बीवी और प्रेमी को बंद कमरे में पकड़ा

पति ने बीवी और उसके प्रेमी को बंद कमरे में पकड़ा। रस्सियों से बांधकर ऐसी बर्बर सजा दी कि दर्द और मजे की चीखें रातभर गूंजती रहीं। अब दोनों सिर्फ उसके गुलाम हैं।

दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। उम्र 28 साल। राजस्थान के जोधपुर शहर का रहने वाला हूँ। एक प्राइवेट फाइनेंस कंपनी की ब्रांच में अकाउंट मैनेजर की नौकरी करता हूँ। हाइट 5 फुट 9 इंच, शरीर मजबूत, लंड का साइज 8.5 इंच का मोटा और नसों वाला। दिखने में साधारण लेकिन जब गुस्सा आता है तो आँखों में खून उतर आता है।

मेरी बीवी का नाम प्रिया है। उम्र 24 साल। सांवली रंगत, तीखे नैन-नक्श, मोटे और रसीले होंठ। हाइट 5 फुट 2 इंच। फिगर 36-28-38। शादी से पहले उसके बूब्स छोटे थे, लेकिन मैंने दो साल में उन्हें दबा-दबाकर, चूस-चूसकर और तेल लगा-लगाकर इतना बड़ा कर दिया कि अब वो साड़ी में भी बाहर निकलने को होते हैं। गांड तो उसकी शुरू से ही भारी और गोल थी। जब वो चलती है तो दोनों चूतड़ लहरों की तरह ऊपर-नीचे होते हैं। देखने वाले का लंड खुद-ब-खुद खड़ा हो जाता है।

हमारी शादी को डेढ़ साल हो चुके हैं। मैं उसे लगभग रोज़ चोदता हूँ। कभी धीरे, कभी बर्बरता से। उसकी चूत इतनी गीली और टाइट रहती है कि लगता है कोई नई कुंवारी है। लेकिन आज जो कुछ हुआ, उसने मेरे दिमाग के सारे पेंच ढीले कर दिए।
यह बात पिछले महीने की है। प्रिया के ननिहाल वालों ने जोधपुर से 40 किलोमीटर दूर एक गाँव में बुलाया था। मैं और प्रिया दोनों गए। वहाँ उसका बचपन का दोस्त और मुँहबोला भाई रोहन रहता था। उम्र 27 साल, हाइट 6 फुट, शरीर जिम वाला, सांवला और आँखों में हमेशा भूख सी रहती थी। प्रिया उसे भाई कहती थी। मैंने पहले कभी नहीं देखा था।

गाँव पहुँचे तो शाम हो चुकी थी। रोहन का घर कच्चा-पक्का मिलाजुला था। टिन की छत। अंदर घुसे तो रोहन अपनी माँ के साथ बैठा था। उसने मुझे देखते ही “जीजा जी” कहकर गले लगा लिया। फिर प्रिया की तरफ देखा। उसकी नज़र प्रिया की गांड पर टिक गई। प्रिया ने उस दिन काली साड़ी पहनी थी। साड़ी इतनी पतली और कसी हुई थी कि उसके चूतड़ों का गोल आकार साफ दिख रहा था। रोहन की आँखें लाल हो गईं।

रात का खाना खाया। सब सो गए। मैं और प्रिया एक कमरे में। प्रिया ने साड़ी उतारकर सिर्फ ब्रा-पैंटी में लेट गई। मैंने उसकी गांड पर हाथ रखा तो उसने हँसते हुए कहा, “कल रोहन भाई से मिलने जाना है। वो नया घर बनवा रहा है।” मैंने हाँ कह दी।
अगली सुबह प्रिया ने सफेद छोटी कुर्ती और काली टाइट लेगिंग पहनी। लेगिंग इतनी पतली थी कि उसके काले पैंटी के निशान साफ दिख रहे थे। कुर्ती कमर तक थी। नितंब आधे बाहर। मैंने पीछे से उसकी गांड मसल दी। वो चिहुँकी और बोली, “शर्म करो विक्रम… कोई देख लेगा।” लेकिन उसकी आँखों में चमक थी।

रोहन का नया घर आधा किलोमीटर दूर था। मैं बाइक लेकर गया। प्रिया पीछे बैठी। हर गड्ढे पर उसकी भारी गांड उछलती। हवा से कुर्ती ऊपर उड़ जाती और काली पैंटी वाली गांड नंगी हो जाती। रास्ते भर मेरा लंड खड़ा रहा।
घर पहुँचे। गेट खुला था। रोहन बाहर आया। उसने प्रिया को देखते ही कहा, “अरे भाभी, और मोटी हो गई हो। लगता है जीजा जी खूब खिला-पिला रहे हैं।” प्रिया ने हँसकर उसकी बाँह पर चिमटी काटी। तीनों अंदर गए।

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रोहन की माँ और छोटे भाई-बहन बैठे थे। चाय-नाश्ता हुआ। रोहन ने मुझसे कहा, “जीजा जी, आपके पास हॉलीवुड मूवीज हैं ना? ट्रांसफर कर दीजिए।” मैंने मोबाइल निकाला। ट्रांसफर शुरू किया। रोहन बोला, “मैं भाभी को नया घर दिखा कर लाता हूँ। आप यहीं बैठिए। फिल्में बड़ी हैं, आधा घंटा लग जाएगा।”

प्रिया उठ गई। रोहन के पीछे-पीछे चली। मैं बैठा रहा। ट्रांसफर चल रहा था। तभी मुझे शक हुआ। मैंने रोहन का मोबाइल उठाया जो पास रखा था। पासवर्ड उसने बता दिया था। गैलरी खोली। सैकड़ों फोटो। प्रिया की भी। फिर वैल्ट सेक्शन मिला। लॉक तोड़ा। अंदर जो देखा, मेरे हाथ काँप गए।

प्रिया नंगी। घोड़ी बनी हुई। मुँह में लंड लिए हुए। चूत फैलाई हुई। गांड का छेद खुला। और चोदने वाला रोहन ही था। वीडियो थे। प्रिया चीख-चीखकर चुदवा रही थी। “और जोर से… मार डाल… मेरी गांड फाड़ दे…” रोहन उसका बाल पकड़कर पीछे से धकेल रहा था। एक वीडियो में प्रिया घुटनों पर बैठी रोहन का लंड चाट रही थी और बोल रही थी, “भाई का लंड सबसे मोटा है… जीजा का तो छोटा लगता है इसके आगे।”
मेरा दिमाग घूम गया। हाथ काँप रहे थे। लंड फिर भी खड़ा हो गया। मैं तुरंत उठकर बाहर निकला। रोहन की माँ से पूछा, “नया घर कहाँ है?” उन्होंने बताया। मैं दौड़ता हुआ गया।

घर का गेट खुला। अंदर के कमरे का दरवाजा बंद। सीढ़ियाँ बाहर से ऊपर जा रही थीं। मैं दबे पाँव ऊपर गया। एक ही कमरा था। खिड़की पर जाली और पतला पर्दा। मैं पर्दा हटाकर अंदर झाँका।
प्रिया दीवार की तरफ मुँह करके खड़ी थी। लेगिंग और पैंटी घुटनों तक उतारी हुई। रोहन घुटनों के बल बैठा उसकी गांड के छेद को जीभ से चाट रहा था। दोनों हाथों से चूतड़ों को फैला रखा था। प्रिया की चूत से पानी टपक रहा था। रोहन कभी चूत चाटता, कभी गांड के छेद में जीभ घुसा देता। प्रिया सिसक रही थी, “आह्ह… भाई… और अंदर… चाट… मेरी गांड चाट…”

रोहन उठा। अपना 9 इंच का मोटा काला लंड निकाला। प्रिया की गांड पर थप्पड़ मारा। जोर का। लाल निशान पड़ गया। फिर दूसरा थप्पड़। प्रिया चीखी लेकिन पीछे नहीं हटी। रोहन ने लंड गांड के छेद पर लगाया और एक झटके में आधा धकेल दिया। प्रिया की आँखें फटी रह गईं। “आआआह्ह… फट गई… धीरे…” लेकिन रोहन नहीं माना। पूरा लंड अंदर घुसा दिया। फिर बर्बरता से धकेलने लगा।
हर धक्के पर प्रिया की गांड हिलती। रोहन उसके बाल पकड़कर पीछे खींच रहा था। “साली रंडी… शादी के बाद भी भाई का लंड याद आता है ना? बोल…” प्रिया हांफते हुए बोली, “हाँ… याद आता है… जीजा का लंड छोटा लगता है… तेरा ही चाहिए…”

रोहन और जोर से चोदने लगा। थप्पड़ पर थप्पड़। प्रिया की गांड लाल हो गई। फिर उसने प्रिया को बिस्तर पर धकेल दिया। प्रिया घोड़ी बनी। रोहन ने उसके दोनों हाथ पीछे बांध दिए अपनी बेल्ट से। फिर गांड में फिर से लंड घुसाया। अब पूरी तरह BDSM मूड में था। एक हाथ से बाल खींचता, दूसरे से चूत में उँगलियाँ घुसाता। प्रिया चीख रही थी लेकिन मना नहीं कर रही थी।

“और मार… फाड़ दे मेरी गांड… मुझे रंडी बना दे…” प्रिया बोल रही थी। रोहन ने थूक लगाकर और जोर लगाया। लंड पूरा अंदर-बाहर हो रहा था। प्रिया की चूत से पानी की धार बह रही थी। रोहन ने अचानक लंड निकाला और प्रिया के मुँह में ठूंस दिया। “चाट अपनी गांड का स्वाद…” प्रिया ने आँखें बंद करके चाटना शुरू कर दिया। गला तक ले गई। आँसू बह रहे थे लेकिन रुकी नहीं।

फिर रोहन ने उसे फिर से घोड़ी बनाकर गांड में डाल दिया। इस बार और बर्बर। हर धक्के पर प्रिया का शरीर आगे सरकता। रोहन ने उसके गले में हाथ डालकर हल्का दबाया। प्रिया की साँसें फूल गईं। आँखें लाल। लेकिन वो और जोर से धक्के ले रही थी। “मार… और जोर से… मुझे मार डाल…”

मैं खिड़की से देख रहा था। मेरा लंड फटने को हो रहा था। गुस्सा और कामुकता दोनों एक साथ। मैंने दरवाजा खटखटाया नहीं। चुपचाप देखता रहा। रोहन ने प्रिया को पलटा। उसकी टाँगें कंधों पर रखीं और चूत में लंड घुसा दिया। अब दोनों छेद बारी-बारी से चोद रहा था। प्रिया बेहोशी की हालत में थी। मुँह से झाग आ रहा था। “भाई… मैं तेरी कुतिया हूँ… हमेशा के लिए…”

रोहन ने आखिरकार प्रिया की गांड में ही झड़ गया। गर्म वीर्य की धार अंदर छोड़ दी। प्रिया काँप रही थी। रोहन ने लंड निकाला तो वीर्य गांड से बाहर बहने लगा। उसने प्रिया के मुँह में लंड देकर साफ करवाया। प्रिया ने आँखों में आँसू लिए हुए पूरा चाट लिया।
रोहन बोला, “अब जा। जीजा को शक न हो। अगली बार और जोर से चोदूंगा। इस बार रस्सियों से बाँधूंगा।” प्रिया ने हँसते हुए कहा, “जैसी मर्जी। लेकिन अगली बार मेरी चूत भी फाड़ना। जीजा तो सिर्फ चोदता है, तू मारता है।”

मैं चुपचाप नीचे उतर आया। बाइक पर बैठकर थोड़ी दूर चला गया। दस मिनट बाद लौटा। दोनों नीचे आ चुके थे। प्रिया की आँखें चमक रही थीं। लेगिंग ठीक से पहनी हुई थी लेकिन गांड में अभी भी वीर्य होगा।
घर वापस आए। रात को प्रिया सो गई तो मैंने उसके मोबाइल चेक किया। रोहन के साथ सैकड़ों गंदे मैसेज। “कल गांड फाड़ना”, “जीजा के सामने उंगली करना”, “मुझे कुतिया बनाकर चोदो”। मैंने सब सेव कर लिया।

अब मैं फैसला कर चुका हूँ। अगली बार जब रोहन आएगा, मैं दोनों को पकड़ूंगा। प्रिया को उसके सामने और बर्बर तरीके से चोदूंगा। उसे रस्सियों से बाँधूंगा। रोहन को मजबूर करूंगा कि वो देखे। फिर दोनों को एक साथ लूंगा। प्रिया की गांड और चूत दोनों फाड़ दूंगा। उसे इतना चोदूंगा कि वो रोहन का नाम भूल जाए। या फिर दोनों को अपने नियंत्रण में लेकर और क्रूर खेल खेलूंगा।
प्रिया अब सिर्फ मेरी बीवी नहीं। वो मेरी रंडी है। और रोहन उसका लंड का भूखा कुत्ता। इस कहानी का अगला अध्याय और खून के आँसू रुलाने वाला होगा। जो पढ़ रहा है, उसका लंड अभी खड़ा होगा।

दोस्तों, उस रात के बाद से मेरे अंदर का जानवर पूरी तरह जाग चुका था। प्रिया को मैंने पहले भी चोदा था, लेकिन अब उसकी हर साँस, हर मुस्कान मुझे रोहन के लंड की याद दिलाती। मैंने फैसला कर लिया था—अगली बार जब ये दोनों मिलेंगे, तो मैं सिर्फ देखने वाला नहीं रहूँगा। मैं उनका मालिक बनूँगा। उनकी साँसों का, उनकी चूत का, उनकी गांड का, उनके दर्द का।

एक हफ्ते बाद मौका मिला। प्रिया ने कहा कि रोहन जोधपुर आ रहा है कुछ काम से। रात को ठहर जाएगा। मैंने मुस्कुराकर हाँ कह दी। अंदर ही अंदर मेरी योजना तैयार थी। घर में एक पुराना स्टोर रूम था—मोटी दीवारें, छोटी खिड़की, लोहे का दरवाजा। वहाँ मैंने पहले से रस्सियाँ, बेल्ट, हैंडकफ, मोमबत्तियाँ, और एक मोटी चमड़े की पट्टी रख दी थी। साथ में कैमरा भी सेट कर दिया था।

शाम को रोहन आया। काली शर्ट, टाइट जीन्स। प्रिया ने उसे देखते ही आँखों में चमक ला दी। खाना खाया, बातें कीं। रात के ग्यारह बजे मैंने कहा कि मुझे ऑफिस का कुछ जरूरी काम है, थोड़ी देर के लिए बाहर जा रहा हूँ। प्रिया की आँखों में राहत थी। रोहन ने भी मुस्कुराकर सिर हिलाया।
मैं निकला, लेकिन घर के पीछे से घूमकर स्टोर रूम के पास छिप गया। पंद्रह मिनट बाद प्रिया रोहन को लेकर उसी रूम में घुसी। दरवाजा बंद किया। मैंने बाहर से ताला जड़ दिया। अब वो दोनों फँस चुके थे।

अंदर घुसते ही मैंने लाइट जलाई। दोनों चौंक गए। प्रिया की साड़ी आधी खुली थी, रोहन का लंड पहले से बाहर। मैंने दरवाजा बंद करके ताला अंदर से भी लगा लिया।
“खेल खत्म,” मैंने ठंडे स्वर में कहा। “अब मेरा खेल शुरू होता है।”
प्रिया काँप उठी। “विक्रम… सुनो…”
मैंने उसके मुँह पर थप्पड़ मारा। जोर का। होठ फट गए। खून निकल आया। “रंडी चुप। आज तू बोलेगी तभी जब मैं अनुमति दूँगा।”

रोहन आगे बढ़ा। मैंने पॉकेट से निकाली हुई लोहे की रॉड उसके घुटने पर दे मारी। वो चीखता हुआ गिर पड़ा। मैंने तुरंत उसके दोनों हाथ पीछे किए और हैंडकफ लगा दिए। फिर रस्सी से पैर बाँध दिए। प्रिया चीखने लगी तो मैंने उसकी साड़ी के पल्लू से उसका मुँह बंद कर दिया।
मैंने प्रिया को दीवार से लगाकर खड़ा किया। उसकी साड़ी नोंचकर फाड़ दी। ब्रा और पैंटी भी। नंगी खड़ी थी—36 के बूब्स, भारी गांड, गीली चूत। मैंने उसकी दोनों कलाई ऊपर की ओर रस्सी से बाँध दी। पैर फैलाकर एंकल्स को फर्श की रिंग से बाँध दिए। अब वो बिल्कुल फैल चुकी थी। कुछ भी छिपाने को नहीं।
रोहन को मैंने कुर्सी पर बैठाया, हाथ-पैर बाँधे। उसका मुँह खुला रखा ताकि वो सब देखे और सुने।

“देख अपनी रंडी को,” मैंने कहा। “आज इसकी गांड और चूत दोनों फटने वाली हैं। और तू सिर्फ देखेगा। अगर आँखें बंद की तो आँखें निकाल दूँगा।”
मैंने प्रिया की गांड पर पहला थप्पड़ मारा। चमड़े की आवाज गूंजी। लाल निशान। दूसरा, तीसरा, चौथा। प्रिया की चीखें रस्सी में दबकर निकल रही थीं। दस थप्पड़ों के बाद उसकी गांड जल रही थी। मैंने उँगलियाँ चूत में घुसाईं—चार उँगलियाँ एक साथ। गीली थी। बावजूद दर्द के उसका शरीर गद्दाार था।

“साली, रोहन का लंड याद आ रहा है ना?” मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “बोल।”
मुँह की रस्सी ढीली की। प्रिया हांफते हुए बोली, “हाँ… याद आ रहा है… माफ करो…”
मैंने फिर से मुँह बंद किया। अब मोमबत्ती जलाई। गर्म मोम उसकी पीठ पर गिराया। फिर बूब्स पर। फिर सीधे चूत के ऊपर। प्रिया का शरीर ऐंठ गया। चीख इतनी तेज थी कि रस्सी भी दबा न पाई। रोहन की आँखों में आँसू थे, लेकिन लंड खड़ा था। गद्दार कुत्ता।

मैंने अपना 8.5 इंच का लंड निकाला। प्रिया की गांड के लाल छेद पर लगाया। थूक भी नहीं लगाया। एक ही झटके में आधा धकेल दिया। प्रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। मैंने और जोर लगाया—पूरा अंदर। फिर बर्बरता से धकेलने लगा। हर धक्के पर उसके चूतड़ थर्राते। मैंने उसके गले में हाथ डालकर दबाया। साँसें फूलने लगीं। चेहरा लाल। आँखें उभरीं। फिर भी मैं नहीं रुका।
“रोहन को देख,” मैंने उसके कान में गुर्राया। “तेरे भाई को बता कि उसकी रंडी की गांड कितनी टाइट है।”
मुँह खोला। प्रिया रोते हुए बोली, “भाई… मेरी गांड फट रही है… विक्रम बहुत मोटा है… बचाओ…”
रोहन कुछ नहीं बोल पाया। मैंने प्रिया के मुँह में अपनी उँगलियाँ ठूंस दीं। “चाट। अपनी गांड का स्वाद चाट।”

मैंने लंड निकालकर रोहन के पास ले गया। “तेरा लंड अभी तक खड़ा है। गद्दार। इसे चूस।” प्रिया के मुँह से रस्सी हटाई और उसका चेहरा रोहन के लंड पर दबा दिया। “चूस रंडी। अपने प्रेमी का लंड चूस जबकि तेरी गांड में मेरा लंड है।”
प्रिया रोते-रोते चूसने लगी। मैंने पीछे से फिर गांड में धकेल दिया। अब डबल मजा। एक तरफ प्रिया रोहन को चूस रही थी, दूसरी तरफ मैं उसकी गांड फाड़ रहा था। थप्पड़ पड़ रहे थे। कभी बूब्स दबाता, कभी चूत में उँगलियाँ घुसाता।
मैंने रस्सी और कसी। प्रिया के शरीर पर जगह-जगह लाल निशान। फिर मैंने उसे नीचे उतारा। चारों तरफ रस्सी से बाँधकर फर्श पर लिटा दिया—हाथ-पैर फैले, बिल्कुल बेबस। रोहन को उसके ऊपर झुकाया। “अब तू चोद। लेकिन मेरी अनुमति से।”

रोहन का लंड प्रिया की चूत में घुसा। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर से धकेले। “जोर से मार। फाड़ दे इसकी चूत।” रोहन मजबूरन धकेल रहा था। प्रिया चीख रही थी। मैंने अपना लंड प्रिया के मुँह में ठूंस दिया। अब वो दोनों तरफ से भरी हुई थी।
घंटे भर तक ये सिलसिला चला। कभी मैं गांड में, रोहन चूत में। कभी उलटा। कभी दोनों एक साथ एक ही छेद में कोशिश। प्रिया बेहोशी के करीब पहुँच चुकी थी। शरीर पर पसीना, आँसू, थूक, वीर्य सब मिला हुआ।

आखिर में मैंने रोहन को हटाया। प्रिया की दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और चूत में इतनी बर्बरता से झड़ गया कि वीर्य बाहर निकलकर फर्श पर गिरने लगा। फिर गांड में भी एक दौर और। रोहन को मजबूर किया कि वो प्रिया के चेहरे पर झड़े। प्रिया की आँखें, बाल, मुँह सब सफेद हो गए।
मैंने दोनों को अभी भी बाँधे रखा। कैमरा ऑफ किया। प्रिया से कहा, “आज से तू सिर्फ मेरी कुतिया है। रोहन तेरा कुत्ता। जब मैं कहूँगा, तभी चुदोगी। और अगर बिना अनुमति के फिर मिली, तो अगली बार सिर्फ चोदना नहीं—नाखून उधेड़ूँगा, सिगरेट बुझाऊँगा, और दोनों को सड़क पर नंगा छोड़ दूँगा।”

प्रिया रोते हुए सिर हिलाती रही। रोहन की आँखों में डर था। मैंने उन्हें सुबह तक वहीं छोड़ दिया—बाँधे हुए, नंगे, गंदे।
सुबह जब खोला तो प्रिया चल भी नहीं पा रही थी। गांड और चूत सूजी हुई, निशानों से भरी। मैंने उसे नहलाया, दवा लगाई, लेकिन आँखों में वही भूख छोड़ दी। रोहन को बाहर निकालते समय उसके कान में कहा, “अगली बार और क्रूर होगा। तैयार रह।”

अब घर में एक नया नियम है। प्रिया रोज़ रात को मेरे पैरों के पास घुटनों के बल बैठती है। गर्दन में पतली चमड़े की पट्टा। जब मैं कहता हूँ “कुतिया”, वो अपनी गांड ऊँची करती है। जब कहता हूँ “चाट”, वो मेरा लंड और गांड दोनों चाटती है। कभी-कभी मैं रोहन को फोन करके बुलवा लेता हूँ। तब तीनों का खेल और बर्बर हो जाता है—रस्सियाँ, थप्पड़, मोम, गला दबाना, और प्रिया की चीखें।

ये सिलसिला रुकने वाला नहीं। प्रिया अब सिर्फ मेरी बीवी नहीं रही। वो मेरी संपत्ति है। मेरी रंडी। मेरी दर्द की पुतली। और हर रात जब मैं उसकी फटी हुई गांड में लंड धकेलता हूँ, तो वो एक ही बात दोहराती है—“मालिक… और जोर से… मुझे तोड़ दो…”
दोस्तों, अगर तुम्हारा लंड अभी तक नहीं गिरा, तो समझ लो कि ये कहानी तुम्हारे अंदर तक उतर चुकी है। क्योंकि असलियत में दर्द और मजा का ये खेल कभी खत्म नहीं होता। बस और गहरा होता जाता है।

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