दिल्ली की मोटी टीचर रीना की 44 इंच चूचियों और टाइट मोटी गांड को राहुल ने बस से लेकर मनाली की बर्फीली बालकनी तक बेरहमी से फाड़ा। खतरनाक चुदाई, रोती-चीखती रंडी, थूक-मूत और बिना रुके 8 इंच के मोटे लंड की बर्बर मार।
नमस्कार दोस्तों, मैं राहुल। दिल्ली के एक नामी प्राइवेट स्कूल में साइंस टीचर की जॉब करता हूं। रोज सुबह घड़ी की सुई 6:30 बजे होते ही मैं घर से निकल पड़ता हूं। लोकल बस पकड़कर करीब 45 मिनट की दूरी तय करके स्कूल पहुंचता हूं। बस हमेशा खचाखच भरी रहती है। भीड़ में धक्कम-धुक्की, पसीने की महक और कभी-कभी अनजानी औरतों के मुलायम जिस्म का स्पर्श।
मुझे मोटी, गोरी और भारी-भरकम महिलाएं बेहद पसंद हैं। उनकी मोटी टांगें, लटकती चूचियां और भारी गांड देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है। दोस्तों, पिछले तीन महीने से मेरी चूत की भूख मिट नहीं रही थी। सिर्फ हाथों से या वीडियो देखकर काम चला रहा था। लेकिन किस्मत ने एक दिन ऐसा मोड़ लिया कि पूरी जिंदगी याद रह जाए।
उस दिन बस में भीड़ ज्यादा थी। मैं खड़ा था। अचानक पीछे से एक मोटी औरत मेरे करीब आकर खड़ी हो गई। उसकी उम्र करीब 42 साल थी। नाम था रीना। स्कूल टीचर। उसका जिस्म देखकर मेरा मुंह सूख गया। 5 फीट 4 इंच की हाइट, लेकिन वजन शायद 85 किलो के आसपास। गोरा रंग, मोटी भुजाएं, पेट पर हल्की चर्बी और सबसे खतरनाक – उसके 44 इंच के विशाल बूब्स। ब्रा के बावजूद वे बार-बार मेरी पीठ और बाजू से टकरा रहे थे। नीचे उसकी गांड तो जैसे दो बड़े-बड़े गेंदों जैसी थी – गोल, मोटी और टाइट।
“सर, थोड़ा साइड हो जाइए ना,” उसने नरम आवाज में कहा।
मैंने मुड़कर देखा। उसकी आंखों में शरारत थी। मैंने मुस्कुराते हुए जगह दी। बस ब्रेकर पर आई तो वह मेरी तरफ झुक गई। उसके बाएं बूब का पूरा वजन मेरी बांह पर आ गया। नरम, गर्म और भारी। मेरा लंड पैंट में तन गया। उसने महसूस किया होगा, क्योंकि उसकी नजर मेरी जांघों की तरफ गई और फिर वह शरमाकर मुस्कुराई।
“रीना हूं, मॉडर्न पब्लिक स्कूल में पढ़ाती हूं,” उसने बात शुरू की।
“राहुल, सेंट जॉर्ज स्कूल,” मैंने जवाब दिया।
उस दिन से रोजाना बस में हमारी मुलाकात होने लगी। वह मेरे लिए सीट बचाकर रखने लगी। सीट छोटी थी, हम दोनों को पास-पास बैठना पड़ता। उसकी मोटी जांघें मेरी जांघों से सटी रहतीं। बातों-बातों में मैं उसके बूब्स पर हाथ फेर लेता। कभी ब्रेकर के बहाने उसकी गांड को हल्का दबा देता। वह कभी विरोध नहीं करती, बस गहरी सांस लेकर मेरी तरफ देखती।
रीना की शादी को 18 साल हो चुके थे। दो बच्चे। पति सरकारी नौकरी में थे, ज्यादातर बाहर रहते थे। घर में अकेली। उसकी आंखों में वो प्यास साफ दिखती थी जो पांच साल से बुझी नहीं थी।
