंटी फाड़ दी। चुत पहले से गीली थी, पानी चमक रहा था। मैंने 69 पोजीशन में ले लिया। उसकी चुत चाटने लगा। जीभ अंदर डालकर घुमाया। क्लिट को दाँतों से काटा। वो मेरे लौंडे को चूस रही थी और “आह… मेरी चुत प्यासी है… पति ने कभी नहीं चाटा” चिल्ला रही थी।
फिर मैंने उसे चारपाई पर पेट के बल लिटाया। हाथ पीछे बाँध दिए रूमाल से। पैर फैलाए। लौंडा चुत के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्के में आधा अंदर घुसेड़ दिया। मीना चीखी—“आह… फट गई… बहुत मोटा है!” मैंने और धक्के मारे। पूरा लौंडा अंदर चला गया। उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर उठाया और जानवरों की तरह चोदने लगा। हर धक्के में उसके बूब्स चारपाई से टकरा रहे थे।
पंद्रह मिनट तक लगातार पीटा। वो दो बार झड़ चुकी थी पर मैं रुका नहीं। फिर मैंने लौंडा निकाला और गांड के छेद पर रखा। “नहीं… वहाँ मत डालो… दर्द होगा!” वो रोने लगी। मैंने थूक लगाकर धीरे-धीरे धकेला। गांड फटती हुई आवाज आई। पूरा लौंडा अंदर चला गया। मीना चीख रही थी—“मार डालोगे… आह… निकलवाओ!” मैंने उसके बाल पकड़े और जोर-जोर से गांड चोदने लगा। हर धक्के में उसकी चीखें गूंज रही थीं। मैंने एक हाथ से उसकी गर्दन दबाई। साँस रुकने लगी। चेहरा लाल हो गया। मैंने और जोर से दबाया। आँखें फटी हुई थीं। फिर छोड़ दिया। वो हाँफ रही थी।
मैंने उसे उलटा किया। हाथ अभी भी बँधे थे। लौंडा फिर चुत में ठोक दिया। अब मैंने उसके गले पर हाथ रखा और दबाते हुए चोदने लगा। “तेरी चुत मेरी है… समझी?” वो सिर हिला रही थी। मैंने थप्पड़ मारा उसके गाल पर। फिर दूसरा। गाल लाल हो गए। निपल्स को मोड़ा, खींचा। दर्द से वो सिसक रही थी पर चुत और ज्यादा गीली हो रही थी।
चार बार मैंने उसे चोदा उस दिन। एक बार चुत में, दो बार गांड में, एक बार मुँह में। आखिरी बार मैंने उसके मुँह में झड़ा। पूरा वीर्य निगलने को मजबूर किया। जो बचा वो उसके चेहरे पर मल दिया। बूब्स पर भी। वो थककर बिस्तर पर लेटी हुई थी। शरीर पर निशान, गाल लाल, चुत और गांड सूजी हुई।
मैंने उसके बँधे हाथ खोले। वो मेरे पास आकर लेट गई। बोली—“आज तक किसी ने इतना बर्बर तरीके से नहीं चोदा… पति तो सिर्फ दस मिनट में खत्म हो जाता है। तुमने मुझे तोड़ दिया।” मैंने उसके बूब्स मसले और कहा—“अगली बार और ज्यादा बर्बर होगा। रस्सी लाऊँगा, चाबुक लाऊँगा।”
उसके बाद हर महीने जब पति बाहर रहता और बच्चे सिस्टर के पास होते, मीना मेरे पास आती। कभी मैं उसके घर जाता। हर बार नई यातना। कभी मैंने उसके निपल्स पर क्लिप लगाई, कभी चुत में बर्फ डाली फिर लौंडा। कभी उसे कुत्ते की तरह रेंगने को मजबूर किया। कभी उसके मुँह में अपना मोजा ठूंसकर चोदा ताकि चीख न सके।
