सासुर की कुतिया बहू

पड़ोसन ने बहू को कॉलर पहनाकर ससुर के लंड की पूरी गुलाम बना दिया। रोज़ बेरहम चोदाई, गांड-फटना, क्लिप-सजा और बेहोशी तक का क्रूर खेल। एक बहू की आखिरी इज्जत मिटाने वाली सबसे क्रूर और गंदी कहानी।

राहुल के जाने के बाद रितु बिस्तर पर ही पड़ी रही। उसके हाथ-पैर अभी भी रस्सी के निशानों से लाल थे। चूत और गांड दोनों में तेज जलन हो रही थी। वीर्य धीरे-धीरे बाहर रिस रहा था और जांघों पर सूख चुका था। वह बाथरूम गई, ठंडे पानी से खुद को धोया, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। आईने में अपनी नंगी देह देखी—गर्दन पर उंगलियों के निशान, छातियों पर दांतों के काट, जांघों पर थप्पड़ों के लाल निशान। फिर भी अंदर एक भूखी सी बेचैनी थी।

अगले दिन राहुल सुबह दस बजे ही आ गया। अमित अभी भी टूर पर थे। बच्चे दादी के पास। राहुल ने दरवाजा खोला तो रितु रसोई में कॉफी बना रही थी। उसने कोई नमस्ते नहीं किया। सीधा उसके पास जाकर बालों में मुट्ठी मारी और पीछे खींच लिया।
“आज पूरा दिन मेरा है,” उसने कहा। आवाज में कोई नरमी नहीं थी।

रितु का गला उसके हाथ में था। वह उसे ड्राइंग रूम तक घसीटते हुए ले गया। वहां उसने पहले से लाई हुई एक मोटी काली रस्सी और चमड़े की पट्टियां निकालीं। रितु की सांस तेज हो गई। राहुल ने उसे जबरन नंगा किया। उसके कपड़े फर्श पर बिखर गए। फिर उसने रितु के दोनों हाथों को पीठ के पीछे बांध दिया, इतनी कसकर कि कलाईं में दर्द होने लगा। इसके बाद उसकी दोनों टांगों को फैलाकर टखनों से सोफे के पैरों से बांध दिया। रितु पूरी तरह फैल चुकी थी। चूत खुली हुई, गांड थोड़ी उठी हुई।

राहुल ने अपनी पैंट खोली। लंड पहले से ही सख्त था। उसने रितु के मुंह के पास लाकर थ Hop दिया। “खोल।”
रितु ने होंठ खोले। राहुल ने पूरा लंड एक झटके में गले तक ठूंस दिया। रितु की आंखें पानी से भर गईं। वह हांफने लगी। राहुल उसके बाल पकड़े हुए आगे-पीछे कर रहा था। लंड गले में धंस रहा था, रितु की लार मुंह से बह रही थी। कभी-कभी वह इतना जोर से घुसाता कि रितु की सांस रुक जाती। फिर निकालता, थूक से तर लंड उसके चेहरे पर मारता और फिर से मुंह में ठूंस देता।

जब रितु का चेहरा पूरा लार और आंसुओं से भीग गया, तब राहुल ने लंड निकाला। वह उसके पीछे गया। रितु की गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। आवाज पूरे फ्लैट में गूंजी। फिर दूसरा, तीसरा। गांड लाल हो गई। राहुल ने अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में घुसा दीं। वह पहले से गीली थी। उंगलियां अंदर-बाहर करते हुए उसने तीसरी उंगली भी ठूंस दी। रितु कराह उठी।

“आज सिर्फ लंड नहीं चलेगा,” राहुल ने कहा। उसने बैग से एक मोटा काला डिल्डो निकाला—लंड से भी मोटा। उसे रितु की चूत पर रगड़ा, फिर एक झटके में पूरा अंदर धकेल दिया। रितु की चीख निकल गई। डिल्डो इतना मोटा था कि चूत के होंठ फैलकर सफेद पड़ गए। राहुल उसे जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा। दूसरी हाथ से उसकी गांड में एक उंगली घुसा दी, फिर दो। रितु का शरीर कांप रहा था। दर्द और मजे का मिश्रण उसे पागल कर रहा था।