एक शुक्रवार को स्कूल में हाफ डे था। बस में वह मेरे कंधे पर सिर रखकर बोली, “राहुल, आज मूवी चलें? बहुत दिनों से मन नहीं लगा।”
मैं राजी हो गया। हम दोनों सीधे साकेत सिटी वॉक के मल्टीप्लेक्स पहुंचे। Animal पार्ट 2 लगी हुई थी। डार्क हॉल, लास्ट रो। जैसे ही लाइट्स ऑफ हुईं, रीना मेरे सीने से लिपट गई। उसके विशाल बूब्स मेरे शरीर पर दब रहे थे। मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी जांघ पर रख दिया। वह धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरकाने लगी।
मूवी के हॉट सीन शुरू होते ही मैंने उसकी गर्दन चूम ली। वह सिहर उठी। मैंने उसका चेहरा मोड़ा और गहरी फ्रेंच किस करने लगा। उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी। मैंने एक हाथ उसके बूब पर रखा और जोर से दबाया। “आह्ह्ह… राहुल… धीरे…” वह फुसफुसाई, लेकिन उसकी आंखें बंद थीं और होंठ खुले हुए थे।
मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। हाथ अंदर डाला। उसकी चूत पहले से ही गीली थी। मोटी, रसीली चूत। दो उंगलियां डालते ही वह कसमसा उठी। “उम्म्म्म… अंदर डालो ना…”
वह अचानक खड़ी हुई। “चलो बाहर।”
मैं समझ गया। हम दोनों तेजी से हॉल से निकले। मैंने उसे अपनी बाइक पर बिठाया और सीधा अपने फ्लैट ले आया – द्वारका सेक्टर 12 का एक 2BHK।
दरवाजा बंद होते ही मैंने रीना को दीवार से सटा दिया। उसके होंठ चूसने लगा, गर्दन पर काटने लगा। उसने मेरी शर्ट फाड़ी। मैंने उसकी कुर्ता और ब्रा एक साथ उतार दी। 44 इंच के दोनों बूब्स जैसे जेली की तरह लहरा रहे थे। भारी, लटकते हुए, गहरे गुलाबी चुचुक। मैंने एक बूब मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरे को हाथ से मसलता रहा।
“आह्ह्ह… राहुल… तुम मुझे मार डालोगे… इतने साल बाद…” वह कराह रही थी।
मैंने उसे उठाकर बेड पर फेंक दिया। उसकी सलवार और पैंटी खींचकर उतारी। सामने थी – मोटी, सफेद, चर्बी वाली गांड और उसके बीच में गुलाबी चूत। बाल साफ किए हुए। मैं घुटनों के बल बैठा और उसकी चूत पर जीभ फेरने लगा।
रीना पागल हो गई। “चाटो… जोर से चाटो… मेरे पति ने कभी नहीं चाटा…”
मैंने उसकी चूत में पूरी जीभ घुसा दी। क्लिटोरिस चूसता रहा। दो उंगलियां अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। पांच मिनट में उसका पहला पानी निकला। वह चीखी, “मैं मर गई… राहुल… तुम्हारी रंडी हूं मैं…”
अब मेरी बारी। मैंने पैंट उतारी। मेरा 8 इंच लंबा, मोटा लंड लोहे की तरह खड़ा था। रीना की आंखें फटी रह गईं। “ये तो घोड़े जैसा है…”
मैंने उसे घुटनों के बल बैठाया और मुंह में ठूंस दिया। “चूस रंडी। पूरा मुंह भर के चूस।”
