बर्फीली साली की बर्बर चुदाई

ठंडी उत्तराखंडी हवेली में बर्फ की रात, जीजू राहुल ने अपनी 28 साल की गोरमट साली प्रिया की टाइट चूत और मोटी गांड को बेरहमी से फाड़ दिया। गुप्त हवस, थप्पड़ों, काटने और जोरदार पेलाई भरी पागल रातें, जो परिवार की दीवारें हिला गईं full real sex stories on lustystories.fun ।

रात की ठंडी हवा उत्तराखंड की उस पुरानी हवेली में घुस रही थी, जहां परिवार की सारी रौनक एक छत के नीचे सिमटी हुई थी। हवेली का नाम था ‘केदार भवन’, जो नैनीताल के पास एक छोटे से पहाड़ी गांव में बसा था। बर्फीली सर्दी ने पूरे इलाके को सफेद चादर ओढ़ा रखा था। ठंडी हवा की लहरें पुरानी लकड़ी की खिड़कियों के झरोखों से अंदर घुसकर कमरे की मोटी पत्थर की दीवारों को छू रही थीं। हवा में बर्फ की सर्दी इतनी तीखी थी कि चमड़ी पर चुभन सी होती थी। पुरानी हवेली की ऊंची छत, लकड़ी के बीम और मोटी दीवारें ठंड को अंदर कैद किए रखे थे। बाहर बर्फ गिर रही थी, सड़कें पूरी तरह बंद थीं।


पूरे परिवार की खुशियां और शोर-शराबा एक ही छत के नीचे था, लेकिन अंदर का माहौल भारी और ठंडा महसूस हो रहा था। राहुल उस रात बेचैनी से करवटें बदल रहा था। उसके शरीर पर मोटे कंबल के बावजूद ठंड की सिहरन रीढ़ की हड्डी तक उतर रही थी। उसका मन अंदर ही अंदर एक अनजानी आग से जल रहा था। दिल की धड़कन तेज थी, सांसें भारी हो रही थीं। वह 35 साल का मजबूत कद-काठी वाला आदमी था, चौड़े कंधे, मोटी बाहें और गहरी आंखें। शादी में अपने साले की वजह से यहां आया था, लेकिन अब बर्फबारी के कारण ट्रेन और सड़कें दोनों बंद हो चुकी थीं। घर लौटना नामुमकिन था। मजबूरन इसी पुरानी हवेली में रुकना पड़ा था।


उसका कमरा हवेली के दूसरे तल्ले पर था। लकड़ी का पुराना बिस्तर, नम दीवारें और मंद रोशनी वाला एक छोटा लैंप। कमरे में पुरानी किताबों और लकड़ी की गंध मिली हुई थी। बाहर बरामदे में परिवार के लोग हल्की-हल्की बातें कर रहे थे, लेकिन राहुल का ध्यान कहीं और था – प्रिया पर।


प्रिया उसकी साली की पत्नी थी। 28 साल की प्रिया पहली बार इस शादी में मिली थी, लेकिन उसकी एक झलक ने राहुल को अंदर तक हिला दिया था। गोरी, चिकनी त्वचा, जिस पर ठंड में गुलाबी लाली छा जाती थी। लंबे, घने काले बाल कमर तक लहराते थे, जिनकी महक हर बार हवा में फैल जाती थी। उसकी आंखें बड़ी-बड़ी, कजरारी और इतनी गहरी कि देखते ही इंसान डूब जाए। भरे हुए वक्ष 36 इंच के, जो साड़ी के ब्लाउज में फटने को तैयार रहते थे। पतली कमर, गोल और मोटी गांड जो हर कदम पर लहराती थी। साड़ी उसके बदन पर इतनी कसकर लिपटी रहती थी कि उसके नितंबों की गोलाई और जांघों की मोटाई साफ झलकती थी।


