वर्जिन चूत का खून

19 साल के अर्जुन ने 21 साल की नेहा की टाइट चूत और मोटी गांड को बेरहमी से फाड़ा। वर्जिन खून, चीखें, थप्पड़ और जंगली रातें – एक ऐसी खूंखार चुदाई जो दर्द और मज़े की हद पार कर गई lusty sex stories app lustystories par padh rhe ho।

मेरा नाम अर्जुन शर्मा है। मैं आपको अपनी सबसे जंगली, बेरहम और खूंखार पहली चुदाई की असली कहानी सुनाता हूं, जो आज भी मेरे खून को उबाल देती है और लंड खड़ा कर देती है। यह बात उस वक्त की है जब मैं 19 साल का था। स्कूल खत्म करके कॉलेज की तैयारी कर रहा था। सेक्स के बारे में मैंने सिर्फ दोस्तों की गंदी बातों और ब्लू फिल्मों से ही कुछ-कुछ जाना था, लेकिन असल में चोदने का जंगली मज़ा तो अभी बाकी था।


मेरे पापा का ट्रांसफर दिल्ली से लखनऊ हो गया था। लखनऊ के पुराने बंगले में रेनोवेशन का काम चल रहा था। पापा-मम्मी काम के सिलसिले में 2 हफ्ते के लिए बाहर गए हुए थे। घर पर सिर्फ 70 साल से ज्यादा उम्र के दादी-दादू थे। उसी दौरान मेरी मौसी की बेटी नेहा हमारे बंगले में आई। नेहा 21 साल की थी, कॉलेज की स्टूडेंट। उसका फिगर किसी भी मर्द का लंड फटाफट खड़ा कर देने वाला था – 36-24-38।

गोरी चमकती त्वचा, लंबे काले घने बाल जो कमर तक लहराते थे, मोटी-मोटी जांघें और उभरी हुई गोल-गोल गांड जो चलते वक्त जोर-जोर से हिलती हुई किसी हथियार की तरह लगती थी। उसके बड़े-बड़े गोल-मटोल चूचे हमेशा ब्रा फाड़ने को तैयार रहते, निप्पल हमेशा उभरे हुए। नेहा को देखते ही मेरे मन में उसे बेरहमी से चोदने, फाड़ने और भोसड़ा बनाने की आग सुलग जाती।


नेहा मुझे बचपन से ही बहुत पसंद करती थी। वह अक्सर मुझसे चिपककर बैठती, मेरे गाल चूमती और कान में फुसफुसाती, “अर्जुन, तुम इतने हैंडसम और गोरे हो गए हो। जब बड़ा हो जाओगे तो मुझे अपनी दुल्हन बनाओगे ना? मैं तुम्हारी ही बनना चाहती हूं।” मैं भी उसे देखकर सोचता कि काश इसकी टाइट चूत और मोटी गांड में अपना मोटा लंड घुसा पाऊं और उसे चीख-चीख कर चोदूं।


एक शाम को बंगले में बिजली और प्लंबिंग का काम चल रहा था। लाइट्स, पंखे सब ठप हो गए। रात को सोने की बड़ी समस्या हो गई। दादी-दादू अपनी पुरानी छोटी कोठरी में सो गए। नेहा और मैं बड़े वाले एसी बेडरूम में एक ही किंग साइज बेड पर सोने को मजबूर हो गए। कमरा पूरी तरह अंधेरा था, सिर्फ बाहर की स्ट्रीट लाइट की हल्की-सी चमक खिड़की से आ रही थी। मैं दिन भर के थकान से जल्दी सो गया।


अचानक नींद में महसूस हुआ कि कोई गर्म, गीली और नरम चीज मेरे लंड पर जोर-जोर से रगड़ रही है। मेरी आंख खुली तो देखा – नेहा मेरे ऊपर झुकी हुई थी। उसकी सलवार का नादा पूरी तरह खुला हुआ था। उसकी गीली, गरम चूत मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड पर तेजी से रगड़ रही थी। उसका एक हाथ मेरे सीने को नोच रहा था और दूसरा हाथ मेरे लंड को दबोचे हुए था।

उसके मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियां और कराह निकल रही थीं – “उफ्फ… अर्जुन… कितना मोटा और सख्त हो गया है तेरा लंड… आह्ह्ह…”
मेरा 8 इंच लंबा और मोटा लंड फटाफट खड़ा हो गया। पैंट फाड़ने को तैयार। मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उसके नंगी चूत पर रख दिया और उंगली से रगड़ना शुरू कर दिया। नेहा बुरी तरह चौंक गई और तुरंत पीछे हट गई।

“अर्जुन… सॉरी… मैं… मैं सो नहीं पा रही थी… बहुत दिनों से तुम्हें चाहती हूं,” कहकर वह शर्म से दूसरी तरफ मुड़ गई। उस रात कुछ नहीं हुआ, लेकिन मेरे दिमाग में जंगली आग लग गई थी। मैं रात भर उसके चूचों और चूत को चोदने का ख्वाब देखता रहा।


अगली सुबह हम दोनों घर पर अकेले थे। दादी-दादू मंदिर गए हुए थे। नेहा किचन में नाश्ता बना रही थी। मैं चुपके से पीछे से आया और उसे जोर से जकड़ लिया। मेरे हाथ उसके पेट पर थे और मेरा खड़ा लंड उसकी मोटी गांड पर दबा हुआ था। “दीदी, कल रात क्या कर रही थी? अपनी चूत से मेरा लंड रगड़ रही थी ना?”

मैंने उसके कान में गर्म सांस छोड़ते हुए फुसफुसाया। वह शरमा गई, लेकिन मेरे लंड को अपनी गांड पर और जोर से दबा दी। “बस… इंतजार करो अर्जुन… आज रात पूरी तरह मेरा बदन तुम्हारा है,” वह बोली और मेरे होंठों पर किस कर दी।


रात फिर आई। इस बार मैं पूरी तरह तैयार था। हम दोनों फिर एक ही बेड पर लेटे। मैंने जानबूझकर अपनी शर्ट और पैंट उतार दी। नेहा ने भी अपनी सलवार ढीली कर ली। अंधेरे में उसका गोरा बदन चमक रहा था। मैंने धीरे से उसे अपनी तरफ खींचा।

इस बार उसने कोई विरोध नहीं किया। हमारी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके मोटे होंठों को चूसना शुरू किया। नेहा के मुंह से “मम्मी… आह्ह्ह” निकल गया। हमारी जीभें एक-दूसरे में लिपट गईं। मैं उसके 36 साइज के चूचों को ऊपर से ही जोर-जोर से दबाने और मसलने लगा। वे इतने सख्त और भरे हुए थे कि मेरे हाथों में समा नहीं रहे थे।


“अर्जुन… चूसो ना… काटो… बहुत जोर से…” नेहा ने कराहते हुए कहा। मैंने उसकी कमीज के सारे बटन फाड़ दिए। ब्रा का हुक तोड़ दिया। उसके गुलाबी-गुलाबी निप्पल खड़े हो चुके थे। मैंने एक चूचा पूरा मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने, काटने और नोचने लगा।

दूसरा चूचा हाथ से मसलते हुए। नेहा मेरे बालों को नोच रही थी और चीख रही थी, “और जोर से… फाड़ दो… आह्ह्ह… उफ्फ… मैं पागल हो रही हूं!”


मैंने उसकी सलवार और पैंटी पूरी तरह उतार फेंकी। उसकी चूत बिल्कुल साफ शेव की हुई, फूली हुई, गुलाबी और पहले से ही रस से लथपथ थी। मैंने दो उंगलियां अंदर डालकर जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा।

नेहा की चूत से “चर्र-चर्र” “पच-पच” की आवाजें आने लगी। वह पहली बार झड़ गई। पूरा गर्म रस मेरी उंगलियों पर बह निकला। “अब मेरी बारी,” कहते हुए मैंने अपना 8 इंच का मोटा लंड निकाला। नेहा की आंखें फैल गईं। “इतना बड़ा… मार डालेगा… लेकिन चोद दो मुझे बेरहमी से!”


नेहा ने खुद हाथ बढ़ाकर लंड सहलाना शुरू कर दिया। फिर मुंह में ले लिया। वह इतने जोर से चूस रही थी जैसे भूखी शेरनी हो। पूरा गला तक ले जा रही थी। मैंने उसके सिर को पकड़कर जोरदार फेस फकिंग शुरू कर दी। उसके मुंह से लार, थूक और प्रीकम का मिश्रण बह रहा था। फिर हम 69 पोजीशन में आ गए। मैं उसकी चूत को जीभ से चाट रहा था, काट रहा था, अंदर जीभ घुसा रहा था।

नेहा मेरा लंड चूसते हुए चीख रही थी। उसकी चूत से बार-बार पानी फूट रहा था। “अब पेल दो… बेरहमी से चोद दो… फाड़ दो मेरी चूत!” वह चिल्लाई।


मैंने उसे मिशनरी पोजीशन में लिटाया। तकिया उसके मोटे कूल्हों के नीचे रखा। लंड का सुपारा उसकी टाइट चूत पर रखा और एक ज़ोरदार, बेरहम धक्का मारा। “आआआह्ह्ह! फट गई… निकालो… मार डाला!” नेहा जोर से चीखी। लेकिन मैं रुका नहीं। आधा लंड अंदर था।

खून की हल्की धार निकली – वह वर्जिन थी। मैंने उसे गहरी किस करते हुए पूरा 8 इंच का लंड एक ही झटके में अंदर ठेल दिया। नेहा के नाखून मेरी पीठ पर गड़ गए। “बहनचोद… मार डाला… आह्ह्ह… उफ्फ… बहुत दर्द हो रहा है!”


मैं रुका नहीं। तेज-तेज, बेरहम धक्के मारने लगा। पूरा बेडरूम “पच्च-पच्च” “फच-फच” “थप-थप” की आवाजों से भर गया। नेहा की चूत मेरे मोटे लंड को चूस रही थी। “और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… भोसड़ा बना दो… आह्ह्ह!” वह चिल्ला रही थी।

मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख दीं और पिस्टन की तरह चोदने लगा। 15-20 मिनट बाद वह 2 बार झड़ चुकी थी। मैंने भी उसके अंदर ही झड़ दिया। गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया।


उस रात हम रुके नहीं। दूसरी राउंड में डॉगी स्टाइल। मैंने उसकी मोटी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारते हुए पीछे से पूरा लंड घुसाया। उसकी गांड लाल हो गई। “चोदो… और चोदो… गांड भी फाड़ दो बाद में!” तीसरी राउंड में वह ऊपर थी। कूद-कूद कर चुदवा रही थी।

उसके 36 साइज के चूचे उछल-उछल रहे थे। मैं नीचे से जोरदार धक्के दे रहा था। हम सुबह तक 4 बार चोद चुके थे।


अगले दिन नेहा थोड़ी लंगड़ाती हुई चल रही थी। “बुर पूरी फूल गई है तेरे मोटे लंड से,” वह शरमाते हुए बोली। मैंने उसे नहाने के लिए बाथरूम में ले जाकर फिर चोदा। गीले बदन पर साबुन लगाते हुए, दीवार से सटाकर खड़े-खड़े बेरहमी से चोदा। पानी की धार के साथ उसके मुंह से चीखें निकल रही थीं।


इसके बाद नेहा पूरे 7 दिन हमारे बंगले में रही। हर रोज हम जंगली जानवरों की तरह चुदाई करते। कभी किचन काउंटर पर, कभी बालकनी में, कभी छत पर रात को। मैंने उसकी गांड भी पहली बार फाड़ी। पहले तो वह डरी, लेकिन लुब्रिकेट करके जब पूरा 8 इंच अंदर किया तो वह पागल हो गई। “गांड चोदो… मेरी गांड का भोसड़ा बना दो… आह्ह्ह!”


एक दिन मैंने उसे बेड पर हाथ-पैर बांध दिया। आंखों पर पट्टी बांधकर घंटों tease किया। चूत में उंगलियां, जीभ, फिर लंड। वह रो-रोकर भीख मांग रही थी, “पेल दो… मैं मर जाऊंगी… चोद दो मुझे!”


हमने हर पोजीशन ट्राई की – स्पूनिंग, व्हील बैरो, स्टैंडिंग फक, कार्पेट मुनचर। उसकी चूत, मुंह, गांड – सब मेरे लंड से भरे रहे। उसकी चीखें, गालियां, “बहनचोद… लंड का राजा… फाड़ दो… और जोर से पेलो” पूरे बंगले में गूंजती रहीं।


7 दिन बाद जब वह जाने लगी तो रोते हुए बोली, “अर्जुन, तुम मेरे पहले और आखिरी मालिक हो। मैं किसी और से नहीं चुदूंगी।” मैंने उसे गले लगाया और आखिरी बार किचन टेबल पर बेरहमी से चोद दिया।


अब नेहा शादीशुदा हो चुकी है, लेकिन उसकी चूत और गांड अभी भी मेरे लंड की भूखी हैं। शादी के 6 महीने बाद ही उसने मुझे फोन किया। “अर्जुन, मेरे पति विदेश गए हैं 15 दिन के लिए। मैं अकेली मर रही हूं। आओ और मुझे बेरहमी से चोदो, वरना मैं पागल हो जाऊंगी।” उसकी आवाज में वही जंगली प्यास थी। मैं तुरंत लखनऊ से दिल्ली पहुंच गया जहां उसका फ्लैट था।


दरवाजा खुलते ही नेहा मेरे गले लिपट गई। उसने सिर्फ एक पारदर्शी नाइट गाउन पहना था, नीचे कुछ नहीं। उसके 36 साइज के चूचे गाउन के अंदर से साफ दिख रहे थे, निप्पल सख्त होकर बाहर को उभरे हुए। मैंने उसे दीवार से सटाकर जोर से किस किया।

मेरी जीभ उसके मुंह के अंदर घुस गई, उसके थूक को चूसते हुए। नेहा ने मेरी पैंट का बटन खोलकर मेरा 8 इंच का मोटा लंड बाहर निकाल लिया और घुटनों पर बैठकर पूरा मुंह में ले लिया। “ग्लक-ग्लक” की आवाजें पूरे हॉल में गूंज रही थीं। मैंने उसके बाल पकड़कर जोरदार फेस फकिंग की, लंड उसके गले तक ठेल दिया। उसके मुंह से लार की धार बह रही थी, आंखों में आंसू थे, लेकिन वह रुकी नहीं। “और गहरा… मेरे गले में झड़ दो,” वह गड़गड़ाते हुए बोली।


मैंने उसे उठाकर सोफे पर पटक दिया। उसकी टांगें फैलाकर चूत पर मुंह रख दिया। उसकी चूत अब और ज्यादा फूली हुई थी, शादी के बाद थोड़ी ढीली लेकिन अभी भी टाइट। मैंने जीभ अंदर डालकर जोर-जोर से चाटा, दांतों से क्लिटोरिस काटा। नेहा चीख रही थी, “आह्ह्ह… काट दो… फाड़ दो मेरी चूत… बहनचोद!” उसका पहला ऑर्गेज्म आया तो उसने मेरे सिर को अपनी जांघों में जकड़ लिया और पूरा रस मेरे मुंह में उड़ेल दिया। मैंने सब पी लिया और फिर भी चूसता रहा।


फिर मैंने उसे उठाकर बेडरूम में ले गया। बेड पर पटककर उसके हाथ-पैर बांध दिए। आंखों पर काली पट्टी बांध दी। “आज मैं तुझे पूरी रात रंडी की तरह इस्तेमाल करूंगा,” मैंने कहा। सबसे पहले मैंने अपना लंड उसके मुंह में ठेला और घंटे भर तक चुसवाया। फिर चूत में 4 उंगलियां डालकर फाड़ने लगा। नेहा कराह रही थी, “दर्द हो रहा है… लेकिन और करो… मुझे और दर्द दो!” मैंने लुब्रिकेंट लगाकर अपना पूरा मुट्ठी अंदर डालने की कोशिश की। वह चीख-चीख कर झड़ गई।


अब असली खेल शुरू हुआ। मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया। उसकी मोटी गांड पर 20-20 जोरदार थप्पड़ मारे। गांड लाल हो गई। फिर एक झटके में पूरा लंड चूत में ठेल दिया। “फट गई… आह्ह्ह… मार डाला!” लेकिन मैं रुका नहीं। 30 मिनट तक बिना रुके पिस्टन की तरह चोदा। हर धक्के पर उसके चूचे लहरा रहे थे। मैंने उसके बाल खींचे, गर्दन दबाई, और गालियां दीं, “ले रंडी… ले मेरी साली… तेरी चूत मेरे लंड की गुलाम है।” वह चिल्ला रही थी, “हां… मैं तुम्हारी रंडी हूं… भोसड़ा बना दो… और तेज!”


उस रात हमने 6 राउंड लिए। एक बार मैंने उसे बालकनी में ले जाकर खड़े-खड़े चोदा। दिल्ली की रात की हवा में उसकी चीखें गूंज रही थीं। पड़ोसी सुन लें, ऐसा डर था लेकिन हमें परवाह नहीं थी। दूसरी बार बाथरूम में शावर के नीचे। गीले बदन पर साबुन लगाकर मैंने उसकी गांड फाड़ी। पहले तो उसने विरोध किया, “नहीं… आज दर्द बहुत होगा,” लेकिन मैंने उसके मुंह में उंगलियां ठूंस दीं और पूरा 8 इंच गांड में घुसा दिया। नेहा रो पड़ी लेकिन कुछ देर बाद “और चोदो… गांड का भोसड़ा कर दो” चिल्लाने लगी।


15 दिनों में हमने होटल, कार, छत, किचन – हर जगह चुदाई की। एक दिन मैंने उसे कार में हाईवे पर चलते हुए चोदा। वह मेरे लंड पर बैठकर कूद रही थी, कार हिल रही थी। ट्रक ड्राइवरों ने देखा तो हॉर्न बजाए, लेकिन नेहा और जोर से चीखी, “देख लो… मैं चुद रही हूं!”


शादी के बाद नेहा की छोटी बहन रिया भी हमारे संपर्क में आई। रिया 19 साल की थी, फिगर 34-22-36, और नेहा से भी ज्यादा शरारती। एक बार नेहा ने खुद मुझे सरप्राइज दिया। वह रिया को लेकर आई। “अर्जुन, आज हम दोनों बहनों को एक साथ चोदो।” कमरे में दो नंगी बहनें। मैंने पहले नेहा को चोदा, रिया देख रही थी। फिर रिया को। रिया वर्जिन थी। उसकी टाइट चूत फाड़ते वक्त उसकी चीखें पूरे होटल में गूंज गईं।

मैंने दोनों को एक साथ 69 में लिटाया। एक की चूत चूसता, दूसरी मेरा लंड चूसती। फिर दोनों को एक साथ डॉगी में चोदा, बारी-बारी। कमरा चीखों, थप्पड़ों, “फच-फच” और गालियों से भर गया। “बहनचोद… दोनों बहनों की चूत फाड़ दो… हम तुम्हारी गुलाम हैं!”


उसके बाद तो सिलसिला चल पड़ा। नेहा और रिया दोनों मेरी व्यक्तिगत रंडियां बन गईं। कभी-कभी मैं तीनों को एक साथ बुलाता। बेड पर तीन नंगी औरतें, मैं बीच में। घंटों तक बेरहमी से चोदता। चूत, गांड, मुंह – सब भरता। नेहा अब प्रेग्नेंट भी हो गई थी एक बार, लेकिन फिर भी वह कहती, “गर्भ में बच्चा है फिर भी चोदो मुझे… दर्द के साथ मज़ा दो।” मैंने उसे सावधानी से लेकिन जोरदार चोदा।


आज भी जब मौका मिलता है, मैं इन दोनों बहनों को अलग-अलग या साथ में जंगली जानवरों की तरह चोदता हूं। होटल के सुइट में, पहाड़ी रिसॉर्ट में, या लखनऊ के पुराने बंगले में। कभी-कभी मैं उन्हें बांधकर घंटों tease करता, वाइब्रेटर इस्तेमाल करता, फिर अपना मोटा लंड अंदर घुसाकर फाड़ता। उनकी चीखें, रोना, भीख मांगना – सब मुझे और उत्तेजित करता है। “पेल दो… हम मर जाएंगे… लेकिन रुको मत!”


दोस्तों, यह मेरी जिंदगी की सबसे जंगली, बेरहम, खूंखार और लंबी चुदाई वाली सच्ची कहानी है। इसमें दर्द, मज़ा, प्यार, गंदगी और जुनून सब कुछ है। अगर आपने पूरी पढ़ी है तो समझ गए होंगे कि असली सेक्स कितना खतरनाक और लत लगाने वाला होता है। कमेंट में बताओ कैसी लगी। और हां, असली माल चोदने में है, लेकिन हमेशा सुरक्षित और सहमति से। अगली कहानी में मैं बताऊंगा कि कैसे मैंने नेहा की सहेली को भी अपनी चुदाई का शिकार बनाया।

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