फटी चूत की गुलामी

अर्जुन ने पड़ोस की 21 साल की जवान स्नेहा को छत से लटकाकर, बेल्ट मारकर और 9 इंच के लंड से गांड-चूत दोनों फाड़कर बर्बर BDSM चुदाई का गुलाम बना लिया। दर्द भरी चीखों वाली बेकाबू रातें।

बात उन दिनों की है जब मैं भोपाल के एक नामी इंजीनियरिंग कॉलेज में फाइनल ईयर का छात्र था। शहर की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में बैचलर लड़कों के लिए किराए का अच्छा मकान ढूंढना आसान नहीं होता। पिछले दो साल एक पुराने, भीड़-भाड़ वाले इलाके में गुजारने के बाद मैंने फैसला किया कि अब कुछ शांत और प्राइवेट जगह चाहिए। काफी तलाश के बाद मुझे शहर के बाहरी इलाके में एक पुराना लेकिन बड़ा मकान मिल गया। इलाका थोड़ा सुनसान था, आस-पास कम ही घर थे, लेकिन किराया सस्ता और जगह खुली थी।


मकान की हालत खराब थी। महीनों से खाली पड़ा था, धूल-मिट्टी और मकड़ियों के जाले हर तरफ। सफाई में दो दिन लग गए। पड़ोस के घर के छोटे-छोटे बच्चे, जिनकी उम्र 8 से 12 साल के बीच थी, मुझे देखकर उत्सुक हो गए और उन्होंने सफाई में हाथ बंटाया। शाम ढलते ही मैं थककर चूर हो गया। नहाया, कुछ खाया और सो गया।


अगली सुबह पड़ोस वाले अंकल-आंटी ने मुझे खाने पर बुलाया। उनके परिवार में कुल सात सदस्य थे – माता-पिता, चार छोटे बच्चे और उनकी 21 साल की बड़ी बेटी, जो अभी हाल ही में कॉलेज से पासआउट हुई थी। नाम था उसका – स्नेहा। उस दिन स्नेहा बिलासपुर में किसी जॉब इंटरव्यू के लिए गई हुई थी, इसलिए मुलाकात नहीं हो पाई। खाना खाकर मैंने परिवार से अच्छी बातचीत की और वापस अपने कमरे में लौट आया।


अगले कुछ दिनों में मेरा रूटीन सेट हो गया – सुबह एक्सरसाइज, कॉलेज, शाम को वापसी। बीच-बीच में पड़ोसी बच्चों के साथ हंसी-मजाक चलता रहता। एक शाम छत पर खड़े होकर दोस्त से फोन पर बात कर रहा था, तभी नजर पड़ी पड़ोस की छत पर। वहां एक बेहद खूबसूरत, गोरी-चिट्टे रंग की जवान लड़की कुर्सी पर बैठी बच्चों से बातें कर रही थी। उसकी उम्र करीब 21 साल थी, लंबे काले घने बाल, बड़ी-बड़ी आंखें, गुलाबी होंठ और वो फिगर… ओह माय गॉड! 36 इंच के भारी-भरकम स्तन, पतली कमर और 38 इंच के गोल-मटोल, उभरे हुए नितंब। वह बिल्कुल किसी बॉलिवुड हीरोइन जैसी लग रही थी।


मैं छत पर ही खड़ा उसे घूरता रहा। नीचे आकर सीधा बाथरूम में घुसा और जोर-जोर से मुठ मार डाली। लेकिन संतुष्टि कहां? रात को भी उसकी याद में दो बार और लंड हिलाया।


अगली सुबह मैं छत पर योगासन कर रहा था। तभी देखा, स्नेहा अपनी छत पर एक्सरसाइज कर रही है। वह टाइट स्पोर्ट्स ब्रा और शॉर्ट्स पहने थी। हर उछाल के साथ उसके विशाल स्तन ऊपर-नीचे लहरा रहे थे, जैसे जेली की तरह। झुकते वक्त उसकी डीप नेकलाइन से स्तनों की गहरी खाई साफ दिख रही थी। टाइट शॉर्ट्स में उसकी चूत की लाइन और मोटी गांड की दरार उभरी हुई थी। मैंने आंखें बंद करने का नाटक किया लेकिन उसकी हर हरकत को अपनी आंखों से चूस रहा था।


