विजय ने नीलिमा को अजनबियों के हवाले कर दिया। आंखों पर पट्टी, हाथ-पैर जकड़े, तीन मर्दों ने उसके हर अंग को बेरहमी से कुचला। दर्द में भी वह और मांगती रही चुदाई कहानीया ।
रात के अंधेरे में शहर की हलचल थम चुकी थी। विजय (48) अपने अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ा सिगरेट पी रहा था। नीचे सड़क पर गाड़ियों की हल्की आवाजें आ रही थीं। अंदर बेडरूम में उसकी पत्नी नीलिमा (44) नंगी लेटी थी। उसका शरीर अब भी वैसा ही भरा-भरा था जैसा शादी के दिन था—बड़े-बड़े स्तन, चौड़ी कमर, और गोल-मटोल नितंब जो हर कदम पर लहराते थे। उसका फिगर 38-30-40 था। गोरा, चिकना शरीर मानो मक्खन से बना हो। विजय खुद मध्यम कद का, थोड़ा मोटा आदमी था। उसका लंड औसत से छोटा था, और यही बात अब उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा गड्ढा बन चुकी थी।
बचपन से विजय गलत संगत में पला-बढ़ा था। गली के लड़कों के साथ अश्लील बातें, पुरानी पोर्न पत्रिकाएं, और बाद में इंटरनेट ने उसके दिमाग को सेक्स से भर दिया था। इंजीनियरिंग के बाद नौकरी लगी, शादी हुई, दो बेटे हुए जिन्हें उन्होंने दक्षिण भारत के एक आवासीय विद्यालय में भेज दिया। अब घर में सिर्फ विजय और नीलिमा रहते थे। शुरुआत के सालों में दोनों ने एक-दूसरे को जमकर चोदा। सुबह, दोपहर, रात—जब भी मौका मिलता, विजय नीलिमा को पकड़ लेता। उसके स्तनों को मुंह में भरकर चूसता, चूत चाटता, और पीछे से धकेलता। नीलिमा भी कामुक थी। बिस्तर पर आते ही वह उछल-उछल कर बैठ जाती, विजय के लंड पर सवार होकर जोर-जोर से हिलती और गालियां बकती।
लेकिन साल बीतते गए। विजय का लंड अब नीलिमा को संतुष्ट नहीं कर पाता था। वह खुद भी महसूस करती थी कि उसकी चूत अब और बड़े, मोटे, क्रूर लंड की भूखी हो गई है। दोनों को ओरल सेक्स, गंदी बातें, रोल-प्ले और पोर्न का शौक था। रात को वे नंगे लेटे-लेटे सेक्स स्टोरीज पढ़ते। नीलिमा की आवाज में कामुकता बढ़ जाती जब वह पढ़ती—“उसने मेरी गांड में लंड घुसाया और चूत को मुट्ठी से कूटा…”। विजय का लंड खड़ा हो जाता, लेकिन अब उसकी इच्छा बदल चुकी थी। वह नीलिमा को दूसरे मर्द से चुदवाते हुए देखना चाहता था। नीलिमा भी यही चाहती थी—कि विजय उसके सामने किसी और औरत को चोदे, और वह खुद अजनबी के हाथों में बर्बरता से इस्तेमाल हो।
दो साल पहले उन्होंने गोवा जाने का फैसला किया। समुद्र किनारे एक शांत रिसॉर्ट में कमरा लिया। नीलिमा ने पूरे टूर में बिना ब्रा-पैंटी के कपड़े पहने—छोटी स्कर्ट, ढीले टॉप जो उसके स्तनों की गहरी दरार दिखाते थे। समुद्र तट पर जब वह चलती तो पुरुषों की नजरें उसके नितंबों पर चिपक जातीं। कई बार अजनबी हाथ बढ़ाकर उसके चूतड़ सहला जाते। नीलिमा मुस्कुराती रहती। विजय दूर से देखता और उसका लंड तन जाता। एक शाम समुद्र किनारे चट्टानों के पीछे उन्होंने खड़े-खड़े चुदाई की। थोड़ी दूर एक जोड़ा उन्हें देख रहा था और खुद भी उत्तेजित होकर एक-दूसरे को सहला रहा था।
तीसरे दिन रात को दोनों ने बहुत शराब पी। कमरे में नंगी डांस किया। नीलिमा की आंखें लाल हो गईं। वह बिस्तर पर गिर गई और झपकी आ गई। विजय का भी नशा चढ़ा हुआ था। उसकी हवस जाग उठी। उसने दरवाजा अधखुला छोड़कर रिसेप्शन पर पहुंचा। मैनेजर—एक तगड़ा, 35 साल का आदमी जिसका नाम सुरेश था—उसे देखकर मुस्कुराया। सुरेश ने दो दिन से नीलिमा को घूरा था। उसके बड़े स्तन, हिलते नितंब—सब याद थे।
“कोई लड़की का इंतजाम?” विजय ने फुसफुसाया।
सुरेश ने सिर हिलाया। “रूम 314 जाओ। वहां इंतजाम है।”
विजय चला गया। सुरेश ने तुरंत उसके कमरे की तरफ कदम बढ़ाए। दरवाजा हल्के से धक्का देने से खुल गया। अंधेरा था। नीलिमा नंगी लेटी थी। उसके पैर थोड़े खुले हुए थे। सुरेश ने चुपचाप कपड़े उतारे। उसका लंड मोटा और लंबा था—लगभग 8 इंच का, नसों से भरा हुआ। वह धीरे से बिस्तर के पास गया और नीलिमा की चूत पर जीभ फेरने लगा। गर्म, गीली जीभ ने उसके होंठों को चाटा। नीलिमा नशे में कराह उठी।
“राजेश… आज जितना चाहे उतना चोदो… मैं कुछ नहीं बोलूंगी…” उसने अधबीच में कहा।
सुरेश मुस्कुराया। उसने नीलिमा की चूत को जोर से चाटना शुरू किया। जीभ अंदर घुसाई, चूत के होंठों को दांतों से काटा। नीलिमा की टांगें कांपने लगीं। सुरेश ने उसके नितंबों को फैलाया और गांड के छेद पर भी जीभ फेर दी। फिर उसने अपना लंड नीलिमा के मुंह में ठूंस दिया। नीलिमा ने आंखें बंद रखकर चूसना शुरू कर दिया। गला भर गया, आंसू निकल आए, लेकिन वह चूसती रही। सुरेश ने उसके बाल पकड़कर जोर से धकेला। लंड गले तक पहुंचा। नीलिमा ने घुटते हुए पूरा माल निगल लिया।
सुरेश नहीं रुका। उसने नीलिमा को पेट के बल लिटाया, उसके नितंब ऊपर उठाए और बिना किसी चेतावनी के अपना मोटा लंड उसकी चूत में धकेल दिया। नीलिमा चीख पड़ी।
“आह्ह… ये क्या… इतना मोटा… माँ…!”
सुरेश ने उसके बाल पकड़े और जोर-जोर से धकेलने लगा। हर धक्के पर नीलिमा की चूत चिरती हुई महसूस हो रही थी। सुरेश ने उसके स्तनों को पीछे से मरोड़ा, निपल्स को उंगलियों से दबाया। फिर वह 69 पोजीशन में आ गया। नीलिमा का मुंह उसके लंड पर था, और सुरेश उसकी चूत और गांड दोनों चाट रहा था। नीलिमा नशे और उत्तेजना में पागल हो चुकी थी।
“चोद दे कुत्ते… मेरी चूत का भोसड़ा बना दे… गांड में भी डाल…!” वह चिल्लाई।
सुरेश ने क्रीम लगाई और धीरे-धीरे अपना लंड उसकी गांड में घुसाने लगा। नीलिमा की आंखें फटी रह गईं। दर्द और मजे का मिश्रण। सुरेश ने पूरा लंड अंदर डाल दिया और जोर से हिलने लगा। नीलिमा की चीखें कमरे में गूंज रही थीं। सुरेश ने उसके गले पर हाथ रखा और हल्का दबाया—BDSM का स्वाद। नीलिमा की सांसें उखड़ने लगीं, लेकिन वह और जोर से धक्के लेने लगी।
“और कस के दबा… मुझे अपनी रांड बना…!”
सुरेश ने उसके गाल पर थप्पड़ मारा। फिर दूसरा। नीलिमा की आंखों से आंसू बहने लगे, लेकिन वह मुस्कुरा रही थी। सुरेश ने उसे कुत्ते की तरह घसीटा, दीवार के सहारे खड़ा किया और पीछे से चोदने लगा। हर धक्के पर नीलिमा की छातियां दीवार से टकरा रही थीं। सुरेश ने उसके निपल्स को दातों से काटा। खून की बूंदें निकलीं। नीलिमा कराह उठी लेकिन पीछे हटी नहीं।
दो घंटे तक सुरेश ने उसे बर्बरता से इस्तेमाल किया। चूत, गांड, मुंह—सब जगह। आखिर में उसने नीलिमा के चेहरे पर अपना माल उड़ेल दिया। नीलिमा की आंखें, मुंह, स्तन—सब सफेद हो गए। सुरेश ने चुपचाप कपड़े पहने और निकल गया।
उधर रूम 314 में एक 26 साल की लड़की—सोनिया—विजय का इंतजार कर रही थी। उसने विजय के कपड़े उतारे और मालिश शुरू की। उसके हाथ विजय के शरीर पर घूम रहे थे। जब वह लंड तक पहुंची तो विजय का पूरा शरीर कांप उठा। सोनिया ने शावर में ले जाकर उसकी चूत चटवाई, स्तन मुंह में दिए। विजय ने उसे घोड़ी बनाकर आगे-पीछे दोनों तरफ से चोदा। गालियां बकीं—“रंडी… भोसड़ी वाली… तेरे भोसड़े में लंड घुसाऊंगा…”। सोनिया ने उसके अंडकोष मुंह में लेकर जोर से चूसे। विजय का माल उसके मुंह और चेहरे पर फूट पड़ा।
सुबह जब विजय कमरे में लौटा तो नीलिमा जाग चुकी थी। उसके शरीर पर नीले निशान थे, गर्दन पर उंगलियों के निशान, स्तनों पर दांत के निशान।
“रात मजा आया ना?” नीलिमा ने मुस्कुराते हुए पूछा।
विजय का चेहरा पीला पड़ गया। उसने सच बता दिया। नीलिमा ने भी अपनी बात सुनाई। दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। फिर नीलिमा हंसी।
“अब कोई प्रूफ नहीं। और हमें ये अनुभव मिला। अगली बार किसी जोड़े को ढूंढेंगे। लेकिन इस बार मैं चाहती हूं कि तू मुझे उनके सामने बांध दे। हाथ-पैर बांधकर, आंखों पर पट्टी बांधकर, और फिर दोनों मिलकर मेरी चूत और गांड फाड़ दें। मैं चाहती हूं कि दर्द हो, अपमान हो, और मैं खुद उनसे भीख मांगूं कि और चोदो।”
विजय का लंड फिर तन गया। दोनों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया। बाहर सूरज उग रहा था, लेकिन उनके कमरे में अभी भी रात का अंधेरा और हवस बाकी थी।
अगले कुछ महीनों में उनकी खोज जारी रही। वे अब सिर्फ स्वैपिंग नहीं चाहते थे। वे पूर्ण समर्पण, क्रूरता, और बिना किसी सीमा के सेक्स चाहते थे। नीलिमा ने विजय से कहा कि वह उसे किसी अजनबी के हाथों में सौंप दे—पूरी तरह। विजय ने सहमति दी। एक दिन उन्होंने एक निजी पार्टी का पता लगाया जहां सिर्फ चुने हुए जोड़े जाते थे। वहां नियम साफ थे—कोई नाम नहीं, कोई सवाल नहीं, और जो कहा जाए वह करना होगा।
पार्टी में नीलिमा को एक कमरे में ले जाया गया। उसके हाथ-पैर चेन से बांध दिए गए। आंखों पर काली पट्टी। विजय को एक तरफ खड़ा रहने को कहा गया—सिर्फ देखने के लिए। तीन मर्द कमरे में आए। उनके लंड पहले से तने हुए थे। एक ने नीलिमा के मुंह में लंड ठूंस दिया, दूसरे ने चूत, तीसरे ने गांड। एक साथ तीनों जगह। नीलिमा की चीखें गूंज रही थीं, लेकिन पट्टी के नीचे उसकी आंखों से उत्तेजना की चमक आ रही थी। विजय देख रहा था। उसका अपना लंड हाथ में था, लेकिन वह छू नहीं रहा था। सिर्फ देख रहा था कि उसकी पत्नी कैसे बर्बरता से इस्तेमाल हो रही है।
एक मर्द ने उसके गाल पर थप्पड़ मारे, दूसरे ने निपल्स पर क्लिप्स लगा दिए। दर्द से नीलिमा का शरीर ऐंठ गया, लेकिन वह और जोर से धक्के लेने लगी। “और… और कस के… मुझे अपनी रांड बना दो…” उसकी आवाज में गिड़गिड़ाहट थी। विजय ने महसूस किया कि यह वही पल है जिसकी वह सालों से कल्पना कर रहा था। नीलिमा अब सिर्फ उसकी पत्नी नहीं थी—वह एक वस्तु बन चुकी थी जिसे दर्द और मजे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
पार्टी खत्म होने के बाद जब नीलिमा की चेन खोली गई तो उसका शरीर घावों और निशानों से भरा था। लेकिन उसकी आंखों में संतुष्टि थी। विजय ने उसे बाहों में लिया। दोनों जानते थे कि यह अंत नहीं है। यह शुरुआत है। अब उनकी जिंदगी में कोई सीमा नहीं बची थी। सिर्फ हवस थी, दर्द था, और वह भूख जो कभी शांत नहीं होने वाली थी।
रात के अंधेरे में वे फिर से बिस्तर पर लेटे। नीलिमा ने विजय के कान में फुसफुसाया—“अगली बार तू भी उनके साथ शामिल हो। मुझे देखना है कि तू किसी और औरत को कैसे चोदता है जबकि मैं बांधी हुई उनकी चूत चाट रही हूं।”
विजय ने सिर हिलाया। बाहर शहर सो रहा था, लेकिन उनके कमरे में एक नई आग जल रही थी—क्रूर, निर्दयी, और कभी न बुझने वाली।
दो हफ्ते बाद वह पल आ गया। एक पुराने गोदाम में गुप्त पार्टी का आयोजन हुआ था। सिर्फ चुने हुए लोग। कोई मोबाइल नहीं, कोई नाम नहीं। नीलिमा को अंदर लाते ही उसके कपड़े फाड़ दिए गए। उसके हाथ पीछे मोड़कर मोटी चेन से बांध दिए गए, पैरों को अलग-अलग फैलाकर फर्श के छल्लों में जकड़ दिया गया। आंखों पर मोटी काली पट्टी। मुंह में बड़ा गेंद वाला गैग ठूंस दिया गया ताकि उसकी चीखें दब जाएं।
विजय को एक तरफ कुर्सी पर बैठाया गया। उसके सामने एक नंगी औरत घुटनों के बल बैठाई गई—गोरी, बड़े स्तनों वाली, जिसका नाम नहीं पूछा गया। विजय को आदेश मिला—“इसकी चूत चाट, फिर चोद। लेकिन धीरे। पहले दर्द दे।”
नीलिमा पट्टी के नीचे सब सुन रही थी। उसकी चूत पहले से भीग चुकी थी। तीन मर्द उसके चारों तरफ खड़े थे। एक ने उसके स्तनों पर लोहे के क्लिप्स कस दिए। निपल्स दब गए, खून की छोटी बूंदें निकलीं। नीलिमा की कमर ऐंठ गई लेकिन गैग की वजह से सिर्फ गुर्राहट निकली। दूसरे मर्द ने उसकी गांड के छेद में ठंडा मेटल का प्लग धकेल दिया—मोटा, नसों वाला। तीसरे ने चूत में दो उंगलियां घुसाकर अंदर की दीवारों को खुरचना शुरू कर दिया।
