राहुल और प्रिया की गुप्त बर्बर चुदाई की अनगिनत रातें। दीदी के घर से लेकर होटल, कार और छत तक – गला दबाकर, गांड फाड़कर, रोते-चीखते हुए घंटों की हिंसक चुदाई। शादी के बाद भी उनकी भूख कभी नहीं मरी desi porn stories ।
मेरा नाम राहुल है। मैं राजस्थान के जोधपुर जिले के एक छोटे से कस्बे का रहने वाला हूँ। अब 28 साल का हो चुका हूँ, लेकिन जो कुछ 2015 में हुआ था, वह आज भी मेरी रगों में खून की तरह दौड़ता है। वह मेरी पहली चुदाई थी, और वह भी ऐसी कि किसी भी मर्द का लंड सीधा खड़ा हो जाए।
मैं तब 19 साल का था, कॉलेज के पहले साल में। मेरी बड़ी दीदी की शादी दो साल पहले हो चुकी थी। जीजाजी का नाम विकास था, जो जोधपुर शहर में सरकारी नौकरी करते थे। उनका घर शहर के पुराने मोहल्ले में था – दो मंजिला, बड़ा सा बंगला। दीदी ने मुझे घर बुला लिया था क्योंकि मैं कस्बे से रोज कॉलेज आने-जाने में परेशान था। “राहुल, तुम हमारे घर रहकर पढ़ाई करो। हम दोनों को भी अच्छा लगेगा,” दीदी ने कहा। मम्मी-पापा ने भी हामी भर दी।
घर में दीदी और जीजाजी के अलावा उनकी चचेरी ननद भी अक्सर आती-जाती रहती थी। उसका नाम प्रिया था। प्रिया 21 साल की थी, बी.एससी. फाइनल ईयर में। वह जयपुर में रहती थी लेकिन जोधपुर में उसके कॉलेज के कुछ स्पेशल क्लासेस थे, इसलिए महीने में 15-20 दिन वह यहीं रहती। प्रिया देखने में ऐसी कि कोई भी मर्द एक बार देख ले तो बार-बार घूरने लगे। उसकी हाइट 5 फीट 6 इंच, रंग दूधिया गोरा, बाल घने और काले जो कमर तक लहराते। उसकी छातियां 36D – भारी, गोल और एकदम टाइट।
कमर 28 इंच की पतली, और गांड 38 इंच की – इतनी मोटी और उभरी हुई कि साड़ी या जींस में भी फटने को तैयार। उसके होंठ गुलाबी, आंखें बड़ी-बड़ी, और चाल ऐसी कि लंड अपने आप हिलने लगे।
मैं शुरू में बहुत शर्मीला था, लेकिन प्रिया के साथ रहते-रहते हम दोनों की दोस्ती गहरी हो गई। हम घंटों बातें करते, पढ़ाई में मदद करते। कभी-कभी सेक्स की बातें भी छिड़ जातीं। वह खुलकर बोलती, “राहुल, लड़कियों को भी लंड की जरूरत होती है, बस मौका चाहिए।” मैं मन ही मन उसे चोदने के सपने देखता। उसकी टी-शर्ट में उभरे निप्पल, टाइट जींस में फटी गांड – सब कुछ मुझे पागल कर देता।
दिसंबर 2015 की बात है। सर्दी कड़ाके की पड़ रही थी। दीदी को डिलीवरी का टाइम आ गया था। उन्हें और जीजाजी को अस्पताल ले जाना पड़ा। घर में सिर्फ मैं और प्रिया रह गए। पूरा घर खाली, बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। हमने रात का खाना खाया – गरमा-गरम दाल-चावल। फिर लिविंग रूम में टीवी ऑन कर लिया। प्रिया ने कहा, “आज ठंड बहुत है, एक ही रजाई में बैठते हैं।”
हम दोनों एक रजाई में पैर डालकर बैठ गए। प्रिया ने ब्लैक कलर की टाइट टी-शर्ट और ग्रे शॉर्ट्स पहनी थी। उसकी जांघें रजाई के नीचे मेरी जांघों से टच हो रही थीं। टीवी पर इमरान हाशमी की मूवी चल रही थी – हॉट सीन वाले गाने। प्रिया की सांसें थोड़ी तेज हो रही थीं। मैंने हिम्मत करके कहा, “प्रिया, नींद आ रही है।” लेकिन असल में मेरे दिमाग में तूफान चल रहा था।
मैं लेट गया। कुछ देर बाद प्रिया ने भी लेटने का नाटक किया। मैंने धीरे से अपनी टांग उसके ऊपर रख दी। वह कुछ नहीं बोली। फिर मैं उसके करीब सरक गया। मेरा लंड पहले से ही पत्थर की तरह खड़ा था – 7 इंच लंबा, मोटा और नसों वाला। मैंने हल्का-हल्का अपने हाथ उसके स्तनों के पास ले जाकर रख दिए। प्रिया ने करवट ली और मेरे सीने से चिपक गई। उसकी सांसें गर्म थीं।
“राहुल…” उसने फुसफुसाकर कहा।
मैंने जवाब नहीं दिया, बस उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। पहला किस – गहरा, लंबा, जीभ वाली। हम दोनों एक-दूसरे की जीभ चूसने लगे। प्रिया के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की। ब्रा नहीं थी। उसके भारी, गोरे स्तन बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल एकदम खड़े थे। मैंने एक को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। प्रिया ने मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को अपने स्तनों में दबा दिया। “चूसो राहुल… जोर से… काटो इन्हें!”
मैंने दूसरे स्तन को भी मसलते हुए निप्पल को दांतों से काटा। प्रिया चीखी, लेकिन दर्द में भी मजा था। मैंने नीचे जाकर उसकी शॉर्ट्स खींची। ब्लैक लेस वाली पैंटी भीग चुकी थी। मैंने उसे भी उतार दिया। प्रिया की चूत – एकदम साफ, गुलाबी, और अब पानी से तर। मैंने अपना मुंह वहां रख दिया। जीभ से उसका क्लिटोरिस चाटने लगा। प्रिया पागल हो गई। “हरामजादे… चूत चाटो… अंदर डालो जीभ!” वह मेरे सिर को चूत पर दबा रही थी। मैंने जीभ अंदर डाली, फिर उंगलियां। दो उंगलियां अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। प्रिया का पहला ऑर्गेज्म आ गया। वह जोर से चीखी और चूत से गर्म पानी फूटा।
अब मेरी बारी। मैंने पैंट उतारी। मेरा 7 इंच का मोटा लंड लोहे की तरह खड़ा। प्रिया ने उसे देखा और आंखें चमक उठीं। “कितना मोटा है… आज इसकी चुदाई लूंगी।” उसने मुंह खोलकर पूरा लंड मुंह में ले लिया। गला तक। वह गैगिंग कर रही थी लेकिन रुकी नहीं। ऊपर-नीचे मुंह चला रही थी, लंड चूस रही थी, अंडों को सहल रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर मुंह में धकेल रहा था। “चूस ले साली… पूरा ले ले!”
कुछ देर बाद मैंने उसे बेड पर लिटाया। उसकी जांघें फैलाईं। लंड की नोक चूत पर रखी और एक जोरदार धक्का। “आआह्ह्ह्ह!” प्रिया चीख उठी। पूरा लंड एक झटके में अंदर चला गया। उसकी चूत टाइट थी, लेकिन गीली होने से आसानी से घुस गया। मैंने तेज-तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के पर उसके स्तन हिल रहे थे। मैं एक हाथ से स्तन मसल रहा था, दूसरे से उसके गले को हल्का दबाए हुए था। “चोदो राहुल… फाड़ दो मेरी चूत… जोर से!”
हम कुत्ते की स्टाइल में गए। मैं पीछे से उसके बाल पकड़कर घोड़े की तरह चोद रहा था। उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी – पक-पक की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। प्रिया और पागल हो गई। “मारो… और मारो… मैं तुम्हारी रंडी हूं आज!”
तीसरी पोजीशन में वह ऊपर आई। काउगर्ल स्टाइल। उसने लंड अपनी चूत में डाला और तेजी से उछलने लगी। उसके स्तन उछल-उछलकर मेरे मुंह में आ रहे थे। मैं नीचे से धक्के मार रहा था। हम दोनों पसीने से तर थे। उसका दूसरा और तीसरा ऑर्गेज्म आ गया। आखिरकार मैंने भी जोर-जोर से धक्के मारे और अपना गाढ़ा वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
हम दोनों थककर लेट गए। लेकिन रात अभी बाकी थी।
दूसरी राउंड में मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। उसकी एक टांग कंधे पर रखकर इतनी गहरी चुदाई की कि प्रिया रोने लगी मजा से। “फाड़ दोगे आज… लेकिन मत रुकना!” तीसरी राउंड में शावर के नीचे। गर्म पानी के नीचे उसकी चूत चाटी, फिर पीछे से गांड पर लंड रगड़ा। उसने कहा, “आज गांड भी मार दो।” मैंने लंड पर थूक लगाया और धीरे-धीरे उसकी टाइट गांड में घुसाया। प्रिया दर्द से चीखी लेकिन फिर मजा लेने लगी। पूरी रात हमने चार बार चुदाई की। हर बार नया स्टाइल, नई गालियां, नई बर्बरता।
अगले दिन दीदी को बच्चा हुआ, लेकिन वे तीन दिन अस्पताल में रहीं। इन तीन दिनों में प्रिया और मैं घर को चुदाई का अड्डा बना दिया। सुबह उठते ही चूत चुदाई, नहाते वक्त गांड चुदाई, दोपहर में किचन में खड़े-खड़े, रात को बेड पर घंटों।
एक दिन मैंने उसे बेड पर बांध दिया। हाथ-पैर बेड से बंधे, आंखों पर पट्टी। फिर घंटे भर तक उसकी चूत और गांड पर उंगलियां, जीभ, लंड – सब कुछ चलाया। वह चीख-चीखकर मांग रही थी, “डाल दो… मार दो… मैं मर जाऊंगी!” मैंने उसे इतना चोदा कि उसकी चूत सूज गई। वीर्य उसके मुंह, चूत, गांड, स्तनों – हर जगह छोड़ा।
तीन दिन बाद जब दीदी-जीजाजी घर आए तो प्रिया की चाल लड़खड़ा रही थी। लेकिन उसकी आंखों में चमक थी।
उसके बाद भी कई मौके आए। कॉलेज छुट्टियों में, होटल में, यहां तक कि एक बार कार में हाईवे पर। हमारी चुदाई इतनी खुलकर होती कि प्रिया कहती, “तुम्हारा लंड मेरी चूत का मालिक है।”
अब प्रिया की शादी हो चुकी है, मेरी भी। लेकिन जब भी वह जोधपुर आती है, वह मुझे मैसेज करती है – “आज रात तुम्हारी रंडी तैयार है।” और हम फिर से बर्बर चुदाई करते हैं।
यह थी मेरी पहली और सबसे यादगार चुदाई की कहानी। लेकिन असल खेल तो इसके बाद शुरू हुआ। शादी के बाद भी प्रिया और मेरी भूख कभी कम नहीं हुई। उल्टा और तेज होती गई।
प्रिया की शादी दिल्ली के एक बिजनेसमैन से हो गई। मैं भी अपनी शादी के दो साल बाद सेटल हो गया। लेकिन जोधपुर आने का बहाना कभी न छूटता। एक बार वह अकेली आई, दीदी के घर। दीदी-जीजाजी बाहर गए हुए थे। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, प्रिया ने मेरी शर्ट पकड़कर मुझे दीवार से सटाया। “हरामजादे, तीन महीने से बिना तेरे लंड के मेरी चूत सूख रही है। आज फाड़ डाल इसे!”
उसने अपनी साड़ी की पल्लू गिरा दी। अंदर सिर्फ ब्लैक लेस ब्रा और पैंटी। उसके 36D वाले स्तन अब और भारी हो गए थे। मैंने उसे उठाकर बेडरूम में फेंक दिया। प्रिया हंसते हुए बोली, “आज मुझे रंडी की तरह ट्रीट कर। जितना बर्बर हो सके।”
मैंने उसकी साड़ी पूरी उतार दी। ब्रा के हुक तोड़े और उसके दोनों स्तनों को जोर से मसलने लगा। निप्पल को उंगलियों से कसकर दबाया। प्रिया चीखी, “हां… और जोर से… दर्द दो मुझे!” मैंने एक स्तन मुंह में भर लिया और दांत गड़ाकर काटा। खून जैसा निशान पड़ गया। वह पागल हो गई। मैंने उसे घुटनों पर बैठाया और पैंट उतारकर अपना 7.5 इंच का मोटा लंड उसके मुंह पर दे मारा।
“चूस साली… गले तक ले!”
प्रिया ने आंखें बंद करके पूरा लंड मुंह में उतार लिया। गैगिंग हो रही थी, आंसू बह रहे थे, लेकिन वह रुकी नहीं। मैंने उसके बाल पकड़े और मुंह को फकिंग मशीन बना दिया। लंड उसके गले में धंस रहा था। थूक उसके मुंह से बाहर निकल रहा था। “ले… ले पूरी… आज तेरा मुंह चूत बना दूंगा!”
कुछ मिनट बाद मैंने उसे बेड पर पटका। उसकी जांघें चौड़ी कीं और बिना किसी तैयारी के एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में धकेल दिया। “आआआह्ह्ह फट गई…!” प्रिया चीख पड़ी। लेकिन उसकी चूत पहले से ही झरना बहा रही थी। मैंने पागलों की तरह धक्के मारे – तेज, गहरे, बर्बर। हर धक्के पर उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने एक हाथ से उसका गला दबाया, दूसरे से क्लिट पर थप्पड़ मारे। प्रिया का शरीर कांप रहा था। “चोदो… फाड़ दो… मैं तुम्हारी गुलाम हूं आज!”
हम पोजीशन बदलते रहे। डॉगी स्टाइल में मैंने उसके बाल खींचे और गांड पर इतने थप्पड़ मारे कि लाल-लाल हो गई। फिर मैंने लंड निकाला और सीधे उसकी गांड पर रख दिया। “नहीं… आज दर्द होगा… लेकिन डाल दो!” प्रिया ने खुद अपनी गांड फैलाई। मैंने थूक लगाया और आधा लंड एक झटके में अंदर कर दिया। प्रिया दर्द से चीखी, लेकिन मैं रुका नहीं। पूरी तरह घुसा दिया। फिर तेजी से गांड मारने लगा। कमरे में चप्प-चप्प की आवाजें और उसकी चीखें गूंज रही थीं।
उस रात हमने पांच राउंड लिए। आखिरी राउंड में मैंने उसे बालकनी में ले जाकर खड़े-खड़े चोदा। नीचे सड़क पर लोग घूम रहे थे। प्रिया डरी हुई थी लेकिन मजा दोगुना हो रहा था। “देख ले कोई… लेकिन मत रुक!” मैंने उसकी चूत में वीर्य भर दिया और फिर मुंह में भी। प्रिया ने सब निगल लिया।
इसके बाद के महीनों में हमारे मिलन और खतरनाक होते गए। एक बार दीदी के घर पर ही, जब सब सो रहे थे, हम छत पर गए। चांदनी रात में प्रिया नंगी होकर घुटनों पर बैठ गई। मैंने उसे पीछे से चोदा। उसकी चीखें दबाने के लिए मुंह पर हाथ रखा। हर धक्के के साथ वह कांप रही थी। “तेरा लंड मेरी चूत का राजा है राहुल… चाहे शादी हो या न हो!”
एक और यादगार रात जब हम होटल गए। प्रिया ने रूम बुक किया। जैसे ही अंदर entered, उसने मुझे धक्का देकर बेड पर गिराया। “आज मैं तुझे रेप करूंगी।” उसने मेरे हाथ बेड से बांध दिए। फिर अपनी पैंटी उतारकर मेरे मुंह पर बैठ गई। “चाट… अच्छे से चाट मेरी चूत!” मैं जीभ अंदर-बाहर कर रहा था। वह मेरे चेहरे पर रगड़ रही थी। फिर उसने मेरा लंड मुंह में लिया और 69 पोजीशन में हम दोनों एक-दूसरे को चाटते रहे।
बाद में उसने लंड पर कंडोम चढ़ाया और मेरे ऊपर बैठकर उछलने लगी। उसके भारी स्तन मेरे मुंह के सामने नाच रहे थे। मैं नीचे से जोरदार धक्के मार रहा था। प्रिया चिल्ला रही थी, “जोर से… चीर दो… आज बच्चा बनवा दे!” हम दोनों का पानी एक साथ निकला। लेकिन खेल खत्म नहीं हुआ।
उसने मुझे खोल दिया और चारों खाने चित लिटाकर मेरी गांड पर बैठ गई। उसकी उंगलियां मेरी गांड में घुसाने लगीं। “आज तुझे भी औरत बनाऊंगी।” मैंने विरोध किया लेकिन वह नहीं मानी। उसने लंड पर लुब्रिकेंट लगाया और धीरे-धीरे अपनी उंगलियां बढ़ाती गई। दर्द के साथ अनोखा मजा था। फिर उसने स्ट्रैप-ऑन निकाला (जो उसने पहले से तैयार रखा था) और मेरी गांड मारने लगी। “ले… ले रंडी… आज तू मेरी है!”
मैं चीख रहा था लेकिन लंड फिर से खड़ा हो गया। प्रिया ने मुझे फिर से चोदा – आगे से और पीछे से। आखिरकार मैंने उसे पलटा और इतनी बर्बर चुदाई की कि होटल का बेड हिलने लगा। उसकी चूत और गांड दोनों सूज गईं। वीर्य उसके पूरे शरीर पर फैला दिया – चेहरे, स्तनों, पेट, जांघों पर। प्रिया खुशी से रो रही थी। “कितना मजा आया… तू ही मेरा असली मालिक है।”
समय के साथ हम और क्रिएटिव होते गए। एक बार जयपुर में उसकी कार में हाईवे पर। रात के अंधेरे में उसने कार साइड में रोकी। सीट पीछे की और हमने वहां चुदाई शुरू की। बाहर ट्रक गुजर रहे थे। प्रिया ऊपर बैठकर उछल रही थी। उसके स्तन बाहर थे। कोई देख ले तो क्या होता – इस डर ने मजा सौ गुना कर दिया। मैंने उसकी गर्दन पर लव बाइट्स किए।
दूसरी बार दीदी के घर की किचन में। सब बाहर थे। प्रिया ने बेंच पर झुककर गांड दिखाई। मैंने पीछे से घुसा और जोर-जोर से मारा। उसके मुंह में कपड़ा ठूंसा ताकि चीख न निकले। वीर्य उसकी चूत से निकलकर जांघों पर बह रहा था।
हमारी ये गुप्त चुदाई अब भी जारी है। कभी-कभी वह फोन पर वीडियो कॉल करके अपनी चूत दिखाती है और कहती है, “देख… तेरे बिना सूख रही है। जल्दी आ।” मैं चला जाता हूं। होटल, गेस्ट हाउस, यहां तक कि एक बार मंदिर के पास पार्किंग में भी हमने कार में चुदाई की।
प्रिया अब मां बन चुकी है लेकिन उसकी भूख नहीं मरी। वह कहती है, “शादी से पहले तूने मुझे चोदा था, अब भी चोद। मैं हमेशा तेरी रंडी रहूंगी।”
यह कहानी खत्म नहीं होती। हमारी चुदाई की भूख कभी शांत नहीं होती। अगर आपको ये पसंद आई तो बताएं। और हां, अगली कहानी में हमारी और भी खतरनाक एडवेंचर्स सुनाऊंगा – जहां हमने रिस्क लिए, नए-नए तरीके आजमाए और एक-दूसरे को पूरी तरह तोड़-मरोड़कर चोदा।
कमेंट में जरूर बताएं कि कैसी लगी ये बर्बर चुदाई वाली कहानी।
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