अकेली विधवा और उसकी देवरानी ने जवान पड़ोसी को जंजीरों में जकड़कर रात-दिन अपने शरीर की आग बुझाने का क्रूर खेल खेला। दर्द, चीख और पागल इच्छाओं से भरी वो रातें कभी खत्म न होने वाली भूख जगा गईं lusty hindi sex stories ।
रात के ग्यारह बज रहे थे। शहर के बाहरी इलाके में, पुरानी रेलवे कॉलोनी की एक अंधेरी गली में, तीन मंजिला मकान का पहला फ्लोर रोशन था। वहाँ रहती थी मीनाक्षी। उम्र 38 साल, लंबाई 5 फीट 6 इंच, गोरी चमड़ी पर हल्की गेहुँई चमक। छाती 40 इंच की भारी-भरकम, कमर 30, कूल्हे 44। जाँघें मोटी और सख्त, गांड गोल और उठान वाली। बाल काले लंबे, आँखें तीखी। पति की मौत के तीन साल हो चुके थे। घर में सिर्फ उसकी 20 साल की देवरानी काजल रहती थी—पतली, गोरी, छाती 34, कमर 26, कूल्हे 36। दोनों औरतें अकेली थीं, और दोनों की भूख दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी।
पड़ोस के मकान में रहता था अर्जुन। उम्र 21। लंबा, दुबला-पतला लेकिन मजबूत शरीर। कंधे चौड़े, कमर पतली। लंड 9 इंच का मोटा, नसों से भरा, झाँट घने। वह रोज शाम को किराने की दुकान पर आता था जो मीनाक्षी के घर के नीचे ही थी। दुकान छोटी थी—आटा, तेल, साबुन। मीनाक्षी वहाँ बैठा करती थी।
उस शाम अर्जुन दुकान पर पहुँचा। मीनाक्षी ने उसकी पैंट में उभार देखा। उसने जानबूझकर झुककर सामान निकाला। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया। ब्लाउज के ऊपर से आधा स्तन बाहर निकल आया—गोरा, भूरा निप्पल। अर्जुन की नजर अटक गई। लंड तुरंत खड़ा हो गया, पैंट में तंबू सा तान गया।
मीनाक्षी ने देखा। उसकी साँसें भारी हो गईं। उसने होंठ काटे। काजल भी वहाँ थी। उसने दीदी की तरफ देखा और मुस्कुराई।
“दीदी… आज फिर वही हालत?” काजल ने धीरे से पूछा।
मीनाक्षी ने आँखें बंद करके कहा, “हाँ। तीन साल से सूखी पड़ी हूँ। आज इसका लंड देखकर चूत में आग लग गई है। इतना मोटा… इतना लंबा… मुझे फाड़ना चाहता है।”
काजल ने अर्जुन की तरफ देखा। “ये रोज आता है। कल रात मैंने देखा था—ये अपनी छत पर मुठ मार रहा था। लंड इतना सख्त था कि हाथ से मुश्किल से पकड़ पा रहा था।”
मीनाक्षी की आँखों में हवस चमक उठी। उसने अर्जुन को इशारा किया। “अंदर आ। सामान बाद में ले जाना।”
अर्जुन अंदर गया। दरवाजा बंद हुआ। मीनाक्षी ने साड़ी उतार दी। सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट। फिर ब्लाउज के हुक खोले। दोनों स्तन बाहर झूल गए—भारी, गोल, निप्पल कड़े। उसने पेटीकोट भी गिरा दिया। पूरी नंगी खड़ी हो गई। झाँट साफ मुंडे हुए, चूत की फाँक मोटी और गुलाबी।
“देख,” उसने कहा, “तीन साल से किसी ने नहीं छुआ। आज तू फाड़ेगा।”
अर्जुन की साँसें फूल गईं। मीनाक्षी ने उसके पास आकर पैंट का बटन खोला। लंड बाहर निकल आया—मोटा, नसों वाला, मुँह पर पहले से ही पानी चमक रहा था। उसने झुककर लंड को मुँह में ले लिया। गला तक धकेल दिया। आवाज आई—घुर्र… घुर्र…। वह चूसने लगी जैसे भूखी हो। लार टपकने लगी। काजल भी नंगी हो गई। उसने मीनाक्षी की गांड पर थप्पड़ मारा—पटाक! पटाक!