विजय ने सामने वाली औरत के बाल पकड़े और उसका मुंह अपने लंड पर दबा दिया। वह गला भरकर चूसने लगी। विजय ने उसके बाल और कसकर खींचे। “और गहरा… रांड।” फिर उसने उसे पेट के बल लिटाया, नितंब ऊपर उठाए और बिना किसी चिकनाई के अपना लंड उसकी गांड में धकेल दिया। औरत चीखी। विजय ने उसका मुंह दबाया और जोर-जोर से धकेलने लगा। हर धक्के पर उसकी गांड चिरती हुई आवाज कर रही थी।
उधर नीलिमा पर अत्याचार बढ़ रहा था। एक मर्द ने गैग निकाला और अपना मोटा लंड उसके गले तक ठूंस दिया। दूसरा उसकी चूत में मुट्ठी घुसाने लगा—धीरे-धीरे, उंगलियां फैलाते हुए। नीलिमा की आंखों से आंसू बहने लगे। दर्द असहनीय था, लेकिन उसकी चूत और ज्यादा गीली हो रही थी। तीसरे ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में गुर्राया—“तू सिर्फ एक छेद है। आज हम तेरे तीनों छेद फाड़ देंगे।”
विजय ने अपनी औरत को चोदते हुए नीलिमा की तरफ देखा। नीलिमा की टांगें कांप रही थीं। मुट्ठी अब लगभग पूरी अंदर थी। नीलिमा की चीख निकल पड़ी—“फाड़ दो… मुझे फाड़ दो…!”
मर्दों ने उसे घुमाया। अब वह कुत्ते की तरह थी—हाथ पीछे, पैर फैले। एक ने चूत में, दूसरे ने गांड में एक साथ लंड धकेल दिए। तीसरा उसके मुंह में। तीनों एक साथ धकेल रहे थे। नीलिमा का शरीर इधर-उधर हिल रहा था जैसे कोई कठपुतली हो। क्लिप्स और कस दिए गए। निपल्स से खून की धार बहने लगी। एक मर्द ने उसके गाल पर थप्पड़ मारे—बाएं, दाएं, बाएं—जब तक गाल लाल और सूज नहीं गए।
विजय अपनी औरत की गांड में झड़ गया। फिर उसने उसे घुमाया और उसके मुंह में लंड ठूंसकर बाकी माल भी उगलवा लिया। उसके बाद वह नीलिमा के पास गया। मर्दों ने जगह दी। विजय ने नीलिमा के बाल पकड़े और अपना लंड उसके मुंह में डाला जिसमें अभी भी दूसरी औरत का स्वाद बाकी था। नीलिमा ने आंखें बंद करके चूसा। विजय ने उसके गले पर हाथ रखा और हल्का दबाया। नीलिमा की सांसें उखड़ने लगीं लेकिन वह और जोर से चूसने लगी।
फिर विजय ने उसकी चूत में अपना लंड डाला जबकि दो मर्द अभी भी उसकी गांड और मुंह इस्तेमाल कर रहे थे। नीलिमा अब सिर्फ आवाजें निकाल रही थी—अधूरी, टूटी हुई। उसका शरीर पसीने और खून से लथपथ था। एक मर्द ने उसके पेट पर थूका और थप्पड़ मारा। दूसरे ने उसके बाल काटकर फेंक दिए।
घंटों तक यह सिलसिला चला। जब आखिरकार चेन खोली गई तो नीलिमा फर्श पर गिर पड़ी। उसके छेद खुले और लाल थे, शरीर पर नीले-काले निशान, गर्दन पर उंगलियों के निशान, स्तनों पर खून के धब्बे। विजय ने उसे उठाया। नीलिमा की आंखें अभी भी पट्टी के नीचे थीं। उसने फुसफुसाया—“और… अगली बार और क्रूर करना… मुझे बेहोश होने तक चोदना…”
विजय ने उसके माथे को चूमा। गोदाम के बाहर रात अभी बाकी थी। और उनकी हवस भी।
चुदाई कहानीया :-