join my telegram channel for leaked videos

राहुल ने डिल्डो अंदर ही छोड़ दिया और खुद उसके मुंह में फिर से लंड ठूंस दिया। अब वह दोनों छेद इस्तेमाल कर रहा था—एक हाथ से डिल्डो चला रहा था, दूसरे से बाल पकड़कर मुंह चोद रहा था। रितु की आवाजें दबी हुई सिसकियों में बदल गई थीं। लार फर्श पर गिर रही थी।
थोड़ी देर बाद राहुल ने डिल्डो निकाला। चूत से गीला रस बह निकला। उसने रितु की गांड के छेद पर थूका, उंगलियों से फैलाया और अपना लंड वहां लगा दिया। रितु ने सिर हिलाया, “नहीं… बहुत दर्द होगा…”

राहुल ने जवाब में और जोर से धक्का मारा। आधा लंड गांड में घुस गया। रितु की चीख दब गई। राहुल रुका नहीं। पूरा लंड अंदर धकेल दिया। गांड की दीवारें फैल गईं। वह बर्बरता से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ रितु का शरीर आगे को झुक रहा था। राहुल ने उसका गला पकड़ लिया और और तेज करने लगा। गांड की फच-फच की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
“तेरी गांड मेरी है… समझी?” राहुल ने गले को और कसते हुए कहा।

रितु की आंखें पलटने लगीं। वह झड़ गई—बिना छुए ही। शरीर कांप रहा था। राहुल ने उसकी गांड में ही वीर्य छोड़ दिया। गर्म तरल अंदर भर गया। जब उसने लंड निकाला तो सफेद वीर्य गांड से बाहर बहने लगा।

लेकिन राहुल थका नहीं था। उसने रितु की रस्सियां खोलीं, सिर्फ इसलिए कि उसे नए अंदाज में बांध सके। इस बार उसने रितु को उलटा लिटाया—चेहरा नीचे, गांड ऊपर। हाथों को सिर के ऊपर बांधा, टांगों को और चौड़ी की। फिर बैग से एक छोटी सी चमड़े की चाबुक निकाली। पहली मार रितु की जांघ पर पड़ी। लाल निशान उभर आया। दूसरी गांड पर। तीसरी चूत के पास। रितु चीख रही थी, लेकिन राहुल नहीं रुक रहा था। दस-बारह मारों के बाद उसकी गांड और जांघें लाल हो चुकी थीं।

राहुल ने फिर से लंड खड़ा किया। इस बार उसने रितु की चूत में घुसाया। डिल्डो से फैली हुई चूत आसानी से ले गई, लेकिन राहुल की बर्बरता नहीं बदली। वह इतने जोर से झेड़ रहा था कि रितु का माथा फर्श पर रगड़ खा रहा था। एक हाथ से वह उसकी कमर दबाए हुए था, दूसरे से बाल खींच रहा था। रितु की आवाजें अब सिर्फ “आह… आह… और… तोड़ दे…” बनकर रह गई थीं।
राहुल ने अचानक लंड निकाला, रितु को घुमाया और उसके चेहरे पर बैठ गया। “चाट।”

रितु की जीभ उसकी गांड और लंड के नीचे घूमने लगी। राहुल उसका मुंह दबाए हुए ऊपर-नीचे हो रहा था। फिर वह उठा, रितु के मुंह में लंड ठूंसा और गले तक ले जाकर झड़ गया। वीर्य सीधे गले में उतर गया। रितु खांसने लगी, लेकिन राहुल ने लंड बाहर नहीं निकाला जब तक आखिरी बूंद नहीं निकल गई।

दोपहर तक राहुल ने रितु को तीन बार और लिया। एक बार सोफे पर, जहां उसने उसकी टांगें कंधों तक मोड़ रखीं और इतनी गहराई तक घुसाया कि रितु को लगा पेट फट जाएगा। दूसरी बार रसोई की प्लेटफॉर्म पर, जहां उसने रितु को उलटा लटकाया और गांड चोदी। तीसरी बार बाथरूम में, जहां ठंडे पानी के नीचे खड़े-खड़े उसकी चूत फाड़ दी।

