इंदौर के एक साधारण घर में शुरू हुई वह आग, जहाँ जीजा ने सलहज को दीवार से सटाकर उसकी हर साँस छीन ली, पेट में अपना खून उतार दिया और दोनों हमेशा के लिए एक-दूसरे के गुलाम बन गए।
मेरा नाम है राहुल वर्मा। मैं इंदौर, मध्य प्रदेश का रहने वाला हूँ। उम्र 34 साल। शादीशुदा हूँ, दो बच्चे हैं—एक बेटा 8 साल का और एक बेटी 5 साल की। पत्नी का नाम सीमा है। हम एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में रहते हैं। घर छोटा-सा है, दो कमरे, एक रसोई और बाहर खुला आँगन। मैं प्राइवेट कंपनी में अकाउंटेंट हूँ। जीवन सामान्य चल रहा था… जब तक कि सीमा का छोटा भाई और उसकी पत्नी हमारे घर नहीं आए।
सीमा का भाई अमित शर्मा, उम्र 29 साल। उसकी पत्नी का नाम है नैना शर्मा, उम्र 26 साल। गोरी, लंबे बाल, गदराया हुआ जिस्म, 34 साइज के मम्मे और गोल-मटोल नितंब। नैना देखने में शांत लगती थी, लेकिन उसकी आँखों में कुछ ऐसा था जो पहली मुलाकात में ही मेरे अंदर जलन पैदा कर गया।
घर की दीवारें पुरानी हो चुकी थीं। प्लास्टर गिरने लगा था। सीमा ने कहा, “राहुल, अमित को बुला लो। वह मिस्त्री का काम भी जानता है। बाहर से किसी को रखने से बेहतर है अपना ही साला आ जाए।”
मैंने मना नहीं किया। अमित को फोन किया। उसने कहा, “ठीक है जीजा। नैना को भी साथ ले आऊँगा। मदद कर देगी।”
दो दिन बाद अमित और नैना हमारे घर पहुँचे। उनके साथ उनके दो छोटे बच्चे भी थे। घर में भीड़ हो गई। रात को हम सब आँगन में चारपाई बिछाकर सोने लगे। माँ अंदर कमरे में सोती थीं।
पहले दो दिन सामान्य रहे। अमित दीवारों पर प्लास्टर करता, मैं और सीमा मदद करते। नैना भी साथ में रहती। लेकिन तीसरे दिन से उसकी नजरें मुझ पर टिकने लगीं। जब मैं सीमेंट मिलाता, वह पास आकर पानी देती। उसकी उंगलियाँ मेरे हाथ से रगड़ खा जातीं। जब मैं सीढ़ी पर चढ़ता, वह नीचे से मेरी पैंट की तरफ देखती। एक बार तो उसने जान-बूझकर अपना दुपट्टा गिरा दिया और झुककर उठाते समय अपनी गहरी साड़ी की ब्लाउज की दरार मुझे दिखा दी।
मैं पीछे नहीं हटा। मैंने भी उसकी तरफ देखना शुरू कर दिया। उसकी कमर की लचक, उसके मम्मों का हिलना, उसके होंठों पर हल्की मुस्कान—सब मुझे पागल बनाने लगा। रात को जब सब सो जाते, मैं आँखें बंद करके नैना की कल्पना करता। उसकी गोरी जाँघें, उसकी गीली चूत, और मैं उस पर सवार होकर उसे चीरता हुआ।
एक रात चिकन बिरयानी बनाई गई। सबने खाया। पेट भरकर लोग सो गए। रात के 1 बजे अचानक किसी ने मेरे कंधे को हिलाया। आँख खोलकर देखा—नैना खड़ी थी। साड़ी की जगह उसने सिर्फ एक पतली नाइटी पहन रखी थी। नाइटी के अंदर कुछ नहीं। उसके मम्मे नाइटी से बाहर आने को बेताब थे। निपल्स कड़े हो चुके थे।
“जीजा… बाहर आओ,” उसने फुसफुसाया।
“सब जाग जाएँगे,” मैंने कहा।
“कोई नहीं जागेगा। आ जाओ।”
join my telegram channel for leaked videos
मैं उठकर उसके पीछे-पीछे आँगन के कोने में चला गया जहाँ अँधेरा था। नैना ने अचानक मेरे गले में हाथ डाल लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर चिपका दिए। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर से खींचे और गहरा चुंबन लिया। उसके मम्मे मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे। मैंने नाइटी ऊपर कर दी। उसके नंगे जिस्म पर हाथ फिराने लगा। एक हाथ से उसके बाएँ मम्मे को मसलने लगा, दूसरे हाथ से उसकी चूत पर। वह पहले से ही गीली थी। उंगलियाँ अंदर घुसते ही उसकी सिसकी निकल गई।
“जीजा… जोर से करो… मुझे दर्द दो,” उसने कहा।
मैंने दो उंगलियाँ उसकी चूत में ठूँस दीं और तेज-तेज मारने लगा। उसी समय तीसरी उंगली उसकी गांड के छेद पर रख दी। वह काँप उठी। “आह… जीजा… गांड में भी डालो…”
मैंने उसकी गांड की अंगुली अंदर घुसा दी। दोनों छेदों में उंगलियाँ घुमाते हुए उसे दीवार से सटा दिया। वह मेरे कंधे पर दाँत गड़ा रही थी ताकि आवाज न निकले। मैंने उसकी चूत और गांड दोनों को फाड़ते हुए उंगलियों से चोदा। वह झड़ गई। उसके पानी से मेरी हथेली भीग गई।
लेकिन उसी रात हम और आगे नहीं बढ़ पाए। अमित की खर्राटे की आवाज आ गई। हम अलग हो गए। अगले दिन अमित और नैना अपने घर चले गए।
पंद्रह दिन बाद मौका मिला। मैं अमित के घर गया। अमित और उसके माँ-बाप खेत पर गए हुए थे। घर में सिर्फ नैना थी। बच्चे स्कूल में थे। मैंने दरवाजा खटखटाया। नैना ने खोला। वह फिर से नाइटी में थी।
जैसे ही मैं अंदर घुसा, उसने दरवाजा बंद कर दिया। कोई बात नहीं की। बस मेरे गले में हाथ डालकर मुझे दीवार से सटा दिया। इस बार कोई हिचक नहीं थी।
“आज पूरा चोदो मुझे, जीजा। जितना दर्द दे सको, दो। मुझे कुतिया बनाकर चोदो,” उसने साफ कहा।
मैंने उसकी नाइटी फाड़ दी। उसके नंगे जिस्म को देखकर मेरा लण्ड फटने को हो आया। 8.5 इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा। मैंने उसे बालों से पकड़कर घुटनों पर बैठा दिया।
“मुँह खोल,” मैंने हुक्म दिया।
नैना ने मुँह खोला। मैंने अपना लण्ड उसके गले तक ठूँस दिया। वह गैग करने लगी, आँखों से आँसू बहने लगे, लेकिन मैंने उसके सिर को पकड़कर और अंदर धकेला। उसकी लार मेरे अंडों तक बह रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ उसकी गर्दन में उभार आ जाता। वह सिसक रही थी, लेकिन विरोध नहीं कर रही थी। बल्कि उसकी एक हाथ अपनी चूत पर था और वह खुद को सहला रही थी।
दस मिनट तक मैंने उसका मुँह बलात्कार की तरह चोदा। फिर मैंने उसे खींचकर सोफे पर पटक दिया। उसे घोड़ी बना दिया। उसके नितंबों को दोनों हाथों से फैलाया। उसकी चूत पूरी तरह फूलकर लाल हो चुकी थी, पानी टपक रहा था। मैंने अपने लण्ड का टोपा उसके छेद पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर घुसेड़ दिया।
“आह्ह्ह… फट गई… जीजा… धीरे…” वह चिल्लाई।
मैंने एक भी नहीं सुनी। उसके कूल्हों को पकड़कर जानवर की तरह धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उसके मम्मे सोफे से टकरा रहे थे। चूत और लण्ड की चप-चप की आवाज पूरे घर में गूँज रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में कहा, “तेरी यह तंग चूत सिर्फ मेरे लिए है। अमित तेरी गांड भी नहीं फाड़ पाया होगा। आज मैं दोनों छेद फाड़ दूँगा।”
उसने जवाब में सिर्फ कराह भरी। मैंने रफ्तार बढ़ा दी। उसकी चूत मेरे लण्ड को निगल रही थी। दो बार वह जोर से काँपी और झड़ गई। उसका पानी मेरे अंडों पर गिर रहा था। मैंने लण्ड निकाला और उसकी गांड के छेद पर रख दिया।
“नहीं… जीजा… गांड में मत डालो… बहुत मोटा है…” वह डर गई।
मैंने थूक लगाकर एक जोरदार धक्का मारा। आधा लण्ड उसकी गांड में घुस गया। वह चीख पड़ी। मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया और बाकी लण्ड भी अंदर धकेल दिया। उसकी गांड मेरे लण्ड को जकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। पहले दर्द था, फिर वह खुद अपनी गांड पीछे मारने लगी।
“चोदो… जीजा… गांड फाड़ दो… कुतिया बना दो मुझे…”
मैंने उसकी गांड को बेरहमी से चोदा। बीच-बीच में लण्ड निकालकर उसकी चूत में डालता, फिर वापस गांड में। उसके शरीर पर मेरे नाखूनों के निशान पड़ गए। मैंने उसके मम्मों को इतना मसला कि निपल्स लाल हो गए। एक बार तो मैंने उसके गले को हल्के से दबाया। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं, लेकिन वह और जोर से झड़ गई।
आखिर में मैंने उसे पीठ के बल लिटाया। उसकी टाँगें उसके कंधों तक मोड़ दीं। पूरा वजन उसके ऊपर डालकर मैंने उसकी चूत में लण्ड ठोकना शुरू कर दिया। इस पोजीशन में मेरा लण्ड उसकी कोख तक जा रहा था। वह पागलों की तरह चिल्ला रही थी।
“वीर्य अंदर डालो… जीजा… मुझे गर्भवती बना दो… अमित का नहीं, तुम्हारा बच्चा चाहिए…”
ये सुनकर मेरा कंट्रोल टूट गया। मैंने 8-10 आखिरी जानलेवा धक्के मारे और उसकी चूत के सबसे गहरे हिस्से में अपना पूरा गर्म वीर्य उंडेल दिया। इतना कि वीर्य बाहर निकलकर उसकी जाँघों पर बहने लगा।
हम दोनों पसीने से लथपथ सोफे पर गिरे पड़े थे। नैना की चूत और गांड दोनों से वीर्य टपक रहा था। उसके शरीर पर काटने और नाखून के निशान थे। आँखों में आँसू थे, लेकिन मुस्कान भी थी।
उसके बाद हमारा खेल नियमित हो गया। हर हफ्ते मैं किसी न किसी बहाने अमित के घर पहुँच जाता। कभी मैं उसे रसोई में चोदता, कभी छत पर, कभी रात को जब अमित सो जाता तो हम दोनों बाहर मैदान में जाकर कुत्ते-बिल्ली की तरह मिलते। एक बार तो मैंने उसे हाथ-पैर बाँधकर चोदा। रस्सी से उसके हाथ बिस्तर से बाँधे, आँखों पर पट्टी बाँधी और घंटों तक उसकी चूत, गांड और मुँह तीनों का इस्तेमाल किया। उसने उस दिन इतने जोर से काटा कि मेरे कंधे पर दाँत के निशान कई दिन तक रहे।
दो महीने बाद नैना ने बताया कि वह प्रेग्नेंट है। टेस्ट में पॉजिटिव आया। अमित खुश था, सोच रहा था कि उसका बच्चा है। लेकिन नैना और मैं जानते थे सच्चाई। नैना ने कहा, “यह बच्चा तुम्हारा है जीजा। तुमने मेरी कोख में वीर्य बोया था। अब मैं तुम्हारी रखैल हूँ। जब चाहो आओ, जैसे चाहो चोदो।”
आज भी जब मैं इंदौर की उन गलियों से गुजरता हूँ, तो वह रातें याद आ जाती हैं। नैना की चीखें, उसकी गीली चूत, उसकी फटी हुई गांड और वह अहसास जब मैं उसके अंदर अपना बीज छोड़ रहा था।
आज भी जब मैं इंदौर की उन गलियों से गुजरता हूँ तो नैना की चीखें कानों में गूँजती हैं। लेकिन कहानी वहाँ खत्म नहीं हुई थी। प्रेग्नेंसी का पता चलने के बाद हमारा रिश्ता और भी गहरा, और भी काला हो गया।
नैना का पेट धीरे-धीरे बढ़ने लगा। तीसरे महीने में उसका पेट हल्का सा गोल हो चुका था। अमित खुश था। वह रोज नैना के पेट पर हाथ फेरता और कहता, “मेरा बेटा है।” नैना मुस्कुरा देती, लेकिन उसकी आँखें मुझसे मिलतीं तो उनमें भूख होती।
एक दोपहर मैं फिर उसके घर पहुँचा। अमित दफ्तर गया था। बच्चे स्कूल में थे। सास-ससुर गाँव गए हुए थे। घर पूरी तरह खाली। नैना ने दरवाजा खोला तो वह सिर्फ एक काली साटन की नाइटी में थी। नाइटी पेट के नीचे तक नहीं पहुँच रही थी। उसके बढ़ते हुए पेट के नीचे उसकी चूत साफ नजर आ रही थी। बाल साफ मुँडे हुए थे। चूत के होंठ पहले से ज्यादा मोटे और काले पड़ गए थे।
“आज कुछ अलग करना है,” उसने कहा और मेरे हाथ में एक काली रस्सी थमा दी। “जितना चाहो बांधो। जितना दर्द दो, उतना अच्छा।”
मैंने उसे खींचकर बेडरूम में ले गया। बिस्तर के चारों कोनों पर पहले से लोहे के छल्ले लगे हुए थे। नैना ने खुद ही अपनी नाइटी उतार दी और नंगी लेट गई। मैंने उसकी दोनों कलाई रस्सी से बाँधकर छल्लों में फँसा दी। फिर दोनों टाँगें फैलाकर टखनों को भी बाँध दिया। वह पूरी तरह फैली हुई थी। पेट ऊपर उठा हुआ, मम्मे बड़े हो चुके थे, निपल्स काले और मोटे। चूत खुली पड़ी थी, अंदर का गुलाबी हिस्सा साफ दिख रहा था।
मैंने अपनी पैंट खोली। 8.5 इंच का लण्ड पहले से कड़ा था। मैंने उसके मुँह के पास लाकर थ Hopा दिया। “चाट।”
नैना ने जीभ निकाली और लण्ड की नसों को चाटने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुँह में पूरा लण्ड ठूँस दिया। गर्भवती होने के बावजूद उसने गला खोल दिया। लण्ड उसके गले तक चला गया। आँखों से आँसू बहने लगे, नाक से सिनक आने लगी, लेकिन वह रोकने की कोशिश नहीं कर रही थी। मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ उसकी गर्दन में उभार आता। लार उसके गले से बहकर गर्दन और मम्मों पर गिर रही थी।
बीस मिनट तक मैंने सिर्फ उसका मुँह इस्तेमाल किया। जब मेरा लण्ड पूरी तरह उसके थूक से चमकने लगा तो मैंने निकाल लिया। उसकी साँसें उखड़ रही थीं। मैंने बिस्तर के नीचे से एक पतला बेंत निकाला जो उसने खुद रखा था।
“आज मारोगे?” उसने पूछा, आँखों में चमक के साथ।
मैंने जवाब में बेंत उसकी जाँघ पर पटका। एक लाल लकीर उभर आई। नैना कराह उठी। दूसरी चोट उसकी दूसरी जाँघ पर। तीसरी उसके बाएँ मम्मे पर। निपल के ठीक ऊपर बेंत लगा। वह चीख पड़ी। मैंने उसके पेट को छोड़कर बाकी शरीर पर बेंत चलाना शुरू कर दिया। जाँघें, नितंब, मम्मे, पीठ—हर जगह लाल निशान पड़ गए। वह रस्सियों में तड़प रही थी, लेकिन हर चोट के बाद उसकी चूत से पानी और ज्यादा बहने लगा।
जब उसका शरीर जलने लगा तो मैंने बेंत फेंक दिया। उसके ऊपर चढ़ गया। लण्ड को उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर घुसेड़ दिया। गर्भवती चूत पहले से ज्यादा गरम और तंग लग रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में बोला, “तेरे अंदर मेरा बच्चा पल रहा है और मैं आज तेरी चूत को फाड़ने वाला हूँ।”
फिर शुरू हुआ असली खेल। मैंने उसके कूल्हों को इतनी जोर से पकड़ा कि नाखून गड़ गए। धक्के इतने भारी थे कि बिस्तर चरमरा रहा था। हर धक्के के साथ उसका पेट हिल रहा था। मैंने एक हाथ से उसका गला दबाया। साँस रुकने लगी तो उसकी चूत और जोर से सिकुड़ने लगी। वह झड़ गई। पानी मेरे लण्ड पर छलक आया। मैंने रुकने का नाम नहीं लिया। गला छोड़कर दोनों मम्मों को मसलने लगा। निपल्स को दाँतों से काटा। खून की एक बूंद निकली तो मैंने चाट ली।
“गांड में डालो,” उसने हाँफते हुए कहा। “आज गांड फाड़ दो।”
मैंने लण्ड निकाला। चूत से वीर्य और पानी का मिश्रण बह रहा था। मैंने उसके नितंबों को और फैलाया। गांड का छेद पहले से थोड़ा ढीला पड़ चुका था हमारे पुराने खेलों की वजह से, लेकिन फिर भी तंग था। मैंने थूक लगाकर टोपा लगाया और धीरे-धीरे धकेलना शुरू किया। आधा जाने के बाद नैना चीख पड़ी। मैंने एक हाथ से उसका मुँह बंद किया और बाकी लण्ड एक ही झटके में अंदर धकेल दिया।
उसकी गांड मेरे लण्ड को जकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे गति बढ़ाई। पहले दर्द की चीखें थीं, फिर वह खुद अपनी गांड पीछे मारने लगी। मैंने रस्सियाँ थोड़ी ढीली कीं ताकि वह हिल सके। फिर दोनों छेदों को बारी-बारी से चोदने लगा। कभी चूत, कभी गांड। कभी दोनों में उंगलियाँ और लण्ड एक साथ। उसकी चीखें दीवारों से टकरा रही थीं।
एक बार तो मैंने उसके मुँह में अपनी चार उंगलियाँ ठूँस दीं और उसी समय गांड में लण्ड। वह गैग कर रही थी, आँसू बह रहे थे, लेकिन शरीर कांप-कांपकर झड़ रहा था। मैंने उसकी चूत पर थप्पड़ मारे। इतने जोर से कि लाल हो गई। फिर दो उंगलियाँ चूत में डालकर उसकी गांड चोदता रहा।
आखिर में जब मेरा पानी निकलने वाला था तो मैंने लण्ड उसकी चूत में डाला। टाँगें उसके कंधों तक मोड़ दीं। पूरा वजन उसके बढ़ते पेट पर डालकर मैंने आखिरी धक्के मारे। इतने गहरे कि लगा कोख छू रहा हूँ। नैना की आँखें पलट गईं। वह लगातार झड़ रही थी। मैंने उसके गले को दोनों हाथों से दबाया और उसी हालत में अपना पूरा वीर्य उसकी चूत के सबसे गहरे हिस्से में उंडेल दिया। इतना कि वीर्य बाहर निकलकर उसके मलाशय तक बह गया।
रस्सियाँ खोलने के बाद भी वह हिल नहीं पा रही थी। शरीर पर बेंत के निशान, नाखून के निशान, काटने के निशान। चूत और गांड दोनों से वीर्य टपक रहा था। मैंने उसके बगल में लेटकर उसके पेट पर हाथ फेरा।
“यह बच्चा भी तेरा गुलाम बनेगा,” उसने फुसफुसाया। “जैसे मैं हूँ।”
उसके बाद के महीने और भी कठोर होते गए। पाँचवें महीने में जब पेट साफ दिखने लगा तब मैंने उसे एक नई सजा दी। मैंने उसके दोनों मम्मों पर क्लिप लगाई। छोटी-छोटी धातु की क्लिप जो निपल्स को दबाती थीं। फिर एक पतली चेन दोनों क्लिपों को जोड़ती थी। मैं चेन खींचता तो उसके मम्मे खिंच जाते। उसी हालत में मैं उसे कुत्ते की तरह रेंगने पर मजबूर करता। फर्श पर चारों हाथ-पैरों के बल। चेन मेरे हाथ में। जब चाहता खींच लेता। उसके पीछे से चूत या गांड में लण्ड डाल देता। वह रेंगती रहती और मैं उसके अंदर धक्के मारता रहता।
एक शाम तो मैंने उसे बालकनी में उसी हालत में चोदा। नीचे गली में लोग आ-जा रहे थे। नैना का मुँह मैंने कपड़े से बंद कर रखा था। सिर्फ उसकी आँखें दिख रही थीं। मैंने उसके नितंबों को फैलाकर गांड में लण्ड डाल रखा था और धीरे-धीरे हिला रहा था। डर के मारे उसकी चूत पानी छोड़ रही थी जो फर्श पर गिर रहा था।
सातवें महीने में खेल और खतरनाक हो गया। अब उसका पेट काफी बड़ा था। मैंने उसे कुर्सी पर बैठाया, टाँगें फैलाईं और कुर्सी के हाथों से बाँध दिया। फिर उसके सामने घुटनों के बल बैठा और उसकी चूत चाटने लगा। जीभ अंदर तक ले जाकर उसके क्लिटोरिस को दाँतों से हल्का काटता। वह तड़पती। जब वह झड़ने के करीब होती तो मैं रुक जाता। तीन-चार बार ऐसा किया। आखिर में जब वह रोने लगी तो मैंने खड़ा होकर उसका मुँह खोला और लण्ड उसके गले में उतार दिया। उसी समय दो उंगलियाँ उसकी चूत में और एक उंगली गांड में। तीनों छेद एक साथ भरे हुए। वह गैग कर रही थी, आँसू बह रहे थे, शरीर कांप रहा था। मैंने उसके गले में लण्ड रखते हुए ही झड़ गया। वीर्य उसके मुँह में भर गया। कुछ उसने निगला, कुछ बाहर निकला।
प्रसव से दो हफ्ते पहले आखिरी बार मिला। उस दिन मैंने कोई रस्सी नहीं इस्तेमाल की। सिर्फ अपने हाथों से उसे नियंत्रित किया। उसे दीवार से सटाया। एक हाथ से दोनों कलाई ऊपर पकड़ीं। दूसरे हाथ से उसका गला। फिर नीचे से लण्ड उसकी चूत में प्रवेश कराया। गर्भवती शरीर में लण्ड अलग था। मैंने धीरे शुरू किया, फिर रफ्तार बढ़ाई। उसके पेट के बीच मेरा पेट रगड़ खा रहा था। हर धक्के के साथ वह कराहती। मैंने गला थोड़ा और दबाया। उसकी आँखें लाल हो गईं। उसी दबाव में वह जोर से झड़ी। उसकी चूत ने मेरे लण्ड को इतने जोर से जकड़ा कि मैं भी उसके साथ ही निकल गया। वीर्य इतना था कि उसकी जाँघों से होता हुआ फर्श तक पहुँच गया।
बच्चा पैदा हुआ—एक लड़का। अमित ने नाम रखा। लेकिन नैना ने मुझे अकेले में बताया, “यह तुम्हारा खून है। तुम्हारे वीर्य से बना है। और जब यह बड़ा होगा तो मैं इसे भी सिखाऊँगी कि असली मजा दर्द में है।”
आज सालों बाद भी जब कभी मौका मिलता है, मैं नैना के पास जाता हूँ। अब उसके शरीर पर पुराने निशान हैं—बेंत के, रस्सी के, दाँतों के। लेकिन उसकी भूख पहले जैसी ही है। बल्कि और बढ़ गई है। कभी-कभी वह खुद रस्सी लेकर आती है और कहती है, “आज पहले जैसी सजा दो। और कठोर। इस बार खून भी निकालना।”
और मैं निकालता हूँ। क्योंकि एक बार जब तुम सीमा पार कर लेते हो, तो वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं बचता। सिर्फ और गहरा अंधेरा बचता है। और उस अंधेरे में नैना और मैं दोनों खो चुके हैं—एक-दूसरे के शरीर में, एक-दूसरे की हवस में, एक-दूसरे के दर्द में।
Pingback: mature mom porn stories :- दोस्त की माँ - Lustystories