38 साल के ताकतवर अमित ने 34 साल की सेक्सी रूचि भाभी को अपनी जंगली BDSM गुलाम बना लिया। छिपी चुदाई, क्रूर थप्पड़, clamps, गांड चोदाई और दर्द भरा नशा… भाभी हर रात फटती और भीख मांगती है bhabhi sex stories ।
मेरा नाम अमित है। मैं 38 साल का शादीशुदा मर्द हूँ। कद 6 फीट का, बदन हट्टा-कट्टा, जिम का दीवाना। गोरा रंग, घुंघराले बाल और छाती पर घने काले बाल जो मेरी मर्दानगी को और निखारते हैं। मैं दिल्ली के एक पॉश सोसाइटी में रहता हूँ, जहां ऊंची-ऊंची इमारतें और प्राइवेट गार्डन हैं।
अच्छी सर्विस करता हूँ, मगर घर पहुंचते ही मेरी बीवी अंकिता और हमारे 4 साल के बेटे को संभालने में जुट जाता हूँ। अंकिता 32 साल की बेहद खूबसूरत और सेक्सी औरत है, लेकिन शादी के बाद उसकी रुचि सेक्स में कम हो गई थी। वह घर संभालती, बच्चे को देखती, बस।
हमारे ठीक बगल वाले फ्लैट में यश भार्गव रहते थे।
यश 37 साल का स्मार्ट, हैंडसम आदमी था, जो अक्सर बिजनेस टूर पर रहता। उसकी बीवी रूचि 34 साल की आग थी। 5 फीट 6 इंच लंबी, गोरा रंग, भारी-भारी 38DD चूचियां, पतली कमर, मोटी-मोटी जांघें और गोल-गोल गांड जो साड़ी में भी फटने को तैयार रहती। वह ज्यादातर हल्की साड़ी और बहुत छोटे ब्लाउज पहनती, जिससे उसकी चूचियों का गहरा क्लिवेज हमेशा झलकता। उसकी चाल में एक जंगली आकर्षण था। हम दोनों परिवारों की अच्छी दोस्ती थी। अंकिता और रूचि घंटों बातें करतीं। मैं रूचि को भाभी कहता और यश मुझे अमित भाई। लेकिन अंदर ही अंदर कुछ और चल रहा था।
नजदीकियां बढ़ती गईं। रूचि भाभी की नजरों में मुझे एक जवान, ताकतवर मर्द दिखता। वह अक्सर मेरी मांसपेशियों की तारीफ करती, “अमित जी, आपकी छाती देखकर तो किसी भी औरत का दिल धड़क जाए।” मैं हंसकर टाल जाता, लेकिन मेरे लंड में सनसनी दौड़ जाती।
एक शाम मैं उनके फ्लैट गया। यश टूर पर था। रूचि भाभी अकेली थी। बेटा सो चुका था। मैं कुछ सामान देने गया था।
वापस जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। “अरे अमित, ऐसे कैसे भाग रहे हो? बैठो ना। अकेली हूँ, दिल भारी है।” उसकी आवाज में एक गुस्सा और प्यास था। मैं बैठ गया। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया। भारी चूचियां लगभग बाहर आ गईं। गहरा क्लिवेज, पसीने से चमकती त्वचा। उसके आर्मपिट्स शेव नहीं किए हुए थे, हल्के बालों की झलक। मैंने सोचा, नीचे भी ऐसी ही जंगली झांटें होंगी।
उसने जूड़ा बांधते हुए हाथ ऊपर किए। आर्मपिट्स की गंध आई। मेरा लंड खड़ा हो गया। पहली बार मेरी नियत पूरी तरह खराब हो गई। मैं उसे नंगा करके रौंदना चाहता था। लेकिन मैंने सब्र किया। वह चाय लाई, हंसती-बोलती रही। उसकी बातों में छेड़छाड़ बढ़ती जा रही थी।
कुछ दिन बाद सवेरे-सवेरे रूचि भाभी मेरे घर आई। अंकिता मायके गई हुई थी।
मैं सिर्फ तौलिए में था, नहाने जा रहा था। दरवाजा खोला तो वह मुस्कुराई, “वाह अमित! नंगे बदन कितना खतरनाक लग रहे हो। ये चौड़ी छाती, ये बाल… लगता है कोई जंगली जानवर है।” उसकी नजरें मेरे तौलिए पर टिक गईं। “अगर तौलिया हटा दो तो और मजा आएगा।”
मैं हंसा, लेकिन अंदर आग लग गई। वह बैंक जाना चाहती थी। मैंने उसे छोड़ने का वादा किया।
आधे घंटे बाद जब वह तैयार हुई – हल्की साड़ी, गहरा ब्लाउज, मेकअप – तो वह आग थी। कार में बैठते ही उसकी जांघ मेरी जांघ से सट गई। बैंक के बाद वह मुझे ब्रा शॉप ले गई। “ये वाली बड़ी टाइट हो गई है,” उसने दुकानदार से कहा, “मेरी चूचियां अब और भी भारी हो गई हैं।” मैं कल्पना कर रहा था कि उन भारी चूचियों को कैसे नोचूंगा। फिर उसने ट्रिमर और वैक्स क्रीम खरीदी। “नीचे के बाल जल्दी बढ़ जाते हैं,” उसने फुसफुसाया, “जल्दी साफ करना पड़ता है।”
रेस्टोरेंट में चाट खाते हुए उसने कहा, “चाट चाटने में बड़ा मजा आता है… आम चूसने में भी।” मेरी आंखों में आग देखकर वह मुस्कुराई।
फिर एक दिन यश 4 दिन के टूर पर चला गया। अंकिता अभी मायके में थी। रूचि ने फोन किया, “अमित, आज से 4 दिन तक मैं तेरी हूँ। आ जा।”
शाम 8 बजे मैं पहुंचा। बेटा सो चुका था। उसने व्हिस्की निकाली। “कॉलेज टाइम में पीती थी। यश को मत बताना।” हम दोनों ने खूब पी। शराब चढ़ते ही उसकी जुबान खुल गई। “अमित, इन 4 दिनों तक तू मुझे अपनी रंडी बना ले। जो चाहे कर। मार, पीट, बांध, चोद… लेकिन पूरी तरह चोद दे मुझे। मैं बहुत दिनों से तरस रही हूँ।”
मैंने उसे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। उसके होंठ चूसने लगा। वह मेरे बाल पकड़कर चूम रही थी। मैंने उसका ब्लाउज फाड़ा। ब्रा हुक तोड़ दिया। 38DD की भारी, भरी-पूरी चूचियां उछल पड़ीं। गुलाबी चुंबक जैसे निप्पल। मैंने एक चूची मुंह में भर ली, जोर से चूसा, काटा। वह चीखी, “हां… काट डाल… नोच ले मेरी चूचियां!” मैंने दूसरी चूची पर जोरदार थप्पड़ मारा। लाल निशान पड़ गया।
वह और उत्तेजित हो गई।
मैंने उसे उठाकर बेडरूम ले गया। उसके कपड़े फाड़-फाड़कर उतारे। पेटीकोट हटाया तो उसकी चूत सामने थी – घनी काली झांटों से भरी, गीली, मोटी-मोटी ओठ वाली। मैंने उसे घुटनों पर बैठाया। “चूस मेरे लंड को, रंडी!”
मेरा 8 इंच का मोटा, नसों वाला लंड बाहर आया। वह लपकी, मुंह में भर लिया। गला तक ले गई, उल्टी जैसी आवाजें निकाली, लेकिन चूसती रही। “गले तक ले ले… हां, ऐसी ही चूस!” मैंने उसके बाल पकड़कर जबरदस्ती मुंह में धकेला। वह आंसू बहा रही थी, लेकिन आंखों में प्यास थी।
फिर मैंने उसे बेड पर पटका। उसके हाथ बांध दिए मेरी बेल्ट से। टांगें फैलाकर उसके ऊपर चढ़ गया। चूत पर थूककर लंड रगड़ा। “मांग, रंडी!” वह चिल्लाई, “फाड़ डाल मेरी चूत… अपनी भाभी की बुर मार!” मैंने एक झटके में पूरा 8 इंच घुसा दिया। वह चीख उठी। “आआह… फट गई… लेकिन मत रुक!” मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। घपाघप की आवाज गूंज रही थी। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने एक हाथ से चूची नोचते हुए, दूसरे से गांड पर जोरदार चपत लगाई। लाल हो गई उसकी गोरी गांड।
“हां… मार… पीट मुझे… मैं तेरी गुलाम हूँ!” वह चिल्ला रही थी। मैंने उसे कुत्ते की तरह मोड़ा। गांड ऊपर, मुंह नीचे। लंड फिर से चूत में घुसाया। इस बार और तेज। गांड पर लगातार थप्पड़। फिर अंगुली गांड में डाल दी। वह कांप रही थी। “तेरी गांड भी चोदूंगा आज,” मैंने कहा। उसने सिर हिलाया। मैंने लंड निकाला, चूत की चिकनाई से गांड पर रगड़ा और धीरे-धीरे घुसा दिया। वह दर्द से चीखी, लेकिन कमर हिला रही थी। “फाड़ डाल मेरी गांड… हां… तेरे लंड के लिए मरी जा रही हूँ!”
