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सिंदूर की जंजीर
कनेरपुर के सूखे घर में उन्नीस साल का लड़का एक रात में बीवी बन जाता है। गले की चाबी, फटी गांड और खून से सनी चादरें अब उसकी नई जिंदगी हैं। वापसी का कोई रास्ता नहीं। उस सुबह के बाद से कनेरपुर का वह कच्चा घर नरक बन गया था मेरे लिए। लेकिन नरक ऐसा जिसमें मैं खुद को बार-बार धकेलता रहा। वीरेंद्र खेत से लौटते ही दरवाज़ा बंद करता। कुंडी लगती। फिर वही आवाज़—“कपड़े......Read Full story