फ्लैट की चारदीवारी में एक लड़की को पूरी मजबूर किया

फ्लैट की चारदीवारी में एक लड़की को पूरी तरह तोड़कर रेंगने पर मजबूर किया गया। थप्पड़, जबरदस्ती और खुली बालकनी तक खींचकर उसका शरीर सबके सामने इस्तेमाल होता रहा। दर्द और अपमान में डूबी वह और गिरी, और माँगी।

ये कहानी अनन्या की है। उम्र 23 साल। इंदौर के एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में एमबीए फाइनल ईयर। हॉस्टल की सख्ती से तंग आकर तीन सहेलियों ने यूनिवर्सिटी से थोड़ा दूर विजय नगर एरिया में तीन बीएचके फ्लैट किराए पर ले लिया था। अनन्या, रिया और सायरा। रिया का बॉयफ्रेंड आदित्य और सायरा का बॉयफ्रेंड करण अक्सर रात भर रुकते थे। अनन्या का अपना कोई नहीं था। पिछले रिश्ते के टूटने के बाद उसकी देह में एक भूख जाग चुकी थी जो अब काबू में नहीं आ रही थी।

शनिवार की रात पार्टी का प्लान बना। आदित्य ने महंगी व्हिस्की और वोडका का इंतजाम किया। करण ने चाइनीज और स्नैक्स मंगवाए। तीनों लड़कियां पार्लर से निकलकर तैयार हो चुकी थीं। वैक्सिंग, बॉडी स्क्रब, सब कुछ। अनन्या ने जानबूझकर हल्का मेकअप किया था। उसके 36 साइज के भरे हुए स्तन छोटे ब्लाउज में तनाव पैदा कर रहे थे।

संगीत जोरों पर था। चारों जोड़े चिपक-चिपक कर नाच रहे थे। आदित्य रिया की गांड पर हाथ फेर रहा था। करण सायरा की गर्दन चूस रहा था और एक हाथ उसके टाइट टॉप के अंदर घुसाए हुए था। अनन्या सोफे पर बैठी व्हिस्की के घूंट ले रही थी और सिगरेट का धुआं उड़ा रही थी। उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उन दोनों जोड़ों को देखकर उसकी भूख और भड़क रही थी।
रिया अचानक बोली, “आज सिर्फ डांस नहीं। आज हम खेलते हैं असली गेम।”
सायरा मुस्कुराई, “क्या?”

रिया ने एक खाली व्हिस्की की बोतल बीच में रख दी। “स्पिन द बॉटल। लेकिन नियम सख्त। जो बोतल जिसकी तरफ रुके, बाकी सब मिलकर टास्क देंगे। कोई मना नहीं। और टास्क जितना गंदा, जितना क्रूर, जितना अपमानजनक होगा… उतना ही मजा।”
सब मान गए। नशा और वासना दोनों चरम पर थे।
पहली स्पिन। बोतल आदित्य की तरफ रुकी।

रिया ने धीरे से कहा, “अपनी पैंट और अंडरवियर उतारो। सिर्फ शर्ट पहनकर बालकनी में खड़े हो जाओ। दस मिनट। और जब कोई नीचे से गुजरे तो जोर से बोलो—‘मेरा लंड भूखा है’।”
आदित्य की आँखें फटी रह गईं लेकिन उसने मना नहीं किया। उसने कपड़े उतारे। उसका मोटा, आधा खड़ा लंड सबके सामने झूलने लगा। वह बालकनी में चला गया। ठंडी हवा में उसका लंड और सख्त हो गया। नीचे सड़क पर कुछ लोग गुजरे। आदित्य ने दबे स्वर में कहा, फिर जोर से।

लोग हंसने लगे, कोई फोन निकालने लगा। दस मिनट बाद जब वह अंदर आया तो उसके गाल लाल थे और लंड पूरी तरह तना हुआ।
दूसरी स्पिन। बोतल अनन्या की तरफ रुकी।
रिया और सायरा ने एक साथ देखा। रिया बोली, “आज तुम्हारी बारी है अनन्या। ऊपर वाले फ्लैट में चार लड़के रहते हैं। तुम उनके पास जाओगी। लेकिन शर्त ये है—”

