रिया की चुदासी चूत ने तीन जंगली मर्दों को बुलाया। बाल खींचे, चूत में एक साथ दो लंड घुसाए, गांड फाड़ी, चीखें निकालीं – खून, आँसू और वीर्य से सनी बर्बर रांड बनी रिया।
मैं रिया हूँ, इक्कीस साल की एक बेहद चुदासी और बेचैन लड़की। मेरा रंग गोरा है, लेकिन बदन इतना निखरा हुआ है कि हर लड़का मुझे देखते ही अपनी नजरें हटा नहीं पाता। मेरे चूचे 34D के हैं, कसकर भरे हुए, और मेरी चूत हमेशा भूखी रहती है। मेरा बॉयफ्रेंड विक्रम है – छह फीट लंबा, काला, मांसल शरीर वाला, जिसका लंड देखकर कोई भी लड़की घुटनों पर बैठ जाए। वो दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ता है, और मैं भी वहीं की स्टूडेंट हूँ।
ये कहानी तब की है जब मैं बीस साल की थी। कॉलेज में नया-नया बॉयफ्रेंड बना था विक्रम का। मुझे चुदाई की आग इतनी लगी हुई थी कि रात को सोते वक्त भी मेरी उंगलियाँ खुद-ब-खुद मेरी चूत में घुस जातीं। लेकिन कॉलेज में सबके बीच चुदाई का मौका नहीं मिलता था। हर तरफ दोस्त, टीचर, गार्ड – सब नजर रखे हुए थे। फिर भी विक्रम मेरे साथ क्लास के पीछे वाले खाली लाइब्रेरी रूम में मुझे घसीट ले जाता।
एक दिन उसने मुझे वहाँ बुलाया। मैंने टाइट क्रॉप टॉप और स्किनी जींस पहनी थी। जैसे ही मैं अंदर घुसी, विक्रम ने दरवाजा बंद किया और मुझे दीवार से सटा दिया। उसकी हॉट साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। उसने मेरे होंठों को चूसना शुरू किया – इतनी जोर से कि मेरे होंठ सूज गए। चूमते-चूमते उसने मेरा क्रॉप टॉप ऊपर किया और मेरे चूचों को ब्रा के ऊपर से मसलने लगा। मेरी साँसें तेज हो गईं। मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। विक्रम ने मेरी जींस के बटन खोले और हाथ अंदर डाल दिया। उसकी मोटी उंगलियाँ मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगीं।
“रिया, तेरी चूत तो जल रही है आज,” उसने कान में फुसफुसाते हुए कहा और दो उंगलियाँ मेरी चूत में घुसा दीं। मैं चीख पड़ी, लेकिन उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया। वो उंगलियाँ तेज-तेज अंदर-बाहर करने लगा। मेरे घुटने काँप रहे थे। मैंने उसका लंड पकड़ लिया – पैंट के ऊपर से ही। वो लंड पत्थर जैसा खड़ा था, मोटा और लंबा। विक्रम ने मेरे चूचों को इतनी जोर से दबाया कि मेरे निप्पल कड़े हो गए। मैं झड़ गई – पहली बार क्लास के अंदर ही। मेरी चूत से पानी निकलकर जींस भीग गई। लेकिन बाहर से आवाजें आने लगीं तो हम रुक गए। विक्रम बाथरूम भाग गया अपना लंड हिलाने। उस दिन भी हमारी प्यास नहीं बुझी।
कुछ दिन बाद मुझे मामा के घर लखनऊ जाना पड़ा – एक फैमिली वेडिंग के लिए। वहाँ प्राइवेसी नाम की चीज नहीं थी। एक शाम मैं अकेली में विक्रम से वीडियो कॉल पर बात कर रही थी। उसने कहा, “रिया, अपना टॉप हटा, चूचे दिखा।” मैंने कमरा लॉक किया और टॉप उतार दिया। ब्रा भी खोल दी। विक्रम ने अपना लंड निकालकर हिलाना शुरू कर दिया। उसके लंड का टोपा चमक रहा था। मैं भी उत्तेजित हो गई। लेकिन अचानक बाहर से आवाज आई तो मैंने कॉल काट दिया और सीधे बाथरूम भाग गई।
बाथरूम में मैं पूरी नंगी हो गई। फर्श पर बैठकर फोन में हार्डकोर चुदाई वाला पोर्न चला दिया। स्क्रीन पर लड़की को लंड फाड़ रहा था। मेरे हाथ खुद-ब-खुद मेरी चूत पर पहुँच गए। मैंने पहले एक उंगली डाली, फिर दो, फिर तीन। लेकिन मुझे पूरा लंड चाहिए था। मैंने चार उंगलियाँ ठूंस दीं और तेज-तेज चोदने लगी। मेरे चूचे लहरा रहे थे। मैंने उन्हें भींचा, काटा, चूसा। झड़ने के वक्त मैंने जोर से चिल्लाया – “आह्ह्ह… विक्रम… फाड़ दो मेरी चूत!” और मेरी चूत से पिचकारी छूट गई। फर्श पर खून के निशान दिखे। मैं डर गई, लेकिन फिर मुस्कुराई। अब मेरी चूत का दरवाजा खुल चुका था। मुझे असली लंड चाहिए था।
लखनऊ से लौटते ही मैंने विक्रम को मैसेज किया – “मुझे चोदना है। आज रात।” विक्रम ने जवाब दिया – “कल दोपहर को तैयार रहना। मैं तुझे अपने PG रूम ले जाऊँगा। वहाँ कोई नहीं होगा।” मैंने रात भर सो नहीं पाई। सुबह उठकर मैंने अपनी चूत की सारी झांटें साफ कीं। गर्म पानी से नहाया, बदन पर ऑयल लगाया। काली लेस वाली ब्रा-पैंटी पहनी। ऊपर एक टाइट ब्लैक टॉप और जीनशॉर्ट्स। चेहरे पर हल्का मेकअप। मैं तैयार थी – विक्रम के लंड की भेंट चढ़ने के लिए।
दोपहर को विक्रम मुझे यूनिवर्सिटी गेट पर बाइक लेकर आया। मैं पीछे बैठी और उसकी कमर पकड़ ली। उसका PG कमरा दक्षिण दिल्ली में था – पुराना लेकिन प्राइवेट। दरवाजा खोलते ही विक्रम ने मुझे अंदर घसीटा और दीवार से दे मारा। उसकी किस इतनी जोरदार थी कि मेरे होंठ कट गए। वो मेरे टॉप को फाड़ते हुए उतार रहा था। ब्रा भी खींचकर फेंक दी। मेरे 34D चूचे बाहर आ गए। विक्रम ने उन्हें मुट्ठी में भर लिया और इतनी जोर से दबाया कि मैं चीख पड़ी – “आह्ह विक्रम… दर्द हो रहा है!” लेकिन वो नहीं रुका। उसने मेरे निप्पल को दाँतों से काटा और चूसा। फिर मुझे बेड पर पटक दिया।
विक्रम ने अपनी शर्ट उतारी। उसका काला मांसल बदन देखकर मेरी चूत और गीली हो गई। उसने मेरी जीनशॉर्ट्स खींचकर उतारी और पैंटी को चीरते हुए फाड़ दिया। मेरी चूत अब पूरी नंगी थी – गीली, सूजी हुई। उसने मेरी टांगें फैलाकर चूत पर मुँह रख दिया। जीभ से चाटना शुरू किया – इतनी तेजी से कि मेरी चूत जलने लगी। उसने मेरे क्लिटोरिस को चूसा, काटा, फिर दो उंगलियाँ घुसाकर चोदना शुरू कर दिया। मैं चीख रही थी – “हाँ… चाटो… फाड़ दो… मैं तुम्हारी रांड हूँ!” विक्रम ने मेरे बाल पकड़े और मेरी चूत में अपना मुँह गाड़ दिया। उसकी जीभ अंदर तक घुस रही थी। मैं झड़ गई – पहली बार उसके मुँह में। लेकिन वो नहीं रुका।
फिर विक्रम खड़ा हुआ। उसने पैंट उतारी। उसका लंड बाहर आया – सात इंच लंबा, मोटा, नसों वाला, टोपा लाल और चमकदार। मैंने घुटनों के बल बैठकर उसे मुट्ठी में लिया। हिलाया, चूमा, फिर पूरा मुँह में ले लिया। गला तक चूसा। विक्रम ने मेरे सिर को पकड़कर जोर-जोर से ठोका – “चूस रिया… गला तक ले… साली चुदासी!” मेरे आँसू निकल आए, लेकिन मैं और जोर से चूस रही थी। उसका लंड मेरे गले में फंस रहा था। कुछ मिनट बाद उसने मुझे खींचा और बेड पर लिटा दिया।
विक्रम ने कंडोम नहीं लगाया। मैंने कहा – “सीधा घुसा दो… मैं रियल फील करना चाहती हूँ।” उसने मेरी टांगें कंधों पर रखीं और लंड का टोपा मेरी चूत पर रखा। फिर एक जोरदार झटका मारा। “आआआह्ह्ह!” मैं चीख पड़ी। लंड आधा घुस गया। दर्द था, लेकिन मजा भी। विक्रम ने दूसरा झटका मारा और पूरा लंड मेरी चूत में धंस गया। खून निकला। मेरी चूत फट गई थी। लेकिन विक्रम रुका नहीं। उसने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ बेड हिल रहा था। “चोदो… फाड़ दो मेरी चूत… मारो जोर से!” मैं चिल्ला रही थी।
विक्रम ने मुझे घुटनों के बल कर दिया। डॉगी स्टाइल में लंड घुसाया और बाल खींचे। एक हाथ से मेरे चूचे दबा रहा था, दूसरे से चूत पर थप्पड़ मार रहा था। “साली… कितनी टाइट चूत है तेरी… आज तुझे रांड बना दूँगा!” वो इतनी जोर से चोद रहा था कि मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। फिर उसने मुझे ऊपर किया, मेरी गर्दन दबाई हल्की-हल्की और मिशनरी में चोदा। हर झटके में मैं झड़ रही थी। तीन बार झड़ चुकी थी। विक्रम ने मुझे फिर घुमाया और स्टैंडिंग फकिंग की – मुझे दीवार से सटाकर ऊपर उठाकर लंड घुसाया। मेरी टांगें उसके कमर पर लिपटी थीं।
आखिर में जब वो झड़ने वाला था, उसने मुझे घुटनों पर बैठा दिया और लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया। “पी ले सारी… तेरी चूत के साथ मुँह भी भर दूँ!” उसका गाढ़ा, गर्म वीर्य मेरे गले में उतरा। मैंने सब चूस लिया। हम दोनों थककर बेड पर गिर गए। मेरी चूत सूज गई थी, लाल हो गई थी, लेकिन खुशी से चमक रही थी। विक्रम ने मुझे चूमा और बोला – “अब तू मेरी प्रॉपर्टी है। रोज चुदेगी।”
उस दिन के बाद विक्रम ने मुझे कई बार चोदा – कभी कॉलेज की छत पर, कभी उसकी बाइक पर जंगल में, कभी होटल में। हर बार वो और खूंखार होता गया। मेरी चूत अब उसकी लंड की आदी हो चुकी थी।
कुछ महीनों बाद विक्रम की दोस्ती एक नए स्तर पर पहुँच गई। वो मुझे अपने दोस्तों के सामने लाकर दिखाने लगा। एक शाम उसने मुझे मैसेज किया – “आज रात मेरे फ्लैट पर आ। मेरे दो दोस्त भी आएँगे। तुझे असली मज़ा देंगे।” मेरा दिल धड़क उठा। डर भी लगा, लेकिन चूत की आग ने मुझे हाँ कहला दी। मैंने टाइट रेड ड्रेस पहनी, अंदर कुछ नहीं। ब्रा-पैंटी भी नहीं। बस लिपस्टिक और काजल लगाकर निकल पड़ी।
फ्लैट पर पहुँचते ही विक्रम ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर खींच लिया। अंदर तीन लड़के थे – विक्रम, उसका दोस्त अर्जुन और राहुल। तीनों काले, मोटे-तगड़े, आँखों में भूख। लाइट्स डिम थीं, म्यूजिक तेज। विक्रम ने मुझे बीच में खड़ा किया और बोला – “ये मेरी रिया है। आज इसे सब मिलकर चोदेंगे।” मैं शरमा गई, लेकिन मेरी चूत पहले से तर हो चुकी थी।
अर्जुन ने सबसे पहले मेरी ड्रेस ऊपर चढ़ाई। मेरे नंगे चूचे देखकर तीनों की साँसें तेज हो गईं। राहुल ने मेरे पीछे से आकर चूचे पकड़े और इतनी जोर से मसला कि मैं कराह उठी। विक्रम मेरे सामने आया, घुटनों पर बैठकर मेरी चूत चाटने लगा। उसकी जीभ तेजी से क्लिट पर घूम रही थी। अर्जुन ने मेरा मुँह खोला और अपना मोटा लंड घुसा दिया। “चूस साली… अच्छे से!” मैं गले तक चूस रही थी, आँसू बह रहे थे। राहुल ने पीछे से मेरी गांड में उंगली डाली। दर्द हुआ, लेकिन मजा भी।
फिर उन्होंने मुझे बेड पर पटक दिया। विक्रम ने पहले लंड घुसाया – जोरदार धक्कों से चोदा। अर्जुन मेरे मुँह में, राहुल मेरे चूचों पर। तीनों बारी-बारी मुझे चोदते रहे। कभी डॉगी में, कभी मुझे ऊपर उठाकर, कभी दो लंड एक साथ – एक चूत में, एक मुँह में। मैं चीख रही थी – “आह्ह… और जोर से… फाड़ दो मुझे… मैं तुम सबकी रांड हूँ!” मेरी चूत से पानी बह रहा था, खून भी मिला हुआ। तीनों ने मुझे तीन-तीन बार झड़वाया। आखिर में सबने मेरे मुँह और चेहरे पर झड़ दिया। गाढ़ा वीर्य मेरे होंठों पर, आँखों पर।
सुबह तक मैं थककर चूर हो गई। बदन पर निशान, चूत सूजी हुई। लेकिन मन में संतुष्टि थी। विक्रम ने मुझे गले लगाया और बोला – “अब तू हमारी प्रॉपर्टी है। अगली बार और लड़के लाएँगे।” मैं मुस्कुराई। मेरी चुदाई की भूख कभी नहीं मिटने वाली थी।
अब ये कहानी यहीं खत्म होती है… लेकिन मेरी जिंदगी में चुदाई का सिलसिला जारी है। क्या तुम भी मेरे साथ जुड़ना चाहोगे? 😈
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