मजहबी अम्मी की छुपी भूख और बेटे का बदला 2

मिर्जा ने अम्मी नाजिया को सुधीर के साथ चुदते देख लिया। अब बेटे ने ब्लैकमेल कर अपनी मजहबी अम्मी की चूत और गांड ली। गंदी चुदाई, थ्रीसम और रात भर की जंगली मस्ती की कहानी।

सुधीर के चले जाने के बाद मैं छत पर काफी देर तक बैठा रहा। मेरा पूरा शरीर पसीने से तर था। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। जो कुछ मैंने अपनी आँखों से देखा था, वो मेरे दिमाग में बार-बार प्ले हो रहा था। मेरी अम्मी नाजिया – जो हमेशा हिजाब में रहती हैं, नमाज पढ़ती हैं, और गैर मर्द से नजर तक नहीं मिलातीं – आज एक जवान मर्द के सामने रंडी बनकर घुटनों पर बैठी लंड चूस रही थीं। उनकी चीखें, “आह्ह सुधीर… और जोर से चोदो” वाली आवाजें अभी भी मेरे कानों में गूंज रही थीं।

मुझे गुस्सा भी आ रहा था, शर्म भी आ रही थी, लेकिन सबसे ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। मेरा लंड बार-बार खड़ा हो जा रहा था। मैंने सोचा, “अब चुपचाप बैठकर क्या फायदा? अम्मी की ये भूख मैं भी पूरी कर सकता हूँ।” लेकिन मैं जानता था कि सीधे जाकर कुछ कहना आसान नहीं होगा। अम्मी बहुत मजहबी हैं, उन्हें गुस्सा आएगा, रोएंगी, शायद घर छोड़ने की धमकी भी देंगी। इसलिए मुझे सावधानी से प्लान करना था।

मैं चुपके से नीचे उतरा। पहले मुख्य दरवाजे से बाहर निकला, फिर जोर से दरवाजा खटखटाया जैसे अभी कॉलेज से लौटा हूं।

“अम्मी! दरवाजा खोलिए ना!” मैंने सामान्य स्वर में आवाज लगाई।

कुछ सेकंड बाद अम्मी ने दरवाजा खोला। उनका चेहरा थोड़ा लाल था, बाल बिखरे हुए थे, और आँखें थकी हुई लग रही थीं। उन्होंने जल्दी से साड़ी का पल्लू ठीक किया। “मिर्जा बेटा? आज इतनी जल्दी कैसे आ गया? कॉलेज तो शाम को छूटता है ना?”

मैं अंदर आते हुए बोला, “दोस्त की बाइक ले गया था, मैं पैदल आ गया। बहुत गर्मी थी, थक गया हूँ। पानी पिला दो अम्मी।”

अम्मी किचन की तरफ गईं। मैं उनके पीछे-पीछे गया। उनकी गांड साड़ी के नीचे हिल रही थी। मुझे याद आ गया कि कुछ देर पहले सुधीर इसी गांड को मसल रहा था। अम्मी ने पानी का ग्लास दिया। मैंने एक घूंट पिया और सीधे सवाल पूछा, “अम्मी, आज घर में कौन आया था? बाहर एक काली बुलेट बाइक खड़ी थी। मुहल्ले के बच्चों ने कहा कि वो कई बार आ चुका है।”

अम्मी का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया। उनके हाथ कांपने लगे। उन्होंने हड़बड़ाकर कहा, “नहीं बेटा… वो… वो मेरी पुरानी सहेली की बाइक थी। वो कुछ काम से आई थी और चली गई।”

मैंने मुस्कुराते हुए अपना फोन निकाला। मैंने खिड़की से जो कुछ देखा था, उसका थोड़ा-बहुत वीडियो क्लिप बना लिया था (बिना आवाज के)। मैंने उन्हें वीडियो दिखाया। अम्मी की आँखें फट गईं। वे लड़खड़ाकर सोफे पर बैठ गईं।

“मिर्जा… ये… ये कैसे…? बेटा प्लीज इसे किसी को मत दिखाना। मैं तेरी अम्मी हूँ… गलती हो गई… तेरे अब्बू सालों से नहीं आते… मैं इंसान हूँ बेटा… मुझे भी जरूरत होती है।” उनकी आवाज रोने लगी। आंसू उनकी आँखों से बहने लगे।

मैं उनके पास बैठ गया। उनकी पीठ पर हाथ रखा और बोला, “अम्मी, मैं समझता हूँ। लेकिन तुमने मुझे कभी नहीं बताया। सुधीर कौन है? और वो तुम्हें रंडी कहकर चोद रहा था। बुर्के में गांड मारने की बात कर रहे थे।”

अम्मी ने सिर झुकाया, “सुधीर हमारे मुहल्ले के काउंसलर का बेटा है। एक दिन अचानक मिल गया। बातें बढ़ीं… फिर… मैं मजबूर हो गई बेटा। प्लीज माफ कर दो। रिकॉर्डिंग डिलीट कर दो। मैं वादा करती हूँ कभी नहीं करूंगी।”

मैंने उनकी ठोड़ी उठाई और आँखों में आँखें डालकर बोला, “अम्मी, डिलीट तो कर दूंगा, लेकिन एक शर्त पर। अब तुम्हें मेरी जरूरत पूरी करनी पड़ेगी।”

अम्मी ने हैरानी से देखा, “क्या… क्या कह रहे हो मिर्जा? तुम मेरे बेटे हो… ये गुनाह है… अल्लाह माफ नहीं करेगा।”