एक बार मैंने उसके दोनों हाथ और पैर चारपाई से बाँध दिए। आँखों पर पट्टी बाँधी। फिर लौंडा बारी-बारी चुत और गांड में डालने लगा। बीच-बीच में थप्पड़, चुटकी, दाँत। तीन घंटे तक लगातार। वो कई बार बेहोश होने वाली थी। जब छोड़ा तो उसका शरीर काँप रहा था। चुत से खून की हल्की लकीरें निकल रही थीं। गांड पूरी लाल और सूजी हुई।
मीना अब मेरी गुलाम बन चुकी थी। जब भी मिलती, घुटनों के बल बैठकर लौंडा चूसती। “मालिक… आज कैसे सताओगे?” पूछती। मैंने एक बार उसके गले में चमड़े का पट्टा बाँधा और घर में घुमाया। कुत्ते की तरह। फिर फर्श पर चोदा।
मीना मेरे पैरों पर सिर रखकर लेटी हुई थी। उसके बाल मेरे हाथ में थे। मैंने जोर से खींचा। उसका चेहरा मेरे घुटने से टकराया। आँखों में दर्द था पर होंठ मुस्कुरा रहे थे।
“राहुल… अगली बार और ज्यादा क्रूर होना। मुझे तोड़ दो पूरी तरह।”
मैंने उसके बाल और कसकर पकड़े। “अभी तो शुरुआत है। आज रात तू घर नहीं जाएगी। बच्चे सिस्टर के पास हैं ना?”
उसने सिर हिलाया। “हाँ… पूरी रात।”
मैंने उसे उठाया और बेडरूम के कोने में खड़े लोहे के अलमारी के हैंडल से उसके दोनों हाथ बाँध दिए। रस्सी इतनी कस दी कि उसकी कलाईयाँ तुरंत लाल हो गईं। पैर फैलाकर टखनों को भी बाँध दिया। वो पूरी तरह फैली हुई खड़ी थी। बूब्स आगे निकले हुए, निपल्स अभी भी काटे हुए और सूजे हुए।
मैंने अपनी बेल्ट निकाली। चमड़े की मोटी बेल्ट। पहली चोट उसकी जांघ पर पड़ी। तेज आवाज। लाल निशान उभर आया। मीना ने दाँत भींचे। दूसरी चोट दूसरी जांघ पर। तीसरी सीधे चुत के ऊपर। वो चीखी। चौथी गांड पर। पाँचवी फिर गांड पर। हर चोट के बाद मैं उसके गाल पर थप्पड़ मारता।
“गिनती कर,” मैंने हुक्म दिया।
“एक… दो… तीन…” वो काँपती आवाज में गिनने लगी। बीस चोटें लगाईं। उसकी जांघें, गांड और पीठ लाल हो चुकी थीं। कुछ जगहों पर हल्की खरोंचें भी आ गई थीं।
फिर मैंने फ्रिज से बर्फ की ट्रे निकाली। एक-एक बर्फ का टुकड़ा उसके निपल्स पर रगड़ा। ठंडक से वो काँपने लगी। बर्फ पिघलकर उसके बूब्स से बह रहा था। मैंने बर्फ का एक टुकड़ा उसकी चुत में ठूंस दिया। दूसरा गांड में। ठंड से उसकी चीखें गूंज उठीं।
“अब गरम करूँगा,” मैंने कहा।
मैंने लाइटर जलाया। मोमबत्ती जलाई। पिघला हुआ मोम पहले उसके बाएँ निपल पर गिराया। मीना जोर से चिल्लाई। मोम सख्त होते ही निपल पर सफेद परत जम गई। दाएँ निपल पर भी। फिर चुत के ऊपर। मोम गिरते ही वो शरीर ऐंठने लगी। हाथ-पैर बाँधे होने के कारण हिल नहीं पा रही थी। सिर्फ चीख सकती थी।
मैंने मोम को ठंडा होने दिया फिर उंगली से खुरचकर हटाया। निपल्स और ज्यादा लाल और संवेदनशील हो चुके थे। मैंने उन्हें दाँतों से काटा। खून की एक बूंद निकली। मैंने चाट लिया।
अब लौंडा पूरी तरह सख्त था। मैंने उसके मुँह में ठूंस दिया। गले तक। वो दम घोंटने लगी। आँखों से आँसू बह रहे थे। मैंने बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदा। थूक उसके गले से बाहर निकल रहा था। दस मिनट तक लगातार। जब निकाला तो वो हाँफ रही थी, लार उसके पूरे चेहरे पर फैली हुई।
मैंने रस्सी खोली। वो फर्श पर गिर पड़ी। मैंने उसे बालों से उठाया और चारपाई पर घसीटा। पेट के बल लिटाया। हाथ पीछे बाँधे। पैर फैलाए। लौंडा उसकी गांड के छेद पर रखा। कोई तेल नहीं, कोई थूक नहीं। सिर्फ जबरदस्ती।
एक जोरदार धक्के में आधा लौंडा अंदर घुस गया। मीना की चीख इतनी तेज थी कि दीवारें गूंज उठीं। “आह… फट गई… निकालो… प्लीज…”
मैंने और धक्का मारा। पूरा सात इंच अंदर चला गया। गांड फटती हुई आवाज आ रही थी। मैंने उसके कंधे दबाए और जानवरों की तरह पीटना शुरू कर दिया। हर धक्के में उसकी चीखें बदल रही थीं—दर्द से मजे में, मजे से फिर दर्द में।
बीस मिनट तक लगातार गांड चोदी। बीच में दो बार रुका, लौंडा निकाला, थप्पड़ मारे, फिर से घुसेड़ दिया। उसकी गांड पूरी तरह लाल और सूज चुकी थी। खून की हल्की धार भी बह रही थी।
फिर मैंने उसे उलटा किया। आँखों पर काला कपड़ा बाँधा। मुँह में अपना अंडरवियर ठूंस दिया ताकि चीख न सके। हाथ-पैर फिर से बाँधे। अब मैंने चुत में लौंडा डाला। गीली थी पर सूजन की वजह से तंग। मैंने पूरा जोर लगाया। उसके पेट पर हाथ रखकर दबाते हुए चोदने लगा।
एक हाथ से उसके गले को दबाया। साँस रुकने लगी। चेहरा नीला पड़ने लगा। मैंने और जोर से दबाया। दस सेकंड… बीस सेकंड… फिर छोड़ दिया। वो अंदर ही अंदर हाँफ रही थी। अंडरवियर के कारण आवाज नहीं निकल रही थी।
मैंने ये खेल तीन बार दोहराया। हर बार गला दबाकर साँस रोकी, फिर छोड़ी, फिर और जोर से चोदा। उसकी चुत से पानी की जगह गाढ़ा रस बह रहा था। दो बार वो झड़ी। शरीर ऐंठ रहा था।
अब मैंने एक नया सामान निकाला। घर में रखी हुई पतली रस्सी। उसके दोनों निपल्स को रस्सी से बाँधा और कसकर खींचा। निपल्स ऊपर उठ गए। दर्द से वो काँप रही थी। फिर उसी रस्सी को उसके क्लिट से भी बाँधा। हर बार जब मैं धक्का मारता, रस्सी खिंचती और निपल्स व क्लिट पर दर्द होता।
मैंने एक घंटे तक ऐसे ही चोदा। कभी चुत, कभी गांड, कभी दोनों में बारी-बारी। बीच-बीच में बेल्ट से मारता। कभी मोम गिराता। कभी बर्फ रगड़ता।
जब मेरा पहला जलन निकला तो मैंने उसका मुँह खोला और पूरा वीर्य उसके गले में उतार दिया। निगलने को मजबूर किया। जो बाहर निकला उसे उसके चेहरे पर मल दिया।
पर मैं रुका नहीं। दस मिनट आराम किया। लौंडा फिर सख्त हो गया। अब मैंने उसे कुत्ते की पोजीशन में किया। गर्दन में चमड़े का पट्टा बाँधा। पट्टा पकड़कर खींचते हुए चोदने लगा। हर धक्के के साथ पट्टा कसता। उसकी साँस फूल रही थी।