शाम होते-होते रितु का शरीर पूरी तरह टूट चुका था। चल नहीं पा रही थी। राहुल ने उसे बिस्तर पर लिटाया, उसके ऊपर लेट गया और धीरे से कान में बोला, “कल रात फिर आऊंगा। इस बार कुछ नए खिलौने लाऊंगा। तेरी चूत और गांड दोनों को इतना फैला दूंगा कि तू चल भी नहीं पाएगी।”

रितु की आंखें बंद थीं। होठ सूजे हुए, शरीर पर नीले-लाल निशान, चूत और गांड दोनों सूजी हुई और वीर्य से भरी हुई। अंदर कहीं एक आवाज अभी भी कह रही थी कि यह सब गलत है, बहुत गलत है। लेकिन जब राहुल का हाथ उसकी चूत पर गया तो वह खुद ही टांगें और फैला दी।
राहुल हंसा। “देखा… कुतिया खुद मांग रही है।”

उसने दो उंगलियां फिर से अंदर घुसा दीं। रितु की कमर उठ गई। राहुल की उंगलियां अंदर घूम रही थीं, उसके वीर्य को और गहराई तक धकेल रही थीं। रितु की सांसें तेज हो गईं। वह फिर से गीली हो रही थी।
राहुल ने उंगलियां निकालीं, उन्हें रितु के मुंह में ठूंस दिया। “चाट अपना स्वाद।”

रितु ने आंखें खोलीं। उसकी निगाह में अब सिर्फ भूख बची थी। उसने उंगलियां चूस लीं। राहुल ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “अच्छी लड़की। कल रात और बर्बर होगा। तैयार रह।”
वह उठा, कपड़े पहने और जाने लगा। दरवाजे पर मुड़कर बोला, “दरवाजा खुला रखना। और नंगी ही सोना। समझी?”
रितु ने सिर हिलाया। राहुल चला गया। फ्लैट में सन्नाटा छा गया। रितु बिस्तर पर ही पड़ी रही। पैर फैलाए हुए। चूत से अभी भी वीर्य रिस रहा था। शरीर दर्द कर रहा था, लेकिन मन में एक ही बात घूम रही थी—कल रात।

और वह इंतजार करने लगी। रात के ग्यारह बज रहे थे। रितु बिल्कुल नंगी बिस्तर पर लेटी थी, जैसे राहुल ने कहा था। दरवाजा खुला छोड़ रखा था। शरीर अभी भी दर्द कर रहा था—गांड में जलन, चूत सूजी हुई, जांघों पर चाबुक के निशान। फिर भी उसके अंदर की भूख शांत नहीं हुई थी। वह अंधेरे में आंखें खोले इंतजार कर रही थी।

दरवाजे पर धीमी सी आहट हुई। राहुल अंदर आया। हाथ में एक बड़ा काला बैग था। उसने लाइट नहीं जलाई। सिर्फ मोबाइल की रोशनी से रितु के नंगे शरीर को देखा—पैर फैलाए, चूत अभी भी थोड़ी खुली हुई, जांघों पर सूखा वीर्य।
“अच्छी कुतिया,” उसने कहा। आवाज ठंडी थी। “आज तेरी हद पार करूंगा।”

उसने बैग खोला। अंदर से निकले—मोटी चमड़े की कॉलर, निप्पल क्लैंप्स, एक लंबा मोटा एनल हुक, दो अलग-अलग साइज के डिल्डो (एक तो राहुल के लंड से भी मोटा), और एक छोटी सी इलेक्ट्रिक शॉक वाली रॉड। रितु की सांस अटक गई।
राहुल ने पहले उसके गले में कॉलर कस दिया। लोहे की चेन से उसे बेड के हेडबोर्ड से बांध दिया। फिर दोनों निप्पल्स को क्लैंप्स से दबाया। रितु की चीख निकल गई। क्लैंप्स इतने टाइट थे कि निप्पल्स बैंगनी पड़ गए। राहुल ने चेन खींचकर और कस दिया। दर्द से रितु की आंखों में पानी आ गया।