“दीदी की गांड लाल कर दो,” काजल बोली।
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मीनाक्षी ने लंड मुँह से निकाला। “बेडरूम में चल।”
बेडरूम में बड़ी चारपाई थी। दीवार पर लोहे की कड़ियाँ लगी थीं—पुरानी, जंग लगी। मीनाक्षी ने अर्जुन को चारपाई पर लिटाया। उसके दोनों हाथ कड़ियों से बाँध दिए। फिर पैर भी। अर्जुन पूरी तरह बेबस। मीनाक्षी ने तेल की बोतल निकाली। गर्म तेल। उसने अर्जुन के लंड पर डाल दिया। फिर अपनी चूत में उँगलियाँ डालकर गीला किया।
“अब चट,” उसने कहा और अर्जुन के मुँह पर बैठ गई। चूत उसके होंठों पर दब गई। “चाट। जोर से। दाँत लगा। चूस।”
अर्जुन ने जीभ अंदर घुसाई। मीनाक्षी कराह उठी। “आааह… और गहरा… अपनी जीभ से मेरी चूत फाड़ दे।” काजल ने अर्जुन के लंड को मुँह में लिया और गले तक धकेलने लगी। दोनों औरतें एक साथ। मीनाक्षी ने अर्जुन के बाल पकड़कर अपने कूल्हे जोर-जोर से उसके मुँह पर रगड़ने शुरू कर दिए। चूत का पानी उसके चेहरे पर बहने लगा।
“अब नीचे,” मीनाक्षी बोली। वह उठी और अर्जुन के लंड पर बैठ गई। एक झटके में पूरा लंड अंदर चला गया। चूत की दीवारें फैल गईं। मीनाक्षी चीखी, “आह्ह्ह… फट गई… मोटा है बहुत…” फिर वह ऊपर-नीचे होने लगी। जोर-जोर से। थप्पड़ की आवाज—चाटाक! चाटाक! उसके भारी स्तन उछल-उछल रहे थे। काजल ने मीनाक्षी के स्तन पकड़कर निचोड़ने शुरू कर दिए। निप्पल को दाँतों से काटा।
मीनाक्षी ने अर्जुन के गले पर हाथ रखा और दबाया। “साँस मत ले। मेरी चूत में ही मर।” वह और तेज बैठने लगी। लंड हर बार गर्भ तक जा रहा था। आवाजें—थप-थप-थप… पानी की आवाज… चूत का रस चारपाई पर गिर रहा था।
काजल ने चाबुक निकाला—चमड़े का पतला। उसने मीनाक्षी की पीठ पर मारना शुरू किया। पटाक! पटाक! लाल निशान पड़ गए। मीनाक्षी और पागल हो गई। “और मार… और जोर से… मेरी गांड पर भी…” काजल ने गांड पर कई जोरदार थप्पड़ मारे। गांड लाल हो गई।
फिर मीनाक्षी उठी। उसने अर्जुन के हाथ-पैर खोले। “अब तू मार। जितना क्रूर हो सके।”
अर्जुन उठा। उसने मीनाक्षी को चारपाई पर पेट के बल लिटाया। उसके दोनों हाथ पीछे बाँध दिए। फिर गांड के दोनों गोल हिस्सों को फैलाया। चूत और गांड दोनों खुले। उसने पहले चूत में लंड घुसाया—जोरदार धक्का। पूरा। फिर निकाला और गांड के छेद पर रखा।
“इसे मत डाल…” मीनाक्षी बोली, लेकिन आवाज में मना करने का भाव नहीं था।
अर्जुन ने एक ही झटके में आधा लंड गांड में धकेल दिया। मीनाक्षी चीख पड़ी—“आआआह्ह्ह… फट गई… निकाल… नहीं… और अंदर…” अर्जुन ने बाकी आधा भी घुसा दिया। पूरा लंड गांड में। फिर धक्के शुरू किए। क्रूर। तेज। हर धक्के पर मीनाक्षी की चीख। काजल ने मीनाक्षी के मुँह में अपना हाथ ठूँस दिया ताकि आवाज बाहर न जाए।
