राजस्थान मे शादी मे लड़की को चोदा

शादीशुदा वरुण ने 22 साल की रिया को अपने जाल में फँसाया। दर्द, खून और जबरदस्ती के खेल में उसकी देह टूटती गई, पर वह खुद और गहरी गुलामी माँगती रही। हर रात नई यातना।

मेरा नाम वरुण है। उम्र 36 साल। मुंबई के अंधेरी वेस्ट में रहता हूँ। शादीशुदा हूँ, लेकिन पत्नी और बच्चे विदेश में रहते हैं। व्यापार के सिलसिले में मैं अक्सर बाहर निकलता रहता हूँ।
चार साल पहले की बात है। अप्रैल का महीना था। गर्मी अपने चरम पर थी। मेरी मौसी की बेटी की शादी राजस्थान के एक छोटे से शहर उदयपुर के पास एक गाँव में तय हुई थी। वहाँ पहुँचते ही महसूस हुआ कि पूरा इलाका पैसे वालों का है। बड़े-बड़े मकान, निजी जमीन, और शादी का आयोजन घर से थोड़ी दूर एक खुले मैदान में हो रहा था।

वहाँ पहुँचते ही सबसे पहले नजर एक लड़की पर पड़ी। नाम था रिया। उम्र 22 साल। लंबी, गोरी, शरीर इतना कसा हुआ जैसे जिम से निकली हो। कमर पतली, छातियाँ भारी और गोल, और पीछे की तरफ गोल-गोल कसी हुई गांड। उसने टाइट जींस और छोटी सी टॉप पहनी हुई थी। पहली नजर में ही उसने मुझे घूरा। मैंने भी आँखें नहीं फेरों।
रात को मैं अपने कमरे में लेटा था। गर्मी से पसीना बह रहा था। तभी दरवाजा धीरे से खुला और रिया अंदर आ गई। उसने दरवाजा बंद किया और बिना कुछ बोले मेरे बिस्तर के पास आकर खड़ी हो गई।

“अंकल… आप मुझे पसंद हो गए,” उसने सीधे कहा।
मैं उठा और बैठा। “तुम जानती हो मैं शादीशुदा हूँ?”
“हाँ। लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता।”
उसने अपनी टॉप उतार दी। ब्रा के बिना उसकी भारी छातियाँ बाहर आ गईं। निप्पल काले और कड़े थे। फिर जींस और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। बालों वाली चूत सामने थी, होंठ मोटे और सूजे हुए।

मैंने उसे अपने पास खींचा। उसके बालों को मुट्ठी में कसकर पकड़ा और उसके मुँह में अपनी जीभ ठूस दी। वह चीखने वाली थी लेकिन मैंने उसका मुँह और जोर से दबाया। उसके होंठ काटे, जीभ चूसी, और गर्दन पर दाँत गड़ा दिए। वह काँप रही थी।
“अंकल… दर्द हो रहा है…”
“चुप रह। आज तुझे सिखाना है।”
मैंने उसे जबरदस्ती बिस्तर पर लिटाया। उसके दोनों हाथ ऊपर कर दिए और अपनी बेल्ट से बाँध दिए। पैर अलग-अलग फैलाकर टाँगों को भी बाँध दिया। वह पूरी तरह फैल गई थी। चूत खुली और गीली चमक रही थी।

मैंने अपनी पैंट उतारी। लंड पहले से ही सख्त और मोटा खड़ा था। उसकी चूत पर थूक दिया और बिना किसी तैयारी के दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं। वह चीख उठी।
“आह… अंकल… धीरे…”
मैंने उँगलियाँ और जोर से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। तीसरी उँगली भी डाल दी। उसकी चूत फैल रही थी, खून की हल्की धार भी निकल आई। वर्जिन थी। मैंने देखा और मुस्कुराया।
“देख, खून निकल रहा है। आज तेरी सील फूटने वाली है।”

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मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर धकेल दिया। वह जोर से चिल्लाई। आँखों से आँसू बहने लगे। मैं रुका नहीं। पूरा लंड अंदर तक घुसाया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उसकी गांड बिस्तर से उठ रही थी।
“चुपचाप सह। आज तेरी गांड भी फाड़ूँगा।”
मैंने उसके मुँह में अपना अँगुठा ठूस दिया ताकि वह चीख न सके। उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाया, निप्पल को मोड़ा और खींचा। दर्द से वह काँप रही थी लेकिन उसकी चूत और गीली हो रही थी।

मैंने उसे पलटा। हाथ-पैर बँधे होने की वजह से वह ठीक से करवट नहीं ले पाई। मैंने उसकी गांड के दोनों गालों को फैलाया। बीच में गुलाबी छेद दिख रहा था। मैंने थूक लगाया और लंड को गांड के छेद पर रखा।
“नहीं… अंकल… वहाँ मत…”