“आज रोना मना है। रोई तो और सख्त होगा।”
उसने रितु के हाथों को फिर से पीठ के पीछे बांधा, टांगों को जितना हो सके फैलाकर टखनों से बेड के कोनों से कस दिया। रितु पूरी तरह फैल चुकी थी—चूत और गांड दोनों हवा में खुली हुई। राहुल ने पहले उसकी चूत पर थूका, फिर सबसे मोटा डिल्डो लिया। बिना किसी तैयारी के उसे धकेलना शुरू किया। रितु की चूत चीख उठी। डिल्डो का सिर अंदर घुसा तो लगा जैसे कोई मुट्ठी घुस रही हो। राहुल ने जोर लगाया। आधा अंदर गया। रितु की कमर उछल गई, लेकिन रस्सियां उसे रोक रही थीं।

“ले… पूरा ले,” राहुल ने दांतों से कहा और एक झटके में बाकी का हिस्सा अंदर धकेल दिया। रितु की चीख गले में अटक गई। चूत के होंठ फटने के कगार पर थे। राहुल डिल्डो को अंदर-बाहर करने लगा—तेज, निर्दयी। हर धक्के के साथ रितु का शरीर कांप रहा था। क्लैंप्स वाली चेन हिलने से निप्पल्स और भी दुख रहे थे।

थोड़ी देर बाद उसने डिल्डो अंदर ही छोड़ दिया और एनल हुक निकाला। हुक का मुड़ा हुआ हिस्सा रितु की गांड पर रखा। थूक लगाकर धीरे-धीरे धकेलने लगा। रितु ने सिर हिलाया, “नहीं… बहुत बड़ा है… फट जाएगी…”

राहुल ने जवाब में हुक और अंदर धकेला। गांड की दीवारें फैल गईं। हुक पूरा अंदर चला गया। राहुल ने उसकी चेन हेडबोर्ड से बांध दी ताकि हुक अंदर ही रहे और रितु हिल भी न सके। अब उसकी गांड में धातु का हुक धंसा हुआ था, चूत में मोटा डिल्डो। दोनों छेद पूरी तरह भरे हुए।
राहुल ने अपनी पैंट खोली। लंड पहले से सख्त था। उसने रितु के मुंह के पास लाकर थ Hop दिया। “खोल और गहरा ले।”

रितु ने मुंह खोला। राहुल ने पूरा लंड गले तक ठूंस दिया। इस बार वह रुकने वाला नहीं था। वह रितु के बाल पकड़कर इतनी बर्बरता से मुंह चोद रहा था कि रितु की लार और आंसू फर्श पर बह रहे थे। कभी-कभी वह लंड निकालकर उसके चेहरे पर मारता, फिर से गले में धंसा देता। रितु की सांस बार-बार रुक रही थी। चेहरा लाल हो चुका था।

जब राहुल का मन भर गया तो उसने लंड निकाला। अब वह रितु के खुले शरीर के बीच खड़ा हो गया। उसने डिल्डो निकाला—चूत से गीला रस और झाग बह निकला। फिर अपना लंड वहां लगाकर एक ही झटके में पूरा अंदर कर दिया। रितु की चीख निकली। राहुल ने हुक वाली चेन को भी थोड़ा खींचा जिससे गांड में हुक और गहराई तक धंस गया। अब वह एक साथ दोनों छेदों पर दबाव डाल रहा था—लंड चूत में, हुक गांड में।

धक्के इतने जोर के थे कि बेड की चरमराहट पूरे फ्लैट में गूंज रही थी। राहुल ने रितु का गला दबाया। “बोल… तू मेरी कुतिया है।”
रितु हांफते हुए बोली, “हां… तेरी कुतिया… तोड़ डाल मुझे…”
राहुल की रफ्तार और बढ़ गई। वह इतनी गहराई तक जा रहा था कि रितु को लगा उसका पेट फट जाएगा। क्लैंप्स की चेन हिलने से निप्पल्स में तेज दर्द हो रहा था। अचानक राहुल ने लंड निकाल लिया, रितु को घुमाया (जितना रस्सियां इजाजत देतीं) और उसका मुंह अपने लंड पर दबा दिया। वह गले तक घुसाते हुए झड़ गया। वीर्य सीधे पेट में उतर गया। रितु खांसने लगी, लेकिन राहुल ने लंड बाहर नहीं निकाला।

