प्राइवेट फर्म में प्रोजेक्ट मैनेजर रौनक को बेरहम चोदता

रौनक नैना को बांधता, पीटता, गला दबाता और बेरहमी से चोदता है। दर्द में डूबी नैना और मांगती है। हर रात पहले से ज्यादा क्रूर, ज्यादा गंदी और ज्यादा दीवानी।

रौनक 28 साल का था। दिल्ली के एक प्राइवेट फर्म में प्रोजेक्ट मैनेजर। शरीर कसा हुआ, कंधे चौड़े, आवाज गहरी। सेक्स उसके लिए सिर्फ सुख नहीं था। वह नियंत्रण चाहता था। दर्द, सहमति के अंदर की क्रूरता, और उस क्षण जब दूसरी तरफ वाला व्यक्ति पूरी तरह टूट जाए और फिर भी और मांगे। उसकी दो गर्लफ्रेंड्स थीं—दोनों जानती थीं उसका स्वभाव। दोनों हॉर्नी थीं, दोनों ने उसके हाथों में अपनी गर्दन सौंप रखी थी। लेकिन पिछले दस दिन से कोई रात नहीं हुई थी। शरीर में आग जल रही थी।

काम के सिलसिले में रौनक को शिमला जाना पड़ा। वहाँ उसके पुराने कॉलेज के दोस्त का फ्लैट था। दोस्त बाहर था, लेकिन उसकी छोटी बहन नैना वहाँ रह रही थी। नैना 24 साल की थी। कॉलेज फाइनल ईयर। गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, कमर पतली और कूल्हे गोल। जींस इतनी टाइट कि जांघों की शेप साफ दिखे, और टॉप इतना लो-कट कि जब भी झुके तो गहरी क्लिवेज नजर आए।

रौनक ने पहले दिन ही नोटिस कर लिया था। नैना बात कम करती थी, लेकिन आँखें घुमाती थी। जानती थी कि रौनक कैसा आदमी है। उसकी बहन ने कई बार इशारे में बता रखा था।

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पहली रात रौनक किचन में पानी पी रहा था। नैना भी आई। जगह संकरी थी। उसके कूल्हे रौनक की जांघ से रगड़े। रौनक का लंड पहले से ही आधा सख्त था। नैना कुछ सेकंड रुकी। महसूस किया। फिर गिलास फिसल गया। नैना पीछे हटी और सीधी रौनक की बाहों में आ गई।

रौनक ने उसे कस लिया। एक हाथ उसकी कमर पर, दूसरा उसके एक स्तन पर। दबाया। जोर से। नैना की साँस अटक गई, लेकिन उसने धक्का नहीं दिया। रौनक के होंठ उसकी गर्दन पर थे। दाँत हल्के से दबाए। नैना का शरीर थोड़ा काँपा।

तभी बाहर से आंटी की आवाज आई। रौनक ने छोड़ दिया। नैना का चेहरा लाल था। आँखों में डर और उत्तेजना दोनों थे।
अगले दिन रौनक के दोस्त के माता-पिता किसी फंक्शन में चले गए। घर खाली।

नैना थकी हुई थी, लेकिन रौनक के कमरे में आई और पास बैठ गई। रौनक ने कोई प्रस्ताव नहीं रखा। उसने सीधे नैना का चेहरा पकड़ा, बालों को मुट्ठी में कस लिया और उसके होंठों को अपने मुँह में ले लिया। किस क्रूर था। जीभ अंदर धकेली, होंठ काटे।

नैना सिसक उठी लेकिन हाथ रौनक की छाती पर रख दिए। रौनक ने उसका टॉप ऊपर खींचा और फाड़ दिया। ब्रा का हुक एक झटके में खोला। नैना के स्तन बाहर निकले—मध्यम आकार के, निप्पल लंबे और कड़े। रौनक ने एक निप्पल मुँह में लिया और दाँतों से दबाया। नैना चीखी। रौनक ने दूसरा भी उसी तरह निचोड़ा।
“दर्द हो रहा है?” रौनक ने पूछा, आवाज ठंडी।

