एक पति अपनी बीवी को पूरी रात दीवार से बाँधकर, रस्सियों और आग की बूंदों से जलाता है, गले में कॉलर कसता है और दोनों छेदों कोबारी-बारी फाड़ता रहता है जब तक वह रो-रोकर खुद को उसकी चीज मान न ले।
राघव 32 साल का था। दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन में उसकी दो बेडरूम की फ्लैट थी। रात के 11 बज रहे थे। कमरे में सिर्फ एक लाल रंग की डिमर लाइट जल रही थी। खिड़कियों पर भारी काले पर्दे लगे थे। बिस्तर पर काली चादर बिछी थी। दीवार पर लगे हुक पर चमड़े की पट्टियाँ और रस्सियाँ लटकी हुई थीं।
उसकी पत्नी निशा 28 साल की थी। गोरी, लंबे काले बाल, 34C के भरे स्तन, पतली कमर और चौड़ी कूल्हे। आज रात वह पूरी तरह नग्न थी। हाथ ऊपर की ओर दीवार के हुक से बँधे हुए। टखने भी अलग-अलग बाँध दिए गए थे। मुँह में लाल गेंद वाला गैग फँसा था। आँखों पर काला रेशमी कपड़ा बाँधा हुआ था।
राघव उसके सामने खड़ा था। वह सिर्फ नीचे का अंडरवियर पहने हुए था। उसका लंड पहले से ही सख्त और मोटा था। 7.5 इंच लंबा, मोटा शाफ्ट, नसें उभरी हुई। उसने निशा के गाल पर हाथ फेरा।
“आज रात तू सिर्फ मेरी चीज है। बोलने की इजाजत नहीं। दर्द सहेगी। मजे लेगी। समझी?”
निशा ने सिर हिलाया। उसकी साँसें तेज हो चुकी थीं।
राघव ने उसके स्तनों को दोनों हाथों से पकड़ा। उँगलियों से निपल्स को जोर से दबाया। फिर अचानक एक निपल को मुँह में लेकर जोर से चूसा और दाँतों से हल्का काटा। निशा की कमर उछली। गैग के पीछे से आवाज निकली। राघव ने दूसरा निपल भी वैसा ही किया। दोनों निपल्स लाल और सूजे हुए हो गए।
उसने निशा की जाँघों के बीच हाथ डाला। उँगली योनि पर फिरी। वह पहले से गीली थी। राघव ने हँसते हुए कहा, “इतनी जल्दी गीली हो गई? इतनी हरामजादी है तू।”
उसने एक उँगली अंदर घुसाई। फिर दूसरी। दोनों उँगलियों को अंदर तेजी से आगे-पीछे किया। बीच-बीछ में क्लिट को जोर से रगड़ा। निशा की जाँघें काँपने लगीं। राघव ने उँगलियाँ निकालकर उसके मुँह के गैग के किनारे पर लगाया। “चाट। अपनी ही गंदगी चाट।”
निशा ने जीभ निकाली। राघव ने गैग थोड़ा ढीला किया और अपनी उँगलियाँ उसके मुँह में ठूँस दीं। निशा ने चूस लिया।
फिर राघव ने उसके मुँह से गैग हटाया। निशा ने गहरी साँस ली। राघव ने अपना लंड उसके होठों पर दबाया।
“मुँह खोल। पूरा ले। दांत नहीं लगाना।”
निशा ने मुँह खोला। राघव ने धीरे-धीरे लंड अंदर डाला। पहले टिप, फिर और अंदर। गले तक। निशा की आँखों से आँसू निकल आए। राघव ने उसके बाल पकड़कर सिर को नियंत्रित किया। वह आगे-पीछे करने लगा। कभी धीमा, कभी जोर से। गले की गहराई तक। निशा की लार बहने लगी। कभी-कभी वह घुटने लगाती तो राघव रुक जाता, फिर दोबारा जोर से धकेल देता।
दस मिनट बाद उसने लंड निकाला। निशा हाँफ रही थी। थूक उसके ठोड़ी से नीचे टपक रहा था।
राघव ने उसके पैरों की रस्सियाँ थोड़ी ढीली कीं और उसे घुटनों के बल बिस्तर पर लिटाया। हाथ अभी भी बँधे थे। उसने निशा की कमर पकड़ी और योनि के सामने खड़ा हो गया।
पहले उसने सिर्फ टिप को क्लिट पर रगड़ा। ऊपर-नीचे, गोलाकार। दबाव हल्का नहीं था। जानबूझकर थोड़ा जोर से। निशा की कमर काँप रही थी। फिर उसने टिप को योनि के मुँह पर रखा और एक झटके में आधा अंदर घुसा दिया।
निशा चिल्लाई। “आह्ह… राघव…”
“चुप। दर्द है तो सह।”
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उसने बाकी का हिस्सा भी अंदर धकेल दिया। पूरा। निशा की योनि कसकर जकड़ी हुई थी। राघव ने कुछ सेकंड रोके रखा। फिर पेल्विक मसल्स सिकोड़कर अंदर ही अंदर पल्स दिया। लंड ऊपर की ओर उठता और दबाव बदलता। निशा की साँसें अटकने लगीं।
फिर शुरू हुआ पैटर्न। चार छोटे, जोरदार स्ट्रोक। बाहरी संवेदनशील हिस्से पर। फिर एक गहरा, पूरा अंदर तक। और फिर पल्स। निशा की आवाजें बदलने लगीं। कभी कराह, कभी सिसकी।
राघव ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। कान में गहरी आवाज में बोला, “तेरी यह तंग चूत मेरी है। आज इसे फाड़ दूँगा।”
उसने गति बढ़ाई। अब स्ट्रोक लंबे और जोरदार हो गए। बिस्तर चरमरा रहा था। निशा की स्तन आगे-पीछे हिल रहे थे। राघव ने एक हाथ से उसके स्तन को जोर से मसलना शुरू किया। निपल को उँगलियों के बीच दबाकर घुमाया।
बीस मिनट बाद निशा का शरीर तनने लगा। उसके कूल्हे खुद राघव की ओर उठने लगे। राघव ने महसूस किया। उसने गति नहीं बढ़ाई। बल्कि पूरी तरह अंदर घुसकर रुक गया और ग्राइंड करने लगा। कूल्हों को गोलाकार घुमाते हुए क्लिट पर दबाव बनाए रखा।
“अब मत रुकना… अंदर… वहीं…” निशा ने हाँफते हुए कहा।
राघव ने वैसा ही किया। कुछ सेकंड बाद निशा का शरीर झटके खाने लगा। योनि बार-बार सिकुड़ रही थी। वह जोर से चिल्लाई। ऑर्गेज्म लंबा था। लहरों की तरह। राघव ने अंदर ही दबाव बनाए रखा जब तक उसकी लहरें कम नहीं हुईं।
लेकिन राघव रुका नहीं। उसने निशा को पलट दिया। अब वह पेट के बल लेटी थी। हाथ अभी भी बँधे। राघव ने उसके कूल्हे ऊपर उठाए और दोबारा घुस गया। इस बार और गहरा।
उसने एक हाथ से निशा की गर्दन हल्के से दबाई। दूसरा हाथ कमर पर। अब थ्रस्ट और क्रूर थे। हर धक्के के साथ निशा की आवाज निकलती। कभी दर्द की, कभी मजे की।
राघव ने बिस्तर के पास रखी छोटी चमड़े की पट्टी उठाई। निशा की गांड पर जोरदार एक चपत लगाई। लाल निशान पड़ गया। फिर दूसरी। तीसरी। हर चपत के साथ वह अंदर और जोर से धकेलता।
“गिन। जोर से बोल।”
निशा ने गिनी। “एक… दो… तीन…”
दस चपत के बाद राघव ने पट्टी फेंक दी। उसने निशा के बाल पकड़कर सिर ऊपर उठाया और कान में बोला, “अब मैं तेरी गांड लूँगा।”
निशा सहम गई। “राघव… अभी नहीं… तैयार नहीं…”
“तैयार करूँगा।”
उसने लंड निकाला। योनि से निकली नमी को उँगलियों पर लगाकर निशा की गांड के छेद पर लगाया। एक उँगली धीरे से अंदर डाली। निशा तन गई। राघव ने दूसरी उँगली भी डाली। दोनों उँगलियों को फैलाने लगा।
“ढीली कर। साँस ले।”
जब थोड़ा ढीला महसूस हुआ तो उसने लंड का टिप वहाँ रखा। धीरे-धीरे दबाव दिया। निशा चिल्लाई। आँसू बहने लगे। राघव रुका नहीं। धीरे-धीरे अंदर जाता रहा। आधा। फिर और। पूरा।
निशा की साँसें अटक गईं। राघव ने कुछ देर रोके रखा। फिर छोटे-छोटे स्ट्रोक शुरू किए। बहुत धीमे। फिर धीरे-धीरे गति बढ़ाई। एक हाथ से उसकी क्लिट रगड़ता रहा।
दर्द और मजे का मिश्रण निशा को पागल कर रहा था। कुछ मिनट बाद उसका शरीर दोबारा तनने लगा। राघव ने महसूस किया और गति बढ़ा दी। जोरदार थ्रस्ट। हर धक्के के साथ निशा की आवाज गूँज रही थी।
दूसरा ऑर्गेज्म आया तो निशा का पूरा शरीर काँप रहा था। राघव ने उसी समय अपना भी छोड़ दिया। गर्म वीर्य उसकी गांड के अंदर भर गया। वह अंदर ही अंदर पल्स देता रहा जब तक पूरा नहीं निकल गया।
उसने लंड निकाला। सफेद तरल बाहर निकल रहा था। राघव ने निशा के हाथ-पैर खोल दिए। उसे गोद में लिटा लिया। पसीने से भीगी हुई दोनों के शरीर।
निशा अभी भी काँप रही थी। राघव ने उसके माथे पर चुंबन किया। “पानी पिलाऊँ?”
निशा ने सिर हिलाया। राघव ने बोतल से पानी पिलाया। फिर तौलिया से उसके शरीर को पोंछा। दोनों देर तक चिपके रहे।
कुछ देर बाद निशा ने धीमी आवाज में कहा, “अगली बार… और जोर से करना।”
राघव ने मुस्कुराते हुए उसके निपल को फिर से उँगलियों में दबाया। “जरूर। अगली बार रस्सियाँ और कसकर बाँधूँगा। और शायद मोम भी गिराऊँगा।”
निशा की आँखों में फिर से चमक आ गई। कमरे में लाल रोशनी अभी भी जल रही थी। बाहर दिल्ली की रात गहरी हो चुकी थी। अंदर दोनों के शरीर अभी भी एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। पसीना, वीर्य और लार की महक हवा में फैली हुई थी।
राघव ने निशा को कसकर पकड़ लिया। उसकी उँगलियाँ फिर से उसकी योनि की ओर बढ़ने लगीं। निशा ने आँखें बंद कर लीं। वह जानती थी कि रात अभी खत्म नहीं हुई है। आगे और भी कुछ बाकी है। और इस बार वह पूरी तरह तैयार थी। हर दर्द, हर चपत, हर गहरा धक्का सहने के लिए। क्योंकि आज रात वह सिर्फ उसकी थी। पूरी तरह। बिना किसी सीमा के।
राघव की उँगलियाँ निशा की योनि पर पहुँच चुकी थीं। वह अभी भी गीली और संवेदनशील थी। पिछले ऑर्गेज्म के बाद भी उसका शरीर काँप रहा था। राघव ने दो उँगलियाँ एक साथ अंदर धकेल दीं। जोर से। निशा की कमर उछली।
“आह्ह… अभी… थोड़ा धीरे…” उसने फुसफुसाया।
राघव ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “धीमी वाली बात खत्म हो गई। अब सिर्फ मेरी मर्जी चलेगी।”
उसने उँगलियों को तेजी से अंदर-बाहर किया। बीच-बीच में क्लिट को नाखून से हल्का खुरचा। निशा चिल्लाई। दर्द और उत्तेजना एक साथ। राघव ने तीसरी उँगली भी अंदर घुसा दी। तीन उँगलियाँ उसकी तंग योनि को फैला रही थीं। वह उन्हें मोड़-मोड़कर अंदर घुमाता। निशा की जाँघें काँप रही थीं।
फिर अचानक उसने उँगलियाँ निकाल लीं। निशा हाँफ रही थी। राघव उठा और अलमारी के पास गया। उसने काले चमड़े का कॉलर निकाला। उस पर धातु की रिंग लगी थी। साथ में छोटी चेन और दो क्लिप भी।
वह वापस आया। निशा अभी भी बिस्तर पर लेटी थी। राघव ने कॉलर उसके गले में बाँध दिया। कसकर। फिर चेन को दीवार के हुक से लगा दिया। अब निशा का सिर ज्यादा ऊपर नहीं उठ सकता था।
“हाथ पीछे कर।”
निशा ने हाथ पीछे किए। राघव ने उन्हें कलाई से बाँध दिया। फिर उसने दोनों निपल्स पर मेटल क्लिप लगा दीं। क्लिप कसकर दबे। निशा की आँखें फटी की फटी रह गईं। तेज दर्द।
“सहन कर। वरना और कस दूँगा।”
राघव ने अपना लंड फिर से सख्त कर लिया। उसने निशा को घुटनों के बल किया। चेहरा तकिए पर। गांड ऊपर। कॉलर की चेन खिंची हुई थी। निशा की गर्दन पर दबाव पड़ रहा था।
राघव ने उसके कूल्हे पकड़े और एक झटके में पूरा लंड योनि में घुसा दिया। इतनी जोर से कि निशा की साँस अटक गई। फिर वह थ्रस्ट करने लगा। लंबे, क्रूर, गहरे। हर धक्के के साथ निशा का शरीर आगे खिसकता और कॉलर उसे पीछे खींचता। गला दबता। साँस लेना मुश्किल हो रहा था।
“देख… कैसे तेरी चूत मुझे निगल रही है,” राघव गुर्राया। उसने एक हाथ से क्लिप वाले निपल को खींचा। निशा चीखी।
बीस-पच्चीस जोरदार धक्कों के बाद उसने लंड निकाला। निशा की योनि से नमी बह रही थी। राघव ने बिस्तर के नीचे से एक मोटा काला डिल्डो निकाला। 8 इंच का। असली से भी मोटा।
उसने उसे निशा की योनि पर रगड़ा। फिर धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। निशा की आवाज बदल गई।
“नहीं… बहुत मोटा है… राघव प्लीज…”
“चुप। पूरा लेगी।”
उसने डिल्डो को पूरा अंदर ठूँस दिया। निशा का शरीर तन गया। राघव ने डिल्डो को अंदर ही अंदर घुमाना शुरू किया। फिर बाहर-अंदर। तेजी से। दूसरी तरफ उसने अपना लंड निशा के मुँह के पास लाया।
“मुँह खोल। दोनों तरफ से भरूँगा।”
निशा ने मुँह खोला। राघव ने लंड उसके गले तक धकेल दिया। अब एक तरफ डिल्डो योनि में जोर-जोर से चल रहा था, दूसरी तरफ लंड गले में। निशा की आँखों से आँसू बह रहे थे। लार मुँह से निकल रही थी। कभी-कभी वह घुटने लगती तो राघव थोड़ा बाहर निकालता, फिर और गहराई तक ठूँस देता।
जब निशा की साँस लगभग रुकने वाली होती तो वह लंड निकाल लेता। निशा जोर-जोर से साँस लेती। फिर दोबारा।
कुछ देर बाद राघव ने डिल्डो निकाल लिया। निशा की योनि खुली और लाल हो चुकी थी। उसने निशा को पलट दिया। अब वह पीठ के बल थी। हाथ अभी भी पीछे बँधे। कॉलर चेन से बँधा।
राघव ने उसके पैर फैलाए और कंधों तक मोड़ दिए। पूरी तरह खुली हुई। फिर अपना लंड दोबारा अंदर घुसाया। इस पोजीशन में और गहरा जाता था। हर थ्रस्ट के साथ निशा की गर्दन पर कॉलर का दबाव बढ़ता।
उसने क्लिप को और कस दिया। निपल्स सूजकर बैंगनी हो रहे थे। राघव ने एक क्लिप हटाई और निपल को मुँह में लेकर जोर से चूसा, दाँतों से काटा। खून की छोटी सी बूंद निकली। उसने चाट ली।
“मेरी संपत्ति हो तू। जितना चाहूँ उतना इस्तेमाल करूँगा।”
निशा सिर्फ कराह रही थी। उसकी आवाज में दर्द और पागलपन दोनों थे।
राघव ने गति बढ़ा दी। बिस्तर जोर-जोर से हिल रहा था। निशा का तीसरा ऑर्गेज्म आया तो वह लगभग बेहोश सी हो गई। शरीर ऐंठ रहा था। योनि इतनी जोर से सिकुड़ी कि राघव को भी रोकना पड़ा। लेकिन वह रुका नहीं। ऑर्गेज्म के दौरान भी वह धक्के मारता रहा। निशा चिल्ला रही थी। आवाज दीवारों से टकरा रही थी।
जब लहरें थमने लगीं तो राघव ने लंड निकाला। उसने निशा के मुँह के पास लाकर उसके चेहरे पर थप्पड़ मारा। लंड से। फिर मुँह में ठूँस दिया।
“साफ कर। अपनी चूत का स्वाद चाट।”
निशा ने चूसा। आँखें बंद। आँसू बहते हुए।
राघव फिर उठा। इस बार उसने मोटी रस्सी निकाली। निशा के स्तनों के चारों ओर बाँधनी शुरू की। कसकर। स्तन और भी उभरे और संवेदनशील हो गए। फिर रस्सी को नीचे ले जाकर योनि के दोनों तरफ से गुजारा और क्लिट पर दबाव डालते हुए बाँध दिया। हर हलचल पर रस्सी क्लिट को रगड़ती।
“अब खड़ी हो।”
निशा मुश्किल से उठी। पैर काँप रहे थे। राघव ने चेन को हुक से खोला और उसे कमरे के बीचोंबीच ले गया। वहाँ छत से एक और हुक लटक रहा था। उसने निशा के बँधे हाथों को उस हुक से लटका दिया। अब वह पंजों के बल खड़ी थी। पूरा वजन हाथों पर।
राघव उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने गांड पर जोरदार चपत लगाई। एक। दो। तीन। लगातार। लाल निशान पड़ गए। फिर उसने लंड को उसकी गांड के छेद पर रखा। पिछले राउंड का वीर्य अभी भी वहाँ था। उसने बिना और लुब्रिकेंट के दबाव दिया।
निशा चीखी। “राघव… दर्द हो रहा है… मत कर…”
“दर्द में ही मजा है।”
उसने धीरे-धीरे अंदर धकेला। निशा की आँखें फटी हुई थीं। आँसू धारा की तरह बह रहे थे। राघव पूरा अंदर गया। फिर रुक गया। पेल्विक मसल्स सिकोड़कर अंदर ही अंदर धक्के देने लगा। बिना बाहर निकाले।
एक हाथ से उसने रस्सी को खींचा जो क्लिट पर बँधी थी। हर खिंचाव पर निशा का शरीर झटका खाता। दूसरे हाथ से उसने क्लिप वाले निपल को मरोड़ा।
“बोल। तू किसकी है?”
“तेरी… सिर्फ तेरी…” निशा ने सिसकते हुए कहा।
“जोर से।”
“तेरी रंडी हूँ… जितना चाहे इस्तेमाल कर… फाड़ दे मुझे…”
राघव मुस्कुराया। उसने थ्रस्ट शुरू किए। गांड में। जोर-जोर से। हर धक्के के साथ निशा का शरीर आगे झूलता। हाथों पर पूरा वजन। कलाई कटने जैसी दर्द होने लगी थी।
बीस मिनट तक वह लगातार करता रहा। बीच-बीच में योनि में उँगलियाँ डालकर दोनों छेद एक साथ भरता। निशा का चौथा ऑर्गेज्म इतना तेज था कि उसका पेशाब थोड़ा निकल गया। राघव ने देखा और हँसा।
“देख… कितनी गंदी हो गई है तू।”
उसने लंड निकाल लिया। निशा अभी भी लटकी हुई थी। शरीर ढीला। राघव ने उसे हुक से उतारा। गोद में उठाया और बिस्तर पर पटक दिया।
अब उसने उसके हाथ-पैर फैलाकर चारों कोनों से बाँध दिए। पूरी तरह स्ट्रेच। फिर उसने मोमबत्ती जलाई। लाल रंग की।
निशा की आँखें डर से फैल गईं। “राघव… मोम… प्लीज…”
“सहन करना सीख।”
उसने पहली बूंद उसके स्तन पर गिराई। निशा चीखी। दूसरी बूंद निपल पर। तीसरी पेट पर। फिर और नीचे। योनि के पास। हर बूंद के साथ निशा का शरीर ऐंठता। राघव ने जानबूझकर क्लिट के पास भी कुछ बूंदें गिराईं।
जब मोम ठंडा होकर जमने लगा तो उसने उसे नाखून से खुरचना शुरू किया। फिर अपना लंड दोबारा योनि में डाल दिया। अब थ्रस्ट और भी क्रूर थे। पूरा शरीर वजन डालकर।
“आज रात मैं तुझे याद दिला दूँगा कि तू सिर्फ एक छेद है। मेरा छेद।”
निशा अब बोल नहीं पा रही थी। सिर्फ आवाजें निकल रही थीं। कराह, चीख, सिसकी। राघव ने दोनों निपल्स की क्लिप एक साथ खींच लीं। निशा का शरीर उछला। उसी समय उसका पाँचवाँ ऑर्गेज्म आया। इतना तेज कि उसकी दृष्टि कुछ सेकंड के लिए काली पड़ गई।
राघव ने महसूस किया कि वह खुद भी करीब है। उसने लंड निकाला और निशा के चेहरे पर चढ़ गया। मुँह में, गालों पर, आँखों पर वीर्य की धार छोड़ दी। गर्म। गाढ़ा। निशा के चेहरे पर सफेद धारें बह रही थीं। उसने कुछ मुँह में भी लिया।
राघव उसके ऊपर बैठ गया। साँसें तेज। उसने निशा के बाल सहलाए। इस बार थोड़ा नरम।
“अच्छी लड़की। आज बहुत सहा तूने।”
उसने रस्सियाँ खोलना शुरू किया। कलाई लाल और निशानदार थीं। निपल्स सूजे हुए। गांड और योनि दोनों लाल और इस्तेमाल से सूजी हुईं। शरीर पर मोम के धब्बे, थप्पड़ों के निशान, दांतों के निशान।
राघव ने गीला तौलिया लिया और धीरे-धीरे उसके शरीर को साफ करने लगा। पानी पिलाया। फिर उसे अपनी छाती से लगा लिया।
निशा की आवाज काँप रही थी। “राघव… अगली बार… और ज्यादा दर्द देना… और ज्यादा इस्तेमाल करना…”
राघव ने उसकी ठोड़ी पकड़कर आँखों में देखा। “जरूर। अगली बार पिंजरे में रखूँगा। पूरे दिन। और रात को निकालकर दोबारा तोड़ूँगा।”
निशा ने आँखें बंद कर लीं। उसके होठों पर थकी हुई मुस्कान थी। कमरे में लाल रोशनी अभी भी जल रही थी। बाहर सुबह होने में अभी देर थी। और राघव की उँगलियाँ फिर से उसकी जाँघों के बीच सरकने लगी थीं।
रात अभी खत्म नहीं हुई थी।
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