सायरा ने बात काटी, “तुम सिर्फ एक छोटी सी टी-शर्ट पहनोगी। बिना ब्रा। और नीचे सिर्फ एक थोंग। और हाथ में एक खाली कटोरा लेकर जाओगी। कहना—‘मुझे चीनी चाहिए’। लेकिन असल में तुम्हें उनकी मर्जी पर पूरा कंट्रोल देना होगा। जो भी वे कहें, करना होगा। हम सब सीढ़ियों पर छुपकर देखेंगे।”

अनन्या का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसकी चूत ने एक बार जोर से स्पंदन किया। वह उठकर अपने कमरे में गई। उसने कपड़े उतारे। आईने के सामने खड़ी हुई। उसके 36 के भारी स्तन, गुलाबी निप्पल जो पहले से ही सख्त थे, चिकनी चिकनी गोरी त्वचा, और मुंडवाया हुआ चिकना योनिद्वार। उसने एक बहुत छोटी काली टी-शर्ट पहनी जो सिर्फ स्तनों को आधा ढक पा रही थी। निप्पल साफ दिख रहे थे। नीचे सिर्फ एक पतली काली थोंग। गांड की दोनों गोलियाँ पूरी तरह बाहर।

जब वह बाहर आई तो आदित्य और करण दोनों के लंड एक साथ उछल गए। रिया ने उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाया और निप्पलों को जोर से मरोड़ा। “जा। और वापस आकर सब बताना।”
अनन्या कटोरा लेकर ऊपर गई। घंटी बजाई। दरवाजा खोला एक लंबे, गेहुँए रंग का लड़का। उम्र करीब 22। उसके पीछे तीन और थे। सबकी नजरें अनन्या के शरीर पर चिपक गईं।

“चीनी… चाहिए,” अनन्या ने कहा, आवाज थोड़ी काँप रही थी।
सबसे बड़ा वाला, जिसका नाम बाद में पता चला विकास, आगे आया। उसने अनन्या को ऊपर से नीचे तक घूरा। “अंदर आ।”
अनन्या अंदर घुसी। दरवाजा बंद हुआ। विकास ने बिना बात किए उसकी टी-शर्ट ऊपर कर दी। दोनों भारी स्तन बाहर निकल आए। उसने एक निप्पल को मुंह में ले लिया और जोर से चूसा, दांतों से काटा। अनन्या की सांस अटक गई। दूसरे लड़के ने पीछे से उसकी थोंग खींच ली। उसकी चिकनी चूत और गांड सबके सामने नंगी हो गई।

विकास बोला, “घुटनों पर बैठ।”
अनन्या बैठ गई। चारों लड़के उसके चारों तरफ खड़े हो गए। उन्होंने अपने लंड निकाल लिए। अलग-अलग साइज, लेकिन सब सख्त। विकास ने अपना मोटा लंड उसके मुंह के सामने लाया। “खोल।”
अनन्या ने मुंह खोला। विकास ने एक झटके में अपना लंड उसके गले तक धकेल दिया। अनन्या का गला भरा, आँखों से पानी आने लगा, लेकिन उसने मना नहीं किया। बाकी तीनों उसके स्तनों, निप्पलों और चूत को हाथों से मसलने लगे। एक ने दो उंगलियाँ उसकी गीली चूत में घुसेड़ दीं और जोर-जोर से दबाने लगा।

