शादीशुदा भाभी की चुदाई पति के बेस्वाद बिस्तर से भागकर प्रिया दोबारा रोहन के पास पहुँची। तीन रातों तक मोम दोनों छेद एक साथ फाड़ने का सिलसिला चला। हर चीख के बाद वो और गहरी भूख लेकर लौटती रही।
रोहन 28 साल का था। लंबा, तगड़ा शरीर, चौड़े कंधे, और एक 9 इंच का मोटा लंड जो हमेशा आधा खड़ा रहता था। दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन में उसका अपना फ्लैट था। अंजलि उसकी गर्लफ्रेंड थी—24 साल की, गोरी, पतली कमर, लेकिन छोटी चूचियाँ। प्रिया अंजलि की रूममेट थी। 25 साल की, गेहुँआ रंग, बड़े-बड़े गोल बूब्स जो 36D साइज़ के थे, नुकीले गुलाबी निप्पल, पतले होंठ जो हमेशा गहरे लाल लिपस्टिक से चमकते रहते थे। बाल कमर तक लंबे काले, आँखें तीखी और बड़ी। गांड गोल और भारी, जाँघें मोटी दूध जैसी चिकनी शादीशुदा भाभी की चुदाई कहानी ।
प्रिया हमेशा टाइट कपड़े पहनती थी—जीन्स जो गांड के दोनों गोल हिस्सों को अलग-अलग दिखा दें, और टॉप जो क्लीवेज को बाहर धकेल दें।
रोहन और अंजलि के बीच रिश्ता था, लेकिन प्रिया की तरफ रोहन की नज़रें हमेशा गंदी रहती थीं। एक दिन अंजलि और प्रिया के बीच फ्लैट में जबरदस्त लड़ाई हो गई। गालियाँ उड़ीं, थप्पड़ भी लगे। प्रिया ने अंजलि को “साली रंडी” कहा तो अंजलि ने प्रिया की चूत की गाली दी। लड़ाई के बाद प्रिया रोहन से भी बदतमीजी करने लगी। एक शाम रोहन अंजलि के फ्लैट पर गया। किचन में सामान ढूँढ रहा था। प्रिया बाहर से आई और ठंडी आवाज़ में बोली, “क्या चाहिए?”
रोहन ने पूछा, “चीनी कहाँ रखी है?”
प्रिया ने पलटकर जवाब दिया, “गांड में रखी है। निकाल ले।”
रोहन का खून खौल गया। उसने एक कदम आगे बढ़ाया, प्रिया के बाल पकड़कर पीछे खींचे और कान में फुसफुसाया, “साली, गांड में डाल दूँगा। इतना जोर से कि तू चल नहीं पाएगी। बकचोदी किसी और से कर। मुझे कम जानती है तू। अकड़ तोड़ के तेरी गांड फाड़ दूँगा।”
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प्रिया एकदम चुप हो गई। चेहरा सफेद पड़ गया। उसने धीरे से बताया कि चीनी कहाँ है। उस दिन के बाद रोहन ने उससे बात बंद कर दी। कुछ हफ्ते बाद दोनों लड़कियों की लड़ाई खत्म हो गई। प्रिया ने रोहन से माफी मांगी, लेकिन रोहन ठंडा रहा।
फिर आया प्रिया का बर्थडे। फ्लैट में पार्टी थी। प्रिया ने काला स्किन-टाइट जम्पसूट पहना था। गांड के दोनों गोल हिस्से कपड़े में फँसे हुए पानी ला रहे थे। क्लीवेज इतना गहरा था कि रोहन का लंड शॉर्ट्स में तन गया। केक काटने के बाद प्रिया ने रोहन को गले लगाया। बड़े बूब्स उसकी छाती से चिपक गए। 9 इंच का लंड प्रिया की जाँघ से टकराया। प्रिया की आँखें चौड़ी हो गईं। उसने अंदाजा लगा लिया।
पार्टी खत्म होने के बाद सब सो गए। प्रिया का बॉयफ्रेंड भी नीचे बेहोश पड़ा था। रोहन छत पर सिगरेट पीने गया। अँधेरा था। पानी की टंकी के पास शहर की लाइटें चमक रही थीं। प्रिया भी आ गई। बोली, “रोहन, अभी भी गुस्सा हो?”
“हाँ,” रोहन ने सीधा जवाब दिया।
“माफ कैसे करूँ?” प्रिया ने पास आकर पूछा।
रोहन ने कुछ नहीं कहा। बस उसकी गांड को पीछे से घूरता रहा। नीचे उतरते समय प्रिया की गांड मटक रही थी। रोहन का लंड फड़फड़ाने लगा, लेकिन उसने खुद को रोका।
कुछ दिन बाद इंडिया-ऑस्ट्रेलिया का मैच था। प्रिया ऑस्ट्रेलिया की फैन थी। रोहन ने उसे अपने फ्लैट बुलाया। प्रिया आई—टाइट ब्लू जीन्स, छोटी व्हाइट टॉप, हल्का मेकअप, लाल लिपस्टिक। गांड मटक रही थी, बूब्स कसे हुए। रोहन ने शर्त लगाई—हर फिफ्टी, सेंचुरी, विकेट पर हारने वाला एक बात मानेगा। डिमांड रिज़नेबल होनी चाहिए।
टॉस इंडिया ने जीता। रोहन मुस्कुराया, “पहली शर्त—ऑस्ट्रेलियन जर्सी उतार।”
प्रिया ने नखरे किए लेकिन उतार दी। काली ब्रा में 36D के बूब्स बाहर आने को बेताब थे। रोहन का लंड शॉर्ट्स में सीधा खड़ा हो गया। ऑस्ट्रेलिया ने जल्दी फिफ्टी बना ली। प्रिया बोली, “अंडरवियर निकाल। यहीं।”
रोहन ने शॉर्ट्स और अंडरवियर उतार दिए। 9 इंच का मोटा लंड झूलने लगा। नसें फूली हुईं। प्रिया की आँखें चमक उठीं। उसने निगलते हुए देखा। फिर विकेट गिरा। रोहन ने पीछे जाकर प्रिया की ब्रा का हुक खोल दिया। बड़े बूब्स आजाद हो गए। निप्पल नुकीले और कठोर। रोहन ने हाथ बढ़ाकर एक निप्पल मरोड़ा। प्रिया सिसकी।
फिर 100 रन हो गए। प्रिया ने शर्त लगाई—10 ओवर सिर्फ मैच देखो। रोहन का लंड तड़प रहा था। सातवें ओवर में विकेट गिरा। रोहन ने फ्रिज से दो बर्फ के टुकड़े निकाले। प्रिया को कसकर पकड़ा, जीन्स के अंदर हाथ डाला, पैंटी खींचकर दोनों आइस क्यूब चूत में ठूंस दिए। एक आधा अंदर घुस गया, दूसरा होंठों को ठंडा कर रहा था। प्रिया चीखी, “प्लीज रोहन… ठंड…!”
रोहन ने हाथ से दबाया, बर्फ को और अंदर धकेला, फिर छोड़ा। प्रिया ने तुरंत जीन्स और पैंटी उतार दीं। चूत से पानी टपक रहा था। वो रोहन के ऊपर चढ़ गई, शॉर्ट्स के ऊपर से चूत रगड़ने लगी। कमर गोल-गोल घुमा रही थी। रोहन का लंड फटने को था।
प्रिया उठी और बोली, “हिसाब बराबर।”
रोहन ने उसकी गर्दन पकड़ी, “हिसाब तब बराबर होगा जब मैं तेरी गांड फाड़ दूँगा। आज गांड से शुरू होगा।”
उसने प्रिया को घुमाया, टीवी की तरफ झुकाया, और एक झटके में पूरा 9 इंच गांड में घुसा दिया। प्रिया की चीख निकली, “आह्ह… बहनचोद… फट गई…!”
रोहन ने बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोर-जोर से पेलने लगा। गांड के छेद में लंड फच-फच आवाज कर रहा था। प्रिया दर्द से रो रही थी लेकिन गांड पीछे धकेल रही थी। “कुत्ते… तू पहले से सोच रहा था…!”
