एक पुरानी वीडियो ने सुनीता को जकड़ लिया। रोज दोपहर दरवाजा खुलता, शरीर बँधता, गला भरता और कोख गरम वीर्य से लबालब हो जाती। दर्द अब उसकी नई भूख बन चुका था।
सुबह के 9 बजे थे। रोहन विक्रम के घर के बाहर खड़ा था। विक्रम उसका पुराना दोस्त था, लेकिन आज रोहन सिर्फ दोस्ती के लिए नहीं आया था। पिछले कई महीनों से उसके मन में विक्रम की माँ सुनीता के शरीर का ख्याल घूम रहा था। सुनीता 48 साल की थीं। शरीर पतला-लंबा, गोरा रंग, लंबे काले बाल जो हमेशा साड़ी के पल्लू में छिपे रहते थे। चेहरा साधारण था, लेकिन जब वो घर के काम करती थीं तो उनका ब्लाउज कसकर भरा रहता था और साड़ी कमर पर कस जाती थी।
रोहन ने घंटी बजाई। तीन बार। कोई नहीं आया। चौथी बार जोर से दबाया तो दरवाजा खुला। सुनीता साड़ी में थीं। साड़ी की किनारी जाँघों के ऊपर तक खिसकी हुई थी, पल्लू कमर में बाँधा हुआ और ब्लाउज के दो ऊपरी बटन खुले। उनके दोनों भरे हुए स्तन आधे बाहर झूल रहे थे। पसीने से चमकते हुए। रोहन की नजर वहीं अटक गई। उसका लंड तुरंत सख्त हो गया और पैंट में धक्का मारने लगा।
सुनीता ने गुस्से से देखा।
“तुम यहाँ क्या कर रहे हो? विक्रम घर पर नहीं है। निकलो यहाँ से।”
रोहन अंदर घुस गया।
“आंटी, मुझे विक्रम से मिलना था। लेकिन अब आपसे बात करनी है।”
सुनीता ने दरवाजा बंद किया और किचन की तरफ मुड़ी।
“मेरे बेटे से मिलना-जुलना बंद कर दो। तुम्हारी संगति अच्छी नहीं है। प्रिया ने मुझे सब बता दिया है।”
प्रिया विक्रम की मौसेरी बहन थी, 32 साल की, शादीशुदा। रोहन अक्सर उसे चोदता था। सुनीता का नाम सुनकर रोहन के दिमाग में वह रात घूम गई जब प्रिया ने सुनीता के साथ लेस्बियन सेक्स की वीडियो बनाई थी। सुनीता शादी के बाद से असंतुष्ट थीं। उनके पति रात भर काम में व्यस्त रहते थे। एक दिन प्रिया ने सुनीता को मोबाइल पर पोर्न देखते पकड़ा। फिर बातों-बातों में हाथ कंधों पर फिरा, गर्दन चूमी, स्तन दबाए। सुनीता गरम हो गईं। दोनों ने एक-दूसरे की चूत रगड़ी, उँगलियाँ अंदर डालीं, जीभ से चाटा। एक साल से यह सिलसिला चल रहा था।
रोहन घर से निकला और सीधे प्रिया के घर पहुँचा। प्रिया दरवाजा खोलते ही समझ गई।
“क्या हुआ?”
“सुनीता आंटी मुझ पर भड़क रही हैं। कह रही हैं प्रिया ने सब बता दिया। तूने हमारी चुदाई बताई?”
प्रिया पहले इनकार करती रही। रोहन ने उसका बाल पकड़कर खींचा और मुँह में लंड ठूंस दिया।
“सच बोल रंडी। वरना तेरी सारी वीडियो तेरे पति और ससुराल भेज दूँगा।”
प्रिया की आँखें फटी रह गईं। उसने कबूल किया।
“हाँ… मैंने बता दिया। आंटी… आंटी के साथ मेरी भी चल रही है। एक साल से। उनकी चूत अभी भी गीली हो जाती है।”
रोहन ने प्रिया को बिस्तर पर पटक दिया। साड़ी ऊपर की, पैंटी फाड़ी और बिना किसी तैयारी के लंड उसकी चूत में धकेल दिया। प्रिया चीखी। रोहन ने उसके दोनों हाथ सिर के ऊपर बाँध दिए और जोर-जोर से ठोके।
“अब तू मेरी मदद करेगी। अगली बार जब आंटी तेरे पास आएँ तो चुपके से वीडियो बना। और मुझे सुनीता चाहिए। किसी भी हालत में।”
प्रिया रोते हुए बोली, “ये पाप है… वो तेरे दोस्त की माँ है।”
रोहन ने उसकी चूत में और गहराई तक धकेला।
“जब तू अपनी चूत उनकी चूत पर रगड़ती है तब पाप नहीं होता? बोल।”
प्रिया ने सिर हिलाया। रोहन ने उसका मुँह बंद किया और पूरा पानी उसकी चूत में उड़ेल दिया। प्रिया काँपती रही।
अगली सुबह रोहन ने मेडिकल स्टोर के सामने खड़े होकर कंडोम का विचार छोड़ा। चमड़ी से चमड़ी का मजा चाहिए था। वो सीधा सुनीता के घर पहुँचा। घर खाली था। विक्रम और उसके पिता काम पर निकल चुके थे। रोहन ने घंटी बजाई। सुनीता ने दरवाजा खोला। चेहरा पसीने से तर, साड़ी अस्त-व्यस्त।
“फिर आ गया? निकलो वरना…”
रोहन अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर दिया।
“आंटी, आज मैं निकलूँगा नहीं। आज आपकी ठुकाई होगी।”
सुनीता ने तमाचा जड़ा। रोहन मुस्कुराया। उसने जेब से मोबाइल निकाला और वीडियो चला दी। स्क्रीन पर सुनीता और प्रिया नंगी थीं। सुनीता की टाँगें फैली हुईं, प्रिया उनकी चूत चाट रही थी, उँगलियाँ अंदर-बाहर। सुनीता कराह रही थीं।
सुनीता के हाथ-पैर ठंडे पड़ गए।
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“ये… ये क्या है? मिटा दो… प्लीज…”
रोहन ने मोबाइल जेब में रखा और करीब आ गया।
“अब तुम मेरी हो। आज से रोज। नहीं तो ये वीडियो विक्रम और उसके बाप को भेज दूँगा। और प्रिया की भी।”
सुनीता पीछे हटीं। रोहन ने उनका बाल पकड़ लिया और दीवार से सटा दिया। साड़ी खींचकर फाड़ दी। ब्लाउज के बचे बटन खोल दिए। उनके 38 साइज के भरे स्तन बाहर आ गए। रोहन ने एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। दाँत से काटा। सुनीता चीखीं।
“छोड़ो… पागल हो गए हो…”
रोहन ने उनका पल्लू कमर में बाँध दिया और साड़ी पूरी तरह ऊपर कर दी। पैंटी फाड़कर फेंक दी। उनकी चूत के बाल साफ थे, होंठ थोड़े मोटे और पहले से गीले। रोहन ने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। सुनीता की कमर ऐंठ गई।
“इतनी गीली? प्रिया के साथ रोज रगड़ती हो इसलिए?”
उसने उँगलियाँ और तेजी से चला दीं। सुनीता की साँसें तेज हो गईं। रोहन ने उन्हें घुटनों के बल बिठाया और अपना लंड उनके मुँह के सामने लाया। 8 इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा।
“चूसो। वरना वीडियो भेज दूँगा।”
सुनीता ने आँखें बंद कीं और मुँह खोला। रोहन ने पूरा लंड उनके गले तक ठूंस दिया। सुनीता ने गैग किया। लार बहने लगी। रोहन ने उनके बाल पकड़कर सिर हिलाया। गला पूरी तरह भर गया। आँखों से आँसू निकलने लगे। रोहन ने और जोर लगाया। सुनीता की नाक से साँस नहीं आ रही थी। जब वो लगभग बेहोश होने वाली थीं तब उसने लंड निकाला। लार से लथपथ।
फिर उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। टाँगें फैलाईं और दोनों हाथ सिर के ऊपर बाँध दिए। घर में पड़ी रस्सी से कलाई बाँधी। सुनीता छटपटाईं। रोहन ने उनकी चूत पर थप्पड़ मारा। जोर का। लाल हो गई। फिर दूसरा। तीसरा। सुनीता चीखती रहीं।
“चुप। नहीं तो और मारूँगा।”
रोहन ने लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर धकेल दिया। सुनीता की चीख निकल गई। उनकी चूत सालों बाद इतने मोटे लंड से भरी थी। रोहन ने बिना रुकें ठोके। हर झटका गहरा। अंडकोष उनकी गांड से टकरा रहे थे। सुनीता की आँखें ऊपर की ओर पलटने लगीं।
रोहन ने उनके स्तन दबाए, निप्पल मोड़े, काटे। फिर गर्दन पर काटा। दाँत के निशान पड़ गए। सुनीता रो रही थीं लेकिन उनकी चूत पानी छोड़ रही थी। रोहन ने उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई तक घुसाया। गर्भाशय के मुँह पर लंड टकराने लगा। सुनीता का शरीर काँप रहा था।
“बोल… तेरी चूत कैसी लग रही है?”
सुनीता ने सिर हिलाया। रोहन ने एक तमाचा और जड़ा।
“बोल रंडी।”
“अच्छी… लग रही है…” आवाज टूटी हुई थी।
रोहन ने गति बढ़ा दी। बिस्तर चरमरा रहा था। सुनीता की चूत से पानी की आवाज आ रही थी। अचानक रोहन ने लंड निकाला और उन्हें पेट के बल पलटा। गांड ऊपर की। उसने उनकी गांड के छेद पर थूक लगाया और उँगली अंदर डाली। सुनीता तड़प उठीं। रोहन ने दूसरी उँगली डाली और फैलाया। फिर लंड उनकी गांड में धकेल दिया। धीरे-धीरे पूरा। सुनीता की चीखें घर में गूँज रही थीं। रोहन ने बाल पकड़कर खींचे और जोर-जोर से ठोके। हर धक्के पर उनकी गांड लाल हो रही थी।
आधे घंटे बाद रोहन ने उन्हें फिर सीधा किया। चूत में लंड डाला और दोनों स्तन मुँह में लेकर चूसते हुए पानी उड़ेल दिया। गरम, गाढ़ा वीर्य उनकी चूत में भर गया। बाहर निकलकर जाँघों पर बहने लगा। सुनीता बेहोशी की हालत में पड़ी थीं। हाथ अभी भी बँधे थे।
रोहन ने रस्सी खोली। सुनीता हिल नहीं पा रही थीं। रोहन ने उनके चेहरे पर थप्पड़ मारा।
“अब से हर दोपहर मैं आऊँगा। दरवाजा खुला रखना। अगर मना किया तो वीडियो चली जाएगी। समझी?”
सुनीता ने आँखें खोलीं। आँसुओं से भरी। उन्होंने सिर्फ सिर हिलाया।
रोहन उठकर कपड़े पहनने लगा। जाने से पहले उसने सुनीता की चूत से टपकते वीर्य को उँगली से उठाया और उनके मुँह में डाल दिया।
“चाट। अपना स्वाद चख।”
सुनीता ने जीभ निकाली। रोहन मुस्कुराया और निकल गया।
दोपहर ढल चुकी थी। सुनीता बिस्तर पर पड़ी रहीं। शरीर दर्द कर रहा था। चूत और गांड दोनों जल रहे थे। लेकिन अंदर कहीं एक अजीब सी गर्मी भी थी। वो उठकर नहाईं। साड़ी बदली। आईने में देखा तो गर्दन और स्तनों पर काटने के निशान साफ दिख रहे थे।
शाम को विक्रम और उसके पिता घर आए। सुनीता ने सामान्य व्यवहार किया। रात को बिस्तर पर लेटीं तो शरीर फिर याद दिलाने लगा। रोहन का मोटा लंड, उसके जोर के धक्के, बाल खींचना, थप्पड़। सुनीता की उँगली खुद उनकी चूत पर चली गई। गीली हो चुकी थी।
अगले दिन ठीक दोपहर को घंटी बजी। सुनीता ने दरवाजा खोला। रोहन अंदर आया। बिना बात किए उसने सुनीता को रसोई की मेज पर लिटा दिया। साड़ी ऊपर की, पैंटी फाड़ी और खड़े-खड़े चोदने लगा। मेज हिल रही थी। बर्तन गिर रहे थे। सुनीता के मुँह पर हाथ रखकर रोहन ने पूरा पानी अंदर छोड़ दिया।
फिर उन्हें घुटनों के बल बैठाया और मुँह में लंड ठूंसकर गला चोदा। लार फर्श पर गिर रही थी। रोहन ने उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और गले पर जोर से दबाया। सुनीता की आँखें फटी रहीं। जब साँस लगभग रुकने वाली थी तब उसने छोड़ा। सुनीता खाँसती हुई फर्श पर गिर पड़ीं।
रोहन ने उन्हें उठाया और बेडरूम में ले गया। बिस्तर पर बाँध दिया। इस बार पैर भी। टाँगें पूरी तरह फैली हुईं। उसने उनकी चूत पर बर्फ के टुकड़े रखे। सुनीता तड़पीं। फिर गरम पानी गिराया। ठंड और गर्मी के बीच उनकी चूत और संवेदनशील हो गई। रोहन ने उँगलियाँ अंदर डालकर जी-spot दबाया। सुनीता झटके मारने लगीं। पानी की धार निकलने लगी। रोहन मुस्कुराया।
“देख, बुढ़िया की चूत भी स्क्वर्ट कर सकती है।”
उसने लंड फिर अंदर डाला। इस बार धीरे-धीरे, गहरे। हर इंच महसूस कराते हुए। सुनीता कराह रही थीं। रोहन ने उनके निप्पल पर क्लिप लगा दी जो घर में मिली थी। दर्द से सुनीता की आँखें भर आईं। रोहन ने क्लिप घुमाई। सुनीता चीखीं। फिर उसने गति बढ़ा दी। बिस्तर चरमरा रहा था। सुनीता का शरीर ऐंठ रहा था। एक और स्क्वर्ट। रोहन ने उसी पल अपना पानी उनकी चूत की गहराई में छोड़ दिया।
उसके बाद रोहन रोज आने लगा। कभी रसोई में, कभी बाथरूम में, कभी बालकनी के पास खिड़की के नीचे। कभी रस्सी से बाँधकर, कभी आँखों पर पट्टी बाँधकर, कभी मोमबत्ती की मोम गिराकर। सुनीता की चूत और गांड दोनों रोज इस्तेमाल होती रहीं। शरीर पर निशान बढ़ते गए। लेकिन वो विरोध नहीं कर पाती थीं। वीडियो का डर हमेशा सिर पर लटका रहता था।
एक दोपहर रोहन ने प्रिया को भी बुला लिया। तीनों कमरे में थे। प्रिया ने सुनीता की चूत चाटी जबकि रोहन प्रिया की गांड चोद रहा था। फिर रोहन ने सुनीता को ऊपर बैठाया और प्रिया के मुँह पर चूत रगड़वाई। सुनीता की आँखें शर्म से बंद थीं लेकिन शरीर प्रतिक्रिया दे रहा था। रोहन ने दोनों को बाँध दिया और बारी-बारी चोदा। कमरा कराहों और थप्पड़ों की आवाज से गूँज रहा था।
रात को जब सब चले गए सुनीता अकेली पड़ी रहीं। शरीर दर्द में था। लेकिन अंदर एक भूख भी जाग चुकी थी। वो जानती थीं कि अगले दिन फिर घंटी बजेगी। और वो दरवाजा खोल देंगी।
अगले दिन दोपहर ठीक बारह बजे घंटी बजी। सुनीता दरवाजे के पास खड़ी थीं। शरीर अभी भी कल की मार का दर्द महसूस कर रहा था। चूत और गांड दोनों में जलन थी। गर्दन पर काटने के निशान साफ दिख रहे थे। उन्होंने दरवाजा खोला। रोहन अंदर घुसा। हाथ में एक काला बैग था।
दरवाजा बंद होते ही उसने बैग मेज पर पटक दिया।
“आज खास तैयारी की है। कपड़े उतार।”
सुनीता ने काँपते हाथों से साड़ी खोली। ब्लाउज, पेटीकोट, सब फर्श पर गिर गया। नंगी खड़ी थीं। रोहन ने उनकी जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर कल के थप्पड़ों के निशान देखे। मुस्कुराया। बैग से निकाली मोटी चमड़े की बेल्ट, रस्सियाँ, दो धातु के क्लिप, एक छोटा चाबुक और काली पट्टी।
उसने सुनीता को बेडरूम में घसीटा। बिस्तर के चारों कोनों पर पहले से रस्सियाँ बाँध रखी थीं। सुनीता को पेट के बल लिटाया। हाथ और पैर कसकर बाँधे। टाँगें पूरी तरह फैली हुईं। गांड ऊपर उठी हुई। रोहन ने चाबुक उठाया। पहली चोट गांड पर पड़ी। सुनीता चीखीं। लाल लकीर उभर आई। दूसरी चोट। तीसरी। चौथी। हर चोट पर उनकी गांड सिमटती और फिर फैलती। रोहन ने बीच-बीच में हाथ से सहलाया फिर और जोर से मारा। बीस चोटों के बाद गांड जल रही थी, सूज रही थी। आँसू बिस्तर गीला कर रहे थे।
रोहन ने क्लिप निकाले। एक निप्पल पर लगाई, दूसरा दूसरे पर। चेन से दोनों जोड़ दिए। फिर चेन खींची। सुनीता की चीख निकल गई। दर्द से उनका शरीर ऐंठ रहा था। रोहन ने चाबुक फिर उठाया। अब चूत के होंठों पर मारने लगा। हर चोट पर चूत सिमटती। पानी निकलने लगा। रोहन हँसा।
“दर्द में भी गीली हो जाती है रंडी।”
उसने लंड बाहर निकाला। पहले सुनीता के मुँह में ठूंसा। गला भर गया। लार बहने लगी। रोहन ने सिर पकड़कर जोर-जोर से हिलाया। जब साँस रुकने लगी तो निकाला। फिर उनकी सूजी हुई गांड के छेद पर थूका और एक झटके में पूरा लंड धकेल दिया। सुनीता की चीख दब गई। रोहन ने बाल पकड़कर खींचे और बर्बरता से ठोके। हर धक्के पर गांड और फटती महसूस हो रही थी। धातु के क्लिप निप्पलों को खींच रहे थे। दर्द और आनंद का मिश्रण सुनीता को पागल कर रहा था।
आधा घंटा गांड चोदने के बाद रोहन ने लंड निकाला। वीर्य गांड के छेद से बाहर निकल रहा था। उसने सुनीता को पलटा। अब चूत सामने थी। लाल, सूजी, थप्पड़ों से भरी। रोहन ने दो उँगलियाँ अंदर डालकर जोर से फैलाया। फिर लंड चूत में घुसाया। गहराई तक। गर्भाशय के मुँह पर बार-बार टकराया। सुनीता की आँखें ऊपर पलटने लगीं। शरीर झटके मार रहा था। एक स्क्वर्ट निकला। फिर दूसरा। रोहन ने उसी पल अपना पानी उनकी कोख में उड़ेल दिया। इतना कि बाहर बहने लगा।
रस्सियाँ खोलीं। सुनीता हिल नहीं पा रही थीं। रोहन ने उनके चेहरे पर थूका।
“चाट।”
सुनीता ने जीभ निकाली। रोहन का थूक चाटा। फिर उसने उन्हें बाथरूम में घसीटा। ठंडे पानी से नहलाया। पानी की धार उनके जले हुए शरीर पर पड़ी तो सुनीता काँप उठीं। रोहन ने साबुन से उनकी चूत और गांड साफ की। उँगलियाँ फिर अंदर डाल दीं। सुनीता की कमर ऐंठ गई।
दोपहर ढल चुकी थी। रोहन कपड़े पहनने लगा। जाने से पहले बैग से एक छोटा वाइब्रेटर निकाला। सुनीता की चूत में ठूंस दिया और चालू कर दिया।
“रात तक अंदर रखना। निकाला तो कल और बुरा होगा।”
सुनीता लेटी रहीं। वाइब्रेटर अंदर काँप रहा था। शरीर बार-बार झटके मार रहा था। शाम को विक्रम घर आया तो सुनीता ने मुश्किल से सामान्य चेहरा बनाया। रात भर वाइब्रेटर अंदर रहा। नींद नहीं आई। बार-बार स्क्वर्ट होता रहा। बिस्तर गीला हो गया।
अगली सुबह रोहन जल्दी आ गया। विक्रम और पिता अभी घर पर ही थे। रोहन ने पिछवाड़े से खिड़की खटखटाई। सुनीता काँपती हुई आईं। रोहन अंदर घुसा। घर के दूसरे कमरे में शोर था। रोहन ने सुनीता का मुँह बंद किया और उन्हें अलमारी के पीछे खींच लिया। साड़ी ऊपर की।
पैंटी फाड़ी। खड़े-खड़े लंड उनकी चूत में धकेल दिया। एक हाथ उनके मुँह पर, दूसरा बाल पकड़े। धीरे-धीरे लेकिन गहराई तक ठोके। सुनीता की आँखें फटी हुईं। बाहर विक्रम की आवाज आ रही थी। रोहन और तेजी से धक्के मारने लगा। सुनीता की चूत पानी छोड़ रही थी। रोहन ने पूरा पानी अंदर छोड़ दिया। फिर वाइब्रेटर निकालकर उनकी गांड में ठूंस दिया और चालू कर दिया।
“आज पूरा दिन इसी तरह रहो।”
रोहन निकल गया। सुनीता अलमारी के पीछे काँपती रहीं। गांड में वाइब्रेटर काँप रहा था। चूत से वीर्य टपक रहा था।
दोपहर को घर खाली हुआ। रोहन फिर आया। इस बार प्रिया को भी साथ लाया। प्रिया के हाथ में एक छोटा कैमरा था। रोहन ने सुनीता को बिस्तर पर बाँधा। आँखों पर पट्टी। मुँह में गैग। फिर दोनों ने मिलकर उसे तोड़ा। प्रिया ने सुनीता के स्तन चाटे, निप्पल काटे। रोहन ने चाबुक से उनकी जाँघों और चूत पर मारा। फिर प्रिया ने सुनीता की चूत पर बैठकर रगड़ना शुरू किया। चूत से चूत घिसते हुए दोनों गीली हो गईं। रोहन ने पीछे से सुनीता की गांड में लंड डाल दिया। हर धक्के पर प्रिया की चूत सुनीता की चूत से रगड़ खा रही थी। कमरा कराहों से भर गया। कैमरा सब रिकॉर्ड कर रहा था।
रोहन ने प्रिया को भी बाँध दिया। दोनों औरतें बिस्तर पर फैली हुईं। रोहन बारी-बारी चोदता रहा। कभी सुनीता की चूत, कभी प्रिया की। कभी दोनों के मुँह में एक साथ। कभी चाबुक से दोनों की गांड लाल की। अंत में उसने सुनीता की चूत में और प्रिया की गांड में पानी छोड़ा। दोनों स्त्रियाँ पसीने और वीर्य से लथपथ पड़ी थीं।
रोहन ने कैमरा बंद किया।
“अब ये वीडियो भी मेरे पास है। कोई शिकायत की तो दोनों की जिंदगी खत्म।”
प्रिया रो रही थी। सुनीता की आँखें खाली थीं। रोहन ने दोनों को खोला। सुनीता उठकर नहाईं। शरीर पर नए निशान थे। चाबुक की लकीरें, काटने के निशान, सूजी हुई चूत।
रात को सुनीता अकेली बिस्तर पर लेटीं। उँगली उनकी चूत पर चली गई। अभी भी गीली थी। रोहन के शब्दों की गूंज कानों में थी। अगले दिन फिर घंटी बजेगी। फिर रस्सियाँ। फिर चाबुक। फिर लंड।
और सच में अगले दिन घंटी बजी। रोहन अंदर आया। हाथ में और सामान था। मोटी लोहे की चेन, हथकड़ियाँ, एक बड़ा डिल्डो और काला टेप। उसने सुनीता को दीवार से सटाया। हाथ ऊपर हथकड़ी से बाँधे। पैर फैलाकर चेन से फर्श से बाँधे। फिर काला टेप उनके मुँह पर लगाया। डिल्डो उनकी चूत में ठूंस दिया। इतना बड़ा कि सुनीता की आँखें फट गईं। रोहन ने डिल्डो को अंदर-बाहर करना शुरू किया। जोर-जोर से। दूसरी तरफ चाबुक उनकी जाँघों और स्तनों पर चल रहा था। दर्द और भराव का मिश्रण सुनीता को पागल कर रहा था। शरीर झटके मार रहा था। पानी की धार निकलने लगी। रोहन हँसता रहा।
जब सुनीता लगभग बेहोश होने वाली थीं तब उसने डिल्डो निकाला और अपना लंड डाल दिया। बर्बरता से ठोके। दीवार से सिर टकरा रहा था। हथकड़ियाँ कलाई काट रही थीं। रोहन ने उनका गला दबाया। साँस रुकने लगी। आँखें ऊपर पलट गईं। ठीक उसी पल रोहन ने पानी उनकी गहराई में छोड़ दिया। फिर गला छोड़ा। सुनीता खाँसती हुई लटकती रहीं।
रोहन ने हथकड़ियाँ खोलीं। सुनीता फर्श पर गिर पड़ीं। रोहन उनके ऊपर बैठ गया। लंड उनके चेहरे पर रगड़ा।“चाट। साफ कर।”
सुनीता ने जीभ निकाली। लंड चाटा। वीर्य और अपने रस का स्वाद लिया। रोहन ने उनके बाल पकड़कर और जोर से मुँह में ठूंसा। गला फिर भर गया।
इस तरह दिन बीतते गए। रोहन का शासन और क्रूर होता गया। कभी सुनीता को घंटों बाँधकर छोड़ देता। कभी उनके शरीर पर मोमबत्ती की मोम गिराता। कभी बर्फ और गरम पानी बारी-बारी से उनकी चूत पर डालता। कभी प्रिया को बुलाकर दोनों को एक-दूसरे को चोदने पर मजबूर करता। सुनीता का शरीर निशानों से भर चुका था। लेकिन अंदर की भूख भी बढ़ती जा रही थी। हर दर्द के बाद उनकी चूत और गीली हो जाती। हर बार वो थोड़ी और गिरतीं।
एक दिन रोहन ने उन्हें पूरे घर में नंगा घुमाया। रसोई, बाथरूम, बालकनी। हर जगह चोदा। बालकनी में खड़े-खड़े जब लंड उनकी गांड में था तब नीचे सड़क पर लोग निकल रहे थे। सुनीता का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। डर और उत्तेजना का मिश्रण उन्हें पागल कर रहा था। रोहन ने उनके मुँह पर हाथ रखा और पानी अंदर छोड़ दिया।
शाम को जब सब चले गए सुनीता आईने के सामने खड़ी रहीं। नंगी। शरीर पर लकीरें, निशान, सूजन। चूत अभी भी हल्की-हल्की फड़क रही थी। उन्होंने अपनी उँगली अंदर डाली। गीली। बहुत गीली। आँखें बंद कीं। रोहन का चेहरा सामने आ गया। उसकी हँसी। उसका लंड। उसकी क्रूरता।
अगली सुबह फिर घंटी बजी। सुनीता ने दरवाजा खोला। रोहन मुस्कुरा रहा था। हाथ में नया बैग था। और भी काला। और भी भारी।
सुनीता ने सिर झुकाया और अंदर जाने का रास्ता दिया। दरवाजा बंद हुआ। कमरे में अंधेरा सा छा गया। रस्सियाँ फिर निकलीं। चाबुक फिर उठा। और सुनीता की चीखें फिर गूँजने लगीं।
कहानी अभी भी खत्म नहीं हुई थी। रोहन की भूख असीम थी। सुनीता का शरीर अब सिर्फ उसका खेलने का मैदान रह गया था। हर दिन नई यातना। हर दिन नया तोड़ना। और हर रात सुनीता अकेली लेटी हुई अपनी उँगली से उस दर्द को दोहरातीं। क्योंकि अब दर्द के बिना उनकी चूत शांत नहीं होती थी।
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