उस दिन से मैं रोज छत पर समय बिताने लगा। स्नेहा भी मुझे नोटिस कर चुकी थी। मेरा 6 फीट लंबा, वर्कआउटेड बॉडी – चौड़ी छाती, पतली कमर, मोटी बाहें – उसे आकर्षित कर रहा था। एक दिन मैंने जानबूझकर सिर्फ शॉर्ट्स पहन रखे थे, ऊपर कुछ नहीं। उसका ध्यान बार-बार मेरी तरफ जा रहा था।


अब समय आ गया था एक्शन लेने का। मैंने स्नेहा की मां से कहा कि मुझे उसकी कुछ स्टडी नोट्स चाहिए। आंटी ने कहा, “स्नेहा अभी नहा रही है, मैं भिजवा दूंगी।”


कुछ देर बाद दरवाजा खटखटाया गया। मैं सिर्फ तौलिए में लिपटा हुआ था। स्नेहा अंदर आई। उसने हल्का सा सलवार सूट पहना था, जो उसके उभरे हुए स्तनों को कसकर दबाए हुए था। मैं पानी लाने गया, तभी तौलिया फंस गया और पूरी तरह गिर गया। मेरा 9 इंच लंबा, 3.5 इंच मोटा, नस-नस उभरा हुआ लंड सीधा उसके सामने खड़ा हो गया।


स्नेहा की आंखें फट गईं। उसका चेहरा लाल हो गया। मैंने फटाफट पानी का ग्लास उसके ऊपर गिरा दिया। वह पूरी तरह भीग गई। मैं “सॉरी” कहते हुए उसके स्तनों पर हाथ फेरने लगा। उसके निप्पल सख्त हो चुके थे। वह मेरे लंड को घूर रही थी। मैंने मौका देखकर उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसके स्तनों को जोर से दबाया। स्नेहा के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली। लेकिन मैंने खुद को रोका और तौलिया लपेट लिया।

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उसके जाने के बाद मैंने एक हफ्ते तक उसे अनदेखा किया। वह तड़प रही थी।
फिर पता चला कि पूरा परिवार शादी में जा रहा है। मैंने छत से चिट्ठी फेंकी। अगले दिन घर में ताला लगा देखा तो गुस्से में दो बोतल देशी शराब ले आया। दो पैग डाउन किए ही थे कि दरवाजा खटखटाया गया। स्नेहा खड़ी थी। उसने बताया कि वह घरवालों को झूठ बोलकर सहेली के घर चली गई थी और अब लौट आई है।


“क्यों?” मैंने गुस्से से पूछा।
“क्योंकि… क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूं अर्जुन। तुम्हारा वो मोटा लंड देखकर मेरी चूत रोज रात को गीली हो जाती है,” उसने शर्माते हुए कहा।


बस, फिर क्या था। मैंने उसे अंदर खींचा, दरवाजा बंद किया और उसके बाल पकड़कर जोर से चूम लिया। नशे में मैं पूरी तरह बर्बर हो चुका था। मैंने उसके कपड़े फाड़ डाले। स्नेहा की गोरी, चिकनी देह सामने थी – भारी स्तन, गुलाबी निप्पल, साफ चूत जिस पर हल्के बाल थे।


मैंने उसे घुटनों पर झुकाया और अपना 9 इंच का लंड उसके मुंह में ठूंस दिया। “चूस साली, गहरी चूस!” मैंने उसके सिर को पकड़कर जोर-जोर से मुंह चोदा। लंड उसके गले तक जा रहा था। वह उबकाई ले रही थी, आंसू बह रहे थे, लेकिन मैं नहीं रुका। आखिरकार मैंने उसके मुंह में ही पहला माल उछाल दिया।


फिर मैंने उसे बेड पर पटका, उसके हाथ बांध दिए (मेरे पास पहले से रस्सी रखी थी) और उसके स्तनों पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। “आआह… अर्जुन… दर्द हो रहा है!” लेकिन उसके चेहरे पर मस्ती थी। मैंने उसके निप्पल काटे, चूसा, फिर नीचे जाकर उसकी चूत को जीभ से बर्बर तरीके से चाटा। दो उंगलियां अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर किया। स्नेहा झड़ गई।
अब असली खेल शुरू हुआ। मैंने उसके पैर फैलाए, तकिया कमर के नीचे रखा और अपना मोटा लंड उसकी टाइट, वर्जिन चूत पर रखा। “डर लग रहा है अर्जुन… धीरे से…”


“चुप साली रंडी!” कहते हुए मैंने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड घुस गया। वह चीख पड़ी। मैंने दूसरा जोरदार झटका दिया। पूरा 9 इंच उसकी चूत में समा गया। खून की हल्की धार निकली। मैंने रुके बिना पागलों की तरह चोदना शुरू कर दिया। हर थप्पड़ के साथ “चट-चट-चट” की आवाज गूंज रही थी। मैंने उसके गले पर हाथ रखकर दबाया, स्तनों पर काटा, नितंबों पर जोरदार थप्पड़ मारे।


“मारो… और जोर से चोदो मुझे… मैं तुम्हारी रंडी हूं!” स्नेहा चिल्लाई।
आधे घंटे तक बर्बर चुदाई के बाद मैंने उसे शावर के नीचे ले जाकर खड़ा किया। फिर से लंड खड़ा हो गया। मैंने उसे झुकाया और शैंपू लगाकर उसकी गांड में उंगली घुसाई। पहले एक, फिर दो, फिर तीन। उसके बाद अपना मोटा लंड सेट किया और एक ही झटके में आधा गांड में ठोक दिया। स्नेहा दर्द से चीखी, लेकिन मैंने उसके बाल खींचकर पूरा लंड अंदर कर दिया। गांड चुदाई शुरू हुई। मैंने उसे बेइंतहा ठोका – थप्पड़, चिकोटी, गले दबाना, सब चल रहा था।


उस दिन हमने चार राउंड किए। रात को भी तीन बार।
अगले चार दिन तक स्नेहा मेरे कमरे में रही। हमने हर तरीके की बर्बर चुदाई की। एक दिन मैंने उसे बेड से बांधकर छड़ी से नितंब लाल कर दिए। फिर उसकी चूत और गांड दोनों में लंड डालकर दोहरी चुदाई की। उसकी आंखों पर पट्टी बांधकर घंटों तक ठोका। वह रो रही थी, चीख रही थी, लेकिन बार-बार और मांग रही थी।


“तुम्हारा लंड मेरी चूत फाड़ रहा है अर्जुन… लेकिन रुकना मत!”
एक शाम मैंने उसे बालकनी में खड़ा करके चोदा, जहां कोई भी देख सकता था। उसकी चीखें पूरे इलाके में गूंज रही थीं। हमने रोल प्ले किए – कभी मैं उसके मालिक, वह मेरी गुलाम रंडी। कभी वह मुझे बांधती और मैं उसे चोदता।


आज भी जब मैं उस घर के पास से गुजरता हूं, तो याद आ जाती है स्नेहा की चीखें, उसके आंसू और उसकी भूखी चूत। लेकिन वो सिर्फ शुरुआत थी। असली कहानी तो परिवार के वापस आने के बाद शुरू हुई, जब हम दोनों ने खतरे को अपने जुनून का हिस्सा बना लिया।


परिवार लौट आया था। स्नेहा दिन में सामान्य सी लड़की बनकर रहती, लेकिन रात होते ही वह मेरे कमरे की खिड़की से चुपके से कूदकर अंदर आ जाती। पहली रात ही मैंने उसे इंतजार नहीं करवाया। जैसे ही वह अंदर आई, मैंने उसके बालों को मुट्ठी में भरकर उसे घुटनों पर झुका दिया। “आज तेरी सजा है रंडी। चार दिन तक तू मेरी गुलाम रही, अब असली मालिक तुझे तोड़ेगा।”