“तू मेरी कुतिया है,” मैंने कहा। “भोंक।”
उसने अंडरवियर के बावजूद आवाज निकाली। मैंने और जोर से खींचा। “जोर से भोंक।”
वो भोंकने लगी। असली कुत्ते की तरह। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदा। पसीना दोनों के शरीर से बह रहा था। कमरा सेक्स और दर्द की गंध से भर चुका था।
रात के तीन बज गए थे। मैंने उसे चारपाई से खोला। वो अपने आप खड़ी नहीं हो सकती थी। पैर काँप रहे थे। चुत और गांड दोनों से रस और खून मिला हुआ बह रहा था। शरीर पर बेल्ट के निशान, मोम के धब्बे, रस्सी के निशान।
मैंने उसे बाथরুম में घसीटा। ठंडे पानी से नहलाया। पानी के नीचे ही फिर से चोदा। दीवार से सटाकर। उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। आईने में उसका चेहरा दिख रहा था—आँसू, लार, वीर्य सब मिला हुआ।
सुबह चार बजे मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसके बूब्स पर सिर रखकर लेट गया। वो फुसफुसाई—“राहुल… तुमने सच में तोड़ दिया… पर मुझे और चाहिए… अगली बार चाबुक लाना… और लोहे की चेन…”
मैंने उसके निपल को मरोड़ा। “अगली बार तुझे छत से लटकाऊँगा। घंटों। और तेरी चुत में इतना बड़ा खीरा ठूसूँगा कि तू चल न पाए।”
उसने मेरा लौंडा हाथ में लिया। अभी भी आधा सख्त था। धीरे-धीरे सहलाने लगी। “मैं तैयार हूँ… पूरी तरह तोड़ दो मुझे… मैं तुम्हारी गुलाम हूँ… हमेशा के लिए।”
मैंने आँखें बंद कीं। बाहर सूरज निकलने वाला था। मीना मेरे सीने से चिपक गई। उसके शरीर के हर हिस्से में दर्द था, पर उसकी चुत फिर से गीली हो रही थी।
कुछ देर बाद मैंने फिर से उसे दबाया। इस बार धीरे नहीं। सुबह के उजाले में उसकी गांड को फैलाया और लौंडा फिर से अंदर धकेला। वो सिसक रही थी। “आह… अभी भी दर्द है… पर मत रुको…”
मैंने नहीं रुका। सूरज पूरी तरह निकल आने तक मैंने उसे दो बार और चोदा। एक बार चुत में, एक बार गांड में। आखिरी बार उसका चेहरा मेरे लौंडे से सटाकर रखा और पूरा वीर्य उसके बालों में और माथे पर छोड़ दिया।
जब मैं उठा तो वो सो रही थी। शरीर पर मेरे बनाए हुए निशान चमक रहे थे। मैंने उसके गाल पर थप्पड़ मारा। वो जाग गई।
“अब उठ। नहा। और याद रख—तू सिर्फ मेरी है। पति के आने तक तेरी चुत और गांड दोनों सूजी रहेंगी। हर कदम पर तुझे मेरी याद आएगी।”
मीना ने मेरे पैर छुए। “हाँ मालिक… हमेशा।”
मैं मुस्कुराया। बाहर निकलते हुए दरवाजे पर खड़ा हुआ और आखिरी बार मुड़कर देखा। वो अभी भी फर्श पर बैठी थी, मेरे वीर्य को अपने चेहरे से पोंछते हुए चाट रही थी।
और ये सिलसिला थमने वाला नहीं था। अगली मुलाकात में और ज्यादा अंधेरा होने वाला था। चाबुक, चेन, मोम, सुई… सब तैयार था। मीना की चीखें अभी सिर्फ शुरुआत थीं।
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