गाँव की एक लड़की की हिंदी सेक्स कहानी

गाँव की एक साधारण लड़की रात दर रात एक निर्दयी मर्द के हाथों पूरी तरह से टूटती चली जाती है। दर्द, दबाव और खामोश चीखों वाली वह हिंदी सेक्स कहानी जो शुरू होते ही अंत तक छोड़ने नहीं देती।

मैं राहुल हूँ। उम्र 28 साल। मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे सीहोर के पास एक गाँव में रहता हूँ। घर के पास ही एक पुराना तालाब और घने बाग हैं। मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता था। उस घर की लड़की का नाम काजल था। उम्र 20 साल। काजल के पिता खेतों में काम करते थे, माँ घर संभालती थी।

एक छोटा भाई 15 साल का और एक बहन 11 साल की थी। काजल मोटे-मोटे स्तनों वाली, चौड़ी कमर और गोल नितंबों वाली लड़की थी। चेहरा साधारण था लेकिन जिस्म ऐसा कि गाँव के किसी भी मर्द का खड़ा हो जाए। वह हमेशा ढीली साड़ी या सलवार-कुर्ता पहनती थी जिससे उसका जिस्म छिपता रहता।

हमारे घरों के बीच एक कच्चा रास्ता था। परिवारों में हल्की जान-पहचान थी। कभी-कभी कोई काम हो तो काजल हमारे घर आ जाती या मैं उनके घर चला जाता। एक दोपहर मैं और काजल तालाब के किनारे बैठे थे। तभी दो कुत्ते आए और जोर-जोर से मैथुन करने लगे। कुत्ता कुतिया के ऊपर चढ़ा और उसका लंड अंदर घुसकर फूल गया। दोनों चिपक गए। काजल की निगाहें वहाँ अटक गईं। मैं मुस्कुराया। उसने शरमाते हुए मुँह फेर लिया और जल्दी से घर की तरफ भाग गई।

दो दिन बाद दोपहर में घर पर सब खेतों में थे। काजल अकेली बरामदे में बैठी थी। मैं गया और पानी माँगा। पानी पीते-पीते मैंने फोन निकाला और उसी दिन का कुत्तों वाला वीडियो चालू कर दिया। काजल की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह वीडियो घूर रही थी। फिर अचानक बोली, “बंद करो ये गंदा वीडियो।” मैंने कहा, “उस दिन तो तू देख रही थी। आज भी देख। या फोन ले जा अंदर और अकेले देख।” उसने फोन छीन लिया और अंदर चली गई। दस मिनट बाद लौटी तो उसका चेहरा लाल था, साँस तेज चल रही थी। उसने फोन वापस दिया और दूर जाकर बैठ गई।

रात को ग्यारह बजे एक अनजान नंबर से मैसेज आया। “मैं काजल। उस वीडियो में कुत्ते का लंड अंदर क्यों फँस गया?” मैंने विस्तार से बताया कि कैसे लंड फूल जाता है और पानी निकलने तक बाहर नहीं आता। उसने पूछा कि सफेद पानी क्या होता है। मैंने सब बताया। फिर पूछा, “तेरा कोई बॉयफ्रेंड है?” उसने कहा नहीं। मैंने पूछा, “मेरी दोस्त बनेगी?” वह शर्माई और बोली, “सोचकर बताऊँगी।”

join my telegram channel for leaked videos

अगले दिन हैंडपंप पर पानी लेने गई तो मैं भी गया। कोई नहीं था। मैंने जवाब माँगा। उसने कहा, “किसी को पता नहीं चलना चाहिए। रात नौ बजे घर के पीछे आ जाना।” मैंने मौके का फायदा उठाया और उसके गाल पर एक किस कर दिया। वह हल्का धक्का देकर अलग हो गई लेकिन आँखों में चमक थी।

