24 साल का राहुल अपनी 22 साल की पड़ोसन प्रिया को बांधकर, थप्पड़ मारकर, गला दबाकर और गांड फाड़कर बेरहमी से चोदता है। छत, बाथरूम, रिजॉर्ट में जोखिम भरी जंगली BDSM चुदाई। दर्द और वासना की अनोखी दास्तान chudai stories।
दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और मैं पुणे के कालेवाड़ी इलाके में रहता हूँ। मेरी उम्र 24 साल है, शरीर एथलेटिक, लंबा कद और वो लंड जो किसी भी लड़की की चूत को फाड़ने के लिए मशहूर है। मेरे पड़ोस में एक किराएदार परिवार रहता था – प्रिया, उसकी उम्र 22 साल, फिगर 36-24-38, गोरी चिकनी त्वचा, बड़े-बड़े चुचे और मोटी गोल गांड। वो कॉलेज जाती थी लेकिन अंदर से पूरी चुदासी रंडी थी। उसका भाई विक्रम, 20 साल का, ज्यादातर बाहर रहता था। प्रिया की मम्मी घर संभालती थीं।
हम दोनों की मुलाकात पहले ही हो चुकी थी। एक शाम जब मैं छत पर सिगरेट पी रहा था, प्रिया अपनी बालकनी में खड़ी थी। उसने टाइट टॉप और शॉर्ट्स पहने थे। नजरें मिलीं तो उसने शरारती मुस्कान दी। बस, बात शुरू हुई। कुछ दिनों में हमारी चैट्स सेक्स चैट्स में बदल गईं। वो मुझे अपनी चूत की तस्वीरें भेजती, उंगलियां डालकर सेल्फी लेती।
मैं उसे अपना मोटा 8 इंच का लंड दिखाता। फिर एक दिन मौका मिला। उसके घर वाले बाहर गए थे। मैं घुसा और उसकी चूत को पहले बार चोदा। वो चीखी, तड़पी, लेकिन मांगी और भी ज्यादा। उसके बाद हमारी चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया।
घर के लोग दिन भर काम पर निकल जाते तो हम दोनों किसी न किसी बहाने एक-दूसरे के घर घुसकर रगड़-रगड़ कर चुदाई करते।
लेकिन सामने वाले फ्लैट्स में रहने वाले लोगों की नजरें हमेशा सतर्क रहतीं। ज्यादातर मैं ही उसके घर जाता। उसके कमरे में, बेड पर, फर्श पर, सोफे पर – हर जगह उसकी चूत में अपना लंड घुसेड़ता। प्रिया बिल्कुल बेजोड़ चुदासी थी। वो चोदते वक्त गाली देती, “फाड़ दो मेरी चूत को राहुल… और जोर से… रंडी बना दो मुझे।”
एक दिन उसकी मम्मी मार्केट गई हुई थीं। प्रिया ने मुझे मैसेज किया – “आ जा जल्दी, चूत जल रही है।” मैं तुरंत उसके घर पहुंच गया। दरवाजा बंद किया और उसे दीवार से चिपकाकर उसके होंठ चूसने लगा।
उसके चुचों को जोर से मसल रहा था कि तभी बाहर विक्रम की आवाज आई। “दीदी, मैं आ गया!” मेरी रगों में खून जम गया। प्रिया का चेहरा सफेद पड़ गया। मैं बाथरूम में घुस गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। विक्रम अंदर आया। प्रिया किसी तरह बहाना बनाकर उसे संभाल रही थी।
मैं बाथरूम में खड़ा पसीने से तर था। तभी प्रिया का मैसेज आया – “कुछ करो वरना सब बर्बाद!” मैंने तुरंत अपने एक दोस्त को विक्रम का नंबर भेजा और कहा कि कोरियर का फोन कर दो। दोस्त ने कॉल किया। विक्रम नीचे चला गया। जैसे ही वो बाहर निकला, मैं बाथरूम से बाहर निकला, चारों तरफ नजर दौड़ाई और तेजी से अपने घर भाग गया। प्रिया ने राहत की सांस ली।
इस घटना के बाद हम और ज्यादा सावधान हो गए। लेकिन प्रिया की चूत भूखी थी। वो रोज फोन करके कहती, “चलो होटल चलते हैं।” होटल जाना खतरनाक था। मैंने सोचा घर पर ही बुलाऊं, लेकिन टाइमिंग मैच नहीं कर रही थी। मेरे घर वाले 3 बजे तक आ जाते थे और उसकी मम्मी ज्यादातर घर पर रहती थीं। इस तरह 15 दिन बीत गए। हम दोनों के जननांग तड़प रहे थे। लंड और चूत मिलने को बेकरार।
एक दिन कॉलेज की छुट्टी थी। पूरा इलाका शांत था। मैं देर से उठा। मेरा छोटा भाई घर पर था और विक्रम भी अपने घर पर। मैं ब्रश करके छत पर मुंह धो रहा था। तभी प्रिया अपने घर से निकली, दरवाजा खुला छोड़कर बाथरूम में नहाने चली गई। बाथरूम की वेंटीलेटर वाली खिड़की ठीक मेरी तरफ थी। मैंने उसकी कामुक “आह… उफ्फ…” की आवाजें सुनीं। वो जानबूझकर अपनी उंगलियां चूत में डालकर हिल रही थी और आवाजें निकाल रही थी ताकि मैं सुन सकूं।
मेरा लंड खड़ा हो गया। लेकिन घर पर लोग थे। विक्रम मेरे पास आया और बोला, “चल यार लैपटॉप पर मूवी देखते हैं।” मैंने टालने की कोशिश की, “मुझे काम है, दोस्त के घर जा रहा हूं।” वो चला गया। उसकी मम्मी भी नीचे चली गईं। प्रिया बाथरूम में नंगी थी। तभी उसका वीडियो कॉल आया। स्क्रीन पर वो पूरी नंगी, चूत में दो उंगलियां डाले हुए, स्तन दबाती हुई मुझे घूर रही थी। “आ जा राहुल… चोद मुझे… मैं मर रही हूं।”
मैंने हिम्मत जुटाई। चारों तरफ देखा, कोई नहीं। धीरे से उसके घर घुसा और बाथरूम में दाखिल हो गया। कुंडी लगाई और पलटा। प्रिया ने झपटकर मेरे होंठों को काटते हुए चूम लिया। वो बिल्कुल नंगी थी – उसके बड़े-बड़े 36 साइज के स्तन, गुलाबी चुचियां खड़ी, चूत से रस टपक रहा था। मैंने उसे जोर से बाल पकड़कर घुटनों पर बैठा दिया। “चूस रंडी, आज तेरी चूत फाड़ दूंगा।”
प्रिया ने मेरी पैंट खींची, लंड बाहर निकाला और मुंह में ले लिया। वो इतनी जोर से चूस रही थी कि लग रहा था लंड ही निगल जाएगी। मैंने उसकी गर्दन पकड़कर गहरी थ्रोट दी। वो उबकियां ले रही थी लेकिन रुकी नहीं। “हां… गला फाड़… मेरे लंड का गुलाम बन जा।”
मैंने उसके सिर को जोर-जोर से पीछे-आगे किया। उसके आंसू निकल आए, थूक लंड पर बह रहा था। कुछ देर बाद मैं उसके मुंह में ही झड़ गया। वो सारा वीर्य निगल गई और लंड चाटकर साफ किया।
लेकिन मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने उसे खड़ा किया, दीवार से सटाया, मुंह दीवार की तरफ, गांड मेरी तरफ। “आज तेरी गांड भी मारूंगा।” उसने कहा, “जो मन करे करो… बस चोदो।” मैंने उसके बाल खींचे, गाल पर जोरदार थप्पड़ मारा। “चुप रंडी, आवाज निकाली तो मुंह में लंड ठूंस दूंगा।” फिर मैंने लंड पर थूक लगाया और एक झटके में आधी चूत में घुसा दिया। वो तड़प उठी लेकिन मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया।
“आह्ह्ह… फट गई… धीरे…” लेकिन मैंने सुना नहीं। दूसरे झटके में पूरा 8 इंच लंड उसकी टाइट चूत में उतार दिया। उसकी चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी। मैंने तेज-तेज धक्के मारे। हर धक्के पर उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके गले को दबाया, दूसरे से गांड पर जोरदार चपतें मारीं। “मारो… और जोर से… मैं तुम्हारी गुलाम हूं राहुल…” वो फुसफुसा रही थी।
मैंने उसे घुटनों पर बैठाया, डॉगी स्टाइल में चोदा। बाल खींचते हुए, गले दबाते हुए, थप्पड़ मारते हुए। बाथरूम छोटा था, हर धक्के पर दीवार से टकरा रही थी। मैंने उसके स्तनों को इतनी जोर से मसल कि लाल निशान पड़ गए। फिर मैंने उसे उठाकर वॉशबेसिन पर बिठाया, पैर फैलाए और फिर से घुसा। “देख कितनी गीली है तेरी चूत… 15 दिन बाद मिली है ना रंडी?”
प्रिया चीखना चाहती थी लेकिन मैं उसके मुंह में उंगलियां ठूंस देता। हम दोनों पसीने से तर थे। मैंने उसे चोदते हुए पूछा, “वो शाम को आने वाला लड़का कौन है?” वो हांफते हुए बोली, “मेरा कजिन अमित… बस मिलने आता है।” मैंने क्रूर मुस्कान दी, “अच्छा… आज तेरी चूत मेरी है।” मैंने रफ्तार बढ़ाई। लगभग 15 मिनट तक बिना रुके चोदा। आखिर में उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया। वीर्य निकलकर उसकी जांघों पर बह रहा था।
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प्रिया नीचे बैठ गई और मेरे लंड को फिर चूसने लगी। साफ करके बोली, “फिर कभी ऐसी चुदाई चाहिए।” मैंने उसके बाल पकड़कर कहा, “अगली बार तेरी गांड फाड़ूंगा। तैयार रहना।” मैंने कपड़े पहने, उसे एक क्रूर किस दिया और चुपके से घर लौट गया।
इस घटना के बाद हमारी चुदाई और भी खतरनाक हो गई।
एक दिन जब उसके घर वाले सो रहे थे, मैं छत से कूदकर उसके कमरे में घुसा। उस रात मैंने उसे बेड पर बांध दिया। हाथ-पैर बेड से बंधे, आंखों पर पट्टी। मैंने उसके पूरे शरीर पर मोमबत्ती की गर्म बूंदें डालीं। वो तड़प रही थी। फिर बेल्ट से गांड पर मारते हुए चोदा। “राहुल… मार डालोगे क्या… हां… और मारो…”
मैंने उसकी चूत में वाइब्रेटर डाला और खुद उसकी गांड में लंड घुसाया। डबल पेनेट्रेशन। वो चीख रही थी लेकिन मुंह में गैग था। मैंने उसके स्तनों पर चुटकियां काटीं, गले को दबाया, बाल खींचे। वो कई बार झड़ गई। आखिर में मैंने उसकी गांड में झड़कर उसे रिलीज किया। वो थककर बिस्तर पर पड़ी रही, शरीर पर निशान, चूत और गांड से वीर्य निकल रहा था।
हमारी ये क्रूर चुदाई का सिलसिला महीनों चला। कभी मेरे घर की छत पर, कभी उसकी बालकनी में अंधेरे में, कभी कार में। प्रिया अब पूरी तरह मेरी सेक्स स्लेव बन चुकी थी। वो मेरे हर आदेश का पालन करती – नंगी होकर घूमना, पब्लिक में उंगलियां डलवाना, मेरे लंड पर हर समय तैयार रहना।
एक शाम हम दोनों पार्क के पीछे गए। वहां मैंने उसे घुटनों पर बैठाकर मुंह चुदाया। फिर पेड़ से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। कोई आ जाता तो क्या होता, हमें परवाह नहीं थी। उसकी चीखें दबाने के लिए मैं उसके मुंह पर हाथ रखता और और जोर से धक्के मारता।
हमारी कहानी आज भी जारी है। पुणे की इन गलियों में हमारी क्रूर, बेरहम, जंगली चुदाई का सिलसिला चलता रहता है। प्रिया कहती है, “तुम्हारे बिना मेरी चूत सूख जाती है।” और मैं कहता हूं, “तो तैयार रह, आज फिर फाड़ने वाला हूं।”
दोस्तों, उस दिन के बाद प्रिया पूरी तरह टूट चुकी थी। लेकिन टूटने के बाद वो और भी खतरनाक हो गई थी।
“तो तैयार रह, आज फिर फाड़ने वाला हूं,” मैंने कहा था। उसी शाम 7 बजे उसने मैसेज किया – “छत पर आ। मम्मी सो रही हैं। विक्रम बाहर गया है।”
मैं चुपके से छत पर पहुंचा। अंधेरा था, सिर्फ दूर की स्ट्रीट लाइट की हल्की रोशनी आ रही थी। प्रिया पहले से वहां खड़ी थी – सिर्फ एक काला ट्रांसपेरेंट नाइट गाउन पहने, अंदर कुछ नहीं। जैसे ही मैं पास पहुंचा, उसने खुद को मेरे सीने से चिपका लिया।
“आज मुझे इतना चोदो कि मैं चल भी न पाऊं।”
मैंने उसके बाल मुट्ठी में जकड़े और सिर पीछे खींचा। “रंडी, आज तेरी सजा तय है। 15 दिन की भूख निकालनी है।” मैंने उसे छत की दीवार से सटाया, गाउन ऊपर किया और घुटनों पर बैठा दिया। लंड बाहर निकाला – 8 इंच का मोटा, नसों वाला। प्रिया ने बिना कहे मुंह खोल दिया। मैंने सीधा गले तक ठोक दिया। वो गैग होने लगी, आंसू बहने लगे, लेकिन मैंने बाल पकड़कर फेस फकिंग शुरू कर दी। हर थ्रस्ट पर उसके मुंह से जोरदार आवाजें निकल रही थीं। “चुप कर, वरना पूरा मुहल्ला जाग जाएगा।”
10 मिनट तक उसके गले की चुदाई की। मुंह से थूक और आंसू की धार बह रही थी। फिर मैंने उसे उठाया, दीवार पर टिका दिया और एक पैर कंधे पर चढ़ाकर सीधा चूत में घुसा दिया। वो सूखी नहीं थी – चूत से पानी बह रहा था। लेकिन 15 दिन बाद टाइट हो गई थी। मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर कर दिया। प्रिया चीखने वाली थी कि मैंने अपना मुंह उसके मुंह पर रख दिया और जीभ अंदर डाल दी।
धक्के इतने जोरदार थे कि उसकी गांड दीवार से टकरा-टकरा कर लाल हो रही थी। मैंने एक हाथ से उसका गला दबाया, दूसरे से चुचियों पर चुटकियां काटीं। “ले रंडी… तेरी चूत मेरी प्रॉपर्टी है।” वो हांफ रही थी – “हां… फाड़ दो… मार डालो मुझे… मैं तुम्हारी पेट की रंडी हूं।”
उस रात छत पर ही मैंने उसे 3 बार चोदा। आखिरी बार डॉगी स्टाइल में – उसकी गांड पर बेल्ट से 20-20 चपतें मारीं। लाल निशान पड़ गए। फिर लंड पर थूक लगाकर उसकी गांड में घुसा दिया। प्रिया दर्द से कांप रही थी लेकिन चूत से रस की बाढ़ आ रही थी। “गांड फट गई… लेकिन मत निकालो… पूरा डाल दो।” मैंने उसके बाल खींचे, गले पर काटते हुए पूरा लंड गांड में उतार दिया और बिना रुके पेला। 20 मिनट बाद उसकी गांड में झड़ गया।
उसके बाद हम छत से नीचे उतरे। लेकिन खेल खत्म नहीं हुआ था। अगले दिन उसने मुझे कॉलेज बंक करके घर बुलाया। उसके घर में कोई नहीं था। मैं पहुंचा तो देखा प्रिया बेडरूम में नंगी खड़ी है। हाथों में रस्सी, मुंह में गैग, आंखों पर पट्टी। उसने खुद को तैयार किया था।
“आज मुझे तुम्हारा गुलाम बना लो। जितनी मर्जी सजा दो,” उसने कहा।
मैंने मुस्कुराते हुए उसे बेड पर लिटाया। हाथ-पैर चारों तरफ फैलाकर बांध दिए। फिर ड्रेसिंग टेबल से उसकी अपनी बेल्ट निकाली और छाती, पेट, जांघों पर जोरदार वार किए। हर वार पर वो तड़प उठती और चूत से पानी टपकता। मैंने उसके चुचों पर क्लॉथ पिन लगाए। दर्द से वो कराह रही थी।
फिर मैंने आइस क्यूब्स लिए। पहले उसके गले पर, फिर स्तनों पर, फिर चूत पर फेरा। ठंड से वो कांप रही थी। अचानक मैंने गर्म तेल डाला। कंट्रास्ट से वो पागल हो गई। “राहुल… प्लीज चोद दो… मैं मर जाऊंगी।”
मैंने उसकी चूत में 3 उंगलियां डालीं और तेजी से हिलाई। G-spot पर प्रेशर देते हुए। वो झड़ गई – पहला ऑर्गेज्म। लेकिन मैं रुका नहीं। लंड बाहर निकाला और सीधा गांड में ठोक दिया। बिना लुब्रिकेंट।
वो चीख उठी लेकिन गैग की वजह से सिर्फ दबी हुई आवाज निकली। मैंने उसके गले पर हाथ रखकर दबाया और गांड की बेरहम चुदाई की। हर धक्के के साथ बेड हिल रहा था।
2 घंटे तक सिलसिला चला। मैंने उसे अलग-अलग पोजीशन में चोदा – स्पूनिंग, मिशनरी, स्टैंडिंग। उसके पूरे शरीर पर काटने के निशान, चपतों के लाल घाव, चूसने के नीले मार्क्स।
आखिर में जब मैं झड़ा तो उसकी चूत और गांड दोनों से मेरा वीर्य निकल रहा था। प्रिया बेहोश जैसी पड़ी थी। लेकिन जब होश आया तो बोली, “ये सबसे बेहतरीन दिन था।”
लेकिन असली खेल तो आगे था। एक वीकेंड पर हम दोनों पुणे से बाहर निकले।
लोनावला के पास एक रिजॉर्ट बुक किया। वहां कोई हमें नहीं जानता था। रूम में घुसते ही मैंने प्रिया को घसीटकर अंदर लिया। दरवाजा बंद किया और उसके कपड़े फाड़ दिए।
“आज पूरा दिन तू मेरी सेक्स टॉय है।” मैंने उसे बैंडेज से बांधा – हाथ पीछे, पैर फैलाए।
फिर रूम में रखे टॉय्स निकाले – बड़े-बड़े डिल्डो, वाइब्रेटर, चेन, क्लैम्प्स। सबसे पहले मैंने उसके निप्पल्स पर मेटल क्लैम्प लगाए। फिर चूत में मोटा डिल्डो घुसाया और ऑन कर दिया। प्रिया कराह रही थी।
मैं उसके सामने बैठ गया और लंड चुसवाया। वो मुंह में लेते हुए रो रही थी। फिर मैंने डिल्डो निकाला और खुद घुसा। लेकिन इस बार क्रूरता का नया लेवल – मैंने उसके गले को चेन से घेरा और खींचते हुए चोदा।
वो सांस लेने के लिए तरस रही थी। “मरने दो मुझे… लेकिन चोदते रहो,” वो फुसफुसाई।
रात भर हमने रेस्ट नहीं लिया। बालकनी में खड़े-खड़े चुदाई की जहां कोई भी नीचे से देख सकता था। मैंने उसे बालकनी की रेलिंग पर झुकाया और गांड मारी। नीचे लोग घूम रहे थे। दर्द और डर के मिश्रण से प्रिया कई बार झड़ गई।
अगले दिन सुबह मैंने उसे नंगी करके रिजॉर्ट के प्राइवेट पूल में ले गया। पानी में खड़े होकर चोदा। फिर पूलसाइड पर बांधकर कैनिंग की – छड़ी से गांड पर 50 मार। उसकी चीखें पूरे रिजॉर्ट में गूंज रही थीं लेकिन हमने प्राइवेट विला लिया था।
वापसी में कार में भी नहीं रुके। हाईवे पर पार्क करके सीट पीछे की और प्रिया को गोद में बिठाकर चोदा।
ट्रक वाले देख रहे थे लेकिन हमें परवाह नहीं थी। प्रिया अब पूरी तरह ब्रोकन हो चुकी थी – वो खुद कहती, “मुझे और दर्द दो… मुझे और अपमानित करो।”
घर लौटकर भी सिलसिला जारी रहा। एक दिन विक्रम के कमरे में जब वो सो रहा था, हम बाथरूम में घुसकर चुदाई की। प्रिया ने मुंह पर हाथ रख लिया था खुद। मैंने उसे स्टैंडिंग फिंगरिंग दी और फिर लंड से फाड़ा। विक्रम के सांस लेने की आवाज के साथ हम चोद रहे थे – ये डर और एक्साइटमेंट का कॉम्बिनेशन बेमिसाल था।
अब प्रिया मेरी पूरी प्रॉपर्टी बन चुकी है। वो कॉलेज में भी मेरे दिए हुए बट प्लग लगाकर जाती है। क्लास में बैठकर वाइब्रेटर ऑन करती है और मुझे वीडियो भेजती है। शाम को घर आकर रिपोर्ट करती है – “आज कितनी बार चूत गीली हुई।”
हमारी ये जंगली, बेरहम, क्रूर चुदाई की कहानी कभी खत्म नहीं होती। हर दिन नया प्रयोग, नया दर्द, नया मजा।
प्रिया कहती है, “तुम्हारे बिना मैं अधूरी हूं।” और मैं जवाब देता हूं, “तो तैयार हो जा रंडी… आज तेरी चूत और गांड दोनों को नया रिकॉर्ड बनाना है।”
पुणे की रातें अब सिर्फ हमारी चीखों, थप्पड़ों, कराहों और झड़ने की आवाजों से भरी रहती हैं। ये कहानी जारी रहेगी… जब तक हम दोनों का खून गर्म है।
मजहबी अम्मी की छुपी भूख और बेटे की जासूसी