मैंने सख्त लेकिन धीरे स्वर में कहा, “गुनाह तो तुम सुधीर के साथ कर चुकी हो अम्मी। अब बेटे के साथ कर लो। बाहर किसी को पता नहीं चलेगा। हम दोनों अकेले हैं।”

काफी देर तक अम्मी रोती रहीं। उन्होंने मना किया, समझाया, लेकिन मैं अड़ा रहा। आखिरकार मजबूरी में वे मान गईं। “ठीक है बेटा… जो तुम कहोगे… लेकिन धीरे से करना। मुझे डर लग रहा है।”

मैंने अम्मी को बेडरूम में ले जाया। कमरे में अभी भी सुधीर की महक बाकी थी। मैंने अम्मी की साड़ी का पल्लू खींचा। ब्लाउज के हुक खोले। उनकी बड़ी-बड़ी गोरी चूचियां ब्रा में कैद थीं। मैंने ब्रा का हुक खोला। चूचियां आजाद हो गईं।

“उफ्फ अम्मी… कितनी सुंदर हैं ये।” मैंने एक चूची हाथ में लिया और धीरे से मसलने लगा। फिर मुंह लगाकर चूसने लगा। अम्मी पहले तो कांप रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी सांसें तेज होने लगीं। “आह्ह… मिर्जा बेटा… ये गलत है… आह्ह… धीरे…”

मैंने दूसरी चूची भी चूसनी शुरू कर दी। निप्पल को हल्का-हल्का काटा। अम्मी की कमर झनझना गई। मैंने उनकी साड़ी, पेटीकोट उतार दिए। अब वे सिर्फ पैंटी में थीं। उनकी गोरी जांघें और चूत का उभार देखकर मेरा लंड पैंट फाड़ने को तैयार था।

मैंने अपनी सारी कपड़े उतार दिए। मेरा 6.5 इंच का मोटा लंड खड़ा था। अम्मी ने शर्म से आँखें बंद कर लीं। मैंने उनका सिर पकड़कर लंड उनके होंठों के पास किया। “चूसो अम्मी… जैसे तुम सुधीर का चूसती हो।”

अम्मी ने आंसू पोछे और धीरे से मेरा लंड मुंह में ले लिया। उनकी गर्म, नम जीभ मेरे लंड पर घूमने लगी। “ग्लवक्क… स्लर्प्प…” धीरे-धीरे वे पूरी तरह चूसने लगीं। मैं उनके बाल पकड़कर हल्का-हल्का मुंह चोदने लगा। करीब 12-15 मिनट तक वे ब्लोजॉब देती रहीं।

फिर मैंने उन्हें बेड पर लिटाया। पैंटी उतारी। उनकी चूत सुधीर की चुदाई से अभी भी थोड़ी लाल और गीली थी। मैंने जीभ से चूत चाटनी शुरू की। अम्मी ने कमर उठाई, “आह्ह… बेटा… क्या कर रहे हो… उफ्फ… मजा आ रहा है… आह्ह!”

मैंने उंगली डाली, फिर दो उंगलियां। काफी देर फोरप्ले के बाद मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा। धीरे से दबाया। पूरा लंड अंदर चला गया।

“आआह्ह… मिर्जा… बहुत मोटा है… धीरे बेटा… आह्ह!” अम्मी ने जोर से सिसकारी भरी।

मैंने धीमी रफ्तार से शुरू किया। धीरे-धीरे तेजी बढ़ाई। अम्मी अब साथ देने लगी थीं। “चोदो बेटा… अपनी अम्मी को चोदो… आह्ह… अच्छा लग रहा है…”

हम मिशनरी पोजीशन में काफी देर तक चुदाई करते रहे। फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। उनकी मोटी गोरी गांड पकड़कर जोर-जोर से ठोके मारने लगा। अम्मी की चूचियां लहरा रही थीं। “फाड़ दो बेटा… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह!”

करीब 25 मिनट बाद मैं उनकी चूत के अंदर ही झड़ गया। अम्मी भी झड़ गईं। दोनों थककर लेट गए।

लेकिन मेरी भूख अभी बाकी थी। मैंने अम्मी को नहलाया। नहाते समय फिर से चूचियां दबाईं, चूत में उंगली डाली। नहाकर हम वापस बेडरूम आए।

अब मैंने सुधीर को व्हाट्सएप किया। “आज रात आओ। अम्मी के साथ थ्रीसम करेंगे। वीडियो रिकॉर्डिंग है मेरे पास।”

सुधीर हैरान हुआ लेकिन तैयार हो गया। वह रात 9 बजे आ गया।

अम्मी को जब पता चला तो वे बहुत शर्मिंदा हुईं। “बेटा, ये क्या कर रहे हो? दो मर्दों के साथ…?”

मैंने उन्हें समझाया, “अम्मी, अब तुम हम दोनों की हो। मजा दो।”

सुधीर ने अम्मी को बुर्का पहनाकर चोदा। पहले वह बुर्के में ही उनकी चूत में घुसा। मैंने अम्मी का मुंह लिया। फिर पोजीशन बदले। मैंने अम्मी की गांड ली। पहली बार गांड में लंड डालने पर अम्मी बहुत चीखीं, “आह्ह… फट जाएगी… धीरे… आह्ह!” लेकिन धीरे-धीरे गांड खुल गई।

पूरी रात हम तीनों ने मस्ती की। अम्मी कई बार झड़ीं। हम दोनों ने उनकी चूत, गांड और मुंह में वीर्य भरा। सुबह तक अम्मी पूरी तरह थक चुकी थीं लेकिन संतुष्ट थीं।

उसके बाद घर की रूटीन बदल गई। अम्मी अब मेरी और सुधीर की जरूरत पूरी करती हैं। कभी अकेले, कभी साथ।

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