रात नौ बजे सब सो चुके थे। मैं चुपके से निकला। काजल पिछले दरवाजे से बाहर आई। हम थोड़ा आगे घने पेड़ों की छाँव में चले गए। जैसे ही अँधेरे में पहुँचे, उसने खुद को मुझसे चिपका लिया। उसके मोटे स्तन मेरी छाती से दब गए। मैंने उसके होठों को पकड़ लिया और जोर से चूसा। जीभ अंदर घुसा दी। एक हाथ से उसके स्तन दबाए। उसने पहले झटका दिया लेकिन फिर सहम गई। मैंने कुर्ते के अंदर हाथ डालकर ब्रा का हुक खोला और दोनों स्तन बाहर निकाल लिए। मोटे, सख्त निप्पल्स को उँगलियों से मसलने लगा। काजल की साँसें तेज हो गईं। “धीरे… पहली बार…” उसने फुसफुसाया।

मैंने और जोर से दबाया। एक स्तन मुँह में ले लिया और दाँतों से हल्का काटा। वह सिसकने लगी। दूसरा हाथ उसकी सलवार के नाड़े पर गया। नाड़ा खींचकर खोला। पैंटी के ऊपर से चूत सहलाई। वह पहले से गीली थी। पैंटी के अंदर उँगली घुसाई। चूत गरम और चिपचिपी थी। दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं और जोर-जोर से आगे-पीछे करने लगा। काजल की कमर लचकने लगी। उसने मेरी पैंट की चेन खोली और लंड बाहर निकाल लिया। मोटा, सख्त लंड उसके हाथ में था। वह डरते-डरते हिलाने लगी।

मैंने उसकी सलवार और पैंटी एक साथ नीचे सरका दी। नंगी चूत रात की हवा में खुली थी। मैंने उसे पेड़ के तने से सटाया, दोनों पैर चौड़े किए और घुटनों के बल बैठकर उसकी चूत पर मुँह लगा दिया। जीभ से चूत के होंठ चाटे, क्लिट पर जोर से चूसा। काजल का शरीर काँप उठा। “आह… रुक… बहुत जोर…” लेकिन मैं नहीं रुका। जीभ अंदर घुसा दी और चूसता रहा। पाँच मिनट में वह काँपते हुए झड़ गई। उसके पानी मेरे मुँह पर लग गए।

मैं खड़ा हुआ। लंड उसके चेहरे के सामने था। “मुँह खोल,” मैंने आदेश दिया। उसने हिचकिचाते हुए मुँह खोला। मैंने लंड अंदर ठूंस दिया। गला तक। वह घुटने टेककर खांसने लगी लेकिन मैंने सिर पकड़ रखा था। आगे-पीछे करने लगा। लार टपकने लगी। दस-बारह धक्के के बाद मैंने बाहर निकाला। “अब चारपाई पर लेट।” पास ही एक छोटी झोपड़ी थी जहाँ पुरानी चारपाई पड़ी थी। मैंने उसे वहाँ घसीट कर लेटा दिया। दोनों हाथ उसके सिर के ऊपर बाँध दिए अपनी बेल्ट से। पैर फैला दिए।

“आज तेरी कुँवारपन की दीवार तोड़ूँगा,” मैंने कहा। लंड चूत के मुँह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। काजल चीख उठी। “बाप रे… फट गई… निकाल… दर्द हो रहा…” लेकिन मैं अंदर तक धंसा हुआ था। खून लगा था। मैं रुका नहीं। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर वह चीखती, सिसकती। मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया ताकि आवाज न निकले। स्तनों को मसलता, निप्पल्स को मरोड़ता। चूत कसकर लंड को दबा रही थी। बीस मिनट तक बिना रुके चुदाई की। फिर अंदर ही पिचकारी छोड़ दी। गर्म वीर्य उसकी कुँवारी चूत में भर गया।

हाथ खोल दिए। काजल रो रही थी, शरीर काँप रहा था। मैंने कहा, “अब से तू मेरी है। जब बोलूँगा तब आना। मना किया तो सबको बता दूँगा।” वह डर गई और सिर हिला दिया।
दो दिन बाद फिर मौका मिला। उसके माता-पिता रिश्तेदारों के यहाँ गए थे। दिन में खेत की झोपड़ी में। इस बार मैं तैयार था। रस्सी, एक पतली छड़ी और एक रूमाल ले गया था। काजल आई तो मैंने उसे चारपाई पर लिटाया। हाथ-पैर बाँध दिए। आँखों पर रूमाल बाँध दिया। “आज सिर्फ चुदाई नहीं। आज दर्द भी सहेगी,” मैंने कहा।

