19 साल के मृदुल को अपनी 41 साल की तलाकशुदा बुआ सरिता से गहरा शारीरिक प्यार हो गया। जन्मदिन पर इजहार के बाद दोनों की गुप्त चुदाई शुरू हुई जो डेट और होटल में जारी रही hot sex stories ।
मृदुल 19 साल का एक जवान लड़का था। उसकी उम्र के अनुसार वह काफी स्मार्ट और हैंडसम दिखता था, लेकिन उसकी रुचि अपनी उम्र की लड़कियों में बिल्कुल नहीं थी। उसे MILF औरतों की तरफ खास आकर्षण था – उनकी परिपक्वता, उनके शरीर की गरमाहट और अनुभव उसे पागल कर देते थे। मम्मी-पापा दोनों नौकरीपेशा थे, इसलिए बचपन से ही वह अपना ज़्यादातर समय अपनी बुआ सरिता के साथ बिताता था।
सरिता 41 साल की साँवली रंग की बेहद आकर्षक महिला थी। उसका शरीर अभी भी जवानी की चमक लिए हुए था – बड़े-बड़े स्तन, भारी हिप्स और मोटी जांघें। वह ज़्यादातर समय साड़ी या सलवार-कमीज़ पहनती थी, जिससे उसकी गरमाई छिपती नहीं थी। उसका तलाक हुए दस साल हो चुके थे। उसके पति का किसी दूसरी औरत के साथ अफेयर चल रहा था, जिसके कारण रिश्ता टूट गया। मृदुल के पापा ने सरिता को पास ही में एक छोटा सा 1BHK फ्लैट खरीद कर दे दिया था ताकि वह आराम से रह सके। दोनों फ्लैट पास-पास होने के कारण मृदुल रोज़ बुआ के पास आता-जाता रहता।
सरिता के लिए भी मृदुल उसका अकेलापन भरने वाला सहारा था। वह उसे “बाबू” कहकर पुकारती और उसके साथ खाना बनाती, बातें करती। लेकिन मृदुल के मन में बदलाव आ चुका था। बचपन का क्रश अब गहरे प्यार और कामुक इच्छा में बदल गया था। वह सरिता को अब बुआ नहीं, बल्कि एक पूरी औरत के रूप में देखता था।
जब भी वह सरिता के घर जाता, उसकी नज़रें सरिता के शरीर पर घूमती रहतीं। अगर सरिता झुककर कुछ उठाती तो उसका गहरा क्लेवेज़ दिख जाता। मृदुल चुपके-चुपके उसे देखता और मन ही मन कल्पना करने लगता। कभी ब्रा का स्ट्रैप दिख जाता तो वह रात को घर लौटकर सरिता को उसी ब्रा में नंगा करके सोचता और हिलाने लगता। उसकी उंगलियाँ अपने लंड पर सरकतीं और वह बार-बार सरिता के नाम का जाप करता। “बुआ… आप कितनी सेक्सी हो…”
धीरे-धीरे मृदुल ने फैसला कर लिया कि वह अपनी भावनाएँ सरिता को बताएगा। उसका जन्मदिन नज़दीक था। उसने सोचा कि इसी दिन सब कुछ खुलकर कह देगा।
जन्मदिन का दिन
सुबह मम्मी-पापा ने मृदुल को जल्दी-जल्दी विश किया और ऑफिस चले गए। मृदुल को थोड़ी निराशा हुई कि उसके माता-पिता उसके खास दिन भी उसके साथ समय नहीं निकाल पाए, लेकिन उसे सरिता की याद आते ही खुशी हो गई। वह तैयार होकर सरिता के फ्लैट पहुँचा।
सरिता ने दरवाज़ा खोला और मुस्कुराते हुए उसे जोर से गले लगा लिया। “हैप्पी बर्थडे, मेरे बाबू! आज तू और भी ज़्यादा हैंडसम लग रहा है।” सरिता की साड़ी थोड़ी ढीली थी और गले लगते समय उसके नरम स्तन मृदुल की छाती से रगड़ खा रहे थे। मृदुल को तुरंत उत्तेजना महसूस हुई।
“थैंक यू, बुआ।” मृदुल ने भी उसे कसकर गले लगाया।
सरिता ने उसे अंदर बुलाया। “आजा अंदर… आज मैंने तेरा फेवरेट खाना बनाया है – खीर, पूड़ी और आलू की सब्ज़ी।”
दोनों किचन से लगे कमरे में गए। सरिता ने मृदुल को खीर खिलाई। खाते समय सरिता का ब्लाउज़ थोड़ा खुला हुआ था और मृदुल उसकी छाती को बार-बार देख रहा था। खाना खाने के बाद दोनों लिविंग रूम के सोफे पर बैठ गए। सरिता खुशी-खुशी बताने लगी, “बाबू, तू कितना बड़ा हो गया है। अब तो लड़कियाँ तेरे पीछे पागल होंगी। स्मार्ट, हैंडसम… मेरा बाबू तो अब पूरा मर्द बन गया है।”
मृदुल शर्मा गया लेकिन उसका दिल तेज़ धड़क रहा था। सरिता उठी, “एक सेकंड… तेरा गिफ्ट ले आती हूँ।” वह बेडरूम से एक सुंदर गिफ्ट पैक लेकर आई। मृदुल ने बॉक्स खोला तो उसमें एक ब्रांडेड महँगी घड़ी थी।
“बुआ, यह तो बहुत महँगी है।” सरिता मुस्कुराई, “तेरी चिंता मत कर। मेरी कुछ सेविंग्स हैं। तुझे देखकर अच्छा लगता है।”
मृदुल खड़ा हो गया और सरिता को कसकर गले लगा लिया। सरिता ने उसकी पीठ थपथपाई। “अब इस साल कोई गर्लफ्रेंड बना ले… वरना बुआ के साथ ही रहना पड़ेगा।” कहकर वह हँस पड़ी।
मृदुल ने हिम्मत जुटाई। “बुआ, मुझे आपको कुछ बताना है।” सरिता: “बोलो ना?”
“पहले वादा करो कि गुस्सा नहीं करोगी।” सरिता हँसी, “अरे, मैं अपने बाबू पर गुस्सा क्यों करूँगी? बता क्या बात है?”
मृदुल ने गहरी साँस ली। “बुआ, मुझे आप बहुत पसंद हो। बुआ की तरह नहीं… गर्लफ्रेंड की तरह। मैं आपसे प्यार करता हूँ।”
सरिता पहले तो मुस्कुराई, “अरे पागले… अपनी बुआ को गर्लफ्रेंड बनाएगा क्या? चिंता मत कर, तेरी उम्र की लड़कियाँ मिल जाएँगी।”
लेकिन मृदुल रुका नहीं। उसने सरिता की कमर पर हाथ रख दिया। “बुआ, मुझे सिर्फ आप ही चाहिए। जब भी आप झुकती हो तो आपका क्लेवेज़ दिखता है… मेरा लंड खड़ा हो जाता है। मैं आपको बिना कपड़ों के सोचता हूँ, आपको छूने का मन करता है।”
सरिता चौंक गई लेकिन उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान भी थी। “अच्छा जी? मतलब हमारा बाबू सच में बड़ा हो गया है।”
मृदुल ने सरिता का हाथ पकड़ा और अपनी पैंट उतार दी। उसका सख्त, मोटा लंड सरिता के हाथ में आ गया। सरिता का हाथ काँप गया लेकिन उसने छोड़ा नहीं। मृदुल ने सरिता के होंठों पर जोरदार किस कर दिया।
सरिता के नरम होंठ मृदुल को पागल कर रहे थे। वह उसके गाल, गर्दन, सीने पर किस करने लगा। सरिता विरोध करना चाह रही थी लेकिन उसके शरीर ने साथ देना शुरू कर दिया। मृदुल ने सरिता का पल्लू हटाया, ब्लाउज़ के हुक खोले और ब्रा उतार दी। सरिता के बड़े, भारी स्तन बाहर आ गए। मृदुल ने उन्हें कसकर पकड़ा, निप्पल चूसा, चबाया।
“आह्ह्ह… बाबू…” सरिता की आह निकल गई।
मृदुल ने सरिता की साड़ी और पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। सरिता पूरी तरह नंगी हो गई। उसकी घनी भौंरी वाली चूत मृदुल के सामने थी। सरिता ने शर्म से हाथ से ढकने की कोशिश की लेकिन मृदुल ने उसके हाथ हटाए और चूत को सूँघा। फिर उसने मुंह लगा दिया और जोरों से चाटने लगा।
सरिता का शरीर काँपने लगा। “आह्ह बाबू… अह्हह… एक सेकंड… आह्ह!” मृदुल की जीभ उसकी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। सरिता का पहला ऑर्गेज़म आ गया। वह चीख पड़ी।
मृदुल ने अपना लंड सरिता की गीली चूत पर रखा और कसकर धकेल दिया। “आह्ह्ह!” सरिता चिल्लाई। मृदुल ने बैठे-बैठे ही सरिता को चोदना शुरू कर दिया। दोनों के शरीर पसीने से तर हो गए। सरिता अब पूरी तरह झुक चुकी थी। वह खुद ऊपर-नीचे हिलने लगी।
मृदुल ने सरिता की गांड पकड़ी और तेज़-तेज़ धक्के मारे। “बुआ… मैं तुम्हें रोज़ चोदूँगा।” आखिरकार मृदुल ने सरिता की चूत के अंदर ही अपना सारा वीर्य भर दिया। दोनों थककर लेट गए।
सरिता ने पूछा, “बाबू, अब क्या होगा?” मृदुल ने उसे चूमते हुए कहा, “अब तुम मेरी हो।”
अगला दिन – डेट और होटल
अगले दिन मृदुल ने सरिता को डेट पर बुलाया। सरिता ने उसकी इच्छा पूरी की। वह गहरी लाल ट्रांसपेरेंट साड़ी पहने थी। ब्लाउज़ बहुत टाइट और लो-कट था। क्लेवेज़ साफ़ दिख रहा था।
मृदुल ने उसे देखते ही गले लगा लिया और किस किया। दोनों रेस्टोरेंट गए। वहाँ खाना खाते समय मृदुल सरिता की जांघ पर हाथ फेरता रहा। रेस्टोरेंट से निकलकर मृदुल पहले से बुक किए होटल ले गया।
कमरे में घुसते ही मृदुल ने सरिता को दीवार से सटाया। साड़ी का पल्लू खींचा, ब्लाउज़ फाड़ा और स्तनों को मसलने लगा। सरिता कराह रही थी, “बाबू… धीरे… आह्ह!”
मृदुल ने सरिता को बेड पर लिटाया। उसकी चूत पहले से गीली थी। मृदुल ने घुटनों के बल बैठकर चूत चाटी, उँगलियाँ डालीं। सरिता ने मृदुल का लंड मुंह में लिया और चूसने लगी।
फिर मृदुल ने सरिता को घोड़ी बनाया। एक ज़ोरदार झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया। “थप… थप… थप…” कमरा चुदाई की आवाज़ से गूँज उठा।
सरिता चिल्ला रही थी, “और ज़ोर से… अपनी बुआ को चोदो… आह्ह… मैं तुम्हारी रंडी हूँ!”
मृदुल ने बाल पकड़े, गांड पर थप्पड़ मारे और तेज़ चोदा। फिर पोज़ीशन बदली – मिशनरी, लेग्स ऊपर, फिर सरिता ऊपर बैठकर काउगर्ल स्टाइल। सरिता की छातियाँ उछल रही थीं।
दोनों कई बार झड़ गए। आखिर में मृदुल ने फिर से चूत में वीर्य भरा।
दोनों लेटे हुए थे। सरिता मृदुल के सीने पर सिर रखे बोली, “बाबू, यह गलत है लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है।”
मृदुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं। मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूँगा।”
इस तरह उनकी गुप्त प्रेम कहानी शुरू हो गई। दोनों अब छुप-छुपकर मिलते, एक-दूसरे को चोदते और प्यार करते।
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