रोहन ने 15 मिनट गांड मारी। फिर लंड निकाला और चूत में ठोक दिया। प्रिया को उठाकर सोफे पर पटक दिया। टाँगें कंधों पर रखीं और रेलगाड़ी चलाने लगा। हर झटके पर प्रिया की चीखें गूँज रही थीं। “फाड़… फाड़ दे…!”
पहली पारी खत्म हुई। रोहन ने प्रिया को घुटनों पर बिठाया। “चूस।”
प्रिया ने लंड मुँह में लिया। जीभ से चाटा, बॉल्स चूसीं, टोपा खींचकर चाटा। 30 मिनट तक गहरी चूसाई। लार टपक रही थी। दूसरी पारी शुरू हुई। रोहन ने प्रिया को लंड पर बिठाया। कमर पकड़कर ऊपर-नीचे किया। प्रिया उछल-उछल कर चुद रही थी। “साले… इतना मोटा… अंजलि कैसे सहती है…!”
रोहन ने थप्पड़ मारा गांड पर। “अंजलि की बात मत कर। तू रंडी है। आज तेरी गांड और चूत दोनों फाड़ूँगा।”
उसने प्रिया को सोफे पर गिराया, टाँगें ऐंठकर एक जोरदार झटका मारा। प्रिया चीखी। होंठ कसकर चूसे, जीभ अंदर घुसाई। बूब्स पीसने लगा। निप्पल काटे। प्रिया झड़ गई। चूत से पानी फूट रहा था।
रोहन ने चूत चाटी। जीभ अंदर तक घुसाई, उंगलियाँ घुमाईं। प्रिया दोबारा झड़ गई। फिर लंड वापस चूत में। 25 मिनट की तूफानी चुदाई। इंडिया जीत गया। रोहन ने प्रिया को बेडरूम घसीटा। बेड के किनारे खींचा, दोनों टाँगें सीने से चिपकाईं, और खड़े होकर रेल चलाई। प्रिया हिल नहीं पा रही थी। सिर्फ चीख रही थी। “प्लीज… थक गई… बेहोश…!”
रोहन ने नहीं सुना। बाल पकड़कर गर्दन चाटी, काटी। फिर लुब्रिकेंट लगाया और गांड में दोबारा पूरा लंड घुसा दिया। 20 मिनट गांड मारी। लंड फच-फच आवाज कर रहा था। प्रिया की गांड लाल हो चुकी थी, छेद फटा हुआ। रोहन झड़ने वाला था। लंड निकाला, प्रिया के मुँह में ठूंस दिया। सर दोनों हाथों से पकड़कर गला तक उतार दिया। दो-तीन झटके। फिर मुँह से निकाला और पूरा वीर्य चेहरे पर, होंठों पर, जीभ पर उगल दिया।
प्रिया हाँफ रही थी। वीर्य चट कर रही थी। “जैसी पर्सनैलिटी… वैसी चुदाई…”
रात अभी बाकी थी। रोहन ने प्रिया को बाथटब में ले जाकर पानी भरवाया। वहाँ उसे बांधकर—हाथ पीछे, टाँगें फैलाकर—फिर से चोदा। गांड में, चूत में, मुँह में। थप्पड़, बाल खींचना, निप्पल मरोड़ना, गर्दन दबाना। प्रिया रो रही थी, भीख माँग रही थी, लेकिन हर बार “और जोर से” कह रही थी।
सुबह प्रिया ऑफिस नहीं जा सकी। रोहन ऑफिस से लौटा तो प्रिया सो रही थी। उसने जगाया, फिर से बाथटब में घसीटा। इस बार प्यार से नहीं—क्रूरता से। बर्फ से चूत रगड़ी, फिर गर्म पानी डाला। प्रिया चीखती रही। रात भर चुदाई चली।
अगले तीन साल रोहन ने प्रिया को अपना गुलाम बना लिया। हर हफ्ते बुलाता। कभी रस्सियों से बांधता, कभी आँखें बंद करके चोदता, कभी गांड में खीरा ठूंसकर छोड़ देता घंटों। प्रिया को दर्द में मजा आने लगा। वो खुद मांगने लगी—“आज गांड फाड़ दो… आज थप्पड़ मारो… आज गला दबाओ…”
तीन साल बाद प्रिया की शादी तय हो गई। शादी से एक हफ्ता पहले वो रोहन के पास आई। आखिरी रात। रोहन ने उसे पूरा नंगा किया, बेड पर बांधा—हाथ-पैर चारों तरफ। पहले गांड में लंड, फिर चूत, फिर मुँह। बीच-बीच में मोमबत्ती का मोम गिराया बूब्स पर। प्रिया चीखती रही लेकिन झड़ती भी रही। आखिर में रोहन ने पूरा वीर्य उसके अंदर उड़ेल दिया—गांड में, चूत में, मुँह में।
सुबह प्रिया उठकर तैयार हुई। दरवाजे पर खड़ी होकर बोली, “थैंक यू रोहन। तूने मुझे सिखाया कि दर्द ही असली मजा है। शादी के बाद भी कभी बुला लेना… मैं आऊँगी।”
रोहन ने उसके होंठ चूसे, गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। “जा। लेकिन याद रखना—तेरी गांड हमेशा मेरी रहेगी।”
प्रिया मुस्कुराई और चली गई। रोहन ने दरवाजा बंद किया। लंड अभी भी आधा खड़ा था।
प्रिया की शादी हो गई। पति का नाम विक्रम था—एक साधारण सा अफसर, पतला शरीर, छोटा लंड, और बिल्कुल बेस्वाद सेक्स। शादी के पहले हफ्ते में ही प्रिया ऊब चुकी थी। विक्रम सिर्फ पाँच मिनट में झड़ जाता था। न थप्पड़, न बाल खींचना, न गांड मारना। प्रिया की चूत सूखी रह जाती थी। रात-रात भर वो रोहन के 9 इंच के मोटे लंड की याद में अपनी उंगलियाँ चूत में घुसाती और रोती।
शादी के ठीक एक महीने बाद प्रिया ने रोहन को मैसेज किया।
“मैं आ रही हूँ। आज रात। विक्रम ऑफिस ट्रिप पर है तीन दिन के लिए। मुझे तेरी जरूरत है। जो चाहे कर मेरे साथ।”
रात के 11 बजे प्रिया रोहन के फ्लैट के दरवाजे पर खड़ी थी। काले कोट के नीचे कुछ नहीं। कोट खोला तो नंगी खड़ी थी। बड़े 36D बूब्स पर पहले से ही निप्पल कठोर। गांड पर हल्के निशान—शायद खुद ही कुछ किया था। आँखों में भूख थी।
रोहन ने दरवाजा बंद किया। एक शब्द नहीं बोला। प्रिया के बाल पकड़कर घसीटते हुए बेडरूम ले गया। बेड के पास एक लोहे का फ्रेम लगा था—रोहन ने तीन साल में ही तैयार कर रखा था। हाथ-पैर चारों कोनों पर चेन से बांध दिए। प्रिया की टाँगें पूरी फैली हुईं। चूत और गांड दोनों खुली पड़ी थीं।
रोहन ने पहले एक मोटी ब्लैक वैक्स कैंडल जलाई। गर्म मोम सीधा प्रिया के बाएँ बूब्स पर गिराया। प्रिया चीखी। मोम सख्त होकर निप्पल पर जम गया। फिर दाएँ बूब्स पर। फिर पेट पर। फिर चूत के ऊपर के बालों पर। प्रिया तड़प रही थी। “आह्ह… जल रहा है… और गिरा…!”
रोहन ने मुस्कुराते हुए मोम का एक और थप्पड़ चूत के होंठों पर मारा। प्रिया की कमर उछली। फिर रोहन ने एक पतली बांस की छड़ी निकाली। पहले गांड पर दस जोरदार वार। हर वार पर लाल लकीर उभर आई। प्रिया रो रही थी लेकिन गांड ऊपर उठा रही थी। “जोर से… फाड़ दे…!”