मैंने पहले से तैयार रखी चेन और लॉक से उसके हाथ पीछे बांध दिए। उसकी आंखों पर काली पट्टी बांध दी। फिर उसके कपड़े फाड़ते हुए मैंने उसके पूरे शरीर पर मोमबत्ती की गर्म बूंदें गिराईं। स्नेहा कराह उठी, “आआह… जल रहा है अर्जुन… दर्द हो रहा है!” लेकिन उसकी चूत से पानी टपक रहा था।

मैंने उसके निप्पल पर क्लिप लगाई, जो दबाते ही उसके मुंह से जोर की चीख निकाली। फिर मैंने उसे बेड पर उल्टा लिटाकर उसकी मोटी गांड पर बेल्ट से 50 जोरदार प्रहार किए। उसकी सफेद गांड लाल होकर सूज गई थी। हर थप्पड़ के बाद मैं उसकी चूत में तीन उंगलियां घुसाकर तेजी से फिंगर फक करता।


जब वह रो-रोकर भीख मांगने लगी, तब मैंने अपना 9 इंच का मोटा लंड उसके मुंह में ठोंक दिया। गला फाड़ चुदाई। लंड उसके गले तक जा रहा था, वह उबकाई ले रही थी, थूक और आंसू उसके चेहरे पर बह रहे थे। मैंने उसके सिर को पकड़कर 10 मिनट तक बिना रुके मुंह चोदा और आखिर में पूरा माल उसके गले में उतार दिया।


फिर असली चुदाई शुरू हुई। मैंने उसके पैरों को फैलाकर बेड के कोनों से बांध दिया। उसकी चूत पूरी तरह खुली हुई थी। मैंने लंड पर थूक लगाया और एक ही झटके में पूरी जड़ तक घुसा दिया। स्नेहा की चीख पूरे कमरे में गूंज गई। मैंने उसकी गर्दन दबाते हुए, स्तनों पर काटते हुए, पागलों की तरह पंपिंग शुरू कर दी। “ले साली, तेरी वर्जिन चूत अब मेरी प्रॉपर्टी है!” हर धक्के के साथ उसके स्तन लहरा रहे थे। मैंने बीच-बीच में उसके चेहरे पर थप्पड़ मारे, मुंह में उंगली घुसाई।


एक घंटे तक इस बर्बर पोजीशन में चोदने के बाद मैंने उसे घुटनों पर खड़ा किया और गांड में घुसा दिया। शैंपू और थूक की मदद से भी उसकी टाइट गांड फटने वाली थी। पूरा लंड अंदर डालकर मैंने उसे कुत्ते की तरह चोदा। उसके बाल खींचे, कान काटे, और बार-बार उसके मुंह में थूक डाला। स्नेहा अब दर्द और मजा के बीच पागल हो चुकी थी। वह चिल्ला रही थी, “और जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… मैं तुम्हारी गुलाम रंडी हूं अर्जुन!”


उस रात हमने पांच राउंड किए। सुबह होने से पहले मैंने उसे एक और सजा दी – उसके पूरे शरीर पर अपने नाम के निशान बनाए, चिकोटी काटकर, दांत गड़ाकर।


अगले कई हफ्तों में हमारा खेल और खतरनाक होता गया। एक दिन जब घरवाले बाजार गए, मैंने स्नेहा को अपने कमरे में बुलाया। मैंने उसे पूरी तरह नंगा करके छत की गिरोह पर लटका दिया। हाथ ऊपर बंधे, पैर फैले। फिर मैंने वाइब्रेटर लाकर उसकी चूत और गांड दोनों में डाल दिया। स्विच ऑन किया। स्नेहा तड़पने लगी। “निकालो… प्लीज… मैं झड़ जाऊंगी!” लेकिन मैंने उसे 20 मिनट तक ऐसे ही छोड़ा। उसके पैरों से चूत का पानी टपक रहा था।


