सात साल से सूखी पड़ी चूत में अचानक घुसा मोटा लंड। हाथ-पाँव बँधे, गला दबता, दोनों छेद फटे। बेहोश पति देखता रहा जब उसकी बीवी को जानवरों की तरह रौंदा गया।सात साल से सूखी पड़ी चूत में अचानक घुसा मोटा लंड। हाथ-पाँव बँधे, गला दबता, दोनों छेद फटे। बेहोश पति देखता रहा जब उसकी बीवी को जानवरों की तरह रौंदा गया।
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है। मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे सतना का रहने वाला हूँ और वहाँ एक प्राइवेट कंपनी में अकाउंटेंट की नौकरी करता हूँ। मेरी उम्र 26 साल है। मेरा लंड 7.5 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा है—मोटा, नसों वाला, और इतना कठोर कि किसी भी औरत की चूत को चीर देने वाला।
यह कहानी मेरी और मेरी मामी सीमा की है। सीमा मामी की उम्र 38 साल है, लेकिन शरीर इतना कसा हुआ और सेक्सी है कि 28-29 की लगती हैं। गेहुँआ रंग, लंबे काले बाल, भारी-भरकम 36D के गोल-मटोल चूचे, पतली कमर, चौड़ी गाँड और मोटी-मोटी जाँघें। तीन बच्चों की माँ होने के बावजूद उनकी चूत अभी भी इतनी टाइट है कि पहली बार घुसते ही चीख निकल जाए।
छह महीने पहले की बात है। मेरे मामा के छोटे भाई के बेटे की शादी थी, जो रीवा जिले के एक गाँव में हो रही थी। माँ बीमार थीं, इसलिए मुझे अकेले जाना पड़ा। शादी का घर मेहमानों से भरा था, इसलिए माँ ने फोन करके कहा कि मैं सीमा मामी के घर ठहरूँ।
सीमा मामी के पति यानी मेरे मामा को सात साल पहले लकवा मार गया था। वो बस खाट पर पड़े रहते थे, बोल नहीं सकते थे, हिल नहीं सकते थे। मामी अकेली सारा घर संभालती थीं—खेतों का काम, बच्चों की पढ़ाई, मामा की सेवा। सात साल से उनकी चूत में कोई असली लंड नहीं घुसा था। सिर्फ उंगलियाँ और कभी-कभी कोई सब्जी। वो प्यासी थीं। बहुत प्यासी।
गाँव पहुँचकर मैंने शादी के घर में सबको नमस्ते की, आशीर्वाद लिया, फिर मामी के घर चला गया। घर छोटा था, आँगन में तुलसी का पौधा, अंदर दो कमरे। मामा खाट पर लेटे थे, आँखें खुलीं लेकिन बेजान। मैंने उन्हें नए कपड़े और मिठाई दीं। मामी की आँखों में आँसू आ गए। वो मेरे सीने से लगकर रोने लगीं। उनके भारी चूचे मेरे सीने पर रगड़ रहे थे। साड़ी के नीचे ब्रा नहीं थी—चूचियाँ नंगी थीं, निप्पल सख्त। मेरा लंड तुरंत तंबू बनाने लगा।
मैंने उन्हें शांत किया। “मामी, रो मत। अब मैं हूँ ना।”
वो मेरे गले में बाँहें डालकर और जोर से चिपक गईं। मैंने उनकी कमर पकड़ी। हाथ साड़ी के नीचे चला गया—पेट कोमल, फिर नीचे… जाँघों के बीच गीलापन। मामी काँप गईं।
रात को बच्चे बड़े मामा के यहाँ सोने चले गए। घर में सिर्फ मैं, मामी और बेहोश मामा। मैं बाथरूम गया। वहाँ मामी की गीली साड़ी और पेटीकोट टंगे थे। मैंने पेटीकोट सूँघा—तेज चूत की खुशबू। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। मैंने शॉर्ट्स में ही बाहर आकर बैठ गया।
मैंने कहा, “मामी, मामा के बिना कितना मुश्किल होता होगा…”
वो चुपचाप बैठी रहीं। मैंने आगे कहा, “कुछ काम तो ऐसे होते हैं जो बिना मर्द के पूरे नहीं होते। जैसे… हरी कराना।”
मामी की आँखों में एक अजीब चमक आई। कातिल मुस्कान। उन्होंने धीरे से कहा, “हरी… हाँ बेटा। सात साल से कोई हरी नहीं कर पाया।”
मैंने शॉर्ट्स नीचे खींच दी। मेरा मोटा, नसों वाला लंड बाहर निकल आया—सीधा, कठोर, आगे से टपकाता हुआ। मामी की साँसें तेज हो गईं। उन्होंने बिना कुछ बोले झुककर लंड को हाथ में लिया। उंगलियों से मसलने लगीं। फिर मुँह में ले लिया।
गले तक।
सीमा मामी ने मेरा पूरा 7.5 इंच लंड अपने गले में उतार लिया। आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन वो रुक नहीं रहीं थीं। गला खरखरा रहा था, थूक टपक रहा था। मैंने उनके बाल पकड़कर और अंदर धकेल दिया। “चूस रांड… सात साल से तरस रही है ना… अब पूरा निगल।”
वो गग-गग कर रही थीं, लेकिन लंड छोड़ नहीं रहीं थीं। मैंने उनके चूचों को साड़ी के ऊपर से मसलना शुरू किया। फिर साड़ी खींचकर फेंक दी। ब्लाउज फाड़ दिया। 36D के भारी चूचे बाहर निकल आए—काले-काले निप्पल, सख्त। मैंने एक निप्पल मुँह में लेकर जोर से काटा। मामी चीखीं, लेकिन लंड अभी भी उनके गले में था।
मैंने उन्हें बिस्तर पर धकेल दिया। पेटीकोट फाड़ दिया। चूत पूरी तरह गीली थी—बाल छोटे कटे हुए, होंठ गुलाबी और सूजे हुए। मैंने दो उंगलियाँ अंदर घुसा दीं। इतनी टाइट कि उंगलियाँ भी मुश्किल से जा रही थीं। “आह… आराम से… सात साल हो गए…”
मैंने नहीं सुना। तीन उंगलियाँ। फिर चार। उनकी चूत को चौड़ा करने लगा। मामी कराह रही थीं, पैर फैलाए हुए। मैंने झुककर चूत चाटी—जीभ अंदर तक घुसाई, क्लिट को दाँतों से काटा। वो झड़ गईं। जोर से। चूत से पानी की धार छूट गई।
लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था।
मैंने उनके दोनों हाथ ऊपर करके साड़ी की पल्लू से बाँध दिए। पैर भी अलग-अलग करके बिस्तर के पायों से बाँध दिए। अब सीमा मामी पूरी तरह बेबस थीं—हाथ-पाँव बँधे, चूत खुली, चूचे बाहर। मैंने लंड उनके मुँह के सामने रखा। “चाट। अच्छे से। वरना गाँड में डालूँगा बिना तेल के।”
वो चाटने लगीं। जीभ से लंड के नीचे की नस चाटी, अंडों को मुँह में लिया, फिर वापस गले में उतारा। मैंने उनके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदना शुरू किया। गला खरखरा रहा था, थूक पूरे चेहरे पर लग गया था। आँखों से आँसू बह रहे थे।
फिर मैंने लंड उनकी चूत पर सटाया। टोपा अंदर घुसाया। इतनी टाइट कि सिर्फ आधा ही गया। मामी चीखीं—“उई माँ… फट जाएगी… आराम से…”
मैंने झटका मारा। पूरा लंड एक साथ अंदर चला गया। उनकी चूत चीख उठी। मैंने रुककर नहीं, बल्कि और जोर से धक्के लगाने शुरू किए। बिस्तर चरमरा रहा था। हर धक्के पर उनके चूचे उछल रहे थे। मैंने दोनों निप्पल पकड़कर मरोड़े। “चिल्ला… और चिल्ला रांड… तेरी चूत सात साल बाद फट रही है।”
मामी पागलों की तरह कराह रही थीं। “आह… आह… मार… और जोर से मार… साले… पूरा फाड़ दे…”
मैंने उनकी गाँड के नीचे तकिया रख दिया ताकि चूत और ऊपर उठ जाए। फिर दोनों हाथ उनकी कमर पर रखकर इतनी ताकत से चोदने लगा कि हर धक्के पर उनकी साँस रुक जाती। पाँच मिनट में वो दोबारा झड़ गईं। चूत इतनी सिकुड़ी कि मेरे लंड को निचोड़ रही थी।
लेकिन मैंने झड़ने नहीं दिया।
मैंने लंड निकाला। चूत से सफेद झाग निकला। फिर उन्हें घोड़ी बनाया—चेहरा तकिये पर, गाँड ऊपर। मैंने उनकी गाँड के दोनों गोल हिस्सों को फैलाया। बीच में गुलाबी छेद। मैंने थूक लगाकर एक उंगली घुसाई। मामी तिलमिला गईं। “नहीं… वहाँ मत… दर्द होगा…”
मैंने दूसरी उंगली भी घुसा दी। फिर लंड। बिना तेल के। सिर्फ थूक से। टोपा अंदर गया। मामी चीख पड़ीं—“आह… फट गई… निकाल… निकाल साले…”
मैंने नहीं निकाला। धीरे-धीरे पूरा लंड उनकी गाँड में उतार दिया। इतनी टाइट कि मेरे लंड को भी दर्द हो रहा था। फिर धक्के शुरू किए। हर धक्के पर उनकी गाँड खुल रही थी। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनकी क्लिट मसलनी शुरू की। दूसरे हाथ से उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा।
“अब बोल… किसकी रांड है तू?”
“तेरी… तेरी रांड… आह… और जोर से… गाँड फाड़ दे…”
मैंने बीस मिनट तक उनकी गाँड चोदी। बीच-बीच में लंड निकालकर चूत में डालता, फिर वापस गाँड में। मामी पागल हो चुकी थीं। वो खुद अपनी गाँड फैला-फैलाकर माँग रही थीं। “और अंदर… पूरा… पूरा डाल…”
आखिरकार मैंने उनकी गाँड में ही झड़ दिया। इतना वीर्य कि बाहर निकलकर जाँघों तक बह गया। मैंने लंड अंदर ही रखा और उन्हें उसी हाल में छोड़ दिया—हाथ-पाँव बँधे, गाँड वीर्य से भरी।
दस मिनट बाद मैंने उन्हें खोला। मामी थककर बिस्तर पर गिर पड़ीं। लेकिन मैंने उन्हें आराम नहीं करने दिया। मैंने 69 पोजीशन बनाई। मैं नीचे लेटा, उन्होंने मेरे लंड पर मुँह बैठाया। मैंने उनकी चूत और गाँड दोनों चाटे—वीर्य को चाट-चाटकर साफ किया, फिर जीभ अंदर तक घुसाई। मामी फिर से लंड चूसने लगीं। गले तक।
लंड दोबारा खड़ा हो गया। मैंने उन्हें दीवार के सहारे खड़ा किया। एक टांग ऊपर उठाकर चूत में लंड घुसाया। खड़े-खड़े इतनी जोर से चोदा कि दीवार पर उनके सिर की ठोक लग रही थी। उनके चूचे मेरे मुँह में थे। मैं काट-काटकर चूस रहा था। निप्पल पर दाँत के निशान पड़ गए।
फिर मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। दोनों पैर उनके कंधों पर रख दिए। लंड पूरा अंदर तक। इतनी गहराई कि उनके पेट पर उभार दिख रहा था। मैंने दोनों हाथ उनके गले पर रख दिए। हल्का दबाया। “अब साँस रोक… जब तक मैं कहूँ…”
मामी की आँखें फटी की फटी रह गईं। मैं धक्के लगाते हुए गला दबाए रखता। जब उनकी साँस रुकने लगती तो छोड़ देता, फिर दोबारा दबाता। वो झड़ती रहीं। बार-बार। चूत से पानी की धारें निकल रही थीं।
रात भर मैंने उन्हें चार बार और चोदा। एक बार बाथरूम में—दीवार से लगाकर, पानी की बौछार में। एक बार आँगन में तुलसी के पौधे के पास—रात के अँधेरे में, मुँह बंद करके। एक बार मामा की खाट के पास—मामा बेहोश पड़े थे, आँखें खुलीं। मैंने मामी को उनकी खाट के बगल में घोड़ी बनाकर चोदा। “देख… तेरा पति देख रहा है… कैसे उसकी बीवी की गाँड फट रही है।”
मामी शर्म से लाल हो गईं, लेकिन चूत और भी गीली हो गई।
सुबह तक उनकी चूत और गाँड दोनों सूज चुकी थीं। निप्पल पर काटने के निशान, गर्दन पर उंगलियों के निशान, जाँघों पर थप्पड़ों के लाल निशान। मैंने उन्हें आईने के सामने खड़ा किया। “देख… कैसी लग रही है तू। पूरी रांड।”
वो आईने में खुद को देखकर मुस्कुराईं। “अब तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊँगी विक्रम… हर हफ्ते आना… वरना मैं खुद तुम्हारे शहर आ जाऊँगी।”
उसके बाद हर सप्ताहांत मैं सतना से रीवा आता। कभी शादी का बहाना, कभी कोई काम। हर बार मामी तैयार मिलतीं—कभी सिर्फ साड़ी में बिना ब्लाउज-पेटीकोट, कभी हाथ-पाँव पहले से बँधे हुए। कभी मैं उन्हें बाँधता, कभी वो खुद रस्सी लेकर आतीं।
एक बार मैंने उनकी दोनों चूचियों को रस्सी से बाँधा और लंड सिर्फ निप्पलों के बीच चोदा। एक बार उनकी आँखें बाँधकर पूरे घर में घुमाया—कभी किचन की मेज पर, कभी आँगन की मिट्टी पर, कभी मामा की खाट के नीचे।
सीमा मामी अब सिर्फ मेरी रांड रह गई थीं। सात साल की प्यास एक रात में नहीं बुझी थी। वो हर बार और ज्यादा माँगतीं—ज्यादा जोर से, ज्यादा गहराई से, ज्यादा बर्बरता से। और मैं देता। बिना किसी रहम के।
अब जब भी मैं उनके गाँव जाता हूँ, मामा की आँखें मुझे देखती हैं। बेजान। और मैं उनकी बीवी की गाँड में लंड घुसाए हुए मुस्कुराता हूँ।
उस रात के बाद सीमा मामी पूरी तरह बदल गई थीं। पहले वो शर्म और हिचक के साथ मांगती थीं, अब वो खुद मुझे रस्सी और चाबुक लेकर आतीं। हर सप्ताहांत जब मैं सतना से रीवा पहुँचता, वो दरवाजे पर खड़ी मिलतीं—साड़ी सिर्फ कमर में लिपटी, ऊपर से नंगी, चूचे पर पहले से निप्पल क्लिप लगे हुए, और दोनों हाथ पीछे बँधे।
एक शनिवार की शाम को मैं पहुँचा तो उन्होंने बिना कुछ बोले मुझे अंदर खींच लिया। मामा की खाट के बगल में ही एक मोटी रस्सी और लोहे की चेन रखी थी। उन्होंने मेरे पैर छूते हुए कहा, “आज तुम कुछ मत करना… आज मैं खुद अपनी हालत बताऊँगी। बस तुम देखना और जितना चाहो उतना बर्बर बनना।”
मैंने उनकी ठुड्डी पकड़कर ऊपर उठाई। “बोल रांड… आज क्या करवाना है?”
वो गिड़गिड़ाईं, “पहले मुझे पूरी नंगी करो। फिर हाथ-पाँव बाँधो। फिर मेरी चूत और गाँड दोनों में एक साथ कुछ डालो… और गला दबाते हुए चोदो। जितना दर्द हो उतना अच्छा।”
मैंने उनकी साड़ी खींचकर फेंक दी। निप्पल क्लिप हटाए तो निप्पल सूजे हुए और काले पड़ चुके थे। मैंने दोनों निप्पलों को मुँह में लेकर जोर से काटा। खून की हल्की धार निकली। मामी कराह उठीं लेकिन पीछे नहीं हटीं। मैंने उनके दोनों हाथ ऊपर करके छत की कड़ी से बाँध दिए। पैर अलग-अलग फैलाकर फर्श पर कीलों से बाँध दिए। अब वो बीचों-बीच लटक रही थीं—पूरी नंगी, चूत खुली, गाँड फैली हुई।
मैंने पहले उनकी चूत में चार उंगलियाँ एक साथ घुसा दीं। इतनी जोर से कि उनकी कमर झुक गई। “आह… फाड़ दिया… और अंदर…” मैंने उंगलियाँ घुमा-घुमाकर उनकी चूत को चौड़ा किया। फिर एक मोटा बैंगन उठाया जो उन्होंने खुद रखा था। बिना किसी तेल के उसे उनकी चूत में धकेल दिया। पूरा अंदर चला गया। मामी चीख पड़ीं। आँखों से आँसू बहने लगे। मैंने बैंगन को अंदर-बाहर करना शुरू किया—जोर-जोर से, बिना रुके। हर धक्के पर उनकी चूत से पानी निकल रहा था।
फिर मैंने दूसरा बैंगन उनकी गाँड में घुसाया। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। मैंने दोनों बैंगनों को एक साथ आगे-पीछे करना शुरू किया। मामी पागलों की तरह झूल रही थीं। “आह… दोनों फट रहे हैं… और जोर से… मार साले… और मार…”
मैंने उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और गला दबा दिया। एक हाथ से गला, दूसरे हाथ से दोनों बैंगन। साँस रुकने लगी तो उन्होंने पैर पटकने शुरू कर दिए, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। जब उनकी आँखें ऊपर पलटने लगीं तभी छोड़ा। वो जोर से खाँसते हुए झड़ गईं—चूत से पानी की तेज धार छूटी, जो फर्श पर गिरकर फैल गई।
मैंने बैंगन निकाले। चूत और गाँड दोनों खुले और लाल हो चुके थे। मैंने अपना लंड निकाला—7.5 इंच का मोटा लंड पूरी तरह खड़ा। पहले उनकी चूत में धकेल दिया। इतनी आसानी से चला गया जैसे कोई सुरंग हो। फिर गाँड में। दोनों जगह बारी-बारी चोदता रहा। बीच-बीच में उनके चेहरे पर थप्पड़ मारता। “बोल… किसकी रांड है?”
“तेरी… सिर्फ तेरी… गाँड-चूत दोनों तेरी…”
मैंने उन्हें छत से उतारा लेकिन हाथ-पाँव बँधे ही रखे। फर्श पर घुटनों के बल बैठाया। लंड उनके मुँह में घुसा दिया। गले तक। फिर दोनों हाथ उनके सिर पर रखकर जोर-जोर से मुँह चोदने लगा। गला खरखरा रहा था, थूक नाक और आँखों तक लग गया था। मैंने कहा, “निगल… पूरा निगल रांड… वरना गाँड में गर्म मिर्च डाल दूँगा।”
वो निगलने लगीं। आँसू बह रहे थे लेकिन मुँह नहीं खोल रहीं थीं। मैंने उनके बाल पकड़कर और गहराई तक धकेला। फिर एकाएक लंड निकालकर उनके चेहरे पर झड़ गया—वीर्य आँखों, नाक, मुँह सब जगह लग गया। उन्होंने जीभ निकालकर चाटा।
रात और लंबी होने वाली थी।
मैंने उन्हें मामा की खाट के पास घसीटा। मामा अभी भी बेहोश पड़े थे, आँखें खुलीं। मैंने मामी को खाट के नीचे घुटनों के बल बैठाया और पीछे से गाँड में लंड घुसा दिया। “देख… तेरा पति देख रहा है… कैसे उसकी बीवी की गाँड फट रही है। बोल उसे… बोल कि तू कितनी बड़ी रांड है।”
मामी ने आँसू भरी आवाज में कहा, “देख लो… तुम्हारी बीवी की गाँड में लंड घुसा है… और मजा आ रहा है… आह… और जोर से…”
मैंने उनके दोनों चूचों को पकड़कर मरोड़ना शुरू किया। निप्पल इतने सख्त थे कि उंगलियों से दबाने पर दर्द से उनकी आवाज बदल जाती। मैंने एक निप्पल को दाँतों से पकड़कर खींचा। खून की बूँदें निकलीं। मामी चीखीं लेकिन गाँड और पीछे धकेल रही थीं।
फिर मैंने उन्हें खाट पर ही लिटा दिया—मामा के बिल्कुल बगल में। उनके एक हाथ को मामा के हाथ से बाँध दिया। अब वो हिल भी नहीं सकती थीं। मैं उनके ऊपर चढ़ गया। लंड चूत में। गला दबाते हुए चोदने लगा। हर धक्के पर खाट चरमरा रही थी। मामा की आँखें हमें देख रही थीं। मैंने मामी के कान में कहा, “आज तेरी चूत में इतना वीर्य डालूँगा कि सुबह तक बहता रहे… और तू मामा के सामने ही साफ करेगी।”
मामी पागल हो चुकी थीं। “ डाल… पूरा डाल… मुझे अपनी हग्वा बना दे… अपनी पेशाब की प्याली बना दे…”
मैंने लंड निकालकर उनके मुँह में डाल दिया। गले तक। फिर निकालकर चूत में। फिर गाँड में। तीनों छेद बारी-बारी इस्तेमाल किए। आखिरकार उनकी चूत में इतना जोर से झड़ा कि वीर्य बाहर निकलकर जाँघों से होता हुआ फर्श पर गिरने लगा। मैंने लंड अंदर ही रखा और उन्हें उसी हाल में छोड़ दिया—हाथ बँधे, चूत भरी हुई, मामा के बगल में।
आधी रात को मैं उठा। मामी अभी भी वहीं लेटी थीं। मैंने उनके चेहरे पर थप्पड़ मारा। “उठ रांड। अब पेशाब की बारी है।”
मैंने उन्हें बाथरूम में घसीटा। टॉयलेट सीट पर बैठाया। खुद सामने खड़ा होकर लंड उनके मुँह में डाल दिया। “पी… मेरा पेशाब पी।”
पहले तो वो हिचकिचाईं, फिर मुँह खोल दिया। गर्म धार उनके गले में उतरने लगी। कुछ बाहर गिर गया, बाकी उन्होंने निगल लिया। आँखें बंद करके। जब धार खत्म हुई तो उन्होंने लंड को चाट-चाटकर साफ किया।
मैंने उन्हें फिर से बाँधा—इस बार बिस्तर पर, पैर सिर के पास मोड़कर। चूत और गाँड दोनों पूरी तरह खुले। मैंने गर्म मोमबत्ती जलाई और उनकी चूत के होंठों पर मोम टपकाना शुरू किया। मामी चीख उठीं। “आह… जल गई… और डाल… और…”
मैंने निप्पलों पर भी मोम टपकाया। फिर ठंडा पानी डालकर झटका दिया। उनकी त्वचा लाल हो चुकी थी। मैंने फिर से लंड गाँड में घुसाया। इस बार बिना किसी रहम के। पूरे जोर से। हर धक्के पर उनके शरीर में कंपन हो रहा था। मैंने उनके बाल पकड़कर सिर उठाया और आईने के सामने किया। “देख… कैसी लग रही है तू। पूरी तरह टूटी हुई रांड।”
वो आईने में खुद को देखकर मुस्कुराईं—आँसू और वीर्य से सना चेहरा। “और तोड़… पूरी तरह तोड़ दे मुझे…”
सुबह चार बजे तक मैंने उन्हें छह बार और चोदा। कभी फर्श पर, कभी दीवार से लगाकर, कभी खिड़की के पास जहाँ बाहर अँधेरा था। उनकी चूत और गाँड दोनों से लगातार वीर्य बह रहा था। जाँघें चिपक रही थीं। निप्पल पर काटने और मोम के निशान। गर्दन पर उंगलियों के नीले निशान।
जब आखिरकार मैं थककर उनके पास लेटा तो उन्होंने मेरे लंड को हाथ में लिया और धीरे से सहलाते हुए कहा, “अगली बार और कड़ा सामान लाना… चाबुक, क्लैंप, और मोटी मोटी चीजें। मैं और बर्बरता चाहती हूँ। मुझे दर्द चाहिए… बहुत दर्द।”
मैंने उनके बाल सहलाए। “मिलेगा। जितना चाहे उतना। तेरी चूत और गाँड दोनों को इतना फैला दूँगा कि तुझमें कोई और लंड टिक ही न सके।”
सीमा मामी ने आँखें बंद कर लीं। चेहरे पर संतुष्टि और भूख दोनों थी। मामा की खाट पर अभी भी वो बेजान आँखें खुली हुई थीं। और कमरे में सिर्फ साँसें और वीर्य की गंध बची थी।
अगले हफ्ते मैं और सामान लेकर आने वाला था। और सीमा मामी उससे भी ज्यादा टूटी हुई मिलने वाली थीं।
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