मैंने एक जोर का धक्का मारा। आधा लंड उसकी गांड में घुस गया। वह दर्द से चीखने लगी। मैंने पूरा लंड अंदर धकेल दिया। उसकी गांड फट रही थी। खून और थूक मिलाकर गीला हो गया था। मैंने जोर-जोर से गांड चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ वह सिसक रही थी।
मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में बोला, “आज से तू मेरी रंडी है। जब बोलूँगा, चूत खोलेगी। समझी?”
उसने सिर हिलाया। आँसू बह रहे थे लेकिन वह मना नहीं कर रही थी।

मैंने उसे फिर से सीधा किया। इस बार चूत और गांड दोनों में बारी-बारी से लंड घुसाया। एक हाथ से उसके गले को दबाया। साँस फूलने लगी तो भी नहीं छोड़ा। दूसरा हाथ उसकी चूत पर था, क्लिट को जोर से रगड़ रहा था।
वह झड़ गई। शरीर अकड़ गया, चूत से पानी की धार निकलने लगी। मैं रुका नहीं। उसी हालत में उसे और जोर से चोदता रहा। दूसरी बार झड़ी तो वह बेहोशी की कगार पर थी।

मैंने अपना लंड निकाला और उसके मुँह में ठूस दिया। “चाट। सारा खून और पानी चाट।”
उसने आँखें बंद करके चाटना शुरू कर दिया। मैंने उसके बाल पकड़कर मुँह में और गहराई तक लंड घुसाया। गला भर गया तो भी नहीं निकाला। आखिर में उसके मुँह में ही झड़ गया। वह खांस रही थी, वीर्य उसके चेहरे और छातियों पर गिर रहा था।
मैंने उसके बँधन खोले। वह बिस्तर पर लेटी हुई काँप रही थी। चूत और गांड दोनों से खून की धारें बह रही थीं।
“अब उठ। नहा ले। और रात को फिर आना।”
वह धीरे-धीरे उठी और लड़खड़ाते हुए बाहर चली गई।

अगले दिन शादी का दिन था। दिन भर मैं काम में व्यस्त रहा। शाम को जब सब लोग व्यस्त थे, रिया फिर मेरे पास आई। इस बार वह और भी बोल्ड थी। उसने खुद अपनी स्कर्ट ऊपर की और पैंटी नीचे खींच दी।
“अंकल… आज और जोर से करना। कल वाली दर्द अभी भी महसूस हो रही है।”

मैंने उसे दीवार के साथ खड़ा किया। उसके दोनों हाथ दीवार पर रखवाए। पीछे से उसकी गांड में फिर से लंड घुसा दिया। इस बार वह खुद गांड आगे करके धक्के ले रही थी। मैंने उसके गले में अपना हाथ फँसाया और जोर से दबाया। साँस रुकने लगी तो भी धक्के नहीं रुके।
मैंने उसकी चूत में तीन उँगलियाँ डाल दीं और गांड में लंड। दोनों जगह एक साथ भर गया था। वह चीख रही थी लेकिन आवाज दबा रही थी।
“रंडी… तेरी यह गांड अब मेरी है। जब चाहूँगा फाड़ूँगा।”

मैंने उसे फर्श पर गिरा दिया। चारों तरफ से घेर लिया। उसके मुँह में, चूत में, गांड में बारी-बारी से लंड ठूसा। उसके स्तनों को दाँतों से काटा। निप्पल पर निशान पड़ गए। उसकी जाँघों पर थप्पड़ मारे। लाल निशान उभर आए।
रात भर मैंने उसे इस्तेमाल किया। जब वह थककर गिर गई तो भी नहीं छोड़ा। सुबह होते-होते उसकी चूत और गांड दोनों सूज गए थे। चलने में तकलीफ हो रही थी।

तीसरे दिन मैं वापस मुंबई जा रहा था। रिया स्टेशन तक आई। आँखों में आँसू थे।
“अंकल… फिर कब मिलोगे?”
मैंने उसके गाल पर थप्पड़ मारा। “जब बोलूँगा तब आएगी। और हाँ, कोई और लड़का छूएगा तो उसकी और तेरी दोनों की गांड फाड़ दूँगा।”
उसने सिर झुका लिया। “जी अंकल।”
ट्रेन में बैठते हुए मैंने उसके फोन नंबर सेव कर लिया। मुंबई पहुँचकर मैंने उसे मैसेज किया—
“रात को नंगी फोटो भेज। चूत और गांड दोनों खुली हुई।”
कुछ देर बाद फोटो आ गई। वह बिस्तर पर लेटी हुई थी। दोनों पैर फैलाए हुए। चूत अभी भी लाल और सूजी हुई थी। गांड के छेद पर खून के निशान थे।

मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया—
ट्रेन मुंबई पहुँची तो मैंने सीधे घर जाकर स्नान किया। शरीर पर अभी भी रिया की गंध और खून के हल्के निशान थे। फोन पर उसकी भेजी हुई तस्वीरें बार-बार खोलकर देख रहा था। चूत लाल, गांड फटी हुई, आँखों में डर और इच्छा का मिश्रण।
रात के 11 बजे मैंने उसे कॉल किया।
“नंगी हो जा। कैमरा ऑन कर।”

उसने तुरंत वीडियो कॉल स्वीकार कर लिया। कमरे की रोशनी मंद थी। वह बिस्तर पर बैठी थी, टॉप और स्कर्ट अभी भी पहने हुए।
“उतार सब। अभी।”
उसने कपड़े उतारे। भारी छातियाँ बाहर आ गईं। निप्पल अभी भी काले निशानों से भरे थे। चूत के बाल नहीं कटे थे, गीली चमक रही थी।
“उंगलियाँ डाल। दो। जोर से।”
उसने अपनी चूत में दो उंगलियाँ घुसा दीं। दर्द से चेहरा सिकुड़ गया लेकिन वह रुक नहीं रही थी। मैंने देखा और लंड बाहर निकाल लिया।
“तीसरी भी डाल। और गांड में एक।”

वह हिचकिचाई। मैंने आवाज सख्त कर दी।
“डाल। नहीं तो कल तेरे घर आकर सबके सामने चोदूँगा।”
उसने कांपते हाथ से तीसरी उंगली चूत में और एक उंगली गांड में डाल दी। आँखों से आँसू बहने लगे। मैंने उसे आदेश दिया कि वह कैमरे के सामने घुटनों के बल बैठे, गांड ऊपर करे और दोनों छेद फैलाकर दिखाए। वह मान गई। फटी हुई गांड साफ दिख रही थी।
“अब सो जा। कल सुबह 6 बजे कॉल करूँगा। उस समय तक उंगलियाँ अंदर रखे रहना।”
उसने सिर हिलाया। कॉल कट गया।

अगले तीन दिन मैंने उसे इसी तरह रात-रात भर टॉर्चर किया। कभी बर्फ की डंडियों से निप्पल दबवाए, कभी रबर बैंड से चूत के होंठ बाँधकर खींचवाए, कभी उसे अपने ही पेशाब में बैठने का आदेश दिया। हर बार वह रोती थी, लेकिन मना नहीं करती थी।
चौथे दिन मैंने फैसला किया। बिजनेस मीटिंग का बहाना बनाकर मैं फिर उदयपुर के लिए निकल पड़ा। रिया को मैसेज किया—
“आज रात 10 बजे उसी कमरे में नंगी लेटी रहना जहाँ पहली बार चोदी थी। दरवाजा खुला छोड़ देना। कोई आवाज निकाली तो जिंदा नहीं छोड़ूँगा।”

रात के 9:45 पर मैं वहाँ पहुँचा। कमरा अंधेरा था। रिया बिस्तर पर पूरी नंगी लेटी हुई थी। हाथ-पैर फैलाए हुए। चूत और गांड अभी भी सूजे हुए थे।
मैंने दरवाजा बंद किया और लॉक लगा दिया। बैग से रस्सी, चमड़े का पट्टा, मोमबत्ती और एक मोटी लोहे की रॉड निकाली।
“उठ। दीवार के साथ खड़ी हो।”
वह उठी। मैंने उसके दोनों हाथ ऊपर करके रस्सी से बाँध दिए। पैर भी अलग-अलग फैलाकर बाँध दिए। अब वह पूरी तरह फैल चुकी थी।

मैंने मोमबत्ती जलाई। गर्म मोम उसकी छातियों पर टपकाने लगा। निप्पल पर मोम गिरा तो वह जोर से काँपी लेकिन आवाज नहीं निकाली। मैंने मोम चूत के ऊपर भी गिराया। गर्म मोम उसके खुले छेद में घुस रहा था। दर्द से उसका शरीर ऐंठ रहा था।
फिर मैंने चमड़े का पट्टा निकाला। उसकी गांड पर जोर का वार किया। लाल निशान उभर आया। दूसरा वार। तीसरा। लगातार बीस वार किए। गांड लाल हो गई, कुछ जगहों से खून की बूंदें निकलने लगीं। वह सिसक रही थी लेकिन चुप थी।

मैंने उसकी चूत में लोहे की रॉड घुसा दी। ठंडी और मोटी रॉड अंदर तक चली गई। मैंने रॉड को घुमाया, अंदर-बाहर किया। उसकी चूत से खून और पानी दोनों निकल रहे थे। फिर वही रॉड उसकी गांड में ठूस दी। पूरा अंदर तक। उसने आँखें बंद कर लीं। आँसू बह रहे थे।
मैंने अपना लंड निकाला और उसके मुँह में जबरदस्ती ठूस दिया। गले तक। वह घुटने टेक रही थी, लेकिन हाथ बँधे होने की वजह से कुछ कर नहीं पा रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुँह में और गहराई तक लंड घुसाया। साँस फूलने लगी तो भी नहीं निकाला। जब वह लगभग बेहोश होने वाली थी तब निकाला और उसके चेहरे पर थूक दिया।
“चाट।”

उसने जीभ निकालकर चाटा।
मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। रस्सी नहीं खोली। उसके ऊपर चढ़ गया और एक झटके में पूरा लंड चूत में धकेल दिया। खून की धार निकल आई। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ उसका शरीर आगे-पीछे हो रहा था। उसके गले को दोनों हाथों से दबाया। साँस पूरी तरह बंद हो गई। चेहरा लाल हो गया। आँखें ऊपर की तरफ घूमने लगीं। तब जाकर मैंने हाथ ढीला किया। वह जोर से साँस लेने लगी।

इसी हालत में मैंने उसे पलटा। गांड में लंड घुसाया। इस बार पूरा अंदर तक। उसकी गांड फट रही थी। खून बिस्तर पर फैल गया। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में बोला—
“तेरी यह गांड अब सिर्फ मेरे लंड के लिए है। कोई और छुएगा तो काट दूँगा।”
मैंने घंटों तक उसे चोदा। चूत, गांड, मुँह—तीनों छेद बारी-बारी से। कभी उसके स्तनों को दाँतों से काटा यहाँ तक कि खून निकल आया। कभी उसकी जाँघों पर सिगरेट के जलते हुए सिरे से निशान बनाए। वह रो रही थी, काँप रही थी, लेकिन हर बार “और करो अंकल” कह रही थी।
सुबह के 4 बजे जब मैं थक गया तो उसके ऊपर लेट गया। लंड अभी भी उसकी चूत में था। वीर्य अंदर ही छोड़ दिया। बाहर निकालने नहीं दिया।

“अब सो। दिन में उठकर नहा लेना। खून साफ करना। शाम को फिर से तैयार रहना।”
वह थककर सो गई। शरीर पर नीले-लाल निशान, खून के धब्बे, मोम के जमे हुए टुकड़े।
दोपहर में मैंने उसे फिर जगाया। इस बार और क्रूर। उसे बाथरूम में ले जाकर फर्श पर बैठाया। उसके सिर पर खड़े होकर पेशाब किया। उसके मुँह में, छातियों पर, चूत पर। उसने आँखें बंद करके सब सह लिया। फिर मैंने उसे पेशाब में ही लेटा दिया और उसी हालत में फिर से चोदा।

शाम को मैंने एक नया खेल शुरू किया। उसके निप्पल पर क्लिप लगाई। क्लिप इतनी कसी हुई थी कि खून रुकने लगा। चूत के होंठों को भी क्लिप से दबाया। फिर रस्सी से उसके शरीर को इस तरह बाँधा कि वह सिर्फ घुटनों के बल रह सके। गांड ऊपर। मैंने उसकी गांड में मोटी मोमबत्ती ठूस दी और जला दी। गर्म मोम अंदर पिघलकर उसकी आँतों में जा रहा था। वह दर्द से चीखने लगी।
“चीख। आज कोई नहीं सुनेगा।”

मैंने उसके मुँह में कपड़ा ठूस दिया। फिर पट्टे से उसकी गांड और जाँघों पर बेतहाशा वार करने लगा। हर वार के साथ मोमबत्ती और अंदर चली जा रही थी। आधा घंटा लगातार पिटाई की। जब मोमबत्ती पूरी तरह अंदर चली गई तब निकाली। उसकी गांड से मोम और खून का मिश्रण बह रहा था।
रात भर यही सिलसिला चला। मैंने उसे इतना चोदा कि वह बेहोश हो गई। सुबह जब होश आया तो वह मेरे सीने से लिपटी हुई थी। आँखों में डर नहीं, एक अजीब सी भूख थी।
“अंकल… मुझे मार डालो लेकिन छोड़ो मत।”

मैंने उसके बाल सहलाए और फिर से उसके गले पर हाथ रख दिया।
“मारूँगा नहीं। लेकिन जिंदा भी नहीं छोड़ूँगा। तू मेरी संपत्ति है। जब तक चाहूँगा इस्तेमाल करूँगा। तोड़ूँगा। फाड़ूँगा। और तू सिर्फ सहेगी।”
उसने आँखें बंद कर लीं और मेरे हाथ को अपने गले पर और जोर से दबाने के लिए दबाया।
मैंने मुस्कुराते हुए लंड फिर से उसकी फटी हुई गांड में धकेल दिया।
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