छड़ी चूत पर भी पड़ी। दो-तीन वार। चूत के होंठ सूज गए। फिर रोहन ने एक बड़ा काला डildo—11 इंच का—निकाला। पहले चूत में ठूंस दिया। पूरा अंदर तक। प्रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। “बहुत बड़ा… अंदर तक…!” रोहन ने डildo को तेजी से अंदर-बाहर किया। पानी की आवाज आने लगी। फिर निकाला और गांड में घुसा दिया। प्रिया चीखी। गांड का छेद फैल गया। रोहन ने डildo को अंदर छोड़ दिया और चेन को थोड़ा और कस दिया।
अब असली खेल शुरू हुआ। रोहन ने अपना 9 इंच का लंड निकाला। पहले प्रिया के मुँह में ठूंसा। गला तक। प्रिया की आँखों से आँसू बहने लगे। रोहन ने सर पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदा। लार मुँह से बाहर निकल रही थी। दस मिनट बाद लंड निकाला। प्रिया हाँफ रही थी। “और… गला फाड़…!”
रोहन ने प्रिया को पलटा। चेहरे के बल लिटाया। गांड ऊपर। डildo अभी भी अंदर था। उसने डildo निकाला और अपना लंड एक झटके में गांड में घुसा दिया। पूरा। प्रिया की चीख दीवारों से टकराई। रोहन ने बाल पकड़कर पीछे खींचे और रेलगाड़ी चलाने लगा। हर झटके पर गांड की मांसपेशियाँ फड़क रही थीं। “कुत्ते की औलाद… तेरी गांड मेरी है… शादीशुदा रंडी…!”
बीस मिनट गांड मारने के बाद लंड निकाला। प्रिया की गांड से सफेद झाग निकल रहा था। रोहन ने तुरंत चूत में डाल दिया। प्रिया दोबारा झड़ गई। शरीर काँप रहा था। रोहन रुका नहीं। चूत फाड़ते हुए उसने दोनों निप्पल मरोड़े। फिर गर्दन दबाई। प्रिया की साँस रुकने लगी। आँखें पलटीं। ठीक उसी वक्त रोहन ने जोर का झटका मारा और प्रिया तीसरी बार झड़ गई।
रात अभी बाकी थी। रोहन ने चेन खोली। प्रिया को घसीटते हुए बाथटब में ले गया। ठंडा पानी भरा। प्रिया को पानी में बैठाया। फिर बर्फ के टुकड़े चूत और गांड दोनों में ठूंस दिए। प्रिया काँप रही थी। “ठंड… मर जाएगी…!” रोहन ने उसका सर पानी में दबाया। पाँच सेकंड। दस सेकंड। प्रिया हाथ-पैर पटकने लगी। रोहन ने छोड़ा। प्रिया खाँस रही थी। “और… डुबा…!”
रोहन ने फिर से डुबाया। इस बार लंबा। प्रिया की गांड पानी के ऊपर थी। रोहन ने खड़े होकर गांड में लंड घुसा दिया। पानी के अंदर चुदाई। प्रिया की चीखें पानी में गूँज रही थीं। जब रोहन झड़ने वाला था तो लंड निकाला, प्रिया का सर पानी से बाहर निकाला और मुँह में ठूंस दिया। पूरा वीर्य गले में उतार दिया। प्रिया ने निगला। कुछ बाहर निकला तो रोहन ने थप्पड़ मारा। “सब निगल। एक बूँद भी बाहर नहीं।”
सुबह चार बजे तक खेल चला। प्रिया की गांड और चूत दोनों सूजी हुईं थीं। बूब्स पर मोम के निशान, गांड पर छड़ी के लाल निशान, गर्दन पर उंगलियों के निशान। रोहन ने उसे बेड पर लिटाया। प्रिया सो नहीं पा रही थी। शरीर दर्द से काँप रहा था लेकिन आँखों में संतुष्टि थी।
दूसरे दिन दोपहर में प्रिया फिर आई। इस बार हाथ में एक काला बैग। अंदर रस्सियाँ, क्लैम्प्स, और एक इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस। “आज तू मुझे पूरी तरह तोड़ दे,” प्रिया ने कहा। “विक्रम को शक हो रहा है। मुझे ऐसा सबक दे कि मैं भूल न पाऊँ।”
रोहन ने प्रिया को पूरी तरह नंगा किया। हाथ पीछे बांधे। निप्पल पर मेटल क्लैम्प्स लगाए। चेन से जोड़ दिए। थोड़ा खींचा तो प्रिया चीखी। फिर इलेक्ट्रिक पैड चूत के दोनों तरफ लगाए। लो वोल्टेज। प्रिया का शरीर झटके से उछला। “आह्ह… करंट… और बढ़ा…!”
रोहन ने वोल्टेज बढ़ाया। प्रिया फर्श पर गिर गई। शरीर ऐंठ रहा था। रोहन ने उसी हालत में उसका मुँह खोला और लंड ठूंस दिया। प्रिया करंट लगते हुए भी लंड चूस रही थी। लार और आँसू मिलाकर बह रहे थे। रोहन ने प्रिया को उठाया, दीवार से सटाया। टाँगें फैलाकर अपना लंड चूत में घुसाया। उसी समय क्लैम्प्स खींचे और करंट दिया। प्रिया पागलों की तरह चीखी। शरीर काँप रहा था। रोहन रुका नहीं। दीवार से टकराते हुए चोदता रहा।
रात को रोहन ने एक नया खेल खेला। प्रिया को कुर्सी पर बैठाया। हाथ-पैर बांधे। आँखों पर काली पट्टी। फिर एक-एक करके अलग-अलग चीजें इस्तेमाल कीं—पहले मोटी मोमबत्ती चूत में, फिर गांड में। फिर अदरक की पतली पट्टी गांड में ठूसी। जलन इतनी तेज थी कि प्रिया रोने लगी। “निकाल… जल रहा है…!” रोहन ने नहीं निकाला। बल्कि उसी जलन में अपना लंड चूत में डालकर जोर-जोर से पेलने लगा। प्रिया पागल हो रही थी। दर्द और मजे का मिश्रण। वो झड़ गई। शरीर शिथिल पड़ गया।
तीसरे दिन सुबह प्रिया को घर लौटना था। विक्रम आने वाला था। रोहन ने आखिरी बार प्रिया को बेड पर बांधा। इस बार दोनों छेदों में एक साथ—चूत में लंड, गांड में मोटा डildo। प्रिया की चीखें घर में गूँज रही थीं। रोहन ने बाल पकड़कर सर पीछे खींचा और कान में फुसफुसाया, “शादीशुदा रंडी। तेरा पति तुझे ऐसे कभी नहीं चोदेगा। याद रखना—तेरी गांड, तेरी चूत, तेरे निप्पल सब मेरे हैं। जब भी बुलाऊँगी, तू आएगी। नहीं तो मैं खुद आकर तेरे पति के सामने तेरी गांड फाड़ूँगा।”
प्रिया आँसू भरी आँखों से बोली, “आऊँगी… हमेशा आऊँगी… तू मेरा मालिक है…”
रोहन ने आखिरी झटके मारे। पहले चूत में वीर्य उड़ेल दिया। फिर लंड निकालकर गांड में डाल दिया और बाकी वीर्य वहाँ छोड़ दिया। अंत में प्रिया के मुँह में लंड रखकर बाकी बचा हुआ निगलवाया।
प्रिया उठी। कपड़े पहने। चलते-चलते दरवाजे पर रुकी। मुड़ी। आँखों में अभी भी वही भूख थी। “अगली बार और क्रूर होना। मुझे तोड़ना। पूरी तरह।”
रोहन ने सिर्फ सिर हिलाया। दरवाजा बंद हुआ। फ्लैट में सन्नाटा छा गया। लेकिन रोहन जानता था—यह अंत नहीं था। प्रिया बार-बार आएगी। हर बार और ज्यादा टूटी हुई, और ज्यादा भूखी। और रोहन हर बार उसे और गहराई तक तोड़ेगा। क्योंकि कुछ रंडियाँ सिर्फ दर्द में ही जीती हैं। और प्रिया उनमें से एक थी।
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