रंडी प्रोफेसर की जंजीर वाली रात – xkhani

नेहा की भूखी चूत को विक्रम ने जंजीरों में जकड़कर, थप्पड़ों से लाल करके, काट-चूसकर बाथरूम-बेडरूम में बर्बर फाड़ा। कुतिया तड़पी, फव्वारे छोड़े, लेकिन लंड की प्यास रात भर नहीं बुझी – क्रूर चुदाई का तूफान xkhani !

मेरे कान में नेहा मैडम ने धीरे से फुसफुसाया, “विक्रम! फक मी हार्ड! ऐसी बर्बर चुदाई कर मेरी कि आज का दिन मैं जिंदगी भर याद रखूं! चोद मुझे विक्रम, जोर से चोद! मेरी चूत को फाड़ डाल आज!”


मैं 22 साल का कॉलेज स्टूडेंट था, लेकिन उस पल मेरे अंदर एक जानवर जाग उठा। नेहा मैडम, 37 साल की वो खूबसूरत प्रोफेसर, जिनकी क्लास में हर लड़का पागल रहता था, आज मेरे सामने नंगी लेटी थी। उनकी 36E साइज की भारी-भरकम चूचियां, 38 इंच की मोटी-गोल गांड और क्लीन शेव्ड गुलाबी चूत… सब कुछ मेरे लिए खुला था। हम मुंबई के बांद्रा में उनकी लग्जरी 3BHK फ्लैट में थे। पति विदेश में बिजनेस के सिलसिले में एक महीने से गायब था। उसने उनकी प्यासी चूत को भूखा छोड़ दिया था।


मेरे दिमाग में शैतानी प्लान घूम गया। मैंने कहा, “मैम, एक बार पॉर्न में देखा था नायक नायिका को बिस्तर से बांधकर बर्बर चुदाई करता है। अगर आप बुरा न मानो तो…”


नेहा की आंखें चमक उठीं। उन्होंने तुरंत कहा, “वाह विक्रम! क्या आइडिया है! आज तुझे पूरी छूट है। जैसे मन करे, वैसे मुझे चोद! कोई रहम नहीं! एक महीने से मेरी चूत सूखी पड़ी है। वो कमीना पति चला गया और मुझे रंडी की तरह तड़पने छोड़ गया। आज तू जो भी कर, कर! बस मुझे चरम सुख दे!”


नेहा उठीं, नंगी ही चलकर अलमारी से दो सिल्क स्कार्फ निकाल लाईं। उनकी मोटी गांड हिलते हुए देखकर मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। नंगी औरत की गांड पीछे से देखना ही कितना खतरनाक होता है – मन करता है पकड़कर फाड़ डालो। उन्होंने स्कार्फ मुझे थमाए और बोलीं, “ले कुत्ते! मेरे हाथ और पैर बांध दे! आज मैं तेरी रंडी हूं, तेरी कुतिया! मुझे तमन्ना या मैम मत बोल। बस रंडी, कुतिया, हरामजादी… जो मन करे बोल! कोई रहम नहीं!”


मैं गरज उठा, “चल कुतिया, तैयार हो जा!”
मैंने नेहा को किंग साइज बेड पर लिटाया। उनके दोनों हाथ बेड के हेडबोर्ड से बांध दिए, दोनों पैर फैलाकर फुटबोर्ड से कसकर बांध दिए। वो स्प्रेड ईगल पोजीशन में नंगी लेटी थीं। उनकी भारी चूचियां टाइट होकर ऊपर उठ गईं, नाभि सुंदर दिख रही थी और गीली चूत मेरी तरफ मुंह फाड़े आमंत्रण दे रही थी। उनकी चूत से रस टपक रहा था।


नेहा बोलीं, “आ विक्रम, शुरू कर! आज तू मुझे थका देगा या मैं तुझे? मेरी चूत में कितने राजा घुस चुके हैं, लेकिन आज तू फाड़ दे इसे!”
मेरा ८ इंच का मोटा, नसों वाला लंड हवा में तन गया। मैंने कहा, “कुतिया, पहले तेरे हर अंग को चाटूंगा… फिर फाड़ूंगा!”
मैं उनके पैरों के अंगूठों से शुरू किया। जीभ से चूसा, काटा। फिर पिंडलियों पर लपलपाती जीभ फेरते हुए ऊपर चढ़ा। उनकी मोटी जांघों को चाटा, दांत गड़ाए। वो तड़पने लगीं – “आह… साले, और जोर से काट!” मैंने जांघों के बीच की नरम जगह पर जीभ घुमाई, लेकिन चूत को अभी छुआ नहीं। नाभि पर जीभ डालकर चोदा, जैसे छोटी चूत हो।

गर्दन पर काटा, कानों को चूसा। फिर उनके भारी 36E चूचों पर हमला किया। बाएं चूचे को मुंह में भरकर चूसा, दाएं को जोरदार मसलते हुए निप्पल को दांत से काटा। नेहा चीखीं, “उफ्फ… हरामी, दर्द हो रहा है लेकिन मजा भी आ रहा है! और जोर से!”


मैं उनके चूचों पर थप्पड़ जमाने लगा। चमकदार लाल निशान पड़ गए। “रंडी, तेरे चूचे तो फट जाएंगे आज!” फिर मैं उनकी चूत पर झुका। पहले हल्के लिक किया, फिर जीभ अंदर डाली। सुड़-सुड़ करके उनका चूत रस पीने लगा। तीन उंगलियां अंदर घुसेड़ दीं, जी-स्पॉट पर जोरदार रगड़ने लगा। क्लिटोरिस को दांत से काटा। नेहा पूरी तरह पागल हो गईं। उनका शरीर बंधे होने के कारण मछली की तरह तड़प रहा था। “आह… विक्रम… मैं झड़ रही हूं… उफ्फ… फव्वारा छूट रहा है!”


उनकी चूत से झरना सा गर्म रस फूटा। मैंने सारा पी लिया। वो तीन बार झड़ चुकी थीं। लेकिन मैं रुका नहीं।
अचानक मैं उठा और अपना लंड उनके मुंह में ठूंस दिया। “चूस रंडी! गला तक ले!” मैंने उनके मुंह को फक करना शुरू किया। लंड गले तक घुसेड़ा। “घुं-घुं” की आवाजें निकल रही थीं। उनकी आंखों में आंसू आ गए, लेकिन वो जीभ से लंड चाट रही थीं।

एक बार तो लंड इतना गहरा गया कि उनका दम घुटने लगा। मैंने बाल पकड़कर जोर से मुंह फका। “साली कुतिया, आज तेरा मुंह भी चूत बना दिया!”


नेहा ने दांत हल्के लगाए तो मैंने लंड बाहर निकाला। वो हांफते हुए बोलीं, “हरामजादे! दम निकाल दिया था… लेकिन मजा आया! अब मेरी चूत की प्यास बुझा! तकिया मेरे चूतड़ के नीचे लगा और फाड़ दे!”
मैंने तकिया रख दिया। उनकी मोटी गांड ऊपर उठ गई। चूत बिल्कुल खुली, रस से चमक रही थी। मेरा लंड चूत के मुंह पर सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा 8 इंच एक ही झटके में घुस गया।

“आआआ… उह्हह… फाड़ दिया रे… लेकिन और जोर से!”
मैंने उनके बंधे चूचों को मसलना शुरू किया। हर धक्के के साथ थप्पड़ मार रहा था। फच-फच… फच-फच की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। “चोद रंडी! तेरी चूत फाड़ डालूंगा आज!” नेहा चिल्ला रही थीं – “हां साले… जोर से… मेरी चूत को बर्बर चोद… आह… आह… आज फाड़ दे इस हरामजादी चूत को!”


मैं उनकी कमर पकड़कर पिस्टन की तरह धक्के मारने लगा। हर झटका इतना जोरदार कि बेड हिल रहा था। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैंने उनके निप्पल काटे, चूचों पर लाल-लाल थप्पड़ मारे। गांड पर भी हाथ चला दिया। “रंडी, तेरी गांड भी लाल कर दूंगा!”
नेहा बार-बार झड़ रही थीं। “विक्रम… मैं फिर झड़ गई… उफ्फ… तेरा लंड तो लोहे का रॉड है!” मैंने गति बढ़ाई। कमरे में पसीने की बू थी। AC भी फेल लग रहा था। अचानक मेरे लंड में करंट दौड़ा। मैंने जोर से धक्का मारा और उनकी चूत में गर्म-गर्म वीर्य उड़ेल दिया। “ले रंडी… मेरी गर्म मलाई पी!”


नेहा भी साथ झड़ीं। उनकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। हम दोनों पसीने से तर थे। मैं उनके ऊपर गिर पड़ा। लेकिन रुका नहीं। लंड अभी भी अंदर था। मैंने धीरे-धीरे फिर हिलाना शुरू किया। “कुतिया, अभी तो शुरुआत है!”
नेहा हांफते हुए बोलीं, “साले… तू थकता नहीं… मुझे और चोद… मेरे हाथ खोल दे थोड़ा…”


मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं रंडी! आज तू बंधी ही रहेगी!” मैंने उनके हाथों की रस्सी ढीली की लेकिन पैर अभी बंधे रखे। फिर उन्हें घुटनों के बल मोड़ा। अब डॉगी स्टाइल में। मैंने बाल पकड़े, गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे – चमाक… चमाक… लाल निशान उभर आए। फिर लंड अंदर घुसेड़ा और बर्बर चुदाई शुरू। “ले कुतिया… गांड हिला… तेरी चूत फाड़ता हूं!”


फच-फच की आवाज तेज हो गई। मैंने एक हाथ से उनकी चूत में उंगली डालकर क्लिटोरिस रगड़ा। नेहा चीख रही थीं – “आह… विक्रम… मैं मर जाऊंगी… लेकिन मत रुक… चोदते रह…”


इस राउंड में उन्होंने चार बार झड़ा। मैंने भी दूसरी बार उनकी चूत में वीर्य भरा। अब वो पूरी तरह थक चुकी थीं। मैंने उन्हें खोल दिया। हम दोनों बेड पर लेटे थे। नेहा ने मेरे माथे पर किस किया और कान में बोलीं, “विक्रम… आज तूने मुझे वो सुख दिया जो मैं सालों से तरस रही थी। तेरा लंड अब मेरी चूत का दीवाना बन गया है!”


हम दोनों 5 घंटे तक चुदाई करते रहे। बीच में पानी पिया, फिर फिर से शुरू। तीसरे राउंड में उन्होंने मुझे राइड किया – अपनी भारी चूचियां हिलाते हुए ऊपर-नीचे कूद रही थीं। मैंने नीचे से धक्के मारे। चौथे राउंड में फिर मिशनरी। हर बार बर्बर, हर बार जोरदार थप्पड़, काटना, चूसना। उनकी चूत सूजी हुई थी, लेकिन वो रुकने को तैयार नहीं थीं।


आखिरकार शाम हो गई। उस शाम नेहा मैडम ने मुझे जाने नहीं दिया। “विक्रम, आज रात यहीं रह। मेरी चूत अभी भी तेरे लंड की भूखी है।” उनकी आंखों में वही शैतानी चमक थी। मैंने मुस्कुराकर कहा, “ठीक है रंडी, लेकिन अब तू मेरी गुलाम बनेगी।”


रात भर हमने कमरे को युद्धक्षेत्र बना दिया। पहले मैंने उन्हें बाथरूम में घसीटा। शावर के नीचे पानी की तेज धार में उनकी नंगी देह को दीवार से सटाया। मेरे हाथ उनकी मोटी गांड को मसलते रहे, उंगलियां चूत में घुसेड़ते। नेहा चीख रही थीं, “आह… साले, पानी के साथ चोद मुझे!” मैंने उन्हें घुटनों पर बिठाकर मुंह में लंड ठूंस दिया। गले तक फक किया, वो घुट-घुट कर रही थीं लेकिन रुकने को तैयार नहीं।

फिर मैंने उन्हें उठाया, पैर फैलाकर काउंटर पर बिठाया और जोरदार धक्कों से चुदाई शुरू। पानी की छींटें उड़ रही थीं, फच-फच की आवाज गूंज रही थी। नेहा बार-बार झड़ रही थीं, “विक्रम… तेरी चुदाई ने मुझे पागल कर दिया!”


बाथरूम से निकलकर बेडरूम में फिर से। इस बार मैंने उन्हें चारों हाथ-पैर बांधकर उल्टा लिटाया। उनकी गांड ऊपर थी। मैंने पहले गांड पर कई थप्पड़ मारे – चमाक-चमाक – लाल हो गई। फिर लंड चूत में घुसेड़ा और पीछे से बर्बर धक्के। “ले कुतिया, आज तेरी गांड भी मारूंगा!” नेहा तड़प रही थीं, “हां… मार… फाड़ दे… मैं तेरी रंडी हूं!”.


सुबह तक हम चार बार और झड़े। उनका पूरा बदन निशानों से भरा था – थप्पड़ों के, काटने के, चूसने के। नेहा मेरे सीने पर सिर रखकर बोलीं, “विक्रम, तूने मुझे जिंदा कर दिया। अब हर हफ्ते तेरे पास आऊंगी। तेरे लंड के बिना मैं नहीं रह सकती।”


उस रात के बाद हमारा रिश्ता और गहरा हो गया। नेहा अब मेरी पूरी तरह गुलाम थीं। जीवन की हर मुश्किल में वो याद आती – और चुदाई का वो बर्बर मजा मुझे फिर से जिंदा कर देता।

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