अरुण ने कविता को रस्सी से बांधकर गला दबाया, गांड फाड़ी, मुंह में ठूंसा और क्रूर धक्कों से दोनों होल चीर डाले। दर्द और मजे की वो रात जो भूलना नामुमकिन।
रात का अंधेरा शहर की गलियों में घना हो चुका था। मयूर विहार के उस छोटे से फ्लैट में दीवारें भी सांस रोककर सुन रही थीं। अरुण 34 साल का था, लंबा-चौड़ा, चौड़ी छाती वाला आदमी। उसकी बीवी कविता 29 साल की थी, गोरी-चिट्टी, गठीली कमर वाली। दोनों शादीशुदा थे, पर आज की रात कुछ अलग थी।
अरुण ने कविता को दीवार से सटाया। उसकी साड़ी पहले ही फर्श पर पड़ी थी। ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले जा चुके थे। कविता के 36 साइज के मम्मे बाहर निकल आए थे। गुलाबी निप्पल पहले से ही तन चुके थे। अरुण ने एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसा। दांत से हल्का काटा। कविता की कमर में झटका लगा।
“आह… धीरे…” उसकी आवाज कांप उठी।
अरुण ने जवाब नहीं दिया। उसने कविता के दोनों हाथ ऊपर उठाकर एक हाथ से पकड़ लिए। दूसरी हाथ से उसकी पेटीकोट फाड़ दी। अंदर काली लेस वाली पैंटी थी। अरुण ने उसे भी नीचे खींचकर घुटनों तक ला दिया। फिर अपनी पैंट का जिपर खोला। 7.5 इंच का मोटा, नसों वाला लंड बाहर निकला। पहले से ही सख्त।
उसने कविता को घुमाया। चेहरा दीवार की तरफ। कमर को पीछे धकेला। एक हाथ से उसके कूल्हे को कसकर पकड़ा, दूसरे हाथ से लंड को उसकी गांड के छेद पर रख दिया। थूक लगाकर एक जोरदार धक्का मारा।
“आह्ह्ह… फट गई…” कविता चीखी।
अरुण रुकने वाला नहीं था। उसने और जोर से धक्के देने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ उसके कूल्हे और कविता के मोटे चूतड़ टकरा रहे थे। थप-थप-थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी। कविता की गांड लाल हो चुकी थी। अंदर का छेद खुलता जा रहा था।
“तेरी गांड इतनी टाइट है… सालों से कोई नहीं घुसा… आज मैं इसे फाड़ दूंगा,” अरुण गुर्राया।
कविता दोनों हाथ दीवार पर टिकाए हुए कराह रही थी। उसकी आंखों से पानी निकल रहा था, लेकिन वो पीछे हटने की कोशिश नहीं कर रही थी। उल्टा अपनी गांड और पीछे कर रही थी।
अरुण ने स्पीड बढ़ा दी। अब धक्के इतने जोर के थे कि कविता की सांसें उखड़ने लगीं। अचानक उसने लंड बाहर निकाला। कविता की गांड से गाढ़ा सफेद लिक्विड रिस रहा था। अरुण ने उसे गोद में उठाया और डाइनिंग टेबल पर लिटा दिया। टांगें फैलाईं। कविता की चूत पूरी तरह खुली थी। बाल साफ शेव किए हुए। गुलाबी होल थोड़ा फूल चुका था।
अरुण ने थूक अपनी हथेली पर लिया और चूत पर लगा दिया। फिर लंड का सिरा चूत के मुंह पर रखा और एक ही धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह… इतना गहरा…” कविता की कमर उछल गई।
अरुण ने दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं। अब वो पूरी ताकत से चोदने लगा। फच-फच-फच की आवाज तेज हो गई। कविता की चूत से पानी निकल रहा था। हर धक्के के साथ वो अपने स्तनों को मसल रही थी। निप्पल को उंगलियों से पिंच कर रही थी।
“मेरी चूत फाड़ दो… और जोर से…” कविता चीख रही थी।
join my telegram channel for leaked videos
अरुण ने एक हाथ से उसके गले को हल्का दबाया। सांस रोकने जितना नहीं, बस दबाव बनाने जितना। कविता की आंखें लाल हो गईं। वो और जोर से कराहने लगी। अरुण की कमर मशीन की तरह चल रही थी। 10 मिनट लगातार धक्के। फिर उसने लंड बाहर निकाला।
“मुंह खोल,” उसने हुक्म दिया।
कविता टेबल से उतरी और घुटनों पर बैठ गई। मुंह खोल लिया। अरुण ने लंड उसके मुंह में ठूंस दिया। गले तक। कविता ने उबकाई रोकी और चूसने लगी। अरुण ने उसके बाल पकड़कर सिर को आगे-पीछे किया। गला चुदाई। लार बह रही थी। आंखों से पानी। लेकिन कविता ने एक बार भी पीछे नहीं हटी।
जब अरुण को माल निकलने वाला लगा, उसने लंड बाहर निकाला और कविता के चेहरे पर छोड़ दिया। गाढ़ा वीर्य उसके माथे, आंखों, नाक और मुंह पर गिरा। कविता ने जीभ निकालकर जो मुंह के पास था, उसे चाट लिया। बाकी चेहरे पर ही छोड़ दिया।
दोनों फर्श पर बैठ गए। सांसें तेज चल रही थीं। घड़ी की तरफ नजर गई। रात के 11 बज चुके थे। कविता के पति राजेश अगले दिन सुबह आने वाले थे। अरुण का भी परिवार दो दिन बाद लौटने वाला था।
कविता उठी और बाथरूम की तरफ चली। अरुण भी पीछे-पीछे गया। दोनों नंगे ही शावर के नीचे खड़े हो गए। अरुण ने साबुन लगाया और कविता के पूरे शरीर को रगड़ने लगा। मम्मों को, गांड को, चूत को। कविता ने भी उसका लंड साफ किया। फिर दोनों ने एक-दूसरे को अच्छी तरह धोया।
नहाकर कविता ने साड़ी पहनी। मेकअप किया। अरुण ने भी कपड़े पहन लिए। दोनों चुपचाप फ्लैट से निकले। रास्ते में एक ढाबे पर खाना खाया। फिर अरुण ने कविता को उसके घर छोड़ दिया।
रात भर अरुण सो नहीं पाया। सुबह स्कूल पहुंचा। कविता नहीं आई थी। मैसेज आया था कि आज नहीं आ पाएगी। अरुण ने दिनभर काम किया। शाम को घर लौटा। रात को उसकी बीवी सीमा घर आ गई।
सीमा 31 साल की थी। गेहुंआ रंग। 34 साइज के मम्मे। अरुण से शादी को 6 साल हो चुके थे। आज वो अलग मूड में थी। नाईटी पहने हुए कमरे में आई और अरुण के सीने पर सिर रख दिया। उंगलियों से उसके बालों को मरोड़ने लगी।
“तुम्हारे बिना मन नहीं लगता,” उसने कहा और सीने पर जोर से चुंबन कर दिया।
अरुण की लुंगी के अंदर लंड तन गया। सीमा का हाथ नाभि से होते हुए नीचे गया। लंड पकड़ लिया। उमेठने लगी। अरुण ने उसकी नाईटी ऊपर की और गांड सहलाने लगा। उंगली दरार में डाल दी। सीमा ने लुंगी खोल दी। खुद भी नंगी हो गई। फिर ऊपर चढ़कर अपना निप्पल अरुण के मुंह में ठूंस दिया।
अरुण ने चूसा। साथ ही चूत में उंगली घुमाई। सीमा ने लंड पकड़कर चूत के मुंह पर रगड़ा और खुद ही अंदर ले लिया। फिर उछलने लगी। अरुण नीचे से धक्के मार रहा था। फच-फच की आवाज। सीमा की चुचियां हिल रही थीं। 15 मिनट बाद अरुण ने अंदर ही माल छोड़ दिया।
दोनों लेटे रहे। आधे घंटे बाद सीमा ने फिर से शुरू किया। इस बार वो अरुण के लंड को मुंह में ले गई।
चूसने लगी। अरुण ने उसे 69 में घुमाया। दोनों एक-दूसरे को चाटने लगे। फिर सीमा ने लंड पर बैठकर फिर से चोदना शुरू किया। इस बार और तेज। जब अरुण का दूसरी बार निकला, तो वो उसके ऊपर ही लेटी रही।
सुबह सीमा ने कपड़े पहने और बाहर चली गई। अरुण स्कूल गया। वहां कविता मिली। दोनों ने चुपके से किस किए। खाली पीरियड में बात की।
“कल रात क्या हुआ?” अरुण ने पूछा।
कविता मुस्कुराई। “राजेश घर आए। रात भर चोदा। गांड नहीं मारी… अभी नहीं। लेकिन चूत इतनी मारी कि सुबह तक चल नहीं पा रही थी।”
अरुण ने और पूछा। कविता ने विस्तार से बताया। कैसे राजेश ने उसे टेबल पर लिटाया। कैसे उसके मम्मों को बांधकर चोदा। कैसे गला दबाकर माल छोड़ा।
अरुण सुनता रहा। उसकी सांसें तेज हो गईं। कविता की आंखों में भी वही भूख थी।
दोनों जानते थे कि अगली मुलाकात में कुछ और क्रूर होने वाला है। कुछ और गहरा। कुछ और दर्दनाक। और दोनों उसका इंतजार कर रहे थे।
रात के अंधेरे में मयूर विहार का वो फ्लैट फिर से चुप था। अरुण ने दरवाजा बंद किया और पीछे से कुंडी लगा दी। कविता पहले से अंदर खड़ी थी। काली साड़ी में, बाल खुले हुए। उसकी आंखों में वही भूख थी जो पिछले हफ्ते से दोनों को जला रही थी।
अरुण ने बिना कुछ कहे उसकी साड़ी खींच ली। एक झटके में ब्लाउज के हुक फाड़ दिए। 36 साइज के मम्मे बाहर निकल आए। उसने दोनों निप्पल को एक साथ मुंह में ले लिया और जोर से चूसा। दांत से काटा। कविता की कमर कांप उठी।
“आज कोई नरमी नहीं,” अरुण ने गुर्राते हुए कहा। “हाथ पीछे कर।”
कविता ने दोनों हाथ पीछे किए। अरुण ने बेडरूम से मोटी रस्सी निकाली। उसके दोनों कलाई कसकर बांध दीं। फिर घुटनों के बल बैठाया। रस्सी को उसके टखनों से भी बांध दिया ताकि वो भाग न सके। अब कविता पूरी तरह बेबस थी।
अरुण ने अपनी पैंट उतारी। 7.5 इंच का मोटा लंड पहले से सख्त खड़ा था। उसने कविता के मुंह के सामने लाकर थप्पड़ मारा। एक, दो, तीन। गाल लाल हो गए। फिर लंड उसके मुंह में ठूंस दिया। गले तक। कविता की आंखों से पानी निकलने लगा। लार बह रही थी। अरुण ने बाल पकड़कर सिर को आगे-पीछे किया। गला चुदाई शुरू हो गई। हर धक्के के साथ कविता की सांस रुक रही थी। जब वो उबकाई करने लगी तो अरुण ने और जोर से धकेला।
“चूस… और गहरा…” उसने हुक्म दिया।
पांच मिनट बाद उसने लंड बाहर निकाला। कविता खांस रही थी। लार और आंसू चेहरे पर बह रहे थे। अरुण ने उसे घुमाया। छाती के बल लिटा दिया। गांड ऊपर। दोनों हाथ अभी भी पीछे बंधे थे। उसने एक जोरदार थप्पड़ उसकी गांड पर मारा। लाल निशान पड़ गया। फिर दूसरा, तीसरा। कविता चीख रही थी लेकिन आवाज दबा रही थी।
अरुण ने थूक लगाया और लंड का सिरा गांड के छेद पर रखा। एक ही धक्के में आधा अंदर घुसा दिया।
“आह्ह्ह… फट रही है…” कविता की आवाज कांप उठी।
अरुण रुकने वाला नहीं था। पूरा लंड अंदर धकेल दिया। गांड फैल गई।
उसने कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ थप-थप की आवाज गूंज रही थी। कविता की गांड लाल हो चुकी थी। अंदर का छेद खुलता जा रहा था। अरुण ने एक हाथ से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। दूसरा हाथ गले पर रखा। हल्का दबाव। कविता की सांसें उखड़ने लगीं।
“तेरी गांड मेरी है… आज इसे फाड़ दूंगा,” अरुण गुर्राया।
बीस मिनट लगातार गांड चुदाई। कविता की आंखों से पानी बह रहा था। शरीर कांप रहा था। अरुण ने लंड बाहर निकाला। गांड से गाढ़ा सफेद लिक्विड रिस रहा था। छेद खुला हुआ था। अरुण ने उंगली अंदर डाली और घुमाई। फिर दो उंगलियां। कविता कराह उठी।
अब उसने कविता को पीठ के बल लिटाया। टांगें फैलाईं। रस्सी अभी भी बंधी थी। चूत पूरी तरह खुली थी। गुलाबी होल फूल चुका था। अरुण ने थूक लगाया और लंड अंदर घुसा दिया। एक ही धक्के में पूरा। कविता की कमर उछल गई। अरुण ने दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं और पूरी ताकत से चोदने लगा।
फच-फच-फच की आवाज कमरे में गूंज रही थी। कविता की चूत से पानी निकल रहा था। हर धक्के के साथ उसके मम्मे हिल रहे थे। अरुण ने एक निप्पल मुंह में ले लिया और काटा। दूसरे को उंगलियों से पिंच किया। कविता चीख रही थी।
“और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो…” उसने खुद कहा।
अरुण ने स्पीड बढ़ा दी। अब धक्के इतने क्रूर थे कि टेबल हिल रही थी। उसने एक हाथ गले पर रखा और दबाया। कविता की आंखें लाल हो गईं। सांस रुकने लगी। उसी पल अरुण ने और गहरा धक्का मारा। कविता का शरीर कांप उठा। पानी की धार निकल पड़ी। वो झड़ गई।
अरुण रुका नहीं। उसने लंड बाहर निकाला और कविता के मुंह के ऊपर लाया। “मुंह खोल।”
कविता ने मुंह खोला। अरुण ने लंड ठूंस दिया और माल छोड़ना शुरू कर दिया। गाढ़ा वीर्य गले में जा रहा था। कविता निगल रही थी। कुछ बाहर निकलकर ठोड़ी पर बह गया। अरुण ने पूरा माल उसके मुंह में छोड़ दिया। फिर लंड बाहर निकाला। कविता ने जीभ से सुपाड़े को साफ किया।
दोनों थक चुके थे। अरुण ने रस्सी खोली। कविता के कलाई लाल हो चुके थे। गांड और चूत दोनों सूज गए थे। अरुण ने उसे गोद में उठाया और बाथरूम ले गया। शावर के नीचे दोनों खड़े हो गए। अरुण ने साबुन लगाया और कविता के पूरे शरीर को धीरे-धीरे रगड़ा। मम्मों को, गांड को, चूत को। कविता ने भी उसका लंड साफ किया। फिर दोनों ने एक-दूसरे को धोया।
नहाकर कविता ने कपड़े पहने। मेकअप किया। चेहरे पर अभी भी थकान थी लेकिन आंखों में संतुष्टि। अरुण ने भी कपड़े पहन लिए। दोनों चुपचाप फ्लैट से निकले। रास्ते में एक छोटे रेस्तरां में खाना खाया। फिर अरुण ने कविता को उसके घर छोड़ दिया।
रात भर अरुण के दिमाग में वही सीन घूम रहे थे। कविता की बंधी हुई कलाई। लाल गांड। गले पर दबाव। मुंह में माल। सुबह स्कूल पहुंचा। कविता आई। दोनों ने चुपके से नजरें मिलाईं। खाली पीरियड में बात हुई।
“कल रात…” कविता ने धीरे से कहा। “इतना दर्द हुआ… लेकिन मजा भी उतना ही आया। राजेश को शक नहीं हुआ। उसने सिर्फ चूत मारी। गांड नहीं छुई।”
अरुण ने उसकी कलाई पर हल्के निशान देखे। मुस्कुराया। “अगली बार और ज्यादा होगा। और क्रूर। और गहरा।”
कविता की आंखों में वही आग जल उठी। “मैं तैयार हूं।”
दोनों जानते थे कि ये खेल अभी खत्म नहीं हुआ था। शहर की रातें और लंबी होने वाली थीं। और उनके शरीरों में जो आग जल रही थी, वो हर मुलाकात के साथ और भयंकर होती जा रही थी।
उस रात अरुण घर लौटा। सीमा पहले से इंतजार कर रही थी। नाईटी में। आज वो भी अलग मूड में थी। अरुण ने दरवाजा बंद किया। सीमा पास आई। दोनों की सांसें मिल गईं। अरुण ने उसकी नाईटी फाड़ दी। 34 साइज के मम्मे बाहर निकल आए। उसने दोनों निप्पल को मुंह में ले लिया और जोर से चूसा। सीमा कराह उठी।
अरुण ने उसे बिस्तर पर धकेला। टांगें फैलाईं। चूत पहले से गीली थी। उसने लंड अंदर घुसा दिया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। सीमा चीख रही थी। अरुण ने उसके गले पर हाथ रखा। हल्का दबाव। सीमा की आंखें लाल हो गईं।
उसी पल अरुण ने और गहरा धक्का मारा। दोनों एक साथ झड़ गए।रात लंबी थी। दोनों थकने वाले नहीं थे। शहर के बाहर अंधेरा गहराता जा रहा था। और उनके अंदर की आग अभी बुझने वाली नहीं थी।
47 साल की मोटी पड़ोसन की चुदाई
प्राइवेट फर्म में प्रोजेक्ट मैनेजर रौनक को बेरहम चोदता