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हम घंटों चोदते रहे। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। फिर बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे नंगा करके, बाल पकड़कर मुंह में मारा। वह मेरे लंड को देवता मानकर चूस रही थी। “तेरा लंड ही मेरा असली मालिक है… यश का छोटा लंड कभी ऐसा मजा नहीं देता!”
रात के दूसरे राउंड में मैंने उसे बांधकर रखा। आंखों पर पट्टी। फिर मोमबत्ती की बूंदें चूचियों पर गिराईं। वह तड़प रही थी। “दर्द हो रहा है… लेकिन और दो!” मैंने उसकी चूत में उंगली डालकर G-spot मारा। वह झड़ गई, पानी फूटा। फिर मैंने उसे फिर से चोदा, इस बार और बेरहमी से। “तेरी चूत मेरी है… रोज चोदूंगा!” वह चिल्लाई, “हां… रोज… तेरी रंडी बन गई हूँ!”
सुबह जब उठे, मेरा लंड फिर खड़ा था। वह मुस्कुराई, “सवेरे का लंड सबसे खतरनाक होता है।” मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया। लंड पर बैठाकर चोदा। वह ऊपर-नीचे उछल रही थी। चूचियां मेरे मुंह में। मैंने निप्पल काटे। वह झड़ गई। मैंने भी उसके अंदर पूरा माल भर दिया।
4 दिन तक यही सिलसिला चला। हर दिन नया प्रयोग। एक दिन मैंने उसे बालकनी में नंगा करके चोदा, जहां पड़ोस के लोग आ-जा रहे थे। खतरे का मजा अलग था। उसकी चूत में वाइब्रेटर डालकर पूरे दिन घुमाया। शाम को निकालकर खुद मारा। उसने मेरे पैर चाटे, गांड चाटी, हर जगह से सेवा की।
चौथे दिन यश के आने से पहले हमने आखिरी बार जंगली चुदाई की। मैंने उसे फर्श पर पटका, बाल खींचे, चूचियों पर काटे, गांड लाल कर दी। अंत में उसके मुंह में झड़ा। वह सब पी गई। “अब तू मेरी है… जब चाहूंगा, चोदूंगा,” मैंने कहा। वह बोली, “हमेशा… तेरी जंगली रंडी।”
रूचि भाभी अब मेरी पूरी तरह गुलाम बन चुकी थी। वह मेरे हर आदेश मानती – चाहे चूत दिखाकर बुलाना हो, या रात को छत पर नंगा होकर चुदवाना। हमारी ये गुप्त जंगली दुनिया बेहद खतरनाक और लत लगाने वाली थी।
कुछ हफ्तों बाद यश फिर से 5 दिन के टूर पर चला गया। अंकिता बच्चे को लेकर अपनी बहन के यहां गई हुई थी। मौका मिलते ही मैंने रूचि को मैसेज किया – “रात 11 बजे मेरे फ्लैट में नंगी आ। दरवाजा खुला रहेगा। आंखों पर पट्टी बांधकर घुटनों पर बैठकर इंतजार करना।”
रात ठीक 11 बजे दरवाजा हल्का खुला। मैं अंदर गया तो देखा – रूचि पूरी नंगी, आंखों पर काली पट्टी, घुटनों पर बैठी हुई। उसके भारी 38DD स्तन लटक रहे थे, निप्पल सख्त। जांघों के बीच घनी काली झांटों वाली चूत पहले से गीली थी। मैंने चुपचाप उसके पास पहुंचकर उसके बाल पकड़े और जोर से खींचा। “आज तुझे सजा मिलेगी, मेरी गुलाम रंडी। तूने कल दिन में बिना मेरी परमिशन के खुद को छुआ था।”
उसने कांपते हुए कहा, “मालिक… माफ कर दो… लेकिन आपकी याद आ गई थी।” मैंने हंसा और उसके मुंह में अपना 8 इंच का मोटा लंड ठेल दिया। गला तक। वह उबकाई ले रही थी, आंसू बह रहे थे, लेकिन मैंने बाल पकड़कर जबरदस्ती मुंह फक दिया। “चूस… गले तक… तेरी गला मेरी चूत है आज!”
फिर मैंने उसे बेड पर पटक दिया। हाथ-पैर चारों तरफ फैलाकर बांध दिए। उसके स्तनों पर nipple clamps लगा दिए। वह चीखी, “आआह… दर्द हो रहा है मालिक!” मैंने clamps को चेन से खींचा और जोर से झटका दिया। चूचियां लाल हो गईं। फिर मैंने एक राइडिंग क्रॉप निकाला और उसके मोटे स्तनों, पेट, जांघों और चूत पर बेरहमी से मारना शुरू कर दिया। हर चपत के साथ वह तड़पती, चीखती, लेकिन उसकी चूत से पानी बह रहा था। “हां… मारो… मुझे सजा दो… मैं आपकी जंगली गुलाम हूँ!”
मैंने उसकी टांगें और फैलाईं। चूत के ओठ खोलकर अंदर उंगली डाली और G-spot को तेजी से मारा। वह झड़ गई, लेकिन मैं रुका नहीं। दूसरे हाथ से उसकी गांड में दो उंगलियां घुसा दीं। “आज तेरी दोनों बुर चोदूंगा।” फिर मैंने लंड निकाला और सीधा उसकी गांड में धकेल दिया। बिना रुके पूरा 8 इंच। वह चीख पड़ी, शरीर कांप रहा था। “फट गई… मालिक… लेकिन मत निकालो… फाड़ दो!” मैंने तेज-तेज धक्के मारे। गांड की दीवारें मेरे लंड को चूस रही थीं। clamps वाली चूचियां उछल रही थीं। मैंने क्रॉप से उसकी जांघों पर लगातार मारा। लाल निशान पड़ गए।
एक घंटे तक गांड चोदने के बाद मैंने लंड निकाला और चूत में घुसा दिया। अब दोनों छेद गीले और लाल हो चुके थे। “तेरी चूत और गांड दोनों मेरी हैं। रोज इस्तेमाल करूंगा।” वह चिल्लाई, “हां मालिक… ये चूत आपकी है… जितना चाहो फाड़ो… मैं बिना आपकी चुदाई के नहीं रह सकती!”
मैंने उसे खोलकर कुत्ते की पोजीशन में किया। कॉलर पहनाया और चेन से खींचा। “चल, मेरी पालतू कुत्ती।” मैंने उसे पूरे फ्लैट में घुमाया, फर्श चाटवाया, फिर बालकनी में ले गया। रात के अंधेरे में, जहां नीचे सड़क पर लोग चल रहे थे, मैंने उसे रेलिंग पकड़वाकर खड़े-खड़े चोदा। कोई भी ऊपर देख ले तो सब देख लेता। खतरे का रोमांच उसे और पागल कर रहा था। “लोग देख रहे होंगे… लेकिन चोदते रहो मालिक!”
फिर अंदर लेकर मैंने उसे फर्श पर लिटाया। उसके मुंह पर बैठ गया और लंड चुसवाया। वह पूरी ताकत से चूस रही थी। मैंने उसके निप्पल पर मोमबत्ती की गर्म बूंदें गिराईं। दर्द से वह मेरे लंड को और जोर से चूसने लगी। आखिर में मैंने उसके गले में झड़ दिया। वह सब निगल गई। “तेरा मालिक का माल… कितना स्वादिष्ट है।”
अगले दिन मैंने उसे और क्रूर खेल खेला। मैंने उसके पूरे शरीर पर वैक्सिंग क्रीम लगवाई खुद। फिर ट्रिमर से उसके आर्मपिट्स और चूत के बालों को डिजाइन बनाकर ट्रिम किया। “आज तू मेरी स्लेव है।” मैंने उसे बांधकर vibrator चूत में डाला और highest speed पर चला दिया। वह घंटों तड़पी, बार-बार झड़ती रही, लेकिन मैंने लंड नहीं दिया। “भीख मांग!” वह रोते हुए बोली, “मालिक… प्लीज अपना लंड दे दो… मेरी चूत फट रही है… मैं मर जाऊंगी!”
जब वह पूरी तरह टूट गई, तब मैंने उसे उठाया और दीवार से सटाकर खड़ा करके पेला। लंड इतनी तेजी से घुस रहा था कि उसके पैर उठ गए। “तेरी चूत फाड़ दूंगा आज!” वह चीख रही थी, “फाड़ दो… चीर दो… मैं आपकी बुरचोद रंडी हूँ!” मैंने उसके गले पर हाथ रखकर दबाया, हल्का सांस घुटने लगा। आंखें लाल। लेकिन उसकी चूत और कस गई।
तीसरे दिन मैंने उसे पब्लिक रिस्क वाला खेल खेलाया। शाम को सोसाइटी के पार्क में, अंधेरे कोने में, मैंने उसे स्कर्ट के नीचे बिना पैंटी बुलाया। वहां बेंच पर बैठकर उसकी चूत उंगली से चोदी। आसपास लोग टहल रहे थे। वह मेरे कंधे पर सिर रखकर दबी आवाज में कराह रही थी। फिर मैंने उसे पार्क की दीवार से सटाकर पीछे से चोदा। छोटी-छोटी चपतें। कोई भी आ जाए तो पकड़े जाते। उसका डर और उत्तेजना दोनों चरम पर थे।
रात को घर लाकर मैंने उसे पूरे 3 घंटे तक बांधकर रखा। Electro stimulator से उसके निप्पल और चूत पर शॉक दिए। हर शॉक पर वह चीखती और झड़ जाती। “मालिक… मैं टूट गई… लेकिन और दो… मुझे और दर्द दो!” मैंने उसके स्तनों पर बाइट मारे, खून निकल आया हल्का। फिर लंड से चूत, गांड, मुंह तीनों में बारी-बारी मारा। आखिर में उसके पूरे चेहरे, स्तनों और चूत पर अपना माल उड़ेल दिया।
चौथे दिन उसने खुद मुझसे कहा, “मालिक, आज मुझे और क्रूर बनाइए।” मैंने उसे बैंडेज से पूरी तरह बांध दिया। सिर्फ चूत और गांड खुली। फिर anal hook लगाकर ऊपर खींचा। वह लटक रही थी। मैंने whip से पूरे शरीर पर निशान बना दिए। फिर दोनों छेदों में लंड और vibrator एक साथ। वह लगातार squirting कर रही थी। फर्श पानी से भर गया। “मैं आपकी pain slut हूँ… जितना दर्द उतना मजा!”
पांचवें दिन यश के आने से पहले हमने आखिरी जंगली सेशन किया। मैंने उसे पूरे घर में घसीटा। हर कमरे में चोदा। किचन में काउंटर पर, बाथरूम में शावर के नीचे गला दबाकर, बालकनी में फिर से। अंत में बेड पर उसकी टांगें अपने कंधे पर रखकर इतनी तेज चोदा कि बेड हिल रहा था। “तेरी चूत अब हमेशा मेरे लंड के आकार की रहेगी!” वह चीख-चीखकर बोली, “हां मालिक… फाड़ दो… मैं आपकी permanent गुलाम रंडी हूँ… यश कभी मुझे ऐसा नहीं चोद सकता!”
उसके बाद भी हमारे गुप्त संबंध चलते रहे। कभी-कभी मैं उसे होटल ले जाता, वहां BDSM किट के साथ पूरी रात रौंदता। कभी वह मेरे ऑफिस के पास कार में आकर मुंह में ले लेती। एक बार तो यश के घर में ही, जब वह शॉवर ले रहा था, मैंने रूचि को किचन में झुकाकर 5 मिनट में चोद डाला। खतरा और मजा दोनों चरम पर।
रूचि अब पूरी तरह बदल गई थी। घर में यश के सामने आज्ञाकारी बीवी, लेकिन मेरे सामने जंगली, दर्द और लंड की भूखी गुलाम। उसकी चूत, गांड और मुंह हमेशा मेरे लिए तैयार रहते। हमारी ये क्रूर, बेरहम, hardcore दुनिया किसी को पता नहीं चली, लेकिन दोनों के लिए ये जिंदगी का सबसे नशे वाला हिस्सा बन गई थी।
रातें अब ऐसे गुजरतीं कि सुबह उठते ही रूचि के शरीर पर नये निशान होते – चपतों के, बाइट के, clamps के। और वह मुस्कुराकर कहती, “मालिक, आज फिर सजा दो… मैं और सह सकती हूँ।”
हमारी ये कहानी कभी खत्म नहीं होती। जितना क्रूर उतना प्यार, जितना दर्द उतना मज़ा। रूचि भाभी मेरी सबसे खतरनाक और लत लगाने वाली चुदाई की गुलाम बनकर रह गई।
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