कॉलेज से जल्दी घर लौटे मिर्जा ने हिजाबी मजहबी अम्मी नाजिया को अनकट मोटे लंड वाले यार के साथ चुदते देखा। वॉयर, गंदी चुदाई और गांड मारने की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी।
हाय दोस्तों, मेरा नाम मिर्जा है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर का रहने वाला हूँ। आज मैं आप लोगों को अपनी जिंदगी की सबसे शॉकिंग, गर्म और सच्ची सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ। ये कहानी मेरी अपनी मजहबी अम्मी की है, जिनका नाम नाजिया है। उम्र 45 साल है, लेकिन देखने में वो अभी भी 35 से ज्यादा नहीं लगतीं।
अम्मी बहुत धार्मिक और पर्दे वाली औरत हैं। घर से बाहर निकलते ही हमेशा पूरा हिजाब पहनती हैं। गैर मर्द से बात करने में भी उन्हें शर्म आती है। मुहल्ले वाले उन्हें आदर्श बीबी कहते हैं। लेकिन असलियत कुछ और ही थी, जो उस दिन मेरी आँखों ने देख ली।
घर में सिर्फ मैं और अम्मी रहते हैं। अब्बू दुबई में नौकरी करते हैं। वो साल में सिर्फ एक-दो बार घर आते हैं। इसलिए अम्मी अकेली रहती हैं।
उस दिन ईद की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थीं। सुबह मैं कॉलेज जाने के लिए तैयार हुआ। बाइक निकालकर रास्ते में निकल पड़ा। बीच रास्ते में मेरा दोस्त जहांगीर मिल गया। उसे अपनी गर्लफ्रेंड को घुमाने जाना था और उसकी बाइक खराब हो गई थी। उसने मेरी बाइक माँगी। मुझे भी छुट्टियों के बाद कॉलेज जाने का बिल्कुल मन नहीं था, इसलिए मैंने बाइक दे दी और पैदल ही घर की तरफ चल पड़ा।
जब मैं घर के नजदीक पहुँचा तो मुहल्ले के छोटे बच्चे सड़क पर खेल रहे थे। मेरे घर के ठीक बाहर एक शानदार काली बुलेट मोटरसाइकिल खड़ी थी। वो बाइक मुझे पूरी तरह अनजान थी। मैं हैरान हो गया। एक बच्चे के पास जाकर पूछा, “भैया, ये बाइक किसकी है?”
बच्चा हँसते हुए बोला, “अरे भैया, आपके घर के रिश्तेदार की है ना। वो तो कई बार आ चुके हैं। अम्मी के साथ काफी देर तक अंदर रहते हैं।”
ये सुनकर मेरा दिमाग घूम गया। अम्मी ने मुझे कभी किसी रिश्तेदार के आने की बात नहीं बताई थी। शक होने लगा। मैं सीधे मुख्य दरवाजे से नहीं गया। चुपके से घर के बगल वाले खाली प्लॉट में घुस गया और पीछे वाली खिड़की से अंदर झाँकने लगा।
जो नजारा मैंने देखा, उससे मेरे होश उड़ गए।
मेरी मजहबी अम्मी नाजिया, जो कभी गैर मर्द की तरफ देखती भी नहीं थीं, आज खुले घने काले बालों के साथ, लाल लिपस्टिक लगाए, हाई हील्स पहने जमीन पर घुटनों के बल बैठी हुई थीं। उनके सामने एक तगड़ा, हैंडसम जवान मर्द खड़ा था। अम्मी उसका मोटा लंड मुँह में लेकर चूस रही थीं।
वो मर्द करीब 30 साल का था। जिम वाली चौड़ी छाती, मोटी-मोटी बाहें जिनमें नसें उभरी हुई थीं। उसका लंड देखकर मेरी आँखें फट गईं। अनकट, काला, बेहद मोटा और लंबा – मेरे लंड से दोगुना बड़ा। अम्मी उसे बड़े शौक से चूस रही थीं।
अम्मी ने लंड को मुँह से बाहर निकाला, चमड़ी को पीछे खींचा और लाल होंठों से टोपे पर गहरी किस की। फिर अपनी नोकदार जीभ डालकर टोपे के अंदर चक्कर काटने लगीं। मर्द कराह रहा था, “आह्ह… आह… नाजिया मेरी जान… मेरी रंडी… बहन की लौड़ी… कितना मस्त चूसती है तू!”