विकास ने उसके बाल पकड़कर सिर को नियंत्रित किया और बुरी तरह से मुंह चोदने लगा। थूक उसकी ठुड्डी से लेकर स्तनों तक बहने लगा। जब वह लगभग दम घुटने की हालत में थी तो विकास ने लंड निकाला और उसके चेहरे पर थूक दिया। “अब चारों को चूस।”
अनन्या ने बारी-बारी से चारों लंड चूसे। गले तक लिए, जीभ से अंडकोष चाटे, थूक से लथपथ किए। विकास ने फिर उसे खींचकर सोफे पर लिटाया। दोनों पैर फैला दिए। “पकड़ो इसे।”

दो लड़कों ने उसके हाथ और पैर पकड़ लिए। विकास ने बिना किसी प्रस्तावना के अपना मोटा लंड उसकी तंग चूत में एक झटके में धंसवा दिया। अनन्या चीख पड़ी। दर्द और मजे का मिश्रण। विकास ने निर्दयता से ठोकरें मारनी शुरू कर दीं। हर धक्के के साथ उसके स्तन उछल रहे थे। दूसरा लड़का उसके मुंह में लंड ठूंस रहा था। तीसरा उसके निप्पलों को दाँतों से काट-काट रहा था।

थोड़ी देर बाद विकास ने उसे पलटा। घुटनों के बल किया। अब उसकी गांड हवा में थी। विकास ने थूक लगाकर अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे लेकिन बिना रुके धकेलना शुरू किया। अनन्या की आँखें फटी की फटी रह गईं। दर्द तेज था। लेकिन वह चिल्ला नहीं सकी क्योंकि मुंह में लंड था। विकास ने पूरा लंड अंदर तक पहुँचाया और फिर तेजी से गांड चोदने लगा। हर धक्के के साथ अनन्या का शरीर आगे-पीछे हो रहा था।

बाकी लड़के बारी-बारी से उसकी चूत और मुंह का इस्तेमाल कर रहे थे। एक ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और गले पर हाथ दबाया। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन उत्तेजना चरम पर थी। उसकी चूत से पानी की धार बह रही थी।
विकास ने आखिर में उसकी गांड में ही झड़ा। गर्म वीर्य अंदर भर गया। फिर दूसरे ने उसकी चूत में। तीसरे ने मुंह में। चौथे ने उसके स्तनों और चेहरे पर। अनन्या का पूरा शरीर वीर्य से लथपथ हो चुका था। चेहरा, स्तन, बाल, जांघें।

विकास ने उसे उठाया और आईने के सामने खड़ा किया। “देख अपने आप को।” अनन्या ने देखा—लाल निप्पल, सूजी हुई चूत, वीर्य से चमकता शरीर, आँखों में पानी। विकास ने उसके गले में अपना पट्टा जैसा बेल्ट बाँध दिया। “अब नीचे जा। इसी हालत में। और अपने दोस्तों को बता कि तुझे कितना मजा आया।”

अनन्या थोंग और टी-शर्ट भी नहीं पहन सकी। सिर्फ बेल्ट गले में डाले, वीर्य टपकते हुए सीढ़ियों से नीचे उतरी। रिया, सायरा, आदित्य और करण सब वहीं खड़े थे। उनकी आँखें फटी रह गईं।
रिया ने पास आकर उसके चेहरे से वीर्य चाटा। “अब घर के अंदर असली मजा शुरू होगा।”
फ्लैट में वापस आकर दरवाजा बंद किया गया। अनन्या को बीच में खड़ा किया गया। आदित्य ने रस्सी निकाली। उसके दोनों हाथ पीछे बाँध दिए गए।

फिर आँखों पर काली पट्टी। रिया ने उसके निप्पलों पर क्लिप लगा दिए। दर्द की लहर दौड़ गई। सायरा ने उसकी चूत में एक बड़ा सा वाइब्रेटर धंसवा दिया और स्पीड हाई कर दी।
अब चारों बारी-बारी से उसका इस्तेमाल करने लगे। आदित्य ने उसकी गांड में फिर से लंड डाला जबकि करण मुंह में। रिया और सायरा उसके स्तनों को मरोड़ रही थीं, थप्पड़ मार रही थीं। हर थप्पड़ के साथ अनन्या का शरीर काँप रहा था। वाइब्रेटर लगातार उसकी चूत को कँपा रहा था। वह बार-बार झड़ रही थी, लेकिन कोई रुकने वाला नहीं था।

रात गहरी होती गई। अनन्या को कुत्ते की तरह चारों पैरों पर रेंगवाया गया। गले में बेल्ट की जगह अब असली कॉलर बाँध दिया गया। लीश पकड़कर कमरे-कमरे घुमाया गया। जब वह थककर गिरने लगती तो थप्पड़ और चटखारे उसकी गांड पर पड़ते। आदित्य ने उसके मुंह में अपना लंड डालकर कहा, “अब से तुम सिर्फ हमारी रंडी हो। जब तक हम कहें, चूसोगी, चोदोगी, सहोगी।”

सुबह चार बजे तक खेल चला। अनन्या का शरीर नील-पील हो चुका था। निप्पल सूजे हुए, चूत और गांड दोनों लाल और सूजी हुई, गला बैठ चुका था। लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब संतुष्टि थी। जब आखिर में रस्सियाँ खोली गईं और आँखों की पट्टी हटाई गई तो उसने धीमी आवाज में कहा, “अगली बार… और सख्त करना।”

सूरज निकलने लगा था। फ्लैट में वीर्य और पसीने की गंध फैली हुई थी। अनन्या सोफे पर नंगी लेटी हुई थी, शरीर पर बाकी चारों के निशान। रिया उसके बाल सहला रही थी। सायरा सिगरेट जलाकर उसके होंठों तक ले गई। आदित्य और करण दोनों थके हुए लेकिन संतुष्ट मुस्कुरा रहे थे।

अनन्या ने आँखें बंद कीं। उसकी भूख आज कुछ हद तक शांत हुई थी। लेकिन वह जानती थी—ये सिर्फ शुरुआत थी। अब ये फ्लैट सिर्फ रहने की जगह नहीं रह गया था।
सूरज की पहली किरणें खिड़की से अंदर घुस रही थीं लेकिन फ्लैट में अभी भी अंधेरा और गंदी गंध का मिश्रण था। अनन्या सोफे पर नंगी लेटी हुई थी। उसके शरीर पर नीले-काले निशान, सूजे हुए निप्पल, जांघों के अंदर वीर्य के सूखे धब्बे। गले पर कॉलर अभी भी बंधा हुआ था। रिया उसके सिर को गोद में लेकर बाल सहला रही थी तो सायरा सिगरेट का धुआं उसके खुले मुंह में उड़ा रही थी। आदित्य और करण दोनों नंगे ही फर्श पर बैठे थे, उनके लंड अभी भी आधे खड़े थे।

अनन्या की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। दर्द पूरे शरीर में दौड़ रहा था लेकिन उसके अंदर की भूख और तेज हो चुकी थी। उसने फुसफुसाते हुए कहा, “और… और सख्त।”
रिया की आँखों में एक क्रूर मुस्कान तैर गई। उसने अनन्या के बाल कसकर पकड़े और सिर पीछे खींचा। “आज रविवार है। पूरा दिन हमारा है। आज तुझे असल में तोड़ना है।”

सायरा ने रसोई से मोटी रस्सियाँ, बेल्ट, क्लिप और एक बड़ा काला डिल्डो निकालकर लाई। आदित्य ने अनन्या को सोफे से खींचकर फर्श पर पटक दिया। उसके दोनों हाथ पीठ के पीछे कसकर बाँध दिए गए। फिर दोनों टखने भी बाँधकर घुटनों को छाती से चिपका दिया गया। अनन्या की चूत और गांड पूरी तरह खुली और बेबस हो गईं।

रिया ने दोनों निप्पलों पर मेटल क्लिप लगा दिए और चेन से जोड़ दिया। थोड़ी सी भी हलचल पर क्लिप कस जाते और दर्द की तेज लहर दौड़ जाती। सायरा ने बड़ा डिल्डो उसकी अभी भी सूजी हुई चूत में एक झटके में धंसवा दिया। अनन्या चीखी लेकिन आदित्य ने तुरंत अपना लंड उसके मुंह में ठूंस दिया।

