सौतेली बहन की सेक्स कहानी

रोहित ने रिया को सिर्फ चोदा नहीं, उसके शरीर के हर छेद को दर्द से भर दिया। बाँधकर, पीटकर, जलाकर और रात-रात भर फाड़कर उसने अपनी बहन को पूरी तरह अपना शिकार बना लिया। कोई बचने का रास्ता नहीं बचा।मेरा नाम रिया है।

मैं 21 साल की हूँ और मेरे सौतेले भाई रोहित 34 साल के हैं। हम मुंबई के एक पुराने, एकांत वाले फ्लैट में रहते हैं—पोवई की एक ऊँची बिल्डिंग की टॉप फ्लोर पर, जहाँ आस-पास के घरों की रोशनी भी मुश्किल से पहुँचती है। मम्मी-पापा लंबे समय से दुबई में बिजनेस संभाल रहे हैं। घर में सिर्फ हम दोनों।

रोहित हमेशा से मुझ पर नजर रखता था। मेरी जवानी जब उभरने लगी—मेरे 36D के भारी, गोल स्तन, चौड़ी कमर, गोल-मटोल गांड—तो उसकी नजरें और भी भूखी हो गईं। पहले वह मुझे गोद में बिठाकर मेरे स्तनों को “प्यार” के नाम पर मसलता। मैं मना करती, वह हँसकर और जोर से दबाता। धीरे-धीरे मेरी मनाही कमजोर पड़ने लगी। उसकी मोटी, काली, 9 इंच लंबी और मोटी लौंड जब मेरी गांड से रगड़ती तो मेरी चूत खुद-ब-खुद गीली हो जाती।

एक रात, जब बाहर तेज बारिश हो रही थी और बिजली कड़क रही थी, रोहित ने फैसला कर लिया। वह मेरे कमरे में घुसा। मैं सिर्फ एक पतली नाइटी में लेटी थी। उसने दरवाजा बंद किया, चाबी घुमाई।
“रिया… आज तू पूरी तरह मेरी है।”

मैं उठने वाली थी कि उसने मेरे बालों को मुट्ठी में जकड़ लिया और मेरे मुँह पर हाथ रख दिया। “चिल्लाना मत। नहीं तो गांड फाड़ दूँगा।”
उसने मुझे बिस्तर से खींचकर फर्श पर घसीटा। ठंडी टाइलें मेरे नंगे शरीर से चिपक गईं। उसने मेरी नाइटी फाड़ दी। मेरे बड़े स्तन बाहर निकल आए। उसने एक हाथ से दोनों निप्पल्स को पकड़कर मोड़ा, इतनी जोर से कि दर्द से मेरी आँखों में आँसू आ गए। दूसरे हाथ से उसने अपनी पैंट खोली। उसकी लौंड बाहर निकली—काली, नसों से भरी, सुपारे जितनी मोटी, सिर से पहले से ही चिपचिपा रस टपक रहा था।
“इसको चाट।”

मैंने सिर हिलाया। उसने मेरे बाल और कसकर खींचे और अपना मोटा लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया। मैंने घुटने टेक दिए। उसकी लौंड मेरे गले तक पहुँच गई। मैंने खाँसते हुए उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन वह और गहरा धकेलता रहा। उसकी गांड आगे-पीछे हिल रही थी। मेरा गला फैल रहा था, आँसू बह रहे थे, लेकिन वह रुकने वाला नहीं था। वह मेरे बालों को पकड़कर मेरा मुँह अपनी लौंड पर इस्तेमाल कर रहा था—जोर से, गहराई तक, बिना किसी दया के।

जब मेरा मुँह उसके रस से भर गया तो उसने निकाल लिया और मेरे चेहरे पर थप्पड़ मारा। “अब गांड ऊपर कर।”
मैं डर से काँप रही थी। उसने मुझे चौपाया बना दिया—हाथ-पैर फर्श पर, गांड हवा में। उसने मेरे दोनों नितंबों को जोर से फैलाया। मेरी गुलाबी चूत और सिकुड़ी हुई गांड दोनों उसके सामने थीं। उसने थूक कर अपनी उंगली मेरी गांड के छेद में घुसाई। दर्द इतना तेज था कि मैं चीख पड़ी। उसने दूसरी उंगली भी अंदर कर दी और दोनों को घुमाने लगा।
“यह तो अभी शुरुआत है।”

फिर उसने अपनी मोटी लौंड मेरी कुंवारी चूत पर रखी। एक जोरदार धक्का। मेरी झिल्ली फटी। दर्द ने मेरे पूरे शरीर को जकड़ लिया। मैं रोने लगी, लेकिन उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और और गहरा धकेलता रहा। हर धक्के के साथ उसकी लौंड मेरी तंग चूत को चीरती हुई अंदर जाती। खून और रस मिलाकर उसकी लौंड चमक रही थी। वह बिना रुके चोद रहा था—तेज, गहरा, क्रूर।
“तेरी यह कुंवारी चूत अब सिर्फ मेरे लंड की है।”

वह मुझ पर लेट गया। उसके भारी शरीर ने मुझे कुचल रखा था। उसने मेरे दोनों हाथों को पीछे बांध दिया—अपनी बेल्ट से। फिर उसने मेरी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। हर थप्पड़ के साथ वह और जोर से चोदता। मेरी चूत फैल चुकी थी, लेकिन दर्द अभी भी था। वह मेरे निप्पल्स को मुँह में लेकर काटने लगा—इतना जोर से कि खून की बूँदें निकल आईं।

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फिर उसने अपनी लौंड बाहर निकाली और सीधे मेरी गांड के छेद पर लगा दी। मैंने सिर हिलाया, “नहीं… भैया… वहाँ नहीं…”
उसने मेरी गांड के दोनों हिस्से और फैलाए और एक ही धक्के में अपना पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मेरी चीख कमरे में गूँज गई। गांड फटने जैसी पीड़ा। वह रुकने वाला नहीं था। वह मेरी गांड चोदने लगा—तेज, गहरा, बिना किसी रुक-रुक के। हर धक्के के साथ उसकी मोटी लौंड मेरे छेद को फाड़ रही थी। मैं रो रही थी, काँप रही थी, लेकिन वह और तेज होता गया।

उसने मेरे बालों को पकड़कर मेरा सिर पीछे खींचा। “अब बोल… किसकी गांड है यह?”
“आपकी… भैया… आपकी…”
वह हँसा और और जोर से धकेलने लगा। मेरी गांड से खून और थूक मिलकर बह रहा था। उसने एक हाथ से मेरी चूत में तीन उंगलियाँ घुसा दीं और दोनों जगह एक साथ इस्तेमाल करने लगा। दर्द और मजे का अजीब मिश्रण मेरे शरीर में दौड़ रहा था। मेरी चूत खुद-ब-खुद सिकुड़ने लगी।

जब वह करीब आया तो उसने अपनी लौंड मेरी गांड से निकाली और मेरे मुँह में ठूंस दी। मैंने उसके खून-मिश्रित लंड को चाटा। फिर उसने मुझे फिर से चौपाया बनाकर अपनी लौंड मेरी चूत में घुसाई और आखिरी जोरदार धक्कों के साथ अपना गाढ़ा, गर्म वीर्य मेरी गर्भ में उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि वह बाहर भी बहने लगा।

वह थककर मेरे ऊपर गिर पड़ा। लेकिन रात खत्म नहीं हुई थी। आधे घंटे बाद वह फिर खड़ा हो गया। उसने मुझे बाथरूम में घसीटा। ठंडे पानी से नहलाया, फिर दीवार के साथ खड़ा करके फिर से चोदना शुरू कर दिया—पहले चूत, फिर गांड। इस बार उसने मेरे गले पर हाथ रखा और हल्का सा दबाया। सांस रुकने जैसी हालत में वह मुझे चोदता रहा।

सुबह तक उसने मुझे तीन बार और इस्तेमाल किया। मेरी चूत और गांड दोनों सूज गए थे, लाल थे, वीर्य से भरे हुए। उसने मुझे बाँधकर रखा। सुबह जब मैं उठी तो वह मेरे सामने बैठा था, अपनी लौंड हाथ में लिए।
“अब से हर रात यही होगा। मम्मी-पापा जब तक बाहर हैं… तू मेरी गुलाम है।”

मैंने सिर झुका लिया। दर्द अभी भी था, लेकिन मेरे शरीर ने उसके लंड की आदत डाल ली थी। उसकी क्रूरता, उसके थप्पड़, उसकी गहरी चुदाई—सब कुछ अब मेरे अंदर बस चुका था।
उसके बाद के हफ्तों में रोहित ने मुझे पूरी तरह तोड़ दिया। कभी रस्सी से बाँधकर छत से लटका देता, कभी मोमबत्ती का मोम मेरे निप्पल्स पर गिराता, कभी मुझे कुत्ते की तरह पट्टा बाँधकर घर में घुमाता। हर बार उसकी मोटी लौंड मेरी चूत या गांड में होती। कभी वह मुझे आईने के सामने खड़ा करके खुद चोदता ताकि मैं देख सकूँ कि मेरी गांड कैसे उसके लंड से फैल रही है। कभी वह मेरे मुँह में पेशाब करता और मुझे निगलने को मजबूर करता।

एक रात उसने मुझे पूरी तरह काला कपड़ा ओढ़ाकर बिस्तर पर बाँध दिया। आँखें बंद, हाथ-पैर फैले। फिर उसने मोमबत्ती जलाई और गर्म मोम मेरे स्तनों, पेट और चूत पर गिराया। दर्द से मैं तड़प उठी। उसी दर्द में उसने अपनी लौंड मेरी गांड में घुसा दी और घंटों चोदता रहा। जब वह आया तो उसने अपना पूरा वीर्य मेरी गांड में भर दिया और फिर उंगली से अंदर ठूंस दिया ताकि एक बूँद भी बाहर न निकले।

अब मैं उसकी पूरी तरह से हूँ। मेरी चूत उसकी है, मेरी गांड उसकी है, मेरा मुँह उसकी है। जब भी वह चाहता है—चाहे दिन हो या रात—वह मुझे पकड़ता है, बाँधता है, थप्पड़ मारता है और अपनी मोटी लौंड से मेरे शरीर के हर छेद को फाड़ता है। दर्द अब मजा बन चुका है। उसकी क्रूरता अब मेरी जरूरत बन चुकी है।

और हर रात, जब वह मेरे ऊपर होता है, अपनी लौंड को मेरी गहराई तक धकेलता है, तब मैं सिर्फ एक बात दोहराती हूँ—
“भैया… और जोर से… मेरी गांड फाड़ दो…”
रोहित का वादा सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहा। तीन दिन बाद मम्मी-पापा ने फोन करके बताया कि दुबई का डील और दो हफ्ते लंबा खिंच गया है। रोहित ने फोन काटते ही मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में वह भूख थी जो अब छिपती नहीं थी।

उसने मुझे बालों से पकड़कर ड्राइंग रूम के बीच खींच लिया। “आज से तू सिर्फ मेरी गुलाम है। कोई कपड़ा नहीं। कोई मनाही नहीं।”
उसने मेरे सारे कपड़े फाड़ दिए। मैं नंगी खड़ी थी। उसने रसोई से मोटी रस्सी निकाली और मेरे दोनों हाथों को पीठ के पीछे कसकर बाँध दिया। फिर मेरी टखनों को भी बाँधकर दोनों पैरों के बीच एक लंबी रस्सी बाँध दी ताकि मैं ज्यादा न खोल सकूँ। उसने मेरी गर्दन में एक चमड़े का पट्टा बाँधा—उसमें लोहे की चेन लगी थी। चेन को उसने दीवार के हुक से बाँध दिया।

“अब घूम नहीं सकती। जहाँ हूँ वहीं रहूँगी।”
रात भर उसने मुझे उसी हालत में रखा। सुबह उसने मुझे जगाया तो उसकी मोटी, काली लौंड मेरे चेहरे पर थपथपा रही थी। “मुँह खोल।”
मैंने खोला। उसने अपना पूरा 9 इंच का लंड मेरे गले में ठूंस दिया। मैंने खाँसी, आँसू बहे, लेकिन वह रुका नहीं। वह मेरे बाल पकड़कर मेरा मुँह अपनी लौंड पर इस्तेमाल कर रहा था—जोर से, गहराई तक, बिना रुकें। जब मेरा गला सूजने लगा तो उसने निकाल लिया और मेरे चेहरे पर थप्पड़ मारा।

“अब गांड ऊपर।”
मैंने घुटनों के बल बैठकर गांड उठाई। उसने मेरे दोनों नितंबों को जोर से फैलाया और बिना किसी तैयारी के अपनी लौंड सीधी मेरी गांड के छेद में घुसा दी। दर्द ने मेरे शरीर को झकझोर दिया। मैं चीखी, लेकिन उसने चेन खींचकर मेरा सिर पीछे कर लिया। “चिल्लाना मत। दर्द सह।”
वह मेरी गांड चोदने लगा—तेज, क्रूर, हर धक्के में पूरा लंड अंदर तक। मेरी गांड फटने जैसी पीड़ा हो रही थी। खून और थूक मिलकर उसकी लौंड पर चमक रहे थे। उसने एक हाथ से मेरे बाल पकड़े और दूसरे से मेरे निप्पल्स को मोड़कर खींचा। दर्द इतना तेज था कि मेरी आँखें बंद हो गईं।

जब वह करीब आया तो उसने लौंड निकाली और मेरे मुँह में ठूंस दी। “सब निगल।” उसने अपना गाढ़ा वीर्य मेरे गले में उड़ेल दिया। मैंने निगला। फिर उसने मुझे फर्श पर छोड़ दिया।
दोपहर में उसने नई सजा निकाली। उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया, हाथ-पैर चारों कोनों से बाँध दिए। फिर मोमबत्ती जलाई। गर्म मोम मेरे बाएँ निप्पल पर गिराया। मैं तड़प उठी। फिर दाएँ पर। फिर मेरे पेट पर, चूत के ऊपर, गांड की दरार पर। हर बूँद जलन पैदा कर रही थी। उसी जलन में उसने अपनी तीन उंगलियाँ मेरी चूत में घुसा दीं और जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा।

“तेरी यह चूत अब सिर्फ दर्द के लिए बनी है।”
शाम को उसने मुझे बाथरूम में घसीटा। ठंडे पानी से नहलाया, फिर दीवार के साथ खड़ा करके मेरी गर्दन में पट्टा कस दिया। उसने मेरी टाँगें फैलाकर अपनी लौंड मेरी चूत में घुसाई और साथ ही एक मोटा प्लास्टिक का डिल्डो मेरी गांड में ठूंस दिया। दोनों जगह एक साथ। वह चोद रहा था और डिल्डो को भी अंदर-बाहर कर रहा था। मेरी चीखें बाथरूम में गूँज रही थीं।

रात को उसने मुझे कुत्ते की तरह पट्टा बाँधकर पूरे फ्लैट में घुमाया। मैं चारों पैरों पर चल रही थी, गांड हवा में। जब भी वह चाहता, रुक जाता और मेरी गांड या चूत में अपनी लौंड घुसा देता। एक बार उसने मुझे बालकनी के पास ले जाकर खड़ा किया। बाहर अँधेरा था, लेकिन हवा ठंडी थी। उसने मुझे रेलिंग से बाँध दिया और पीछे से मेरी गांड फाड़ते हुए चोदा। हर धक्के के साथ मेरी गांड रेलिंग से टकरा रही थी।

अगले दिन उसने और क्रूर खेल शुरू किए। उसने मेरे निप्पल्स पर क्लैंप लगा दिए—लोहे के, जो कसते ही दर्द से मेरी आँखें भर आईं। फिर उसने एक पतली चेन उन क्लैंप से जोड़कर मेरी गर्दन के पट्टे से बाँध दी। हर बार जब मैं हिलती, क्लैंप खिंचते और दर्द बढ़ जाता। उसी हालत में उसने मुझे घुटनों के बल बैठाया और अपना लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया। वह मेरे बाल पकड़कर मेरा गला चोद रहा था। आँसू, लार, उसकी लौंड—सब मिलकर मेरे चेहरे पर बह रहे थे।

रात को उसने मुझे उल्टा लटकाया। रस्सी से टखनों को बाँधकर छत के हुक से लटका दिया। मेरा सिर नीचे, गांड ऊपर। खून सिर में चढ़ गया। उसने मेरी गांड फैलाकर अपनी लौंड अंदर घुसा दी और हवा में झुलाते हुए चोदने लगा। हर धक्के के साथ मेरा शरीर झूल रहा था। दर्द और चक्कर एक साथ। जब वह आया तो उसने अपना पूरा वीर्य मेरी गांड में भर दिया और उंगली से अंदर ठूंस दिया।

सुबह तक मेरी गांड और चूत दोनों सूज गए थे, लाल थे, खून और वीर्य से सने। लेकिन रोहित रुका नहीं। उसने मुझे फिर बाँध दिया—इस बार हाथ ऊपर, पैर फैले। फिर उसने एक पतली बेंत निकाली। पहली चोट मेरी जाँघ पर पड़ी। मैं चीखी। दूसरी गांड पर। तीसरी चूत के ऊपर। हर चोट के बाद वह अपनी उंगलियाँ घाव पर फेरता और फिर लौंड घुसा देता।

एक दोपहर उसने मुझे रसोई के टेबल पर लिटाया। हाथ-पैर बाँधे। फिर बर्फ के टुकड़े मेरी चूत में ठूंस दिए। ठंडक से मेरी चूत सिकुड़ गई। उसी सिकुड़न में उसने अपनी मोटी लौंड अंदर घुसा दी। दर्द ने मुझे पागल कर दिया। वह चोदता रहा—तेज, गहरा, बिना दया के। जब वह निकला तो बर्फ पिघल चुकी थी और मेरी चूत से पानी और वीर्य दोनों बह रहे थे।

रात को उसने नया नियम बनाया। “अब से तू बिना अनुमति के पेशाब नहीं करेगी। जरूरत हो तो मेरे सामने बैठकर कर।” उसने मुझे पट्टा बाँधकर बाथरूम ले गया और वहाँ मेरी गर्दन दबाकर खड़ा रखा जब तक मैं उसकी आँखों के सामने पेशाब नहीं कर दी। फिर उसने मुझे चाटने को मजबूर किया।

अगले दिनों में दर्द और मजे का फर्क मिट गया। वह मुझे घंटों बाँधकर रखता, मोम गिराता, क्लैंप लगाता, बेंत मारता, और फिर अपनी लौंड से मेरे हर छेद को फाड़ता। कभी वह मेरे मुँह में पेशाब करता और निगलने को कहता। कभी वह मुझे आईने के सामने खड़ा करके खुद चोदता ताकि मैं देखूँ कि मेरी गांड कैसे उसके लंड से फूल रही है, कैसे खून और वीर्य बह रहे हैं।

एक रात उसने मुझे पूरी तरह काला कपड़ा ओढ़ाकर बिस्तर पर बाँध दिया। आँखें, मुँह, सब बंद। फिर उसने धीरे-धीरे मोमबत्तियाँ जलाईं और गर्म मोम मेरे पूरे शरीर पर गिराया—स्तन, पेट, जाँघें, चूत, गांड। हर बूँद जलन। उसी जलन में उसने एक के बाद एक तीन अलग-अलग डिल्डो मेरी चूत और गांड में ठूंस दिए और उन्हें वहीं छोड़ दिया। फिर अपनी लौंड मेरे मुँह में डालकर गला चोदने लगा। मैं हिल नहीं सकती थी। सिर्फ दर्द और उसकी लौंड का स्वाद।

जब वह आया तो उसने कपड़ा हटाया और मेरे चेहरे पर थूक दिया। “अब तू पूरी तरह टूट चुकी है।”
मैं बोल नहीं पाई। मेरा शरीर काँप रहा था। लेकिन जब उसने मुझे खोला और अपनी लौंड फिर से मेरी गांड में घुसाई, तो मेरे मुँह से सिर्फ एक बात निकली—
“भैया… और गहरा… फाड़ दो पूरी तरह…”

रोहित हँसा। उसने मेरे बाल पकड़कर मेरा सिर पीछे खींचा और और जोर से धकेलने लगा। उसकी मोटी, काली लौंड मेरी गांड को चीरती हुई अंदर जा रही थी। हर धक्के के साथ मेरी आँखों के सामने अँधेरा छा रहा था। दर्द अब इतना गहरा था कि वह मजे में बदल चुका था। मेरी चूत खुद-ब-खुद सिकुड़ रही थी, गांड उसके लंड को जकड़ रही थी।

उसने मेरे दोनों निप्पल्स को मुँह में लेकर काटा। खून की बूँदें निकलीं। उसने चाटा। फिर और तेज चोदने लगा। बिस्तर चरमरा रहा था। मेरी चीखें कमरे में गूँज रही थीं। जब वह आखिरी बार आया तो उसने अपना पूरा वीर्य मेरी गांड की गहराई में उड़ेल दिया—इतना ज्यादा कि वह बाहर भी बहने लगा। फिर उसने उंगली से अंदर ठूंस दिया और मुझे बाँधकर वैसा ही छोड़ दिया।

सुबह तक मैं उसी हालत में पड़ी रही। शरीर दर्द से काँप रहा था, लेकिन मन में एक अजीब सी भूख जाग चुकी थी। रोहित जब आया तो उसने मुझे देखा और मुस्कुराया।
“अब तू तैयार है अगले लेवल के लिए।”
उसने नई रस्सियाँ निकालीं, नए क्लैंप, एक मोटी चेन और एक लंबा, मोटा काला डिल्डो। मेरी आँखों में डर था, लेकिन साथ ही एक भूखी स्वीकृति भी।

वह मेरे पास आया, मेरे बालों को सहलाया और धीरे से बोला—
“आज रात मैं तुझे ऐसी जगह ले जाऊँगा जहाँ से वापस लौटना मुश्किल होगा। तेरी चूत, तेरी गांड, तेरा मुँह… सब कुछ मैं तोड़कर रख दूँगा। और तू खुद माँगती रहेगी कि और फाड़ दूँ।”
मैंने सिर झुका लिया। चेन खनक उठी।
रात अभी शुरू ही हुई थी।

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