शादी के दौरान राहुल बार-बार अपनी नजरें उस पर टिकाते, फिर खुद को कोसता। “यह गलत है, वह मेरी साली की बीवी है। परिवार की इज्जत का सवाल है।” लेकिन उसका लंड उसके कंट्रोल से बाहर हो चुका था। प्रिया की हंसी, उसकी नजरों की शरारत, उसके होंठों की नमी – सब कुछ उसे पागल कर रहा था।


रात और गहराती गई। ठंड बढ़ती गई। राहुल कंबल में लिपटा हुआ था, लेकिन नींद उसे छू भी नहीं रही थी। अचानक दरवाजे पर हल्की खटखटाहट हुई।
“कौन?” राहुल ने कांपती आवाज में पूछा।
“जीजू, मैं प्रिया हूं।” नरम, थोड़ी कांपती हुई आवाज आई।


राहुल का दिल जोर से धड़क उठा। उसने जल्दी से दरवाजा खोला। प्रिया वहां खड़ी थी। उसके कंधों पर मोटा शॉल लपेटा हुआ था, लेकिन ठंड से उसके गाल लाल हो रहे थे। आंखों में नमी थी, होंठ हल्के से कांप रहे थे। उसकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था, जिससे उसके भारी वक्षों की गहराई झांक रही थी।
“जीजू, नींद नहीं आ रही। घर में सब सो गए हैं, लेकिन ठंड बहुत है। क्या मैं थोड़ी देर यहां बैठ सकती हूं? बातें करेंगे?” उसकी आवाज में एक अजीब सी ललक थी।


राहुल हिचकिचाया, लेकिन “आओ” कहकर दरवाजा खोल दिया। प्रिया अंदर आई और धीरे से दरवाजा बंद कर लिया। कमरा छोटा था। दोनों बिस्तर के किनारे बैठ गए। दूरी बनाए रखने की कोशिश में भी उनके बदन एक-दूसरे की गर्माहट महसूस कर रहे थे।
बातें शुरू हुईं। परिवार, शादी, मौसम। लेकिन धीरे-धीरे बातें गहरी होती गईं।
“जीजू, आपकी पत्नी कितनी भाग्यशाली हैं। आप इतने मर्दाना, इतने केयरिंग।” प्रिया ने कहा और उसकी आंखें राहुल की आंखों में गड़ गईं।


राहुल मुस्कुराया, “तुम भी तो कम नहीं हो प्रिया। तुम्हारा पति सच में बहुत लकी है।”
उनकी नजरें मिलीं। समय जैसे रुक गया। प्रिया अनजाने में करीब सरक आई। राहुल का हाथ उसके हाथ को छू गया। बिजली सी दौड़ गई। प्रिया की उंगलियां ठंडी लेकिन मुलायम थीं। उसने राहुल का हाथ पकड़ लिया।


“जीजू, मुझे बहुत ठंड लग रही है।” उसकी आवाज अब फुसफुसाहट बन चुकी थी।
राहुल ने अपना कंबल उसके कंधों पर डाला। उसका हाथ उसके कंधे पर रुक गया। प्रिया ने आंखें बंद कर लीं। राहुल का हाथ धीरे से उसके गाल पर गया। प्रिया ने सिर झुकाकर उसके हाथ को चूमा।


“रहने दो जीजू… यह गर्माहट अच्छी लग रही है।” कहते हुए वह और करीब आ गई। अब उनके शरीर छू रहे थे। प्रिया का नरम बदन राहुल की छाती से सट गया।
राहुल का लंड पहले ही सख्त हो चुका था। उसने प्रिया के चेहरे को ऊपर उठाया। उनके होंठ मिले। पहला किस हल्का था, लेकिन फिर गहरा, भूखा, प्यासा। प्रिया की जीभ राहुल की जीभ से लड़ने लगी। उनकी सांसें एक हो गईं। राहुल ने प्रिया को अपनी मजबूत बाहों में जकड़ लिया। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया। राहुल ने उसके भारी, 36 इंच के वक्षों को दोनों हाथों से दबाया।


“आह… प्रिया, तुम्हारी चूचियां कितनी बड़ी और मुलायम हैं।” राहुल ने उसके कान में फुसफुसाया।
प्रिया शर्मा गई लेकिन उसने राहुल की शर्ट के बटन खोल दिए। उसकी उंगलियां राहुल के चौड़े, बालों वाले सीने पर घूमने लगीं। राहुल ने उसके ब्लाउज के हुक खोले। सफेद ब्रा से बाहर झांकते भरे वक्ष देखकर उसका लंड और सख्त हो गया। उसने ब्रा उतार दी। प्रिया की गुलाबी, बड़े-बड़े चुचियां बाहर आ गईं। निप्पल सख्त और खड़े थे। राहुल ने एक चूची मुंह में ले ली और जोर से चूसने लगा। प्रिया की सिसकारी निकली, “आह जीजू… और जोर से… काट लो इन्हें।”


कमरे में अब केवल उनकी गर्म सांसों और चुसाई की आवाजें गूंज रही थीं। राहुल ने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया। उसकी साड़ी, पेटीकोट सब उतार दिए। प्रिया अब पूरी नंगी थी। उसकी गोरी जांघें, साफ चूत जो पहले से गीली हो चुकी थी, और मोटी गांड। राहुल ने अपनी पैंट उतारी। उसका 8 इंच लंबा, मोटा लंड बाहर आया, जो पूरी तरह खड़ा और नसों से फूला हुआ था।
प्रिया ने उसे पकड़ लिया। “जीजू, आपका लंड तो बहुत बड़ा और मोटा है। इसे देखकर ही मेरी चूत गीली हो गई है।” उसने लंड को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। गहरी थ्रोट तक ले जाती, फिर बाहर निकालती। राहुल उसके बाल पकड़कर उसके मुंह में धकेल रहा था।
“चूसो प्रिया… साली की रंडी बन जा आज।” राहुल की आवाज कड़क थी।
प्रिया की आंखों में शर्म नहीं, सिर्फ हवस थी। राहुल ने उसे उल्टा किया। उसकी मोटी गांड ऊपर थी। उसने गांड पर थप्पड़ मारा। “चटाक!” प्रिया चीखी लेकिन और पीछे धकेली। राहुल ने अपनी जीभ उसकी चूत और गांड के छेद पर फिराई। प्रिया पागल हो रही थी। “आह जीजू… चाटो… अपनी साली की चूत चाटो।”


राहुल ने अपना मोटा लंड उसकी गीली चूत पर रखा और एक जोरदार झटके में पूरा घुसा दिया। “आआआह…!” प्रिया की चीख निकली। इतना मोटा लंड उसकी टाइट चूत में घुसा तो वह कांप उठी। राहुल ने रुकना नहीं था। वह जोर-जोर से धकेलने लगा। हर थप्पड़ पर प्रिया की गांड हिल रही थी।


“चोदो जीजू… फाड़ दो मेरी चूत… हां… और तेज… मैं आपकी रंडी हूं आज।” प्रिया चिल्ला रही थी।
राहुल ने उसकी कमर पकड़ी और मशीन की तरह पेलने लगा। कमरा उनके शरीरों की टकराहट की आवाजों से भर गया था। पसीना, चूत का रस, सांसों की गर्मी – सब मिलकर माहौल को और गर्म कर रहा था। राहुल ने प्रिया को कई पोजीशन में चोदा – कभी मिशनरी में, कभी डॉगी में, कभी वह ऊपर बैठकर खुद को हिलाती। उसकी चूचियां उछल रही थीं। राहुल उन्हें दबाता, चूसता, काटता।


एक बार उसने प्रिया की गांड में भी लंड घुसाने की कोशिश की। प्रिया ने दर्द से चीख मारी लेकिन फिर मजा आने लगा। “हां जीजू… मेरी गांड भी फाड़ दो।” धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में चला गया। राहुल ने जोरदार गांड मारना शुरू कर दिया।