“चुपचाप सह,” आदित्य ने गुर्राते हुए कहा और बाल पकड़कर गले तक लंड धकेलने लगा।
करण ने बेल्ट निकाली और अनन्या की गांड पर पहली चोट लगाई। तेज आवाज के साथ लाल निशान उभर आया। दूसरी, तीसरी, चौथी… बेल्ट की हर चोट पर अनन्या का शरीर कांपता लेकिन मुंह भरा होने की वजह से वह सिर्फ गले से आवाजें निकाल पा रही थी। रिया क्लिप की चेन खींच-खींचकर उसके निप्पलों को और ज्यादा यातना दे रही थी।

थोड़ी देर बाद आदित्य ने लंड निकाला। अनन्या हांफ रही थी, मुंह से लार टपक रही थी। करण ने उसे घुटनों के बल किया। रस्सियाँ अभी भी बंधी थीं। उसने अपनी मोटी लंड उसकी गांड के छेद पर रखी जो पिछले रात के इस्तेमाल से अभी भी ढीली और लाल थी। बिना किसी मेहरबानी के पूरा लंड अंदर धकेल दिया। अनन्या की आँखें फटी की फटी रह गईं। दर्द इतना तेज था कि उसके शरीर से पसीना छूटने लगा।
करण ने निर्दयता से गांड चोदनी शुरू कर दी। हर धक्के के साथ अनन्या का चेहरा फर्श पर रगड़ खा रहा था। रिया ने उसके बाल पकड़कर सिर उठाया और अपना योनिद्वार उसके मुंह पर दबा दिया। “चाट। अच्छे से। वरना और मार पड़ेगी।”

अनन्या की जीभ रिया की गीली चूत पर चलने लगी। सायरा पीछे से डिल्डो को उसकी चूत में जोर-जोर से धकेल रही थी। तीनों छेद एक साथ भरे हुए थे। दर्द, अपमान और मजे का मिश्रण अनन्या को पागल बना रहा था। वह बार-बार झड़ रही थी लेकिन कोई रुकने वाला नहीं था।
एक घंटे बाद रस्सियाँ थोड़ी ढीली की गईं। अनन्या को खड़ा किया गया। उसके पैर कांप रहे थे। आदित्य ने उसके गले में लीश लगाई और बालकनी की तरफ खींचने लगा। “आज सबको दिखाना है हमारी रंडी को।”

बालकनी का दरवाजा खोला गया। सुबह की रोशनी में अनन्या नंगी खड़ी थी—शरीर पर मार के निशान, क्लिप लगे निप्पल, जांघों से वीर्य टपकता हुआ। नीचे सड़क पर कुछ लोग गुजर रहे थे। आदित्य ने लीश कसकर खींची और अनन्या को रेलिंग से लगा दिया। उसकी गांड बाहर की तरफ थी।

करण ने फिर से उसकी गांड में लंड डाल दिया। अब खुले में। हर धक्के के साथ अनन्या की चीखें दबी-दबी निकल रही थीं। रिया और सायरा दोनों तरफ खड़े होकर उसके स्तनों को मरोड़ रही थीं और थप्पड़ मार रही थीं। नीचे से किसी ने सीटी बजाई। किसी ने फोन निकाला। अनन्या की शर्म और उत्तेजना दोनों चरम पर थीं। उसकी चूत से पानी की धार बह निकली और बालकनी के फर्श पर गिरने लगी।
आदित्य ने उसे अंदर खींचा। अब बारी थी और क्रूर खेल की। सायरा ने रसोई से बर्फ के टुकड़े लाए। अनन्या को फिर से बांधकर लिटाया गया। बर्फ के टुकड़े उसकी चूत और गांड के छेद में धकेल दिए गए। ठंडक से उसका शरीर ऐंठ गया। फिर गर्म मोमबत्ती जलाई गई। रिया ने पिघला हुआ मोम उसके निप्पलों, पेट और जांघों पर टपकाया। हर बूंद के साथ अनन्या चीख पड़ती लेकिन मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था।

मोम ठंडा होते ही आदित्य ने उसे फाड़-फाड़कर हटाया। त्वचा लाल और संवेदनशील हो चुकी थी। फिर दोनों लड़कों ने बारी-बारी से उसकी दोनों छेदों को बेरहमी से चोदा। रिया ने उसके बालों से खींचकर चेहरे पर थप्पड़ मारे। “बोल रंडी। तू क्या है?”
अनन्या ने टूटी आवाज में कहा, “रंडी… सिर्फ रंडी… मारो… और मारो…”
दोपहर तक खेल जारी रहा। अनन्या को कुत्ते की तरह रेंगवाया गया। लीश पकड़कर बाथरूम ले जाया गया। वहां शॉवर के नीचे खड़ा करके दोनों लड़कों ने उसके मुंह और चेहरे पर पेशाब किया। अनन्या ने आँखें बंद किए बिना गटक लिया। फिर सायरा ने उसे जबरदस्ती अपना योनिद्वार चाटने पर मजबूर किया जबकि रिया पीछे से बेल्ट से उसकी गांड पीट रही थी।

शाम होते-होते अनन्या का शरीर पूरी तरह टूटा हुआ लग रहा था। लेकिन उसकी आँखों में अभी भी वह भूख बाकी थी। आदित्य ने उसे आखिरी बार चारपाई पर लिटाया। चारों ने एक साथ उसके शरीर पर हमला बोल दिया। एक लंड मुंह में, एक चूत में, एक गांड में, और रिया उसके निप्पलों को दांतों से काट रही थी। अनन्या की चीखें कमरे में गूंज रही थीं। वह बार-बार झड़ रही थी, शरीर ऐंठ रहा था, लेकिन कोई दया नहीं दिखा रहा था।

रात के नौ बजे जब आखिरकार सब रुकें तो अनन्या फर्श पर गिरी हुई थी। सांस फूल रही थी। पूरा शरीर वीर्य, पसीने, मोम और थूक से लथपथ। गले पर कॉलर, निप्पलों पर अभी भी क्लिप के लाल निशान। रिया ने उसके पास बैठकर पानी की बोतल उसके होंठों से लगाई। अनन्या ने घूंट भरे।
सायरा ने धीरे से पूछा, “अब काफी हुआ?”
अनन्या ने आँखें खोलीं। उसकी आवाज बैठ चुकी थी लेकिन साफ थी। “नहीं… कल रात फिर से… और इस बार ऊपर वाले लड़कों को भी बुला लेना। आज वाली सजा से भी ज्यादा… मैं सह सकती हूं।”
आदित्य मुस्कुराया। करण ने उसके बाल सहलाए। रिया ने कॉलर की लीश अपने हाथ में ली और हल्के से खींची। “तो फिर तैयार रह। कल से तू सिर्फ हमारी संपत्ति है। जब तक हम चाहें, जैसे चाहें… इस्तेमाल करेंगे।”

अनन्या ने आँखें बंद कीं। दर्द पूरे शरीर में धड़क रहा था लेकिन उसके अंदर एक अजीब शांति और तृप्ति थी। फ्लैट की दीवारें अब उसकी चीखों और कराहों की आदी हो चुकी थीं। और वह जानती थी—ये सिलसिला अब रुकने वाला नहीं था। हर रात और ज्यादा क्रूर, और ज्यादा गहरा, और ज्यादा बेकाबू होने वाली थी। उसकी भूख अब सिर्फ मजे की नहीं, पूरी तरह टूट जाने की हो चुकी थी। और ये चार लोग उसे ठीक वैसा ही तोड़ने वाले थे जैसे वह चाहती थी।

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