रीना जैसे भूखी शेरनी थी। गले तक ले जा रही थी। थूक निकल रहा था। गोलियां चूस रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर फेस फक किया।
“अब गांड मारनी है,” मैंने कहा।
रीना घबराई। “पहली बार है… तुम्हारा बहुत मोटा है… दर्द होगा…”
मैंने उसे घोड़ी बनाया। उसकी मोटी गांड ऊपर। मैंने लंड पर थूक लगाया और धीरे से दबाया। टाइट गांड का छेद मुश्किल से खुला। रीना चीखी, “आआआह्ह्ह… फट जाएगी… प्लीज निकालो…”
लेकिन मैंने कमर पकड़कर जोर का धक्का मारा। आधा लंड घुस गया। वह रोने लगी। मैं रुका नहीं। पूरा लंड उसके टाइट गांड में उतार दिया।
“ले रंडी… अब मजा ले…”
मैंने तेज-तेज धक्के मारे। हर धक्के पर उसकी मोटी गांड लहराती। “थप-थप-थप” की आवाज गूंज रही थी। रीना पहले दर्द से चीखी, फिर मजा आने लगा। “और जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… हां… हां… मैं तुम्हारी गांडिया रंडी हूं…”
25 मिनट तक मैंने उसकी गांड मारी। फिर उसके मुंह में झड़ गया। वह पूरा माल पी गई।
लेकिन रात अभी बाकी थी।
मैंने उसे पानी पिलाया। 10 मिनट बाद लंड फिर खड़ा। इस बार चूत का नंबर था। मैंने उसे मिशनरी में लिटाया। लंड की नोक चूत पर रखी और एक जोरदार धक्के में पूरा घुसा दिया।
“आआआह्ह्ह… फट गई… इतना मोटा…”
मैंने उसके दोनों पैर कंधों पर रखे और पिस्टन की तरह चोदने लगा। हर धक्के पर उसके बूब्स उछल रहे थे। मैं उन्हें चूसता, काटता। वह नाखून मेरी पीठ पर गड़ाए जा रही थी।
“पति बन जा मेरे… रोज चोदो मुझे… मैं 5 साल से सूखी हूं…”
हमारी चुदाई 40 मिनट चली। उसका पानी तीन बार निकला। आखिर में मैंने उसे फिर घोड़ी बनाया और चूत में ही झड़ गया।
रात 11 बजे तक हम तीन राउंड कर चुके थे। चौथे राउंड में मैंने उसे स्टैंडिंग फक किया। दीवार से सटाकर उसकी एक टांग उठाई और लंड अंदर डाला। उसकी मोटी गांड मेरे हाथों में दब रही थी।
सुबह 4 बजे तक उसकी चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं। दोस्तों, उस दिन रीना मेरे सीने पर लेटी हुई सो गई थी। उसकी मोटी गांड अभी भी मेरे हाथ में दबी हुई थी। सुबह जब उसकी आंख खुली तो उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और बोली, “पति जी, आज से मैं तुम्हारी पूरी तरह गुलाम हूं। जहां कहोगे, जब कहोगे, जैसे कहोगे… चोदना।”
उसी हफ्ते हमने प्लान बनाया। मनाली घूमने का। स्कूल में छुट्टी ली, दो दिन की। रीना ने घर पर बहाना बना लिया कि कॉन्फ्रेंस है। हम दिल्ली से बस पकड़कर मनाली पहुंचे। पूरा रास्ता बस में ही उसकी मोटी जांघों पर हाथ फेरता रहा। रात के अंधेरे में उसकी सलवार के अंदर हाथ डालकर उसकी चूत में उंगलियां घुसाता रहा। वह दांत भींचकर कराह रही थी, “राहुल… बस में ही फाड़ दोगे क्या?”
मनाली पहुंचते ही हमने हिमालय व्यू होटल में रूम बुक किया। बालकनी वाली सुइट, सामने बर्फीले पहाड़ और नदी का नजारा। रूम में घुसते ही रीना ने अपना पूरा कपड़ा उतार फेंका। 44 इंच के विशाल बूब्स लहरा रहे थे, मोटी गांड हिल रही थी। मैंने उसे बालकनी में खींच लिया। ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन हम दोनों में आग लगी हुई थी।
“यहां? बाहर?” उसने घबराकर पूछा।
“हां रंडी, पूरी दुनिया देखेगी कि तू कैसे चुदती है,” मैंने कहा और उसे बालकनी की रेलिंग पर झुका दिया। उसकी मोटी गांड बाहर की तरफ। मैंने पीछे से लंड निकाला। 8 इंच का मोटा खड़ा लंड। बिना किसी चेतावनी के उसके टाइट गांड के छेद पर रखा और पूरा जोर लगाकर धक्का मारा।
“आआआह्ह्ह्ह!!! फट गई… राहुल… दर्द हो रहा है…” रीना चीखी। ठंडी हवा में उसकी चीख गूंज गई। लेकिन मैं रुका नहीं। उसके बाल पकड़े, कमर पकड़ी और पिस्टन की तरह गांड मारने लगा। हर धक्का इतना जोरदार कि उसकी मोटी गांड लाल हो गई। “थप थप थप” की आवाज पहाड़ों में गूंज रही थी। रीना पहले रो रही थी, फिर पागल हो गई, “और जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… मैं तुम्हारी गांड की रंडी हूं… हां… हां… मारो!”
20 मिनट तक मैंने उसकी गांड बर्फीली बालकनी में फाड़ी। फिर उसके मुंह में झड़ गया। वह पूरा माल निगल गई और बोली, “अब मेरी चूत भी लो… प्यासी है बहुत।”
रात भर हमने कमरे में चुदाई का तांडव मचाया। पहले मैंने उसे बेड पर लिटाया, पैर फैलाए और चूत चाटने लगा। उसकी मोटी चूत में जीभ घुसाई, क्लिटोरिस को काटा, दो उंगलियां, तीन उंगलियां… चार उंगलियां डालकर फाड़ने लगा। रीना तकिए को काट रही थी, “मर गई… तुम्हारी जीभ जादू है… चूसो… और चूसो…”
उसका पहला पानी निकला तो मैंने लंड चूत में घोंप दिया। मिशनरी पोजीशन में उसके मोटे बूब्स पर मुंह रखकर चोदता रहा। हर धक्के पर उसके बूब्स उछल रहे थे। मैं उन्हें थप्पड़ मार रहा था, चूस रहा था, काट रहा था। “तुम्हारा लंड मेरी चूत फाड़ रहा है… लेकिन मजा आ रहा है… चोदो पति… रोज ऐसा चोदना…”
हमने पोजीशन बदली। डॉगी, काउगर्ल, रिवर्स काउगर्ल। रीना ऊपर बैठकर झूम रही थी। उसकी मोटी गांड मेरी गोद में पटक-पटक कर ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उसके बूब्स को इतना जोर से दबाया कि दूध जैसा कुछ निकलने लगा। वह चीखती रही, “हां… दबाओ… फोड़ दो… मैं तुम्हारी हूं…”
तीसरे राउंड में मैंने उसे दीवार से सटाया, एक टांग कंधे पर चढ़ाई और खड़े-खड़े चूत मारी। उसकी पूरी बॉडी हिल रही थी। बाहर से कोई भी देख ले तो क्या फर्क पड़ता? हम पागल हो चुके थे।
रात के 2 बजे हमने शावर में चुदाई की। गर्म पानी के नीचे मैंने उसे घुटनों पर बैठाया, मुंह में लंड ठूंसा और गले तक फक किया। वह उल्टी करने लगी लेकिन मैंने बाल पकड़कर रोका नहीं। फिर उसे शावर के नीचे घोड़ी बनाया और गांड मारी। पानी और थूक मिलाकर लंड चिकना था, फिर भी उसकी टाइट गांड फटने वाली थी। “राहुल… तुम जानवर हो… लेकिन मुझे यही चाहिए… फाड़ दो…”