फिर मैं आया। पहले मैंने उसके मुंह में लंड ठोंका, फिर पीछे से दोनों छेदों में बारी-बारी चोदा। डबल पेनेट्रेशन के लिए मैंने एक बड़ा डिल्डो लाकर उसकी चूत में डाला और खुद गांड में घुस गया। स्नेहा लगभग बेहोश हो गई थी। उसकी चीखें अब सिसकारियों में बदल गई थीं। मैंने उसकी कमर पकड़कर इतनी तेज रफ्तार से ठोका कि बेड हिल रहा था।


एक और यादगार रात थी जब मैंने उसे ब्लाइंडफोल्ड करके कार में बिठाया और शहर के बाहर सुनसान जगह ले गया। वहां जंगल के किनारे मैंने उसे कार के बोनट पर लिटाया। रस्सियों से बांधा। फिर रात भर खुले में उसकी चुदाई की। मच्छर काट रहे थे, ठंड लग रही थी, लेकिन मैंने उसे बार-बार चोदा। गांड में, मुंह में, स्तनों के बीच।

मैंने उसके शरीर पर अपनी पेशाब की धार छोड़ी और फिर उसे चाटने को मजबूर किया। स्नेहा अब पूरी तरह ब्रोकन हो चुकी थी, लेकिन उसका जुनून और बढ़ गया था।


समय के साथ हमने और क्रूर खेल खेले। एक बार मैंने उसके मासिक धर्म के दिनों में भी उसे नहीं छोड़ा। खून से सनी चूत को चोदा, मुंह में डाला। वह रो रही थी लेकिन भीख मांग रही थी और ज्यादा। मैंने उसे पब्लिक प्लेस में रिस्की सेक्स के लिए मजबूर किया – कॉलेज के पीछे, पार्क में, यहां तक कि एक बार सिनेमा हॉल की पिछली सीट पर उसकी स्कर्ट ऊपर करके गांड में उंगली डालकर चोदा।


तीन महीने बाद स्नेहा ने खुद प्रस्ताव रखा। “अर्जुन, मुझे और तोड़ो। मुझे लगातार दर्द चाहिए।” उस दिन मैंने उसे घर में अकेला पाकर पूरी रात टॉर्चर सेशन दिया। मैंने उसके निप्पल पर आइस क्यूब्स रखे, फिर गर्म तेल डाला। उसके क्लिटोरिस पर क्लैंप लगाया। फिर एक के बाद एक तीनों छेदों में चोदा – मुंह, चूत, गांड। आखिर में मैंने उसे डीप थ्रोट करते हुए इतना जोर से चोदा कि उसकी नाक से मेरा माल निकलने लगा।


हमारी ये खतरनाक मोहब्बत कई सालों तक चली। स्नेहा ने अपनी जॉब छोड़ दी और मेरी गुलाम बनकर रहने लगी। हमने कई शहर घूमे – दिल्ली, मुंबई, गोवा। हर जगह नई-नई क्रूरता के साथ सेक्स। गोवा की समुद्र किनारे रात में मैंने उसे नंगा करके रेत पर बांधा और घंटों चोदा। लहरें उसके शरीर को छू रही थीं, मैं उसके अंदर था।


आज भी जब हम मिलते हैं, तो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। स्नेहा अब 25 साल की हो चुकी है, लेकिन उसकी भूख कभी कम नहीं हुई। वह अभी भी मेरे सामने घुटनों पर बैठकर कहती है, “मालिक, आज फिर से अपनी रंडी को फाड़ दो।”


ये कहानी सिर्फ सेक्स की नहीं, दो शरीरों के बीच उस जंगली, बर्बर, क्रूर जुनून की है जो दर्द को मजा और मजा को लत बना देता है। जो पढ़ रहा है, वो जानता है कि ऐसी चुदाई जिंदगी में एक बार भी मिल जाए तो इंसान कभी नहीं भूलता। स्नेहा की चीखें, उसकी लाल गांड, फटी चूत और मेरे लंड की गर्मी… ये सब अब मेरी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।

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