पत्नी की बेचैन प्यास

एक छोटी कमजोरी ने पत्नी को रातों की आग बना दिया। हर रात नए हाथ उसे तोड़ते, वह और मांगती। पति बस देखता रहा। यह कहानी आपको अंत तक बांधे रखेगी।

मेरी पत्नी प्रिया 28 साल की है। गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, 36 साइज के भरे हुए स्तन और गोल मटोल गांड वाली एक ऐसी औरत जो देखने में साधारण गृहिणी लगती हो लेकिन अंदर से पूरी तरह से विकृत और भूखी कुतिया है। मेरी लुल्ली सिर्फ 3.5 इंच की है और दो मिनट से ज्यादा नहीं टिकती। इसी कमजोरी ने प्रिया को धीरे-धीरे पूरी कॉलोनी की सार्वजनिक रांड बना दिया। अब वह सिर्फ मेरे पति होने का नाटक करती है। घर में रहती है, खाना बनाती है, लेकिन रात भर अलग-अलग मर्दों के लंड चूसती और चुदवाती है। मुझे कोई आपत्ति नहीं। मेरा काम सिर्फ देखना और अपनी छोटी लुल्ली को हिलाना रह गया है।

उस शुक्रवार की शाम को मैं ऑफिस से जल्दी लौटा। घर का दरवाजा आधा खुला था। अंदर से आहें और थप्पड़ की आवाजें आ रही थीं। मैं चुपके से अंदर घुसा। बेडरूम में प्रिया नंगी घुटनों के बल बैठी थी। उसके दोनों हाथ पीछे बांधे हुए थे। हमारे सोसायटी का गार्ड सूरज, 35 साल का हट्टा-कट्टा आदमी, उसके मुंह में अपना मोटा काला लंड ठूसे जा रहा था। प्रिया की आंखों से आंसू बह रहे थे लेकिन वह रोक नहीं रही थी। सूरज उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के मार रहा था।

“चूस रांड, और गहरा… गले तक ले,” सूरज गुर्राया और एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया। प्रिया की लार लंड पर बह रही थी। मैं दरवाजे पर खड़ा देखता रहा। सूरज ने प्रिया को उठाया, बेड पर पेट के बल लिटाया और उसकी गांड पर थूक लगाकर एक झटके में अपना लंड अंदर घुसेड़ दिया। प्रिया चिल्लाई लेकिन सूरज ने उसके मुंह दबा दिया।

“चुप कुतिया। तेरे पति को पता है तू कितनी सस्ती है?” सूरज ने उसकी गांड पर लगातार थप्पड़ बरसाए। लाल निशान पड़ गए। दस मिनट की क्रूर चुदाई के बाद सूरज ने प्रिया के मुंह में झड़कर अपना लंड साफ करवाया और चला गया। प्रिया बेड पर पड़ी हांफ रही थी। मैंने कोई सवाल नहीं किया। बस फ्रिज से बीयर निकाली और बैठ गया।

शाम को प्रिया ने खुद को तैयार किया। काली लेदर मिनी स्कर्ट जो उसकी गांड को आधा ढकती थी, ऊपर सिर्फ एक नेट का टॉप जिसमें उसके निप्पल साफ दिख रहे थे। उसने गर्दन में चoker पहना हुआ था जिस पर “Public Property” लिखा था। मैंने उसे देखा तो मेरी छोटी लुल्ली तन गई लेकिन मैं जानता था कि आज रात मेरी बारी नहीं आने वाली।

हम दोनों “ब्लैक रोज़” नाम के अंडरग्राउंड क्लब पहुंचे। वहां सिर्फ चुनिंदा लोग आते थे। एंट्री पर गार्ड ने प्रिया को ऊपर से नीचे तक घूरा और मुझसे कहा, “ये वाली फ्री है क्या?” प्रिया ने खुद जवाब दिया, “रात भर के लिए रेट बता।” गार्ड हंसा और हमें अंदर जाने दिया।
क्लब के अंदर रोशनी कम थी। मोटे-मोटे मर्द और अधनंगी औरतें। प्रिया जैसे ही अंदर घुसी, आंखें उसकी तरफ उठ गईं। हम एक कोने में बैठे। प्रिया ने दो पैग एक साथ लगा लिए। तभी दो लड़के हमारे टेबल पर आए। एक का नाम विक्रम था, 32 साल का, जिम वाला शरीर, और दूसरा अमन, 29 साल का, लंबा और सांड जैसा। दोनों ने प्रिया को घूरा।
विक्रम बोला, “ये तेरी बीवी है?”