सुबह होने तक उसकी चूत और गांड दोनों सूज गई थीं। लेकिन रीना खुश थी। “5 साल की प्यास आज पूरी हुई।”
दूसरे दिन हम सोलंग वैली गए। वहां बर्फ थी। हमने घोड़े लिए और ऊपर चढ़े। एक सुनसान जगह पर घोड़े रोककर हमने फिर शुरू किया। बर्फ पर रीना को घुटनों के बल बैठाया, उसकी सलवार नीचे की और पीछे से चोदने लगा। ठंडी हवा, बर्फ की सफेदी और हमारी गर्म चुदाई। रीना चीख रही थी, “यहां किसी ने देख लिया तो… लेकिन रुकना मत… चोदते रहो…”
वापसी में कार में भी हमने रिस्क लिया। ड्राइवर के पीछे सीट पर उसकी चूत में उंगलियां डालकर मैं उसे झाड़ता रहा।
मनाली से लौटने के बाद हमारा सिलसिला और तेज हो गया। एक दिन स्कूल के बाद हम उसके घर गए। पति बाहर थे, बच्चे दादी के पास। घर में घुसते ही मैंने रीना को किचन में झुका दिया। कुर्ता ऊपर, सलवार नीचे। बर्तन रखे हुए थे, लेकिन मैंने उसकी गांड में लंड ठोक दिया। वह चूल्हे के पास खड़ी चुद रही थी। “राहुल… कोई आ जाएगा… आह्ह्ह… लेकिन अच्छा लग रहा है…”
फिर बेडरूम में ले गया। पूरे घर में हमने चुदाई की – सोफे पर, बालकनी पर, बाथरूम में। मैंने उसे बांधकर चोदा। उसके हाथ पीछे बांधे, आंखों पर पट्टी बांधी और 40 मिनट तक लगातार गांड और चूत दोनों मारी। वह रो रही थी, चीख रही थी, लेकिन बार-बार पानी छोड़ रही थी। “तुम मुझे मार डालोगे… लेकिन यही सुख है… और मारो…”
एक और हॉट इंसिडेंट हुआ जब हमने सिनेमा हॉल में फिर गए। पिछली रो में। फिल्म शुरू होते ही मैंने उसकी पैंटी उतारी और उंगलियों से चूत फाड़ी। फिर उसकी साड़ी में हाथ डालकर लंड निकाला और चुपके से चूत में डाल दिया। वह मेरी गोद में बैठकर धीरे-धीरे हिल रही थी। आसपास लोग थे, लेकिन हम रुके नहीं। आखिर में वह मेरे कंधे पर मुंह दबाकर झड़ गई।
रीना अब पूरी तरह बदल चुकी थी। पहले शर्मीली टीचर, अब मेरी खतरनाक रंडी। वह कहती, “तुम्हारे बिना एक दिन भी नहीं रह सकती। तुम्हारा मोटा लंड मेरी चूत और गांड का मालिक है।”
एक रात हमने थ्रीसम का प्लान किया। उसकी सहेली प्रिया, जो 40 साल की मोटी थी, को भी शामिल किया। लेकिन वो अलग कहानी है। अभी तो रीना की टाइट गांड और रसीली चूत की कहानी काफी है।
दोस्तों, यह थी हमारी मनाली वाली बर्फीली और खतरनाक चुदाई की पूरी डिटेल। रीना की मोटी गांड आज भी मेरे लंड की गर्मी याद करती है। अगर तुम्हें ये कहानी पसंद आई तो कमेंट करो। अगली कहानी में हम होटल की स्वीमिंग पूल में नाइट चुदाई करेंगे, जहां रीना की चीखें पूरे होटल में गूंजी थीं।
अपना लंड थामकर रखो, और पढ़ते रहो। रीना जैसे प्यासी औरतें इंतजार कर रही हैं।
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