लखनऊ के पास गांव का मर्द अर्जुन ने शादीशुदा रिया को होटल में बंधन-मुक्त चोदा। मोटा 7 इंच लंड से चीखें निकालीं, खून बहाया, गांड में उंगली, चार राउंड ब्रूटल चुदाई – अब वो उसकी गुलाम बन गई hindisex story।
हाय दोस्तों, मेरा नाम अर्जुन सिंह है। मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर से महज २० किलोमीटर दूर बसे छोटे से गांव हरिपुरा का रहने वाला हूं। उम्र है २८ साल की, कद-काठी मस्त वाली – ५ फुट १० इंच लंबा, मोटा-तगड़ा बदन जो जिम और खेतों की मेहनत से तराशा हुआ है। गांव में रहते हुए दिन काटना पड़ता है, सुबह उठो, खेत संभालो, शाम को थकान मिटाने के लिए मोबाइल पर घूमो। घर में हिंदी बोलते हैं, लिखते भी यही हैं, तो अगर इस देसी सेक्स कहानी में कहीं लफड़ा हो जाए तो माफी मांग लेना भाई। लेकिन वादा है, ये कहानी ऐसी होगी कि तुम्हारा लंड खड़ा हो जाएगा, और पढ़ते-पढ़ते रुकना मुश्किल लगेगा। yeh hindisex story app lustystories par padh rhe ho.
ये बात है पिछले साल की गर्मियों की। मई का महीना था, लू चल रही थी बाहर, लेकिन अंदर का ज्वाला तो और भयानक था। मैं रोज की तरह शाम को बोर होकर इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रहा था। गांव का सन्नाटा कचोटता था – कोई दोस्ताना चहल-पहल नहीं, बस मां-बाप की चिंता और भाई का शादी का दबाव। तभी स्क्रीन पर एक सजेशन पॉप अप हुई। एक लड़की की प्रोफाइल – नाम रिया शर्मा। फोटो देखते ही दिल धक् से रह गया। वो मुस्कुरा रही थी, बाल खुले, आंखों में वो चमक जो कह रही हो, ‘आजा, खेल लें थोड़ा।’ उम्र लग रही २६-२७ की, लेकिन वो मादक अदा… जैसे कोई जंगली बिल्ली हो। मैंने बिना सोचे रिक्वेस्ट भेज दी। सोचा, शायद रिजेक्ट हो जाए, लेकिन ना-मुंह से ‘एक्सेप्ट’ का नोटिफिकेशन आ गया। दिल की धड़कन तेज हो गई।
फटाक से मैसेज टाइप किया – ‘हाय, कैसे हो?’ रिप्लाई आया, ‘हाय अर्जुन जी, अच्छी हूं। आप?’ बस, यहीं से शुरू हो गया सिलसिला। पहले तो हल्की-फुल्की बातें – गांव-शहर, मौसम, फैमिली। लेकिन रिया की बातों में वो मिठास थी, जो चाय में गुड़ घोलने जैसी लगती है। वो लखनऊ के पास ही एक कस्बे, गोमती नगर एक्सटेंशन में रहती थी – महज १५ किलोमीटर दूर। उसके पापा सरकारी नौकरी में थे, मां होममेकर, और वो खुद एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती थी। शादीशुदा थी, लेकिन पति साल भर पहले सऊदी चला गया था काम के सिलसिले में। अकेलापन… वो शब्द ही काफी था मेरे लिए।
पहले ही दिन हमने दो घंटे फोन पर बात की। रात के ११ बज चुके थे, लेकिन बातें थमने का नाम न ले रहीं। मैंने हिम्मत जुटाई, ‘नंबर दे दो ना, व्हाट्सएप पर चैट करें।’ वो हंसी, ‘अरे इतनी जल्दी? ठीक है, भेज रही हूं।’ नंबर आ गया। अगली सुबह ही मैसेज किया – ‘गुड मॉर्निंग, नींद आई?’ रिप्लाई: ‘हां, लेकिन तुम्हारी बातें याद आ रही थीं।’ बस, यहीं से बातें गहरी होने लगीं। मैंने धीरे-धीरे टॉपिक बदला – फिल्में, गाने, फिर पर्सनल चीजें। ‘तुम्हारी उम्र क्या है?’ ‘२६। तुम?’ ‘२८। लेकिन लगता हूं ३० का।’ हंसी उड़ी। फिर एक दिन, बातों-बातों में मैंने पूछा, ‘तुम्हारी फिगर कैसी है? मतलब, हेल्थ कंसर्न।’ वो शरमाई, लेकिन बताया – ‘५ फुट ५ इंच हूं। वेट ५५ किलो। कमर २८ की, बस्ट ३६ का। जिम जाती हूं ना।’ उफ्फ! वो डिटेल्स सुनते ही मेरा लंड सिहर उठा। कल्पना करने लगा – पतली कमर, भरे-भरे बूब्स, वो कर्व्स जो किसी को भी पागल बना दें।
धीरे-धीरे बातें सेक्सी हो गईं। मैंने पूछा, ‘तुम्हें रोमांटिक मूवीज पसंद हैं?’ वो बोली, ‘हां, लेकिन रियल लाइफ में तो कुछ ही मिलता है।’ मैंने मौका लपका, ‘क्या मतलब? पति तो हैं ना?’ सांस लेकर बोली, ‘हां, लेकिन वो दूर हैं। अकेलापन काटता है।’ मैंने एक पॉर्न क्लिप भेज दी – हल्की वाली, लेकिन इंटेंस। ‘ये देखो, क्या लगता है?’ वो नेगेटिव नहीं हुई। ‘वाह, हॉट है। लेकिन रियल में ट्राई किया है?’ बातें ऐसे चलीं जैसे आग लग गई हो। वो भी ओपन हो गई – अपनी फैंटसीज शेयर करने लगी। ‘मुझे डॉगी स्टाइल पसंद है, लेकिन कभी प्रॉपर ट्राई नहीं किया।’ मैं हंस पड़ा, ‘तो मिलो, दिखाता हूं।’ वो चुप रही, फिर बोली, ‘सच में मिलना चाहोगे?’ दिल की धड़कन रुक सी गई। ‘हां, कल?’
अगले दिन दोपहर ३ बजे, मैंने बाइक स्टार्ट की। लखनऊ की तरफ दौड़ा। वो एक कैफे के बाहर खड़ी थी – ब्लैक टॉप, जींस, बाल खुले। रियल लाइफ में वो फोटो से दस गुना सेक्सी लग रही थी। आंखों में वो चमक, होंठों पर वो स्माइल जो कह रही हो, ‘आ गया मेरा शिकार।’ मैं उतरा, हाय बोला। वो मुस्कुराई, ‘अर्जुन, तुम तो फोटो से कूल लगते हो।’ हम कैफे में घुसे। कॉफी ऑर्डर की, बातें कीं – हंसी-मजाक, फ्लर्टिंग। लेकिन अंदर का ज्वाला भड़क रहा था। मेरी नजरें उसके बूब्स पर ठहर गईं – टॉप के नीचे उभरे हुए, जैसे आम के बूंदे लटक रहे हों। वो नोटिस कर रही थी, लेकिन शरमाने की बजाय आंख मार दिया।
एक घंटे बाद, मैंने कहा, ‘चलो कहीं प्राइवेट जगह।’ वो हिचकिचाई, ‘क्या? अभी?’ लेकिन आंखों में सहमति थी। ‘ठीक है, लेकिन स्लो।’ हम एक बजट होटल की तरफ बढ़े – गोमती नगर का एक छोटा सा प्लेस, जहां चेक-इन आसान था। काउंटर पर रिसेप्शनिस्ट ने आईडी मांगी। रिया ने बिना हिचक पर्स से आधार कार्ड निकाला। मैं सोच में पड़ गया – साली तो प्लान्ड आ गई थी! रूम में घुसते ही दरवाजा लॉक किया। हवा में टेंशन था, जैसे बिजली का तार चरमरा रहा हो। मैंने उसे दीवार से सटा लिया। होंठ उसके होंठों पर चिपका दिए। वो चीखी नहीं, बल्कि जवाब दिया – जीभें लड़ाई करने लगीं। मेरा हाथ उसके बूब्स पर गया – ३६ साइज के वो गोले, कड़क, जैसे रॉकेट लॉन्चर। मैंने जोर से दबाया, वो सिसकारी भरी, ‘आह… धीरे अर्जुन, दर्द हो रहा।’
लेकिन दर्द में भी मजा था उसका। मैंने गर्दन पर किस्से बरसाए, कान चाटे। वो कांप रही थी, हाथ मेरे शर्ट में घुस गए। ‘तुम्हारा बदन… कितना सॉलिड है।’ मैंने उसे बेड पर धकेला। ऊपर चढ़ गया, कुर्ता… नहीं, उसका टॉप ऊपर किया। ब्रा ब्लैक लेस वाली, उसके गोरे बूब्स बाहर झांक रहे। मैंने ब्रा खींची, चूचियां बाहर। गुलाबी निप्पल्स, सख्त। मुंह में लिया, चूसा जैसे भूखा शेर। वो चिल्लाई, ‘ओह गॉड… अर्जुन, मार डालोगे!’ लेकिन टांगें फैला रही थी। मैंने जींस उतारी – पैंटी भी ब्लैक, गीली हो चुकी। नाभि पर जीभ फेरी – वो पेट थरथराने लगा, जैसे इमरान की मूवी में सीन हो। ‘आह… बस… वहां…’ वो बड़बड़ा रही थी।
मैंने पैंटी साइड की, चूत देखी – साफ-सुथरी, गीली, महक मादक। खुशबू लगाई थी शायद, लेकिन वो नैचुरल गंध… उत्तेजक। जीभ डाली, चाटा। वो उछल पड़ी, ‘नहीं… शर्म आ रही।’ लेकिन हाथ मेरे सिर पर दबा रही। मैंने उंगली डाली – टाइट चूत, साल भर की भूख। वो चीखी, ‘धीरे… फट जाएगी।’ लेकिन मैंने स्पीड बढ़ाई। दूसरी उंगली, फिर थंब से क्लिट रगड़ा। उसका पानी बहने लगा। ‘अर्जुन… मैं… आ रही हूं!’ वो झड़ गई, शरीर कांपता हुआ।

अब मेरा टर्न। मैंने टी-शर्ट उतारी, पैंट खोली। अंडरवियर में मेरा ७ इंच का मोटा लंड फड़फड़ा रहा। वो देखकर आंखें फटीं, ‘ये तो… विशालकाय है! मेरा पति का तो आधा भी नहीं।’ वो घुटनों पर बैठी, लंड पकड़ा। मुंह में लिया – चूसा जैसे आइसक्रीम। मैंने सिर पकड़कर धक्का दिया, गले तक। वो गैग हुई, लेकिन रुकी नहीं। ‘चूस रिया, पूरा खा ले।’ ६९ पोजिशन में आए – उसकी चूत मेरे मुंह पर, मेरा लंड उसके। मैं चूत चाटता, वो लंड चूसती। उंगली गांड में डाली – टाइट, लेकिन वो एंजॉय कर रही। ‘आह… वहां भी?’ मैंने हां कहा, ‘सब कुछ तेरा आज।’
फिर रुकवाया। कंडोम पहनने को कहा, लेकिन वो बोली, ‘नहीं, रॉ फील करना है।’ मैंने लंड सेट किया चूत पर। धक्का मारा – टाइट चूत ने रोक लिया। वो चीखी, ‘दर्द… बाहर निकालो!’ लेकिन मैंने कमर पकड़ी, जोर लगाया। आधा अंदर। खून निकला थोड़ा – पुरानी भूख। ‘सहन कर रिया, मजा आएगा।’ पूरा धक्का – वो चिल्लाई, मुँह दबा लिया मैंने। अब पेलना शुरू – धीरे, फिर तेज। बेड हिल रहा, दीवारें गूंज रही। उसके बूब्स उछल रहे, मैं मसल रहा। ‘चोदो अर्जुन… फाड़ दो!’ वो चीख रही। १५ मिनट बाद, मैं झड़ने वाला। ‘कहां?’ ‘अंदर… भर दो!’ स्पर्म चूत में बहा – गर्म, चिपचिपा। उसके साथ उसका दूसरा ऑर्गेज्म।
लेकिन मेरा लंड ढीला नहीं पड़ा – गॉड गिफ्ट। मैंने धक्के जारी रखे। वो थकी, ‘बस… थोड़ा रेस्ट।’ लंड बाहर निकाला, लेकिन वो देखकर हंस पड़ी, ‘ये तो अभी भी रॉक हार्ड!’ वीडियो बनाई मैंने – फोन सेट किया। वो पोज देती – चूत फैलाकर, बूब्स दबाकर। ‘रिकॉर्ड करो, बाद में देखेंगे।’ फिर दूसरा राउंड। नाभि चाटी, चूत में उंगली। गर्म हो गई। डॉगी में – गांड ऊपर, कमर पकड़ी। धक्का – पूरा अंदर। ‘पेलो राजा… जोर से!’ चुदाई ब्रूटल – थप्पड़ लगाए गांड पर, बाल खींचे। वो चीखती, लेकिन ‘और… और!’ २० मिनट, फिर स्पर्म अंदर।
शाम तक चार राउंड – मिशनरी, काउगर्ल, स्टैंडिंग। हर बार इंटेंस, पसीना, चीखें। आखिरी में चिपटे लेटे। ‘तुमने तो मुझे बर्बाद कर दिया,’ वो बोली, चूत छूकर। ‘लेकिन मजा आया।’ विदा लेते वक्त किस किया। ‘फिर मिलेंगे।’ उसके बाद रोज वीडियो कॉल – मटरबेशन शो, डर्टी टॉक्स। हर मौके पर मिले, चोदा। रिया की सहेली नेहा को भी लपेटा बाद में – वो अलग कहानी। लेकिन ये सिलसिला… अभी भी जल रहा है। दोस्तों, कैसी लगी ये हॉट मैरिड अफेयर वाली सेक्स कहानी? कमेंट्स में बताओ, मेल करो।
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सरसों के खेतों में नेहा की चीखें