ट्रेन की उस रात ने मुझे तोड़ दिया

अजनबी लड़की की टाइट बॉडी पर कब्जा, खून से सनी चूत, रस्सियों में जकड़ी रातें और दो मर्दों के बीच पिसती देह—ये कहानी सिर्फ दर्द नहीं, बल्कि एक लड़की के पूरी तरह टूटने की है।

राजेश शर्मा, 28 साल का लंबा-चौड़ा, छह फुट का गठीला जवान था। मुंबई में आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता था। उसकी जिंदगी रूटीन में उलझी हुई थी—कोड, मीटिंग्स, और अकेले सोने वाली रातें। एक दिन ऑफिस ने उसे हैदराबाद भेजने का फैसला किया। ट्रेन का टिकट बुक हुआ—राजधानी एक्सप्रेस, सेकंड एसी, लोअर बर्थ।

कोच में घुसते ही राजेश ने देखा कि सामने वाली बर्थ पर एक लड़की बैठी है। नाम था अंजलि मेहता, उम्र 26। दिल्ली की रहने वाली, मार्केटिंग मैनेजर। गेहुंआ रंग, लंबे काले बाल, तंग जींस और सफेद टॉप में उसके शरीर की रेखाएं साफ झलक रही थीं। छाती 36 की फुल्ल, कमर पतली, कूल्हे चौड़े। आंखों में एक अजीब सी ठंडक थी, जैसे कोई राज छुपा हो।
शुरुआत में अंजलि ने राजेश की तरफ देखा तक नहीं। फोन में व्यस्त रही। ट्रेन चल पड़ी। आधा सफर निकलने के बाद अचानक बोली, “भाई साहब, नीचे वाली सीट मुझे दे दो। ऊपर वाली आप ले लो। मुझे नींद नहीं आती ऊपर।”

राजेश ने मुस्कुराते हुए कहा, “खाना खाने के बाद चेंज कर लेंगे। आप यहीं बैठो।”
उसका फोन डिस्चार्ज हो गया। चार्जर मांगने आई तो राजेश के पास बैठ गई। बात शुरू हुई। राजेश ने पूछा, “नाम?”
“अंजलि।”
राजेश ने हल्के से कहा, “अंजलि… नाम में ही कुछ मीठा है।”
वह शर्माई, लेकिन मुस्कुरा दी। बातें बढ़ती गईं। दिल्ली-मुंबई की जिंदगी, जॉब का तनाव, अकेलेपन की शिकायतें। राजेश ने मजाक में कहा, “बॉयफ्रेंड तो होगा ही?”
अंजलि ने सिर हिलाया, “कोई नहीं। कभी नहीं बनाया।”

राजेश ने आंखें मिलाते हुए कहा, “तो मुझे बना लो।”
अंजलि कुछ सेकंड चुप रही, फिर धीरे से बोली, “ठीक है… देख लेंगे।”
रात हो गई। लाइट्स डिम। केबिन में सिर्फ दो ही यात्री थे। पर्दे लगे हुए। राजेश ने अंजलि को बाँहों में खींचा। वह थोड़ा हिचकी, लेकिन विरोध नहीं किया। राजेश का हाथ उसकी कमर पर फिसला, फिर ऊपर। टॉप के अंदर घुस गया। ब्रा के ऊपर से 36 साइज के नरम, भारी स्तनों को दबाया। अंजलि की सांस तेज हो गई।

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राजेश ने उसके कान के पीछे जीभ फिराई। अंजलि का शरीर कांप उठा। उसने राजेश का हाथ पकड़ा, लेकिन हटाने की बजाय और जोर से दबाया। राजेश ने उसके होंठों को जबरदस्ती अपने होंठों से बंद कर लिया। जीभ अंदर घुसा दी। अंजलि ने हल्की आवाज निकाली, लेकिन मुंह नहीं खोला विरोध के लिए।
राजेश का हाथ नीचे गया। जींस का जिप खोला, पैंटी के अंदर उंगली घुसाई। अंजलि पूरी गीली थी। उसकी चूत टाइट और गरम। राजेश ने एक उंगली अंदर धकेली। अंजलि की कमर उछल गई। “आह… धीरे…” उसने फुसफुसाया, लेकिन राजेश ने दूसरी उंगली भी अंदर कर दी। दो उंगलियां एक साथ अंदर-बाहर करने लगा। अंजलि के नाखून राजेश की पीठ में गड़ गए।

राजेश उठा, केबिन का दरवाजा लॉक किया, पर्दे ठीक किए। अंजलि को ऊपर वाली बर्थ पर ले गया। कपड़े उतार दिए—टॉप, ब्रा, जींस, पैंटी। अंजलि नंगी लेटी थी। राजेश ने भी अपने कपड़े फेंके। उसका लंड 9 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा था, नसों से भरा हुआ, सिरे से पहले से ही पानी टपक रहा था।
अंजलि की आंखें फटी की फटी रह गईं। “ये… इतना बड़ा…”
राजेश ने उसके बाल पकड़कर सिर नीचे झुकाया। “मुंह खोल।”

अंजलि ने हिचकिचाते हुए मुंह खोला। राजेश ने सिरा अंदर डाला। अंजलि ने सिर्फ आधा ही ले पाई। राजेश ने बालों को मुट्ठी में कस लिया और गर्दन तक धकेल दिया। अंजलि की आंखों से आंसू बह निकले। वह गला घुटने की आवाजें निकाल रही थी, लेकिन राजेश ने नहीं छोड़ा। दो मिनट तक उसके मुंह को चोदा। फिर बाहर निकाला। अंजलि ने खांसते हुए थूक और लार साफ की।
राजेश ने उसे लेटाया। दोनों टांगें फैला दीं। उसकी चूत पर जीभ रख दी। ऊपर वाले दाने को चूसा, चाटा, दांतों से हल्के से काटा। दो उंगलियां फिर अंदर। अंजलि कराह रही थी, कमर हिला रही थी। “बस… अब और नहीं…” लेकिन राजेश ने नहीं माना। तीन उंगलियां कर दीं। अंजलि का शरीर ऐंठ गया। वह चरमसुख पर पहुंच गई, पानी की धार छोड़ी, लेकिन राजेश ने उंगलियां नहीं निकालीं। और तेजी से हिलाता रहा।

फिर राजेश ने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ा। गीला किया। अंजलि ने खुद थूक लगाया। राजेश ने एक जोर का धक्का मारा। आधा भी अंदर नहीं गया। अंजलि चीख पड़ी। उसकी चूत से खून की एक पतली रेखा बह निकली। कुंवारी थी। राजेश ने नहीं रोका। दूसरा धक्का—और अंदर। अंजलि रोने लगी, आंसू बह रहे थे, लेकिन राजेश ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया। “शांत रह। ट्रेन में शोर मत कर।”

धीरे-धीरे पूरा 9 इंच अंदर धंस गया। अंजलि की आंखें बंद थीं, चेहरा दर्द से मुड़ा हुआ। राजेश ने हिलना शुरू किया। पहले धीरे, फिर तेज। ट्रेन की हलचल उसके धक्कों में मिल रही थी। अंजलि की चूत फट रही थी, खून और पानी मिला-जुला बह रहा था। राजेश ने उसके दोनों स्तनों को जोर से दबाया, निपल्स को मरोड़ा। अंजलि की कराहें दबी हुई आवाजों में निकल रही थीं।

बीस मिनट तक राजेश ने उसे बिना रुके चोदा। बीच-बीच में बाल खींचकर सिर पीछे किया, गर्दन पर दांत गड़ाए, पीठ पर नाखून फिराए। अंजलि कई बार झड़ गई, लेकिन राजेश ने नहीं रुका। आखिर में वह भी चरम पर पहुंचा और पूरा वीर्य उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। अंजलि बेहोशी जैसी हालत में लेटी रही।
रात को फिर आंख खुली। राजेश फिर खड़ा हो गया। इस बार उसने अंजलि को पेट के बल लिटाया। हाथ पीछे बांध दिए अपनी बेल्ट से। टांगें फैलाकर उसके पीछे से घुसा। अंजलि चीखी, लेकिन आवाज दब गई। राजेश ने एक हाथ से उसके बाल खींचे, दूसरे से कमर दबाई। इस बार और क्रूर। हर धक्के के साथ अंजलि की चूत और फैलती जा रही थी। खून फिर निकला। राजेश ने उसके मुंह में उंगलियां ठूंस दीं। “चाट।”

सुबह हैदराबाद स्टेशन पहुंचे। अंजलि को चलने में तकलीफ हो रही थी। टांगों के बीच दर्द और खून के निशान। राजेश ने नंबर लिया। स्टेशन से निकलते समय अंजलि ने धीरे से कहा, “अगली बार… और जोर से…”
उस दिन के बाद वे हफ्ते में दो-तीन बार मिलने लगे। होटलों में, अंजलि के फ्लैट में। राजेश ने उसे और आगे बढ़ाया—हाथ बांधना, आंखें बंद करना, हल्के चाबुक, गर्दन पर रस्सी, मुंह में गैग। अंजलि अब खुद मांगने लगी। पूरा लंड मुंह में लेने लगी, गले तक। कभी-कभी राजेश उसे घंटों तक इस्तेमाल करता, बिना थके। अंजलि की चूत अब उसकी आदत बन चुकी थी—हमेशा गीली, हमेशा तैयार, हमेशा दर्द और मजे का मिश्रण।

राजेश का लंड अब सिर्फ अंजलि की चूत के लिए तरसता था। और अंजलि… वह अब उस दर्द को प्यार कहने लगी थी।राजेश और अंजलि की मुलाकातें अब सिर्फ हफ्ते में दो-तीन बार की नहीं रहीं। वे लगभग हर दूसरे दिन मिलने लगे। अंजलि का फ्लैट हैदराबाद के एक शांत सोसाइटी में था—तीसरी मंजिल, दो बेडरूम। राजेश जब भी आता, अंजलि दरवाजा खोलते ही नंगी या सिर्फ एक पतली नाइटी में खड़ी मिलती। उसकी आंखों में अब डर नहीं, बल्कि एक भूखी सी भूख रहती।

एक शनिवार की रात राजेश आया तो अंजलि ने खुद ही हाथ आगे बढ़ा दिए। “आज बांधो… जितना सख्त हो सके।”
राजेश ने मुस्कुराया। उसने अपने बैग से मोटी काली रस्सी निकाली। अंजलि को बेडरूम ले जाकर बिस्तर पर पेट के बल लिटाया। दोनों हाथ पीछे खींचकर कलाई से कलाई तक कसकर बांधे। फिर टखनों को भी। रस्सी इतनी कस दी कि अंजलि की त्वचा पर लाल निशान पड़ गए। उसके मुंह में एक मोटा कपड़ा ठूंस दिया और ऊपर से टेप लगा दी ताकि कोई आवाज बाहर न जाए।

राजेश ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “आज तुम्हारी चूत और गांड दोनों फाड़ूंगा। समझी?”
अंजलि ने सिर हिलाया। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन पुतलियां फैली हुई थीं।
राजेश ने पहले उसकी चूत में तीन उंगलियां एक साथ घुसा दीं। अंजलि का शरीर ऐंठ गया। उंगलियां अंदर-बाहर तेजी से चलने लगीं। खून और पानी मिला-जुला बहने लगा। फिर राजेश ने अपना 9 इंच का मोटा लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा और एक ही धक्के में आधा अंदर धकेल दिया। अंजलि की रीढ़ की हड्डी सीधी हो गई। राजेश ने बाल और जोर से खींचे और पूरा लंड अंदर धंसा दिया। अंजलि की चूत फटी हुई सी लग रही थी। खून की धारें जांघों पर बहने लगीं।

राजेश ने बिना रुके चोदना शुरू किया। हर धक्का इतना जोरदार था कि बिस्तर की खटखटाहट दीवारों तक गूंज रही थी। अंजलि की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। राजेश ने उसके दोनों स्तनों को पीछे से पकड़कर जोर-जोर से मरोड़ा। निपल्स को नाखूनों से काटा। अंजलि की कराहें कपड़े और टेप के पीछे दबकर सिर्फ गुनगुनाहट बनकर रह गईं।

बीस मिनट तक राजेश ने उसकी चूत को बेरहमी से कुचला। फिर लंड बाहर निकाला। अंजलि की चूत खुली हुई, लाल, सूजी हुई और खून से लथपथ थी। राजेश ने थूक लगाकर अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखा। अंजलि ने सिर हिलाकर मना किया, लेकिन राजेश ने नहीं माना। एक जोर का धक्का—सिरा अंदर घुस गया। अंजलि का पूरा शरीर कांप उठा। राजेश ने और जोर लगाया। आधा लंड अंदर। अंजलि की आंखें फटी की फटी रह गईं। दर्द इतना था कि वह बेहोश होने के करीब पहुंच गई।

राजेश ने पूरा लंड उसकी गांड में धंसा दिया। फिर हिलना शुरू किया। धीरे-धीरे नहीं—जोरदार, क्रूर धक्के। हर बार लंड पूरा बाहर निकलता और फिर एक झटके में अंदर धंस जाता। अंजलि की गांड से भी खून निकलने लगा। राजेश ने एक हाथ से उसके बाल खींचे, दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगलियां घुसा दीं। तीन उंगलियां चूत में और पूरा लंड गांड में—अंजलि दोहरी यातना झेल रही थी।

आधे घंटे बाद राजेश ने अपना वीर्य उसकी गांड के अंदर छोड़ दिया। लंड बाहर निकाला तो अंजलि की गांड खुली हुई, लाल और लहूलुहान थी। राजेश ने रस्सियां नहीं खोलीं। वह अंजलि के पास बैठ गया, उसका चेहरा अपने हाथ में लिया और बोला, “अब तुम्हारी बारी है मुझे चूसने की। और इस बार गले तक लेना। वरना फिर से गांड फाड़ दूंगा।”

टेप और कपड़ा हटाया। अंजलि की आंखों में आंसू थे, होंठ सूजे हुए। राजेश ने खड़े होकर अपना लंड उसके मुंह के सामने किया। अंजलि ने मुंह खोला। राजेश ने बाल पकड़कर गर्दन तक धकेल दिया। अंजलि का गला भर गया। वह उल्टी करने वाली थी, लेकिन राजेश ने नहीं छोड़ा। दो मिनट तक उसके मुंह और गले को बेरहमी से चोदा। लार और आंसू अंजलि के चेहरे पर बह रहे थे। आखिर में राजेश ने अपना वीर्य उसके मुंह और गले में छोड़ दिया। अंजलि ने खांसते हुए निगल लिया।

रात भर राजेश ने उसे बांधे रखा। कभी चूत में उंगलियां घुसाकर छोड़ देता, कभी गांड में, कभी दोनों में। कभी उसके स्तनों पर हल्के चाबुक के निशान बनाता। अंजलि सुबह तक कई बार बेहोश हुई और जागी। सुबह जब रस्सियां खोली गईं तो उसके शरीर पर लाल-नीले निशान थे—कलाई, टखने, गर्दन, स्तन, जांघें। चूत और गांड दोनों सूजे हुए और दर्द से भरे।

अगले हफ्ते राजेश ने और आगे बढ़ाया। उसने अंजलि को एक रिमोट कंट्रोल वाला वाइब्रेटर उसकी चूत में डालकर बांध दिया और ऑफिस ले गया। पूरे दिन वाइब्रेटर को कभी धीमा, कभी तेज करता रहा। अंजलि मीटिंग में बैठी-बैठी कई बार झड़ गई, लेकिन आवाज नहीं निकाल सकी। शाम को घर आकर राजेश ने उसे फिर से बांधा। इस बार उसने अंजलि की आंखें भी बांध दीं। फिर उसके शरीर पर बर्फ और गर्म मोम दोनों इस्तेमाल किए। निपल्स पर मोम गिराया, चूत पर बर्फ रगड़ी। अंजलि पागल हो रही थी।

राजेश ने एक नया खेल शुरू किया। उसने अंजलि को उल्टा लटकाया—पैर ऊपर, सिर नीचे। फिर उसकी चूत और गांड दोनों में बारी-बारी से लंड घुसाया। गुरुत्वाकर्षण की वजह से खून उसके चेहरे की तरफ जमा हो रहा था। अंजलि की चीखें दबी हुई थीं। राजेश ने आधे घंटे तक उसे इसी हालत में चोदा। फिर नीचे उतारा और उसके मुंह में अपना लंड ठूंस दिया जो अभी-अभी उसकी गांड में था।

अंजलि अब खुद मांगने लगी थी। “और सख्त… और गहरा… मुझे तोड़ दो।” राजेश उसकी बात मानता। कभी वह अंजलि को कुत्ते की तरह रस्सी से बांधकर कमरे में घुमाता, कभी उसे जमीन पर लिटाकर पैरों से उसकी चूत दबाता। कभी उसके शरीर पर सिगरेट के हल्के निशान बनाता (बिल्कुल सतही, लेकिन दर्दनाक)। अंजलि हर बार और नीचे झुकती चली गई।

एक रात राजेश ने अंजलि के फ्लैट में एक दोस्त को भी बुलाया—अपना पुराना कॉलेज फ्रेंड, विक्रम, 30 साल का। अंजलि को पहले से बताया नहीं था। जब विक्रम आया तो अंजलि नंगी, बांधी हुई बिस्तर पर पड़ी थी। राजेश ने कहा, “आज तुम्हारी दोनों छेद एक साथ भरे जाएंगे।”
अंजलि की आंखों में डर था, लेकिन उसने सिर हिलाया। राजेश उसकी चूत में घुसा और विक्रम उसकी गांड में। दोनों ने एक साथ धक्के मारने शुरू किए। अंजलि का शरीर दो मर्दों के बीच पिस रहा था। उसकी चूत और गांड दोनों फटने के कगार पर थे। खून फिर बहने लगा। दोनों मर्दों ने बारी-बारी से उसके मुंह में भी लंड ठूंसा। रात भर अंजलि को बारी-बारी और एक साथ इस्तेमाल किया गया। सुबह तक वह हिल भी नहीं पा रही थी।

उसके बाद की मुलाकातें और क्रूर होती गईं। राजेश ने अंजलि के लिए एक छोटा सा पिंजरा बनवाया। कभी-कभी वह अंजलि को उसमें बंद करके रखता, पानी और खाना सिर्फ तभी देता जब अंजलि उसके लंड को चाटती। कभी वह अंजलि को घंटों तक बाथरूम में बांधकर छोड़ देता, जहां ठंडा पानी उसके शरीर पर गिरता रहता।

अंजलि की जिंदगी अब सिर्फ दर्द, मजा और राजेश के लंड के इर्द-गिर्द घूमने लगी। वह ऑफिस में भी उसके निशानों को छुपाकर काम करती। रात को घर आकर अपने आप को तैयार रखती—नंगी, तेल लगाए हुए, रस्सी हाथ में लिए।
राजेश का लंड अब अंजलि की चूत, गांड और मुंह तीनों का मालिक बन चुका था। और अंजलि… वह अब उस मालिकाने को अपनी सांसों जितना जरूरी समझने लगी थी।

एक रात राजेश ने अंजलि के कान में कहा, “अगली बार तुम्हें किसी और शहर ले जाऊंगा। वहां एक जगह है… जहां तुम्हें पूरा तोड़ दूंगा। इतना कि तुम चल भी नहीं पाओगी।”
अंजलि की आंखों में आंसू थे, लेकिन होठों पर मुस्कान। उसने धीरे से कहा, “ले चलो… तोड़ दो मुझे पूरी तरह।”
और कहानी यहीं नहीं रुकी। वह तो बस शुरू हुई थी…

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