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था, लेकिन मेरा अपना लंड पैंट में फटने को तैयार हो गया था। मैंने चुपके से पैंट खोली और अपना लंड बाहर निकालकर हिलाने लगा।
तभी उस मर्द ने अम्मी को अपनी मजबूत बाहों में उठाया और नंगी हालत में ऊपर वाले कमरे की तरफ ले जाने लगा। मैं तेजी से मुख्य दरवाजे की तरफ गया। मेरे पास घर की अतिरिक्त चाबी थी। चुपचाप दरवाजा खोला, अंदर घुसा और बंद कर लिया।
अम्मी को यकीन था कि घर में कोई नहीं है, इसलिए उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद नहीं किया था। मैं दरवाजे की आड़ में छिपकर देखने लगा।
अंदर अम्मी ब्रा और पैंटी में सिगरेट पी रही थीं। उनकी गोरी देह, बड़े-बड़े चूचे और मोटी जांघें देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया। वो बेहद सेक्सी और हॉट लग रही थीं।
सुधीर (मर्द का नाम) ने अम्मी की ब्रा उतार दी। उनकी गोरी, रसीली चूचियाँ बाहर आ गईं। बड़े-बड़े, भारी और टाइट निप्पल। सुधीर ने दोनों हाथों से चूचियों को जोर-जोर से दबाना और मसलना शुरू कर दिया। अम्मी सिसकारियाँ भर रही थीं, “आह्ह… सुधीर… और जोर से… उफ्फ!”
फिर उसने अम्मी की पैंटी भी फाड़ दी। अम्मी की चूत बिल्कुल साफ, गोरी और पहले से ही पानी से तर थी। सुधीर ने चूत पर उंगली फेरी और फिर चूचियों को चूसने लगा। कभी दायाँ थन पूरा मुँह में लेकर चूसता, कभी बायाँ। दाँतों से निप्पल हल्का काटता तो अम्मी झुरझुरा जातीं।
करीब दस मिनट चूचियों की चुसाई के बाद सुधीर बोला, “नाजिया डार्लिंग, अब मुझे नंगा कर।”
अम्मी ने उठकर उसकी शर्ट और पैंट उतार दी। अब दोनों पूरी तरह नंगे थे। अम्मी घुटनों पर बैठ गईं और उस अनकट मोटे लंड को फिर से अपने मुँह में ले लिया। “ग्लवक्क… स्लर्प्प… ग्लैक्क…” की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। सुधीर ने अम्मी का सिर पकड़कर पूरा लंड उनके गले तक ठूंस दिया। अम्मी की आँखों से आंसू निकल आए, लेकिन वो चूसती रहीं।
थोड़ी देर बाद सुधीर ने अम्मी को बेड पर पटक दिया, उनकी टांगें फैलाईं और अपना 8 इंच का मोटा अनकट लंड उनकी चूत के मुंह पर रखा। एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा लंड एक ही बार में अंदर चला गया।
“आआआह्ह… मर गई सुधीर… बहुत बड़ा है… आह्ह!” अम्मी जोर से चीख पड़ीं।
सुधीर रुकने वाला नहीं था। उसने तेज-तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए। कमरे में चुदाई की थप-थप की आवाजें और अम्मी की सिसकारियाँ भर रही थीं। पहले तो अम्मी दर्द से चीखती रहीं, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें मजा आने लगा। अब वो अपनी गांड ऊपर उठा-उठाकर कह रही थीं, “आह्ह… और जोर से चोदो सुधीर… फाड़ दो अपनी मजहबी रंडी की चूत… हां यार… और तेज!”
सुधीर गंदी-गंदी गालियाँ दे रहा था, “ले साली कुतिया… हिजाबी रंडी… मजहबी छिनाल… तेरी चूत में कितना कसाव है… ले ले मेरी रांड गर्लफ्रेंड!”
करीब 20 मिनट जोरदार चुदाई के बाद सुधीर ने अम्मी की चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। अम्मी भी दो बार झड़ चुकी थीं। दोनों पसीने से तर-बतर होकर बेड पर लेट गए।
सुधीर ने सिगरेट सुलगाई और अम्मी को पिलाते हुए पूछा, “कैसी लगी चुदाई मेरी जान?”
अम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं, “बहुत मस्त थी यार। तेरा अनकट लौड़ा मेरी चूत को फाड़ कर रख देता है। मैं पूरी तरह संतुष्ट हूँ।”
लेकिन सुधीर की भूख अभी बाकी थी। उसने कहा, “नाजिया, मुझे मजहबी औरतों की गांड मारने में सबसे ज्यादा मजा आता है।”
मैं सोच रहा था कि अम्मी मना कर देंगी, लेकिन अम्मी ने शर्माते हुए कहा, “अनकट लौड़े का असली स्वाद तो गांड में ही मिलता है। अगली बार मैं बुर्का पहनकर अपनी गांड मरवा लूंगी तेरे से।”
ये सुनकर मैं हैरान रह गया।
कुछ देर बाद सुधीर कपड़े पहनकर चला गया। मैं चुपके से छत पर छिप गया।
दोस्तों, ये थी मेरी मजहबी अम्मी नाजिया की छुपी हुई रंडी वाली घटना। अब मैं जान गया था कि अम्मी कितनी भूखी हैं। आगे क्या हुआ – कैसे मैंने अम्मी को ब्लैकमेल किया, खुद उनके साथ चुदाई की या उनके यार के साथ थ्रीसम किया – वो सब अगली कहानी में बताऊंगा।
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