पहले छड़ी से उसके नितंबों पर मारने लगा। हर चोट पर वह चीखती। लाल निशान पड़ गए। फिर स्तनों पर हल्की मार। निप्पल्स को क्लिप जैसी चीज से दबाया (मैंने घर से क्लॉथ पिन ले आए थे)। दर्द से वह तड़प रही थी लेकिन बंधी हुई थी। फिर चूत पर मुँह लगाया, चाटा, काटा। उँगलियाँ अंदर घुसाकर जोर से घुमाईं। तीन उँगलियाँ एक साथ। फिर लंड अंदर ठूंस दिया। इस बार पीछे से। कुतिया की तरह घुटनों के बल। बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के। हर धक्के पर उसके स्तन झूल रहे थे। मैंने उसके मुँह में उँगलियाँ ठूंस दीं। वह गला घोंटते हुए सिसक रही थी।

आधा घंटा चुदाई के बाद मैंने बाहर निकाला और उसके मुँह में डाल दिया। “पूरा निगल,” आदेश दिया। वह रोते हुए निगलने लगी। वीर्य उसके गले में उतर गया। फिर मैंने उसे घुमाया। चूत में फिर से घुसाया। इस बार क्लिट को उँगली से मसलते हुए। वह दर्द और मजे के बीच झड़ गई। शरीर अकड़ गया। मैंने भी अंदर छोड़ दिया।

उसके बाद नियमित हो गया। कभी रात को तालाब के किनारे, कभी खेत की झोपड़ी में। हर बार कुछ नया। कभी उसके हाथ बाँधकर सिर्फ स्तन चूसता रहता। कभी चूत में सब्जी की मोटी डंठल घुसाकर छोड़ देता। कभी उसके नितंबों को लाल करने तक पिटाई। कभी उसे जमीन पर घुटनों के बल बैठाकर मुँह में लंड ठूंसता और गले तक ले जाता। काजल पहले रोती, फिर आदी होने लगी। उसका शरीर मेरे आदेशों का आदी हो गया। जब मैं कहता “चूत खोल,” वह बिना देर किए पैर फैला देती। जब कहता “मुँह खोल,” वह घुटने टेक देती।

एक रात मैंने उसे घर के पीछे ले जाकर पूरी रात रखा। हाथ-पैर बाँधे, आँखें बंद। पूरी रात उसकी चूत, गांड और मुँह तीनों का इस्तेमाल किया। गांड पहली बार फाड़ी। खून लगा। वह चीखी लेकिन मैंने मुँह बंद रखा। सुबह छोड़ते समय कहा, “अब तू सिर्फ मेरी रंडी है। जब चाहूँगा तभी बुलाऊँगा। मना किया तो गाँव में नंगी घुमाऊँगा।”

काजल का शरीर अब मेरे निशानों से भरा रहता। स्तनों पर काटने के निशान, नितंबों पर छड़ी के लाल निशान, चूत हमेशा सूजी रहती। वह दिन में सामान्य दिखती लेकिन रात को मेरी गुलाम बन जाती। एक दिन उसने खुद मैसेज किया, “आज रात आ जा। सब सो गए हैं। आज और जोर से करना।”

मैं गया। इस बार मैंने उसे उलटा लटकाया। पैर ऊपर, सिर नीचे। चूत मुँह के सामने। मैंने घंटों चाटा, काटा, उँगलियाँ घुसाईं। फिर लंड अंदर। गुरुत्वाकर्षण से लंड और गहरा जाता। वह बेहोशी की हालत में झड़ती रही। आखिर में मैंने उसके चेहरे पर पूरा वीर्य छोड़ दिया। बाल, आँखें, मुँह सब सना दिया।

कहानी यहीं नहीं रुकी। महीनों तक यही सिलसिला चला। काजल अब पूरी तरह टूट चुकी थी। उसका शरीर मेरी क्रूरता का आदी हो गया था। जब भी मैं चाहता, वह आ जाती। कभी खेत में नंगी घूमती मेरे आदेश पर। कभी खुद रस्सी लेकर आती कि आज बाँधकर मारना। उसकी चूत अब इतनी ढीली हो गई थी कि मेरा मोटा लंड आसानी से अंदर चला जाता। फिर भी हर बार मैं उसे दर्द देता। क्योंकि दर्द में ही वह असली मजा लेती थी।

एक दिन उसके माता-पिता वापस आने वाले थे। आखिरी मौका। मैंने उसे पूरे दिन झोपड़ी में रखा। सुबह से शाम तक। हाथ-पैर बाँधे। हर घंटे चुदाई। बीच-बीच में छड़ी, क्लॉथ पिन, उँगलियाँ, मुँह। शाम तक उसकी चूत, गांड दोनों सूज गए थे। शरीर पर नीले निशान। वह बोल भी नहीं पा रही थी। सिर्फ सिसक रही थी। आखिर में मैंने कहा, “अब तू हमेशा के लिए मेरी है। शादी हो या न हो, तू मेरी रंडी रहेगी।” उसने आँखों से हाँ कहा।

गाँव की वह कुँवारी लड़की अब एक पूरी तरह से तोड़ी हुई, आदी गुलाम बन चुकी थी। और मैं उसका मालिक। हर रात उसका जिस्म मेरी क्रूर इच्छाओं का शिकार बनता रहा। कोई नहीं जानता था। और वह कभी बता भी नहीं सकती थी। क्योंकि डर और मजे दोनों ने उसे हमेशा के लिए बाँध लिया था।

काजल अब पूरी तरह से मेरी संपत्ति बन चुकी थी। उसके माता-पिता लौट आए थे लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। रात के अँधेरे में वह हमेशा मेरे पास आ जाती। कभी तालाब के किनारे घने पेड़ों के नीचे, कभी खेत की पुरानी झोपड़ी में, कभी मेरे घर के पिछवाड़े जहाँ कोई नहीं आता था। हर मुलाकात पहले से ज्यादा क्रूर, ज्यादा गंदी और ज्यादा दर्दनाक होती जा रही थी।

एक रात मैंने उसे विशेष तैयारी के साथ बुलाया। रस्सी, मोटी छड़ी, क्लॉथ पिन के अलावा मैंने घर से एक मोटी मोमबत्ती, सरसों का तेल और एक पुराना चमड़े का पट्टा भी ले लिया था। काजल झोपड़ी में आई तो उसके चेहरे पर डर और उत्तेजना दोनों साफ दिख रहे थे। उसने खुद कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैंने रोका। “नहीं। आज मैं उतारूँगा। और आज तू सिर्फ सहेगी। बोलने की इजाजत नहीं।”

मैंने उसकी साड़ी खींचकर फाड़ दी। ब्लाउज के हुक इतनी जोर से खोले कि एक टूट गया। ब्रा और पैंटी को भी फाड़कर अलग कर दिया। वह पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थी। मोटे स्तन, चौड़े नितंब, और पहले से सूजी हुई चूत। मैंने उसके दोनों हाथ पीछे बाँध दिए। फिर पैरों को भी चौड़े करके रस्सी से बाँध दिया ताकि वह हिल भी न सके। आँखों पर काला कपड़ा बाँध दिया।

पहले मैंने उसके स्तनों पर क्लॉथ पिन लगाए। दोनों निप्पल्स को कसकर दबा दिया। दर्द से वह काँप उठी लेकिन आवाज नहीं निकाली। मैंने छड़ी उठाई और उसके नितंबों पर जोरदार वार करना शुरू किया। एक… दो… पाँच… दस। हर वार पर उसका शरीर झटका खाता। नितंब लाल हो गए, फिर बैंगनी। कुछ जगहों से हल्की खरोंचें भी आ गईं। मैंने उसके जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर भी मारे। चूत के पास। वह सिसक रही थी लेकिन मुँह बंद रखे हुए थी।

फिर मैंने सरसों का तेल उसके पूरे जिस्म पर पोत दिया। स्तन, पेट, जाँघें, चूत, गांड सब चमकने लगे। तेल लगाते हुए मैंने उसकी चूत में तीन उँगलियाँ एक साथ घुसा दीं और जोर से फैलाने लगा। “इतनी ढीली हो गई है फिर भी तंग लगती है,” मैंने कहा। उँगलियाँ निकालकर मोटी मोमबत्ती ली और धीरे-धीरे उसकी चूत में धकेल दी। आधी मोमबत्ती अंदर चली गई। काजल का शरीर अकड़ गया। मैंने मोमबत्ती को आगे-पीछे करना शुरू किया। साथ ही क्लॉथ पिन को मरोड़ता रहा।

आधा घंटा बाद मैंने मोमबत्ती निकाली और अपना लंड उसके मुँह में ठूंस दिया। आँखें बंद होने की वजह से वह अंदाजा नहीं लगा पा रही थी। लंड गले तक चला गया। वह खांसने लगी, लार टपकने लगी लेकिन मैंने सिर पकड़कर और गहरा धकेला। दस-बारह धक्के के बाद बाहर निकाला और उसकी चूत में एक झटके में पूरा घुसा दिया। तेल की वजह से आसानी से चला गया लेकिन मैंने फिर भी जोर लगाया। हर धक्के पर उसके स्तन झूल रहे थे, क्लॉथ पिन हिल रहे थे और दर्द बढ़ा रहे थे।

मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में कहा, “आज तेरी गांड भी फाड़ूँगा। तैयार रह।” लंड चूत से निकालकर गांड के छेद पर रखा। तेल लगा रखा था लेकिन पहली बार इतनी गहराई तक जाने वाला था। एक जोरदार धक्का। काजल की चीख रुक गई। शरीर काँप उठा। मैं रुका नहीं। आधा लंड अंदर धंसा दिया। फिर पूरा। उसकी गांड मेरे लंड को कसकर दबा रही थी। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर वह काँपती। मैंने एक हाथ से उसके बाल और दूसरे से क्लॉथ पिन मरोड़े।

बीस मिनट तक गांड की चुदाई के बाद मैंने बाहर निकाला। लंड पर खून की हल्की परत थी। मैंने उसे चारपाई पर उलटा लिटाया। सिर नीचे, नितंब ऊपर। फिर से गांड में घुसा दिया। इस पोजीशन में और गहरा जा रहा था। उसके मुँह से सिर्फ अजीब सी आवाजें आ रही थीं। मैंने छड़ी से उसके पीठ पर भी मारना शुरू किया। लाल निशान पड़ गए। आखिर में मैंने उसकी गांड में ही पूरा वीर्य छोड़ दिया। गर्म तरल उसके अंदर भर गया और बाहर भी रिसने लगा।

हाथ-पैर खोल दिए। आँखों का कपड़ा हटाया। काजल की आँखें लाल थीं, चेहरा सूजा हुआ। वह बोल नहीं पा रही थी। मैंने पानी की बोतल उसके मुँह से लगाई। “पी। कल फिर आना। और अगली बार अपने साथ एक मोटी बैंगन लाना। समझी?” उसने सिर हिलाया।

अगली रात वह बैंगन लेकर आई। मैंने उसे फिर से बाँधा। इस बार ज्यादा सख्ती से। हाथ ऊपर, पैर फैलाकर। बैंगन पर तेल लगाकर पहले उसकी चूत में घुसाया। पूरा अंदर तक। फिर गांड में। दोनों छेद भरे हुए थे। मैंने छड़ी से उसके स्तनों पर हल्की मार की। निप्पल्स और सख्त हो गए। फिर अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। अब तीनों छेद भरे हुए थे। मैं उसके मुँह में धक्के मार रहा था जबकि बैंगन उसकी चूत और गांड में धंसे हुए थे। काजल की आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन वह विरोध नहीं कर रही थी।

मैंने बैंगन निकालकर अपना लंड उसकी चूत में डाला। जोरदार चुदाई। फिर गांड में। फिर वापस मुँह में। इस चक्र को मैंने कई बार दोहराया। उसके जिस्म से पसीना और मेरे वीर्य की गंध चारों तरफ फैल गई थी। आखिर में मैंने उसके चेहरे पर, स्तनों पर और खुली चूत पर पूरा वीर्य छोड़ दिया। वह लेटी हुई थी, शरीर काँप रहा था, आँखें बंद।

महीनों बीत गए। काजल अब सिर्फ मेरी क्रूर इच्छाओं की पूर्ति का जरिया रह गई थी। दिन में वह सामान्य लड़की लगती। घर का काम करती, भाई-बहन का ध्यान रखती। लेकिन रात को जब मैं बुलाता तो वह चुपचाप आ जाती। कभी मैं उसे तालाब में नंगा नहलाता और पानी में ही चुदाई करता। कभी खेत की मेड़ पर खुले में बाँधकर छोड़ देता घंटों के लिए। मच्छर काटते, हवा लगती लेकिन वह हिलती नहीं थी क्योंकि मैंने मना किया होता।

एक दिन मैंने उसे और नीचे गिराया। उसके छोटे भाई के स्कूल बैग से एक मोटी पेंसिल निकालकर उसकी चूत में घुसा दी और कहा, “इसके साथ घर जा। रात तक अंदर रख। निकालने की कोशिश की तो अगली बार असली सजा मिलेगी।” वह डर गई लेकिन मान गई। रात को जब आई तो पेंसिल अभी भी अंदर थी। मैंने निकालकर देखा। चूत लाल और सूजी हुई थी। फिर मैंने उससे कई गुना मोटा लंड अंदर डाल दिया।

अब मैं उसे सिर्फ चुदाई के लिए नहीं बुलाता था। कभी-कभी सिर्फ यातना के लिए। घंटों बाँधकर रखना, निप्पल्स पर वजन लटकाना, चूत में बर्फ के टुकड़े डालना, फिर गरम तेल डालना। दर्द और राहत का खेल। काजल की सहनशक्ति बढ़ती जा रही थी लेकिन उसका मन पूरी तरह टूट चुका था। वह अब खुद मांगने लगी थी। “आज और जोर से मारो… आज गांड में दो बार… आज मुँह में ज्यादा देर तक रखो…”
एक रात मैंने उसे पूरी तरह तोड़ने का फैसला किया। झोपड़ी में ले जाकर पहले सामान्य चुदाई की।

फिर बाँधा। छड़ी से पूरे जिस्म पर निशान बनाए। स्तन, पेट, जाँघें, नितंब। फिर लंड उसकी गांड में डालकर इतनी देर तक धक्के मारे कि वह बेहोश होने की कगार पर पहुँच गई। बीच-बीच में उसके मुँह में पेशाब किया। उसने पिया। फिर वीर्य। फिर फिर से चुदाई। सुबह जब उसे छोड़ा तो वह चल भी नहीं पा रही थी। मैंने उसे कंधे पर उठाकर उसके घर के पीछे छोड़ दिया और कहा, “अब तू हमेशा के लिए मेरी रंडी है। शादी की बात आए तो मना कर देना। तू सिर्फ मेरे लंड के लिए बनी है।”

काजल ने आँसुओं भरी आँखों से देखा और धीरे से कहा, “जैसी मालिक की इच्छा।”
उसके बाद के दिन और भी गंदे, और भी क्रूर होते गए। गाँव की वह साधारण कुँवारी लड़की अब एक पूरी तरह से प्रशिक्षित, दर्द की दीवानी गुलाम बन चुकी थी। और मैं उसका निर्दयी मालिक। हर रात उसका जिस्म मेरी सबसे गंदी, सबसे क्रूर कल्पनाओं को साकार करता रहा। कोई दीवार बाकी नहीं बची थी। सिर्फ दर्द, सिर्फ कामुकता और सिर्फ मेरा पूरा कब्जा।

47 साल की मोटी पड़ोसन की चुदाई

प्राइवेट फर्म में प्रोजेक्ट मैनेजर रौनक को बेरहम चोदता

पति के सामने जवान डॉक्टर ने गांड फाड़ी

भाई का क्रूर शिकार

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *