राहुल की रंडी बन गई प्रियंका

शादीशुदा प्रियंका ने 7 साल बाद पुराने यार राहुल से मिलकर अपनी चूत-गांड फटवाई। बेरहम थप्पड़, गला दबाकर, गांड फाड़ चुदाई – अब वो उसकी बेशर्म गुलाम रंडी बन चुकी है।

दोस्तों, मेरा नाम प्रियंका है। मैं 28 साल की शादीशुदा औरत हूँ। दिखने में मैं एकदम साधारण-सी लगती हूँ, लेकिन अंदर से मैं पूरी आग हूँ। मेरा रंग गोरा-सा है, लेकिन आँखों में वो शैतानी चमक है जो किसी को भी पागल कर दे। एक साल पहले मेरा फिगर 34-30-36 था। आज मैं इस साइट पर अपनी असली, बेरहम और बेहद गंदी सेक्स कहानी शेयर कर रही हूँ। पूरे एक साल तक अपने यार से इतनी जोरदार चुदाई करवाई कि आज मेरा फिगर 38-34-40 हो गया है। मेरे बूब्स अब इतने भारी और उभरे हुए हैं कि ब्रा फटने लगती है। मेरी गांड इतनी मोटी और टाइट हो गई है कि कोई भी देखकर थूक निगल लेता है।


मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से गांव की लड़की हूँ। स्कूल खत्म होने के बाद आगे पढ़ाई के लिए मैं अपने चाचा के घर मेरठ आ गई। वहाँ से दिल्ली के एक टॉप कॉलेज में एडमिशन ले लिया। कॉलेज का पहला दिन था। क्लास में घुसते ही सबकी नजर एक लड़के पर ठहर गई। नाम था राहुल। छह फुट लंबा, काला लेकिन चमकदार त्वचा वाला, चौड़ी छाती, पतली कमर, मोटी टांगें और वो मर्दाना चेहरा जिसे देखकर लड़कियों की चूत गीली हो जाती। पढ़ाई में नंबर वन, क्रिकेट टीम का कैप्टन, डिबेट में सबसे तेज़ जीभ। कॉलेज की हर लड़की उसके पीछे पागल थी।


मैं भी अपनी सहेलियों के साथ उसके ग्रुप में शामिल हो गई। वह मुझसे ज्यादा बात नहीं करता था, लेकिन बाकी लड़कियों को गले लगाता, कंधे पर हाथ रखता, कान में फुसफुसाता। मुझे देखकर बस मुस्कुरा देता और आगे बढ़ जाता। मैं जलती रहती। महीने बीत गए। एक दिन मेरी बेस्ट फ्रेंड ने कहा, “प्रियंका, राहुल तुझसे बात करना चाहता है। लाइब्रेरी के पीछे वाले गार्डन में मिल रहा है।”


मैं गई। उसने सीधा प्रपोज कर दिया। मैं घबरा गई और रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद उसने मुझे पूरी तरह इग्नोर कर दिया। क्लास में मेरे सामने से गुजरता तो नजर भी नहीं मिलाता। मैं रोती, तड़पती। पाँच महीने बाद फिर उसने प्रपोज किया। इस बार मैं हाँ कह गई। उसके दोस्तों ने क्लास के बाहर पहरा दे दिया और हम दोनों खाली क्लासरूम में मिलने लगे। पहले दिन ही हमने किसिंग शुरू कर दी। दो साल तक हमने सिर्फ़ किस और चूचियों को दबाना सीखा। उसका लंड मैंने कभी हाथ तक नहीं लगाया। सिर्फ़ उसके पैंट पर से उभार देखकर पागल होती।


कॉलेज खत्म हुआ। राहुल बेंगलुरु चला गया जॉब के लिए। फोन पर बातें होती रहीं। तभी मेरे घरवालों को सब पता चल गया। फोन तोड़ दिया, मुझे गांव बुला लिया और तीन महीने में शादी तय कर दी। राहुल आया था मुझसे मिलने, लेकिन मैंने बदनामी के डर से मिलने से मना कर दिया। शादी हो गई। मेरा पति 35 साल का, मोटा, छोटा लंड वाला, बदबू वाला आदमी था। न चाहते हुए भी उसने मुझे जबरदस्ती चोदा। दो बच्चे हो गए। लेकिन हर रात मैं राहुल के नाम से चूत में उंगली डालकर झड़ती। सात साल बाद लॉकडाउन खुला। फेसबुक पर राहुल की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। मैं काँप उठी। नंबर लिया। सहेली के फोन से कॉन्फ्रेंस कॉल पर बात हुई। उसने कहा, “प्रियंका, आज भी सिर्फ़ तुझे चाहता हूँ। किसी और को हाथ तक नहीं लगाया।”


मैंने ठान लिया – अब चुदना है। चार दिन बाद मैंने पति से कहा, “सहेली के घर जाना है, छोड़ दो।” पति ने छोड़ दिया। मैं सीधे राहुल के पास। वह अपनी बाइक पर आया। मुझे पीछे बिठाया और दिल्ली के बाहर एक लग्ज़री रिसॉर्ट में ले गया। रूम नंबर 305। दरवाज़ा बंद होते ही मैं उसके गले लगकर फूट-फूट कर रोने लगी। वह भी रोया। फिर अचानक उसने मुझे दीवार से सटाकर दो जोरदार थप्पड़ मारे मेरे गालों पर।
“हरामी, सात साल तक इंतज़ार कराया! अब चुदेगी आज!”


मैंने हाँ में सिर हिलाया और हमारी किसिंग शुरू हुई। वो इतनी भयंकर थी कि हमारे होंठ कट गए, खून चूसते रहे। उसने मुझे कंधों से पकड़कर बेड पर फेंक दिया। मैं उसके ऊपर चढ़ गई। कपड़े उड़ने लगे। आधे घंटे में हम दोनों नंगे। उसके लंड को देखकर मेरी आँखें फट गईं – 9 इंच लंबा, मोटाई तीन अंगुल, नसें फूली हुईं, सिर गोल और लाल।


“ये… ये कैसे इतना बड़ा हो गया?” राहुल हँसा, “तेरे लिए तैयार किया है रंडी!”
उसने मुझे नीचे लिटाया और मेरे 38 साइज के बूब्स पर हमला बोल दिया। दाँत गड़ाए, चूसा, काटा, थप्पड़ मारे। मैं चीख रही थी – “आह्हह… फाड़ दो… मारो और जोर से!” मेरी चूत से पानी की धार बहने लगी। उसने मेरी टांगें चौड़ी कीं और चूत पर मुंह रख दिया। जीभ अंदर घुसेड़ी, उंगली से चोदा, इतना जोर से कि मैं दो बार झड़ गई।


“चाट ले राजा… सात साल की प्यास बुझा दे!”
फिर मैंने उसका लंड पकड़ा। मुंह में लिया तो गला फटने लगा। फिर भी पूरा गले तक चूस लिया। वह मेरे बाल पकड़कर जबरदस्ती ठोक रहा था – “ले रंडी… गला फाड़ के चूस!” मैं थूक-कफ से सराबोर हो गई।


उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बनाया। मेरी गांड पर थप्पड़ों की बौछार – पचास से ज्यादा मारे। फिर अपनी जीभ गांड के छेद में घुसेड़ दी। मैं पागल हो गई। “चोद दो… गांड फाड़ दो आज!”


उसने लंड पर थूक लगाया और एक ही झटके में पूरा 9 इंच मेरी गांड में घुसेड़ दिया। मैं चीख उठी – “आआआआ… मर गई… निकालो… आह्हह!” लेकिन दो मिनट बाद ही मजा आने लगा। वह पागलों की तरह ठोक रहा था। हर थ्रस्ट पर मेरी गांड हिल रही थी। “फाड़ दे… और जोर से… तेरी रंडी हूँ आज से!”