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मैंने सिर हिलाया।

अमन मुस्कुराया, “तो फिर शेयर करने में ऐतराज नहीं होगा।”
प्रिया ने मेरी तरफ देखा। मैंने आंखें बंद कर लीं। प्रिया उठी और दोनों के साथ डांस फ्लोर पर चली गई। विक्रम ने पीछे से उसकी स्कर्ट ऊपर कर दी। प्रिया की गांड नंगी थी, पैंटी नहीं पहनी थी। अमन ने आगे से उसके स्तनों को मसलना शुरू कर दिया। लोग देख रहे थे। किसी ने फोन निकाला। प्रिया को कोई शर्म नहीं आई। वह दोनों के बीच पिसी जा रही थी।

आधा घंटा बाद विक्रम ने प्रिया का हाथ पकड़ा और क्लब के पीछे वाले डार्क रूम की तरफ ले गया। मैं पीछे-पीछे चला। डार्क रूम में सिर्फ लाल बत्ती जल रही थी। दीवारों पर चेन और चाबुक लटके थे। विक्रम ने प्रिया के हाथ ऊपर की चेन में बांध दिए। अमन ने उसकी स्कर्ट फाड़ दी। अब प्रिया पूरी नंगी, हाथ ऊपर बंधे, खड़ी थी।

विक्रम ने चाबुक उठाया। पहली मार उसकी जांघ पर पड़ी। प्रिया चिल्लाई। दूसरी मार गांड पर। तीसरी दोनों स्तनों पर। लाल लकीरें उभर आईं। अमन उसके मुंह में अपना लंड ठूंस रहा था ताकि वह चिल्ला न सके। विक्रम ने चाबुक फेंका और प्रिया की गांड पर थूक लगाकर एक झटके में अपना मोटा लंड अंदर पेल दिया। प्रिया की आंखें फटी की फटी रह गईं। विक्रम ने उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।

“तेरी चुत कितनी ढीली हो गई है रांड। कितने लंड रोज लेती है?” विक्रम गालियां देता रहा। अमन ने अपना लंड प्रिया के मुंह से निकाला और उसके चेहरे पर थप्पड़ मारते हुए बोला, “जवाब दे कुतिया।”
प्रिया ने लार भरे मुंह से कहा, “हर रोज… पांच-छह… कभी दस भी…”

विक्रम की स्पीड बढ़ गई। वह प्रिया की गांड को इतनी जोर से पीट रहा था कि थप्पड़ की आवाज पूरे रूम में गूंज रही थी। अमन ने प्रिया के दोनों स्तनों को मुंह में लिया और दांत से काटने लगा। निप्पल पर दांत के निशान पड़ गए। खून की कुछ बूंदें निकलीं। प्रिया रो रही थी लेकिन मना नहीं कर रही थी।

बीस मिनट बाद विक्रम ने अपना लंड निकाला और प्रिया को घुटनों पर बैठा दिया। दोनों ने उसके मुंह में बारी-बारी से लंड डालकर जोर से मुंह चोदना शुरू कर दिया। प्रिया की आंखें लाल हो गई थीं। गला बैठ गया था। फिर विक्रम ने प्रिया को उठाया, दीवार से सटाया और उसकी दोनों टांगें फैलाकर खड़े-खड़े चुत में लंड घुसेड़ दिया। अमन पीछे से आया और प्रिया की गांड में अपना लंड डालने लगा। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। प्रिया की चीखें दबी-दबी निकल रही थीं।

वे दोनों प्रिया को दीवार से सटाकर इतनी क्रूरता से चोद रहे थे कि उसकी पीठ दीवार से रगड़ खाकर छिल गई। विक्रम ने उसके गले को दबाया। प्रिया की सांसें उखड़ने लगीं। अमन ने उसकी गांड पर लगातार थप्पड़ बरसाए। जब प्रिया बेहोशी की हालत में पहुंचने लगी तो विक्रम ने गला छोड़ा और दोनों ने अपना-अपना लंड निकालकर प्रिया के चेहरे और स्तनों पर झड़ दिया। गाढ़ा सफेद माल उसके बालों, आंखों और मुंह पर लग गया। प्रिया ने जीभ निकालकर चाटा।

वे दोनों कपड़े पहनने लगे। विक्रम ने प्रिया के चoker को खींचते हुए कहा, “कल रात तेरे घर आउंगा। अपने पति को भी बुला लेना। उसे भी सिखाना है कैसे बीवी चोदी जाती है।”
प्रिया ने सिर हिलाया। मैंने कुछ नहीं कहा। हम तीनों क्लब से निकले। गाड़ी में विक्रम ने ड्राइविंग की। प्रिया आगे बैठी थी। अमन पीछे मुझसे चिपककर बैठा। रास्ते भर विक्रम एक हाथ से गाड़ी चला रहा था और दूसरे हाथ से प्रिया की चुत में उंगलियां डाले हुए था। प्रिया की टांगें फैली हुई थीं। अमन ने प्रिया के स्तनों को मसलते हुए मुझसे कहा, “तेरी बीवी की गांड कल रात चाबुक से लाल कर दूंगा। तू देखना।”

घर पहुंचे तो रात के दो बज रहे थे। विक्रम और अमन अंदर आ गए। मैंने दरवाजा बंद किया। प्रिया को उन्होंने लिविंग रूम के बीच में नंगा खड़ा कर दिया। विक्रम ने अपने बैग से रस्सी निकाली और प्रिया के हाथ-पैर बांध दिए। फिर उसे सोफे पर पेट के बल लिटाया। अमन ने चाबुक निकाला।

पहली मार इतनी जोर की थी कि प्रिया चीख पड़ी। दूसरी, तीसरी… लगातार बीस मारें उसकी गांड और जांघों पर पड़ीं। गांड लाल हो गई, कुछ जगहों पर हल्के घाव भी हो गए। फिर विक्रम ने प्रिया के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वह चिल्ला न सके और दोनों ने बारी-बारी से उसकी चुत और गांड में लंड डालकर पूरी रात चोदा। कभी कुत्ते की तरह, कभी उसे उल्टा लटकाकर, कभी बाल पकड़कर घसीटते हुए।

सुबह चार बजे जब दोनों थक गए तो उन्होंने प्रिया के मुंह में आखिरी बार झड़कर उसे फर्श पर छोड़ दिया। प्रिया की हालत खराब थी। शरीर पर नीले-लाल निशान, चेहरे पर सूखा हुआ माल, आंखें सूजी हुई। विक्रम ने जाते-जाते मुझसे कहा, “अगली बार अपने दोस्तों को भी ले आउंगा। तेरी बीवी को पूरी टीम चोदेगी।”
वे चले गए। मैं प्रिया के पास बैठ गया। उसने आंखें खोलीं और धीमी आवाज में बोली, “पानी…”

मैंने पानी पिलाया। फिर वह मुस्कुराई और कहा, “कल रात और जोर से चोदना… मुझे और दर्द चाहिए।”
मैंने सिर हिलाया। मेरी छोटी लुल्ली फिर से तन गई थी लेकिन मैं जानता था कि मेरी बारी कभी पूरी तरह नहीं आने वाली। प्रिया अब सिर्फ मेरी पत्नी नहीं रही थी। वह उन मर्दों की सार्वजनिक संपत्ति बन चुकी थी जो उसे तोड़कर मजा लेते थे। और मैं… मैं सिर्फ एक मूक दर्शक था जो अपनी हार को हर रात दोबारा जीता था।

अगली सुबह प्रिया किचन में चाय बना रही थी। शरीर पर निशान साफ दिख रहे थे। उसने मुझसे पूछा, “आज शाम को विक्रम आने वाला है। उसके साथ दो और होंगे। तू तैयार रहना।”
दोस्तो,
अगली सुबह प्रिया किचन में चाय बना रही थी। शरीर पर निशान साफ दिख रहे थे। उसने मुझसे पूछा, “आज शाम को विक्रम आने वाला है। उसके साथ दो और होंगे। तू तैयार रहना।”

मैंने चुपचाप हामी भर ली। क्योंकि अब मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा था। प्रिया की भूख बढ़ती जा रही थी और मैं उसकी इस भूख का सबसे बड़ा गवाह बन चुका था।
शाम के सात बजे घर की घंटी बजी। दरवाजा खोला तो विक्रम खड़ा था। उसके पीछे दो नए चेहरे। एक का नाम राहुल था, 34 साल का, कंधे चौड़े, हाथों में मोटी नसें फूली हुई। दूसराकरण, 30 साल का, लंबा और पतला लेकिन आंखों में ऐसी क्रूरता कि देखने वाले की रूह कांप जाए। तीनों के हाथ में काले बैग थे।

विक्रम ने बिना अनुमति के अंदर घुसते हुए कहा, “बीवी कहां है?”
प्रिया बेडरूम से निकली। उसने सिर्फ एक पारदर्शी ब्लैक लिंजरी पहनी थी। स्तन और योनि साफ दिख रहे थे। राहुल ने उसे देखते ही सीटी बजाई। करण ने मुंह बनाते हुए कहा, “ये तो तैयार कुतिया लग रही है।”

विक्रम ने बैग खोला। उसमें रस्सियां, चाबुक, धातु के क्लैंप, gag और एक मोटी काली डिल्डो निकली। उसने प्रिया की तरफ इशारा किया, “नंगी हो। अभी।”
प्रिया ने लिंजरी उतार दी। तीनों ने उसे लिविंग रूम के बीच में खड़ा कर दिया। विक्रम ने उसके दोनों हाथ पीछे बांध दिए। फिर राहुल ने उसके टखनों में अलग-अलग रस्सी बांधकर टांगें फैला दीं। प्रिया वी-शेप में खड़ी हो गई। करण ने उसके मुंह में बड़ा सा रबर का gag ठूंस दिया। लार तुरंत बहने लगी।

विक्रम ने धातु के क्लैंप निकाले और प्रिया के दोनों निप्पलों पर कसकर लगा दिए। प्रिया की आंखें फटी की फटी रह गईं। दर्द से उसका शरीर कांप उठा लेकिन आवाज gag की वजह से नहीं निकल पाई। फिर उसने एक और क्लैंप उसकी चुत के ऊपरी हिस्से पर लगा दिया। प्रिया की टांगें कांपने लगीं।

राहुल ने चाबुक उठाया। पहली मार जांघ के अंदरुनी हिस्से पर पड़ी। दूसरी गांड पर। तीसरी पेट पर। लगातार मारें पड़ती रहीं। हर मार के साथ प्रिया का शरीर झटकों से हिलता। लाल धारियां उभर आईं। कुछ जगहों पर चमड़ी फटने लगी। विक्रम ने चाबुक ले लिया और सीधे स्तनों पर मारना शुरू कर दिया। क्लैंप की वजह से निप्पल और भी संवेदनशील हो गए थे। प्रिया की आंखों से आंसू बह रहे थे।

करण ने प्रिया के बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और उसके कान में फुसफुसाया, “आज तुझे कुत्ते की तरह इस्तेमाल करेंगे। तेरा पति भी देखेगा।”
फिर तीनों ने प्रिया को फर्श पर घुटनों के बल बैठा दिया। gag हटाया गया। विक्रम ने अपना मोटा लंड निकाला और प्रिया के मुंह में इतनी गहराई तक ठूंस दिया कि वह उल्टी करने को हो गई। राहुल और करण दोनों तरफ खड़े होकर अपने लंड उसके चेहरे पर रगड़ रहे थे। विक्रम ने बाल पकड़कर जोर-जोर से मुंह चोदना शुरू कर दिया। गले की आवाजें आने लगीं। लार फर्श पर गिर रही थी।

दस मिनट बाद विक्रम ने लंड निकाला और प्रिया को चारपाई की तरह उल्टा कर दिया। उसके हाथ-पैर अभी भी बंधे थे। राहुल ने उसकी गांड पर थूक का बड़ा गोला गिराया और एक झटके में अपना मोटा लंड अंदर पेल दिया। प्रिया चिल्लाई। करण ने उसी समय उसकी चुत में डिल्डो घुसेड़ दी। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। विक्रम उसके मुंह में फिर से लंड डाले हुए था।

वे तीनों एक साथ धक्के मार रहे थे। राहुल गांड में इतनी क्रूरता से पेल रहा था कि प्रिया का शरीर आगे-पीछे धकेल दिया जा रहा था। हर धक्के के साथ वह कराहती। करण डिल्डो को अंदर-बाहर कर रहा था और बीच-बीच में निकालकर उसके चेहरे पर मारता। विक्रम गालियों की बौछार कर रहा था, “ले रांड… गले तक ले… तेरी चुत और गांड दोनों को फाड़ देंगे आज।”

आधा घंटा बाद उन्होंने प्रिया को खड़ा किया। रस्सियां ढीली कीं लेकिन हाथ पीछे बंधे रहे। विक्रम ने उसे खिड़की के पास ले जाकर झुका दिया। बाहर अंधेरा था लेकिन बालकनी से किसी के आने-जाने की आवाज आ रही थी। राहुल ने पीछे से फिर गांड में लंड डाल दिया। करण ने प्रिया के बाल पकड़कर सिर उठाया ताकि अगर कोई देखे तो चेहरा साफ दिखे। विक्रम उसके स्तनों को मसलते हुए निप्पल के क्लैंप को और कस रहा था।

प्रिया की आवाज अब सिसकियों में बदल चुकी थी। राहुल ने उसकी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ बरसाए। हर थप्पड़ के साथ लाल निशान और गहरे होते गए। फिर उसने लंड निकालकर प्रिया को घुमाया और खड़े-खड़े उसकी चुत में पेल दिया। करण ने उसी समय पीछे से गांड में अपना लंड डाल दिया। डबल पेनिट्रेशन। प्रिया का शरीर दोनों के बीच पिसा जा रहा था। विक्रम उसके मुंह में लंड ठूंसकर गला बंद किए हुए था।

वे दोनों इतनी तेज स्पीड से चोद रहे थे कि प्रिया की टांगें कांपने लगीं। उसका शरीर पसीने से लथपथ हो चुका था। निप्पल के क्लैंप हिल-हिलकर और दर्द दे रहे थे। अचानक राहुल ने जोर से धक्का मारा और प्रिया की चुत में ही झड़ गया। गर्म माल अंदर भर गया। करण ने भी कुछ ही देर बाद गांड में अपना माल उंडेल दिया। प्रिया की टांगों से सफेद तरल रिसने लगा।

विक्रम ने प्रिया को फर्श पर पटक दिया। उसने उसके चेहरे पर बैठकर अपना लंड उसके मुंह में फिर से डाल दिया और जोर से मुंह चोदने लगा। राहुल और करण दोनों तरफ से उसके स्तनों को मसल रहे थे और क्लैंप को खींच-खींचकर छोड़ रहे थे। प्रिया की आंखें अब आधी बंद हो चुकी थीं। दर्द और थकान से उसका शरीर ढीला पड़ रहा था लेकिन तीनों रुकने वाले नहीं थे।

विक्रम ने आखिरकार प्रिया के मुंह में झड़कर पूरा माल उसके गले में उतार दिया। प्रिया ने खांसते हुए निगला। फिर तीनों ने उसे उठाया और बेडरूम में ले गए। वहां उन्होंने प्रिया को बेड के चारों कोनों से बांध दिया। हाथ और पैर फैले हुए। विक्रम ने चाबुक फिर से उठाया। इस बार मारें सीधे चुत और गांड के छेद पर पड़ने लगीं। प्रिया चीखती रही। हर चीख के साथ चाबुक और जोर से पड़ता।

राहुल ने एक मोटी मोमबत्ती जलाई और पिघला हुआ मोम प्रिया के स्तनों और पेट पर गिराने लगा। गर्म मोम लगते ही प्रिया का शरीर उछल पड़ता। करण ने उसी समय डिल्डो को उसकी गांड में फिर से घुसेड़ दिया और घुमाते हुए अंदर-बाहर करने लगा। विक्रम चाबुक से उसकी जांघों को लहूलुहान किए जा रहा था।

रात के बारह बज चुके थे। तीनों थकने के बजाय और उत्तेजित हो रहे थे। उन्होंने प्रिया को खोलकर कुत्ते की तरह फर्श पर गिरा दिया। विक्रम ने उसके मुंह में gag फिर से ठूंस दिया। राहुल ने पीछे से गांड में लंड डाला और करण ने चुत में। दोनों एक साथ धक्के मारते हुए प्रिया को फर्श पर घसीटने लगे। प्रिया का माथा फर्श से रगड़ खा रहा था। शरीर पर मोम, थूक, माल और पसीना सब मिलाजुला था।

वे दोनों लगभग बीस मिनट तक बिना रुके चोदते रहे। प्रिया की आवाज अब सिर्फ दबी हुई कराह बनकर रह गई थी। आखिर में राहुल ने गांड में और करण ने चुत में एक साथ झड़कर अपना माल भर दिया। प्रिया फर्श पर ढेर की तरह गिर गई। शरीर कांप रहा था। आंखें बंद थीं।
विक्रम ने उसके बाल पकड़कर सिर उठाया और चेहरे पर थूक दिया। “कल रात फिर आउंगा। अगली बार तेरे पति को भी बांधकर रखूंगा। उसे भी सिखाना है कैसे अपनी बीवी की गांड देखी जाती है।”

तीनों कपड़े पहनने लगे। जाने से पहले राहुल ने प्रिया की गांड पर एक आखिरी जोरदार थप्पड़ जड़ा। करण ने उसके निप्पल के क्लैंप को खींचकर अलग किया। प्रिया की चीख निकल गई।

दरवाजा बंद होते ही सन्नाटा छा गया। मैं कोने में खड़ा अपनी छोटी लुल्ली हिला रहा था। प्रिया फर्श पर पड़ी थी। शरीर पर अनगिनत निशान, मोम के धब्बे, सूखा हुआ माल। उसने आंखें खोलीं और धीमी आवाज में बोली, “पानी… और… कल रात और जोर से… मुझे तोड़ना चाहते हैं वो…”

मैंने पानी पिलाया। फिर उसके घावों पर गीला कपड़ा रखा। प्रिया मुस्कुराई। उस मुस्कान में दर्द था, भूख थी और एक ऐसी विकृति जो अब कभी खत्म नहीं होने वाली थी।
मैं जानता था कि यह सिलसिला रुकने वाला नहीं। प्रिया अब सिर्फ चुदने के लिए जी रही थी। और मैं… मैं उसकी इस बर्बर भूख का सबसे वफादार गवाह बन चुका था। अगली रात और भी क्रूर होने वाली थी। और मैं फिर से वहीं खड़ा रहूंगा, देखता हुआ, हिलाता हुआ, और अपनी हार को हर बार नए सिरे से स्वीकार करता हुआ।

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साले की बीवी की कोख में बीज

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