शादीशुदा साली की गांड फाड़ता क्रूर जीजा। बाल खींच, गला दबा, रस्सी से बांधकर बर्बर चुदाई। आंसू, खून और वीर्य की बेहद कठोर दास्तान।
मेरा नाम राहुल है। उम्र इस वक्त 32 साल। शादी को दो साल हो चुके थे जब ये सब शुरू हुआ। मेरी बीवी प्रिया उस समय 27 की थी और पेट से थी। गर्भावस्था के पांचवें महीने में सेक्स लगभग बंद हो चुका था। प्रिया थक जाती, दर्द होता, और मैं भी खुद को रोकने की कोशिश करता। लेकिन शरीर अपनी मांग रखता है।
प्रिया की छोटी बहन निशा हमारे घर आई मदद के लिए। निशा की उम्र 22 साल थी। कॉलेज खत्म कर चुकी थी, बॉडी टाइट, गोरा-गेहुआं रंग, लंबे काले बाल, कसी हुई कमर, गोल-मटोल गांड और छोटी-छोटी लेकिन सख्त चुचियां। चेहरा देखकर लगता था कोई मॉडल हो। वो हमारे तीन कमरों वाले फ्लैट में आई थी, जो पुराने दिल्ली के एक घनी कॉलोनी में था। उसका कमरा हमारे बेडरूम के ठीक बगल में था। दीवार पतली थी।
शुरुआत में मैंने कोई गलत नीयत नहीं रखी। लेकिन दो हफ्ते में ही सब बदल गया। सुबह चाय बनाते वक्त उसकी कमर का मोड़, रात को टीवी देखते वक्त उसकी जांघों का खुलापन, नहाने के बाद गीले बालों से टपकता पानी… सब मुझे खींच रहा था। प्रिया जल्दी सो जाती। निशा देर तक जागती। कभी-कभी हम दोनों अकेले बैठकर फिल्में देखते। मैं उसके शरीर को चुपके से ताड़ता। वो भी जानती थी।
एक रात वो जल्दी सो गई। मैं उसके कमरे के दरवाजे के पास गया। अंदर से हल्की-हल्की सिसकारियां आ रही थीं। दरवाजा थोड़ा धकेला तो देखा—निशा चादर ओढ़े लेटी थी, एक हाथ नीचे और फोन कान पर। वो किसी से बात कर रही थी और साथ-साथ अपनी चूत सहला रही थी। चादर खिसकी हुई थी। उसकी नंगी जांघें, बालों वाली गीली चूत और उभरी हुई चुचियां साफ दिख रही थीं।
मैंने लाइट जला दी। निशा हड़बड़ा गई। फोन गिरा, चादर और खिसक गई। पूरा नंगा शरीर मेरे सामने था। छोटी-छोटी चुचियों के गुलाबी निप्पल खड़े थे, पेट सपाट, चूत के होंठ थोड़े बाहर निकले हुए और चमक रहे थे। मैं दरवाजे पर खड़ा रहा। निशा ने मेरी आंखों में देखा। कुछ सेकंड तक हम दोनों चुप रहे। फिर उसने खुद चादर पूरी तरह हटा दी।
मैं बिस्तर पर कूद पड़ा। उसके होंठों पर अपना मुंह दबा दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया। उल्टे अपनी जीभ अंदर घुसा दी। मैंने उसकी चुचियां जोर से मसलनी शुरू कर दीं। निप्पल को दांतों से काटा। वो कराह उठी। मेरा हाथ उसकी चूत पर गया। वो पहले से ही गीली थी। दो उंगलियां अंदर घुसा दीं। टाइट थी। मैंने उंगलियों को जोर-जोर से अंदर-बाहर किया। निशा की कमर उछलने लगी।
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मैंने उसके बालों को मुट्ठी में कस लिया और उसका मुंह अपने लंड की तरफ खींचा। पेंट खोलकर अपना 8 इंच का मोटा लंड निकाला। निशा ने बिना कुछ कहे मुंह खोल दिया। मैंने पूरा लंड उसके गले तक ठूंस दिया। वो हांफने लगी, आंसू निकल आए, लेकिन मैंने बालों से पकड़कर उसके सिर को आगे-पीछे किया। गला खराब कर दिया उसका। थूक लंड पर और उसके चेहरे पर फैल गया। जब उसका मुंह पूरा खुल गया और आवाज बंद होने लगी, तभी निकाला।
फिर मैंने उसकी टांगें चौड़ी कीं और मुंह उसकी चूत पर लगा दिया। बाहरी मांस को दांतों से खींचा, चूसा, जीभ अंदर घुसाई। निशा चीखने लगी। मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया। दो बार झड़ गई वो। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मैंने उठाया और घोड़ी बना दिया। गांड ऊपर की तरफ। उसके बालों को फिर मुट्ठी में लिया और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रखा।