बीस मिनट गांड चुदवाई। फिर उसने मुझे सीधा किया और चूत में लंड ठोंका। इतना जोर से कि बेड हिलने लगा। मैं चीख रही थी, नाखून उसके पीठ में गड़ाए हुए थे। वह मेरी गर्दन दबा रहा था, चूचियों को मरोड़ रहा था। “ले हरामी… तेरे पति का छोटा लंड कभी ऐसा नहीं ठोक पाया ना?”


मैं चिल्लाई – “नहीं… वो तो चूतिया है… तू सांड है… चोदते रहो… कभी मत रुको!”
हमने पोजीशन बदली। मैं रिवर्स काउगर्ल में बैठी, खुद कूद रही थी। लंड पूरी चूत में घुस-घुस कर निकल रहा था। राहुल नीचे से मेरी गांड पर थप्पड़ मार-मार कर मुझे और तेज़ कुदवा रहा था। मैं तीन बार झड़ चुकी थी। उसका लंड अब भी पत्थर जैसा।


फिर उसने मुझे बेड के किनारे लिटाया, मेरे पैर कंधे पर रखे और खड़े होकर चोदा। हर झटका इतना गहरा कि मेरी आँखों से पानी आ गया। “माल निकाल… मेरे मुंह में!”
अंतिम राउंड में वह मेरे मुंह पर बैठ गया। लंड गले तक घुसेड़ा और झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य की मोटी-मोटी फुहारें। मैंने पूरा पी लिया, आखिरी बूंद तक चूस लिया।


लेकिन मैं अभी नहीं रुकी। वह थका हुआ था, सोने लगा। मैंने उसे नींद में ही पकड़ा, उसके पैर बेड से बाहर लटकाए, खुद नीचे बैठकर लंड चूसना शुरू कर दिया। लंड फिर खड़ा हो गया। मैं ऊपर चढ़ी और घोड़ी बनकर खुद अपनी गांड में डाल लिया। जोर-जोर से हिलाई। राहुल जाग गया तो गुस्से में मेरी कमर पकड़कर इतना जोर से ठोका कि मैं बेहोश होने लगी।


“आज तू मर जाएगी रंडी!”
दो घंटे लगातार चुदाई। चूत, गांड, मुंह – तीनों छेदों में उसका लंड घुसा। मैंने गाली दी, चीखी, रोई, हँसी। आखिर में दोनों एक साथ झड़े। उसका वीर्य मेरी चूत और गांड दोनों में भरा हुआ था।


हम बाथरूम गए, नहाए, फिर एक घंटा और चुदाई की। कुल तीन घंटे। जब रिसॉर्ट से निकले तो मेरी चाल लड़खड़ा रही थी। पति को फोन किया – “सहेली के यहाँ रुक रही हूँ रात को।”
राहुल ने मुझे गले लगाया और कान में फुसफुसाया, “अब हर हफ्ते चुदेगी। तेरी चूत, तेरी गांड, तेरे मुंह – सब मेरे।”


मैं मुस्कुराई और बोली, “हाँ मालिक… अब मैं सिर्फ़ तेरी बेशर्म रंडी हूँ। जब चाहो, जहां चाहो, जैसे चाहो – चोद लेना। मैं हमेशा तैयार रहूंगी।”
उस रात घर लौटकर मैं बिस्तर पर लेटी रही, लेकिन नींद कहाँ आ रही थी? मेरी चूत और गांड अभी भी जल रही थीं, राहुल के लंड की याद से पागल हो रही थी। पति सो रहा था, खर्राटे ले रहा था। मैंने चुपके से अपना हाथ पैंटी में डाला। उंगलियाँ अभी भी गीली थीं, राहुल का वीर्य अंदर भरा हुआ था। मैंने आँखें बंद कीं और कल की चुदाई याद करने लगी। “आह्ह… राजा… और जोर से…” मैं फुसफुसाई और दो उंगलियाँ अंदर डालकर खुद को चोदने लगी। पति को पता भी नहीं चला कि उसकी बीवी बगल में लेटे-लेटे किसी और के लंड पर झड़ रही है।


अगले हफ्ते राहुल का मैसेज आया – “शनिवार को दिल्ली आ रही है? अस्पताल के पास वाला होटल बुक कर लिया है। रूम 407। दोपहर 2 बजे।” मैंने पति से झूठ बोला – “मम्मी बीमार हैं, अस्पताल जाना है चेकअप के लिए।” पति ने हाँ कर दी, बच्चे स्कूल में थे। मैं तैयार होकर निकली। नई ब्लैक लेस वाली ब्रा पहनी, टाइट जींस जो मेरी मोटी गांड को और उभार रही थी।


होटल पहुँचते ही राहुल ने दरवाजा खोला। जैसे ही अंदर घुसी, उसने मुझे दीवार से सटा दिया। एक हाथ से मेरी गर्दन दबाई, दूसरे से मेरी जींस की बटन खोल दी। “रंडी, एक हफ्ते से तेरी चूत याद आ रही है। आज तेरी सारी हदें तोड़ दूँगा।” वह मुझे घसीटकर बेड पर फेंका। कपड़े फाड़-फाड़ कर उतारे। मेरे बूब्स बाहर आते ही उसने दोनों को इतने जोर से मसला कि निशान पड़ गए। फिर मेरी टांगें चौड़ी करके चूत पर थप्पड़ मारने लगा – पच-पच-पच! मैं चीख रही थी, लेकिन मजा आ रहा था।


“चाट मेरी चूत… राजा… साफ कर दे!” वह घुटनों पर बैठा, जीभ अंदर घुसेड़ी। उंगलियाँ डालकर इतना तेज चोदा कि मैं झड़ गई। पानी की धार उसके मुंह में जा रही थी। फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया। मेरी गांड पर लाल-लाल निशान बना दिए थप्पड़ों से। लंड पर थूक लगाया और एक झटके में गांड में पूरा घुसेड़ दिया। “आआआ… फाड़ दी… मर गई रे!” वह नहीं रुका। हर थ्रस्ट पर मेरी कमर पकड़कर खींचता, ठोकता। “ले… तेरी गांड मेरी है… रोज मरवाएगी!” मैं रो रही थी, लेकिन चूत से पानी टपक रहा था।


बीस मिनट बाद उसने मुझे पलटा। चूत में लंड डाला और खड़े होकर चोदने लगा। मेरे पैर हवा में, वह इतना जोर से ठोक रहा था कि बेड की चादर फट गई। मैं चिल्लाई – “चोद… और जोर से… तेरी रंडी हूँ… गुलाम हूँ… मार डाल मुझे!” उसने मेरी गर्दन दबाई, चूचियों को काटा। मैं तीन बार झड़ चुकी थी। आखिर में उसने लंड निकाला और मेरे मुंह में घुसेड़ दिया। “पी ले… पूरा!” गर्म वीर्य की फुहारें। मैंने गटक लिया, आखिरी बूंद चाट ली।


फिर हमने बाथरूम में शावर लिया। वहाँ भी नहीं रुके। शावर के नीचे उसने मुझे दीवार से सटाकर पीछे से चोदा। पानी के साथ वीर्य मिलकर बह रहा था। कुल ढाई घंटे चुदाई हुई। बाहर निकलते वक्त मेरी टांगें काँप रही थीं।


अब हर हफ्ते ऐसा ही होता है। कभी कार में, कभी पार्क के पीछे, कभी मेरे घर की छत पर जब पति ऑफिस जाता है। राहुल कहता है – “तेरी चूत मेरी प्रॉपर्टी है। जब चाहूँ, जहाँ चाहूँ, चोद लूँगा।” और मैं बस हाँ कह देती हूँ। क्योंकि अब मैं उसकी बेशर्म, चुदक्कड़ रानी हूँ। पति को पता चले या न चले, मुझे फर्क नहीं पड़ता। राहुल का लंड ही मेरी जिंदगी है।

More stories:-

Anjali Ki Lockdown Barbaadi

Mami Ki Jawani Ki Aag – Secret Desi Chudai Ka Hungama

Simmi Di Secret Chudai – Grocery Store Ton Bed Tak Ka

Mummy-Papa Ki Chhupi Chudai – Meri Raato Ki Wild Kahani

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *