कर्ज में डूबे पति ने बीवी रीना को बूढ़े राजू चाचा ने चोदा

कर्ज में डूबे पति ने बीवी रीना को बूढ़े राजू चाचा और उसके दरिंदों के हवाले कर दिया। रस्सी, बेल्ट, मोम और तीन छेदों की क्रूर चुदाई में रीना दर्द की दीवानी बन गई। हर रात और निर्दय।

मध्य प्रदेश के एक औद्योगिक शहर में, शिप्रा विहार नाम की कॉलोनी थी। वहाँ तीन मंजिला बंगला था फरहान और रीना का। शानदार, सुरक्षा गार्ड वाला।

रीना शादी के सात साल पहले इस घर में आई थी। फरहान के माँ-बाप ने गरीब घर से उसे चुना था। सुहागरात की रात रीना फूलों वाले बिस्तर पर घूँघट ओढ़े बैठी थी। फरहान शेरवानी में आया, घूँघट हटाया, और बिना किसी मिठास के सीधे उसके होंठ चूसने लगा। रीना काँप रही थी। फरहान ने उसके कपड़े फाड़कर उतारे। ब्रा-पैंटी फेंकी। नंगी रीना के बड़े स्तनों पर मुँह चिपका दिया।

दाँत से निप्पल काटा। रीना चीखी। फरहान ने उसके हाथ बाँध दिए बिस्तर के खंभे से। टाँगें फैलाईं। 10 इंच का मोटा लंड रीना की सीलबंद चूत पर रखा और एक ही जोरदार धक्के में आधा घुसा दिया। खून निकला। रीना चिल्लाई, “मार डाला… छोड़ो…” फरहान नहीं रुका। पूरा लंड धकेल दिया। रीना की आँखों से आँसू बहने लगे। फरहान ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कमर तोड़ने वाली स्पीड से चोदने लगा। हर धक्के पर रीना की गाँड बिस्तर से उछलती। फरहान ने रीना के गले पर हाथ दबाया। साँस रुकने लगी।

रीना की चूत खून और पानी से गीली हो चुकी थी। फरहान अंदर ही झड़ गया। रीना को बाँधे छोड़ दिया। रात भर रीना की टाँगें काँपती रहीं।
सुबह फरहान के माँ-बाप खुश थे कि बहू घर संभाल रही है। साल बीते। फरहान रीना को रात में बाँधकर चोदता। कभी रस्सी से, कभी बेल्ट से पीटता। रीना को मजा भी आने लगा था। दर्द में आनंद मिलने लगा था।

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फिर फरहान के माँ-बाप एक्सीडेंट में मर गए। फरहान टूट गया। बिजनेस में कर्ज था। तभी विनय आया। बचपन का दोस्त। विनय ने फरहान को बार में खींचा। पहले बीयर, फिर व्हिस्की, फिर जुआ। फरहान नशे में जुए में पैसा लगाने लगा। पहले जीता, फिर हारने लगा। कर्ज बढ़ता गया।

एक रात फरहान बहुत हार गया। कर्जदारों ने धमकी दी। फरहान घर आया तो रीना सो रही थी। फरहान ने रीना को जगाया, बाल पकड़कर खींचा और बोला, “तेरी वजह से सब बर्बाद हो रहा है।” रीना डर गई। फरहान ने उसे नंगा किया, घुटनों के बल बैठाया और मुँह में लंड ठूंस दिया। रीना की आँखों से आँसू निकल रहे थे। फरहान ने उसके बाल पकड़कर गले तक लंड घुसाया।

रीना उल्टी जैसी करने लगी। फरहान नहीं रुका। पूरा लंड मुँह में डालकर हिलाने लगा। रीना की नाक से साँस निकल रही थी। फरहान मुँह में ही झड़ गया। रीना को जबरदस्ती निगलने को कहा।

अगले दिन फरहान फिर जुए में गया। और हार गया। कर्जदार राजू यादव निकला। राजू चाचा कॉलोनी का नामी आदमी। फरहान को बुलाया।
राजू चाचा ने कहा, “पैसे नहीं तो कुछ और दे।” फरहान चुप रहा। राजू चाचा मुस्कुराया, “तेरी बीवी।” फरहान का खून सूख गया। लेकिन कर्ज इतना था कि इंकार नहीं कर सका।

रात को राजू चाचा फरहान के घर आया। बंटी और मुकेश भी साथ थे। फरहान ने रीना को बुलाया। रीना सलवार-कमीज में आई। राजू चाचा ने रीना को ऊपर से नीचे तक देखा। “उतार सब।” रीना ने फरहान की तरफ देखा। फरहान ने सिर झुका लिया। रीना काँपते हाथों से कपड़े उतारने लगी। जब नंगी हुई तो तीनों बुजुर्गों की आँखें चमक उठीं।

राजू चाचा ने रीना के बाल पकड़े और अपने सामने घुटनों पर बैठाया। अपना 7 इंच का मोटा, काला, नसों वाला लंड निकाला। “चूस।” रीना ने मुँह खोला। राजू चाचा ने पूरा लंड ठूंस दिया। रीना की आँखें फटी की फटी रह गईं। राजू चाचा ने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से हिलाने लगा। रीना की लार टपक रही थी।

गले की आवाज़ निकल रही थी। बंटी और मुकेश अपने लंड निकालकर मसल रहे थे।
राजू चाचा ने रीना को उठाया, बिस्तर पर पेट के बल लिटाया। उसके हाथ पीछे बाँधे। टाँगें फैलाईं। थूक लगाकर अपना लंड रीना की गाँड पर रखा। रीना चिल्लाई, “नहीं… वहाँ मत…” राजू चाचा ने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड गाँड में घुस गया।

रीना की चीख निकल गई। राजू चाचा रुका नहीं। पूरा लंड धकेल दिया। रीना की गाँड से खून निकलने लगा। राजू चाचा कमर हिलाते हुए चोदने लगा। हर धक्के पर रीना का शरीर आगे सरक जाता। बंटी ने रीना का मुँह पकड़कर अपना लंड डाल दिया। मुकेश ने उसके स्तनों को मरोड़ते हुए निप्पल काटे।

राजू चाचा गाँड में झड़ गया। फिर बंटी ने रीना की चूत में अपना लंड घुसाया। रीना की चूत पहले से ही गीली थी दर्द और शर्म से। बंटी ने रीना के बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और जानवरों की तरह चोदा। मुकेश ने रीना के मुँह में लंड डाल रखा था। तीनों बारी-बारी रीना के हर छेद का इस्तेमाल कर रहे थे।

फरहान कमरे के कोने में खड़ा देख रहा था। उसका लंड तन चुका था। राजू चाचा ने फरहान को बुलाया, “तू भी आ। अपनी बीवी की गाँड में डाल।” फरहान आया। राजू चाचा ने रीना को कुत्ते की तरह बैठाया। फरहान ने अपना 10 इंच लंड रीना की खून से सनी गाँड में धकेल दिया। रीना अब सिर्फ सिसक रही थी। फरहान ने कमर तोड़ दी। राजू चाचा रीना के मुँह में फिर लंड डाले हुए था।

रात भर ये सिलसिला चला। रीना को बाँधकर रखा गया। कभी फर्श पर, कभी कुर्सी पर, कभी दीवार से सटाकर। राजू चाचा ने बेल्ट से रीना की गाँड और जाँघों पर निशान बनाए। बंटी ने सिगरेट की आग से रीना के स्तनों पर हल्के दाग दिए। मुकेश ने रीना के बाल पकड़कर सिर को बार-बार दीवार से टकराया।

सुबह जब तीनों गए तो रीना बेड पर पड़ी थी। शरीर पर नीले-काले निशान, गाँड और चूत सूजी हुई, मुँह सूजा हुआ। फरहान ने रीना को देखा और फिर से उत्तेजित हो गया। उसने रीना के बाल पकड़े और फिर से चोदने लगा। रीना अब विरोध नहीं कर रही थी। सिर्फ आँखें बंद किए सह रही थी।

अगले दिन राजू चाचा फिर आया। इस बार अकेला। उसने रीना को बाथरूम में ले जाकर नहलाया। फिर रस्सी से हाथ-पाँव बाँधकर बिस्तर पर लिटाया। उसने रीना की चूत में मोटी मोमबत्ती घुसाई और जलाई। मोम रीना की चूत पर गिर रहा था। रीना चीख रही थी। राजू चाचा हँस रहा था। फिर उसने मोमबत्ती निकाली और अपना लंड डाल दिया।

चोदते हुए उसने रीना के गले पर हाथ दबाया। रीना की साँस उखड़ने लगी। राजू चाचा ने कहा, “आज से तू मेरी है। जब चाहूँगा बुलाऊँगा। फरहान कुछ नहीं बोलेगा।”
फरहान ने सिर हिलाया। कर्ज माफ हो गया था। लेकिन रीना की जिंदगी बंधक बन गई थी।
हर रात राजू चाचा आता।

कभी बंटी-मुकेश के साथ, कभी अकेला। रीना को कुत्ते की तरह घसीटता। कभी पेशाब पिलाता। कभी उसकी गाँड में बोतल घुसाता। कभी उसके स्तनों को रस्सी से बाँधकर लटकाता। रीना की आँखों में अब डर के साथ एक अजीब सी भूख भी थी। दर्द में उसे मजा आने लगा था। जब राजू चाचा बेल्ट से पीटता तो रीना की चूत गीली हो जाती।

एक रात राजू चाचा ने रीना को अपने घर बुलाया। वहाँ और भी लोग थे। चार-पाँच मर्द। रीना को बीच में नंगा खड़ा किया गया। सबने बारी-बारी चोदा। रीना की चूत, गाँड, मुँह सब भरे हुए थे। कोई उसके बाल पकड़कर खींच रहा था, कोई निप्पल मरोड़ रहा था, कोई उसकी जाँघों पर थप्पड़ मार रहा था। रीना कई बार झड़ चुकी थी।

शरीर काँप रहा था। आखिर में सबने उसके चेहरे और स्तनों पर झड़कर निशान छोड़ दिए।
घर लौटते समय राजू चाचा ने रीना से कहा, “अगली बार और कठोर होगा। तैयार रह।”
रीना ने सिर झुकाया। फरहान दरवाजे पर खड़ा था। उसकी आँखों में अब शर्म नहीं, सिर्फ उत्तेजना थी। रीना अंदर गई। फरहान ने दरवाजा बंद किया। रीना को दीवार से सटाया और फिर से चोदने लगा।

इस बार रीना खुद कमर हिला रही थी। दर्द में भी आनंद ले रही थी।
शिप्रा विहार की उन अँधेरी रातों में रीना की चीखें अब दीवारों से टकराकर वापस उसके ही कानों में गूँजती थीं। हर चीख के साथ उसकी भूख और गहरी होती जा रही थी। दर्द अब सिर्फ दर्द नहीं रह गया था। वह नशा बन चुका था।

अगली शाम राजू चाचा अकेला नहीं आया। बंटी, मुकेश और दो नए चेहरे भी साथ थे। एक मोटा, गंदा सा आदमी जिसका नाम रमेश था, और दूसरा लंबा, पतला, आँखों में पागलपन लिए हुए महेश। फरहान ने दरवाजा खोला और चुपचाप किनारे हो गया। रीना सलवार-कमीज में बैठी थी। राजू चाचा ने एक इशारा किया। रीना उठकर खड़ी हो गई। उसके हाथ काँप रहे थे, लेकिन आँखों में डर के साथ एक अजीब सी चमक भी थी।

“उतार।” राजू चाचा की आवाज़ कमरे में गूँजी।
रीना ने धीरे-धीरे कपड़े उतारे। जब वह पूरी तरह नंगी हो गई तो पाँचों मर्दों की नज़रें उसके शरीर पर चिपक गईं। बड़े-बड़े स्तन, भारी गाँड, जाँघों पर पुराने निशान, चूत पर हल्की सूजन।

राजू चाचा ने जेब से मोटी रस्सी निकाली। रीना के हाथ पीछे बाँधे। फिर उसकी टाँगें भी घुटनों से बाँध दीं। रीना को कुत्ते की तरह फर्श पर गिरा दिया। राजू चाचा ने अपना जूता रीना के मुँह के पास रखा।
“चाट।”

रीना ने जीभ निकाली। जूते की गंदगी चाटने लगी। रमेश ने हँसते हुए अपना लंड निकाला और रीना के चेहरे पर थप्पड़ मारने लगा। महेश ने उसके बाल पकड़कर सिर ऊपर खींचा। राजू चाचा ने रीना के मुँह में अपना काला, नसों वाला लंड ठूंस दिया। पूरा गले तक। रीना की आँखें फटी रह गईं। साँस रुकने लगी। राजू चाचा ने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से हिलाने लगा। रीना की लार फर्श पर गिर रही थी। गले से अजीब आवाज़ें निकल रही थीं।

बंटी ने रीना की गाँड पर जोरदार थप्पड़ मारे। लाल निशान उभर आए। फिर उसने थूक लगाकर अपनी मोटी उँगलियाँ रीना की गाँड में घुसा दीं। दो उँगलियाँ, फिर तीन। रीना की चीख लंड के अंदर दब गई। मुकेश ने उसके स्तनों को मरोड़ना शुरू किया। निप्पल को दाँतों से काटते हुए खींच रहा था। रमेश ने रीना की चूत में चार उँगलियाँ एक साथ ठूँस दीं। रीना का शरीर काँप रहा था।

राजू चाचा ने लंड निकाला। रीना हाँफ रही थी। उसने रीना को उठाया और बिस्तर पर पेट के बल लिटा दिया। हाथ पीछे बँधे थे। टाँगें फैला दी गईं। राजू चाचा ने अपना लंड रीना की खून से सनी गाँड पर रखा और एक ही धक्के में पूरा घुसा दिया। रीना की चीख निकल गई। “आаааааа… मार डाला…” राजू चाचा रुका नहीं। कमर तोड़ने वाली स्पीड से चोदने लगा।

हर धक्के पर रीना का शरीर आगे सरक जाता। बंटी ने रीना का मुँह पकड़कर अपना लंड डाल दिया। महेश ने उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाते हुए निप्पल मरोड़ दिए। रमेश ने रीना की चूत में मोटी बोतल घुसा दी। बोतल अंदर-बाहर हो रही थी। रीना की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन चूत से पानी भी टपक रहा था।

राजू चाचा गाँड में झड़ गया। गर्म वीर्य रीना की गाँड से बाहर निकलने लगा। बंटी ने अपनी बारी ली। उसने रीना को कुत्ते की पोजीशन में खींचा और चूत में लंड धकेल दिया। रीना की चूत पहले से ही सूजी हुई थी। बंटी ने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और जानवरों की तरह धक्के लगाने लगा। मुकेश ने रीना के मुँह में लंड ठूँसा। रमेश ने बेल्ट निकाली और रीना की पीठ और गाँड पर मारने लगा। हर चोट पर रीना की चीख निकलती और उसकी चूत और भी भींच जाती।

फरहान कमरे के कोने में खड़ा था। उसका 10 इंच का लंड पूरी तरह तन चुका था। राजू चाचा ने उसे इशारा किया। फरहान आया। राजू चाचा ने रीना के मुँह से लंड निकाला और फरहान से कहा, “अपनी बीवी की गाँड में डाल। जोर से।” फरहान ने रीना की खून और वीर्य से सनी गाँड में अपना मोटा लंड धकेल दिया। रीना की चीख इस बार और तेज़ थी। फरहान ने कमर तोड़ दी। हर धक्के पर रीना की गाँड फटने जैसी लग रही थी। राजू चाचा ने रीना के बाल पकड़कर उसका मुँह अपने लंड पर दबा दिया।

रात भर ये सिलसिला चला। रीना को फर्श पर घसीटा गया। कभी दीवार से सटाकर चोदा गया। कभी कुर्सी पर बाँधकर। महेश ने सिगरेट जलाकर रीना के स्तनों और जाँघों पर हल्के-हल्के दाग दिए। रीना चीखती रही। रमेश ने उसकी चूत में मोटी मोमबत्ती घुसाई और जलाई। मोम उसकी चूत पर गिर रहा था। दर्द इतना तेज़ था कि रीना बेहोश होने वाली थी।

लेकिन राजू चाचा ने उसके गाल पर थप्पड़ मारकर जगाए रखा।
सुबह जब सब जाने लगे तो रीना फर्श पर पड़ी थी। शरीर पर नीले-काले निशान, गाँड और चूत पूरी तरह सूजी हुई, मुँह सूजा हुआ, बाल बिखरे। राजू चाचा ने उसके बाल पकड़कर सिर ऊपर किया। “अगली बार और कठोर होगा। आज से तू हर हफ्ते मेरे घर आएगी। समझी?” रीना ने आँखों में आँसू लिए सिर हिलाया।

फरहान ने दरवाजा बंद किया। रीना अभी भी फर्श पर थी। फरहान ने उसे उठाया और बिस्तर पर फेंक दिया। उसने रीना के हाथ फिर से बाँधे। इस बार रस्सी इतनी कसकर कि रीना की कलाईयाँ लाल हो गईं। फरहान ने अपना लंड रीना की सूजी हुई चूत में धकेल दिया। रीना सिसक रही थी। फरहान ने उसके गले पर हाथ दबाया। साँस रुकने लगी। फरहान जोर-जोर से चोदता रहा। रीना की आँखें ऊपर पलटने लगीं। फरहान अंदर ही झड़ गया। फिर भी लंड नहीं निकाला। वह अंदर ही अंदर हिलता रहा।

दोपहर तक रीना बेड पर पड़ी रही। शरीर में दर्द इतना था कि चल भी नहीं पा रही थी। लेकिन जब फरहान दोबारा आया तो रीना ने खुद टाँगें फैला दीं। फरहान ने देखा तो मुस्कुराया। उसने रीना की चूत में चार उँगलियाँ ठूँस दीं और जोर से मसलने लगा। रीना की कमर उछल रही थी। फरहान ने कहा, “तू अब पूरी तरह हमारी हो चुकी है। दर्द के बिना तुझे मजा नहीं आता।” रीना ने कुछ नहीं कहा। बस आँखें बंद किए सहती रही।

अगले दिन राजू चाचा ने फोन किया। “आज रात मेरे घर आ। अकेली।” फरहान ने रीना को तैयार किया। काली साड़ी पहनाई, अंदर कुछ नहीं। रीना को कार में बैठाकर राजू चाचा के बड़े से घर पहुँचा दिया। वहाँ पहले से आठ-दस मर्द बैठे थे। सबकी नज़रें रीना पर थीं। राजू चाचा ने रीना को बीच में खड़ा किया। “उतार।” रीना ने साड़ी उतारी। नंगी खड़ी हो गई।

राजू चाचा ने रस्सी से उसके हाथ ऊपर बाँधकर छत के हुक से लटका दिया। रीना के पैर जमीन से ऊपर उठ गए। राजू चाचा ने बेल्ट निकाली। पहली चोट रीना की जाँघों पर पड़ी। दूसरी गाँड पर। तीसरी पीठ पर। हर चोट पर रीना की चीख निकलती। शरीर झूल रहा था। फिर राजू चाचा ने उसके स्तनों पर थप्पड़ मारने शुरू किए। निप्पल इतने सूज गए कि छूने से भी दर्द होता। एक मर्द ने आकर रीना की चूत में मोटा खीरा घुसा दिया। दूसरा उसकी गाँड में बोतल। रीना की चीखें घर में गूँज रही थीं।

फिर बारी-बारी सबने उसका इस्तेमाल किया। कोई मुँह में लंड ठूँस रहा था, कोई चूत में, कोई गाँड में। रीना को बीच में लेकर खड़ा किया गया। एक मर्द पीछे से गाँड में, एक सामने से चूत में, एक मुँह में। तीनों एक साथ धक्के लगा रहे थे। रीना का शरीर इधर-उधर धक्के खा रहा था। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन चूत से पानी की धारा बह रही थी। वह कई बार झड़ चुकी थी। शरीर काँप रहा था।

राजू चाचा ने आखिर में रीना को नीचे उतारा। फर्श पर पेट के बल लिटाया। उसके हाथ-पाँव बाँध दिए। फिर उसने गर्म मोमबत्ती जलाकर रीना की पीठ, गाँड और जाँघों पर मोम गिराना शुरू किया। मोम चिपक रहा था। दर्द इतना तेज़ था कि रीना चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगी। राजू चाचा हँस रहा था। “आज तो सिर्फ शुरुआत है। अगली बार और कुछ नया होगा।”

रात खत्म होने तक रीना बेहोश सी पड़ी थी। शरीर पर मोम के दाग, बेल्ट के निशान, उँगलियों के निशान, लंड के निशान। राजू चाचा ने उसे कार में डालकर फरहान के घर भिजवा दिया। फरहान ने रीना को देखा तो उसका लंड तुरंत तन गया। उसने रीना को बिस्तर पर फेंका और बिना किसी देर के उसकी सूजी हुई गाँड में लंड धकेल दिया। रीना अब सिर्फ सिसक सकती थी। फरहान ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कमर तोड़ने वाली स्पीड से चोदा।

सुबह जब रीना जागी तो शरीर में दर्द के साथ एक अजीब सी शांति थी। वह खुद को आईने में देखने गई। निशान साफ दिख रहे थे। उसने अपनी चूत पर हाथ रखा। अभी भी गीली थी। फरहान पीछे से आया। उसने रीना के बाल पकड़े और बोला, “तू अब वापस नहीं जा सकती। यह तेरी जिंदगी है।” रीना ने आईने में अपनी आँखें देखीं। उनमें डर था, लेकिन भूख और भी ज्यादा थी।

शिप्रा विहार की रातें अब और अँधेरी, और क्रूर होती जा रही थीं। रीना की चीखें हर रात लंबी होती जा रही थीं। और हर चीख के साथ वह और गहरी खाई में गिरती जा रही थी। जहाँ दर्द ही एकमात्र मजा था। जहाँ अपमान ही एकमात्र प्यार था। जहाँ उसके शरीर का हर छेद सिर्फ इस्तेमाल के लिए बचा था।
और यह सिलसिला रुका नहीं। आगे और कठोर रातें आने वाली थीं।

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