एक ही धक्के में जड़ तक घुसा दिया। निशा की चीख दब गई मेरे हाथ के नीचे। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैंने बिना रुके ठोकना शुरू कर दिया। कमरे में सिर्फ मांस की थप-थप की आवाज और उसकी दबी हुई सिसकारियां गूंज रही थीं। मैंने उसकी गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। लाल हो गई। फिर और जोर से। निशा रोने लगी, लेकिन गांड पीछे धकेल रही थी।
मैंने उसकी कमर पकड़कर और जोरदार धक्के दिए। हर धक्के में लंड पूरा अंदर जा रहा था। निशा की आवाज बदल गई। “जीजू… बहुत जोर से… दर्द हो रहा है…” लेकिन मैंने सुना नहीं। उल्टे उसकी गर्दन दबाई और और तेज ठोका। वो छटपटाने लगी। मैंने उसका एक हाथ पीछे मोड़कर पकड़ लिया। दर्द से उसका चेहरा बिगड़ गया। मैंने उसी पोजीशन में उसे तब तक चोदा जब तक वो तीन बार और नहीं झड़ गई।
फिर मैंने लंड निकाला। निशा हांफ रही थी। मैंने उसे पीठ के बल लिटाया, टांगें उसके कंधों तक मोड़ दीं और फिर से घुसा दिया।
इस बार और गहरा। उसके चेहरे पर थूका। उसने आंखें बंद कर लीं। मैंने गाल पर थप्पड़ मारा। “आंखें खोल।” उसने खोलीं। मैं उसकी आंखों में देखते हुए ठोकता रहा। उसकी चूत से आवाज आ रही थी—गीली, फिसलती हुई।
जब मेरा समय आया तो मैंने लंड उसकी चूत से निकाला और उसके मुंह में ठूंस दिया। पूरा वीर्य उसके गले में उतार दिया। कुछ बाहर निकल आया। मैंने उसके चेहरे पर मल दिया। निशा थककर लेटी रही। मैंने उसे बाथरूम में खींचा। शावर के नीचे खड़े होकर फिर से उसका मुंह इस्तेमाल किया। फिर उसकी गांड में उंगली घुसाई। वो सिसक उठी। मैंने कहा, “अगली बार यहां भी लूंगा।” उसने कुछ नहीं कहा।
उस रात के बाद निशा डेढ़ महीने और रही। हर मौका मिला तो मैंने लिया। कभी रसोई में, जब प्रिया सो रही होती। कभी रात को उसके कमरे में। कभी उसे जबरदस्ती घोड़ी बनाकर, कभी उसके मुंह में कपड़ा ठूंसकर। एक बार मैंने उसके हाथ पीछे बांध दिए रूमाल से और फिर उसकी चूत और गांड दोनों इस्तेमाल किए। गांड पहली बार थी। खून निकला। निशा रोई, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा जब तक पूरा लंड अंदर नहीं गया। उसके बाद भी कई बार लिया।
कभी-कभी वो अपने बॉयफ्रेंड से फोन सेक्स करती और उसी समय मैं उसके पीछे से ठोक रहा होता। वो फोन पर कराहती और मैं उसकी गर्दन दबाए रखता। प्रिया को कुछ पता नहीं चला। निशा ने कभी शिकायत नहीं की। उल्टे जब मैं देर करता तो खुद मेरे कमरे के पास आ जाती।
अब निशा की शादी हो चुकी है। दो बच्चे हैं। उनमें से एक का चेहरा देखकर कभी-कभी शक होता है। लेकिन जब भी परिवार में कोई मौका मिलता है—किसी शादी में, किसी फंक्शन में—और हम दोनों अकेले पड़ जाते हैं, तो वही पुरानी भूख जाग जाती है। पिछली बार मैंने उसे होटल के बाथरूम में तीन बार लिया। उसके बालों को सिंक से बांधकर, मुंह में तौलिया ठूंसकर। वो अब भी उतनी ही टाइट लगती है जब मैं जोर से ठोकता हूं।
प्रिया को आज तक कुछ नहीं पता। और न ही पता चलेगा। निशा भी चुप है। दोनों जानते हैं कि ये खेल अब बंद नहीं होगा। जब भी मौका मिलेगा, मैं उसकी चूत और गांड दोनों को तबाह करूंगा। जैसा पहले किया था, उससे भी ज्यादा बुरी तरह।
निशा की शादी के तीन साल बाद भी वो खेल खत्म नहीं हुआ। उसका पति रोहित एक साधारण नौकरीपेशा आदमी था, कमजोर शरीर वाला। निशा अब 25 की हो चुकी थी, दो बच्चों की मां। लेकिन जब भी परिवार के किसी कार्यक्रम में हम मिलते, उसकी आंखों में वही पुरानी भूख दिख जाती। पिछली बार दिल्ली में ही एक रिश्तेदार की शादी में मौका मिला। होटल के तीसरे मंजिल पर एक खाली कमरा था। मैंने उसे वहां घसीटा।
दरवाजा बंद करते ही मैंने उसके बालों को मुट्ठी में कस लिया और दीवार से लगा दिया। “कपड़े उतार, जल्दी।” निशा ने साड़ी खोलनी शुरू की, लेकिन मेरे हाथ पहले ही उसके ब्लाउज पर थे। मैंने उसे फाड़ दिया। चुचियां बाहर आ गईं—अब थोड़ी भारी हो गई थीं, बच्चों के बाद, लेकिन निप्पल अभी भी सख्त और काले पड़ चुके थे। मैंने एक निप्पल को दांतों से पकड़कर काटा। खून की बूंद निकली। निशा चिल्लाई। मैंने दूसरा भी काटा। फिर उसके मुंह पर हाथ रख दिया।
“आवाज निकाल दी तो आज गांड में इतना ठोकूंगा कि तू चल नहीं पाएगी।”
मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट फाड़कर फेंक दिए। वो नंगी खड़ी थी। मैंने अपना बेल्ट खोला, पेंट नीचे किया और अपना लंड निकाला—पहले से ही कठोर, नसों से भरा हुआ। निशा झुकी और मुंह में लेने लगी, लेकिन मैंने उसके बाल पकड़कर पूरा गले तक ठूंस दिया। वो हांफने लगी, थूक बहने लगा, आंखों से आंसू। मैंने उसके सिर को दीवार से टकराते हुए आगे-पीछे किया। गला खराब कर दिया। जब उसका चेहरा लाल हो गया और सांस फूलने लगी, तभी निकाला। थूक और लार उसके सीने पर बह रहे थे।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया। पेट के बल। गांड ऊपर। मैंने उसकी गांड के दोनों भागों को जोर से फैलाया। बीच में वो छोटी सी सुराख दिख रही थी, जो पहले भी कई बार इस्तेमाल हो चुकी थी। मैंने थूक लगाकर दो उंगलियां अंदर घुसा दीं। निशा सिसक उठी। “जीजू… अभी नहीं… बहुत दर्द होगा…”
मैंने जवाब में उसकी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। लाल निशान पड़ गए। फिर और मारा। लगातार दस-बारह थप्पड़। उसकी गांड जलने लगी, कांपने लगी। मैंने अपना लंड उसकी गांड के मुंह पर रखा और एक ही धक्के में आधा घुसा दिया। निशा की चीख निकल गई। मैंने उसके मुंह में अपना अंगूठा ठूंस दिया और बाकी लंड जड़ तक धकेल दिया।
गांड बहुत टाइट थी। मैंने बिना रुके ठोकना शुरू कर दिया। हर धक्के में उसकी देह आगे सरकती। मैंने उसके बालों को घुमाकर मुट्ठी में लिया और जैसे घोड़ी को लगाम पकड़ते हैं, वैसे ही खींचते हुए चोदने लगा। निशा रो रही थी, लेकिन गांड पीछे की तरफ खुद धकेल रही थी। मैंने उसकी कमर पर एक हाथ रखा और दूसरे से उसकी चूत में तीन उंगलियां घुसा दीं। अंदर से गीली थी। मैंने उंगलियों और लंड दोनों से एक साथ मारना शुरू कर दिया।
“तेरे पति ने कभी ऐसी हरामजादा चुदाई की है?” मैंने गुर्राते हुए पूछा।
निशा सिर हिला नहीं पाई। मैंने और जोर से ठोका। उसकी गांड की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी—थप-थप, गीली और भारी। मैंने उसे पलटा। अब पीठ के बल। टांगें उसके सिर के पास मोड़ दीं। इस पोजीशन में उसकी गांड और चूत दोनों खुली हुई थीं। मैंने लंड उसकी चूत में घुसाया और पूरी ताकत से ठोकने लगा। निशा की आंखें पलटी जा रही थीं।
मैंने उसके गले पर हाथ रख दिया और दबाया। सांस रुकने लगी उसकी। चेहरा लाल हो गया। मैंने दबाए रखा और नीचे से और तेज धक्के दिए। जब वो छटपटाने लगी तो थोड़ा ढीला किया, फिर फिर से दबाया।
तीन बार झड़ गई वो। हर बार उसकी चूत मेरे लंड को जकड़ लेती। मैंने निकाला और उसके मुंह पर बैठ गया। “चाट।” निशा ने अपनी ही चूत और गांड का पानी चाटा। मैंने उसका मुंह अपने लंड से रगड़ा, फिर वापस गांड में ठूंस दिया। इस बार और क्रूरता से। एक हाथ से उसका गला दबाए रखा, दूसरे से उसकी चुचियों को मरोड़ता रहा। निप्पल इतने सख्त हो गए थे कि दबाने पर वो और चिल्लाती।
जब मेरा समय करीब आया तो मैंने लंड निकाला, उसके चेहरे पर थूका और फिर से मुंह में ठूंस दिया। पूरा वीर्य उसके गले में उतार दिया। कुछ बाहर निकलकर उसके बालों में और गालों पर लग गया। मैंने उसे वैसा ही छोड़ दिया—नंगी, रोती हुई, चेहरे पर वीर्य और आंसू मिला हुआ।
आधे घंटे बाद हम दोनों ने नहाया। निशा ने अपना फटा ब्लाउज किसी तरह ठीक किया। बाहर निकलते समय मैंने उसके कान में कहा, “अगली बार तेरे बच्चों के सामने वाले कमरे में चोदूंगा। देखना।”
उसके बाद के छह महीनों में तीन बार और मौका मिला। एक बार उसके ही घर में, जब रोहित दफ्तर गया हुआ था और बच्चे स्कूल में। मैं दोपहर को पहुंचा। निशा दरवाजा खोलते ही समझ गई। मैंने उसे रसोई में ही पकड़ लिया। फ्रिज से बर्फ निकाली और उसकी चुचियों पर रगड़ी। निप्पल सिकुड़ गए। फिर बर्फ की एक डली उसकी चूत में धकेल दी। निशा कांपने लगी। मैंने उसे सिंक पर लिटाया, टांगें फैलाईं और बर्फ पिघलने तक मुंह लगाए रखा। फिर अपना लंड घुसाया। रसोई की खिड़की खुली थी। बाहर गली का शोर आ रहा था। मैंने उसकी गांड में उंगली घुसाए हुए चोदा। जब झड़ने वाला था तो निकाला और उसके खुले मुंह में छोड़ दिया।
दूसरी बार एक पार्टी में। बाथरूम में। मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया, उसे कमोड पर बैठाया और खड़े होकर उसके मुंह में लंड ठूंसा। फिर उलटा करके उसकी गांड में लिया। बाथरूम छोटी थी। हर धक्के पर उसका सिर शीशे से टकराता। मैंने उसके बालों से खींचकर शीशे की तरफ मुंह कर दिया। “देख खुद को। कैसी लग रही है तू।” निशा की आंखों में आंसू थे, लेकिन वो देख रही थी—अपना खुला मुंह, लाल गांड, और मेरे लंड का अंदर-बाहर होना।
अब स्थिति ये है कि निशा खुद मौका तलाशती है। कभी फोन पर मैसेज आ जाता है—“कल दोपहर खाली है घर।” कभी किसी शादी में आंखों ही आंखों में इशारा। मैं हर बार पहले से ज्यादा क्रूर हो जाता हूं। कभी रस्सी से उसके हाथ-पैर बांधता हूं। कभी उसके मुंह में उसका ही कपड़ा ठूंसकर चुप कराता हूं। कभी उसकी गांड इतनी मारता हूं कि बैठ नहीं पाती कई घंटों तक।
एक बार मैंने उसके पति के सोने वाले कमरे में ही चोदा। रोहित बगल वाले कमरे में टीवी देख रहा था। निशा के मुंह पर तकिया दबाए रखा और धीरे-धीरे लेकिन बहुत गहराई तक ठोका। हर बार जब वो कराहने लगती, मैं और जोर से दबा देता। अंत में उसका पूरा शरीर कांप रहा था। मैंने वीर्य उसकी चूत के अंदर ही छोड़ दिया। फिर कहा, “जा, अपने पति के साथ सो। मेरे माल को अंदर लेकर।”
निशा अब भी वही करती है। कभी विरोध करती है आवाज में, लेकिन शरीर से कभी नहीं। उसकी चूत और गांड दोनों अब मेरी आदत पहचानती हैं। जब भी मैं अंदर जाता हूं, वो खुद फैल जाती है।
और ये खेल चलता रहेगा। जब तक मैं चाहूंगा। जब तक उसकी देह मेरी भूख को नहीं मिटा पाएगी।
प्रिया को कुछ नहीं पता। रोहित को कुछ नहीं पता। सिर्फ हम दोनों जानते हैं कि दीवारों के उस पार क्या होता है—जब बाल खींचे जाते हैं, जब गला दबाया जाता है, जब गांड फटने के कगार पर होती है, और जब आंसू और वीर्य एक साथ बहते हैं।
ये कहानी अभी खत्म नहीं हुई। अगली मुलाकात में मैं उसे और नीचे गिराऊंगा। और वो आएगी। हमेशा की तरह।
रुबीना और ननद सीमा को ठेकेदार ने चोदा