विक्रम ने बचपन की पड़ोसन रिया को मुंबई के विले में बाँधकर, फाड़कर, थप्पड़ मारकर और गांड-चूत दोनों में रात-दिन बेरहमी से चोदा। अब वो उसकी गुलाम रंडी है, जो हमेशा लंड के लिए तरसती रहती है ki lusty stories ।
मेरा नाम विक्रम है, उम्र २७ साल। मैं लखनऊ में एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर काम करता हूँ। जिंदगी की रफ्तार इतनी तेज थी कि सेक्स के अलावा मुझे और कुछ सूझता ही नहीं था। घर में माँ और बहन को पहले ही कई बार चोदा था, फिर एक दूर की रिश्तेदार मौसी को भी अपने लंड का गुलाम बना चुका था। लेकिन अब दिल में एक नई आग लगी थी – मेरी बचपन की पड़ोसन रिया।
रिया अब २९ साल की हो चुकी थी। हम दोनों एक ही कॉलोनी में बड़े हुए थे, लेकिन तब वह सिर्फ एक प्यारी सी लड़की थी। शादी के बाद जब वह वापस आई तो जैसे कोई जादू हो गया। उसका गोरा रंग, लंबे काले बाल, ३८ साइज के मोटे-मोटे और भारी स्तन, कमर २८ और गांड ४० की – वह अब एक खतरनाक हवस की मूर्ति बन चुकी थी। शादी को ८ महीने हुए थे और उसका पति अक्सर बिजनेस टूर पर रहता था।
एक दिन मैं लखनऊ से सीधे मुंबई पहुँचा। उसका ससुराल वहाँ के रईस इलाके में एक विशाल विला था। मैंने उसका नंबर डायल किया और कहा, “रिया, मैं काम के सिलसिले में मुंबई आ गया हूँ।” वह हँसी और बोली, “अरे विक्रम! होटल में मत रुकना, घर आ जाओ। यहाँ कोई नहीं है। सास-ससुर तो दिल्ली गए हैं और मेरा पति १५ दिन के लिए सिंगापुर में है।”
जब मैं वहाँ पहुँचा तो रिया ने मुझे गले लगा लिया। उसकी साड़ी का ब्लाउज इतना टाइट था कि उसके भारी स्तनों का आकार साफ दिख रहा था। मैंने मन ही मन सोचा – आज इस साली को इतना जोर से चोदूँगा कि उसकी चीखें पूरे विले में गूँजें। रात को खाना खाते समय उसने एक हॉट इंग्लिश मूवी लगा दी जिसमें खुलेआम सेक्स सीन थे। हर किस और चुदाई के दृश्य पर उसकी साँसें तेज हो जातीं, लेकिन वह शरमा कर मुस्कुरा देती।
रात को मैं अपने कमरे में सिर्फ लुंगी पहने लेटा था। नीचे कुछ भी नहीं। सुबह-सुबह जब रिया चाय लेकर आई, मैंने जान-बूझकर लुंगी सरका दी। मेरा ९ इंच का मोटा, काला और नसों वाला लंड पूरी तरह तना हुआ बाहर झाँक रहा था। रिया ने एक नजर डाली, उसके गाल लाल हो गए, लेकिन वह कुछ नहीं बोली। सिर्फ मुस्कुराई और चली गई।
थोड़ी देर बाद उसकी आवाज आई, “विक्रम, जरा मेरा टॉवल और ब्रा-पैंटी दे दो।” मैं उसके कमरे में गया। वहाँ लाल रंग की लेस वाली ब्रा और एकदम छोटी सी पैंटी पड़ी थी। पैंटी उठाकर मैंने सूँघी – उसकी चूत की मादक महक ने मुझे पागल कर दिया। मैंने पैंटी को मुँह में दबाकर चूसा, फिर बाहर निकलकर दरवाजे पर टॉवल थमा दिया। उसने दरवाजा इतनी जोर से बंद किया कि मेरी झाँटें हिल गईं। लेकिन अब मैं समझ गया था – यह साली मुझे तड़पा रही है।
पाँच दिन गुजर गए। वह मुझे अपनी भारी चूचियाँ दिखाती, फ्रैंक बातें करती, लेकिन जैसे ही मैं पास आता, कोई न कोई बहाना बनाकर भाग जाती। एक शाम अचानक आसमान में काले बादल घिर आए। तेज बारिश शुरू हो गई। रिया छत पर चढ़ गई और मुझे आवाज दी, “विक्रम, ऊपर आओ! बरसात का मजा लो।” मैं गया तो देखा वह काली साड़ी में पूरी भीग चुकी थी। ब्लाउज का बैक हिस्सा इतना डीप था कि उसकी गोरी पीठ चमक रही थी। आगे के हुक खुल चुके थे और सफेद ब्रा से उसके काले निप्पल्स झाँक रहे थे।
मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों को काटते हुए जोर से चूम लिया। वह पहले तो चिपक गई, फिर धक्का देकर बोली, “क्या कर रहे हो विक्रम?” मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे झुकाया और गरजते हुए कहा, “रिया, आज मैं तुझे चोदने आया हूँ। बचपन से तेरी चूत का दीवाना हूँ। आज तू मेरी रंडी बनेगी।” उसने मेरी आँखों में देखा और हँसकर बोली, “अरे मूर्ख! मैं भी तुझे चाहती थी। लेकिन पहल तुझे करनी थी। आज देर आई, पर दुरुस्त आई। अब दिखा तेरा मर्दाना लंड कितना ताकतवर है।”
मैंने तुरंत उसकी साड़ी खींचकर फाड़ दी। ब्लाउज के हुक तोड़ दिए। भारी ३८ साइज के स्तन बाहर उछल पड़े। मैंने एक स्तन मुँह में दबाकर काटा, दूसरे को जोर से मसलते हुए थप्पड़ मारा। रिया चीखी, “आह्ह्ह… विक्रम… जोर से!” मैंने उसे छत के फर्श पर पटक दिया। बारिश की बूँदें उसके गोरे बदन पर गिर रही थीं। मैंने उसकी पेटीकोट और पैंटी फाड़कर उतार दी। उसकी चूत पर घने बाल थे, लेकिन अंदर गुलाबी और गीली। मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालकर जोर से घुमाईं। रिया तड़प उठी, “फाड़ दो मेरी चूत… आज बहुत दिनों बाद असली मर्द मिला है!”
मैंने अपना ९ इंच का लंड निकाला और उसके मुँह के पास ले गया। “चूस रंडी!” उसने पूरा लंड मुँह में ले लिया और गहरी चूसने लगी। उसके गले तक पहुँचाते हुए मैंने उसके सिर को दबाकर जबरदस्ती चुदवाया। वह उबकियाँ ले रही थी, लेकिन आँखों में वासना थी। फिर मैंने उसे घुटनों के बल खड़ा किया और पीछे से एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया। “आआआह्ह्ह… फट गई मेरी चूत!” वह चीखी। मैंने उसके बाल पकड़कर घोड़े की तरह जोर-जोर से ठोके मारने शुरू किए। हर ठोके के साथ उसके भारी स्तन लहरा रहे थे। बारिश की आवाज और उसकी चीखें एक साथ गूँज रही थीं।
मैंने उसके गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे – लाल निशान पड़ गए। “तेरी यह मोटी गांड भी आज मेरी होगी!” मैंने कहा। उसने पीछे मुड़कर बोली, “मारो… चोदो… मेरी गांड भी फाड़ दो आज!” मैंने लंड निकाला और सीधे उसके टाइट गांड के छेद में घुसा दिया। रिया दर्द से चीखी, लेकिन मैं रुका नहीं। पूरा लंड अंदर तक ठेल दिया और जोर-जोर से गांड मारने लगा। उसकी चूत से रस टपक रहा था। मैंने एक हाथ से उसकी चूत में उँगलियाँ डालकर मसलना शुरू कर दिया।
रिया पहली बार झड़ गई। उसका पूरा शरीर काँप रहा था। लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया। उसे उठाकर छत के झूले पर लिटा दिया। उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और फिर से चूत में लंड ठेल दिया। झूला तेजी से हिल रहा था। हर झटके में मेरा लंड उसकी गर्भाशय तक पहुँच रहा था। मैंने उसके निप्पल्स को दाँतों से काटा, स्तनों पर थप्पड़ मारे। “आह्ह्ह विक्रम… तुम्हारा लंड तो जानलेवा है… मुझे और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो!” वह चिल्ला रही थी।
दूसरी बार जब वह झड़ी तो मैंने भी अपना लंड निकालकर उसके मुँह में ठेल दिया। पूरा वीर्य उसके गले में उतार दिया। वह हर कतरा चूस गई। लेकिन मेरी हवस अभी शांत नहीं हुई थी। मैंने उसे उठाकर अंदर बेडरूम में ले गया। वहाँ मैंने उसे चारों तरफ से बाँध दिया – हाथ-पैर बिस्तर से। फिर से उसकी चूत और गांड दोनों में बारी-बारी से चोदा। रात भर मैंने उसे ५ बार चोदा। हर बार अलग पोजिशन में – कभी डॉगी, कभी मिशनरी, कभी वह ऊपर। उसके स्तनों पर काटने के निशान, गांड पर थप्पड़ों के लाल दाग और चूत पर मेरे लंड के ठोके – सब कुछ बता रहा था कि आज रिया को असली मर्द मिल गया है।
सुबह हुई तो रिया अभी भी बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसके पूरे बदन पर मेरे दाँतों के निशान और थप्पड़ों की लालिमा चमक रही थी। मैंने उसे उठाया और सीधे बाथरूम में घसीट लिया। शावर खोलते ही गर्म पानी उसके गोरे बदन पर गिरने लगा। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे झुकाया और गरजते हुए बोला, “रंडी, आज तेरी चूत और गांड दोनों को फिर से फाड़ने का समय है।”
रिया की आँखों में वासना उबाल खा रही थी। उसने खुद ही घुटनों के बल बैठकर मेरा ९ इंच का मोटा लंड मुँह में ले लिया। पानी की धार के बीच वह इतनी जोर से चूस रही थी कि उसके गले तक लंड पहुँच रहा था। मैंने उसके सिर को दबाकर जबरदस्ती गला चोदा। वह उबकियाँ ले रही थी, आँखों से पानी बह रहा था, लेकिन वह रुकने का नाम नहीं ले रही थी। “चूस साली… पूरा वीर्य पी ले!” मैं चिल्लाया और उसके मुँह में अपना पहला झड़क उतार दिया।
फिर मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया। एक पैर उसके कंधे पर रखा और सीधे चूत में पूरा लंड ठेल दिया। गर्म पानी, उसकी चीखें और मेरे ठोके – पूरा बाथरूम गूँज रहा था। “आआह्ह्ह विक्रम… फाड़ दो… मेरी चूत तेरी है!” वह चिल्ला रही थी। मैंने उसके भारी ३८ साइज के स्तनों को जोर से थप्पड़ मारे, निप्पल्स को मरोड़ा और काटा। फिर पीछे मुड़कर उसकी मोटी गांड पर इतने जोरदार थप्पड़ लगाए कि उसके चूतड़ लाल हो गए।
उसके बाद मैंने उसे बाथरूम से बाहर घसीटा और किचन में ले गया। वहाँ काउंटर पर उसे लिटाकर फिर से चोदा। कॉफी मशीन की आवाज, उसके स्तनों की लहर और मेरे लंड के खचाखचा ठोके – सब मिलकर एक खतरनाक संगीत बना रहे थे। उस दिन मैंने उसे चार बार चोदा – किचन में, लिविंग रूम के सोफे पर, बालकनी में और फिर छत के उसी झूले पर। हर बार नई पोजिशन, हर बार और ज्यादा बेरहमी।
तीसरे दिन उसने खुद कहा, “विक्रम, आज मुझे बाँधकर चोदो।” मैंने उसके हाथ-पैर बिस्तर से बाँध दिए और फिर घंटों तक उसकी चूत और गांड दोनों में बारी-बारी से लंड घुसाता रहा। वह चीखती, तड़पती, लेकिन हर झटके के साथ और ज्यादा भीग जाती। उसकी चूत से रस की धार बह रही थी। मैंने उसके मुँह में भी लंड ठेला और पूरा वीर्य उसके गले में उतारा।
पाँचवें दिन जब हम दोनों थक चुके थे, रिया ने मेरे सीने पर सिर रखकर कहा, “अब तू मेरे लिए सब कुछ है। पति आएगा तो भी मैं तेरे बिना नहीं रह पाऊँगी। अगली बार जब तू आएगा, मैं तेरे लिए अपनी एक सहेली को भी बुला लूँगी। दोनों को साथ में चोदना चाहता है न?”
मैंने उसके बाल पकड़कर होंठ चबाते हुए कहा, “हाँ रंडी… अगली बार तू और तेरी सहेली दोनों मेरी दो रंडियाँ बनोगी। तब तक अपनी चूत साफ रखना और रोज फोटो भेजना।”
रिया मुस्कुराई और बोली, “जो हुक्म मेरा मालिक… अब से मैं सिर्फ तेरी हवस की गुलाम हूँ।”
मैं मुंबई से लखनऊ लौट आया, लेकिन अब हर हफ्ते उसका मैसेज आता – “मालिक, कब आ रहे हो? मेरी चूत और गांड दोनों तेरे लंड के लिए तरस रही हैं।” और मैं जानता हूँ, अगली बार वहाँ जाकर मैं उसे और भी बेरहमी से चोदूँगा। क्योंकि अब रिया सिर्फ मेरी प्रॉपर्टी है – एक भूखी, गीली और हमेशा तैयार रंडी।
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