19 साल की प्रिया और 18 साल की नेहा को टीचर राहुल ने क्रूर BDSM से तोड़ा। खून, चीखें, गांड-चूत फाड़ चुदाई और बेरहम गुलामी की जंगली कहानी, जहां दर्द ही सबसे बड़ा सुख बन जाता है student chudai ।
यह एक गहरी, जुनूनी और खतरनाक प्रेम कहानी है जो दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर में शुरू हुई। मेरा नाम राहुल शर्मा है। उम्र ३५ साल। मैं पिछले दस साल से यहां गणित और फिजिक्स पढ़ाता हूं। कोरोना महामारी के बाद जब सब कुछ सामान्य होने लगा, तब मेरी जिंदगी में एक तूफान आया जिसका नाम था प्रिया।
प्रिया मेरी स्टूडेंट थी, उम्र सिर्फ १९ साल। पिछले साल उसने मुझसे १२वीं की तैयारी की थी। वह बेहद खूबसूरत थी – लंबे काले बाल, गोरी चमकदार त्वचा, और उसका शरीर अब पूरी तरह जवान हो चुका था। उसके स्तन भारी और उभरे हुए थे, कमर पतली, और कूल्हे इतने आकर्षक कि कोई भी पुरुष एक नजर में ही मोहित हो जाए। वह क्लास में हमेशा मेरी तरफ घूरती रहती थी, लेकिन मैंने कभी ध्यान नहीं दिया। मैं एक साधारण टीचर था, कभी कल्पना भी नहीं की थी कि कोई स्टूडेंट मुझसे प्यार कर सकती है।
फिर इंस्टाग्राम ने सब बदल दिया। मैंने अकाउंट बनाया और कुछ हफ्तों बाद प्रिया ने मुझे फॉलो किया। उसने पहला मैसेज भेजा – “सर, आप बहुत अच्छे टीचर हैं।” धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। वह मुझे बताती कि वह मेरे बिना सुकून नहीं पाती। एक दिन उसने कहा, “सर, एक लड़की ने मुझे बताया कि आप उसके बॉयफ्रेंड हो।” मैंने साफ मना कर दिया, “यह सब बकवास है। मैं ऐसी बातें पसंद नहीं करता।”
उसके बाद मैंने उससे बात करना कम कर दिया। लेकिन स्कूल में वह उदास रहने लगी। उसकी आंखें हमेशा मेरी तरफ रहतीं, जैसे कोई भूखी आत्मा। आखिरकार मैंने इंस्टाग्राम पर मैसेज किया, “क्या हुआ? उदास क्यों हो?”
उसका जवाब आया – “सर, मैं आपसे पागलों की तरह प्यार करती हूं।”
join my telegram channel for leaked
मैंने लिखा, “प्रिया, तुम मेरी बेटी जैसी हो। उम्र का फर्क बहुत है।”
वह तुरंत बोली, “बेटी नहीं हूं ना सर! बस एक बार ‘आई लव यू’ बोल दीजिए। मैं कुछ और नहीं मांगूंगी। वरना मैं मर जाऊंगी।”
उसकी बातों में इतनी बेचैनी थी कि मेरे अंदर का मर्द जाग उठा। मैंने कुछ दिन टाला, लेकिन वह रोज रोती-बिलखती मैसेज करती।
आखिरकार मैंने हां कह दिया। “आई लव यू प्रिया।” उस दिन से उसकी दुनिया बदल गई। वह खिल उठी।
हमारी मीठी-मीठी बातें शुरू हुईं। लेकिन धीरे-धीरे वह सेक्सी बातें करने लगी। मैंने पहले मना किया, लेकिन उसकी जवान देह और उसकी भूख ने मुझे तोड़ दिया। मैं भी उसके साथ रसीली बातें करने लगा।
एक दिन मैंने मजाक में पूछा, “कभी किस किया है?”
वह शरमाते हुए बोली, “नहीं सर। लेकिन आप करेंगे तो मैं मना नहीं करूंगी।”
अगले दिन कोचिंग में चाय के बहाने मैंने उसे अपने केबिन के अंदर बुलाया। दरवाजा बंद करते ही मैंने उसे दीवार से सटा दिया। मेरे होंठ
उसके नरम गुलाबी होंठों पर टिक गए। मैंने उसके होंठों को जोर-जोर से चूसा, काटा। उसकी सांसें तेज हो गईं। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मेरे हाथ उसकी टॉप के अंदर घुस गए। उसके स्तन ३६डी साइज के थे – भारी, सख्त और गर्म। मैंने उन्हें क्रूरता से मसला, निप्पल्स को खींचा। वह सिहर उठी लेकिन दर्द में भी आनंद ले रही थी।
“सर… आह…” वह फुसफुसाई।
हम रोज ऐसे ही मिलते। कभी-कभी मैं उसे अकेले पढ़ाने का बहाना करके किस करता, स्तन चूसता।
फिर अर्धवार्षिक एग्जाम आए। मैंने स्टूडेंट्स को अलग-अलग बुलाया। जब प्रिया आई, मैंने पहले उसके होंठों को काटा, फिर स्तनों को इतनी जोर से दबाया कि निशान पड़ गए। “सलवार का नाड़ा खोलो,” मैंने हुक्म दिया।
उसने कांपते हाथों से नाड़ा ढीला किया। मेरा हाथ उसकी पैंटी में घुसा। उसकी चूत पर हल्के बाल थे। मैंने उंगलियों से उसकी क्लिटोरिस को रगड़ा। वह कांपने लगी। “सर मत… कोई आ जाएगा!”
“चुप रह!” मैंने उसकी गर्दन दबाते हुए कहा और उंगली अंदर डाल दी। उसकी चूत गीली और तंग थी। मैंने तेजी से उंगलियां चलाईं। कुछ ही
मिनट में वह झड़ गई, उसके पैर कांप रहे थे।
कुछ दिन बाद मौका मिला तो मैंने उससे कहा, “मेरा लंड सहलाओ।” उसने पैंट खोलकर मोटे ८ इंच लंबे लंड को अपने नाजुक हाथों में लिया और जोर-जोर से हिलाने लगी। मजा इतना आया कि मैं बाथरूम में जाकर मुठ मारकर रहा।
एक दिन प्रिया कोचिंग नहीं आई। मैं बहाने से उसके घर चला गया। पता चला उसके परिवार वाले गुजरात गए हैं। घर पर सिर्फ वह और उसकी छोटी बहन नेहा थी। नेहा १८ साल की थी, थोड़ी पतली लेकिन उतनी ही सेक्सी।
“फोटो की जरूरत है बोर्ड फॉर्म के लिए,” मैंने बहाना बनाया।
अंदर ले जाते ही मैंने प्रिया को जोर से पकड़ लिया। उसके कपड़े फाड़ने जैसा उतारा। उसके भारी स्तनों को चूसते हुए मैंने उन्हें काटा भी। वह दर्द से चीखी लेकिन उसकी आंखों में वासना थी। मैंने उसकी चूत पर उंगलियां फिराईं, फिर दो उंगलियां अंदर डालकर तेजी से फक किया। वह पागल हो गई।
“सर… चूसूंगी?” उसने पूछा।
मैंने अपना लंड उसके मुंह में ठूंस दिया। वह घुटनों के बल बैठकर गहरी गला चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के सिरे पर घूम रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में जोर-जोर से धक्के दिए। आखिरकार मैं उसके मुंह में झड़ गया और उसने पूरा वीर्य निगल लिया।
लेकिन अब हम दोनों बोर होने लगे थे।
“प्रिया, अब तुम्हारी चूत फाड़नी है,” मैंने क्रूर स्वर में कहा।
“हां सर… मैं अपनी कुंवारी चूत आपको सौंपना चाहती हूं। मेरी बहन नेहा सब जानती है। वह मदद करेगी। कल घर आ जाइए।”
अगले दिन मैं उनके साउथ दिल्ली के बड़े फ्लैट पर पहुंचा। नेहा ने दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए बोली, “जल्दी कीजिए सर, शाम को मम्मी-पापा आ सकते हैं।”
मैंने प्रिया को बेडरूम में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया। मैंने उसे पूरी तरह नंगा किया। उसका गोरा बदन मेरे सामने था – भारी स्तन, पतली कमर, और गुलाबी चूत। मैंने उसे बेड पर पटका। उसके हाथों को अपने बेल्ट से बांध दिया – BDSM स्टाइल।
“आज तुझे बहुत दर्द दूंगा प्रिया। तैयार है?”
वह कांप रही थी लेकिन बोली, “हां सर… मुझे अपनी मालकिन बनाइए।”
मैंने उसके स्तनों को जोर से थपड़ा, निप्पल्स को काटा। फिर उसकी जांघों को फैलाकर चूत चाटने लगा। मेरी जीभ उसके क्लिट पर घूम रही थी। वह तड़प रही थी। मैंने तीन उंगलियां अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर किया। उसकी चूत से पानी बह रहा था।
“अब लंड चूस,” मैंने हुक्म दिया
वह बंधे हाथों के साथ झुकी और मेरा मोटा लंड मुंह में ले लिया। मैंने उसके सिर को दबाकर गला तक ठूंसा। वह उबकाई ले रही थी लेकिन रुकी नहीं।
फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया। लंड को उसकी चूत पर रखा और एक क्रूर झटका मारा।
“आआआह… सर!” वह चीख पड़ी। उसकी सील फट गई। खून बहने लगा। लेकिन मैं रुका नहीं। दूसरे झटके में पूरा ८ इंच लंड अंदर चला गया।
“दर्द हो रहा है सर… प्लीज धीरे…” वह रो रही थी।
“चुप! आज तुझे फाड़ डालूंगा,” मैंने उसके बाल खींचते हुए कहा और तेज-तेज धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसके स्तन लहरा रहे थे। मैंने उसके गाल पर थप्पड़ मारा, गर्दन दबाई। वह दर्द और आनंद के मिश्रण में पागल हो रही थी।
“और जोर से सर… मेरी चूत फाड़ दो!” वह चिल्लाई।
मैंने उसे कुत्ते की तरह चोदा। उसके कूल्हों को थपथपाते हुए, बाल खींचते हुए। फिर मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और खड़े-खड़े चोदा। उसकी चूत लंड के साथ-साथ सिकुड़ रही थी।
काफी देर बाद मैंने उसे बेड पर पटका और घोड़ी बनाकर फिर से जोरदार चुदाई की। “आह… सर… मैं मर रही हूं… और जोर से!”
आखिरकार मैं उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया।
हम दोनों थके हुए पड़े थे। तभी नेहा ने दरवाजा खटखटाया। “बहन, सब ठीक?”
प्रिया ने हां कहा। नेहा अंदर आई और बोली, “सर, मैंने चाभी के छेद से सब देख लिया। आपका लंड तो बहुत मोटा और लंबा है। मेरी चूत भी प्यासी है।”
प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “सर, इसकी भी ले लीजिए।”
मैंने नेहा को खींच लिया। वह एकदम तैयार थी। उसने मेरे लंड को मुंह में ले लिया। “बहन की चूत का स्वाद आ रहा है… स्वादिष्ट है,” वह हंसी।
मैंने नेहा को भी बांधा। उसके छोटे लेकिन सख्त स्तनों को क्रूरता से मसला। फिर उसकी चूत को उंगलियों से फाड़ा। वह भी कुंवारी थी। मैंने
उसे भी पहले चाटा, फिर लंड घुसाया। वह चीखी, रोई, लेकिन जल्दी ही चुदाई का आनंद लेने लगी।
“सर… मुझे भी अपनी रंडी बना दीजिए… आह!”
मैंने दोनों बहनों को बारी-बारी चोदा। कभी प्रिया को, कभी नेहा को। दोनों को एक साथ बेड पर लिटाकर, एक की चूत में लंड, दूसरे की चूत में उंगलियां। मैंने उन दोनों के मुंह में लंड ठूंसा। दोनों बहनें मेरे लंड को चाट रही थीं।
रात भर चली यह क्रूर चुदाई। मैंने दोनों को थप्पड़ मारे, बाल खींचे, स्तन काटे, चूत फाड़ी। दोनों बार-बार झड़ रही थीं। आखिरकार सुबह होने से पहले मैंने दोनों के मुंह में झड़ दिया। वे दोनों वीर्य पी गईं।
“सर, अब हम आपकी गुलाम हैं,” प्रिया बोली।
“हमेशा,” नेहा ने जोड़ा।
उस रात के बाद तीनों की जिंदगी एक नशीले सपने में बदल गई। मैंने तय कर लिया था कि दोनों बहनों को पूरी तरह अपनी गुलाम बना लूंगा। अगले दिन कोचिंग के बाद मैंने प्रिया को मैसेज किया, “रात ९ बजे मेरे फ्लैट पर आना। नेहा को भी साथ ले आना। आज तुम दोनों को असली ट्रेनिंग दूंगा।
दोनों बहनें ठीक ९ बजे पहुंच गईं। मैंने दरवाजा खोला तो देखा दोनों ने छोटी-छोटी स्कर्ट और टाइट टॉप पहनी हुई थीं। मैंने उन्हें अंदर खींचा और तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। “कपड़े उतारो। दोनों नंगी हो जाओ।”
वे दोनों झट से नंगी हो गईं। प्रिया के ३६डी के भारी स्तन और नेहा के ३४सी के सख्त स्तन मेरे सामने थे। मैंने दोनों को घुटनों के बल बैठने को कहा। फिर मैंने अपने बैग से BDSM किट निकाली – चेन, हैंडकफ, निप्पल क्लैम्प्स, व्हिप, लेडर बेल्ट और एक बड़ा डिल्डो।
“आज से तुम दोनों मेरी पेट स्लेव हो। जो कहूंगा वही करना। समझी?”
“जी मालिक,” दोनों ने एक साथ कहा।
मैंने पहले प्रिया के स्तनों पर निप्पल क्लैम्प्स लगाए। वह दर्द से कराह उठी, “आह… सर… बहुत दर्द हो रहा है!” मैंने क्लैम्प्स को और कस दिया।
फिर नेहा के भी। दोनों बहनों की आंखों में आंसू थे लेकिन चूतें गीली हो रही थीं।
मैंने प्रिया को बेड पर लिटाया और उसके हाथ-पैर चारों तरफ बांध दिए। फिर नेहा को उसके मुंह पर बिठा दिया। “अपनी बहन की चूत चाटो नेहा।”
नेहा झुकी और प्रिया की गुलाबी चूत को चाटने लगी। मैंने पीछे से नेहा की गांड पर व्हिप मारा। “जोर से चाट!”
नेहा तेजी से चाट रही थी। प्रिया तड़प रही थी। मैंने अपना ८ इंच का मोटा लंड प्रिया के मुंह में ठूंसा और गले तक धक्के देने लगा। वह उबकाई ले रही थी लेकिन मैं रुका नहीं। “निगल पूरी तरह, रंडी!”
कुछ देर बाद मैंने पोजीशन बदली। दोनों बहनों को डॉगी स्टाइल में खड़ा किया। उनकी कमर पर बेल्ट बांधकर एक साथ दोनों की चूतों में उंगलियां डालीं। फिर मैंने प्रिया की चूत में अपना लंड घुसा दिया। एक ही झटके में पूरा लंड अंदर। वह चीख पड़ी। मैंने नेहा की चूत में बड़ा डिल्डो ठेल दिया। दोनों को एक साथ फाड़ रहा था।
“आह… मालिक… फाड़ दीजिए हमारी चूतें!” प्रिया चिल्लाई।
मैंने तेज-तेज धक्के मारे। हर धक्के पर उनकी गांड लहरा रही थी। मैंने व्हिप से उनकी पीठ और कूल्हों पर निशान बना दिए। खून की हल्की लकीरें उभर आईं। दर्द से वे रो रही थीं लेकिन उनकी चूतें और भी गीली हो रही थीं।
मैंने प्रिया को झड़ने नहीं दिया।
जब वह कगार पर पहुंचती, मैं रुक जाता। “भीख मांगो।”
“प्लीज मालिक… मुझे झड़ने दीजिए… मैं आपकी गुलाम हूं!”
आखिरकार मैंने दोनों को एक साथ झड़ने दिया। दोनों बहनें एक साथ चीखती हुईं झड़ गईं। कमरे में उनकी चीखें गूंज रही थीं।
उसके बाद मैंने उन्हें शावर के नीचे ले जाकर क्रूरता से चोदा। पानी के नीचे खड़े-खड़े दोनों की गांड में उंगलियां डालीं। “कल से गांड भी फाड़ूंगा,” मैंने कहा।
अगले हफ्ते मैंने उन्हें और ट्रेनिंग दी। एक रात मैं उन्हें अपने फ्लैट में ले गया और पूरे घर को डनजन बना दिया। अंधेरा कमरा, सिर्फ लाल लाइट। मैंने दोनों को पूरी तरह नंगा करके चेन से छत से लटका दिया। उनके पैर जमीन से कुछ इंच ऊपर थे।
“आज पेन ट्रेनिंग है।”
मैंने पहले प्रिया के स्तनों पर मोमबत्ती की गर्म मोम डाली। वह तड़प उठी। “आआह… जल रहा है!” फिर नेहा पर। दोनों के शरीर पर मोम की परत जम गई। मैंने मोम साफ करते हुए उनके निप्पल्स को काटा।
फिर मैंने दोनों की चूतों में बड़े-बड़े डिल्डो घुसाए और वाइब्रेटर ऑन कर दिया। वे लटकते हुए तड़प रही थीं। मैंने अपनी बेल्ट निकाली और बारी-बारी उनकी जांघों, गांड और पीठ पर प्रहार किए। कमरे में चीखें और चमड़े की आवाज गूंज रही थी।
“मालिक… हम मर जाएंगे… प्लीज!” नेहा रो रही थी।
“मरना नहीं, चोदना है,” मैंने कहा और प्रिया की गांड में अपना लंड घुसाने लगा। पहली बार गांड फाड़ रहा था। वह पूरी तरह फटने वाली थी। खून और लुब्रिकेंट मिलकर बह रहा था। मैंने बेरहमी से पूरा लंड अंदर किया और पंपिंग शुरू की।
प्रिया की आंखें उलट गईं। दर्द और आनंद का ऐसा मिश्रण कि वह बेहोश होने लगी। मैंने नेहा को नीचे उतारा और उसका मुंह प्रिया की चूत पर लगा दिया। “चाटते रहो।”
मैं प्रिया की गांड चोद रहा था और नेहा उसकी चूत चाट रही थी। फिर पोजीशन बदला। अब नेहा की बारी। उसकी छोटी सी गांड को मैंने पहले उंगलियों से फैलाया, फिर लंड ठेल दिया। वह चीखती रही लेकिन मैंने उसके मुंह में गैग बॉल ठूंसा।
रात भर चली यह सेशन। मैंने दोनों को कई बार झड़वाया। उनके शरीर पर निशान, काटने के दाग और लाल लकीरें थे। आखिरकार जब मैं
झड़ा तो दोनों के मुंह खोलकर उनके चेहरों पर वीर्य उछाल दिया। वे दोनों लपक-लपककर उसे चाट रही थीं।
इसके बाद हमारी जिंदगी और खतरनाक हो गई। मैं उन्हें कभी-कभी पब्लिक प्लेस में भी रिस्क लेने लगता। एक दिन कोचिंग के बाद मैंने प्रिया को कार में बिठाया।
नेहा पीछे थी। मैंने प्रिया की स्कर्ट ऊपर की और ड्राइव करते हुए उसकी चूत में उंगलियां डाल दीं। हाईवे पर गाड़ी तेज थी। प्रिया दबे स्वर में कराह रही थी।
“मालिक… कोई देख लेगा…”
“देख ले तो देख ले। तुम मेरी रंडियां हो।”
मैंने नेहा को भी आगे बुलाया और दोनों की चूतों को एक साथ रगड़ा। ट्रैफिक में खड़े होने पर मैंने प्रिया का सिर अपनी गोद में झुका दिया और लंड चुसवाया।
एक और खतरनाक रात आई जब मैं उन्हें एक लक्जरी रिसॉर्ट ले गया। प्राइवेट विला बुक किया। वहां मैंने दोनों को पूल के किनारे नंगा किया। रात के अंधेरे में मैंने उन्हें घुटनों के बल खड़ा करके दोनों तरफ से चोदा। पहले प्रिया की चूत, फिर नेहा की गांड। पानी में उनके शरीर चमक रहे थे।
मैंने उन दोनों को एक-दूसरे से ६९ पोजीशन में लिटाया और ऊपर से दोनों छेदों में लंड और डिल्डो घुसाया। वे चीख-चीखकर झड़ रही थीं। मैंने व्हिप से उनकी पीठ पर प्रहार किए। “जोर से चिल्लाओ! कोई सुन ले तो सुन ले।”
उस रात मैंने उन्हें इतनी क्रूरता से चोदा कि दोनों बेहोश हो गईं। उनके शरीर पर मेरा वीर्य, उनका पानी और पसीना सब मिला हुआ था।
धीरे-धीरे दोनों बहनें पूरी तरह टूट चुकी थीं। वे मेरे बिना रह नहीं सकती थीं। प्रिया अक्सर कहती, “मालिक, मुझे रोज दर्द दीजिए। बिना दर्द के
मुझे मजा नहीं आता।” नेहा और भी ज्यादा मस्त थी। वह खुद कहती, “मेरी गांड फाड़ दीजिए, चूत को खून कर दीजिए।”
एक दिन मैंने उन्हें चुनौती दी। “अगर तुम दोनों २४ घंटे मेरी गुलाम बनकर रह सको बिना रुके, तो मैं तुम्हें एक गिफ्ट दूंगा।”
वे तैयार हो गईं।
मैंने उन्हें अपने फ्लैट में बंद कर दिया। पूरे २४ घंटे वे नंगी रहीं। मैं उन्हें खाना खिलाता, लेकिन हर घंटे चोदता। कभी चूत, कभी गांड, कभी मुंह। उनके शरीर पर हर तरह के टॉयज।
निप्पल्स पर वेट्स लगाए, चूत में वाइब्रेटर। वे कराहतीं, रोतीं, भीख मांगतीं लेकिन मैं रुकता नहीं।
२४ घंटे बाद दोनों थककर चूर हो चुकी थीं लेकिन उनकी आंखों में संतोष था। “मालिक, हम हमेशा आपकी रहेंगी।”
मैंने उन्हें गिफ्ट दिया – दोनों के नाम पर एक छोटा अपार्टमेंट, जहां हम तीनों कभी भी जंगली सेक्स कर सकें।
आज भी यह सिलसिला जारी है। कोचिंग में पढ़ाते हुए मैं उन्हें देखता हूं और सोचता हूं कि रात को इन दोनों को कैसे फाड़ूंगा। प्रिया और नेहा अब मेरी जिंदगी का सबसे खतरनाक और मीठा राज हैं। उनकी चीखें, उनके आंसू, उनका वीर्य पीना और उनकी बेरहम चुदाई – यह सब मेरे लिए सबसे बड़ा नशा है।
क्या पता यह कहानी कहां तक जाएगी। लेकिन एक बात तय है – राहुल शर्मा की इन दो जवान रंडियों को अब कोई नहीं बचा सकता। वे पूरी तरह टूटी हुई, वफादार और प्यासी गुलाम बन चुकी हैं।
student chudai stories:-