चचेरी बहन और उसका प्रेमी

मनाली के सुनसान कॉटेज में बर्फ ने रास्ता काट दिया। रिया की चचेरी बहन और उसका प्रेमी रात भर उसके शरीर को अपनी मर्जी से मोड़ते, बाँधते और तोड़ते रहे। सुबह होते-होते वह खुद और माँगने लगी।

रिया की उम्र बाईस साल थी। मेहना उसकी चचेरी बहन थी, उम्र चौबीस। और रोहन मेहना का बॉयफ्रेंड, उम्र अट्ठाईस। तीनों दिल्ली के एक पुराने कॉलोनी में रहते थे, जहाँ घर एक-दूसरे से सटे हुए थे। गर्मी की छुट्टियों में तीनों ने मनाली के पास एक सुनसान कॉटेज बुक कर लिया था। कॉटेज पहाड़ों के बीच था, सड़क से दो किलोमीटर अंदर, कोई पड़ोसी नहीं, सिर्फ घने जंगल और ठंडी हवा।

शाम ढल चुकी थी। बाहर बर्फ जैसी ठंड थी, अंदर फायरप्लेस जल रही थी। रोहन ने पहले ही बोतलें खोल रखी थीं। विस्की का तीखा स्वाद तीनों के गले में उतर चुका था। रिया हल्की नीली साड़ी में थी, मेहना काले टाइट जींस और क्रॉप टॉप में। रोहन ने अपनी शर्ट के बटन खोल रखे थे। शराब का असर तेज था। रिया की आँखें धुँधली हो रही थीं, शरीर में गर्मी फैल रही थी।

मेहना ने अचानक रिया का हाथ पकड़ा और खींचकर रोहन के पास बैठा दिया। “आज तू हमारी है,” उसने धीरे से कहा, आवाज में हँसी और हुक्म दोनों थे। रिया ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन रोहन का मजबूत हाथ उसकी कमर पर पड़ गया। उसने रिया को अपनी गोद में खींच लिया। साड़ी का पल्लू फिसल गया। रोहन के उंगलियाँ सीधे उसके ब्लाउज के नीचे घुस गईं। रिया के स्तन बत्तीस डी साइज के थे, भारी और गोल। रोहन ने दोनों को मुट्ठी में भर लिया और जोर से मसलने लगा। निप्पल तुरंत खड़े हो गए।

रिया चीखने वाली थी, लेकिन मेहना ने उसका मुँह अपने होंठों से बंद कर दिया। जीभ अंदर घुस गई, दाँत होंठों को काटने लगे। रोहन ने ब्लाउज के हुक फाड़ दिए। कपड़ा फटते ही उसके मुँह में रिया का एक स्तन समा गया। वह जोर-जोर से चूसने लगा, दाँत से निप्पल को काटता, फिर जीभ से चाटता। दूसरा हाथ नीचे चला गया। साड़ी ऊपर उठी, पैंटी को एक झटके में फाड़ दिया। उंगलियाँ सीधे चुत में घुस गईं। रिया गीली थी, लेकिन रोहन ने बिना रुके तीन उंगलियाँ अंदर ठेल दीं।

“आह… धीरे…” रिया की आवाज दब गई। मेहना हँसती हुई उसके बाल पकड़कर पीछे खींच रही थी। “धीरे नहीं होगा आज। तू तो हमारी गुलाम है।” उसने अपनी जींस खोलकर उतार दी। मेहना की चुत भी पहले से गीली थी। उसने रिया के चेहरे को अपनी तरफ घुमाया और अपनी चुत उसके मुँह पर बैठा दी। “चाट। अच्छे से।”

join my telegram channel for leaked videos

रिया की जीभ बाहर निकली। मेहना ने उसके सिर को दोनों हाथों से दबाया। रोहन नीचे से और जोर से उंगलियाँ चला रहा था। कभी क्लिट को चुटकी में लेकर मसलता, कभी पूरी मुट्ठी अंदर ठेलने की कोशिश करता। रिया का शरीर काँप रहा था। शराब और दर्द और मजे का मिश्रण उसे पागल बना रहा था।

रोहन ने अचानक रिया को उठाया और फायरप्लेस के पास फर्श पर लिटा दिया। उसने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड नौ इंच लंबा और मोटा था, नसें फूली हुईं। उसने रिया के दोनों पैर फैलाए और बिना किसी प्रस्तावना के अंदर घुसा दिया। एक ही धक्के में पूरा लंड चुत में समा गया। रिया की चीख निकली। मेहना ने तुरंत अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया।

रोहन ने रिया के कूल्हों को पकड़कर जोर-जोर से ठोकरें मारनी शुरू कर दीं। हर धक्का इतना गहरा था कि रिया का शरीर आगे-पीछे सरक रहा था। मेहना उसके ऊपर बैठ गई और अपने स्तन रिया के मुँह में ठेलने लगी। “चूस दोनों। जोर से।” रिया की आँखों से पानी आ रहा था, लेकिन वह चूस रही थी। रोहन ने गति बढ़ा दी। उसकी कमर मशीन की तरह चल रही थी। चुत की दीवारें फटने जैसी लग रही थीं।

कुछ देर बाद रोहन ने लंड निकाला और रिया को पेट के बल पलट दिया। उसके नितंबों को ऊपर उठाया और फिर से अंदर घुस गया। इस बार और गहरा। उसने रिया के बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “चिल्ला। सुनना चाहता हूँ।” रिया चीखी। आवाज कॉटेज में गूँज गई। मेहना ने रिया के हाथ पीछे बाँध दिए। बेल्ट से कसकर। फिर खुद रिया के नीचे लेट गई और उसके स्तनों को मुँह में भरकर काटने लगी।

रोहन ने एक हाथ से रिया की गर्दन दबाई। साँस रुकने लगी। दूसरे हाथ से उसके नितंबों पर जोर-जोर से थप्पड़ जड़ने लगा। लाल निशान उभर आए। हर थप्पड़ के साथ लंड और तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था। रिया का शरीर सिहर रहा था। वह झड़ने वाली थी। रोहन ने महसूस किया और अचानक रुक गया। लंड अंदर ही अंदर। “आज इजाजत के बिना झड़ना मना है।”

मेहना उठकर खड़ी हो गई। उसने रिया के मुँह में अपनी उंगलियाँ ठेल दीं। “चाट इन्हें भी। अपनी चुत का स्वाद ले।” फिर वह रिया के पीछे घुटनों के बल बैठ गई और अपनी जीभ उसकी गांड में घुसा दी। रोहन ने लंड निकाला और मेहना की तरफ बढ़ाया। मेहना ने मुँह खोल दिया। रोहन ने पूरा लंड उसके गले में ठेल दिया। मेहना की आँखों से पानी निकला, लेकिन वह चूसती रही। गला खराब होने की आवाजें आ रही थीं।

रिया अभी भी बाँधी हुई लेटी थी। रोहन ने मेहना को खींचा और रिया के ऊपर लिटा दिया। दोनों की चुतें एक-दूसरे से रगड़ खाने लगीं। रोहन ने अपना लंड दोनों के बीच घुसाया। कभी रिया की चुत में, कभी मेहना की। दोनों को बारी-बारी से चोदता रहा। जब रिया की बारी आती तो वह पूरा वजन उसके ऊपर डाल देता। जब मेहना की तो उसके बाल पकड़कर खींचता।

रात गहरी हो चुकी थी। फायरप्लेस की रोशनी में तीनों के शरीर पसीने से चमक रहे थे। रोहन ने रिया को कुर्सी पर बैठाया। हाथ अभी भी बंधे थे। उसने उसके पैर फैलाए और कुर्सी के हैंडल से बाँध दिए। अब रिया पूरी तरह खुली हुई थी। रोहन ने एक मोमबत्ती जलाई। पिघला हुआ मोम रिया के स्तनों पर टपकाने लगा। गरम बूँदें गिरते ही रिया चीखी। निप्पल सख्त हो गए। मोम ठंडा होकर सफेद परत बन गया। रोहन ने उसे नखों से खुरचकर हटाया और फिर से चूसने लगा।

मेहना ने एक पतली रस्सी निकाली। उसने रिया के स्तनों के चारों ओर कसकर बाँध दी। स्तन फूलकर लाल हो गए। फिर रस्सी क्लिट के आसपास लपेट दी। हर साँस के साथ रस्सी कसती। रोहन ने इस हालत में फिर से लंड अंदर घुसाया। अब हर धक्के के साथ रिया का शरीर काँपता। दर्द और मजा एक हो गए थे।

रोहन ने अचानक लंड निकाला और रिया के मुँह में ठेल दिया। पूरा गला भर गया। उसने सिर पकड़कर आगे-पीछे करने लगा। रिया की नाक से साँस लेना मुश्किल हो रहा था। गले में वीर्य आने वाला था। रोहन ने रोक लिया। “निगलना है पूरा। एक बूँद भी बाहर नहीं।” फिर से धक्के शुरू हो गए। आखिर में उसने गले के अंदर ही झड़ दिया। गर्म वीर्य सीधे पेट में उतर गया। रिया ने निगल लिया। कुछ थक्के नाक से बाहर निकले। रोहन ने उन्हें उंगली से साफ करके फिर मुँह में ठेल दिया।

मेहना ने रिया को कुर्सी से खोला और फर्श पर लिटा दिया। अब बारी उसकी थी। उसने रिया की चुत पर बैठकर अपनी चुत रगड़नी शुरू की। दोनों की चुतें गीली थीं, रस बह रहा था। रोहन पीछे से मेहना की गांड में उंगलियाँ घुसा रहा था। फिर उसने अपना लंड मेहना की गांड में ठेल दिया। मेहना चीखी लेकिन रगड़ना नहीं रोका। रोहन दोनों को एक साथ चोद रहा था—एक लंड से मेहना की गांड, उंगलियों से रिया की चुत।

समय बीतता गया। तीनों थक चुके थे लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। रोहन ने रिया को खींचकर खिड़की के पास खड़ा कर दिया। बाहर अँधेरा था, ठंडी हवा अंदर आ रही थी। उसने रिया के हाथ ऊपर उठाकर खिड़की के फ्रेम से बाँध दिए। फिर पीछे से घुस गया। हर धक्के के साथ रिया का शरीर खिड़की से टकरा रहा था। मेहना नीचे घुटनों के बल बैठकर रिया की क्लिट चाट रही थी। ठंड और गर्मी का मिश्रण रिया को पागल कर रहा था।

रोहन ने गति और तेज कर दी। उसकी साँसें तेज थीं। “अब झड़। दोनों एक साथ।” उसने रिया की गर्दन दबाई और अंतिम धक्के मारे। रिया का शरीर अकड़ गया। चुत ने जोर से रस छोड़ा। उसी पल रोहन ने भी अंदर झड़ दिया। गर्म वीर्य रिया की चुत में भर गया। मेहना ने जीभ से उसे चाटकर निगला।

फिर तीनों फर्श पर गिर गए। पसीना, वीर्य, कामरस सब मिला हुआ। रोहन ने रिया के बाल सहलाते हुए कहा, “कल सुबह फिर शुरू होगा। आज तो बस शुरुआत है।” मेहना ने रिया के होंठ चूमे। स्वाद मिला-जुला था।
सुबह होने में अभी देर थी। बाहर हवा चल रही थी। अंदर तीनों शरीर एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। रिया की आँखें बंद थीं, लेकिन शरीर अभी भी सिहर रहा था। रोहन का हाथ उसके स्तन पर था, मेहना की उंगलियाँ उसकी चुत में। रात अभी खत्म नहीं हुई थी। और कॉटेज के चारों तरफ सन्नाटा था। कोई सुनने वाला नहीं। सिर्फ तीन शरीर और उनकी आदिम भूख।

रिया ने धीरे से आँखें खोलीं। रोहन देख रहा था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तू हमारी पूरी तरह है। भाग नहीं सकती।” रिया ने कुछ नहीं कहा। बस उसके लंड को हाथ में लेकर फिर से सख्त करने लगी। मेहना हँस पड़ी। “देख, खुद मांग रही है।”
रोहन उठकर खड़ा हो गया। उसने रिया को कंधे पर उठाया और बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर पटक दिया। इस बार रस्सियाँ और कसीं।

हाथ-पैर चारों तरफ बाँध दिए। फिर उसने एक छोटी सी चमड़े की पट्टी निकाली। रिया के नितंबों पर मारने लगा। हर मार के साथ लाल निशान। रिया चीख रही थी, लेकिन आँखों में मजा भी था। मेहना उसके मुँह में अपना स्तन ठेलकर चीखें दबा रही थी।
रोहन ने पट्टी रखी और फिर से लंड अंदर घुसाया। इस बार गांड में। रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। दर्द तेज था। लेकिन रोहन नहीं रुका। धीरे-धीरे पूरा अंदर। फिर धक्के। मेहना नीचे से रिया की चुत में उंगलियाँ चला रही थी। दोनों छेद एक साथ भरे हुए। रिया का शरीर काँप रहा था। वह फिर झड़ गई। रोहन ने भी गांड के अंदर ही झड़ दिया।

रात बीत गई। सुबह की रोशनी खिड़की से अंदर घुस रही थी जब रोहन की आँखें खुलीं। रिया अभी भी उसके सीने पर लेटी थी, हाथ-पैर ढीले। मेहना उसके दूसरी तरफ मुँह गड़ाए सो रही थी। बाहर बर्फ भारी पड़ रही थी। सड़क बंद हो चुकी होगी। कोई आने-जाने वाला नहीं।
रोहन ने धीरे से रिया के बाल पकड़े और सिर उठाया। “उठ। अब आराम खत्म।” उसकी आवाज में कोई नरमी नहीं थी। रिया की आँखें खुलीं। शरीर में दर्द था—गांड में जलन, स्तनों पर रस्सी के निशान, नितंबों पर थप्पड़ के लाल दाग। लेकिन उसके अंदर फिर से वही भूख जाग रही थी।

मेहना भी जाग गई। उसने मुस्कुराते हुए रिया के गाल पर थप्पड़ जड़ा। “आज पूरा दिन तेरा है। भागने की कोशिश मत करना।” तीनों उठे। रोहन ने रिया को नंगा ही खींचकर बाथरूम में ले गया। ठंडा पानी उसके शरीर पर डाल दिया। रिया काँप उठी। रोहन ने साबुन से उसके पूरे बदन को मसलना शुरू किया—स्तनों को निचोड़ते हुए, चुत में उंगलियाँ घुसाते हुए, गांड की दरार साफ करते हुए। मेहना पीछे से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींच रही थी।

नहाने के बाद रोहन ने रिया को बेडरूम में वापस लाया। इस बार उसने मोटी रस्सी निकाली। रिया के दोनों हाथ पीठ के पीछे बाँध दिए, इतने कसकर कि कलाई में खून रुकने लगा। फिर पैरों को फैलाकर टखनों से बिस्तर के पायों से बाँध दिया। रिया पूरी तरह खुली और असहाय लेटी थी। रोहन ने एक काला कपड़ा उसकी आँखों पर बाँध दिया। अँधेरा। सिर्फ स्पर्श और आवाज।

मेहना ने एक पतली चमड़े की बेल्ट उठाई। “गिन। हर मार के बाद।” पहली मार नितंब पर पड़ी। रिया चीखी। “एक…” दूसरी और जोर से। “दो…” तीसरी में त्वचा फटने जैसी आवाज आई। “तीन…” रोहन ने गिनती दस तक पहुँचाई। रिया के नितंब जल रहे थे, लाल और सूजे हुए। मेहना ने बेल्ट रखी और अपनी जीभ से उन जलते निशानों को चाटना शुरू किया। दर्द और ठंडक का मिश्रण रिया को सिहरा रहा था।

रोहन ने अपना लंड उसके मुँह के पास लाया। “खोल।” रिया ने होंठ खोले। पूरा लंड गले तक ठेल दिया गया। रोहन ने सिर पकड़कर आगे-पीछे करना शुरू किया। गला खराब होने लगा। आँसू आँखों के कपड़े को गीला कर रहे थे। मेहना नीचे से रिया की चुत में दो उंगलियाँ घुसाकर जोर-जोर से हिला रही थी। क्लिट को नखों से खुरच रही थी। रिया झड़ने वाली थी तभी रोहन ने लंड निकाल लिया। “इजाजत नहीं।”

उसने रिया को पेट के बल पलटा। गांड ऊपर। रस्सियाँ और कसीं। रोहन ने थूक लगाकर अपना लंड उसकी गांड में एक झटके में घुसा दिया। रिया की चीख दब गई क्योंकि मेहना ने उसी पल अपना मुँह उसकी चुत पर लगा दिया। जीभ अंदर-बाहर, दाँत क्लिट पर। रोहन ने पूरी ताकत से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ रिया का शरीर बिस्तर में धंस रहा था। गांड फटने जैसी लग रही थी। रोहन ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “चिल्ला जोर से। कोई नहीं सुनेगा।”

मेहना उठकर रिया के चेहरे पर बैठ गई। अपनी चुत उसके मुँह पर दबा दी। “चाट। अच्छे से। नहीं तो और मारेगी।” रिया की जीभ बाहर निकली। मेहना ने सिर दबाकर अपनी चुत रगड़नी शुरू की। नीचे रोहन गांड चोद रहा था। तीनों का शरीर पसीने से नहाया हुआ था। रोहन ने अचानक लंड निकाला और मेहना की गांड में ठेल दिया। मेहना चीखी लेकिन रिया के मुँह से नहीं हटी। रोहन दोनों को बारी-बारी से चोदता रहा—कभी रिया की गांड, कभी मेहना की।

कुछ देर बाद रोहन ने रिया की आँखों का कपड़ा खोला। रोशनी में उसकी आँखें लाल थीं। उसने रस्सियाँ ढीली कीं लेकिन हाथ पीछे ही रखे। रिया को खींचकर खिड़की के पास खड़ा किया। बाहर बर्फ गिर रही थी। ठंडी हवा शरीर पर लग रही थी। रोहन ने उसके हाथ ऊपर उठाकर खिड़की के लोहे के फ्रेम से बाँध दिए। फिर पीछे से चुत में घुस गया। इस बार और गहरा। हर धक्के के साथ रिया का माथा शीशे से टकरा रहा था। मेहना नीचे घुटनों के बल बैठकर उसकी क्लिट को मुँह में भरकर चूस रही थी। कभी दाँत से काटती, कभी जीभ से फेरती।

रोहन की साँसें तेज हो गईं। उसने रिया की गर्दन दोनों हाथों से दबाई। साँस रुकने लगी। चेहरा लाल हो गया। उसी हालत में उसने अंतिम जोरदार धक्के मारे और अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य रिया की चुत में भर गया। मेहना ने तुरंत जीभ से उसे चाटकर निगला। रिया का शरीर अकड़ गया। वह भी जोर से झड़ी। रस उसकी जाँघों से बहकर फर्श पर गिर रहा था।

रोहन ने रस्सियाँ खोलीं। रिया ढेर की तरह गिर पड़ी। लेकिन आराम नहीं मिला। मेहना ने उसे घसीटकर बिस्तर पर लाया। इस बार उसने रिया के स्तनों को रस्सी से कसकर बाँधा। स्तन फूलकर बैंगनी पड़ने लगे। फिर क्लिट के चारों ओर पतली रस्सी लपेट दी। हर साँस में दर्द। रोहन ने एक छोटी मोमबत्ती जलाई। पिघला हुआ मोम रिया के निप्पलों पर टपकाने लगा। गरम बूँदें गिरते ही त्वचा सिकुड़ गई। रिया चीख रही थी। मेहना उसके मुँह में उंगलियाँ ठेलकर चीखें दबा रही थी।

मोम ठंडा होने के बाद रोहन ने नखों से खुरचना शुरू किया। फिर दोनों निप्पलों को मुँह में भरकर जोर से चूसा, दाँत गड़ाए। खून की हल्की धार निकली। उसने चाट लिया। मेहना ने रिया की जाँघों को और फैलाया। रोहन ने अपना लंड फिर से गांड में ठेल दिया। इस बार बिना थूक के। दर्द असहनीय था। रिया रो रही थी लेकिन शरीर खुद ही आगे बढ़ रहा था। मेहना उसकी चुत में तीन उंगलियाँ घुसाकर मुट्ठी बनाने की कोशिश कर रही थी।

दोपहर ढल चुकी थी। तीनों थककर बिस्तर पर गिरे थे। रिया के शरीर पर नए निशान—मोम के, दाँतों के, रस्सी के। लेकिन उसकी आँखों में अभी भी वही भूख थी। रोहन ने उसके कान में फुसफुसाया, “शाम को और होगा। आज तो पूरा दिन बाकी है।” मेहना ने रिया के होंठ चूमे। स्वाद खून और वीर्य का मिला हुआ था।

बाहर बर्फ रुकने का नाम नहीं ले रही थी। कॉटेज चारों तरफ से बंद था। कोई बचाव नहीं। रिया ने धीरे से कहा, “और… और जोर से करो।” रोहन मुस्कुराया। उसने फिर से रस्सी उठाई। इस बार और कसी। कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। पहाड़ों के इस सुनसान कोने में उनकी क्रूरता और गहरी होती जा रही थी।

रुद्रक्ष की अनन्या 1 : नंबर तीन की अंतिम साँस

सिंदूर की जंजीर

बॉस की बीवी ने खुद को पूरी तरह सौंप दिया

राहुल की प्रिया हाउसवाइफ बंधक कुतिया

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *