ससुर की फटी गांड वाली बहु

शादी की रात पति के बाप ने बहु की कुंवारी गांड फाड़ दी। बदला लेने बहु ने पति को गुलाम बनाकर सालों तक खून-पसीने वाली क्रूर चुदाई की। दर्द, खून और पागलपन की सबसे काली कहानी।

राहुल की शादी आज उसकी सपनों की राजकुमारी से हो गई थी। वो बहुत खुश था, जैसे उसे कोई अनमोल खजाना मिल गया हो। शादी की रस्में खत्म होने के बाद सब अपने-अपने कमरों में चले गए थे। राहुल अपनी नई-नवेली दुल्हन के साथ सुहागरात मनाने को बेकरार था।
मेघना ने आज तक किसी को भी अपने शरीर को छूने नहीं दिया था। वो बहुत स्वाभिमानी लड़की थी। लेकिन आज मौका भी था और अधिकार भी।

राहुल के दोस्तों ने जबरदस्ती उसे बहुत ज्यादा वियाग्रा खिला दी थी। उसका 8 इंच का मोटा, नसों से भरा लंड सिर्फ मेघना के ख्याल से ही लोहे की तरह कठोर हो गया था। नसें फूली हुई बाहर निकल रही थीं। इंतजार नहीं हुआ तो वो जल्दी से कमरे में गया।
कमरा फूलों से सजा था। बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी थीं। टेबल पर शराब का गिलास रखा था। मादक खुशबू पूरे कमरे में फैली हुई थी। लेकिन दुल्हन कहीं नहीं थी।

मेघना का फोन कमरे में ही पड़ा था। वॉलपेपर पर दोनों की शादी की फोटो थी। वियाग्रा ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। राहुल का लंड चुदाई मांग रहा था। वो एक हाथ से लंड दबाए हुए पूरे घर में मेघना को खोजने लगा। कहीं नहीं मिली।
तभी बेसमेंट से गहनों की खनकने की आवाज आई। राहुल का दिल जोर से धड़का। वो धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे गया। दरवाजे के छेद से देखा तो उसके होश उड़ गए।

एक पतली कमर और बहुत बड़ी गोल गांड वाली लड़की चाँद की रोशनी में चमक रही थी। कमर में करधनी, नाक में नथ, हाथों में दुल्हन जैसे गहने, गले में मंगलसूत्र। उसके दुल्हन वाले कपड़े फर्श पर पड़े थे। वो एक 58 साल के मोटे, सफेद बालों वाले आदमी के ऊपर उछल-उछल कर चुदवा रही थी।

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उसकी सिसकियाँ इतनी जोर की थीं जैसे कोई भूखी शेरनी हो। हर धक्के के साथ वो आदमी और तेजी से उसकी चूत में घुस रहा था। मेघना के बड़े-बड़े 38 साइज के बूब्स गेंद की तरह उछल रहे थे। आँखें बंद किए वो चुदाई का मजा ले रही थी।
राहुल चीख उठा—“मेघना! ये क्या कर रही हो?”

दरवाजा बंद था। वो जोर-जोर से पीटने लगा लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। नीचे उसका लंड अपनी बीवी की चुदाई किसी और के लंड से होते देखकर फड़फड़ाने लगा। दर्द होने लगा। वो न चाहते हुए भी अपने लंड को मसलने लगा। आँखों में आँसू थे।
आवाज सुनकर दोनों मुड़े। मेघना अपने ही पति के बाप की गोद में बैठी थी और उनके मोटे लंड से चुदवा रही थी।
सुहागरात तो मन रही थी, लेकिन राहुल और मेघना की नहीं। राहुल के बाप विजय और उसकी नई बहु की।

विजय की आँखों में आँसू थे लेकिन वो चुदाई का मजा ले रहा था जैसे सालों की भूख हो। अंदर ही अंदर गिल्ट से मर रहा था लेकिन सामने उसके बेटे की बीवी का शरीर था। कैसे रोक पाता।

मेघना के चेहरे पर कातिल मुस्कान थी। जरा भी पछतावा नहीं। अब तो और जोर से चुदवाने लगी। दोनों की आँखें एक-दूसरे से मिलीं। राहुल न चाहते हुए भी लंड हिलाए जा रहा था वरना उसका लंड फट जाता। दोस्तों ने बहुत ज्यादा डोज दे दी थी। दिल घोड़े की तरह भाग रहा था। हाथ इतनी तेजी से आगे-पीछे हो रहे थे कि लंड लाल हो गया था। न झड़ने का नाम ले रहा था न मेघना की चुदाई रुकने का।

विजय ने मेघना को घोड़ी बना लिया। उसकी बड़ी गांड पर अपना मोटा लंड रखा और घिसने लगा।
मेघना राहुल की तरफ देखते हुए बोली—“उफ्फ्फ्फ पापा… अब और कितना तड़पाओगे? देखो न आपका बेटा कितना बेचैन हो रहा है अपनी बीवी की चुदाई देखने को। अब जल्दी से चोद दो। मेरी गांड फाड़ दो… आह्ह्ह्ह…”
दोनों का चेहरा आमने-सामने था। राहुल वहाँ से जाना चाहता था लेकिन पैर नहीं उठ रहे थे। वो लगातार लंड हिलाए जा रहा था।
“आह्ह्ह्हह्हह… मर गई! उफ्फ्फ्फ्फ आप कितने बेदर्द हो…”

विजय ने एक ही झटके में अपना पूरा 9 इंच का मोटा लंड मेघना की कुँवारी गांड में घुसा दिया। गांड फट गई। खून से लंड रंग गया लेकिन विजय किसी जानवर की तरह अपनी बहु की गांड मारने लगा। मेघना कुछ देर दर्द से बिलखती रही फिर मजा आने लगा। वो गांड उठा-उठा कर ससुर की चुदाई में साथ देने लगी। दोनों की सिसकियाँ चरम पर थीं।

मेघना कम से कम 12 बार झड़ चुकी थी। राहुल का लंड बुरी तरह छिल गया था लगातार हिलाने से। उस रात बेसमेंट में पूरी रात चुदाई की आवाजें गूंजती रहीं।
सुबह 9 बजे घर में सिर्फ राहुल और उसके बाप रह गए थे। मेघना भी रहने आ गई थी। राहुल बाहर किसी पागल की तरह बैठा था। एकदम गुमसुम।

विजय रोते हुए आया। हाथ काँप रहे थे। आँखों में अपने बेटे की जिंदगी बर्बाद करने का दुख था। वो राहुल के पैरों में गिरकर माफी माँगना चाहता था। राहुल ने उसे धक्का दिया और लड़खड़ाते हुए कमरे में चला गया जहाँ मेघना बिस्तर के कोने में बैठी थी। उसकी आँखें लाल थीं।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा। राहुल की आँखों में सिर्फ सवाल थे।

मेघना फीकी मुस्कान के साथ बोली—“तुम्हें मेरा चेहरा देखकर कुछ याद नहीं आता? ध्यान से देखो। शायद याद आए। एक चुलबुली सी मासूम लड़की जो तुम्हारे प्यार में पागल थी। तुमने उसके तन-मन सबसे प्यार किया फिर सामान की तरह इस्तेमाल करके छोड़ दिया। वो तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली थी।”

राहुल बिना किसी भाव के बस सुन रहा था। मुँह से सिर्फ एक शब्द निकला—“किरण…”
“हाँ, किरण। उसकी छोटी बहन हूँ मैं। हम दोनों बहने एक-दूसरे से सब कुछ शेयर करती थीं। वो हमेशा तुम्हारे बारे में बात करती थी। नाम नहीं बताती थी। बोलती थी जब शादी की बात करने घर आएगा तो नाम भी जान लेना। तुम नहीं आए। वो चली गई हमेशा के लिए… अपने पेट में तुम्हारी निशानी लेकर।”

मेघना टूट पड़ी। आवाज में बेतहाशा दुख और गुस्सा था—“अब पता चला न राहुल… जब कोई तुमसे प्यार करे और तुम धोखा दो तो कितना दर्द होता है। ये दर्द किरण ने सहा था। अब तुम सहो।”
राहुल बिना कुछ बोले वहाँ से चला गया। शाम हो गई। न उसकी खबर थी न मेघना को होश।
तभी फोन बजा। इंस्पेक्टर आकाश का कॉल आया जो राहुल का बचपन का दोस्त था।

“यार मेघना… प्लीज माफ करना। बड़ी गलती हो गई। हमने राहुल को समझने में भारी भूल कर दी।”
मेघना होश में आई—“मतलब?”
आकाश रोते हुए बोला—“जिसे तुम राहुल समझ रही थी वो तो उसके जुड़वाँ भाई रोहित है। दोनों बिलकुल एक जैसे हैं। किरण रोहित से प्यार करती थी, राहुल से नहीं। जब रोहित को किरण के प्रेग्नेंट होने की बात पता चली तो वो भाग गया।

इन्हीं हरकतों की वजह से विजय जी ने उसे घर से निकाल दिया था और किसी को नहीं बताया कि उनका एक और बेटा है। राहुल तो बहुत अच्छा लड़का है। वो किरण से शादी तक करने को तैयार था लेकिन किरण ने मना कर दिया। तुम चाहो तो विजय जी से पूछ लो। प्लीज माफ कर दो मेघना… मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।”

मेघना का होश उड़ गया। वो दौड़कर कमरे में गई। अंदर विजय किसी लाश की तरह पड़े थे। मेघना ने जल्दी से एंबुलेंस बुलाई। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया—“इन्हें वियाग्रा के ओवरडोज से हार्ट अटैक आया है। उम्र ज्यादा होने की वजह से सहन नहीं कर पाए।”
मेघना टूट गई। उसने ही तो विजय को वियाग्रा दी थी। बेचारे ने बहुत कोशिश की थी लेकिन मेघना ने उन्हें लुभाने में कामयाबी पाई थी। वो खुद को पुलिस के हवाले करना चाहती थी लेकिन आकाश ने रोक दिया—“पहले राहुल को खोजते हैं।”

हफ्ते बीत गए। आकाश ने आखिरकार राहुल को खोज लिया। किसी पुराने मंदिर के बाहर भिखारियों की तरह बैठा था। दाढ़ी बढ़ गई थी। मानसिक संतुलन खो चुका था। जो मिलता खा लेता वरना भूखा सो जाता। मुँह से हमेशा मेघना का नाम निकलता।
उसकी ये हालत देखकर मेघना का मन हुआ खुद को मार ले लेकिन मजबूर थी।

आज 12 साल बीत चुके हैं। न राहुल सही हुआ न मेघना अपने दुख से बाहर आई। उसके बाप हमेशा कहते थे—“बेटा जल्दी का काम शैतान का होता है। बिना सोचे-समझे कोई काम करोगे तो अपना ही नुकसान होगा।”
और हो गया। उसने एक अच्छा पति खो दिया, एक अच्छा परिवार खो दिया और एक अच्छी जिंदगी खो दी। अब जब तक राहुल की साँसें चलती हैं, तभी तक उसकी साँसें चलती हैं। राहुल आज भी उससे बच्चे की तरह चिपक कर सोता है और पूछता है—“मेरी मेघना मुझे लेने तो आएगी न?”

और वो चाहकर भी उसे सच नहीं बता पाती। वरना उसे पैनिक अटैक आ जाता।
रात के अँधेरे में जब राहुल सो जाता है तो मेघना चुपचाप रोती है। उसके शरीर पर आज भी वे निशान हैं जो विजय ने छोड़े थे। गले में अभी भी मंगलसूत्र है लेकिन वो सिर्फ लोहे की एक जंजीर बनकर रह गया है। कभी-कभी वो खुद को आईने में देखती है और पूछती है—“क्या ये सब जरूरी था?”जवाब कभी नहीं मिलता।

सिर्फ एक बात साफ है—जल्दी का काम शैतान का होता है। और शैतान ने उस रात पूरे परिवार को निगल लिया था।
बारह साल बीत चुके थे। राहुल अब बयालीस का हो चुका था लेकिन दिमाग अभी भी उसी रात में अटका हुआ था। मेघना उनतीस की थी, शरीर अभी भी फर्म था, कमर पतली, गांड भारी और गोल, बूब्स 38 के, लेकिन आँखों में सिर्फ खालीपन।

दोनों एक छोटे से किराये के कमरे में रहते थे शहर के किनारे। राहुल दिनभर मंदिर के बाहर बैठता, रात को घर आकर मेघना से चिपक जाता और बार-बार वही सवाल पूछता—“मेरी मेघना मुझे लेने आएगी न?”
एक रात मेघना ने फैसला कर लिया। वो अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती थी।

राहुल सोया हुआ था। उसने धीरे से उठकर अलमारी खोली। अंदर एक काला चमड़े का बैग रखा था जिसमें सालों से इकट्ठा किए हुए सामान थे—मोटी रस्सियाँ, चमड़े के पट्टे, आयरन चेन, मुंह बंद करने वाला गैग, एनल प्लग्स, व्हिप और एक मोटी लोहे की छड़।

उसने राहुल को बिस्तर पर ही बाँध दिया। हाथ ऊपर, पैर फैलाए, पूरे शरीर को कसकर रस्सियों से जकड़ दिया। जब राहुल की आँख खुली तो उसने देखा मेघना उसके ऊपर बैठी है। उसके चेहरे पर कोई प्यार नहीं था, सिर्फ ठंडा गुस्सा।
“आज तुम मुझे लेने नहीं आएगी,” मेघना ने धीरे से कहा। “आज मैं तुम्हें लूँगी। ठीक वैसे जैसे तुम्हारे बाप ने मुझे लिया था।”

राहुल की आँखें फटी की फटी रह गईं। वो बोलने की कोशिश करता लेकिन मेघना ने तुरंत गैग उसके मुंह में ठूंस दिया। फिर उसने अपना साड़ी का पल्लू हटाया। उसके बूब्स नंगे थे, निप्पल्स कड़े। उसने राहुल के चेहरे पर बैठकर अपनी चूत उसके नाक और मुंह पर रगड़ी।
“सूंघो… ये वही चूत है जो तुम्हारे बाप ने फाड़ी थी। अब तुम भी सूंघो।”

राहुल की साँसें तेज हो गईं। मेघना ने उसके लंड को देखा—वो अभी भी वियाग्रा के असर जैसा कठोर हो रहा था, सालों बाद भी। 8 इंच का मोटा लंड सीधा खड़ा था। मेघना मुस्कुराई।
उसने राहुल के लंड पर थूक लगाया और फिर धीरे-धीरे अपने मुंह में लिया। दाँत घिसाते हुए चूसने लगी। राहुल की कमर उछली लेकिन रस्सियाँ कस गईं। मेघना ने लंड को गले तक उतारा, फिर निकाला और उसके अंडकोश को जोर से दबाया।

“दर्द हो रहा है न? अच्छा है। किरण को भी दर्द हुआ था जब तुम्हारे भाई ने उसे छोड़ दिया था।”
फिर मेघना ने अपना शरीर घुमाया। उसने राहुल के चेहरे पर अपनी बड़ी गांड रख दी और एनल प्लग को अपने गांड में घुसाते हुए जोर-जोर से रगड़ने लगी। प्लग अंदर-बाहर हो रहा था, खून की कुछ बूँदें भी निकलीं लेकिन मेघना रुकने वाली नहीं थी।
“देखो… तुम्हारे बाप ने मेरी गांड फाड़ी थी। अब मैं खुद फाड़ रही हूँ तुम्हारे सामने।”

राहुल की आँखों से आँसू बह रहे थे। मेघना ने अचानक प्लग निकाला और राहुल के लंड को अपनी गांड के छेद पर रखा। बिना किसी लुब्रिकेंट के, एक झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया। गांड फटने की आवाज आई। राहुल की चीख गैग में दब गई। मेघना चिल्लाई—
“आह्ह्ह्ह… फट गई… लेकिन मजा आ रहा है! तुम्हारा लंड तुम्हारे बाप से भी मोटा है!”

वो ऊपर-नीचे कूदने लगी। हर धक्के के साथ गांड और फैलती जा रही थी। खून लंड पर लग रहा था। मेघना ने अपने बूब्स को जोर-जोर से मसलते हुए राहुल के चेहरे पर थप्पड़ मारे।
“चुदवा… चुदवा अपनी बीवी की फटी गांड! ठीक वैसे जैसे तेरे बाप ने चुदाई थी!”

दो घंटे तक मेघना ने राहुल की गांड मारती रही। फिर उसने लंड निकाला, राहुल को पलटा और उसके मुंह से गैग हटाया। तुरंत अपना मुंह उसके मुंह पर रख दिया और खून मिला थूक उसके गले में उतार दिया।
“निगल… अपनी बीवी का खून निगल।”

राहुल ने निगल लिया। मेघना फिर उसके लंड पर बैठ गई, इस बार चूत में। पूरी ताकत से धक्के लगाने लगी। उसके नाखून राहुल की छाती पर खोद रहे थे, खून की लकीरें बन रही थीं। वो बार-बार चिल्ला रही थी—
“किरण… किरण… देख ले बहन… मैं बदला ले रही हूँ!”

जब राहुल झड़ने वाला था तो मेघना ने लंड निकाल लिया और उसके मुंह में ठूंस दिया। पूरा वीर्य उसके गले में उतार दिया। फिर खुद राहुल के चेहरे पर बैठकर झड़ गई। उसका पानी राहुल की आँखों, नाक, मुंह पर फैल गया।
सुबह होने को आई। मेघना थक कर राहुल के बगल में गिर गई। दोनों खून और पसीने से लथपथ थे। रस्सियाँ अभी भी बंधी थीं।

अगले दिन से ये सिलसिला रोज का हो गया। मेघना ने राहुल को पूरा अपना गुलाम बना लिया। दिन में वो उसे कुत्ते की तरह रस्सी से बाँधकर घर में घुमाती। रात को बारी-बारी से गांड, चूत, मुंह सब जगह चुदवाती। कभी व्हिप से पीटती, कभी लोहे की छड़ से उसके अंडकोश को मारती, कभी मोमबत्ती जलाकर उसके लंड पर मोम गिराती।

एक रात मेघना ने कुछ नया किया। उसने राहुल को दीवार से बाँध दिया, उसके लंड में एक पतली लोहे की छड़ घुसा दी और फिर खुद उसके पीछे से अपनी गांड में उसका लंड डालकर जोर-जोर से धक्के लगाने लगी। हर धक्के के साथ छड़ अंदर और गहराई तक जाती। राहुल की चीखें पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

“दर्द सहो… किरण ने भी सहा था… तुम्हारे भाई ने उसे पेट से मार दिया था!”
मेघना पागल हो चुकी थी। वो अब सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग भी तोड़ रही थी। कभी-कभी वो राहुल को आईने के सामने खड़ा करती और कहती—
“देख… तू अब सिर्फ एक जानवर है। मेरा जानवर। तेरे बाप ने मेरी इज्जत ली, मैंने तेरी जान ले ली।”

बारहवें साल के आखिरी महीने में एक रात मेघना ने अंतिम खेल खेला। उसने राहुल को पूरा नंगा करके छत पर ले गई। वहाँ एक पुरानी कुर्सी रखी थी। राहुल को कुर्सी पर बाँधा, उसके लंड को ऊपर की तरफ कसकर बांधा और फिर खुद उसके ऊपर बैठकर लगातार चार घंटे तक चुदवाई। जब राहुल का लंड सुन्न पड़ने लगा तो मेघना ने व्हिप से उसके पूरे शरीर को पीटना शुरू किया। खून की धारें बहने लगीं।

अंत में मेघना खुद थक गई। वो राहुल के पैरों में गिर गई और रोने लगी।
“मुझे माफ कर दे राहुल… मैं पागल हो गई हूँ… किरण चली गई… तेरा बाप मर गया… तू पागल हो गया… और मैं… मैं शैतान बन गई।”
राहुल की आँखों में पहली बार होश की झलक आई। उसने धीरे से कहा—
“मेघना… मुझे बाँधो मत… मुझे मारो मत… बस… मेरे पास रहो।”

मेघना ने रस्सियाँ काट दीं। दोनों एक-दूसरे से लिपट गए। खून, पसीना, आँसू सब मिल गए।
उस रात के बाद मेघना ने सारे सामान जला दिए। राहुल अब भी कभी-कभी पुरानी बातें पूछता लेकिन मेघना चुप रहती। दोनों एक साथ जी रहे थे—टूटे हुए, खून से सने हुए, लेकिन साथ।

कभी-कभी रात के अँधेरे में मेघना राहुल के लंड को धीरे से सहलाती और फुसफुसाती—“आज सिर्फ प्यार से… कोई दर्द नहीं।”
और राहुल उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए जवाब देता—“जैसी तुम्हारी मर्जी… मेरी मेघना।”
शैतान ने परिवार निगल लिया था। लेकिन दो टूटी हुई आत्माएँ अभी भी एक-दूसरे से चिपकी हुई थीं—खून और सजा के बावजूद।

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