पति के सामने जवान डॉक्टर ने गांड फाड़ी

कबीर देखता रहा जब जवान डॉक्टर आर्यन ने नफीसा को रस्सियों से बाँधकर बर्बरता से चोदा, गला दबाया, थप्पड़ मारे, गांड चीरी और उसे अपनी स्थायी रंडी बना लिया।

ये कहानी मेरे दोस्त की तरफ से लिखी जा रही है। उसका नाम कबीर है। उसकी बीवी का नाम नफीसा है और वो 29 साल की है। दोनों की शादी को चार साल हो चुके थे और वो दोनों रोजाना रात भर एक-दूसरे को चोदते-चुदवाते रहते थे। कबीर की हमेशा से एक गंदी ख्वाहिश थी—कि कोई जवान मर्द उसके सामने नफीसा की चूत को फाड़ दे, उसे कुत्ते की तरह इस्तेमाल करे, थप्पड़ मारे, बाल खींचे और उसे रोने-चिल्लाने पर मजबूर कर दे। नफीसा भी चुपके से इसी बात की दीवानी थी। वो चाहती थी कि कोई जबरदस्त लंड वाला उसे बर्बर तरीके से चोदे जबकि उसका पति पास खड़ा होकर देखे।

एक दिन नफीसा के पेट में दर्द हुआ तो डॉक्टर ने सोनोग्राफी का सुझाव दिया। दोनों मुंबई के एक प्राइवेट क्लिनिक पहुँचे जो अंधेरी वेस्ट में था। क्लिनिक का नाम था “सनराइज डायग्नोस्टिक्स”। शाम के साढ़े छह बज चुके थे और डॉक्टर घर जाने की तैयारी में थे। फिर भी कबीर ने फ्रंट डेस्क पर बैठे लड़के से मिन्नतें कीं। थोड़ी देर बाद अंदर से आवाज़ आई कि डॉक्टर राज़ी हो गए हैं।

अंदर जाते ही कबीर की साँसें तेज़ हो गईं। डॉक्टर एक 24 साल का जवान लड़का था। नाम था आर्यन मेहता। गोरा रंग, जिम से बनी हुई कठोर बॉडी, चौड़े कंधे, और चेहरे पर ऐसी ठंडी मुस्कान जैसे वो पहले से जानता हो कि आज क्या होने वाला है। उसने काली टी-शर्ट और डीप ब्लू जींस पहन रखी थी। जींस इतनी टाइट थी कि उसके जाँघों और लंड का उभार साफ दिख रहा था।

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आर्यन ने नफीसा को बेड पर लेटने को कहा। फिर क्लर्क को बाहर भेज दिया और दरवाज़ा बंद कर दिया। “सलवार खोलो,” उसने सीधा आदेश दिया। नफीसा ने नाड़ा खोला। आर्यन ने बिना किसी हिचक के उसका सलवार नीचे खींच दिया और उसके पेट पर ठंडा जेल लगाते हुए बोला, “पूरी तरह नीचे उतार दो। यूटेरस ठीक से दिखना चाहिए।”

नफीसा ने सलवार घुटनों तक उतार दी। उसकी चूत के बाल घने और काले थे। आर्यन ने जेल भरे हाथ से सीधे उसकी चूत के ऊपर वाली जगह पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसका हाथ नीचे सरकने लगा। उँगलियाँ बालों में घुस गईं। नफीसा की साँसें तेज़ हो गईं। कबीर खड़ा देख रहा था। उसका अपना लंड भी कड़ा हो चुका था।

“कोई दिक्कत है?” आर्यन ने कबीर की तरफ देखा। “बिल्कुल नहीं,” कबीर ने जवाब दिया। “जो करना है करो।”
आर्यन की उँगलियाँ अब नफीसा की चूत की फाँकों पर घूम रही थीं। वो जानबूझकर धीरे-धीरे रगड़ रहा था। नफीसा की टाँगें थोड़ी-थोड़ी खुलने लगीं। आर्यन ने एक उँगली अंदर धकेल दी। नफीसा ने सिसकारी भरी। “आह्ह… ये क्या…”

“चुप,” आर्यन ने सख्ती से कहा। “बीवी को इतना शर्माना नहीं चाहिए।” फिर उसने दूसरी उँगली भी अंदर डाल दी और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। नफीसा की चूत गीली हो चुकी थी। आर्यन ने अपनी जींस का ज़िपर खोला और अपना मोटा, काला, 9 इंच लंबा लंड बाहर निकाला। वो इतना मोटा था कि नफीसा की आँखें फटी रह गईं।

कबीर ने आगे बढ़कर नफीसा का कुर्ता ऊपर कर दिया और उसके स्तनों को दबाया। आर्यन ने नफीसा के बालों को मुट्ठी में जकड़ लिया और उसका मुँह अपने लंड की तरफ खींच लिया। “चूस,” उसने आदेश दिया। नफीसा ने मुँह खोला। आर्यन ने अपना लंड उसके गले तक धकेल दिया। नफीसा घुटने उखड़ने लगी, आँसू निकल आए, लेकिन आर्यन ने बाल और ज़ोर से खींचे और धक्के मारने लगा।

“देख तेरी बीवी कैसे गला फाड़ रही है,” आर्यन ने कबीर से कहा। कबीर अपना लंड निकालकर हिला रहा था। आर्यन ने नफीसा को बेड से खींचकर खड़ा कर दिया, उसे घुटनों के बल बिठाया और पीछे से उसकी चूत में लंड घुसेड़ दिया। एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर चला गया। नफीसा चीख पड़ी।

“आआह्ह्ह… बहुत मोटा है… निकल जाएगा…” आर्यन ने उसके मुँह पर हाथ रख दिया। “चिल्ला मत। चुपचाप ले।” फिर उसने नफीसा के बाल पकड़कर उसके सिर को पीछे खींचा और बर्बरता से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ नफीसा की चूत की दीवारें फटती महसूस हो रही थीं। आर्यन के हाथ उसके गले पर थे, दबा रहे थे। कभी-कभी वो थप्पड़ मारता, कभी स्तनों को ज़ोर से मरोड़ता।

कबीर पास आकर नफीसा के मुँह में अपना लंड ठूंस रहा था। आर्यन और कबीर दोनों मिलकर उसे इस्तेमाल कर रहे थे। आर्यन ने नफीसा को पलटा और उसे मिशनरी पोजीशन में लेटने को मजबूर किया। उसने उसकी दोनों टाँगें कंधों पर चढ़ा लीं और पूरा वजन डालकर चोदने लगा। नफीसा की चूत से पानी निकल रहा था, बिस्तर गीला हो चुका था।

“तेरी बीवी की चूत कितनी ढीली हो गई है,” आर्यन हँसते हुए बोला। “मैं इसे और फाड़ दूँगा।” उसने नफीसा के गाल पर दो जोरदार थप्पड़ मारे। नफीसा के आँसू बह रहे थे लेकिन वो कराह रही थी। आर्यन ने उसके दोनों हाथ उसके सिर के ऊपर बाँध दिए और एक हाथ से गला दबाते हुए धक्के तेज़ कर दिए।

नफीसा का शरीर काँप रहा था। वो बार-बार झड़ रही थी। आर्यन ने उसे कुत्ते की तरह कर दिया, कमर पकड़कर खींचा और इतनी तेज़ी से चोदा कि नफीसा की आवाज़ बंद हो गई। सिर्फ सिसकारियाँ और सिसकियाँ रह गईं। आर्यन ने उसके बालों को पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में फुसफुसाया, “आज से तू मेरी रंडी है। जब चाहूँगा बुलाऊँगा। तेरा पति भी देखेगा।”

कबीर ने नफीसा के मुँह में फिर लंड ठूंस दिया। आर्यन ने नफीसा की गांड पर थूक लगाया और एक उँगली अंदर घुसेड़ दी। नफीसा चीखी लेकिन आर्यन ने और उँगलियाँ बढ़ा दीं। फिर उसने अपना लंड चूत से निकालकर गांड में धकेल दिया। नफीसा का शरीर ऐंठ गया। आर्यन ने बिना रुकें गांड चोदनी शुरू कर दी। खून की कुछ बूँदें भी निकलीं लेकिन आर्यन ने परवाह नहीं की।

“देख कबीर, तेरी बीवी की गांड भी फट रही है,” आर्यन ने कहा। कबीर नफीसा के मुँह से लंड निकालकर उसके चेहरे पर थप्पड़ मार रहा था। नफीसा अब पूरी तरह टूट चुकी थी। वो सिर्फ “और… और चोदो…” बड़बड़ा रही थी।

आर्यन ने फिर से चूत में लंड डाल दिया और दोनों छेदों को बारी-बारी से फाड़ने लगा। नफीसा के शरीर पर थप्पड़ों के निशान, बाल खींचने के निशान और उँगलियों के निशान पड़ चुके थे। आर्यन ने आखिर में नफीसा को अपनी गोद में बैठाया, उसके गले में हाथ डालकर दबाया और नीचे से ऊपर की तरफ धक्के मारने लगा। नफीसा की आँखें ऊपर की तरफ पलट रही थीं।

“अब झड़,” आर्यन ने आदेश दिया। नफीसा का शरीर एक बार फिर से काँप उठा। आर्यन ने भी जोर से कराहते हुए अपना पूरा पानी उसकी चूत के अंदर उड़ेल दिया। इतना कि नफीसा की जाँघों से सफेद पानी बहने लगा। कबीर ने भी नफीसा के चेहरे पर झड़ दिया।
थोड़ी देर तक तीनों हाँफते रहे। आर्यन ने अपना लंड निकाला तो नफीसा की चूत से पानी और थोड़ा खून मिला हुआ पदार्थ बाहर आ रहा था।

आर्यन ने नफीसा के बाल सहलाते हुए कहा, “अगली बार और बुरा होगा। गांड में पूरा मुट्ठी डालूँगा। तैयार रहना।”
नफीसा ने आँखें बंद किए हुए सिर हिलाया। कबीर ने अपनी बीवी के खुले हुए शरीर को देखा—गले पर लाल निशान, स्तनों पर दांतों के निशान, चूत और गांड दोनों फूले हुए और इस्तेमाल किए हुए। उसे अपनी ख्वाहिश पूरी होती दिखी।

उस रात कबीर ने नफीसा को घर ले जाकर फिर से चोदा, लेकिन नफीसा के मुँह से सिर्फ आर्यन का नाम निकल रहा था। अगले हफ्ते दोनों फिर उसी क्लिनिक पहुँचे। इस बार आर्यन ने नफीसा को एक अलग कमरे में ले जाकर तीन घंटे तक बर्बरता से इस्तेमाल किया। कबीर दरवाज़े के पीछे खड़ा सुनता रहा—थप्पड़ों की आवाज़, चीखें, और आर्यन की गंदी गालियाँ।

नफीसा अब सिर्फ कबीर की बीवी नहीं रह गई थी। वो आर्यन की रंडी बन चुकी थी। और कबीर… वो हर बार और ज़्यादा उत्तेजित होकर अपनी बीवी को इस युवक के हाथों सौंप देता था। कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। वो सिर्फ शुरुआत थी।

उस रात के बाद नफीसा की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। अगले ही हफ्ते जब दोनों फिर सनराइज डायग्नोस्टिक्स पहुँचे तो आर्यन ने उन्हें सीधा पिछले कमरे में ले जाया। कमरा अँधेरा था, सिर्फ एक लाल बल्ब जल रहा था। दीवारों पर लोहे की कड़ियाँ लगी थीं, बेड के चारों कोनों पर मोटी रस्सियाँ बँधी हुई थीं। आर्यन ने दरवाज़ा बंद किया और ताला लगा दिया।

“आज सिर्फ सोनोग्राफी नहीं होगी,” उसने ठंडी आवाज़ में कहा। “आज तुझे पूरी तरह तोड़ना है।”
नफीसा का शरीर काँप उठा लेकिन उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। कबीर एक कुर्सी पर बैठ गया, अपना लंड बाहर निकाल लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगा। आर्यन ने नफीसा के बालों को मुट्ठी में जकड़ लिया और उसे घुटनों के बल खींचकर फर्श पर गिरा दिया। “कपड़े उतार। सब।”

नफीसा ने काँपते हाथों से कुर्ता, सलवार, ब्रा और पैंटी उतार दी। आर्यन ने उसकी पैंटी उठाई, सूँघी और फिर उसके मुँह में ठूंस दी। “इसे दबाके रख। आवाज़ निकली तो और बुरा होगा।”

उसने नफीसा के दोनों हाथ पीछे बाँध दिए। मोटी रस्सी इतनी कसकर बाँधी कि कलाईयाँ तुरंत लाल हो गईं। फिर उसे बेड पर पेट के बल लिटाया और दोनों टाँगें फैलाकर कड़ियों से बाँध दीं। नफीसा अब पूरी तरह खुली पड़ी थी—चूत और गांड दोनों हवा में। आर्यन ने उसका मुँह पैंटी से भरा हुआ छोड़ दिया और उसकी गांड पर पहला जोरदार थप्पड़ मारा। आवाज़ कमरे में गूँज गई। नफीसा की कमर ऐंठ गई।

दूसरा थप्पड़ और ज़ोर से। तीसरा। चौथा। आर्यन बिना रुके उसके दोनों नितंबों पर थप्पड़ बरसाता रहा। नफीसा की गांड जल रही थी, लाल हो चुकी थी। आँसू निकल आए लेकिन पैंटी के कारण वो चीख नहीं पा रही थी। आर्यन ने अपनी बेल्ट निकाली और उसे दोहरा करके गांड पर फटकारना शुरू कर दिया। हर फटकार के साथ नफीसा का शरीर झटका खाता। कबीर कुर्सी पर बैठा यह सब देख रहा था, उसका लंड इतना कड़ा था कि दर्द हो रहा था।

आर्यन ने बेल्ट रखी और नफीसा की चूत में तीन उँगलियाँ एक साथ घुसेड़ दीं। वो तेजी से अंदर-बाहर करने लगा, नाखून चुभाते हुए। “तेरी यह चूत अब मेरी है। समझी?” नफीसा ने सिर हिलाया। आर्यन ने उँगलियाँ निकालकर उसके मुँह से पैंटी निकाली और उन्हीं गीली उँगलियों को उसके मुँह में ठूंस दिया। “चाट। अपनी गंदगी चाट।”

नफीसा ने आज्ञाकारी होकर चाटा। आर्यन ने तुरंत अपना 9 इंच का मोटा लंड उसकी गांड पर रगड़ा। बिना किसी लोशन के, सिर्फ थूक लगाकर उसने एक ही धक्के में पूरा लंड उसकी गांड में धकेल दिया। नफीसा की चीख इस बार दब नहीं पाई। आर्यन ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और बर्बरता से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ नफीसा की गांड फटती महसूस हो रही थी। खून की बूँदें टपकने लगीं लेकिन आर्यन ने रफ्तार और बढ़ा दी।

“चिल्ला,” उसने आदेश दिया। “तेरे पति को सुनने दे कि उसकी बीवी कैसे रो रही है।”
नफीसा चिल्लाने लगी—“आआह्ह्ह… आर्यन… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो… प्लीज…” लेकिन आर्यन ने उसकी बात अनसुनी कर दी। वो उसकी गांड को फाड़ता रहा। बीच-बीच में वो अपना लंड निकालता, नफीसा के चेहरे पर थप्पड़ मारता और फिर से गांड में घुसेड़ देता। कबीर अब और बर्दाश्त नहीं कर पाया। उसने नफीसा के मुँह में अपना लंड ठूंस दिया। अब नफीसा दोनों तरफ से भरी हुई थी—मुँह में पति का लंड, गांड में आर्यन का।

आर्यन ने रस्सियाँ थोड़ी ढीली कीं और नफीसा को पलटा। उसके दोनों स्तनों पर दांत गड़ा दिए, इतनी जोर से कि खून की लकीरें निकल आईं। फिर उसने नफीसा की गर्दन में हाथ डालकर दबाया और चूत में लंड घुसेड़ दिया। गला इतना दबाया कि नफीसा की आँखें ऊपर पलटने लगीं। आर्यन ने दबाव कम किया तो नफीसा ने जोर से साँस ली और तुरंत फिर से दबा दिया। ये खेल वो कई बार दोहराता रहा—गला दबाना, छोड़ना, फिर दबाना—जबकि नीचे से लंड चूत को चीर रहा था।

“तू सिर्फ एक रंडी है,” आर्यन उसके कान में फुसफुसाया। “तेरा पति तुझे बेच चुका है। आज से तू मेरी संपत्ति है।”
नफीसा के मुँह से सिर्फ कराहें निकल रही थीं। आर्यन ने उसे बेड से खींचकर फर्श पर गिराया। उसके हाथ अभी भी पीछे बँधे थे। आर्यन ने उसे कुत्ते की तरह घुटनों के बल बैठाया, कमर पकड़ी और फिर से गांड में लंड डाल दिया। इस बार वो इतनी तेज़ी से चोद रहा था कि नफीसा का माथा फर्श से टकरा रहा था। कबीर ने नफीसा के बाल पकड़कर उसका मुँह अपने लंड पर ला दिया। दोनों मर्द अब पूरी तरह तालमेल से उसे इस्तेमाल कर रहे थे।

आर्यन ने अचानक लंड निकाला और नफीसा को पीठ के बल लिटा दिया। उसने उसकी दोनों टाँगें उसके सिर के पास मोड़ दीं—लगभग पूरा शरीर मुड़ा हुआ। इस पोजीशन में नफीसा की चूत और गांड दोनों पूरी तरह खुली थीं। आर्यन ने बारी-बारी से दोनों छेदों में लंड डालना शुरू किया। पाँच धक्के चूत में, पाँच गांड में। नफीसा अब पागलों की तरह चीख रही थी। उसका शरीर पसीने से तरबतर था, बाल चेहरे पर चिपक गए थे, आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे।

“झड़,” आर्यन ने आदेश दिया। “मेरे लंड पर झड़।”
नफीसा का शरीर एक तेज लहर के साथ काँप उठा। उसकी चूत से पानी की धार छूट गई जो आर्यन के पेट तक जा लगी। आर्यन हँसा और और तेज़ी से चोदने लगा। नफीसा लगातार झड़ती रही—एक के बाद एक। उसका शरीर अब काबू में नहीं था। आर्यन ने आखिर में जोर से कराहते हुए अपना पानी उसकी गांड के अंदर उड़ेल दिया। इतना कि जब उसने लंड निकाला तो सफेद गाढ़ा पानी उसकी गांड से बहने लगा, फर्श पर गिरने लगा।

कबीर ने भी नफीसा के चेहरे पर झड़ दिया। आर्यन ने नफीसा के बाल पकड़कर उसका मुँह अपने अभी भी कड़े लंड पर लाया। “साफ कर।” नफीसा ने आज्ञाकारी होकर चाटा—अपनी गांड का खून और आर्यन का पानी दोनों।
आर्यन ने रस्सियाँ खोलीं तो नफीसा का शरीर ढेर की तरह गिर गया। उसके नितंब बैंगनी हो चुके थे, कलाईयों पर गहरे निशान थे, गर्दन पर

उँगलियों के निशान, स्तनों पर दांतों के निशान। चूत और गांड दोनों सूजे हुए और इस्तेमाल किए हुए दिख रहे थे। आर्यन ने उसके बाल सहलाते हुए कहा, “अगली बार और सामान लाऊँगा। मोमबत्ती, क्लैम्प्स, और एक मोटा डिल्डो जो तेरी गांड में पूरा अंदर चला जाएगा। तैयार रहना।”
नफीसा ने आँखें बंद किए हुए फुसफुसाया, “जी… आर्यन…”

कबीर ने अपनी बीवी को उठाया। वो चल भी नहीं पा रही थी। कार में ले जाते समय नफीसा की जाँघों से अब भी पानी टपक रहा था। घर पहुँचकर कबीर ने उसे बाथरूम में नहलाया तो देखा कि उसके शरीर पर कितने गहरे निशान पड़ गए थे। लेकिन नफीसा की आँखों में डर के साथ एक अजीब सी भूख भी थी।

उस रात तीन बजे नफीसा अचानक जाग गई। उसने कबीर को जगाया और फुसफुसाई, “मुझे फिर से उसी दर्द की जरूरत है… आर्यन वाला दर्द…”
कबीर ने मुस्कुराते हुए उसके बाल सहलाए। “कल रात फिर जाएँगे। और इस बार मैं भी शामिल रहूँगा… और बुरी तरह।”
अगली शाम दोनों फिर उसी कमरे में थे। इस बार आर्यन ने नफीसा के निप्पल्स पर मेटल क्लैम्प्स लगा दिए थे। हर बार जब वो हिलती, दर्द की तेज लहर उसके शरीर में दौड़ जाती। आर्यन ने उसकी गांड में एक मोटा काला डिल्डो ठूंस दिया था जो बाहर से रिमोट से कंपन कर रहा था। खुद आर्यन उसका मुँह चोद रहा था जबकि कबीर नीचे से उसकी चूत में लंड डाले हुए था।

नफीसा अब सिर्फ एक शरीर रह गई थी—दर्द, मजा, अपमान और भूख का मिश्रण। आर्यन उसके गले में चमड़े का कॉलर बाँध रहा था जिस पर लिखा था—“आर्यन की रंडी”। कबीर देख रहा था और अपने लंड को और ज़ोर से हिला रहा था।

कमरे में सिर्फ थप्पड़ों की आवाज़, सिसकियाँ, और गीली चूत की आवाज़ गूँज रही थी। नफीसा की आँखें अब बंद नहीं हो रही थीं। वो हर दर्द को महसूस करना चाहती थी। हर अपमान को। हर बर्बर धक्के को।
और आर्यन… वो मुस्कुरा रहा था। क्योंकि वो जानता था कि यह सिर्फ शुरुआत है। नफीसा अब पूरी तरह टूट चुकी थी—और टूटने के बाद ही असली मजा शुरू होता है।

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