शादी की रात चार अजनबियों ने सीमा को नंगा करके रौंदा। बेटा राहुल सब देखता रहा। घर लौटकर उसने माँ को अपनी चीज बना लिया। रोज बांधता, पीटता, चोदता। सीमा की चीखें अब सिर्फ उसके मनोरंजन का सामान बन चुकी थीं।
राहुल की उम्र तेईस साल थी और उसकी माँ सीमा की उम्र बयालीस। सीमा का शरीर 40-32-42 का था। लंबे-लंबे काले बाल, गोरी चमकदार त्वचा, भारी भरे हुए स्तन और मोटी उठी हुई गांड। वो हमेशा साड़ी या घाघरा-चोली पहनती थी, लेकिन इस शादी में उसने गहरे लाल रंग का घाघरा और बहुत डीप नेक वाली बैकलेस चोली पहनी थी। चोली इतनी टाइट थी कि उसके बड़े-बड़े स्तन बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे। घाघरा नाभि से काफी नीचे बंधा था और कमर की नंगी गोलाई साफ दिख रही थी। गले में मोटा सोने का हार और पैरों में ऊँची एड़ी की सैंडल।
शादी जयपुर के बाहर एक बड़े रिसॉर्ट में हो रही थी। रात के करीब ग्यारह बजे बारात का डांस जोरों पर था। सीमा अपने कुछ परिचितों के साथ नाच रही थी। राहुल थोड़ी दूर खड़ा होकर देख रहा था। तभी चार युवा लड़के, उम्र पच्चीस से तीस के बीच, सीमा की तरफ घूरने लगे। उनमें से एक ने कहा, “क्या माल है यार… बयालीस की उमर में भी इतनी हॉट बॉडी।” दूसरे ने जवाब दिया, “आज रात इसकी गांड और चूत दोनों फाड़ देंगे।”
वे चारों धीरे-धीरे सीमा के करीब आ गए। भीड़ के बहाने एक ने उसकी कमर पकड़ी, दूसरे ने पीछे से गांड दबाई, तीसरे ने आगे से स्तनों को छुआ। सीमा ने विरोध करने की कोशिश की लेकिन संगीत इतना तेज था और भीड़ इतनी घनी कि कोई सुन नहीं पाया। राहुल ने सब देख लिया। उसका लंड तुरंत कड़क हो गया।
थोड़ी देर बाद एक लड़के ने सीमा के कान में कुछ कहा। सीमा थोड़ी हिचकिचाई लेकिन फिर उनके साथ चल दी। राहुल चुपचाप पीछे-पीछे गया। वे लोग रिसॉर्ट के पिछवाड़े की ओर एक पुराने स्टोर रूम की तरफ बढ़े। स्टोर रूम में पुरानी कुर्सियाँ, रस्सियाँ, और कुछ लोहे के सामान पड़े थे। दरवाजा बंद होते ही एक ने लाइट जला दी। पीली रोशनी में सीमा का चेहरा साफ दिख रहा था।
चारों ने उसे घेर लिया। सबसे पहले एक ने उसके बालों को जोर से पकड़कर मुंह में अपनी जीभ ठूंस दी। दूसरे ने चोली की डोरी फाड़ दी। स्तन बाहर निकल आए। तीसरे ने घाघरा नीचे खींच लिया। सीमा अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। पिंक रंग की लेस वाली ब्रा और छोटी पैंटी। एक ने ब्रा का हुक तोड़ दिया। भारी स्तन मुक्त हो गए। दूसरे ने पैंटी फाड़कर फेंक दी। सीमा पूरी नंगी हो गई। गले में सिर्फ हार बचा था जो स्तनों के बीच लटक रहा था।
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एक लड़के ने सीमा को घुटनों पर गिरा दिया। चारों ने अपने लंड निकाल लिए। मोटे, लंबे और कड़े। सीमा के मुंह में एक लड़का अपना लंड ठूंसने लगा। “चूस सालि… गहराई तक।” सीमा की आँखों से आँसू निकलने लगे लेकिन वो चूसने लगी। दूसरा लड़का उसके बाल पकड़कर आगे-पीछे करने लगा। तीसरा उसके स्तनों को जोर-जोर से मसल रहा था और निप्पल्स को दांतों से काट रहा था। चौथा पीछे से उसकी गांड के छेद में उंगली घुसा रहा था।
थोड़ी देर बाद उन्होंने सीमा को घोड़ी बना दिया। एक ने आगे से मुंह में लंड डाल रखा था। दूसरे ने पीछे से चूत में अपना मोटा लंड एक झटके में धकेल दिया। सीमा चीखी लेकिन आवाज मुंह में लंड की वजह से दब गई। “आह्ह… दर्द… निकालो…” लेकिन कोई नहीं रुका। तीसरा लड़का उसके बाल पकड़कर सिर ऊपर उठाए हुए था और चौथा स्तनों को जोर से दबा रहा था।
फिर उन्होंने बारी-बारी से चूत और गांड दोनों में लंड डालना शुरू किया। एक ने सीमा को अपने लंड पर बिठाया और उछाल-उछाल कर चोदने लगा। स्तन हवा में झूल रहे थे। पीछे से दूसरे ने गांड में लंड घुसा दिया। डबल पेनेट्रेशन। सीमा चीख रही थी, “नहीं… एक साथ मत करो… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज निकालो…” लेकिन दोनों और जोर से धक्के मारने लगे। तीसरा उसके मुंह में लंड ठूंस रहा था और चौथा उसके निप्पल्स को मोड़-मोड़ कर खींच रहा था।
उन्होंने रस्सियाँ निकालीं। सीमा के हाथ पीछे बांध दिए। फिर उसकी टांगें फैलाकर कुर्सी से बांध दीं। एक लड़का उसके चेहरे पर बैठ गया और गांड के छेद को चाटने लगा। दूसरे ने चूत में तीन उंगलियाँ घुसा दीं और जोर-जोर से फैलाने लगा। तीसरा उसके स्तनों पर थप्पड़ मार रहा था। लाल निशान पड़ गए। चौथा उसके मुंह में थूक रहा था और गालियाँ दे रहा था।
“साली रंडी… तेरी इस उम्र में भी इतनी टाइट चूत… आज रात भर चोदेंगे।”
सीमा रो रही थी लेकिन उसके शरीर से पसीना और पानी दोनों बह रहे थे। एक लड़के ने मोटी रस्सी से उसके स्तनों को बांध दिया। स्तन सूज गए और और भी बड़े लगने लगे। फिर उन्होंने मोमबत्ती जलाई और गर्म मोम उसके निप्पल्स और चूत पर टपकाने लगे। सीमा चीख उठी। “आह्हह… जल रहा है… छोड़ो…” लेकिन उन्होंने और मोम टपकाया।
फिर एक ने लोहे की छड़ निकाली जो ठंडी थी। उसे सीमा की गांड में धीरे-धीरे घुसाया। सीमा का शरीर कांप रहा था। दूसरे ने चूत में अपना लंड डालकर जोर-जोर से धक्के मारे। हर धक्के के साथ सीमा की चीखें गूंज रही थीं। तीसरे ने उसके बालों को पकड़कर सिर पीछे खींचा और गले पर हाथ दबा दिया। सांस लेने में तकलीफ होने लगी। चौथा उसके चेहरे पर थप्पड़ मार रहा था।
वे लोग घंटों तक उस स्टोर रूम में रहे। सीमा को हर पोजीशन में चोदा। कभी कुर्सी पर लिटाकर, कभी दीवार से सटाकर, कभी फर्श पर घसीटते हुए। उन्होंने उसकी गांड पर इतने थप्पड़ मारे कि लाल हो गई। चूत और गांड दोनों से पानी और खून जैसा कुछ निकलने लगा। फिर भी वे नहीं रुके।
आखिर में उन्होंने सीमा को घुटनों पर बिठाया। चारों ने बारी-बारी से उसके चेहरे, बालों, स्तनों और खुली हुई जीभ पर अपना माल छोड़ दिया। सफेद गाढ़ा द्रव उसके पूरे चेहरे और शरीर पर चिपक गया। एक ने उसके मुंह में डालकर निगलने को मजबूर किया। सीमा ने गले में उतार लिया।
जब सब खत्म हुआ तो उन्होंने रस्सियाँ खोल दीं। सीमा पूरी तरह से टूटी हुई, नंगी, पसीने और वीर्य से लथपथ फर्श पर पड़ी थी। शरीर पर काटने, थप्पड़ और रस्सी के निशान साफ दिख रहे थे। स्तन सूजे हुए, निप्पल्स लाल, चूत और गांड दोनों सूजी और खुली हुई। आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन शरीर हिल नहीं पा रहा था।
चारों लड़के कपड़े पहनकर दरवाजा खोलकर चले गए। राहुल जो पूरे समय छिपकर देख रहा था और खुद को हिला रहा था, अब बाहर निकला। उसने माँ को उसी हालत में देखा। सीमा की आँखें उससे मिलीं। शर्म, दर्द और थकान से भरी हुई। राहुल ने कुछ नहीं कहा। बस वहाँ खड़ा रहा और माँ के टूटे हुए शरीर को निहारता रहा।
उस रात के बाद सीमा कई दिनों तक बिस्तर पर पड़ी रही। शरीर के हर हिस्से में दर्द था। चूत और गांड दोनों सूजी हुई थीं, निप्पल्स पर काटने के निशान अभी भी काले पड़ रहे थे, और रस्सी के निशान कलाई और टखनों पर गहरे बने हुए थे। राहुल रोज कमरे में आता, माँ को नंगी चादर के नीचे देखता और चुपचाप खड़ा रहता। सीमा उसकी आँखों से नज़रें चुरा लेती, लेकिन राहुल की निगाहें उसके शरीर पर ही टिकी रहतीं।
तीसरे दिन रात को जब घर में अंधेरा हो चुका था, राहुल माँ के कमरे में घुसा। सीमा सो रही थी। उसने चादर धीरे से हटाई। माँ पूरी नंगी लेटी थी। सूजे हुए स्तन, लाल निप्पल्स, और जांघों के बीच अभी भी हल्की सूजन। राहुल का लंड तुरंत कड़क हो गया। उसने अपनी पैंट खोली और माँ के चेहरे के पास ले जाकर लंड रगड़ने लगा। सीमा की आँखें खुल गईं। डर और शर्म से वो कांप उठी।
“राहुल… क्या कर रहा है तू…” उसकी आवाज कांप रही थी।
राहुल ने जवाब नहीं दिया। उसने माँ के बाल पकड़कर सिर उठाया और अपना मोटा लंड उसके मुंह में ठूंस दिया। सीमा ने मना किया, दाँत भींच लिए, लेकिन राहुल ने और जोर से धक्का मारा। “चूस… उस रात जैसे चूसा था वैसे ही चूस।” सीमा की आँखों से आँसू बहने लगे। राहुल ने उसके बाल और कसकर पकड़े और गले तक लंड उतार दिया। सीमा का गला भर गया, वो हांफने लगी, लेकिन राहुल नहीं रुका। वो आगे-पीछे करने लगा, माँ के मुंह को अपनी इच्छा से इस्तेमाल करने लगा।
थोड़ी देर बाद उसने लंड निकाला और माँ को पेट के बल लिटा दिया। उसके हाथ पीछे खींचकर बेडशीट से बांध दिए। फिर उसने माँ की टांगें फैलाईं और चूत में दो उंगलियाँ घुसा दीं। सीमा चीखी, “नहीं… दर्द हो रहा है अभी भी…” लेकिन राहुल ने तीसरी उंगली भी डाल दी और जोर-जोर से फैलाने लगा। फिर उसने अपना लंड चूत के मुंह पर रखा और एक झटके में अंदर धकेल दिया। सीमा की चीख पूरे घर में गूंज गई। राहुल ने उसके मुंह पर तकिया दबा दिया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ सीमा का शरीर कांपता, स्तन बिस्तर से रगड़ खाते, और गांड हिलती।
राहुल ने माँ की गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे। एक, दो, तीन… लाल निशान पड़ गए। फिर उसने लंड निकालकर गांड के छेद पर लगाया। सीमा ने सिर घुमाकर कहा, “वहाँ मत डाल… प्लीज… बहुत दर्द होगा…” लेकिन राहुल ने सुना ही नहीं। उसने गांड में धीरे-धीरे लंड घुसाना शुरू किया। सीमा चीखती रही, शरीर ऐंठता रहा, लेकिन राहुल ने पूरा लंड अंदर उतार दिया। फिर उसने दोनों हाथों से माँ की कमर पकड़ी और जानवरों की तरह धक्के मारने लगा। गांड के छेद से खून जैसा कुछ निकलने लगा, लेकिन राहुल और तेज होता गया।
उसने माँ को पलट दिया। अब सीमा पीठ के बल लेटी थी, हाथ बंधे हुए। राहुल ने उसके दोनों स्तनों को जोर से मसलना शुरू किया, निप्पल्स को दांतों से काटा, खींचा। फिर उसने माँ के गले पर हाथ रखा और हल्का दबाव डाला। सीमा की सांस फूलने लगी। उसी समय उसने चूत में फिर से लंड डाल दिया और तेज-तेज चोदने लगा। सीमा की आँखें ऊपर को लुढ़कने लगीं, शरीर में ऐंठन दौड़ने लगी। राहुल ने उसके चेहरे पर थूका, गालियाँ दीं, “साली रंडी माँ… उस रात चार लंड लिए, अब बेटे का भी ले।”
रात भर राहुल ने माँ को बार-बार चोदा। कभी मुंह में, कभी चूत में, कभी गांड में। उसने बेडरूम से एक पतली बेल्ट निकाली और माँ की गांड और जांघों पर मारने लगा। लाल-लाल धारियाँ पड़ गईं। फिर उसने माँ के स्तनों को बेल्ट से बांध दिया ताकि वो और सूज जाएं। सीमा रो रही थी, भीख मांग रही थी, लेकिन राहुल का उत्साह बढ़ता जा रहा था। आखिर में उसने माँ के खुले मुंह में, चेहरे पर, बालों पर और स्तनों पर अपना गाढ़ा माल छोड़ दिया। सीमा का चेहरा पूरी तरह सफेद हो गया।
सुबह जब सीमा उठी तो शरीर फिर से टूटा हुआ था। राहुल कमरे में बैठा उसे देख रहा था। उसने साफ कहा, “आज रात फिर से होगा। और अब रोज होगा।” सीमा ने सिर हिलाया, आँसू बहाने लगी, लेकिन राहुल ने उसके बाल पकड़कर सिर उठाया और कहा, “इंकार मत करना। वरना उन चारों को फिर बुला लूंगा।”
उस दिन से घर का माहौल बदल गया। राहुल अब माँ को अपनी संपत्ति समझने लगा। शाम होते ही वो माँ के कमरे में चला जाता। कभी रस्सी से बांधता, कभी बेल्ट से पीटता, कभी मोमबत्ती जलाकर गर्म मोम स्तनों और चूत पर टपकाता। सीमा चीखती, रोती, लेकिन राहुल नहीं रुकता। एक रात उसने माँ को किचन में ले जाकर सिंक पर लिटाया, टांगें फैलाकर बांधीं और घंटों तक चोदा। पानी की धार उसके शरीर पर गिरती रही, ठंड से वो कांपती रही, लेकिन राहुल के धक्के नहीं रुके।
दूसरी रात उसने माँ को छत पर ले गया। रात के अंधेरे में सीमा को नंगा खड़ा किया, हाथ ऊपर बांधे, और उसके शरीर पर ठंडा पानी डाला। फिर पीछे से गांड में लंड डालकर चोदने लगा। हवा में सीमा की चीखें तैर रही थीं। राहुल ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और गले पर हाथ दबाया। सीमा की सांस रुकने लगी, शरीर लटपटा गया, लेकिन राहुल ने तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसने गांड के अंदर ही माल नहीं छोड़ दिया।
एक हफ्ते बाद राहुल ने माँ को फिर से उन चारों लड़कों के पास ले जाने का फैसला किया। उसने सीमा को बताया, “आज रात फिर से वो लोग आएंगे। और इस बार और बुरा होगा।” सीमा ने पैर पकड़कर भीख मांगी, “नहीं बेटा… और मत करवा… मर जाऊंगी…” लेकिन राहुल ने उसके बाल पकड़कर खींचा और थप्पड़ मारा। “चुप रह। तैयार हो जा।”
रात को वे चारों फिर आए। इस बार वे और सामान लेकर आए थे—मोटी रस्सियाँ, क्लैंप, एक छोटी छड़ी, और काला टेप। सीमा को लिविंग रूम के बीचोंबीच खड़ा किया गया। राहुल खुद किनारे खड़ा होकर देख रहा था, अपना लंडहिलाते हुए। चारों ने सीमा के हाथ ऊपर की ओर बांध दिए। फिर क्लैंप निकालकर उसके निप्पल्स पर कस दिए। सीमा चीख उठी। दर्द से उसका शरीर ऐंठ गया। फिर उन्होंने उसकी चूत के ऊपर वाले हिस्से पर भी एक क्लैंप लगा दिया। सीमा की आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
एक लड़के ने छड़ी उठाई और उसकी गांड पर मारना शुरू किया। हर मार के साथ लाल निशान गहराता गया। दूसरे ने उसके मुंह में लंड ठूंस दिया। तीसरे ने चूत में उंगलियाँ घुसाकर फैलाना शुरू किया। चौथे ने गांड के छेद में ठंडा जैल लगाकर मोटी उंगली घुसा दी। सीमा का शरीर कांप रहा था, लेकिन बांधे होने की वजह से वो हिल भी नहीं पा रही थी।
फिर उन्होंने उसे नीचे गिराया। एक ने आगे से मुंह में, दूसरे ने चूत में, तीसरे ने गांड में लंड डाल दिया। तीनों एक साथ धक्के मारने लगे। सीमा की चीखें दब गईं। शरीर इधर-उधर धकेल दिया जा रहा था। राहुल ने पास आकर माँ के बाल पकड़े और उसका चेहरा अपनी तरफ किया। “देख… कितनी अच्छी लग रही है तू।” फिर उसने अपना लंड निकालकर माँ के चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया।
वे लोग घंटों तक खेले। कभी सीमा को कुर्सी पर बांधकर, कभी फर्श पर घसीटते हुए, कभी दीवार से सटाकर। उन्होंने उसके स्तनों पर और थप्पड़ मारे, निप्पल्स के क्लैंप को खींचा, चूत और गांड दोनों को बारी-बारी से फाड़ने की कोशिश की। सीमा कई बार बेहोश होने के करीब पहुँची, लेकिन वे पानी छिड़ककर जगा देते। आखिर में चारों ने और राहुल ने मिलकर उसके पूरे शरीर पर—चेहरे, बाल, स्तन, पेट, चूत—अपना माल छोड़ दिया। सीमा सफेद द्रव से लथपथ, बांधी हुई, कांपती हुई पड़ी थी।
जब सब खत्म हुआ तो राहुल ने रस्सियाँ खोलीं। सीमा नीचे गिर गई। शरीर हिल नहीं रहा था। राहुल ने उसके पास बैठकर उसके बाल सहलाए और धीरे से कहा, “अब ये रोज का कार्यक्रम है। तू मेरी है… और जो मैं कहूँगा वही होगा।”
सीमा की आँखें बंद थीं। आँसू अभी भी बह रहे थे। लेकिन अब उसने कोई विरोध नहीं किया। राहुल ने उसे गोद में उठाया और कमरे में ले जाकर बिस्तर पर डाल दिया। खुद उसके पास लेट गया, हाथ उसके सूजे हुए स्तन पर रखकर। बाहर अंधेरा था। घर में सन्नाटा। लेकिन दोनों के मन में वो रातें बार-बार दोहराई जा रही थीं—दर्द, चीखें, बांधना, पीटना, और वो क्रूर मजा।
और ये सिलसिला यहीं नहीं रुका। आने वाले दिनों में राहुल ने माँ को और नए-नए तरीकों से तोड़ना शुरू किया। कभी घर के बाथरूम में, कभी गाड़ी की पिछली सीट पर, कभी रात के अंधेरे में घर के पीछे वाले बगीचे में। हर बार और क्रूर, और कठोर, और लंबा। सीमा का शरीर निशानों से भर गया, लेकिन राहुल का भूख नहीं मिटी। वो माँ को पूरी तरह अपना गुलाम बनाना चाहता था—और धीरे-धीरे बना भी रहा था।
ट्रेन की उस रात ने मुझे तोड़ दिया