भाभी की क्रूर गुलामी

आर्यन और प्रिया भाभी की बेहद गंदी, बर्बर BDSM चुदाई। मूत-टट्टी, मार-पीट, बंधन और खतरनाक रिस्क के साथ दुनिया की सबसे क्रूर, हार्डकोर और लत लगाने वाली भाभी वाली कहानी।

मेरा नाम आर्यन है। मेरी हाइट 5 feet 10 inches है। मैं अच्छे शरीर वाला, गोरा और आकर्षक लुक वाला लड़का हूँ। उम्र 22 साल। मैं पुणे, महाराष्ट्र से हूँ। आज मैं अपनी सगी भाभी की वो बेहद गंदी, क्रूर और कहानी शेयर कर रहा हूँ जो मेरी जिंदगी का सबसे खतरनाक और लत लगाने वाला सच है।


भाभी का नाम प्रिया है। उनकी उम्र 29 साल है। उनका फिगर 36-28-38 का है – भारी भरकम और चट्टानी बूब्स, पतली कमर और मोटी-गोल गांड जो देखते ही किसी का भी लंड खड़ा कर दे। वे इतनी खूबसूरत और सेक्सी हैं कि पड़ोस के लोग भी उनकी तरफ घूर-घूर कर देखते रहते हैं। उनके होंठ गुलाबी, आँखें काजल भरी और चाल ऐसी कि हर कदम पर उनकी गांड हिलती हुई लगती है।


हमारे घर में कुल 6 सदस्य हैं – मैं, मम्मी-पापा, छोटा भाई और भैया-भाभी। गर्मी का मौसम शुरू हुआ तो घर के बाकी सब लोग गांव चले गए। वहाँ हर साल पूजा-पाठ और खेती का काम होता है। घर में सिर्फ मैं, भैया और भाभी रह गए थे। मेरा कॉलेज एग्जाम चल रहा था इसलिए मैं पुणे में ही रुका हुआ था। भैया एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में हाई लेवल की जॉब करते हैं।


मई का महीना था। एक दिन अचानक कंपनी से भैया को सिंगापुर के लिए इमरजेंसी ट्रिप पर जाना पड़ा। वे जल्दबाजी में घर आए, बैग पैक किया और एयरपोर्ट के लिए निकल गए। उन्हें कम से कम एक महीने तक बाहर रहना था। उनके जाने के बाद घर में बस मैं और प्रिया भाभी रह गए।


पहले दो-तीन दिन सब कुछ नॉर्मल रहा। मैं दिन भर पढ़ाई करता और भाभी घर संभालतीं। लेकिन रातें अब अकेली हो गई थीं। मैं हमेशा से गर्मी में छत पर सोने का शौकीन रहा हूँ। पूरा घर एसी और इनवर्टर से भरा है फिर भी मुझे खुली हवा में सोना पसंद है।


उस रात मैं छत पर बिस्तर लगाकर लेटा हुआ था। आधी रात के करीब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि भाभी मुझसे कुछ फीट दूर अपना बिस्तर लगाकर सो रही हैं। उनकी हल्की सी नाइटी हवा में फड़फड़ा रही थी। मैं हैरान था। भाभी छत पर क्यों? लेकिन मैं चुपचाप लेटा रहा।
सुबह जब नींद खुली तो मैंने पूछा, “भाभी, रात को ऊपर क्यों आ गईं?”
वे शरमाते हुए बोलीं, “अकेले कमरे में डर लग रहा था आर्यन। भैया गए तो घर सूना लगने लगा।”


उसके बाद से हर रात भाभी छत पर ही सोने लगीं। उनका बिस्तर मेरे बिस्तर के पास ही आ गया था। एक हफ्ता बीत गया। अब रातें गर्म और उमस भरी हो रही थीं।
एक रात मेरी नींद खुली। चांदनी रात थी। भाभी करवट लेकर सो रही थीं। उनकी नाइटी घुटनों तक चढ़ गई थी। उनकी गोरी-चिकनी, मोटी जांघें पूरी तरह नंगी दिख रही थीं। इतनी परफेक्ट, इतनी मुलायम कि मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने आज तक भाभी को इस तरह नहीं देखा था। उनके गहरे कटाव वाले बूब्स नाइटी से फटने को तैयार थे।
उस रात पहली बार मेरे दिमाग में गंदे ख्याल आए। मैंने सोचा – इस माल को चोदना है, बर्बर तरीके से।


मैंने अपना बिस्तर और पास खिसका लिया। सोने का नाटक करते हुए अपना पैर उनकी जांघ पर रख दिया। फिर धीरे-धीरे पैर से उनकी जांघ सहलाने लगा। भाभी हल्के से हिलीं लेकिन कुछ नहीं बोलीं। मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने हाथ बढ़ाकर उनके बूब्स पर रख दिया और जोर से दबा दिया।
भाभी एकदम जाग गईं। उन्होंने मेरी तरफ घूरा और जोरदार थप्पड़ मार दिया। “हरामी! क्या कर रहा है तू?” वे गुर्राईं। “भैया को बता दूंगी तो तेरा क्या हाल होगा!”


मैं डर गया। सॉरी बोलकर दूर हट गया। लेकिन नींद दोनों को नहीं आ रही थी। भाभी बार-बार करवट बदल रही थीं। करीब आधा घंटा बाद वे अचानक मेरे पास आईं और बोलीं, “आर्यन… भैया को कुछ नहीं बताऊंगी। लेकिन तूने जो किया वो बहुत गलत था।”
फिर वे एकदम मेरे सीने से चिपक गईं। उनकी सांसें तेज हो रही थीं। “लेकिन… मुझे भी बहुत दिनों से कुछ चाहिए जो भैया नहीं दे पाते।” उनकी आँखों में आग थी।
मैं समझ गया। मैंने उन्हें जोर से चूम लिया। हम दोनों पागलों की तरह किस करने लगे। जीभें एक-दूसरे के मुंह में घुस रही थीं। मैंने उनकी नाइटी फाड़ते हुए उतार दी। वे पूरी नंगी हो गईं। उनके भारी बूब्स छाती पर लहरा रहे थे। गुलाबी चुचियां सख्त हो चुकी थीं।


“मुझे डर्टी चोदना है आर्यन,” उन्होंने कड़क स्वर में कहा। “बहुत क्रूर, बहुत गंदा। मुझे मार, पीट, बांध, गाली दे। मुझे तेरी गुलाम बना ले।”
ये सुनकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने उनकी गर्दन पकड़कर उन्हें नीचे दबाया। “चूतिया रंडी, आज तुझे मैं तोड़ दूंगा।”
मैंने उनके बाल पकड़े और उनका मुंह अपने लंड पर रख दिया। 7 इंच का मोटा लंड उनके गले तक ठूंस दिया। वे उबकाई ले रही थीं लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। “चूस रंडी, गहरी चूस!” वे जोर-जोर से चूसने लगीं। लार उनके मुंह से बह रही थी।


कुछ देर बाद मैंने उन्हें घुटनों पर खड़ा किया। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने जोरदार थप्पड़ मारा। “चटक!” उनकी गोरी गांड लाल हो गई। फिर एक के बाद एक 10-12 थप्पड़। वे कराह रही थीं – “हां… और मारो… मुझे दर्द दो!”
मैंने उनकी गांड चाटनी शुरू की। जीभ गांड के छेद में घुसाई। बहुत तेजी से चाटा। फिर दो उंगलियां डालकर फैलाया। वे चीख रही थीं मजे से।


“अब चूत चाट!” मैंने उन्हें लिटाया और उनके पैर फैलाकर उनकी चूत पर मुंह रख दिया। उनकी चूत पहले से ही गीली थी। खट्टा-मीठा रस निकल रहा था। मैंने जोर-जोर से चूसना शुरू किया। क्लिटोरिस को दांतों से काटा। वे तड़प रही थीं। “आर्यन… मार डालोगे… हां… चूसो और जोर से!”


मैंने उन्हें बांधने का फैसला किया। उनके दुपट्टे से उनके हाथ बिस्तर के सिरहाने बांध दिए। फिर उनकी आँखों पर पट्टी बांध दी। “अब तू मेरी है रंडी।”
मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा ठोक दिया। “आआआह!” वे चीख उठीं। लेकिन मैं रुका नहीं। तेज-तेज धक्के मारने लगा। उनके बूब्स को जोर-जोर से मसलता, चूचियों को काटता।
“तेरी चूत बहुत टाइट है रंडी। भैया का लंड छोटा है ना?” मैं गालियां देते हुए चोद रहा था।

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वे चिल्ला रही थीं, “हां… छोटा है… तुम्हारा बहुत मोटा है… फाड़ दो मेरी चूत!”
मैंने उनकी गांड में भी उंगली डाल दी। दोनों छेदों में एक साथ रगड़ाई। वे झड़ गईं। उनका पानी मेरे लंड पर बह निकला। लेकिन मैं रुका नहीं।
फिर मैंने उन्हें घुटनों पर किया और गांड में लंड घुसाने लगा। “नहीं… धीरे… दर्द हो रहा है!” लेकिन मैं क्रूर था। पूरा लंड उनकी गांड में ठेल दिया। वे रो रही थीं लेकिन गांड हिला रही थीं। मैंने उनके बाल खींचे, गर्दन दबाई और गांड मारता रहा।


“मेरा माल पी ले रंडी!” मैं झड़ने लगा। उन्होंने मुंह खोल दिया। मैंने पूरा माल उनके मुंह में उछाल दिया। वे बिना बर्बाद किए निगल गईं।
लेकिन रात यहीं नहीं खत्म हुई।
मैंने उन्हें बाथरूम ले जाकर शावर के नीचे खड़ा किया। वहाँ फिर से चोदा। उनकी चूत में उंगलियां डालकर पानी निकाला। फिर वे मेरे मुंह पर बैठकर मूतने लगीं। “पी ले आर्यन… मेरी गर्म पेशाब पी!” मैंने पूरा मूत पिया। स्वाद अजीब लेकिन लत लग गया।


उसके बाद मैंने उन्हें टट्टी चटवाने को कहा। वे शरमाईं लेकिन मैंने जबरदस्ती उनकी गांड पर मुंह रखवा दिया। वे मेरी टट्टी चाटने लगीं। हम दोनों पूरी तरह गंदे हो चुके थे।
अगले कई दिन हमने यही खेल खेला। कभी छत पर, कभी बाथरूम में, कभी किचन में। मैं उन्हें रस्सी से बांधकर मारता, चाबुक मारता (बेल्ट से), उनके बूब्स और गांड पर निशान बनाता। वे हर बार और ज्यादा मांगतीं।

“मुझे और क्रूर बनाओ आर्यन… मुझे तुम्हारी गुलाम रंडी बना लो।”
एक रात मैंने उन्हें बालकनी में नंगी खड़ा किया। रात के अंधेरे में उनके बूब्स सहलाते हुए चोदा। पड़ोस में कहीं से आवाज आती तो वे और उत्तेजित हो जातीं।


एक बार मैंने उनके मुंह में लंड डालकर पेशाब कर दिया। वे पूरा पी गईं। फिर उन्होंने मुझे भी पिलाया। हम दोनों मूत और टट्टी के खेल में पूरी तरह डूब गए थे। BDSM का हर रूप आजमाया – चेन, क्लिप्स, स्पैंकिंग, चोकिंग। उनके शरीर पर काटने के निशान, थप्पड़ों के लाल चिह्न हर रोज ताजा होते।


जून के शुरू में घर वाले वापस आने वाले थे। भैया भी सिंगापुर से लौट रहे थे। लेकिन हम रुके नहीं। हमने होटल बुक किया। वहाँ दो दिन लगातार चुदाई की। मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में, मिशनरी में, स्टैंडिंग में, 69 में सब तरीकों से चोदा। उनके दोनों छेदों को लाल कर दिया।
उसके बाद की कहानी और भी खतरनाक हो गई। भैया के वापस आने के बावजूद प्रिया भाभी की भूख मिटने का नाम नहीं ले रही थी। वे हर रात मुझे मैसेज करतीं – “आर्यन, आज रात मेरी गांड फाड़ दो… मुझे तेरे बिना नींद नहीं आती।” मैं भी अब उनका गुलाम बन चुका था, या यूं कहें कि उनका मालिक। हम दोनों एक-दूसरे को पूरी तरह तोड़ने और फिर जोड़ने का खेल खेल रहे थे।


भैया ऑफिस से थके-हारे आते और सो जाते। उसी वक्त हम छत पर या बाथरूम में अपना क्रूर खेल शुरू कर देते। एक रात भाभी ने मुझे बुलाया। वे पहले से ही नंगी खड़ी थीं। उनके हाथ पीछे बंधे हुए थे, मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। उन्होंने खुद को तैयार किया था मेरे लिए। मैंने उनके बाल खींचे और उन्हें छत की दीवार से सटा दिया।
“आज तुझे सजा मिलेगी रंडी,” मैंने कहा और अपनी बेल्ट निकाली। पहले 20 जोरदार कोड़े उनकी मोटी गांड पर पड़े। “चटाक… चटाक!” उनकी चीखें कपड़े में दब गईं लेकिन उनकी चूत से पानी बह रहा था। गांड लाल होकर सूज गई थी। फिर मैंने उनके बूब्स पर क्लिप्स लगाए – कसकर, इतने जोर से कि वे तड़प उठीं।


मैंने उन्हें घुटनों पर बैठाया और अपना मोटा 7 इंच का लंड उनके गले तक ठेल दिया। गला फूल गया, आंखें बाहर निकलने लगीं। वे उबकाई ले रही थीं लेकिन मैंने सिर पकड़कर फेस फकिंग जारी रखी। “निगल साली, पूरा मुंह चूस!” लार, थूक और प्रीकम का मिश्रण उनके चेहरे पर बह रहा था।


फिर मैंने उन्हें चारों खाने चित लिटाया। पैर फैलाकर बांध दिए। उनकी चूत और गांड पूरी तरह खुली थी। मैंने पहले तीन उंगलियां चूत में ठेलीं, फिर चार। वे कराह रही थीं – “फाड़ दो… मेरी चूत फाड़ दो!” मैंने पूरा हाथ घुसाने की कोशिश की। आधा हाथ अंदर चला गया। वे झड़ गईं, शरीर कांप रहा था।


उसके बाद गांड में लंड मारा। बिना किसी लुब्रिकेंट के, रूखा और क्रूर। पूरा लंड एक झटके में अंदर। उनकी आंखें बंद, मुंह खुला, दर्द और मजे का मिश्रण। मैंने उनके गले पर हाथ रखकर दबाया और तेज धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उनके बूब्स उछल रहे थे। मैंने दांतों से उनकी चूचियों को काटा, खून निकलने तक।


“तेरी गांड अब मेरी है रंडी। भैया कभी नहीं मार पाएगा इतना जोर से,” मैं गालियां देता रहा। वे सिर हिला-हिलाकर हां कह रही थीं। हम दोनों एक साथ झड़े। मैंने माल उनकी गांड के अंदर ही छोड़ दिया। जब निकाला तो माल और खून का मिश्रण उनकी जांघों पर बह रहा था।
लेकिन खेल खत्म नहीं हुआ। भाभी ने कहा, “अब मेरा मूत और टट्टी पी लो आर्यन।” वे मेरे मुंह पर बैठ गईं। गर्म पेशाब की धार मेरे मुंह में। मैंने पूरा पिया, बिना बर्बाद किए। फिर वे मेरी छाती पर बैठकर टट्टी करने लगीं। छोटी-छोटी गंदी टट्टी उनके गांड से निकली और मैंने चाट-चाट कर खा ली। स्वाद कड़वा लेकिन लत लग चुकी थी। हम दोनों पूरी तरह गंदगी में लथपथ हो चुके थे।


अगले दिन हमने और बड़ा रिस्क लिया। भैया ऑफिस गए तो हम कार लेकर बाहर निकले। पुणे के पास एक सुनसान हिल स्टेशन पर गए। वहाँ जंगल में मैंने भाभी को नंगी करके पेड़ से बांध दिया। हाथ ऊपर, पैर फैले हुए। पूरे दिन धूप में उन्हें खड़ा रखा। उनके शरीर पर पसीना, धूल और कीड़े चिपक रहे थे।


मैंने उनके शरीर पर मोमबत्ती की बूंदें गिराईं। गर्म मोम उनके बूब्स, पेट, जांघों और गांड पर। वे चीख रही थीं। फिर मैंने आइस क्यूब्स से ठंडा किया। तड़प उठीं। उसके बाद मैंने उन्हें जमीन पर लिटाकर दोनों छेदों में चोदा। आसपास से गुजरने वाली गाड़ियों की आवाज आ रही थी। रिस्क और बढ़ गया था।


“कोई देख लेगा तो क्या होगा?” वे डर के मारे कांप रही थीं लेकिन उनकी चूत और भी गीली हो गई। मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदा, बाल खींचते हुए। फिर उनके मुंह में मूत किया। वे पी गईं। शाम को वापस घर लौटे तो भैया पहले ही आ चुका था। हम दोनों थके लेकिन संतुष्ट।
इसके बाद हमने घर में ही BDSM किट खरीद ली – चेन, हैंडकफ, व्हिप, डिल्डो, बॉल गैग। भाभी अब हर शाम तैयार रहतीं। एक रात मैंने उन्हें पूरे घर में घुमाया। नंगी, कॉलर पहने हुए, चेन से बंधी हुई। किचन में चोदा, लिविंग रूम में चोदा, भैया के बेडरूम के बाहर खड़े होकर उनकी गांड मारी।


“साली, तेरे पति के बेड के पास तेरी गांड मार रहा हूँ,” मैंने कहा। वे उत्तेजना से पागल हो रही थीं।
एक और खतरनाक रात आई। भैया नीचे सो रहा था। हम छत पर थे। मैंने भाभी को उल्टा लटका दिया – पैर ऊपर, सिर नीचे। ब्लड रश हो रहा था। उनके मुंह में लंड डालकर फेस फकिंग की। फिर उनकी चूत पर मुंह रखकर 69 पोजीशन में चाटा। वे झड़-झड़ कर थक गईं।


फिर मैंने उन्हें नीचे उतारा और उनकी गांड में बड़ा डिल्डो डाल दिया। साथ में अपना लंड चूत में। डबल पेनेट्रेशन। वे चीख रही थीं – “मर जाऊंगी… फट जाएगी!” लेकिन मैं रुका नहीं। तेज-तेज धक्के। उनके बूब्स पर थप्पड़, चूचियों पर काट। पूरा शरीर लाल निशानों से भर गया।
अंत में मैंने उनका मुंह खोला और पूरा माल, मूत सब उनके चेहरे और मुंह पर उछाल दिया। वे लथपथ होकर मुस्कुरा रही थीं। “ये ही तो चाहिए था मुझे… क्रूर मालिक।”


समय बीतता गया। हमने और भी एक्सट्रीम किया। एक बार होटल में तीन दिन की बुकिंग की। वहाँ मैंने उन्हें 24 घंटे बांधकर रखा। सिर्फ चोदने, मारने, गंदगी खिलाने के लिए। उन्होंने मेरी टट्टी खाई, मैंने उनकी। हम दोनों अब एक-दूसरे के बिना जी नहीं सकते थे।
भाभी ने एक दिन कहा, “आर्यन, मैं गर्भवती होना चाहती हूँ… तेरे बच्चे से।” मैं हैरान था लेकिन उत्तेजित भी। उसके बाद हमने और बिना प्रोटेक्शन के क्रूर चुदाई शुरू की। हर बार चूत में माल छोड़ता।


घर के अंदर खतरा बढ़ता जा रहा था। एक दिन भैया ने शक किया तो हमने प्लान बनाया। भाभी ने भैया को ड्रिंक में नींद की गोली दी। जब वे बेहोश हो गए तो मैं उनके बेडरूम में आया और प्रिया भाभी को उसी बेड पर चोदा। भैया के बगल में लेटकर उनकी पत्नी की गांड और चूत फाड़ी।
“देख रंडी, तेरे पति के पास तुझे चोद रहा हूँ,” मैंने कहा। वे रो रही थीं मजे से। उस रात हमने तीन बार झड़ा।


अब ये खेल रोज का हो गया था। कभी-कभी हम बाहर पार्क, सिनेमा, शॉपिंग मॉल में भी रिस्की सेक्स करते। भाभी स्कर्ट के नीचे पैंटी नहीं पहनतीं। मैं उंगलियां डालकर उन्हें झड़ाता।
दोस्तों, ये कहानी खत्म होने वाली नहीं है। प्रिया भाभी अब मेरी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। हम दोनों ने मिलकर दुनिया की सबसे गंदी, सबसे क्रूर और सबसे इंटेंस BDSM चुदाई का सफर तय किया है। मारना, पीटना, बांधना, गाली देना, मूत-टट्टी का खेल, पब्लिक रिस्क – सब कुछ।


अगर तुम्हें भी ऐसी भाभी या औरत मिले तो उसे पूरी तरह अपनी गुलाम बना लो। उसे तोड़ो, फाड़ो, गंदा करो। क्योंकि डर्टी, ब्रूटल और हार्डकोर सेक्स का मजा ही कुछ और है। ये नशा कभी नहीं उतरता।
मैं और प्रिया भाभी आज भी ये खेल खेलते हैं। कभी-कभी और भी ज्यादा क्रूरता से। क्योंकि हम जानते हैं – असली चुदाई वही है जो दर्द और मजे की हद पार कर जाए।


कसम से, ये मेरी असली कहानी है। पढ़कर तुम्हारा लंड खड़ा हो जाए तो समझ लेना कि ये असरदार है। अब तुम भी ट्राई करो और अपना अनुभव शेयर करना।
ये खेल जारी है… और आगे और भी खतरनाक होने वाला है।

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