पति दूर था। राहुल ने रितु को रस्सियों से बांधा, चाबुक मारे, गांड और चूत दोनों फाड़ डाले। दर्द, वीर्य और सिसकियों से भरी बर्बर रातें। कोई रहम नहीं।
मेरा नाम सुरेश है। उम्र 58 साल। कानपुर का रहने वाला हूँ। बीवी के मरने के बाद घर में सिर्फ बेटा विजय, उसकी पत्नी प्रिया और तीन साल का पोता आरव बचा। विजय मोबाइल रिपेयर की दुकान चलाता है। प्रिया हाउसवाइफ है। शरीर भरपूर – 36-28-40। गोरी चमड़ी, भारी स्तन, गोल गांड, गहरी नाभि। शादी के बाद और बच्चे के बाद उसकी जवानी और निखर गई।
साड़ी हमेशा नाभि से नीचे बांधती, बड़े गले वाला ब्लाउज, मांग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र। मेरे सामने आते ही पल्लू सर पर डाल लेती लेकिन चेहरा नहीं छुपाती। मैं रोज उसे घूरता। उसके मोटे स्तन, कमर के बल, गांड की हलचल… सब कुछ मुझे पागल कर देता। कई रातें उसके नाम की मुठ मारकर काटीं। लेकिन डर था।
पड़ोस में दो साल पहले आई रीना। उम्र 34। दो बच्चे। मॉडर्न, हँसमुख, चालू। फिगर 34-26-38। चेहरा मासूम लेकिन आँखों में आग। रोज हमारे घर आना-जाना। प्रिया से दोस्ती हो गई। दोनों घंटों कमरे में बातें करतीं। मैं हॉल में टीवी देखता या छत पर खड़ा उनकी छत देखता। रीना जब नमस्ते करती तो मैं उसकी पीठ सहला देता। वो मुस्कुराती रह जाती।
एक दोपहर मैंने दरवाजे पर कान लगाया।
प्रिया – भाभी, आजकल गली के लड़के तुम्हारे पीछे बहुत घूमते हैं।
रीना – यही उम्र है। बन-ठनकर न रहो तो पति भी नहीं देखते। तुम्हारा क्या हाल है? रोज घोड़े की सवारी होती है क्या?
प्रिया – हफ्ते में दो-तीन बार। बच्चे के बाद और कम। तुम?
रीना – वही हाल। घर की मुर्गी दाल बराबर। बाहर वाले मरते हैं चोदने को। मैं पहले उंगली से काम चलाती थी। अब बैगन डालती हूँ। मोटा-लंबा। काम निकलने के बाद उसी की सब्जी पति को खिला देती हूँ।
प्रिया – सच में? तभी इतने बैगन लेती हो!
रीना – तू भी ट्राई कर। ऐसा लगता है जैसे कोई मोटा लंड चोद रहा हो। मेरी चूत अभी गीली हो गई। जा रही हूँ डालने।
मैंने दरवाजा छोड़ दिया। लंड पाजामे में तना खड़ा था। रीना निकलते वक्त देख गई। मुस्कुराई और चली गई।
शाम को दोनों सब्जी खरीद रहीं थीं। रीना लंबे-मोटे बैगन उठा-उठाकर प्रिया को दिखा रही थी। दोनों हँस रहीं थीं। प्रिया ने भी ले लिए।
रात को छत पर रीना आई।
“अंकल जी, खाना हो गया?”
“हाँ बेटा। घूमने से हजम होता है।”
“आप फिट हो। मेरे पति का पेट निकल आया।”
मैंने डबल मीनिंग में कहा – “जिनकी बीवी खूबसूरत होती है उनके पति घर से नहीं निकलते। मेरी बीवी नहीं है इसलिए बाहर जाना पड़ता है… अपने काम के लिए।”
join my telegram channel for leaked videos
रीना मुस्कुराई। मैंने गुड नाइट कहकर उसकी पीठ सहलाई। इस बार हाथ नीचे सरका, गांड पर हल्का दबाया। वो रुकी नहीं।
अगले दिन दोपहर फिर वही कमरा। मैंने सुना।
रीना – कल रात बैगन डाला?
प्रिया – हाँ… थोड़ा डरा। लेकिन अंदर गया तो… मजा आ गया।
रीना – और बड़ा चाहिए तो बता। मैं तेरी मदद करूँगी। तेरे ससुर को देख। वो तुझे रोज घूरता है। उसका लंड भी देख लिया मैंने। मोटा है।
प्रिया चुप रही।
रीना ने आगे बढ़ाया – “तू चाहे तो मैं तेरे ससुर से बात कर दूँ। वो तुझे चोदेगा। और तू उसकी होगी पूरी तरह। मैं भी शामिल रहूँगी। तू सिर्फ हाँ बोल।”
प्रिया की आवाज काँपी – “भाभी… डर लगता है।”
“डर के मारे जिंदगी नहीं जीती। तेरी चूत को असली लंड चाहिए। मैं देख रही हूँ तू भी चाहती है।”
उस रात छत पर रीना ने सीधे कहा – “अंकल जी, प्रिया तैयार है। लेकिन शर्त है। पूरी गुलामी। जितना चाहो उतना क्रूर। मैं भी साथ रहूँगी। कंट्रोल मेरा रहेगा।”
मैंने पूछा – “सच?”
“कल दोपहर। बेटा दुकान पर रहेगा। पोता सोएगा। तुम तैयार रहना।”
अगले दिन दोपहर। रीना आई। प्रिया के कमरे में ले गई। दरवाजा बंद किया लेकिन कुंडी नहीं। मैं अंदर घुसा।
प्रिया बिस्तर पर बैठी थी। साड़ी में। चेहरा लाल। रीना ने कहा – “उतार।”
प्रिया ने साड़ी खोली। ब्लाउज। पेटीकोट। नंगी खड़ी हो गई। 36 के भारी स्तन, काले निप्पल, चिकनी चूत, गोल गांड।
रीना ने मेरे पास आकर मेरा लंड बाहर निकाला। मोटा, नसों वाला, तना हुआ। प्रिया की आँखें फटी रह गईं।
“घुटनों के बल।” रीना ने हुक्म दिया।
प्रिया घुटनों पर बैठ गई। रीना ने मेरे लंड को पकड़कर प्रिया के मुँह में ठूंस दिया। “चूस। गला तक।”
प्रिया ने हिचकते हुए लिया। रीना ने उसके सिर दबाया। लंड गले में घुस गया। प्रिया की आँखों से आँसू निकले। रीना ने बाल पकड़कर जोर-जोर से दबाना शुरू किया। थूक टपकने लगा। गला घर्राता। फिर भी रीना नहीं रुकी।
“अब चूत।”
प्रिया को बिस्तर पर पेट के बल लिटाया। गांड ऊपर। रीना ने उसके दोनों हाथ पीछे बांध दिए रस्सी से। पैर फैलाए। मैं पीछे खड़ा हो गया। रीना ने मेरा लंड प्रिया की गीली चूत पर लगाया।
“एक झटके में पूरा।”
मैंने धक्का मारा। प्रिया चिल्लाई। चूत फटने जैसी आवाज। पूरा लंड अंदर। रीना ने प्रिया का मुँह दबाया। “चिल्ला मत। सहन कर।”
मैंने जोर-जोर से पीटना शुरू किया। हर धक्के पर प्रिया की गांड थरथराती। स्तन बिस्तर से रगड़ खाते। रीना ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “बोल – ससुर का लंड चूत में है।”
प्रिया रोते हुए बोली – “ससुर… का… लंड… चूत में…”
मैंने और तेज किया। रीना ने एक तरफ से प्रिया के निप्पल दबाए, काटे। दूसरी तरफ से उंगली उसकी गांड में घुसेड़ी।
“गांड भी लेनी है आज।”
मैंने लंड निकाला। चूत से पानी टपक रहा था। रीना ने थूक लगाकर गांड का छेद खोला। मैंने धीरे-धीरे धक्का दिया। प्रिया चीखी। रीना ने उसका मुँह अपने स्तन से दबा दिया। “चूस मेरा भी।”
गांड में पूरा लंड घुस गया। तंग, गर्म। मैंने दोनों छेद बारी-बारी चोदे। कभी चूत, कभी गांड। रीना प्रिया के मुँह में उंगलियाँ ठूंसती, थप्पड़ मारती, “रंडी बन गई है तू।”
दो घंटे तक यही चला। प्रिया की चूत और गांड लाल-सुजाए। शरीर पसीने और थूक से चमक रहा था। आखिर में मैंने उसकी चूत में ही झड़ दिया। गरम वीर्य अंदर। रीना ने उंगली डालकर निकाला और प्रिया के मुँह में लगा दिया। “चाट। अपने ससुर का पानी।”
प्रिया ने चाटा।
रीना ने कहा – “अब से हर दोपहर। और रात को जब बेटा सो जाए तब छत पर। पूरी गुलामी। जो कहूँगी करेगी। मना किया तो और सख्त सजा।”
प्रिया ने सिर हिलाया। आँखों में डर और एक अजीब सी चमक।
अगले हफ्ते रोज। कभी रस्सी से बांधकर, कभी आँखें बंद करके, कभी घर के कोने में खड़ी करके पीटना। रीना खुद भी शामिल होती। कभी प्रिया को अपनी चूत चाटने को कहती, कभी मुझे दोनों को एक साथ चोदने देती। प्रिया की चूत अब आसानी से ले लेती। गांड भी। रीना ने एक दिन चेन और कॉलर लाकर पहना दिया। “अब तू कुतिया है।”
एक दिन बेटा जल्दी आ गया। हम तीनों छत पर थे। प्रिया नंगी, कॉलर में, मेरे लंड पर बैठी हुई। रीना उसके पीछे से गांड में उंगली किए हुए। बेटा की आवाज सुनाई दी। रीना ने फौरन प्रिया का मुँह दबाया। मैंने लंड अंदर ही रखा। बेटा नीचे चला गया। खतरा टला।
रातें लंबी होने लगीं। प्रिया अब खुद आकर घुटनों पर बैठ जाती। “आज कैसे चोदना है ससुर जी?” रीना हँसती – “देख, आदत पड़ गई।”
एक रात रीना ने दोनों हाथ-पैर बांधकर प्रिया को लटकाया। मैंने घंटों चोदा। चूत से खून जैसा पानी निकला। फिर भी नहीं रोकी। प्रिया बेहोश जैसी हो गई। रीना ने पानी छिड़ककर जगाया और फिर से शुरू करवाया।
महीनों बीत गए। प्रिया की जिंदगी बदल गई। दिन में सामान्य बहू, रात और दोपहर में पूरी गुलाम। रीना कंट्रोल रखती। कभी दया नहीं। थप्पड़, बाल खींचना, निप्पल दबाना, गांड में मोटी चीजें डालना… सब कुछ।
एक दिन रीना ने कहा – “अब अंतिम स्टेप। तुझे अपनी बहू की पूरी जिंदगी का मालिक बनना है। बेटा को शक नहीं होना चाहिए। लेकिन घर के अंदर तू राजा।”
मैंने प्रिया को घुटनों पर बिठाया। लंड उसके मुँह में। रीना ने पीछे से उसकी गांड चोदी अपनी उंगलियों से। प्रिया की आँखों में आँसू थे लेकिन वो चूसती रही।
उस रात के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। प्रिया अब सिर्फ बहू नहीं रही थी। वो एक जिंदा गुलाम बन चुकी थी। रीना ने उसके गले में लोहे का कॉलर पहना रखा था। चाबी सिर्फ रीना के पास। दिन में वो कॉलर साड़ी के पल्लू से छिपा लेती, लेकिन दोपहर और रात को वो चमकता रहता।
अगले दिन दोपहर बजे बेटा दुकान पर था। पोता सो रहा था। रीना आई और सीधे प्रिया के कमरे में घुस गई। मैं पीछे-पीछे। प्रिया पहले से नंगी बिस्तर पर घुटनों के बल बैठी थी, कॉलर में जंजीर बंधी हुई। रीना ने जंजीर खींची और प्रिया को फर्श पर घसीट लिया।
“आज का दिन खास है,” रीना ने ठंडी आवाज में कहा। “आज तुझे सिर्फ लंड नहीं, सजा भी मिलेगी। कल रात तूने सिसकियाँ भरी थीं। गुलाम सिसकियाँ नहीं भरती।”
रीना ने अपने बैग से निकालकर एक मोटी चमड़े की बेल्ट, मोमबत्ती, और लोहे के क्लिप्स निकाले। प्रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। रीना ने उसके दोनों हाथ पीछे बांध दिए, फिर पैरों को भी फैलाकर रस्सी से बिस्तर के पायों से कस दिया। प्रिया का शरीर पूरा तन गया। चूत और गांड खुली पड़ी थी।
रीना ने मुझे इशारा किया। मैंने अपना लंड निकाला। पहले से तना हुआ। रीना ने प्रिया के मुँह में ठूंस दिया और बाल पकड़कर जोर से दबाने लगी। “गला खोल। पूरा निगल।” प्रिया की आँखों से आँसू बहने लगे। गला घर्रा रहा था। थूक मुँह से बाहर निकलकर छाती पर गिर रहा था। रीना ने और गहरा दबाया। प्रिया की नाक बंद कर दी। साँस रुकने लगी। चेहरा लाल हो गया। तभी रीना ने छोड़ा। प्रिया हाँफने लगी।
“अब सजा,” रीना ने बेल्ट उठाई।
पहले चूत पर एक जोरदार वार। प्रिया चीखी। दूसरा वार गांड पर। तीसरा दोनों जांघों के अंदर। रीना ने बेल्ट की नोक से प्रिया की चूत के होंठ खोलकर अंदर तक मारा। लाल निशान पड़ गए। फिर मोमबत्ती जलाई। पिघला हुआ मोम प्रिया के निप्पलों पर टपकाया। प्रिया तड़प उठी। मोम ठंडा होते ही सख्त हो गया। रीना ने क्लिप्स लगा दिए दोनों निप्पलों पर और एक छोटा क्लिप सीधे चूत की फाँक पर।
“अब चोदो इसे जैसे कोई जानवर हो,” रीना ने मुझसे कहा।
मैंने प्रिया की चूत में एक झटके में पूरा लंड घुसेड़ दिया। वो चीखी लेकिन आवाज मुँह में दब गई क्योंकि रीना ने अपना मुँह उसके मुँह पर रख दिया था। मैंने बेरहमी से पीटना शुरू किया। हर धक्के पर बिस्तर चरमराता। क्लिप्स हिलते और दर्द बढ़ाते। रीना ने प्रिया के बालों को पकड़कर सिर पीछे खींचा और मेरे कान में कहा, “गांड में डालो। आज खून निकले तो निकले।”
मैंने लंड निकाला। चूत से झाग और पानी टपक रहा था। रीना ने थूक का थूक प्रिया की गांड पर लगाया और अपनी दो उंगलियाँ अंदर घुसेड़ दीं। फिर तीन। प्रिया की गांड फैल रही थी। मैंने लंड लगाया और एक ही धक्के में आधा घुसा दिया। प्रिया का शरीर उछल पड़ा। रीना ने उसके मुँह में कपड़ा ठूंस दिया। मैंने बाकी लंड भी धकेल दिया। तंग गांड लंड को जकड़ रही थी। मैंने पागलों की तरह धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर प्रिया की आँखें उल्टी हो जातीं। रीना ने क्लिप्स और कस दिए। निप्पल लगभग फटने वाले थे।
आधा घंटा गांड चोदने के बाद मैंने लंड निकाला। गांड का छेद खुला रह गया था। थोड़ा गुलाबी पानी निकल रहा था। रीना ने अपनी उंगली अंदर डालकर घुमाई और प्रिया के मुँह के कपड़े हटाकर वही उंगली मुँह में ठूंस दी। “चाट अपनी गांड का स्वाद।”
प्रिया ने रोते हुए चाटा।
रीना ने फिर मुझे इशारा किया। “अब दोनों छेद एक साथ।” उसने प्रिया को करवट से लिटाया। एक पैर ऊपर उठाया। मैंने चूत में लंड डाला। रीना ने अपनी तीन उंगलियाँ गांड में। हम दोनों ने एक साथ धक्के मारना शुरू किए। प्रिया पागलों की तरह तड़प रही थी। शरीर ऐंठ रहा था। रीना ने उसके गले की जंजीर खींच रखी थी। साँस रुक-रुक कर आ रही थी।
मैंने चूत में झड़ दिया। गरम वीर्य की धार अंदर। रीना ने तुरंत लंड निकाला और प्रिया के मुँह में ठूंस दिया। “सब निगल। एक बूँद भी बाहर गिरी तो जीभ काट दूँगी।” प्रिया ने गले तक ले जाकर सब निगल लिया।
रीना ने रस्सियाँ खोलीं लेकिन कॉलर नहीं। प्रिया फर्श पर गिर पड़ी। शरीर पर बेल्ट के निशान, मोम के धब्बे, क्लिप्स के लाल घेरे। चूत और गांड सुजी हुई। रीना ने उसके बालों से खींचकर उठाया और मेरे पैरों पर पटक दिया। “ससुर के पैर चाट। धन्यवाद दे।”
प्रिया ने जीभ से मेरे पैर चाटे। “धन्यवाद ससुर जी… धन्यवाद मालकिन…”
रीना हँसी। “आज से हर दोपहर यही होगा। और रात को छत पर। बेटा सो जाए तो तू नंगी आकर मेरे पैरों पर लेट जा। मैं तय करूँगी आज कौन सा छेद फटना है।”
रात आई। बेटा और पोता सो गए। प्रिया कॉलर पहने, नंगी, छत पर आई। रीना पहले से खड़ी थी। उसने प्रिया को दीवार से सटाया। हाथ ऊपर बांध दिए। फिर मेरे लंड को तेल लगाकर प्रिया की गांड में धीरे-धीरे पूरा उतार दिया। इस बार कोई जल्दबाजी नहीं। घंटे भर तक धीमे-धीमे लेकिन बहुत गहरे धक्के। बीच-बीच में रीना प्रिया के निप्पल काटती, चूत में उंगलियाँ घुमाती, गाली देती। “रंडी… ससुर की हगास… कुतिया…”
प्रिया अब चीख नहीं रही थी। बस सिसकियाँ और हाँफना। उसकी आँखों में एक अजीब सी खालीपन आ गया था। दर्द के साथ एक बेहोशी सी मस्ती।
अगले कई दिनों तक यही सिलसिला चला। रीना रोज नया अत्याचार लेकर आती। कभी बर्फ के टुकड़े चूत में डालकर फिर गरम लंड। कभी मोटी मोमबत्ती गांड में छोड़ देना घंटों तक। कभी प्रिया को मेरे लंड पर बैठाना और बालों से खींच-खींचकर ऊपर-नीचे करना जब तक वो बेहोश न हो जाए। कभी दोनों को एक साथ चोदना – मैं चूत में, रीना अपनी मुट्ठी गांड में।
एक दोपहर रीना ने प्रिया को रसोई में ले जाकर टेबल पर लिटाया। पैर फैलाए। मैंने चोदना शुरू किया तो रीना ने गर्म चम्मच से उसके निप्पलों को छुआ। प्रिया चीखी लेकिन आवाज दब गई क्योंकि मुँह में मेरा लंड था। रीना ने कहा, “आज से तू खाना बनाते वक्त भी कॉलर पहनेगी। और जब भी मैं कहूँगी, तुरंत नंगी होकर मेरे सामने घुटने टेक देगी। चाहे घर में कोई हो या न हो।”
प्रिया ने सिर हिलाया। उसकी इच्छाशक्ति टूट चुकी थी।
हफ्तों बीत गए। प्रिया का शरीर अब निशानों से भरा रहता। गर्दन पर कॉलर का निशान स्थायी हो गया। चूत और गांड हमेशा खुली और लाल रहतीं। वो अब खुद ही दोपहर होते ही नंगी होकर इंतजार करने लगती। रीना जब भी आती, प्रिया उसके पैर चाटने लगती।
एक दिन रीना ने फैसला किया। “आज अंतिम परीक्षा। तुझे अपनी पूरी हस्ती बेचनी है।” उसने प्रिया को बाथरूम में ले जाकर ठंडे पानी से नहलाया। फिर पूरे शरीर पर तेल लगाया। कॉलर के साथ कमर में एक और चेन बांध दी जो चूत के बीच से निकलकर गांड में घुसी हुई थी। छोटी-छोटी घण्टियाँ लगी थीं। हर कदम पर आवाज।
मैं कमरे में इंतजार कर रहा था। प्रिया घण्टियाँ बजाती हुई अंदर आई और मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई। रीना ने कहा, “आज तू सिर्फ वस्तु है। बोलने की इजाजत नहीं। सिर्फ सहन करना है।”
उस दिन छह घंटे चले। मैंने और रीना ने बारी-बारी प्रिया के हर छेद का इस्तेमाल किया। मुँह, चूत, गांड। कभी एक साथ दो लंड जैसी उंगलियाँ और असली लंड। कभी प्रिया को उल्टा लटकाकर। कभी फर्श पर घसीटकर। रीना ने उसके बालों की एक चोटी बनाकर हाथ में ले ली और जैसे घोड़ी को हाँकती है वैसे हाँका। प्रिया के मुँह से सिर्फ लार और सिसकियाँ निकल रही थीं। आखिर में जब मैंने उसकी गांड में तीसरी बार झड़ा तो प्रिया बेहोश हो गई।
रीना ने पानी छिड़ककर जगाया। प्रिया की आँखें खुलते ही उसने फुसफुसाकर कहा, “और… कृपया और…”
रीना मुस्कुराई। उसने मेरी तरफ देखा। “देखा? अब ये हमारी है। पूरी तरह। हमेशा के लिए।”
मैंने प्रिया के बाल सहलाए। फिर जंजीर खींचकर उसे अपने लंड तक लाया। प्रिया ने खुद मुँह खोला और लंड अंदर ले लिया। आँखें बंद करके। जैसे वो अब और कुछ नहीं चाहती।
कानपुर की उस गली में सूरज ढल रहा था। नीचे सड़क पर लोग आ-जा रहे थे। ऊपर एक कमरे में एक बहू अपनी आखिरी पहचान खो चुकी थी। और दो लोग उसके शरीर के हर हिस्से के मालिक बन चुके थे।
कहानी यहीं नहीं रुकती। आने वाले दिनों में रीना और नए खेल लाने वाली थी। और प्रिया… अब सिर्फ सहन करने के लिए बची थी।
Pingback: lusty web hindi sex stories :- चचेरी बहन और उसका प्रेमी - Lustystories