फिर भी वह संतुष्ट नहीं था। उसने इलेक्ट्रिक शॉक रॉड निकाली। रितु की आंखें डर से फैल गईं। राहुल ने रॉड को उसकी चूत के ऊपर वाले हिस्से पर लगाया और स्विच दबाया। हल्के करंट की लहर से रितु का शरीर उछल गया। राहुल हंसा और फिर से दबाया—इस बार ज्यादा देर तक। रितु की चीखें कमरे में गूंजने लगीं। वह क्लैंप्स, हुक और रस्सियों में बंधी कांप रही थी।

राहुल ने रॉड को उसकी निप्पल्स पर भी लगाया। दर्द इतना तेज था कि रितु की आंखें पलटने लगीं। फिर उसने रॉड को गांड के हुक के पास लगाया। करंट की लहर से रितु झड़ गई—बिना छुए, सिर्फ दर्द से। शरीर कांप रहा था, चूत से पानी की तरह रस बह रहा था।
“अभी तो शुरू किया है,” राहुल ने कहा।

उसने हुक निकाला। गांड खुली हुई, लाल और सूजी हुई थी। उसने दूसरा, और मोटा डिल्डो गांड में धकेल दिया। रितु की आवाज अब सिसकियों में बदल चुकी थी। राहुल ने दोनों डिल्डो—एक चूत में, एक गांड में—एक साथ अंदर-बाहर करने शुरू कर दिए। उसकी मुट्ठियां दोनों छेदों में काम कर रही थीं। रितु का शरीर पसीने से तर था। बाल चेहरे पर चिपक गए थे।

दो घंटे तक यह सिलसिला चला। राहुल कभी मुंह चोदता, कभी चूत, कभी गांड। कभी चाबुक से मारता, कभी क्लैंप्स और कसता, कभी करंट देता। रितु कई बार झड़ चुकी थी—दर्द से, मजे से, दोनों के मिश्रण से। उसका शरीर अब सिर्फ एक वस्तु बनकर रह गया था जिसे राहुल अपनी मर्जी से तोड़-मरोड़ रहा था।

आखिर में राहुल ने सभी खिलौने हटाए। रितु की चूत और गांड दोनों पूरी तरह खुले हुए, लाल, सूजे हुए और वीर्य व रस से लथपथ थे। राहुल ने खुद को उसके ऊपर डाल दिया। इस बार बिना किसी खिलौने के, सिर्फ अपने लंड से। वह इतनी बर्बरता से झेड़ रहा था कि रितु का सिर बार-बार हेडबोर्ड से टकरा रहा था। गला दबाए हुए, बाल खींचे हुए, वह आखिरी बार झड़ा—सीधे उसकी गर्भ तक।

जब वह लंड निकालकर एक तरफ गिर गया, तो रितु हिल भी नहीं पा रही थी। शरीर पर नीले-काले निशान, निप्पल्स सूजे हुए, चूत और गांड से लगातार वीर्य बह रहा था। राहुल ने उसका चेहरा अपनी तरफ मोड़ा।
“कल रात और नया कुछ लाऊंगा। आज तो सिर्फ वार्म-अप था।”

रितु की आंखों में आंसू थे, लेकिन होंठों पर हल्की सी मुस्कान भी थी। उसने फुसफुसाकर कहा, “आ… तोड़ मुझे पूरी तरह…”
राहुल ने उसके सूजे हुए निप्पल को पकड़कर मरोड़ा। “करूंगा। तेरी चूत और गांड दोनों को ऐसा बना दूंगा कि तू फिर कभी सामान्य तरीके से बैठ भी न पाए।”

वह उठा, खिलौने समेटने लगा। जाने से पहले रितु के गले के कॉलर को कस दिया और चेन बेड से बांध दी।
“नंगी ही रहना। कॉलर मत खोलना। कल रात फिर आऊंगा।”

दरवाजा बंद होते ही फ्लैट में सन्नाटा छा गया। रितु अंधेरे में पड़ी रही—बंधी हुई, टूटी हुई, और अगली बर्बर रात का इंतजार करती हुई। उसके अंदर की आवाज अब पूरी तरह मर चुकी थी। बची थी सिर्फ एक कुतिया, जो अपने मालिक के अगले आदेश का इंतजार कर रही थी।

ससुर की फटी गांड वाली बहु

रुबीना और ननद सीमा को ठेकेदार ने चोदा

कज़िन की रस्सी और चाबुक वाली रातें

दोस्त की अकेली माँ को चोदा

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *