एक अजनबी ने विवाहित महिला और उसकी सहेली को रात भर रस्सियों से बाँधकर उनकी हर सीमा तोड़ दी। दर्द, आँसू और लिप्सा की वो कहानी जो पढ़ते हुए साँस अटक जाए।
मेरा नाम राजेश है। उम्र 28 साल। मैं लुधियाना का रहने वाला हूँ। आज मैं अपनी जिंदगी की सबसे खतरनाक, सबसे गंदी और सबसे क्रूर घटना सुनाने जा रहा हूँ। ये कहानी उस वक्त की है जब मैं 28 का था और मेरी जिंदगी में एक ऐसी औरत आई जिसने मुझे इंसान से जानवर बना दिया।
मैं व्यापार के सिलसिले में जालंधर जा रहा था। ट्रेन में सफर कर रहा था। सामने वाली सीट पर एक आदमी बैठा था। नाम पूछा तो बोला—विकास शर्मा, उम्र 32, जालंधर का। हम दोनों बातें करने लगे। विकास अपनी पत्नी के साथ अकेले रहता था। पत्नी का नाम रेखा था, उम्र 27। विकास ने कहा कि उसकी बीवी बहुत सुंदर है लेकिन उसके साथ उसका रिश्ता ठंडा पड़ चुका है। मैंने नंबर लिए। बाद में व्हाट्सएप पर बातें शुरू हो गईं।
मुझे पता नहीं था कि फोन रेखा चलाती है। मैं सोचता रहा कि विकास से बात कर रहा हूँ। एक दिन रात को एक वीडियो आया। तीन लोगों की क्रूर चुदाई वाली क्लिप। मैंने मैसेज किया—“ये क्या भेजा है भाई?” जवाब आया—“ये मैं, तू और मेरी बीवी हैं। मेरी बीवी को चोदने का शौक है। मैं उसे संतुष्ट नहीं कर पाता। क्या तू मेरी बीवी को चोदेगा?”
मैंने एक पल सोचा और जवाब दिया—“हाँ, लेकिन शर्त है। जब मैं उसे चोदूँगा तब तू कमरे में नहीं होगा। और चुदाई सिर्फ साधारण नहीं होगी। मैं उसे तोड़ दूँगा।” जवाब आया—“ठीक है। जो चाहे कर। बस उसे खुश रख।”
फिर योजना बनी। रविवार को मुझे जालंधर आना था। एक बोतल महँगी व्हिस्की लेकर। विकास घर से बाहर चला जाएगा। रेखा को अकेला छोड़कर। मैं आकर उसे छेड़ूँगा। वह मान जाएगी। फिर विकास लौटेगा। हम दोनों शराब पीएँगे। विकास को बेहोश कर दूँगा। फिर रेखा को अंदर कमरे में ले जाकर जो चाहे करूँगा।
रविवार को मैं जालंधर पहुँचा। विकास का घर छोटा लेकिन साफ था। विकास ने मुझे देखकर हैरानी जताई। मैंने कहा—“इधर से गुजर रहा था तो सोचा मिल लूँ।” विकास ने रेखा से मिलवाया। रेखा सामने आई। 5 फुट 5 इंच की, स्लिम लेकिन कर्वी बॉडी। सीने पर 36 साइज के मम्मे, कमर 26, कूल्हे 38। चेहरा तीखा, आँखें तेज। उसने मुझसे हाथ मिलाया तो उसकी उंगलियों का दबाव असामान्य लगा।
विकास बोला—“तू बैठ, मैं बाजार से कुछ लाता हूँ।” और निकल गया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, रेखा मेरे करीब आई। मुस्कुराई और बोली—“अब अकेले हैं। बताओ, क्या करने आए हो?”
join my telegram channel for leaked videos
मैंने बिना कुछ कहे उसका हाथ पकड़ा और दीवार से सटा दिया। उसके मुँह पर हाथ रखा और कान में बोला—“तेरे पति ने मुझे भेजा है। लेकिन आज मैं तुझे सिर्फ चोदने नहीं आया। आज मैं तुझे तोड़ने आया हूँ।” रेखा की आँखों में चमक आई। वह बोली—“तो तोड़ो। मैं तैयार हूँ।”
मैंने उसका टॉप ऊपर खींचा। 36 के मम्मे बाहर निकले। निप्पल काले और कड़े। मैंने एक मम्मा मुँह में लिया और जोर से काटा। रेखा चीखी लेकिन आवाज दबा ली। मैंने दूसरा मम्मा भी काटा। दोनों निप्पल पर दांत के निशान छोड़ दिए। फिर मैंने उसकी स्कर्ट नीचे खींची।
पैंटी फाड़ दी। चूत साफ मुंडी हुई थी, गीली। मैंने दो उंगलियाँ अंदर घुसाईं और जोर से ऊपर की तरफ दबाया। रेखा की टाँगें काँपने लगीं। मैंने तीसरी उंगली भी डाल दी और मुट्ठी बनाने लगा। रेखा की आँखों से आँसू आने लगे लेकिन उसने कहा—“और अंदर… पूरा मुट्ठी…”
मैंने मुट्ठी बनाकर उसकी चूत में घुसा दी। रेखा की चीख निकल गई। मैंने दूसरी हाथ से उसका गला दबाया और मुट्ठी अंदर-बाहर करने लगा। रेखा की चूत से पानी की धार निकलने लगी। मैंने मुट्ठी निकालकर उसके मुँह में ठूंस दी। वह अपनी ही चूत का पानी चाटने लगी।
तभी बाहर दरवाजे की आवाज आई। विकास लौट आया था। रेखा ने जल्दी से कपड़े ठीक किए। विकास अंदर आया। मैंने बोतल निकाली। तीन गिलास भरे। विकास को मोटे पैग पिलाता रहा। रेखा किचन से आ-जा रही थी। बीच-बीच में मेरे फोन पर विकास के नंबर से मैसेज आ रहे थे—“और पिलाओ। उसे बेहोश कर दो।”
विकास आधे घंटे में लुढ़क गया। सोफा पर बेहोश पड़ा रहा। मैं उठा और रेखा को आँखों से इशारा किया। वह अंदर वाले कमरे में चली गई। मैंने दरवाजा बंद किया और कुंडी लगा दी।
अंदर रेखा नंगी खड़ी थी। मैंने अपनी पैंट खोली। मेरा लंड 8.2 इंच का कठोर हो चुका था। रेखा ने घुटनों के बल बैठकर लंड मुँह में ले लिया। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर को आगे-पीछे करने लगा। लंड उसके गले तक जाता था। रेखा की आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन वह रुक नहीं रही थी। मैंने जोर से धक्का दिया और अपना पानी उसके गले में उतार दिया। रेखा ने सब निगल लिया।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर चित लिटाया। उसके हाथों को सिर के ऊपर बाँध दिया। पैरों को फैलाकर रस्सी से बाँध दिया। रेखा पूरी तरह बेबस हो गई। मैंने उसकी चूत पर थूका और 8.2 इंच का लंड एक झटके में अंदर घुसा दिया। रेखा की चीख निकली। मैंने उसका मुँह कपड़े से बंद कर दिया। फिर क्रूरता से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ रेखा का शरीर काँपता था। मैंने उसके मम्मों को मरोड़ा, निप्पल को दांतों से खींचा। रेखा की चूत से खून की हल्की धार निकल आई लेकिन मैं रुका नहीं।
मैंने पोजीशन बदली। रेखा को घुटनों के बल किया। गांड के छेद पर थूका। रेखा बोली—“वहाँ मत… पहली बार है…” मैंने हँसते हुए कहा—“इसीलिए तो मारूँगा।” और 8.2 इंच का लंड उसकी गांड में धकेल दिया। रेखा की चीख इतनी तेज थी कि कपड़े के बावजूद सुनाई दी। मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और गांड में पूरी ताकत से धक्के मारे। रेखा रो रही थी, काँप रही थी लेकिन उसके शरीर से पानी निकल रहा था। मैंने पंद्रह मिनट तक उसकी गांड मारी। फिर लंड निकालकर उसके मुँह में ठूंस दिया और दूसरा पानी उतार दिया।
उसके बाद मैंने उसे खोला। रेखा थककर गिर गई थी। लेकिन मैंने उसे आराम नहीं दिया। मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया और फिर से चूत में लंड घुसा दिया। इस बार उसने खुद अपनी गांड ऊपर-नीचे करनी शुरू कर दी। मैंने उसके गले पर हाथ रखा और दबाया। रेखा की आँखें लाल हो गईं। मैंने कहा—“बोल, तू मेरी रंडी है।” रेखा ने हाँफते हुए कहा—“हाँ… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… मुझे तोड़ो…”
मैंने तीसरी बार उसकी चूत मारी। इस बार और भी क्रूरता से। उंगलियाँ गांड में डालकर चूत और गांड दोनों एक साथ भरे। रेखा बार-बार झड़ रही थी। उसका शरीर काँप रहा था। आखिर में मैंने अपना तीसरा पानी उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया।
रात भर मैंने रेखा को इस्तेमाल किया। चूत तीन बार, गांड दो बार, मुँह अनगिनत बार। बीच-बीच में मैं उसे थप्पड़ मारता, बाल खींचता, निप्पल काटता। रेखा हर बार और ज्यादा गीली होती जाती थी। सुबह चार बजे मैंने उसे छोड़ दिया। वह बिस्तर पर बेहोश सी पड़ी थी। शरीर पर नील, दांत के निशान, रस्सी के निशान।
मैं कपड़े पहनकर निकला। विकास अभी भी सोफे पर बेहोश पड़ा था जब मैं घर से निकला। बाहर सड़क पर ठंडी हवा चल रही थी लेकिन मेरे शरीर में गर्मी नहीं उतर रही थी। रेखा का शरीर, उसकी चीखें, उसकी गांड में लंड घुसते वक्त का प्रतिरोध—सब कुछ दिमाग में घूम रहा था। मैंने सोचा था कि एक रात काफी होगी। लेकिन रेखा ने मुझे वो स्वाद चखा दिया था जो आसानी से नहीं भूलता।
तीन दिन बाद फोन बजा। विकास का नंबर। लेकिन आवाज रेखा की थी।
“आ जाओ। आज वो दो दिन के लिए दिल्ली गया है। मैं अकेली हूँ। और… मैंने कुछ नया सोचा है।”
मैंने कोई सवाल नहीं किया। सिर्फ “दो घंटे में पहुँचता हूँ” लिखकर फोन रख दिया। इस बार मैंने अपने बैग में कुछ चीजें डालीं—मोटी रस्सी, अंधेरा करने वाला कपड़ा, मुँह बंद करने वाला गैग, और एक छोटी सी चमड़े की बेल्ट। रेखा ने खुद कहा था—“मुझे तोड़ो।” तो इस बार मैं उसे पूरी तरह तोड़ने वाला था।
जब मैं पहुँचा तो रेखा दरवाजे पर नंगी खड़ी थी। सिर्फ गले में एक पतली चेन थी। आँखों में वो ही चमक। उसने मुझे अंदर खींचा और दरवाजा बंद करते ही मेरे पैरों पर बैठ गई।
“आज मुझे रंडी की तरह इस्तेमाल करो,” उसने कहा। “कोई रहम मत करना। मैंने सहेली को भी बुलाया है। वो एक घंटे में आएगी। तब तक मुझे तैयार कर दो।”
मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और खड़ा किया। “तेरी सहेली का नाम?”
“सीमा। 26 साल। शादीशुदा। लेकिन उसका पति भी वैसा ही निकम्मा है जैसे मेरा।”
मैंने रेखा को दीवार से सटाया और उसके मुँह में दो उंगलियाँ ठूंस दीं। वह चूसने लगी। मैंने दूसरी हाथ से उसकी चूत में तीन उंगलियाँ घुसाईं और जोर से फैलाया। रेखा की टाँगें काँपने लगीं। मैंने कहा, “आज तेरी चूत और गांड दोनों इतनी फैला दूँगा कि तू चल भी नहीं पाएगी।”
रेखा ने सिर्फ कराहते हुए सिर हिलाया।
मैंने उसे बेडरूम में घसीटा। बिस्तर के चारों कोनों पर रस्सी बाँध दी। रेखा को चित लिटाकर हाथ-पैर फैला दिए। फिर अंधेरा कपड़ा आँखों पर बाँधा। मुँह में गैग ठूंस दिया। अब वह पूरी तरह बेबस थी। मैंने अपनी पैंट खोली। 8.2 इंच का लंड पहले से कठोर था। मैंने उसकी चूत पर थूका और बिना किसी प्रस्तावना के पूरा लंड एक झटके में अंदर घुसा दिया।
रेखा की कमर उछल गई। गैग के पीछे से दबी हुई चीख निकली। मैंने उसके कूल्हे पकड़कर क्रूरता से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ बिस्तर चरमराता था। मैंने उसके मम्मों को मरोड़ा, निप्पल को नाखून से दबाया। रेखा की चूत से पानी की धार निकल रही थी लेकिन मैं रुका नहीं। बीस मिनट तक मैंने उसे ऐसे ही पीटा। फिर लंड निकालकर उसकी गांड के छेद पर रखा।
रेखा ने सिर हिलाया—ना का इशारा। मैंने हँसते हुए कहा, “अब तेरी मर्जी नहीं चलती।” और लंड उसकी गांड में धकेल दिया। रेखा का शरीर तन गया। मैंने पूरा लंड अंदर तक घुसाया और फिर बिना रुके धक्के मारने लगा। गांड की दीवारें इतनी टाइट थीं कि लंड पर दबाव पड़ रहा था। मैंने रेखा के बाल पकड़कर खींचे और और जोर से पेलने लगा। उसकी गांड से हल्की खून की धार निकली लेकिन मैंने गति और बढ़ा दी।
अचानक दरवाजे की घंटी बजी। सीमा आ गई थी। मैंने लंड रेखा की गांड में ही रखा और जाकर दरवाजा खोला। सीमा 5 फुट 4 इंच की, गोरी, 34-25-37 की बॉडी। उसने रेखा को बिस्तर पर बँधी हुई prostration में देखा तो उसकी साँस तेज हो गई।
“ये… ये क्या है?” उसने पूछा।
मैंने दरवाजा बंद किया और सीमा के करीब जाकर कहा, “तेरी सहेली ने तुझे बुलाया है। आज तू भी इस्तेमाल होने वाली है। कपड़े उतार।”
सीमा ने एक पल हिचकिचाया। फिर रेखा की तरफ देखा जो गैग के पीछे से कराह रही थी। सीमा ने धीरे से अपनी ड्रेस उतारी। उसके मम्मे छोटे लेकिन कड़े थे। चूत पर हल्की झांट थी। मैंने रेखा की गांड से लंड निकाला और सीमा के मुँह के सामने किया। “चाट। अपनी सहेली की गांड का स्वाद ले।”
सीमा ने काँपते हाथों से लंड पकड़ा और जीभ से चाटना शुरू किया। मैंने उसके बाल पकड़कर लंड उसके गले तक ठूंस दिया। सीमा की आँखों से आँसू बहने लगे लेकिन वह बरदाश्त करती रही। मैंने कहा, “अच्छी रंडी बन। वरना तेरी भी वही हालत होगी जो रेखा की है।”
फिर मैंने सीमा को बिस्तर पर रेखा के पास लिटाया। रेखा की आँखों का कपड़ा हटा दिया। दोनों औरतें एक-दूसरे को देखने लगीं। मैंने रेखा का गैग निकाला। रेखा ने हाँफते हुए कहा, “सीमा… आज हम दोनों इसकी रंडियाँ हैं। जो कहे वो कर।”
मैंने दोनों को आमने-सामने 69 की पोजीशन में किया। रेखा सीमा की चूत चाटने लगी और सीमा रेखा की खून मिली गांड। मैं पीछे से कभी रेखा की चूत में घुसता, कभी सीमा की। दोनों की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। मैंने सीमा की गांड में उँगली डालकर फैलाया और फिर लंड घुसा दिया। सीमा पहली बार थी। उसकी चीख इतनी तेज थी कि रेखा ने उसका मुँह अपने मम्मों से दबा लिया।
मैंने दोनों को बारी-बारी से तीन-तीन राउंड मारे। चूत, गांड, मुँह—कोई जगह बाकी नहीं छोड़ी। बीच-बीच में मैं उन्हें एक-दूसरे को थप्पड़ मारने को कहता। रेखा ने सीमा के मम्मों को काटा। सीमा ने रेखा की चूत में चार उंगलियाँ घुसा दीं। मैंने दोनों के गले में चेन डालकर बाँध दिया और खींचते हुए कमरे में घुमाया। “रेंगो,” मैंने कहा। दोनों चारों हाथ-पैरों पर रेंगने लगीं। मैं पीछे से कभी एक की गांड में धक्का मारता, कभी दूसरी की।
रात के दो बज गए थे। दोनों औरतें थककर बिस्तर पर गिर गई थीं। शरीर पर नील, दांत के निशान, रस्सी के निशान, खून और पानी की परत। मैंने आखिरी बार दोनों के मुँह में लंड डालकर अपना पानी उतारा। दोनों ने मिलकर निगला।
सुबह जब मैंने कपड़े पहने तो रेखा ने काँपते हाथों से मेरा पैर पकड़ा। “फिर आना… अगली बार और कठिन बनाना।”
सीमा ने भी सिर हिलाया। उसकी आँखों में डर था, लेकिन उसके साथ भूख भी।
मैंने दरवाजे पर खड़े होकर कहा, “अगली बार तुम दोनों को अपने पतियों के सामने चोदूँगा। और तब तुम मना नहीं कर पाओगी।”
दोनों चुप रहीं। सिर्फ साँसें चल रही थीं।
मैं निकल गया। बाहर सूरज निकल चुका था। लेकिन मेरे दिमाग में अभी भी रेखा और सीमा की चीखें गूँज रही थीं। मैं जानता था कि ये खेल अभी खत्म नहीं हुआ। ये तो सिर्फ शुरुआत थी। अगली बार और क्रूर होगा। और लंबा होगा। और दोनों औरतें खुद मँगवाएँगी।
क्योंकि कुछ औरतें सिर्फ चुदाई नहीं चाहतीं। वे अपनी इज्जत, अपनी अस्मिता, अपनी पूरी हस्ती तोड़ना चाहती हैं। और मैं वो आदमी था जो उन्हें ये तोहफा देने के लिए हमेशा तैयार था।
Pingback: seal tod chudai story :- रस्सी, मोम और उसका शिकार - Lustystories