अर्जुन ने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “तेरी गांड मेरी है। आज रात पूरी फाड़ दूँगा।” वह और जोर से मारने लगा। गांड का छेद फैल गया, खून की हल्की धार भी निकली, लेकिन मीनाक्षी पीछे की तरफ खुद धक्के देने लगी। “और जोर… फाड़ दे… मुझे कुतिया बना दे…”
काजल ने चाबुक से अर्जुन की पीठ पर भी मारा। “इसे और सख्त मार। इसकी गांड में वीर्य भर दे।”
अर्जुन ने आखिरी जोरदार धक्कों के साथ गांड में ही झड़ दिया। गरम वीर्य की धार अंदर बहने लगी। मीनाक्षी काँप रही थी। वह कराहते हुए बोली, “अब चूत में भी… खाली मत छोड़…”
अर्जुन ने लंड निकाला। गांड से वीर्य रिस रहा था। उसने मीनाक्षी को पलटा। पैर कंधों तक मोड़ दिए। चूत पूरी खुली। फिर पूरा लंड एक झटके में चूत में। धक्के इतने जोरदार कि चारपाई चरमरा रही थी। काजल ने मीनाक्षी के स्तन निचोड़-निचोड़कर दूध जैसा पानी निकालने की कोशिश की। निप्पल काट लिए।
मीनाक्षी पागल हो गई थी। “मार… और मार… मेरी चूत फाड़ दे… मुझे गर्भवती बना… अपना वीर्य गर्भ में डाल…” अर्जुन ने गले दबाया। साँस रुकने लगी। चूत और भी कस गई। फिर दोनों एक साथ झड़े। अर्जुन का वीर्य इतना निकला कि चूत से बाहर बहने लगा।
लेकिन खत्म नहीं हुआ।
काजल बोली, “अब मेरी बारी।”
अर्जुन ने काजल को उठाया और दीवार से सटा दिया। उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे। खड़े-खड़े चूत में लंड घुसाया। काजल पतली थी। लंड आसानी से गर्भ तक पहुँच गया। अर्जुन ने उसके गले पर दाँत गड़ा दिए और काट लिया। खून निकला। काजल चीखी लेकिन मजे से। “और काट… मुझे अपना निशान बना…”
मीनाक्षी ने चाबुक उठाया और काजल की पीठ और गांड पर मारने लगी। लाल निशान। अर्जुन धक्के दे रहा था। हर धक्के पर काजल की छाती दीवार से टकरा रही थी। स्तन दब रहे थे।
फिर तीनों फर्श पर गिर गए। अर्जुन ने काजल को घोड़ी बनाई। पीछे से चूत में लंड। मीनाक्षी ने काजल के मुँह में अपनी चूत दबा दी। “चाट मेरी चूत… जो अभी-अभी चुदी है…” काजल जीभ से चाटने लगी। अर्जुन ने काजल की गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे—पटाक! पटाक! गांड लाल। फिर गांड में भी लंड घुसा दिया। काजल चीखते हुए चूत और गांड दोनों में मारी जा रही थी।
रात भर यही चलता रहा। अर्जुन कभी मीनाक्षी की चूत फाड़ता, कभी काजल की गांड। कभी दोनों को एक साथ चाबुक से मारता। कभी उनके बाल पकड़कर मुँह में लंड ठूँसता। दोनों औरतें बारी-बारी से उसके पैर चूमतीं, लंड चाटतीं, वीर्य पीतीं।
सुबह के पाँच बज चुके थे। कमरे में अभी भी गंध फैली हुई थी—वीर्य की, पसीने की, चूत के पानी की और हल्के खून की। अर्जुन चारपाई पर बेहोश सा लेटा था। उसका लंड अभी भी आधा खड़ा था, ऊपर सफेद झाग जमा हुआ।
मीनाक्षी और काजल फर्श पर एक-दूसरे से लिपटी पड़ी थीं। दोनों के शरीर पर चाबुक के लाल-लाल निशान, गर्दन पर दाँत के निशान, जाँघों पर उंगलियों के नीले निशान। उनकी चूत और गांड अभी भी खुली हुई थीं, वीर्य रिसता हुआ।
मीनाक्षी सबसे पहले उठी। उसकी आँखों में अभी भी वही पागल हवस थी। उसने अर्जुन के बाल पकड़कर उसके मुँह के पास अपना चेहरा लाया।
“उठ। अभी नींद का समय नहीं। सूरज निकला है, लेकिन हमारी भूख नहीं मिटी।”
अर्जुन की आँखें खुलीं। मीनाक्षी ने उसके लंड को मुट्ठी में दबाया और जोर से निचोड़ा। दर्द से अर्जुन कराह उठा।
“आह्ह… छोड़…”
“छोड़ूँगी नहीं।” मीनाक्षी ने कहा और उसके लंड पर थूक दिया। फिर मुँह में ले लिया। दाँतों से हल्के-हल्के काटने लगी। काजल भी जाग गई। उसने दीवार से लोहे की जंजीर उतारी—मोटी, भारी। दोनों औरतों ने मिलकर अर्जुन को फिर से चारपाई पर लिटाया। इस बार सिर्फ हाथ नहीं, गर्दन भी जंजीर से बाँध दी। गर्दन इतनी कस दी कि साँस लेते समय घरघराहट होने लगी।
काजल ने तेल की बोतल गरम पानी में डुबोई। फिर अर्जुन के पूरे शरीर पर उंडेल दी। तेल गर्म था। त्वचा जलने लगी। अर्जुन तड़पने लगा, लेकिन जंजीरों ने उसे जकड़ रखा था।
मीनाक्षी ने चाबुक उठाया। इस बार वह पतला नहीं था। मोटा चमड़े का चाबुक, जिसके सिरे पर लोहे के छोटे काँटे लगे थे। उसने अर्जुन की छाती पर पहला वार किया। पटाक! त्वचा फट गई। खून की पतली रेखा निकली। अर्जुन चीखा।
“चुप!” मीनाक्षी ने उसके मुँह में अपना अंडरवियर ठूँस दिया। “आवाज निकाली तो और मारूँगी।”
फिर लगातार वार शुरू हो गए। छाती, पेट, जाँघें, यहाँ तक कि लंड पर भी। लंड पर चाबुक लगते ही अर्जुन का शरीर ऐंठ गया। लेकिन लंड और सख्त हो गया। दर्द और मजे का मिश्रण। काजल ने अर्जुन के अंडकोष पकड़कर जोर से दबाए। नाखून गड़ा दिए।
“इनमें वीर्य भरा है,” काजल बोली, “आज पूरा खाली करवाएँगे।”
मीनाक्षी ने चाबुक नीचे रखा। उसने अर्जुन के पैर फैलाए। उसकी गांड के छेद में पहले एक उंगली डाली, फिर दो, फिर तीन। तेल लगाकर पूरी मुट्ठी अंदर धकेलने की कोशिश की। अर्जुन की आँखें फटी की फटी रह गईं। दर्द इतना तेज था कि वह जंजीरें तोड़ने की कोशिश करने लगा। लेकिन जंजीरें नहीं टूटीं।
“आराम से अंदर ले,” मीनाक्षी ने कहा, “आज तेरी गांड भी हमारी गुलाम बनेगी।”
फिर उसने खुद को अर्जुन के मुँह पर बैठाया। चूत उसके नाक और मुँह दोनों को ढक रही थी। “साँस ले… मेरी चूत से। नहीं तो मर जा।” अर्जुन हांफ रहा था। उसकी जीभ मजबूरी में चूत चाटने लगी। मीनाक्षी ने उसके बाल पकड़कर और जोर से दबाया। चूत का पानी उसके गले में जा रहा था।
काजल ने इधर अर्जुन के लंड पर बैठ गई। लेकिन सामान्य तरीके से नहीं। उसने लंड को अपनी गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे पूरा अंदर ले लिया। दर्द से उसकी आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन वह मुस्कुरा रही थी।
“दीदी… ये मोटा लंड मेरी गांड फाड़ रहा है…”
दोनों औरतें एक साथ हिलने लगीं। मीनाक्षी अर्जुन के मुँह पर, काजल उसके लंड पर। कमरे में सिर्फ गीली आवाजें और जंजीरों की खनखनाहट गूंज रही थी।
एक घंटे बाद मीनाक्षी उठी। उसने अर्जुन की जंजीरें खोलीं, लेकिन सिर्फ इसलिए कि उसे फर्श पर घसीट सके। उसने अर्जुन को बेडरूम से बाहर बालकनी की तरफ खींचा। बालकनी छोटी थी, नीचे गली दिख रही थी। सुबह का समय था, लोग जागने वाले थे।
“यहाँ खड़ा रह,” मीनाक्षी ने आदेश दिया। अर्जुन नंगा खड़ा था। उसका शरीर चाबुक के निशानों से भरा हुआ। लंड अभी भी तना हुआ। काजल ने उसके पीछे से आकर दोनों हाथ पीछे बाँध दिए। फिर उसकी आँखों पर काला कपड़ा बाँध दिया।
मीनाक्षी ने नीचे की तरफ इशारा किया। “देख… गली में कोई आ गया तो तेरी हालत और खराब होगी। लेकिन तू चिल्ला नहीं पाएगा।”
उसने अर्जुन के मुँह में फिर से कपड़ा ठूँस दिया। फिर दोनों औरतें उसके सामने घुटनों के बल बैठ गईं। बारी-बारी से उसके लंड को मुँह में लेने लगीं। दाँत लगा-लगाकर चूसने लगीं। कभी अंडकोष मुँह में लेकर जोर से चूसतीं, कभी लंड के सिरे को दाँतों से काटतीं। अर्जुन दर्द से काँप रहा था, लेकिन लंड और सख्त होता जा रहा था।
तभी गली में किसी के कदमों की आवाज आई। दूध वाला।
मीनाक्षी ने फुसफुसाकर कहा, “अब शांत। अगर आवाज निकाली तो दोनों को पकड़वा दूँगी।”
दूध वाले ने ऊपर देखा, लेकिन बालकनी अंधेरी थी। वह चला गया। जैसे ही उसकी आवाज दूर हुई, मीनाक्षी ने अर्जुन को वापस कमरे में घसीटा।
अब असली खेल शुरू हुआ।
मीनाक्षी ने अलमारी से मोटी रस्सी निकाली। अर्जुन के दोनों हाथों को सिर के ऊपर बाँधा। फिर पैरों को भी फैलाकर बाँधा। शरीर पूरा खिंचा हुआ। उसने गर्म मोमबत्ती जलाई। मोम की बूँदें अर्जुन की छाती पर गिराने लगीं। हर बूँद पर त्वचा जलती। अर्जुन तड़प रहा था। काजल ने नीचे से उसके अंडकोष पकड़ रखे थे और हल्के-हल्के नोंच रही थी।
“बोल,” मीनाक्षी ने कहा, “तू हमारी क्या चीज है?”
अर्जुन ने कपड़ा मुँह से निकालते हुए कहा, “गु… गुलाम…”
“जोर से बोल।”
“मैं आपकी गुलाम हूँ… मेरी चूत… मेरी गांड… मेरा लंड… सब आपका है…”
मीनाक्षी मुस्कुराई। उसने मोमबत्ती नीचे रखी और चाबुक फिर से उठाया। इस बार वार सिर्फ लंड और अंडकोष पर। हर वार पर अर्जुन की चीख। लेकिन हर चीख के साथ लंड और तन जाता।
काजल ने एक कांच की बोतल निकाली। मोटी गर्दन वाली। उसने उस पर तेल लगाया और अर्जुन की गांड में धीरे-धीरे धकेलने लगी। बोतल का आधा हिस्सा अंदर चला गया। अर्जुन की आँखें फटी रह गईं। दर्द असहनीय था। लेकिन काजल रुकने वाली नहीं थी। उसने बोतल को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। हर धक्के पर अर्जुन की चीख गूंजती।
मीनाक्षी ने इधर अर्जुन के मुँह में अपना स्तन ठूँस दिया। “चूस। जोर से। दाँत लगा।” अर्जुन मजबूरी में चूसने लगा। मीनाक्षी कराह उठी। “और जोर… निचोड़ मेरे थन…”
दो घंटे बाद जब बोतल निकाली गई, अर्जुन की गांड पूरी तरह खुली हुई थी। अंदर का मांस लाल और सूजा हुआ। मीनाक्षी ने खुद को वहाँ बैठा दिया। उसकी गांड अर्जुन की खुली गांड पर। दोनों के छेद एक-दूसरे से सट गए। काजल ने दोनों के बीच अर्जुन का लंड दबा दिया और जोर-जोर से दबाने लगी।
फिर तीनों फर्श पर लोटने लगे। अर्जुन कभी मीनाक्षी की चूत चाट रहा था, कभी काजल की। दोनों औरतें बारी-बारी से उसके लंड पर बैठतीं, कभी चूत में, कभी गांड में। चाबुक चलता रहता। कभी बाल खींचे जाते, कभी गर्दन दबाई जाती।
दोपहर तक अर्जुन का शरीर पूरी तरह टूट चुका था। लेकिन दोनों औरतें थकने वाली नहीं थीं। मीनाक्षी ने अर्जुन को फिर से जंजीरों से बाँधा। इस बार सिर नीचे, गांड ऊपर। उसने गर्म मिर्च का तेल निकाला और उसकी खुली गांड में उंडेल दिया। जलन इतनी तेज थी कि अर्जुन की आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। वह चीख रहा था, लेकिन आवाज कपड़े में दब रही थी।
काजल ने इधर उसके लंड को रस्सी से बाँध दिया—जोर से। खून का प्रवाह रुकने लगा। लंड बैंगनी होने लगा। दर्द और जलन एक साथ।
“अब रात तक ऐसे ही रहेगा,” मीनाक्षी ने कहा। “शाम को जब हम तैयार होंगी, तब खोलेंगी। तब तक तू यहीं पड़ा रह। अपनी हालत पर रो।”
दोनों औरतें नहाने चली गईं। अर्जुन जंजीरों में जकड़ा, गांड जलती हुई, लंड रस्सी से बँधा, फर्श पर पड़ा रहा। कमरे में सिर्फ उसकी भारी साँसें गूंज रही थीं।
शाम के छह बजे दोनों लौटीं। नहा-धोकर, साफ कपड़ों में। लेकिन आँखों में वही भूख।
मीनाक्षी ने रस्सी खोली। लंड में खून दौड़ने लगा—तेज दर्द। फिर गांड में ठंडा दूध डाला गया जलन शांत करने के लिए। लेकिन शांति ज्यादा देर नहीं टिकी।
“अब असली मजा,” काजल बोली।
उन्होंने अर्जुन को उठाया और बड़ी कुर्सी पर बैठाया। हाथ-पैर फिर बाँधे। मीनाक्षी ने उसकी गोद में बैठ गई—पीठ की तरफ। लंड उसकी गांड में। काजल सामने से उसकी चूत में उंगलियाँ डालकर मसलने लगी। दोनों औरतें एक साथ हिल रही थीं। अर्जुन बीच में पिसा जा रहा था।
रात गहराने लगी। खिड़की से चाँद की रोशनी अंदर आ रही थी। कमरे में सिर्फ शरीरों के भिड़ने की आवाज, चाबुक की आवाज, चीखें और कराहें।
मीनाक्षी ने अचानक रुककर कहा, “आज रात तू हमें गर्भवती बनाएगा। दोनों को। एक-एक बूंद वीर्य बाहर नहीं निकलेगा।”
अर्जुन की आँखों में डर और हवस दोनों थे। वह जानता था—यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में यह मकान उसकी जेल बनेगा। और ये दोनों औरतें उसकी मालकिन।
बाहर रेलवे कॉलोनी की गली में लोग सो रहे थे। कोई नहीं जानता था कि उस छोटे से फ्लैट के अंदर क्या चल रहा है। और आने वाले हफ्तों में क्या-क्या होने वाला था।
अर्जुन की जंजीरें फिर से खनक उठीं। मीनाक्षी मुस्कुराई। काजल ने चाबुक उठाया।
रात अभी बाकी थी। बहुत बाकी थी।
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