रात भर यह सिलसिला चला। वे थकते नहीं थे। बीच-बीच में पानी पीते, फिर फिर से शुरू। प्रिया कई बार झड़ चुकी थी। उसकी चूत से रस बह रहा था। आखिरकार राहुल ने जोर से चोदते हुए अपना मोटा लोड उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। गर्म वीर्य उसकी चूत को भर गया।


दोनों थककर लेट गए। प्रिया राहुल की छाती पर सिर रखे लेटी थी। उसके बदन पर निशान थे – चूसे हुए, थप्पड़ों के लाल दाग।
“जीजू, यह रात मैं कभी नहीं भूलूंगी। आपने मुझे आज सच में औरत बना दिया।” प्रिया ने फुसफुसाया।


राहुल ने उसे चूमा। मन में अपराधबोध था, लेकिन हवस की तृप्ति ज्यादा थी। “यह हमारा राज रहेगा। कोई नहीं जानना चाहिए।”
बाहर बर्फ अभी भी गिर रही थी। हवेली में सन्नाटा था। लेकिन उस कमरे में जो आग जली थी, वह लंबे समय तक उनकी यादों में जलती रहेगी। सुबह होने तक वे फिर एक बार लिपट गए, इस बार और गहराई से, जैसे यह आखिरी मौका हो।


राहुल ने प्रिया को अपनी छाती से और कसकर चिपका लिया। बाहर बर्फ की सनसनाहट अभी भी जारी थी, लेकिन कमरे के अंदर की गर्मी ने सब कुछ जला दिया था। प्रिया की सांसें अभी भी तेज थीं। उसके बदन पर पसीने की परत चमक रही थी। राहुल की उंगलियां उसकी पीठ पर घूम रही थीं, कभी-कभी उसकी मोटी गांड को नोचती हुईं।


“जीजू… अभी मत छोड़ो मुझे…” प्रिया ने फुसफुसाते हुए कहा और राहुल के लंड को फिर से अपनी उंगलियों में जकड़ लिया। लंड अभी भी आधा सख्त था, प्रिया के चूत के रस और वीर्य से चिपचिपा हुआ। “मुझे फिर से चाहिए… आपका ये मोटा लंड मेरी चूत में… पूरी रात भर… मुझे रंडी बना दो आज।”


राहुल की आंखों में फिर से भूख जाग गई। वह 35 साल का था, लेकिन आज उसकी मर्दानगी 20 साल के जवान की तरह उफान मार रही थी। उसने प्रिया को पलटकर उसके पेट के बल लिटा दिया। प्रिया की मोटी, गोल गांड ऊपर उठ गई। राहुल ने दोनों हाथों से उसके नितंबों को फैलाया और अपनी जीभ गांड के छेद पर घुमाने लगा। प्रिया कराह उठी, “आह… जीजू… वहां… चाटो… अपनी साली की गांड चाटो… मैं आपकी गंदी रखैल हूं आज रात।”


राहुल ने जोर से थप्पड़ मारा गांड पर। चटाक! चटाक! प्रिया की सफेद गांड लाल हो गई। “रंडी… चुप रह… अगर कोई सुन लिया तो?” लेकिन उसकी आवाज में कोई डर नहीं था, सिर्फ क्रूर हवस थी। उसने अपना लंड फिर से सख्त किया और प्रिया की गांड पर रगड़ने लगा। बिना किसी चेतावनी के एक जोरदार झटके में आधा लंड गांड में धंस गया। प्रिया ने तकिए में मुंह दबाकर चीख मारी। दर्द और मजा दोनों एक साथ।


“फाड़ दो… मेरी गांड फाड़ दो जीजू… पूरा डालो… आह!” प्रिया चिल्लाई। राहुल ने उसके बाल पकड़े, सिर पीछे खींचा और पूरी ताकत से पेलना शुरू कर दिया। हर जोरदार धक्के पर प्रिया का पूरा बदन हिल रहा था। उसके भारी 36 इंच के वक्ष बिस्तर से रगड़ खा रहे थे। कमरे में चूत-गांड की चिपचिपी आवाजें, शरीरों की टकराहट और उनकी पागल आहें गूंज रही थीं।