नैना ने सिर हिलाया, लेकिन आँखें बंद करके और जोर से दबाए जाने का इशारा किया।
रौनक ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। जींस और पैंटी एक साथ नीचे खींची। नैना नंगी हो गई। रौनक ने उसकी जांघें फैलाईं और चूत को देखा—गुलाबी, गीली, बाल मुश्किल से। उसने कोई कोमलता नहीं दिखाई।

दो उंगलियाँ एक साथ अंदर धकेल दीं। नैना की चीख कमरे में गूँजी। हाइमन का प्रतिरोध था। रौनक ने रुका नहीं। उंगलियाँ अंदर-बाहर कीं, दीवारों को खुरचती हुई। नैना के नाखून रौनक की बाहों में गड़ गए। आँसू निकल आए, लेकिन उसकी चूत और गीली होती गई।

रौनक ने अपना लंड निकाला। मोटा, नसों वाला, लंबा। नैना की आँखें फटी रह गईं। रौनक ने उसके घुटने छाती तक मोड़े, कूल्हे ऊपर उठाए और लंड का सिरा चूत पर रखा। एक झटके में आधा अंदर कर दिया। नैना जोर से चिल्लाई। खून निकला। रौनक ने रुककर उसके गाल पर थप्पड़ मारा—हल्का नहीं, साफ आवाज वाला।
“चुप। सह।”

फिर पूरा धकेला। नैना का शरीर तनाव में आ गया। रौनक ने उसके गले पर हाथ रखा, हल्के दबाव के साथ, और जोर-जोर से हिलाने लगा। हर धक्का गहरा, क्रूर। नैना की चीखें धीरे-धीरे कराहों में बदल गईं। दर्द अभी भी था, लेकिन उसके नीचे कुछ और जाग रहा था। रौनक ने उसके बालों को पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में बोला, “तुम्हारी चूत इतनी टाइट है कि लग रहा है फट जाएगी। और सहो।”
उसने पोजीशन बदली। नैना को चारों पैरों पर किया। कमर दबाकर पीछे से फिर से घुसाया।

एक हाथ उसकी कमर पर, दूसरा बालों में। हर धक्के के साथ नैना का शरीर आगे खिसकता। रौनक ने उसके कूल्हों पर जोरदार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। नैना रो रही थी, लेकिन हिप्स पीछे धकेल रही थी। रौनक ने उसकी चूत से लंड निकाला, थूक लगाकर उसके मुँह में ठूंस दिया। नैना ने गला खोला। रौनक ने सिर पकड़कर मुँह की गहराई तक धकेला। नैना का गला भर गया, आँखों से पानी आ गया, लेकिन उसने हाथ नहीं हटाए।

रात लंबी चली। रौनक ने नैना को बांधने के लिए उसके ही स्कार्फ का इस्तेमाल किया। हाथों को सिर के ऊपर बाँधा। फिर उसके स्तनों को फिर से काटा, चूसा, निचोड़ा। चूत में उंगलियाँ और लंड बारी-बारी से। कभी धीरे, ज्यादातर क्रूर। नैना कई बार आई। शरीर काँपता रहा। आखिर में रौनक ने उसे पीठ के बल लिटाया, जांघें फैलाईं और पूरा लंड अंदर रखते हुए अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया। नैना का शरीर अकड़ गया। उसके जूस और खून और वीर्य मिलकर चादर गीली कर रहे थे।

बाद में रौनक ने उसे नहलाया। पानी गर्म था। उसने नैना के शरीर को साफ किया, लेकिन उंगलियाँ फिर से उसकी चूत में घुमाईं। नैना कमजोर आवाज में बोली, “और… थोड़ा और।”
अगले दो दिन घर खाली रहा। रौनक ने नैना को सिखाया। कैसे घुटनों के बल बैठकर मुँह खोले। कैसे थप्पड़ सहे। कैसे बाल खिंचने पर भी हिप्स हिलाए। कैसे उसके लंड को गले तक ले। नैना की चूत सूज गई थी, निप्पल कटे हुए लग रहे थे, कूल्हों और जांघों पर लाल-नीले निशान थे। लेकिन हर बार जब रौनक उसे देखता, उसकी आँखों में वही भूख होती।

एक शाम रौनक ने उसे पूरी तरह नंगा करके बालकनी के पास खड़ा किया। ठंडी हवा लग रही थी। उसने नैना के पीछे खड़े होकर लंड अंदर किया और धीरे-धीरे हिलाने लगा। एक हाथ उसके गले पर, दूसरा चूत पर क्लिट रगड़ता हुआ। नैना का शरीर काँप रहा था। रौनक ने कान में कहा, “यहाँ कोई देख ले तो क्या होगा?” नैना ने सिर्फ कराह निकाली। रौनक ने गति बढ़ाई। आखिर में दोनों एक साथ आए। नैना की टाँगें काँपने लगीं। रौनक ने उसे संभाला।

जब माता-पिता लौटे, दोनों सामान्य व्यवहार करते रहे। लेकिन रात को जब सब सो जाते, नैना रौनक के कमरे में आ जाती। कभी चुपचाप, कभी आँखों में चुनौती लेकर। रौनक हर बार और कठोर होता। कभी उसे घुटनों पर बैठाकर अपना लंड उसके चेहरे पर मारता, कभी उसके मुँह में थूकता, कभी चूत में उंगलियाँ घुमाते हुए उसके गाल पर थप्पड़ मारता। नैना रोती भी थी, भीख भी माँगती थी, और फिर और जोर से माँगती थी।

तीसरे दिन रौनक को दिल्ली लौटना था। सुबह नैना उसके कमरे में आई। आँखों में कुछ अधूरा था। रौनक ने उसे बिस्तर पर लिटाया, जांघें फैलाईं और आखिरी बार धीरे से शुरू किया। फिर गति बढ़ाई। नैना के हाथ बाँध दिए। स्तनों को काटा। चूत को पूरा भरा। जब रौनक करीब आया तो नैना के बाल पकड़कर बोला, “याद रखना। अगली बार जब मिलूँगा, और बुरा करूँगा।”

नैना ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। रौनक ने अपना वीर्य उसके मुँह में छोड़ा। नैना ने सब निगल लिया।
दिल्ली लौटकर रौनक अपनी गर्लफ्रेंड्स के पास गया। दोनों ने उसके शरीर पर नैना के नाखूनों के निशान देखे। कुछ नहीं पूछा। रौनक ने उन्हें भी उसी रात बांधा और इस्तेमाल किया। लेकिन दिमाग में नैना की चीखें और उसकी सूजी हुई चूत घूमती रहीं।

कुछ महीने बाद नैना दिल्ली आई। कॉलेज का कोई काम। रौनक के फ्लैट पर रुकी। दरवाजा बंद होते ही रौनक ने उसे दीवार से लगा दिया। इस बार कोई प्रस्ताव नहीं, कोई धीमी शुरुआत नहीं। कपड़े फाड़े। गले पर हाथ रखा। लंड सीधे चूत में धकेला। नैना तैयार थी। गीली थी। और चाहती थी कि रौनक और क्रूर हो।

रात भर चली। रौनक ने नई चीजें आजमाईं—हल्की रस्सी, आँखों पर कपड़ा, ठंडे बर्फ के टुकड़े निप्पलों पर, और फिर गर्म साँस। नैना कई बार रोई, कई बार आई, और हर बार और गहरी समर्पण की मुद्रा में चली गई। सुबह जब रौनक काम पर निकला, नैना बिस्तर पर नंगी लेटी थी। शरीर पर निशान, चेहरे पर शांति।

अब जब भी मौका मिलता है, वे मिलते हैं। नैना शादीशुदा नहीं है। रौनक की गर्लफ्रेंड्स को पता है। कोई शिकायत नहीं करता। क्योंकि तीनों जानते हैं कि रौनक जैसी भूख और नैना जैसा समर्पण आसानी से नहीं मिलता। दर्द के अंदर का सुख, नियंत्रण के अंदर की आजादी—यही उनकी कहानी है। और हर मुलाकात पिछली से ज्यादा तीव्र, ज्यादा क्रूर, और ज्यादा गहरी होती जाती है।

नैना दिल्ली आई और रौनक के फ्लैट में ठहरी। दरवाजा बंद होते ही रौनक ने कोई बात नहीं की। उसने नैना को बालों से पकड़कर दीवार से भिड़ा दिया। टॉप फाड़ दिया। ब्रा के हुक तोड़े। जींस और पैंटी एक झटके में नीचे खींच ली। नैना नंगी खड़ी थी। रौनक ने उसके गले पर हाथ रखा और जोर से दबाया। नैना की साँस अटकी, लेकिन आँखों में वही भूख थी।

रौनक ने अपना लंड निकाला। पहले से सख्त। उसने नैना के मुँह में ठूंस दिया। गला तक। नैना का गला भर गया। आँखों से पानी आ गया। रौनक ने सिर पकड़कर आगे-पीछे किया। थूक मुँह से बाहर निकल रहा था। जब नैना का गला पूरी तरह खुल गया तो रौनक ने लंड निकाला और उसके चेहरे पर थप्पड़ मारा।“नीचे।”

नैना घुटनों पर बैठ गई। रौनक ने उसके बालों को मुट्ठी में कस लिया और फिर से मुँह में धकेला। इस बार और गहरा। नैना की नाक रौनक के पेट से टकरा रही थी। रौनक ने कुछ देर ऐसा ही रखा। नैना का चेहरा लाल हो गया। फिर उसने लंड निकाला और नैना को उठाकर बिस्तर पर फेंक दिया।

हाथ पीछे बाँधे। स्कार्फ से कसकर। आँखों पर काला कपड़ा बाँधा। नैना अंधेरे में थी। रौनक ने उसके स्तनों को पकड़ा और जोर से निचोड़ा। निप्पलों को दाँतों से काटा। नैना चीखी। रौनक ने दूसरा निप्पल भी उसी तरह कुचला। फिर बर्फ का टुकड़ा निकाला फ्रिज से। निप्पल पर रखा। ठंडक से नैना का शरीर काँपा। फिर गर्म मुँह से चूसा। ठंड और गर्मी का खेल कई बार दोहराया। निप्पल सूज गए, लाल हो गए।

रौनक ने नैना की जांघें फैलाईं। चूत पहले से गीली थी। उसने दो उंगलियाँ एक साथ अंदर धकेल दीं। नैना की कमर उछली। रौनक ने उंगलियाँ घुमाईं, दीवारों को खुरचा, फिर तीसरी उंगली भी जोड़ दी। नैना रोने लगी। रौनक ने उसके मुँह पर हाथ रखा।
“आवाज निकालोगी तो और जोर से करूँगा।”

उंगलियाँ अंदर-बाहर होती रहीं। खून नहीं निकला इस बार, लेकिन सूजन साफ थी। रौनक ने उंगलियाँ निकालीं और अपना लंड चूत पर रखा। एक झटके में पूरा अंदर कर दिया। नैना का शरीर अकड़ गया। रौनक ने उसके कूल्हे पकड़कर जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। हर धक्का गहरा। बिस्तर की आवाज पूरे फ्लैट में गूँज रही थी। रौनक ने नैना के गले पर फिर हाथ रखा। दबाव बढ़ाया। नैना की साँसें तेज हो गईं। चेहरा लाल। रौनक ने गति और तेज की।

जब नैना करीब आई तो रौनक ने लंड निकाल लिया। नैना कराहती रही। रौनक ने उसके चेहरे पर थप्पड़ मारा।
“माँगोगी तभी मिलेगा।”
नैना ने टूटी आवाज में कहा, “कृपया… अंदर करो… जोर से…”
रौनक ने फिर धकेला। इस बार और क्रूर। नैना के कूल्हों पर थप्पड़ पड़ने लगे।

लाल निशान। रौनक ने नैना को पलट दिया। चारों पैरों पर। बालों को पकड़कर सिर पीछे खींचा और पीछे से घुसाया। एक हाथ कमर पर, दूसरा बालों में। हर धक्के के साथ नैना का शरीर आगे खिसकता। रौनक ने उसके कूल्हे पर जोरदार थप्पड़ मारे। आवाज साफ थी। नैना चीख रही थी लेकिन हिप्स पीछे धकेल रही थी।

रौनक ने लंड निकाला और नैना के मुँह में फिर ठूंस दिया। चूत का स्वाद। नैना ने गला खोला। रौनक ने सिर पकड़कर पूरा अंदर रखा। नैना का गला भर गया। थूक बह रहा था। फिर लंड निकालकर चूत में वापस डाल दिया। इस बार और तेज। रौनक का पसीना टपक रहा था। नैना का शरीर काँप रहा था। जब रौनक करीब आया तो उसने नैना के बाल खींचकर कहा, “अंदर लेगी?”

नैना ने सिर हिलाया। रौनक ने पूरा लंड अंदर रखते हुए वीर्य छोड़ दिया। नैना का शरीर अकड़ गया। उसके अपने जूस भी बह निकले। रौनक कुछ देर अंदर रहा। फिर निकाला। वीर्य नैना की जांघों पर बह रहा था।
आँखों का कपड़ा खोला। हाथ खोले। नैना लेटी रही। साँसें तेज। रौनक ने पानी पिलाया। फिर स्नान करवाया। पानी के नीचे भी उंगलियाँ चूत में घुमाईं। नैना कमजोर आवाज में बोली, “और…”

रात दोबारा शुरू हुई। रौनक ने नैना को कुर्सी पर बैठाया। हाथ पीछे बाँधे। पैर फैलाए और कुर्सी के पायों से बाँधे। नैना पूरी तरह खुली हुई थी। रौनक ने उसके सामने खड़े होकर लंड पर हाथ फेरा। फिर नैना के मुँह में दिया। इस बार धीरे। गला की गहराई तक। नैना की आँखों में आँसू थे लेकिन उसने गला और खोला। रौनक ने निकाला और चूत पर थप्पड़ मारा।

गीली आवाज। फिर दो उंगलियाँ अंदर कीं और क्लिट को अंगूठे से रगड़ा। नैना झटके खा रही थी। रौनक ने उंगलियाँ निकालकर लंड अंदर कर दिया। कुर्सी हिल रही थी। रौनक ने नैना के स्तनों को पकड़कर जोर से दबाया। निप्पल काटे। नैना चीख रही थी।

जब रौनक फिर आया तो उसने नैना के मुँह में छोड़ा। नैना ने सब निगल लिया। रौनक ने उसके गाल पर थप्पड़ मारा।
“अच्छी लड़की।”
सुबह नैना के शरीर पर निशान थे। गर्दन पर उंगलियों के निशान। स्तनों पर दाँतों के। कूल्हों पर लाल-नीले थप्पड़ों के। जांघों के अंदर खरोंच। चूत सूजी हुई। लेकिन आँखों में संतोष था।

अगले दिन रौनक ऑफिस गया। नैना फ्लैट में रही। शाम को रौनक लौटा तो नैना नंगी ही बिस्तर पर लेटी थी। रौनक ने कोई बात नहीं की। सीधे उसके पास गया। नैना के बाल पकड़कर उठाया और दीवार से लगा दिया। इस बार लंड सीधे चूत में। कोई तैयारी नहीं। नैना गीली थी।

रौनक ने उसके पैर उठाए और कंधों पर रख दिए। पूरा वजन नैना पर। धक्के इतने जोर के कि दीवार से आवाज आ रही थी। रौनक ने नैना के गले पर दोनों हाथ रख दिए। दबाव बढ़ाया। नैना की आँखें फटी रहीं। चेहरा लाल। रौनक ने गति नहीं रोकी। जब नैना की साँस लगभग रुकने वाली थी तब दबाव कम किया। नैना जोर से साँस ली और उसी क्षण आई। शरीर काँप रहा था। रौनक ने अंदर ही वीर्य छोड़ा।

रात को रौनक ने नई चीज निकाली। पतली चमड़े की बेल्ट। नैना को पेट के बल लिटाया। हाथ बाँधे। फिर बेल्ट से उसके कूल्हों और जांघों पर मारे। हर वार के बाद रौनक रुका और चूत में उंगलियाँ घुमाईं। नैना रो रही थी। आँसू चादर पर गिर रहे थे। लेकिन जब रौनक ने पूछा कि रोके तो नैना ने सिर हिलाया। और। रौनक ने दस वार और किए। लाल धारियाँ पड़ गईं। फिर लंड पीछे से अंदर किया।

एक हाथ बालों में, दूसरा कमर पर। धक्के इतने गहरे कि नैना का चेहरा तकिए में दब गया। रौनक ने नैना के कान में कहा, “तुम्हारी चूत मेरी है। जब चाहूँगा फाड़ दूँगा।”
नैना ने सिर्फ कराह निकाली।

तीसरी रात रौनक ने नैना को बाथरूम में ले जाया। शीशे के सामने खड़ा किया। नैना अपना प्रतिबिंब देख रही थी। शरीर पर निशान। रौनक ने पीछे से लंड अंदर किया और नैना के बाल पकड़कर सिर ऊपर उठाया।
“देखो खुद को। कैसी लग रही हो।”

नैना देख रही थी। आँखों में पानी था लेकिन हिप्स पीछे धकेल रही थी। रौनक ने उसके स्तनों को पकड़कर जोर से निचोड़ा। निप्पल मोड़े। नैना चीखी। रौनक ने गति बढ़ाई। शीशा हिल रहा था। जब दोनों करीब आए तो रौनक ने नैना के गले पर हाथ रखा और पूरा लंड अंदर रखते हुए छोड़ दिया। नैना का शरीर काँप रहा था। पैर लड़खड़ा रहे थे। रौनक ने उसे संभाला।

चार दिन बाद नैना को वापस जाना था। आखिरी रात रौनक ने कोई बंधन नहीं किया। सिर्फ नैना को बिस्तर पर लिटाया और घंटों इस्तेमाल किया। कभी धीरे, ज्यादातर क्रूर। मुँह में, चूत में, फिर मुँह में। स्तनों को काटा। कूल्हों पर थप्पड़ मारे। गले दबाए। नैना कई बार आई। आखिर में रौनक ने उसके मुँह में छोड़ा और कहा, “अगली बार और बुरा होगा। तैयार रहना।”

नैना ने आँखें बंद करके सिर हिलाया। मुँह में अभी भी रौनक का स्वाद था।
अब जब भी नैना दिल्ली आती है या रौनक कहीं और बुलाता है, वही सिलसिला चलता है। हर मुलाकात पिछली से ज्यादा कठोर। ज्यादा निशान। ज्यादा समर्पण। नैना की चूत रौनक के लंड की आदी हो चुकी है। दर्द की आदी। गले पर हाथ की आदी। और रौनक जानता है कि नैना कभी मना नहीं करेगी। क्योंकि दोनों को पता है कि इस क्रूरता के बिना उनका शरीर अधूरा रह जाता है।

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