राहुल ने प्रिया को घुटनों के बल खड़ा किया और पीछे से कुत्ते की तरह चोदने लगा। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी, दूसरे से चूचियों को बेरहमी से मलता हुआ। “तुम्हारी चूत और गांड दोनों मेरी हैं आज… साले की बीवी को मैं आज रात भर फाड़ूंगा।” प्रिया का बदन कांप रहा था। वह कई बार झड़ चुकी थी। उसकी जांघों से रस की धार बह रही थी।


फिर राहुल ने उसे उठाकर दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया। प्रिया का एक पैर ऊपर उठाया और खड़े-खड़े ही अपना 8 इंच का मोटा लंड उसकी चूत में घोंप दिया। दीवार पर प्रिया की पीठ रगड़ खा रही थी। राहुल का मुंह उसकी चूचियों पर था – काटता, चूसता, नोचता। प्रिया की निप्पल लाल और सूजी हुई हो गई थीं। “जीजू… मारो… और तेज… मुझे चोदते हुए मार डालो… हां… यही चाहिए था मुझे…”
रात के घंटे बीतते गए। वे थकते नहीं थे।

बीच में राहुल ने प्रिया को अपने मुंह पर बिठाकर उसकी चूत चाटी। प्रिया उसके चेहरे पर झूल रही थी, चूत को रगड़ रही थी। “चूसो जीजू… अपनी साली की गीली चूत पी जाओ…” राहुल की जीभ अंदर तक घुस रही थी। प्रिया का रस उसके मुंह में भर गया।


सुबह होने वाली थी, लेकिन उनकी भूख अभी खत्म नहीं हुई थी। प्रिया ने राहुल को लिटाया और खुद ऊपर चढ़ गई। उसकी मोटी गांड राहुल के लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। तेज-तेज हिलती हुई, कभी घुमाती हुई। राहुल नीचे से जोर-जोर से धक्के दे रहा था। प्रिया की चूचियां उछल-उछलकर राहुल के मुंह में आ रही थीं। वह उन्हें काट रहा था।


“मैं झड़ने वाला हूं प्रिया…” राहुल ने कहा। “अंदर ही छोड़ दो जीजू… अपनी साली की चूत भर दो… गर्भ में डाल दो आज… मुझे आपका बच्चा चाहिए…” प्रिया ने पागलों की तरह कहा।


राहुल ने जोर से धक्का दिया और अपना गर्म वीर्य दूसरी बार प्रिया की चूत के गहरे में उड़ेल दिया। प्रिया भी साथ ही झड़ गई। दोनों चीख पड़े। कमरा उनकी चीखों से भर गया।


थोड़ी देर बाद वे लेटे हुए थे। प्रिया राहुल की बांहों में समाई हुई। लेकिन ठंड के साथ-साथ अब खतरे का एहसास भी होने लगा। बाहर बरामदे में हल्की आवाजें सुनाई देने लगीं। परिवार के लोग जाग रहे थे।


“जीजू… अब जाना होगा…” प्रिया ने दबी आवाज में कहा, लेकिन उसकी उंगलियां अभी भी राहुल के लंड को सहला रही थीं। राहुल ने उसे रोका, “अभी नहीं… एक बार और।” उसने प्रिया को चारों खाने चित लिटाया और उसकी जांघें चौड़ी करके फिर से चोदना शुरू कर दिया। इस बार बहुत धीरे, गहरा और क्रूर। हर धक्के में वह प्रिया की गर्दन चूसता, काटता। प्रिया के नाखून राहुल की पीठ पर गड़ रहे थे। खून निकल आया था, लेकिन मजा दोगुना हो गया था।


वे इस बार इतने उन्मत्त हो गए कि भूल गए बाहर कोई जाग सकता है। प्रिया चिल्ला रही थी, “फाड़ दो… चोदो… और तेज… मैं तुम्हारी हूं… पूरी तरह तुम्हारी रंडी…” राहुल का लंड प्रिया की चूत को फाड़ता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। आखिरकार तीसरी बार राहुल ने प्रिया की गांड में वीर्य उड़ेल दिया। प्रिया की गांड लाल और सूजी हुई थी।


सुबह की पहली किरण खिड़की से अंदर आई। दोनों जल्दी से कपड़े पहनने लगे। प्रिया की साड़ी अस्त-व्यस्त थी। उसके गालों पर चूसने के निशान, गर्दन पर काटने के दाग। राहुल ने उसे पास खींचा और आखिरी गहरा किस लिया। “यह राज हमारे साथ ही रहेगा। लेकिन जब भी मौका मिलेगा… मैं तुम्हें फिर चोदूंगा।”


प्रिया मुस्कुराई, आंखों में शरारत और संतोष, “मैं इंतजार करूंगी जीजू… आपकी इस मोटी लंड की… मेरी चूत और गांड हमेशा आपकी रहेगी।”


प्रिया चुपके से कमरे से निकली। राहुल ने खिड़की से देखा – बर्फ अभी भी गिर रही थी, लेकिन अब हवेली की ठंड उसके लिए कुछ और मायने रखने लगी थी। दिन भर परिवार के बीच वे सामान्य व्यवहार करते रहे, लेकिन हर बार नजरें मिलते ही बिजली दौड़ जाती। शादी के बाकी कार्यक्रमों में प्रिया बार-बार राहुल के पास आने का बहाना ढूंढती। एक बार रसोई में अकेले में राहुल ने उसकी साड़ी ऊपर करके पीछे से उंगली डाल दी। प्रिया ने मुंह दबाकर कराहा।


शाम को फिर बर्फ बढ़ गई। ट्रेन अभी भी रद्द थी। रात को फिर वही कमरा। इस बार प्रिया खुद चली आई। अब कोई बहाना नहीं। सीधे राहुल के गले लग गई। “जीजू… मुझे फिर से चोदिए… पूरी रात… बेरहमी से…”


उस रात उन्होंने और भी खतरनाक तरीके आजमाए। राहुल ने प्रिया को बिस्तर से बांधा (कंबल के कपड़ों से) और घंटों तक उसे tease किया। कभी लंड मुंह में, कभी चूत पर रगड़कर, लेकिन अंदर नहीं डालता। प्रिया रोने लगी, “प्लीज जीजू… डाल दो… मैं मर जाऊंगी…” जब राहुल ने डाला तो प्रिया का बदन झड़ने से कांप उठा।


वे पूरे तीन दिन तक इसी तरह छुप-छुपकर मिलते रहे। हर मुलाकात में और ज्यादा बर्बरता, ज्यादा हवस। राहुल ने प्रिया को कई बार मुँह में वीर्य पिलाया। प्रिया ने खुशी-खुशी पिया। गांड मारी, चूत फाड़ी, चूचियां नोचीं। एक बार तो प्रिया ने राहुल को कहा, “अगर साला आ जाए तो भी मैं नहीं रुकूंगी… आप चोदते रहिए।”


आखिरकार जब मौसम ठीक हुआ और राहुल को जाना पड़ा, दोनों की आंखें नम थीं। लेकिन वादा था – अगली मुलाकात में फिर वही आग जलाएंगे।


उस ठंडी हवेली की रातें उनकी जिंदगी का सबसे गहरा, सबसे गंदा और सबसे यादगार अध्याय बन गईं। बाहर बर्फ पिघल गई, लेकिन उनके अंदर की आग कभी नहीं बुझी। परिवार अनजान था, लेकिन हवस की यह कहानी हमेशा उनके खून में दौड़ती रहेगी।


प्रिया अब कभी भी अकेली नहीं रहती थी। हर ठंडी रात को उसे राहुल के मोटे लंड की याद सताती। और राहुल… वह जानता था, यह सिर्फ शुरुआत थी।

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